Tag: Panchayat Election

  • राजस्थान में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू, 16 जिला परिषद-104 पंचायत समितियों के लिए आज से नामांकन

    राजस्थान में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू, 16 जिला परिषद-104 पंचायत समितियों के लिए आज से नामांकन

    जयपुर
     राजस्थान में आज अधिसूचना जारी होने के साथ ग्रामीण सरकार के सियासी हलचल बढ़ जाएगी। गुरुवार यानी आज से जहां 16 जिला परिषद, 104 पंचायत समिति व 3314 ग्राम पंचायतों में चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी, वहीं 16 जिला परिषदों व 104 पंचायत समितियों में सदस्यों के नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। पहले चरण में ही 3314 ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंच के चुनाव भी हैं, जिनके लिए नामांकन प्रक्रिया मतदान से एक दिन पहले 23 अक्टूबर को पूरी होगी।

    राजस्थान में लगभग आधी 6940 ग्राम पंचायतों को पंच, सरपंच व उपसरपंच इसी माह मिल जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण की 3314 ग्राम पंचायतों में 25 एवं दूसरे चरण की 3626 ग्राम पंचायतों में 31 अक्टूबर को चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। शेष दो चरणों के चुनाव अगले माह होंगे।

    मतदान दलों को नहीं लाने पडेंगे गद़्दे-तकिया, पांच दिन रुकेंगे मतदानकर्मी
    राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदान दलों की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा है। इस बार में सुरक्षाकर्मियों सहित मतदान दल में शामिल कर्मचारियों को अपने साथ बिस्तर नहीं ले जाने पडेंगे, उनके लिए गद्दे-चद्दर-तकिया की व्यवस्था के लिए आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को व्यवस्था सौंप दी है। इसके अलावा छाया-पानी व रोशनी की व्यवस्था के लिए भी पहले से ही दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे मतदाताओं व चुनाव कर्मियों को परेशानी का सामना नहीं करना पडेगा।

    मतदान कर्मी करीब पांच दिन रुकेंगे, इसको देखते हुए उनके लिए कुक व हेल्पर की व्यवस्था भी जिला निर्वाचन अधिकारी करेंगे। इसका खर्च मतदानकर्मी स्वयं वहन करेंगे, जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्येक मतदानकर्मी को 2200 से 3450 रुपए तक भुगतान किया जाएगा।

    प्रत्येक मतदान केंद्र पर 17650 रुपए खर्च
    राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्येक दल को पांच दिन में होने वाले खर्च के रूप में 17650 रुपए दिए जाएंगे। इस दल में सहायक मतदान अधिकारी से रिटर्निंग अधिकारी तक कुल 6 कर्मचारी शामिल होंगे, जिनको प्रतिदिन के हिसाब से कुल 2550 रुपए मिलेंगे।

    शांतिपूर्ण मतदान के लिए 10 बड़े प्रतिबंधात्मक आदेश लागू
    राजस्थान में पंचायती चुनाव को लेकर प्रशासन भी एक्शन मोड में है। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए 10 बड़े प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। सरकारी कर्मचारियों के अवकाश और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी। रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर प्रतिबंधित रहेगा। प्रचार वाहन, सभा और जुलूस के लिए अनुमति जरूरी होगी। BNSS की धारा 163 के तहत हथियारों के प्रदर्शन पर रोक रहेगी। सरपंच प्रत्याशियों को सीमित प्रचार समय मिलेगा और विजय जुलूस नहीं निकलेगा। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट पर कार्रवाई होगी। मतदान केंद्र के 200 मीटर दायरे में मोबाइल प्रतिबंधित रहेगा। मतदान से 48 घंटे पहले और मतगणना के दिन ड्राई डे रहेगा।

  • बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत 4 जिलों में सभी सरपंच सीटें ST के लिए आरक्षित

    बांसवाड़ा-डूंगरपुर समेत 4 जिलों में सभी सरपंच सीटें ST के लिए आरक्षित

    जयपुर
    आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में हजारों गांवों की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उपखंड मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में सरपंच के 14,403 और वार्ड पंच के 1,30,584 पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 7,200 महिला सरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी।

    सरपंच के 14 हजार से ज्यादा पदों का आरक्षण तय
    आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में गांवों की कमान इस बार महिलाओं के हाथ में जाएगी। करीब 7,200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में कई गांवों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर भी आरक्षण लॉटरी ने असर डाला है।

