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  • OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बड़ा खुलासा, 10-11 जातियों को मिला सबसे अधिक प्रतिनिधित्व

    OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बड़ा खुलासा, 10-11 जातियों को मिला सबसे अधिक प्रतिनिधित्व

    जयपुर
    राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें खुलासा हुआ है कि ओबीसी की 10-11 जातियों में जातिवार एक हजार से अधिक लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल पाया। सूत्रों के अनुसार ओबीसी व अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) को आरक्षण का अलग-अलग प्रावधान नहीं है। 309 नगरीय निकायों में से 60 के अध्यक्ष पद ओबीसी के लिए आरक्षित किए जाएंगे। लगभग इसी अनुपात में पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण रहेगा।

    यह रिपोर्ट कैबिनेट की बैठक में रखी जाएगी। इस बार लॉटरी पर्ची के बजाय कम्प्यूटर से निकाली जाएगी। मुख्यमंत्री आवास पर आयोग अध्यक्ष पूर्व जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी ने सदस्य राजीव सक्सेना, मोहन मोरवाल, गोपाल कृष्ण और पवन मंडाविया के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान मंत्री मदन दिलावर, झाबर सिंह खर्रा और जोगाराम पटेल भी मौजूद रहे। इस रिपोर्ट के आधार नगरीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण दिया जाएगा। अब राजस्थान सरकार आयोग की सिफारिशों का अध्ययन कर आगे की प्रक्रिया अपनाएगी।

    दो भाग में है रिपोर्ट, करीब 900 पन्ने
    ओबीसी आयोग की रिपोर्ट दो भाग में है और दोनों को मिलाकर करीब 900 पन्नों में जानकारी दी गई। इसमें से पहले भाग में जनाधार, फील्ड सर्वे, पिछले दो पंचायत-निकाय चुनाव से संबंधित डेटा, केंद्र व राज्य की ओबीसी से संबंधित योजनाएं, सर्वे में सामने आया ओबीसी का जातिवार राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विवरण है। करीब 74.85 लाख परिवारों का सर्वे किया गया, जिसके तहत 19 प्रश्न पूछे गए। इनमें परिवार में राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने से संबंधित प्रश्न भी शामिल था।

    इसके अनुसार जाट जाति की प्रदेश में सबसे अधिक आबादी है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी सबसे अधिक इसी जाति का रहा। दूसरे भाग में पंचायत-निकायों के लिए वार्ड और पदवार ओबीसी का प्रतिनिधित्व सुझाया गया है। जानकारी में आया है कि पिछले दो चुनावों में आरक्षण के कारण ओबीसी को कुल के 10 से 14 प्रतिशत पदों पर प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन सामान्य पदों पर जीत के कारण पंचायतों में यह प्रतिशत 46 व शहरी निकायों में 38 प्रतिशत पहुंच गया।

    कानूनी प्रावधान में बदलाव नहीं
    सूत्रों के अनुसार आयोग ने आरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों में किस प्रकार के बदलाव की सिफारिश नहीं की है। आरक्षण की सही तस्वीर लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगी।

    गोल्डन कवर में सौंपी गई रिपोर्ट
    मुख्यमंत्री को आयोग की ओर से गोल्डन कलर के कवर में लपेटकर रिपोर्ट दी गई, वहीं आयोग प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को तीन रंग वाला गुलदस्ता भेंट किया।

    इन जिलों में ट्राइबल की 100 फीसदी रिजर्व सीट
    सलूम्बर, बांसवाड़ा व डूंगरपुर।

    पूरा कर रहे वादाः सीएम
    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय चुनावों को समय पर कराने का जो वादा किया था, उसकी ओर हम तेजी से बढ़ रहे हैं। वन स्टेट-वन इलेक्शन व्यवस्था से विकास और जनकल्याण के कार्यों को निरंतर गति मिलेगी। इससे पैसे, समय एवं संसाधनों की बचत होगी।

  • ओबीसी सर्वे रिपोर्ट के बाद पंचायत-निकाय चुनाव की तैयारियां होंगी तेज

    ओबीसी सर्वे रिपोर्ट के बाद पंचायत-निकाय चुनाव की तैयारियां होंगी तेज

    जयपुर
     ओबीसी (राजनीतिक) आयोग पंचायत-निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर अपनी रिपोर्ट आज राजस्थान सरकार को सौंपेगा। आयोग की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बुधवार का समय मांगा गया है। ओबीसी (राजनीतिक) आयोग ने 10 जुलाई से प्रदेश में राजधारा सर्वे मोबाइल एप के जरिए ओबीसी परिवारों से जानकारी ली। सत्रह दिन चले सर्वे के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में ओबीसी आबादी करीब 3.63 करोड़ है।

    इस जानकारी के आधार पर आयोग ने पंचायतों व निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है। अब इसकी छपाई का कार्य चल रहा है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह सर्वे किया, जिसके लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने मोबाइल एप तैयार किया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय होगा। आयोग का गत वर्ष 9 मई को सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश मदन लाल भाटी की अध्यक्षता में हुआ था। मोहन मोरवाल, प्रो. राजीव सक्सेना, एडवोकेट गोपाल कृष्ण व पवन मंडाविया को सदस्य बनाया गया था।

    अब निकाली जाएगी लॉटरी
    उधर, पंचायत-निकाय चुनाव के लिए पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी है। दोनों विभागों के दिशानिर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। लॉटरी निकालने के समय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। लॉटरी के आधार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, व महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण किया जाएगा।

    राजस्थान में सितंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज करते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने सभी जिला कलक्टरों को वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अधिकृत कर दिया है। इस संबंध में विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य की 309 नगरीय निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। अधिसूचना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अग्रिम वर्ग की महिलाओं तथा महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण लॉटरी के माध्यम से कराने का अधिकार भी संबंधित जिला कलक्टरों को दिया गया है।

    15 अगस्त से 15 नवम्बर के बीच चुनाव
    लॉटरी के आधार पर वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायती राज विभाग व स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने की सिफारिश भेजी जाएगी। इसके आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग के अनुसार 15 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा।