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  • तलाक के साथ पत्नी को 71.66 लाख रुपये भरण-पोषण, पटना हाईकोर्ट का फैसला

    तलाक के साथ पत्नी को 71.66 लाख रुपये भरण-पोषण, पटना हाईकोर्ट का फैसला

    पटना
     पटना हाईकोर्ट ने करीब 15 साल पुराने वैवाहिक संबंध को समाप्त करते हुए लंबे समय से चले आ रहे अलगाव और वैवाहिक तनाव को मानसिक क्रूरता के दायरे में माना है।

    न्यायाधीश बिबेक चौधरी और न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने कुमारी सौम्या की अपील स्वीकार करते हुए मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया। दोनों का विवाह वर्ष 2009 में हुआ था और अप्रैल 2019 से अलग रह रहे थे।

    वर्षों के अलगाव से व्यावहारिक रूप से टूट चुका था वैवाहिक बंधन
    हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत तलाक मंजूर किया। कोर्ट ने कहा कि वर्षों तक जारी अलगाव, लगातार तनाव और वैवाहिक संबंधों का पुनर्स्थापित न हो पाना इस निष्कर्ष की ओर ले जाता है कि वैवाहिक बंधन व्यावहारिक रूप से टूट चुका है। इसी आधार पर वैवाहिक संबंध समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

    पति के व्यभिचार के आरोप को कोर्ट ने नहीं माना
    मामले में पति की ओर से पत्नी पर व्यभिचार के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि हाईकोर्ट ने ठोस साक्ष्य नहीं होने के कारण इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप पर्याप्त नहीं हैं, उसके समर्थन में विश्वसनीय प्रमाण भी जरूरी हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी दिया हवाला
    खंडपीठ ने मानसिक क्रूरता और वैवाहिक संबंधों से जुड़े अपने निष्कर्ष के लिए सुप्रीम कोर्ट के शोभा रानी बनाम मधुकर रेड्डी (1988) और समर घोष बनाम जया घोष (2007) के फैसलों का भी उल्लेख किया। इन निर्णयों के संदर्भ में वैवाहिक जीवन में लंबे तनाव और अलगाव के प्रभाव पर विचार किया गया।

    पत्नी को मिलेगा 71.66 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण
    हाईकोर्ट ने पत्नी के लिए 71.66 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण निर्धारित किया है। अदालत ने यह राशि तय करते समय पति की करीब 3.70 लाख रुपये मासिक आय और बच्चों समेत परिवार की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखा। भुगतान दो बराबर किश्तों में किया जाना है।

    तीन और छह महीने में चुकानी होगी राशि
    अदालत के निर्देश के अनुसार भरण-पोषण की राशि दो बराबर किश्तों में दी जाएगी। पहली किश्त तीन महीने और दूसरी छह महीने के भीतर भुगतान करनी होगी। राशि का भुगतान पूरा होने के बाद दोनों पक्ष लंबित मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

    लंबे अलगाव पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
    फैसले में हाईकोर्ट ने माना कि लगातार वर्षों तक अलग रहना, वैवाहिक तनाव बने रहना और संबंधों के सामान्य स्थिति में लौटने की संभावना समाप्त होना मानसिक क्रूरता के निष्कर्ष तक पहुंचा सकता है। वहीं व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों के लिए ठोस प्रमाण की आवश्यकता पर भी अदालत ने जोर दिया।

     

  • कोरोना काल में अपनों को खोने वालों के लिए राहत: हाईकोर्ट ने 4 हफ्ते के भीतर अनुग्रह राशि देने का दिया आदेश

    कोरोना काल में अपनों को खोने वालों के लिए राहत: हाईकोर्ट ने 4 हफ्ते के भीतर अनुग्रह राशि देने का दिया आदेश

    पटना
    पटना हाईकोर्ट ने कोरोना से मौत मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कहा कि कोविड से मौत मामले में तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत है। अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र विश्वसनीय सबूत होता है। सिर्फ आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर विधवा का हक नहीं छीना जा सकता। न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने मुंगेर की आशा देवी की अर्जी पर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि भुगतान करने का आदेश दिया।

    कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति अजय कुमार शर्मा की मृत्यु 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19 दर्ज है। जिला प्रशासन ने उन्हें कोविड मृतकों की सूची में रखा और राशि भी आवंटित की। लेकिन भुगतान नहीं किया गया। मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर डीएम को विस्तृत अभ्यावेदन दिया। पर जिला स्वास्थ्य समिति ने आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने का हवाला दे दावा खारिज कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में किसी को मुआवजे से वंचित करने का आधार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट नहीं होना निर्णायक नहीं हो सकता है। अस्पताल का प्रमाण पत्र और जिला स्तरीय सूची में नाम है, तो तकनीकी आधार पर राशि नहीं देना गलत है।

    कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर अस्पताल सील
    कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर पटना के कुम्हरार स्थित भागवत नगर स्थित पुष्पांजलि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को सिविल सर्जन ने सील कर दिया। जिला प्रशासन और पुलिस से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने को आवेदन भी दिया गया है।

    यह कार्रवाई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भारती देवी नाम की महिला की मौत के मामले में की गई है। मामले में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने और अधिक बिल देने का आरोप लगाया था। परिजनों ने सिविल सर्जन के पास शिकायत की थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठी थी। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई की गई। अस्पताल के साथ वहां के चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ भी शिकायत का उल्लेख है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।

    सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है। जांच में जो तथ्यों आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।

  • जस्टिस वी. कामेश्वर राव होंगे पटना हाईकोर्ट के नए CJ, 8 हाईकोर्ट में हुई नियुक्तियां

    जस्टिस वी. कामेश्वर राव होंगे पटना हाईकोर्ट के नए CJ, 8 हाईकोर्ट में हुई नियुक्तियां

    पटना
    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर पटना समेत आठ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की शनिवार को नियुक्ति की गई। एक्स' पर एक पोस्ट में, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस वल्लूरी कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रवींद्र वी. घुगे कलकत्ता हाईकोर्ट के प्रमुख होंगे। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता द्वारा राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के प्रमुख होंगे। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

    जानकारी के मुताबिक, जस्टिस वी. कामेश्वर का जन्म 7 अगस्त 1965 को हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1987 में भूगोल में बीए आनर्स और 1990 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। मार्च 1991 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की प्रधान पीठ में वकालत की।

    बताया जाता है कि जस्टिस वी. कामेश्वर ने वर्ष 1991 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में अधिवक्ता के तौर पर नामांकन करवाया था। उन्होंने श्रम, मध्यस्थता, संवैधानिक और प्रशासनिक कानूनों से जुड़े मामले में विशेषज्ञता हासिल की है।

  • न्यायपालिका में बड़ा बदलाव: मिनाक्षी एम. राय होंगी पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस

    न्यायपालिका में बड़ा बदलाव: मिनाक्षी एम. राय होंगी पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस

    पटना

    पटना हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिलने वाला है।। मिनाक्षी एम राय पटना उच्च न्यायालय की नई चीफ जस्टिस होंगी। सिक्किम हाईकोर्ट की जज रह चुकीं मिनाक्षी एम राय पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगी। सिक्किम के पूर्व गृह सचिव के घर 12 जुलाई 1964 को जन्मी मीनाक्षी एम राय ने वर्ष 1980 में दसवीं पास कर इंटर में दाखिला ली थी। मार्च 1983 में बारहवी पास कर उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति शास्त्र से स्नातक की थी। उसके बाद दिल्ली के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की डिग्री लेकर मिनाक्षी ने खुद को दिल्ली बार काउंसिल में वकालत करने के लिए इनरोलमेंट कराया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट एंव सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की थी। 11 दिसम्बर1990 को सिक्किम में बतौर न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर बहाल हुई थीं। 15 अप्रैल 2015 को सिक्किम हाई कोर्ट में पहली महिला जज के रूप में नियुक्त हुई थीं।

    बताया जा रहा है कि मिनाक्षी मदन राय के पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सिक्किम के लोगों के लिए गौरव भरा पल है। अपने बयान में सिक्किम के मुख्यमंत्री ने कहा कि मिनाक्षी एम राय का पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में चुने जाने एक ऐतिहासिक क्षण है। वो सिक्किम से पहली महिला जज हैं तो इतने उच्च पद पर आसीन हुई हैं। मुख्यमंत्री ने न्यायिक प्रक्रिया में मिनाक्षी एम राय के योगदान को सराहनीय और अतुल्नीय बताया है। सीएम ने सिक्किम की जनता और सरकार की तरफ से मिनाक्षी एम राय को बधाई दी है।

    सीएम ने कहा कि मिनाक्षी एम राय के द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में दिए गए योगदान को सिक्किम तथा देश के लोग याद रखेंगे। मिनाक्षी एम राय के आत्मविश्वास की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम में हाईकोर्ट के जज के तौर पर मिनाक्षी एम राय ने जिस तरह से निष्पक्षता से अपने न्यायिक दायित्वों को निभाया उसका लाभ अब पटना हाईकोर्ट को भी मिलेगा।