    वार्ड पंचों में भी हजारों सीटें महिलाओं के लिए
    सरपंचों के साथ-साथ 1,30,584 वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय कर दिया गया है। इनमें 21,962 वार्ड SC, 19,117 वार्ड ST और करीब 15 हजार वार्ड OBC के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    वहीं, कुल आरक्षण व्यवस्था के तहत करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच भी चुनी जाएंगी। यानी पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर दिखाई देगी।

    4 जिलों में बड़ा उलटफेर, सभी सरपंच सीट ST के लिए
    आरक्षण लॉटरी में सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों की हो रही है। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।

    आंकड़ों के मुताबिक बांसवाड़ा में 327, डूंगरपुर में 442, प्रतापगढ़ में 277 और सलूंबर में 207 सरपंच पद हैं। इन सभी पदों पर ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे।

    इन जिलों में आरक्षण का सीधा असर उन दावेदारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से सरपंच चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब टिकट और चुनावी रणनीति भी आरक्षण के हिसाब से तय होगी।

    बाड़मेर में दोबारा निकली लॉटरी, क्यों मचा विवाद?
    इधर बाड़मेर पंचायत समिति में सरपंच पदों की आरक्षण लॉटरी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। लॉटरी में कपूरड़ी ग्राम पंचायत को SC वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई।

    आपत्ति करने वालों का कहना था कि ग्राम पंचायत में SC वर्ग की आबादी नहीं है। मामला सामने आने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी पंचायत समिति की आरक्षण लॉटरी दोबारा निकालने के आदेश दिए। इससे बाड़मेर की पंचायत समिति में कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना बन गई है।

    अब चुनाव की तारीखों का इंतजार
    सरपंच और पंच के साथ-साथ प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के आरक्षण का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है।

    संभावना जताई जा रही है कि शनिवार या सोमवार तक राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

    हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी के बाद अब राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस गांव की कमान महिला के हाथ जाएगी और किस सीट पर कौन सा वर्ग मैदान में उतरेगा?

  • पंचायत चुनाव से पहले धनबाद में जारी हुई वोटर और बूथों की सूची, 242 पंचायतों पर नजर

    पंचायत चुनाव से पहले धनबाद में जारी हुई वोटर और बूथों की सूची, 242 पंचायतों पर नजर

    धनबाद
    झारखंड में अप्रैल-मई 2027 में त्रिस्तरीय पंचायत संभावित है।
    इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। चुनाव और पंचायतों से संबंधित विभिन्न रिपोर्ट समय-समय पर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा रही है।

    इस कड़ी में धनबाद जिला की पंचायतों, मतदाताओं और मतदान केंद्रों से संबंधित रिपोर्ट व सूची प्रकाशित की गई है। जिसके अनुसार जिले के नौ प्रखंडों के 242 पंचायतों में 10,61,604 मतदाता मतदान करेंगे।

    जबकि 2939 मतदान केंद्रों में से 27 मतदान केंद्र जर्जर हैं या फिर इन्हें स्थानांतरित करने अथवा इनके मरम्मति की आवश्यकता है।

    जर्जर मतदान केंद्रों की स्थानांतरित करने की जरूरत
    जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित इन मतदान केंद्रों में से 27 की हालत खराब है। ये अत्यंत जर्जर हो चुके हैं या फिर इनकी मरम्मति की जरूरत है। ऐसे मतदान केंद्रों में बलियापुर प्रखंड के मुकुंदा पंचायत का बीसीसीएल बिजली घर गोल्डेन पहाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

    जिसे करमाटांड शिफ्ट किया गया है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्र ब्राम्हण टोला का मतदान केंद्र के निजी भवन में संचालित हैं। इसे करमाटांड शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।

    पूर्वी टुंडी के चार केंद्रों जर्जर
    पूर्वी टुंडी प्रखंड के महोलीडीह पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र का मतदान भवन ध्वस्त हो चुका है। जबकि सामुदायिक भवन पंडुआ पूरी तरह से जर्जर है। रूपन में पुराना पंचायत भवन फुलपहाड़ी की हालत खस्ता है। वहीं लटानी और पांड्राबेजरा पंचायत के मतदान केंद्र प्राथमिक विद्यालय शंकरडीह में था।

    इस स्कूल को उत्क्रमित विद्यालय रघुनाथपुर में मर्ज कर दिया गया है। इसी प्रकार से प्राथमिक विद्यालय डुमरजोर को मध्य विद्यालय पोलकेरा में मिला दिया गया है। इनके जगह पर नए भवन को चिन्हित करना होगा।

