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  • डेढ़ साल बाद पाकिस्तान पहुंचा भारत का बड़ा अधिकारी, SCO बैठक में लेंगे हिस्सा

    डेढ़ साल बाद पाकिस्तान पहुंचा भारत का बड़ा अधिकारी, SCO बैठक में लेंगे हिस्सा

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर के करीब डेढ़ साल बाद भारत ने पहली बार विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को पाकिस्तान भेजा है। भारत ने अतिरिक्त सचिव आलोक डिमरी को पाकिस्तान भेजा है। डिमरी इस समय इस्लामाबाद में आयोजित एससीओ समन्वयकों की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत का रुख साफ रहा है कि आतंकवाद से मुक्त और अनुकूल माहौल में ही द्विपक्षीय बातचीत संभव है। हालांकि, भारत एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच के तहत पाकिस्तान के साथ जुड़ने के लिए तैयार है।

    कौन हैं आलोक डिमरी?
    आलोक अमिताभ डिमरी भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी और राजनयिक हैं। फिलहाल वह विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के साथ-साथ SCO के राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डिमरी इससे पहले 2019 से 2022 तक किर्गिज गणराज्य में भारत के राजदूत और बाद में ब्रुनेई में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं। विदेश मंत्रालय में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी SCO से जुड़े मामलों को देखना है। इसी जिम्मेदारी के तहत वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो रही एससीओ की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    भारत की ओर से उनकी मौजूदगी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि करीब दो साल बाद नई दिल्ली की ओर से किसी एससीओ बैठक में पाकिस्तान में भागीदारी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत एससीओ के साथ जुड़ना चाहता है और इसी वजह से अपने एससीओ समन्वयक को पाकिस्तान भेजा गया है।

    पाकिस्तान में क्या हो रहा है?
    पाकिस्तान इस सप्ताह सोमवार से बुधवार तक इस्लामाबाद में एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। बैठक में पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत संगठन के कार्यक्रम और अन्य संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

    पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, यह बैठक 2026-27 के लिए एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (CHS) की पाकिस्तान की अध्यक्षता के तहत हो रही है। इसमें सदस्य देशों के राष्ट्रीय समन्वयक और एससीओ सचिवालय के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

    बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होनी है:
        पाकिस्तान की अध्यक्षता में एससीओ के कार्यक्रमों की रूपरेखा
        आगामी एससीओ बैठकों और कार्यक्रमों की तैयारियां
        एससीओ सहयोग और समन्वय से जुड़े विभिन्न मुद्दे
        एजेंडे में शामिल अन्य विषय

    पाकिस्तान ने अपनी अध्यक्षता के लिए ‘विजन को असलियत में बदलना: कनेक्टिविटी, इनोवेशन और साझा समृद्धि’ थीम रखी है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख क्या रहा है?
    भारत सरकार का रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। खासकर पहलगाम आतंकी हमले और पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद यह स्थिति और स्पष्ट हुई।

    हालांकि, भारत ने एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच पर पाकिस्तान के साथ भागीदारी से इनकार नहीं किया है। दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद से मुक्त अनुकूल माहौल में द्विपक्षीय बातचीत होनी चाहिए, जबकि एससीओ के प्रारूप के तहत भारत पाकिस्तान के साथ जुड़ता रहेगा।

    पाकिस्तान के एससीओ समन्वयक कर रहे हैं बैठक की अध्यक्षता
    अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान के एससीओ राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. एम. फैसल इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। भारत के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी पाकिस्तान में एससीओ की बैठक में नई दिल्ली की करीब दो साल बाद हुई भागीदारी को दर्शाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने की संभावना भी है।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-अमेरिका का बड़ा युद्धाभ्यास, दोनों मोर्चों पर दुश्मनों को मिलेगा कड़ा संदेश

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-अमेरिका का बड़ा युद्धाभ्यास, दोनों मोर्चों पर दुश्मनों को मिलेगा कड़ा संदेश

