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  • स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अड़े पटवारी, MP में 102 पर कार्रवाई; डिप्टी CM से बैठक टली

    स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री पर अड़े पटवारी, MP में 102 पर कार्रवाई; डिप्टी CM से बैठक टली

    भोपाल 
    स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन के विरोध में सामूहिक अवकाश पर गए पटवारियों को प्रशासन ने अब 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। खासकर परिवीक्षाधीन पटवारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय-सीमा में अपने पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करें। ऐसा नहीं करने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत उनकी सेवाएं बिना किसी अतिरिक्त सूचना के समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

    मध्यप्रदेश में 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच स्वामित्व योजना में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ गया है। पटवारियों के निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में साइन नहीं करने के फैसले के बाद प्रदेश में 102 पटवारियों पर बर्खास्त।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके बाद ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व काम का शटडाउन रखा है। देवास में पटवारी बुधवार देर रात तक कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे।

    इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में 12 पटवारियों को शासकीय कार्यों में लापरवाही पर आरोप-पत्र दिए गए हैं।

    सीएम तक पहुंचा मामला, PRC की बैठक बेनतीजा

    पटवारियों का विरोध और जिलों में कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। विरोध के बीच गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, लेकिन इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

    संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश
    प्रशासन ने सामूहिक अवकाश को अनधिकृत अनुपस्थिति मानते हुए संबंधित पटवारियों का वेतन काटने के आदेश भी दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि अवकाश के लिए प्रत्येक कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से विधिवत आवेदन प्रस्तुत करना जरूरी है। संघ के माध्यम से सामूहिक अवकाश की सूचना देकर लगातार शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहना सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।

    अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का नहीं मिलेगा वेतन, 'ब्रेक इन सर्विस' की चेतावनी
    सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति सामूहिक अवकाश या हड़ताल में शामिल होने की अवधि का वेतन देय नहीं होगा। इस अवधि को अवकाश भी स्वीकृत नहीं किया जाएगा। संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि का वेतन काटने की जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पटवारी आगे भी अनधिकृत रूप से शासकीय कार्य से अनुपस्थित रहते हैं तो संबंधित अवधि को 'सेवा में व्यवधान' (ब्रेक इन सर्विस) मानने संबंधी प्रस्ताव विभागाध्यक्ष को भेजे जाएंगे।

    पहले तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों पर हो चुकी कार्रवाई
    बता दें कि प्रशासन की सख्ती के बीच तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं। इसके विरोध में जिलेभर के पटवारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में 1000 से अधिक पटवारी शामिल हुए थे।

    डिप्टी सीएम के साथ होने वाली बैठक भी टली
    पटवारी प्रतिनिधिमंडल की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में होने वाली बैठक भी टल गई। डिप्टी सीएम की व्यस्तता के चलते बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में पटवारियों की मांग और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है।

    पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाया नहीं जाता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ कार्रवाई वापस लेने की मांग भी कर रहा है।

    50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का मामला
    मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर सरकार के 3,800 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है।

    स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इसी आबादी भूमि पर काबिज लोगों को रजिस्ट्री के जरिए मुफ्त में मालिकाना हक देने की प्रक्रिया की जा रही है।

    पटवारी संघ ने कहा- कोर्ट में घसीटे जांएगे

    पटवारी संघ ने योजना में रजिस्ट्री के निष्पादक के रूप में काम करने से इनकार किया है। संघ का कहना है कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल होने से भविष्य में जमीन को लेकर विवाद होने पर उन्हें भी कानूनी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है।

     

  • MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    MP में पटवारियों को सरकार की दो टूक, काम से इनकार किया तो सामूहिक बर्खास्तगी की चेतावनी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। स्वामित्व अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं हैं। इधर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को इनकार करने वालों को बर्खास्त करने के लिए फ्री हैंड दे दिया। अब पटवारी संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पटवारियों को बर्खास्त किया गया तो वे सामान्य कामकाज भी बंद कर देंगे।

    वहीं, जमीनी मामलों के विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारी ओपी भट्ट ने पूरे अभियान की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं। कहा, बैंकों से कर्ज लेने के लिए आवासीय भूखंड की रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं है। इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके हैं। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे।

    विवादों में इसलिए नि:शुल्क रजिस्ट्री

    68 लाख में से 50 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य तय है। 17 अक्टूबर तक यह लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वयक व अन्य को दिए गए। इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है।

