Tag: Nitish Kumar

  • मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज, विजय चौधरी बोले- एनडीए में सब ठीक है

    मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज, विजय चौधरी बोले- एनडीए में सब ठीक है

    पटना

    मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के 12 दिन बाद जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अपनी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यहां पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। नीतीश कुमार के समर्थकों ने जमकर उनके समर्थन में नारेबाजी की। इसी बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार पर बनाए गए गीतों को बजाया। इन गीतों को सुनकर नीतीश कुमार ताली बजाने लगे और मंच पर बैठे लोगों से ताली बजवाई। नीतीश कुमार के साथ दोनों डिप्टी सीएम विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव भी मौजूद थे।

    भामाशाह जयंती पर नीतीश कुमार के पांच संदेश
    बताया जा रहा कि रविवार यानी 26 अप्रैल को भामाशाह जयंती पर जदयू दफ्तर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें ही नीतीश कुमार शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान जदयू कार्यालय में एक पंपलेट भी बांटा गया। इसमें भामाशाह के परिचय के अलावा नीतीश कुमार का संदेश भी लिखा था। इसमें नीतीश कुमार के हवाले से लिखा गया था कि मैं काम करता हूं, मेरा काम ही बोलता है। राजनीति सेवा के लिए है, मेवा के लिए नहीं। न्याय के साथ विकास यानी हर क्षेत्र और हर तबके का विकास। आधे मन से कोई बड़ा काम नहीं होता है। बिहार को मैं उस ऊंचाई पर ले जाना चाहता हूं, जहां से चाहकर कोई भी नीचे नहीं जा सकता है।

    निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर विजय चौधरी ने क्या कहा?
    इधर, नीतीश कुमार और अन्य नेताओं की भी जदयू समर्थक निशांत कुमार को भी खोज रहे थे। वह निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे थे। कुछ कार्यकर्ता तो उन्हें बिहार का अगला मुख्यमंत्री तक बता रहे थे। इसी बीच डिप्टी सीएम विजय चौधरी से कुछ पत्रकारों और निशांत कुमार और मंत्रिमंडल विस्तार पर सवाल पूछ लिया। उन्होंने कहा कि निशांत पार्टी में आ चुके हैं। वह काफी सक्रिय भी हैं। जदयू की पूरी टीम उन्हें पसंद करती है। मंत्रिमंडल विस्तार पर उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है। एनडीए में सबकुछ ठीक है। जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। 

  • ‘लव-कुश’ समीकरण पर फोकस: Nitish Kumar की रणनीति में सम्राट को ‘चौधरी’ बनाने का प्लान पहले से तैयार

    ‘लव-कुश’ समीकरण पर फोकस: Nitish Kumar की रणनीति में सम्राट को ‘चौधरी’ बनाने का प्लान पहले से तैयार

    पटना.

    नीतीश कुमार की एक-एक गतिविधि राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनती रही है। वह अनायस कोई बात आगे नहीं बढ़ाते। बिहार की राजनीति में इन दिनों वह पूरी सोची-समझी नीति के तहत लव-कुश समीकरण को आगे कर रहे। पिछले दिनों अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान जब वे चंपारण के इलाके में थे, तब वह लव-कुश पार्क गए थे।

    उस समय सम्राट चौधरी भी बतौर उपमुख्यमंत्री उनके साथ थे। दोनों ने पार्क में अपनी तस्वीर भी करायी। वह अनायास ही नहीं था। यहां से भी लव-कुश समीकरण को आगे किए जाने का साफ संदेश था। नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान नियमित रूप से सम्राट चौधरी साथ में रहे। इस दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के बारे में कई बार कहा कि अब यही लोग आगे संभालेंगे। कई तरह से उन्होंने इशारे में यह साफ किया था कि सम्राट को वह अपना उत्तराधिकारी बनाने की चाहत रखते हैं। जिस समय नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा को लेकर सक्रिय थे, उस समय उनके एग्जिट प्लान पर विशेष चर्चा नहीं थी। बाद के चरण में जब वह निकले तो राज्यसभा के लिए उनका नाम तय हो गया था। उस समय भी सम्राट चौधरी के साथ उनकी यात्राएं हुईं। बाद में यह चर्चा हुई कि सम्राट चौधरी ही मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार की पसंद हैं। शपथ ग्रहण के दिन सम्राट चौधरी ने जिस तरह से नीतीश कुमार का लोकभवन में अभिवादन किया, उस पर लोगों ने गौर किया।