    नई दिल्ली

    भारत और अमेरिका सितंबर 2026 में अपने ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज 'युद्ध अभ्यास' का 22वां संस्करण करने जा रहे हैं. यह अभ्यास दो अलग-अलग जगहों पर होगा- उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में. दोनों देशों से करीब 350-350 सैनिक तीन सप्ताह तक इसमें भाग लेंगे। 

    यह अभ्यास भारत की दो सबसे संवेदनशील सैन्य सीमाओं- चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और पाकिस्तान की ओर पश्चिमी मोर्चे- के नजदीक होगा. इससे ज्वाइंट ट्रेनिंग की जटिलता और वास्तविक परिस्थितियों के करीब होने का अंदाजा लगता है। 

    औली में एलएसी से करीब 95 किलोमीटर दूर है. यहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध की तैयारियां की जाएंगी. हाल के हिमालयी तैनातियों और पहाड़ी मुकाबले के अनुभवों से सीख लेकर यहां हाई-अल्टीट्यूड वॉरफेयर ड्रिल्स होंगी। 

    राजस्थान का महाजन रेंज पाकिस्तान सीमा के नजदीक भारत के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में से एक है. यहां लाइव-फायर अभ्यास, मैकेनाइज्ड ऑपरेशंस, आर्टिलरी फायरिंग और एयर-ग्राउंड इंटीग्रेशन ड्रिल्स होंगी। 

    दोनों जगहों पर सैनिक सटीक हमलों, क्लोज-एयर सपोर्ट, युद्धक्षेत्र समन्वय और तेज प्रतिक्रिया वाले अभियानों का अभ्यास करेंगे. पहाड़ी और रेगिस्तानी दोनों तरह की चुनौतीपूर्ण जमीनों पर काम होगा। 

    पहली बार अपाचे हेलीकॉप्टर और लंबी दूरी के हथियार
    इस मिलिट्री ड्रिल में पहली बार एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और लंबी दूरी के सटीक हथियारों को शामिल किया जाएगा. इससे संयुक्त हथियार युद्ध क्षमता मजबूत होगी. सैनिक मिलकर सटीक हमले, करीबी हवाई सहायता और तेज प्रतिक्रिया वाले अभियानों का अभ्यास करेंगे. यह अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में होने वाला पहला बड़ा भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यास है. इससे पहले 2025 का संस्करण अलास्का में हुआ था। 

    2004 में शुरू हुए युद्ध अभ्यास ने अब काफी विकास कर लिया है. शुरू में यह मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभ्यास था, लेकिन अब इसमें ऊंचाई वाले युद्ध, पारंपरिक ऑपरेशंस, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे कई पहलू शामिल हो गए हैं. यह अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को दर्शाता है। 

    दोनों देश इंटरऑपरेबिलिटी यानी साथ मिलकर काम करने की क्षमता, ऑपरेशनल समन्वय और तैयारियों को लगातार बढ़ा रहे हैं. इसका उद्देश्य भारत-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे की उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटना है।  

    युद्ध अभ्यास 2026 का दो संवेदनशील मोर्चों के पास होना सिर्फ प्रशिक्षण नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी है. चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं के नजदीक अभ्यास करके भारत अपनी तैयारियों और सहयोगियों के साथ तालमेल को मजबूत कर रहा है. अपाचे हेलीकॉप्टर और सटीक हथियारों का पहली बार शामिल होना आधुनिक युद्ध की जरूरतों को दर्शाता है। 

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह अभ्यास भारत की रक्षा तैयारियों और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देता है. लंबे समय में इससे दोनों सेनाओं के बीच विश्वास बढ़ेगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी. कुल मिलाकर यह अभ्यास भारत की बहुआयामी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है।  

  • ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा खुलासा, पायलट ने बताया कैसे खुली रही 22 मिनट की विंडो

    ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा खुलासा, पायलट ने बताया कैसे खुली रही 22 मिनट की विंडो

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और वायु सेना द्वारा किया गया एक महत्वपूर्ण अभियान चर्चा में है. इस मिशन के दौरान भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने सटीक और तेज हमले किए. एक भारतीय वायुसेना पायलट, जो उस मिशन का हिस्सा था, उन्होंने हाल ही में बताया कि पाकिस्तानी वायुसेना का रिएक्शन धीमी रही. उनके अनुसार लॉन्च विंडो करीब 22 मिनट तक खुला रहा.

    इस दौरान भारतीय विमानों ने अपना मिशन पूरा किया. सुरक्षित वापस लौट आए, जबकि पाकिस्तान प्रभावी जवाब नहीं दे पाया. यह बयान ऑपरेशन की सफलता और भारतीय वायुसेना की तैयारियों को रेखांकित करता है. Su-30MKI भारत की वायुसेना का प्रमुख मल्टीरोल फाइटर है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों भूमिकाओं में सक्षम है. इसकी लंबी रेंज, आधुनिक रडार और हथियार सिस्टम ने इसे ऐसे ऑपरेशन के लिए बनाया है.

    पायलट के अनुसार भारतीय विमानों ने हमला किया, लक्ष्य पर निशाना साधा और वापस लौटने लगे, तब तक पाकिस्तानी वायुसेना पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाई थी. यह 22 मिनट का समय भारतीय पक्ष के लिए निर्णायक साबित हुआ. आधुनिक हवाई युद्ध में प्रतिक्रिया का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है.

    रडार डिटेक्शन, अलर्ट जारी करना, विमानों को एयरबॉर्न करना और इंटरसेप्ट मिशन शुरू करना- ये सभी प्रक्रियाएं तेजी से होनी चाहिए. यदि प्रतिक्रिया में देरी हो जाए तो हमलावर विमान अपना काम पूरा कर सुरक्षित क्षेत्र में पहुंच जाते हैं. इस मामले में पाकिस्तानी वायुसेना की धीमी प्रतिक्रिया कई कारणों से जुड़ी हो सकती है.

    इनमें रडार कवरेज की सीमाएं, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में देरी या उस समय की ऑपरेशनल तैयारियां शामिल हो सकती हैं. भारतीय पक्ष ने शायद इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर या सरप्राइज एलिमेंट का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सिस्टम को अस्थाई रूप से प्रभावित किया हो. हालांकि आधिकारिक पुष्टि के बिना ये अनुमान ही रह जाते हैं.

    Su-30MKI की क्षमताएं और मिशन की सफलता
    Su-30MKI भारतीय वायुसेना का वर्कहॉर्स माना जाता है. इसमें थ्रस्ट वेक्टरिंग, लंबी दूरी की मिसाइलें और ए़डवांस एवियोनिक्स हैं जो इसे जटिल मिशनों के लिए सक्षम बनाते हैं. ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान में इन विमानों ने सटीक स्ट्राइक की क्षमता का प्रदर्शन किया.

    पायलट के बयान से पता चलता है कि भारतीय विमानों ने लक्ष्य को निशाना बनाया. बिना किसी प्रभावी जवाबी कार्रवाई के वापस लौट आए. यह न सिर्फ विमानों की क्षमता बल्कि पायलटों के प्रशिक्षण, मिशन प्लानिंग और खुफिया जानकारी की गुणवत्ता को भी दर्शाता है.

    भारतीय वायु सेना ने पिछले वर्षों में कई अभ्यासों और वास्तविक अभियानों के जरिए अपनी प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाई है. इस घटना से यह भी साफ होता है कि समय पर सही जानकारी और तेज फैसला कितना महत्वपूर्ण है. यदि पाकिस्तानी पक्ष समय पर प्रतिक्रिया देता तो स्थिति अलग हो सकती थी.

    हवाई जंग में वक्त बेहद जरूरी
    आधुनिक हवाई संघर्ष में टाइम-टू-रिस्पॉन्स जीत-हार तय कर सकता है. जब एक पक्ष के विमान दुश्मन के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो दूसरे पक्ष को तुरंत अलर्ट होना चाहिए. रडार सिस्टम को लक्ष्य ट्रैक करना चाहिए, ग्राउंड कंट्रोल को आदेश जारी करने चाहिए और इंटरसेप्टर विमानों को उड़ान भरनी चाहिए.

    22 मिनट का समय आधुनिक मानकों से काफी लंबा माना जा सकता है. इस दौरान भारतीय विमान न सिर्फ हमला कर सकते थे बल्कि सुरक्षित वापसी का रास्ता भी तय कर सकते थे. यह घटना दोनों पक्षों की तैयारियों के बीच के अंतर को उजागर करती है.

    भारतीय वायुसेना ने संभवतः बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस और मिशन प्लानिंग का इस्तेमाल किया. पाकिस्तानी वायुसेना के पास भी एडवांस विमान और सिस्टम हैं, लेकिन उस विशेष समय पर उनका प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया. ऑपरेशन सिंदूर जैसी घटनाएं भारत-पाक सीमा और हवाई क्षेत्र की जटिलताओं को रेखांकित करती हैं.

    दोनों देशों के बीच तनाव के दौर में हवाई क्षमताएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. भारतीय पक्ष के लिए यह सफलता आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, जबकि पाकिस्तानी पक्ष के लिए यह समीक्षा का विषय बन सकती है. ऐसे अभियानों से सीखने योग्य कई बातें निकलती हैं.

        पहली, खुफिया जानकारी और रियल-टाइम सर्विलांस कितनी जरूरी है.
        दूसरी, कमांड सिस्टम की गति और समन्वय.
        तीसरी, पायलटों का प्रशिक्षण और विमानों का रखरखाव.

    भारतीय वायुसेना लगातार अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर रही है. नए सिस्टम शामिल कर रही है. Su-30MKI के साथ अन्य प्लेटफॉर्म भी भविष्य के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

    पायलट के बयान के अनुसार सुखोई-30 एमकेआई विमान आए, हमला किया और वापस लौट गए, जबकि पाकिस्तानी वायुसेना अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई थी. यह 22 मिनट का विंडो ऑपरेशन की सफलता का मुख्य कारण बना. यह घटना बताती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ हथियार काफी नहीं, बल्कि उनकी सही समय पर सही इस्तेमाल की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

  • ऑपरेशन सिंदूर की डॉक्यूमेंट्री पर पाकिस्तान का विरोध, भारत के सैन्य दावों को बताया गलत

    ऑपरेशन सिंदूर की डॉक्यूमेंट्री पर पाकिस्तान का विरोध, भारत के सैन्य दावों को बताया गलत

    नई दिल्ली
    ऑपरेशन सिंदूर पर बनी भारतीय डॉक्यूमेंट्री को देखकर पाकिस्तानियों को मिर्ची लगी है। पाकिस्तान की ओर से मंगलवार को कहा गया कि इसमें ऑपरेशन सिंदूर का एकतरफा ब्योरा दिया गया है और लड़ाई की जमीनी हकीकत की अनदेखी की गई है। डिस्कवरी चैनल की डॉक्युसीरीज 'डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के जवाब में पाक सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि इस डॉक्यूमेंट्री में घटना का बहुत ज्यादा नाटकीय और भारत को रास आने वाले तौर-तरीके से चित्रण किया गया है।

    पाक सेना ने डॉक्यूमेंट्री में इस अभियान को सैन्य सफलता बताने के भारत के दावे पर सवाल उठाए हैं। इस सीरीज में भारत के सीनियर राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व ने 88 घंटे तक चले संघर्ष से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया है। 2 हिस्सों वाली डॉक्यूसीरीज में बात करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा, 'भारत की उदारता और सहनशीलता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।' उन्होंने कहा कि देश जोखिम उठा सकता है और कड़ा प्रहार कर सकता है, चाहे नतीजा कुछ भी हो।

    अजीत डोभाल ने कहा कि इस सैन्य अभियान का मकसद दुश्मन के शिविरों को नष्ट करना था, खासकर उन ठिकानों को जो पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार थे क्योंकि इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे। पिछले साल 7 मई की तड़के ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था, जिसके तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।

    आतंकी ठिकानों पर भारत का सटीक हमला
    22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। 7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने इस अभियान के तहत कुल 9 आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में निशाना बनाया। इन ठिकानों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए किया जाता था। कार्रवाई को सीमित और टारगेटेड बताया गया था।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की कोशिश की गई। भारत ने अपने वायु रक्षा और प्रतिरोधी ड्रोन तंत्र के जरिए कई खतरों को नाकाम किया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के कुछ सैन्य ठिकानों और वायु रक्षा प्रणालियों को भी निशाना बनाया। अभियान ने भारत की खुफिया क्षमता, सटीक मारक क्षमता, ड्रोन तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को सामने रखा। इस अभियान ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की रणनीति में भी बदलाव का संकेत दिया, जिसमें सीमित अवधि में सटीक सैन्य कार्रवाई के जरिए आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर जोर रहा।

  • दिल्ली पर पाकिस्तानी मिसाइल: ऑपरेशन सिंदूर से सामने आया नया सच, कैसे हुई थी नाकामी?

    दिल्ली पर पाकिस्तानी मिसाइल: ऑपरेशन सिंदूर से सामने आया नया सच, कैसे हुई थी नाकामी?

     नई दिल्ली

    ऑपरेशन सिंदूर के वक्त दिल्ली की तरफ बढ़ती उस पाकिस्तानी मिसाइल को शायद यह अंदाज़ा नहीं था कि वह हिंदुस्तान की सरहद नहीं, बल्कि जज़्बे की दीवार से टकराने जा रही है. हरियाणा के आसमान में ही उसे मिट्टी में मिलाकर इंडियन एयरफोर्स ने साबित कर दिया था कि भारत पर आंख उठाने वालों का अंजाम क्या होता है. ऑपरेशन सिंदूर की यह कहानी सिर्फ एक सैन्य सफलता नहीं, बल्कि दुश्मन के लिए सख्त पैगाम है कि अगर कोई हमारे घर की तरफ बढ़ेगा, तो उसका नाम और निशान दोनों नहीं बचेगा। 

    इंडियन एयरफोर्स ने मई 2025 में पाकिस्तान की तरफ से दागी गई फतेह या शाहीन सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइल को दिल्ली पहुंचने से पहले ही हरियाणा के ऊपर सफलतापूर्वक खत्म कर दिया था. यह कार्रवाई पश्चिमी सीमा के पास रणनीतिक रूप से जरूरी सिरसा एयर बेस पर तैनात वायुसेना की यूनिट ने अंजाम दी थी। 

    एयर कोमोडोर रोहित कपिल के नेतृत्व में एयर डिफेंस ग्रिड ने तत्काल जवाब देते हुए बराक-8 (Barak-8) सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम का उपयोग किया. सिरसा से बरामद मलबे ने उस वक्त इस बड़े खतरे का इशारा किया था. यह सफल ऑपरेशन भारत की सैन्य तत्परता और आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है, जिसने युद्ध के दौरान एक बड़े खतरे को टाल दिया था। 

    एयर कोमोडोर रोहित कपिल का नेतृत्व
    इस निर्णायक ऑपरेशन का नेतृत्व 45 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग, एयर कोमोडोर रोहित कपिल ने किया था. उनके सटीक फैसलों और त्वरित जवाबी कार्रवाई की वजह से ही दिल्ली पर होने वाला हमला नाकाम हो सका. उनकी इस बहादुरी और रक्षात्मक व आक्रामक योजना के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें साल 2025 में 'युद्ध सेवा मेडल' से सम्मानित किया था। 

    सिरसा की यह घटना भारत के विकसित होते एयर डिफेंस आर्किटेक्चर का एक उदाहरण बन गई है. मौजूदा वक्त में 'सुदर्शन प्रोग्राम' के तहत देश भर में एक मल्टी-लेवल सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है. इसमें एस-400, बराक-8 और स्वदेशी इंटरसेप्टर सिस्टम को इंटीग्रेटेड किया जा रहा है. सिरसा इंटरसेप्ट आधुनिक युद्ध में सतर्कता और आपसी कोऑर्डिनेशन की अहमियत की याद दिलाता है। 

  • किराना हिल्स में युद्धाभ्यास का धमाका, SU-30, राफेल और ब्रह्मोस के तांडव का ऑपरेशन सिंदूर हुआ लीक

    किराना हिल्स में युद्धाभ्यास का धमाका, SU-30, राफेल और ब्रह्मोस के तांडव का ऑपरेशन सिंदूर हुआ लीक

    नई दिल्ली

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को किस तरह रणनीतिक रूप से झटका दिया, इस पर लंबे समय से बहस होती रही है. अब जाने-माने एरियल वॉरफेयर विश्लेषक और इतिहासकार टॉम कूपर ने दावा किया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स पर सटीक हमला कर उसकी कमर तोड़ दी थी. टॉम कूपर के मुताबिक यही वह निर्णायक वार था, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था और सीजफायर की भीख मांगने लगा. हालांकि भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर किराना हिल्स को निशाना बनाने से इनकार किया है, लेकिन टॉम कूपर का कहना है कि सबूत साफ हैं.

    टॉम कूपर ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें मिसाइलों के धुएं के निशान पहाड़ियों की ओर जाते और टकराते दिखाई देते हैं. इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पाकिस्तानी वायुसेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से धुआं उठता दिखा. कूपर के मुताबिक भारत ने पहले इन रडार स्टेशनों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को निष्क्रिय किया और फिर अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधाओं के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर हमला किया.

    पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भी मारे गए?

    •     टॉम कूपर ने दावा किया कि उस समय पाकिस्तान का ऑपरेशन ‘बुनियान-उन-मार्सूस’ फेल हो चुका था. भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम कर दिया.
    •     कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 12-13 एयरबेस पर हमला किया. अंत में किराना हिल्स पर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेर लिया.
    •     हमले के समय कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज थी. पाकिस्तान, अमेरिका और भारत से संपर्क कर युद्धविराम के रास्ते तलाश रहा था. कूपर के शब्दों में यह साफ संकेत था कि पाकिस्तान अब आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था.

    क्यों पाकिस्तान की कमजोर नस है किराना हिल्स?

    किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है. यहां 20 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में हार्डन शेल्टर व भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं. टॉम कूपर का तर्क है कि ऐसी जगह पर हमला तभी किया जाता है जब स्पष्ट संदेश देना हो- ‘हम जब चाहें, जहां चाहें, जितनी ताकत से चाहें, वार कर सकते हैं.’ कूपर ने यह भी सवाल उठाया कि जब सबूत इतने स्पष्ट हैं तो भारत आधिकारिक तौर पर हमले से इनकार क्यों करता है. वो इसे लेकर इतने आश्वस्त हैं कि बोलते हैं कि इससे इनकार करना वैसा ही जैसे कोई कहे कि सूरज पूरब से नहीं उगता.

    रूसी फाइटर जेट और ब्रह्मोस ने किया तांडव

    हथियारों की बात करें तो कूपर के अनुसार भारत को किसी विशेष गुप्त तकनीक की जरूरत नहीं पड़ी. सुखोई-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं, जगुआर ने रैम्पेज लॉन्च किए और राफेल ने स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया. इतना पाकिस्तान के लिए काफी था. उन्होंने भारत की इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम की खास तारीफ की, जिसने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई. कुल मिलाकर टॉम कूपर का आकलन है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्पष्ट रणनीतिक जीत थी. किराना हिल्स पर कथित हमले ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य क्षमता और एडवांस तकनीक के सामने उसकी जवाबी ताकत सीमित है.