    पटवारियों ने कहा-
    अक्सर जमीनी मामलों में पारिवारिक या अन्य विवाद सामने आते हैं। 50 लाख प्रकरणों में ऐसे विवाद आना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में पीडि़त पक्ष पटवारी को भी विक्रेता के रूप में पक्षकार बना सकता है, जिससे वे अनावश्यक न्यायालयीन मामलों में उलझेंगे।

    सरकार का दावा-
    बैंकों से कर्ज लेने में होगी आसानी सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री होने से संबंधित हितग्राहियों को बैंकों से कर्ज लेने में आसानी होगी और उन्हें अन्य लाभ भी मिलेंगे। जिन दस्तावेजों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की जा रही है, वे दस्तावेज स्वामित्व योजना के तहत 2021 से अब तक 68 लाख लोगों को दिए जा चुके हैं। इनमें नक्शा, खसरा, खतौनी और बही की प्रति शामिल है।

    जमीनी मामलों के जानकारों के अनुसार
    जब शासन किसी व्यक्ति को जमीन के ये दस्तावेज उपलब्ध कराकर उसका मालिकाना हक दे चुका है तो अलग से रजिस्ट्री की जरूरत नहीं रह जाती।

    5 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट भी बेकार
    नि:शुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरदा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इनको गंभीरता से नहीं लिया। सूत्र बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट में कलेक्टरों से मिले फीडबैक को भी उपेक्षित करते हुए प्रदेशभर में अभियान शुरू कर दिया गया।

    मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के सभी कामों से पटवारी संघ अलग रहेगा। रजिस्ट्री भी नहीं करेंगे। बीते दिनों संघ की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है। योजना से संबंधित कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य आगामी निर्देश तक नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाएंगे।

    विशेषज्ञों ने अभियान पर उठाए ये सवाल
        जब स्वामित्व योजना के तहत संबंधित हितग्राही के नाम पर भूखंड के जमीनी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों थी?
        यदि ऐसे भूखंडों पर लोन लेने के लिए कोई बैंक रजिस्ट्री की प्रति मांग रहे थे या लोन देने से इंकार कर रहे थे तो शासन से सार्वजनिक आदेश जारी क्यों नहीं कराया गया?
        जब भी रजिस्ट्री होती है तो शासन को राजस्व मिलता है। नि:शुल्क रजिस्ट्री में करीब 4000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति के बावजूद शासन को घाटे में डालने वाला अभियान क्यों बनाया गया?
        अभियान डिजाइन करने से पहले जमीनी वास्तविकताओं की पड़ताल क्यों नहीं की गई?

  • सीधी में पटवारी की शर्मनाक हरकत का वीडियो वायरल, 65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पार किया नाला; कार्रवाई

    सीधी में पटवारी की शर्मनाक हरकत का वीडियो वायरल, 65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पार किया नाला; कार्रवाई

    सीधी 
    जिले में एक पटवारी को जूतों की चिंता भारी पड़ गई और उन्हें निलंबित कर दिया गया है। पूरा मामला जिले के माटा गांव का है जहां से एक पटवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में पटवारी एक बुजुर्ग की पीठ पर लदकर नाला पार करते दिख रहे थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद बवाल मचा और अब जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है।

    जूते बच गए, पटवारी नहीं
    माटा गांव में बुजुर्ग व्यक्ति की पीठ पर सवार होकर पटवारी द्वारा पानी से भरे नाले को पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देश पर अपर कलेक्टर बीपी पाण्डेय ने माटा गांव पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं। वहीं मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गोपद बनास प्रिया पाठक द्वारा पटवारी हल्का माटा नीलेश नामदेव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रथम दृष्टया असंवेदनशील एवं अपमानजनक व्यवहार पाए जाने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत यह कार्रवाई की गई है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    बुजुर्ग की पीठ पर लदकर किया था नाला पार
    पूरा मामला माटा गांव से जुड़ा है, यहां रहने वाले ललवा केवट के घर और जमीन तक एक छोटे से नाले को पार कर ही जाना पड़ता है। पूरे साल इस नाले में थोड़ा बहुत पानी रहता है। करीब एक साल पहले किसान ललवा केवट की फसल और घर को जंगली जानवरों ने नुकसान पहुंचाया था। जंगली जानवरों के कारण हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए माटा गांव के पटवारी नीलेश नामदेव पहुंचे थे। जूते गीले न हों इस कारण नाले को पार करने के लिए पटवारी बुजुर्ग ललवा केवट की पीठ पर लद गए थे और नाला पार किया था। इसका वीडियो सामने आया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।