    पूर्वी टुंडी की तरह ही कलियासोल प्रखंड का जमाकुदर, ऐलाकेंद्र, सालुकचपड़ा और कलियासोल पंचायत में सामुदायिक भवन फतेहपुर, मध्य विद्यालय कुशियारा, चासपाड़ा पुराना पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय कालुबथान पूर्व और पश्चिम अत्यंत जर्जर हैं।

    एग्यारकुंड में 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब
    एग्यारकुंड प्रखंड में सबसे अधिक 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब है। चांच में एनपीएस डुमरीजोड भूधंसान की चपेट में आ चुका है। प्राथमिक विद्यालय हरिजन स्कूल बंद हो गया है। इन दोनों को पीएस बुटबाड़ी और सामुदायिक भवन पंचायत उपसचिवालय में भेजने का प्रस्ताव दिया गया है।

    वहीं जोगरात पंचायत में पीएस जूनकूदर का कमरा नंबर एक व दो की स्थिति खराब है। गोपीनाथपुर में सामुदायिक भवन आदिवासी टोला, एग्यारकुंड उत्तर में जामबानी लोहिया भवन, शिवलीबाड़ी दक्षिण में सामुदायिक भवन गड़ियाखान और गोपालपुर में पुराना पंचायत भवन व सामुदायिक भवन राजापुर के मरम्मत की जरूरत बताई गई है।

    वहीं कालीपहाड़ी दक्षिण पंचायत में प्राथमिक विद्यालय डीवीसी रांची कालोनी का मतदान केंद्र संख्या 46 से 51 तक जर्जर है।

    भौगोलिक रूप से नहीं बदलेंगी पंचायतें, दावा आपत्ति की मांग
    अब यह भी साफ हो गया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में इनके भौगोलिक स्वरूप में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं होगा। निर्वाचन आयोग से मांगी गई जानकारी पर धनबाद उपायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजी है।

    उसमें बताया गया है कि पंचायत की सीमाओं को ही आधार बनाया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों को लेकर सूची भी जारी कर दिया गया है। जिस पर दावा आपत्ति की मांग किया गया है।

    बाघमारा में अधिक पंचायतें
    जिले के बाघमारा प्रखंड में सबसे अधिक 62 पंचायतें हैं और यहां मतदाताओं की भी संख्या सर्वाधिक 2,45,812 है। यहां सबसे अधिक 668 मतदान केंद्र भी हैं। जबकि सबसे कम केवल नौ पंचायतों वाला प्रखंड पूर्वी टुंडी है। यहां कुल मतदाता 39,229 हैं और मतदान केंद्र 112 हैं।

    प्रखंड – पंचायतें – मतदान केंद्र – कुल मतदाता
    बाघमारा – 62 – 668 – 2,45,812
    बलियापुर – 23 – 283 – 99,844
    धनबाद – 12 – 118 – 44,523
    एग्यारकुंड – 23 – 231 – 90,735
    गोविंदपुर – 39 – 479 – 1,77,966
    कलियासोल – 20 – 226 – 79,115
    निरसा – 27 – 293 – 1,08,611
    पूर्वी टुंडी – 09 – 112 – 39,229
    तोपचांची – 27 – 326 – 1,06,564
    टुंडी – 17 – 203 – 69,205

     

  • राजस्थान में चुनावी हलचल तेज, 309 निकायों के 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी आज

    राजस्थान में चुनावी हलचल तेज, 309 निकायों के 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी आज

    जयपुर
     राजस्थान सरकार ने जिला परिषद सदस्यों, प्रधान, पंचायत समिति सदस्यों, सरंपच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी की नई तारीखें तय कर दी हैं। जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के लिए आरक्षण लॉटरी अब अगले माह 17 सितंबर को निकाली जाएगी। जबकि उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी 18 सितंबर को निकाली जाएगी। वहीं, 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी आज निकाली जाएगी।

    पहले लॉटरी 17 और 18 अगस्त को निकाला जाना प्रस्तावित था। अचानक लॉटरी की तिथि बदलने से पंचायतीराज संस्थाओं के आरक्षण की लॉटरी करीब एक माह आगे खिसकने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता लागू होने को लेकर भी नई अटकलें शुरू हो गई है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 13 अगस्त को जिला प्रमुख पदों के आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव द्वितीय चरण में संभावित होने के कारण जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य और प्रधान पद तथा उपखंड स्तर पर सरपंच एवं वार्ड पंच के आरक्षण की लॉटरी की तारीखें निर्धारित की गई है।

    आचार संहिता को लेकर भी बढ़ी अटकलें
    यदि नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव अलग-अलग चरण में होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीय निकाय चुनाव के साथ ही आचार संहिता लागू नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पंचायत क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार पर चुनावी बंदिशों का तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्र में आचार संहिता कब और किस स्तर पर लागू होगी, यह स्थिति राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले अंतिम चुनाव कार्यक्रम के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    बिना ठोस कारण बताए लॉटरी स्थगित करने पर चर्चाएं तेज
    पंचायतीराज विभाग ने अचानक एक दिन पहले पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की लॉटरी को 1 महीने आगे खिसकाने के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है। लॉटरी स्थगित करने को लेकर पंचायतीराज विभाग के आदेश में हाईकोर्ट के नवंबर तक पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव करवाने के फैसले की पालना करने के संकल्प का हवाला दिया है। पंचायतीराज विभाग के आदेश में पंचायतीराज चुनाव शहरी निकायों के बाद दूसरे फेज में होने की संभावना का हवाला दिया है। एक तरफ विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करने की बात कही है, दूसरी तरफ पंचायतीराज चुनाव दूसरे फेज में होने की संभावना के कारण लॉटरी को एक महीने आगे खिसकाया है।

    निकायों की लॉटरी आज
    राज्य की 309 निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी सोमवार को निकाली जाएगी। निकायों के चुनाव पहले चरण में होंगे। आरक्षण का निर्धारण होते ही भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदारों का गणित बदल जाएगा। जिन वार्डों में आरक्षण की स्थिति बदलेगी, वहां कई निवर्तमान पार्षदों और संभावित प्रत्याशियों को नए वार्ड तलाशने पड़ सकते हैं, जबकि लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे नए चेहरों के लिए भी मौका बन सकता है।

  • ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट के बाद ही होंगे चुनाव, राजस्थान निर्वाचन आयोग ने सरकार को बताया

    ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट के बाद ही होंगे चुनाव, राजस्थान निर्वाचन आयोग ने सरकार को बताया

    जयपुर
     राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव तय समय पर कराना अब संभव नहीं लग रहा। राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से 31 जुलाई तक चुनाव कराने की समय-सीमा में अब सिर्फ 25 दिन बाकी है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को साफ बता दिया है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चुनाव कराने के लिए कम से कम 90 दिन चाहिए। यानी, कोर्ट की मौजूदा समय-सीमा में चुनाव कराना लगभग असंभव है।

    दिलचस्प यह भी है कि इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश का भी पालन नहीं हो पाया था और अब दूसरी बार अदालत की तय समय-सीमा पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका के बाद सरकार और आयोग दोनों सक्रिय हो गए हैं और हाईकोर्ट से समय-सीमा बढ़ाने की रणनीति पर मंथन शुरू हो गया है।

    14 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजारः पंचायती
    राज विभाग ने निर्वाचन आयोग को बताया है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट 14 अगस्त तक सौंप सकता है। इसके बाद विभाग 31 अगस्त तक सभी वर्गों का आरक्षण तय करने की तैयारी में है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा।

    दो चरण में निकाय, चार चरण में पंचायत चुनाव
    राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि आरक्षण निर्धारण पूरा होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकेगा। आयोग के अनुसार पंचायत चुनाव में करीब 50 दिन और नगरीय निकाय चुनाव में 40 दिन लगेंगे। नगरीय निकाय चुनाव 2 चरणों में और पंचायत चुनाव 4 चरणों में कराए जाएंगे।

    आयोग का तर्क है कि नई पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों और वार्डों की संख्या बढ़ने से चुनावी प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि 31 जुलाई की समय-सीमा का पालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में हाईकोर्ट में समय सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन करने की जरूरत है। मंगलवार को स्वायत्त शासन विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों ने इसी मुद्दे पर बैठक कर अदालत में सरकार का पक्ष रखने की रणनीति पर चर्चा की।

  • राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों पर जल्द फैसला संभव, आरक्षण आंकड़ों का इंतजार जारी

    राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों पर जल्द फैसला संभव, आरक्षण आंकड़ों का इंतजार जारी

    जयपुर

    राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण संबंधी नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है. आयोग का मानना है कि आवश्यक डेटा मिलते ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा.

    विभागों से मांगे आंकड़े
    राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जरूरी आंकड़े मांगे हैं.  आयोग का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है. आयोग ने विभागों को स्पष्ट किया है कि डेटा उपलब्ध होते ही चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा.

    आयोग को कोर्ट में देना है जवाब
    उल्लेखनीय है कि चुनाव में देरी को लेकर आयोग को न्यायालय में भी जवाब देना पड़ा था.  15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने को प्रमुख कारण बताया था.

    राज्य सरकार की ओर से पहले ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, लेकिन निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंतिम और प्रमाणित आंकड़ों की आवश्यकता है.  यही वजह है कि विभागों से एक बार फिर विस्तृत डेटा मांगा गया है.

    पंचायत और निकाय चुनाव लंबित
    राजस्थान में पंचायत राज और नगरीय निकायों के चुनाव काफी समय से लंबित हैं. ऐसे में आयोग के ताजा पत्राचार के बाद चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.  अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आयोग को मांगा गया डेटा कब तक उपलब्ध कराती है क्योंकि इसी पर चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय होगी.

  • दिग्गज नेताओं को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, पंचायत चुनाव में जीत का BJP ने बनाया फॉर्मूला

    दिग्गज नेताओं को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, पंचायत चुनाव में जीत का BJP ने बनाया फॉर्मूला

    जयपुर.

    राजस्थान में 'गांव की सरकार' चुनने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। प्रदेश की 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में होने वाले चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी बिसात बिछा दी है। बता दें कि सत्ता और संगठन ने मिलकर एक ऐसी 'सीक्रेट रणनीति' तैयार की है, जिसका मकसद न केवल जीत हासिल करना है, बल्कि विपक्ष के किलों को भी ढहाना है। अब बस इंतजार है तो राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावी तारीखों के औपचारिक एलान का।

    राठौड़, चतुर्वेदी और तिवाड़ी संभालेंगे मोर्चा
    बीजेपी ने इस बार पंचायत चुनावों की जिम्मेदारी अपने सबसे अनुभवी और रणनीतिकार नेताओं को सौंपी है। पार्टी ने जिला परिषद और पंचायत चुनाव समितियों के नाम फाइनल कर लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन प्रमुख नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। इन नेताओं ने ही परिसीमन और पुनर्गठन को लेकर पार्टी की सिफारिशें तैयार की हैं। ताकि चुनावों में बीजेपी को अधिकतम भौगोलिक और राजनीतिक लाभ मिल सके।

    • राजेंद्र राठौड़ (पूर्व नेता प्रतिपक्ष): जमीनी राजनीति के माहिर खिलाड़ी।
    • अरुण चतुर्वेदी (अध्यक्ष, राज्य वित्त आयोग): संगठन और सत्ता के बीच समन्वय के विशेषज्ञ।
    • घनश्याम तिवाड़ी (राज्यसभा सांसद): नीतिगत और कानूनी बारीकियों के जानकार।

    CM भजनलाल शर्मा का 'संभाग प्लान'
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद इन चुनावों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सभी संभागों के प्रमुख नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों का एकमात्र एजेंडा पंचायत चुनाव 2026 था। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधा मतदान केंद्र तक पहुंचे।

    विस्तारकों ने टटोली जनता की नब्ज
    रणनीति बनाने से पहले बीजेपी ने हर विधानसभा स्तर पर 'विस्तारक' तैनात किए थे। इन विस्तारकों का काम केवल पार्टी के कार्यक्रम चलाना नहीं था, बल्कि जमीन पर जनता की नाराजगी और उम्मीदों को समझना था। विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर ही प्रत्याशियों के चयन और प्रचार के मुद्दों का खाका खींचा गया है।

    अगले महीने बज सकता है चुनावी बिगुल
    राज्य निर्वाचन आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस बार 4.02 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। प्रदेश की 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में अगले महीने चुनाव होने की पूरी संभावना है।

    कार्यकाल का गणित: कब-कहां होंगे चुनाव?
    वर्तमान में 12 जिला परिषदों और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल अभी बाकी है, जो अलग-अलग चरणों में पूरा होगा। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही चुनाव आयोग कार्यक्रम जारी करेगा, वैसे ही प्रभारी और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी।

    1. 5 सितंबर तक: 6 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियों का समय पूरा होगा।
    2. 29 अक्टूबर तक: 2 जिला परिषद और 22 पंचायत समितियों का कार्यकाल खत्म होगा।
    3. 22 दिसंबर तक: 4 जिला परिषद और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होगा।