    उपेंद्र कुशवाहा पर लगा चुके हैं दांव
    लव-कुश समीकरण को लेकर नीतीश कुमार अपने आरंभिक दिनों से ही सक्रिय दिखते रहे हैं। आरंभिक दिनों में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को आगे किया था। उन्हीं की पहल पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर आए उपेंद्र कुशवाहा को नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष बनाया। बाद के दिनों में कुशवाहा समाज से आने वाले उमेश कुशवाहा को उन्होंने जदयू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। जदयू के एक राष्ट्रीय महासचिव भी कुशवाहा समाज से बनाए गए। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद शनिवार को नीतीश सबुह 10.30 बजे के करीब सम्राट चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंच गए। उनके साथ नीतीश कुमार के विश्वस्त व उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी भी थे। यह भी अनायास नहीं था। जिस तरह से नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के साथ कई फ्रेम में तस्वीर करायी, उसमें उनका लव-कुश समीकरण स्पष्ट तौर पर झलक रहा था।

  • 20 साल के कार्यकाल पर विराम? नीतीश कुमार के फैसले पर सबकी नजर

    20 साल के कार्यकाल पर विराम? नीतीश कुमार के फैसले पर सबकी नजर

    पटना

     बिहार की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. बीते 20 साल से मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार आज अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. वे अब राज्यसभा सांसद बन चुके हैं. इससे पहले उन्होंने अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसमें सरकार को भंग करने की सिफारिश की गई.

    दोपहर 3:15 बजे इस्तीफा देंगे सीएम
    जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार दोपहर 3:15 बजे राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं. इसके साथ ही मौजूदा सरकार का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा.

    कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों की भावुक प्रतिक्रिया
    बैठक खत्म होने के बाद कई मंत्रियों ने इसे भावुक क्षण बताया. सभी ने नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल और उनके नेतृत्व की सराहना की.
    लखेंद्र पासवान बोले- बिहार को मजबूत बनाने का काम हुआ

    मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों का भरोसा जीता है और राज्य को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया है. उन्होंने कहा कि आगे भी नई सरकार में उनकी भूमिका मार्गदर्शक के रूप में रहेगी.
    लेसी सिंह ने बताया भावुक और गौरव का पल

    मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि यह पल भावुक होने के साथ-साथ गौरव का भी है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जैसे नेता के साथ लंबे समय तक काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही.

    रामकृपाल यादव हुए भावुक
    बैठक के बाद मंत्री रामकृपाल यादव भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि यह पूरे बिहार के लिए भावुक क्षण है. उन्होंने नीतीश कुमार के 20 साल के कार्यकाल को राज्य के विकास में महत्वपूर्ण बताया.

    बीजेपी विधायक बोले- बिहार के इतिहास में दर्ज होगा नाम
    बीजेपी विधायक विनोद नारायण झा ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि उनका नाम बिहार के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा और वे आगे भी मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे.

  • 20 साल बाद केंद्र की राजनीति में लौटे नीतीश कुमार, दिल्ली में शपथ ग्रहण के बाद अब बिहार में नई सरकार के गठन की हलचल तेज

    20 साल बाद केंद्र की राजनीति में लौटे नीतीश कुमार, दिल्ली में शपथ ग्रहण के बाद अब बिहार में नई सरकार के गठन की हलचल तेज

    पटना  

     बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण किया। सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों सदनों का सदस्य बनने रिकॉर्ड कायम कर लिया है। यह उपलब्धि सिर्फ राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने ही हासिल किया। चारों सदनों में बैठने वाले दूसरे सीएम नीतीश कुमार बने हैं। नीतीश कुमार गुरुवार को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा के साथ शपथ ग्रहण करने के लिए पटना से दिल्ली गए थे। आज शाम वे पटना लौट सकते हैं

    नीतीश कुमार ने आज से अपने राजनीतिक जीवन की नई पारी की शुरुआत कर दी है। अब वे पटना लौटेंगे और अपनी इच्छा से मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र देंगे।बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल को नीतीश कुमार अपने कैबिनेट की बैठक करेंगे और खरमास के बाद 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा सौंपेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनेगी। नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है।

    दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के कोर ग्रुप की आज शाम बैठक होने वाली है जिसमें सीएम चेहरा फाइनल किया जा सकता है। वैसे तो नित्यानंद राय, विजय कुमार, सिन्हा, संजीव चौरसिया, संजय जायसवाल, दिलीप जायसवाल, रेणू देवी समेत कई नामों की चर्चा सीएम पद की रेस में हो रही है लेकिन, सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है। माना जा रहा है कि सीएम फेस के चयन में नीतीश कुमार की इच्छा राय को प्रधानता दी जाएगी क्योंकि उनके बाद एनडीए के वोट बैंक को इनटैक्ट रखने के लिए नीतीश कुमार के सामाजिक समीकरण को बरकरार रखा जाएगा।

    दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के कोर ग्रुप की आज शाम बैठक होने वाली है जिसमें सीएम चेहरा फाइनल किया जा सकता है। वैसे तो नित्यानंद राय, विजय कुमार, सिन्हा, संजीव चौरसिया, संजय जायसवाल, दिलीप जायसवाल, रेणू देवी समेत कई नामों की चर्चा सीएम पद की रेस में हो रही है लेकिन, सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है। माना जा रहा है कि सीएम फेस के चयन में नीतीश कुमार की इच्छा राय को प्रधानता दी जाएगी क्योंकि उनके बाद एनडीए के वोट बैंक को इनटैक्ट रखने के लिए नीतीश कुमार के सामाजिक समीकरण को बरकरार रखा जाएगा।

    आज का शपथ ग्रहण नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में वापसी की शुरुआत है। 2005 में दिल्ली की राजनीति छोड़कर पटना गए और बिहार के सीएम बने। करीब 20 सालों की स्टेट पारी निभाने के बाद वे दिल्ली लौट रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह के समय उनके साथ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राज्यसभा सांसद संजय झा, बीजेपी सांसद जेपी, निर्मला सीतारमण, नड्डा, राजीव प्रताप रूडी, बिहार के मंत्री सम्राट चौधरी, अशोक चौधरी, विजय चौधरी, मंत्री जमा खान, रामनाथ ठाकुर समेत बीजेपी और जदयू के कई नेता मौजूद रहे। नीतीश कुमार के शपथग्रहण के बाद दिल्ली से पटना तक सियासी तपिश और बढ़ गई है।

  • बिहार को जल्द मिलेगा नया मुख्यमंत्री, नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद एनडीए में उत्तराधिकारी की रेस तेज

    बिहार को जल्द मिलेगा नया मुख्यमंत्री, नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद एनडीए में उत्तराधिकारी की रेस तेज

     पटना

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कैबिनेट बैठक बुलाई है. इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक उनके कार्यकाल की आखिरी कैबिनेट बैठक भी हो सकती है. यह बैठक मुख्य सचिवालय में होगी. इसमें सभी मंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल रहेंगे. इसमें कुछ महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लग सकती है.

    नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं. इसके बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा भी दे दिया है. जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे. इसके बाद वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिल सकते हैं.

    सत्ता परिवर्तन की आहट
    राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बिहार में जल्द ही सत्ता परिवर्तन हो सकता है. बताया जा रहा है कि एनडीए के अंदर नई रणनीति बन रही है और मुख्यमंत्री पद किसी नए चेहरे को दिया जा सकता है. भाजपा के सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, दिलीप जायसवाल और विजय कुमार सिन्हा के नाम इस दौड़ में सामने आ रहे हैं. अभी तक किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है.

    कब मिलेगा बिहार को नया सीएम?
    सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 13 अप्रैल के आसपास मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और इसके बाद 14 अप्रैल को एनडीए की बैठक में नए नेता का चयन हो सकता है. यह भी कहा जा रहा है कि 16 अप्रैल के बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है. इन सभी बातों पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि बिहार में बड़ा बदलाव होने वाला है.

  • क्या चुनाव से पहले जिला बनेगा बगहा, वाल्मीकि नगर दौरे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दे सकते हैं राजस्व जिले का बड़ा संकेत

    क्या चुनाव से पहले जिला बनेगा बगहा, वाल्मीकि नगर दौरे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दे सकते हैं राजस्व जिले का बड़ा संकेत

     वाल्मीकि नगर
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज यानी रविवार को वाल्मीकि नगर के दौरे पर आ रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर पूरे इलाके में जबरदस्त हलचल है। माना जा रहा है कि सीएम आज उत्तर बिहार के इस अहम पर्यटन केंद्र को करोड़ों रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण वाल्मीकि नगर हवाई अड्डे के विस्तार का शिलान्यास हो सकता है, जिससे अब बड़े विमानों की उड़ान का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

    हवाई अड्डे के लिए 38.64 करोड़ का प्लान
    सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 38.64 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसके तहत हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। वर्तमान में उपलब्ध जमीन के अलावा करीब 12 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण होना है। जैसे ही जमीन की प्रक्रिया पूरी होगी, निर्माण कार्य में तेजी आएगी। इससे न सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि पर्यटकों के लिए वाल्मीकि नगर पहुंचना और भी आसान हो जाएगा।

    2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे CM
    तय कार्यक्रम के मुताबिक, मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे और सीधे वाल्मीकि नगर पहुंचेंगे। वहां पहुंचकर वे 'मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा' के तहत दोन नहर सेवा पथ के बहाली कार्यों का जायजा लेंगे। इसके साथ ही गंडक नहर शाखा के निरीक्षण का भी प्रोग्राम है। इसके अलावा वे लव-कुश पार्क का निरीक्षण करेंगे और वाल्मीकि नगर सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। सीएम इको टूरिज्म पार्क और गिद्ध संरक्षण केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे।

    क्या बगहा बनेगा नया राजस्व जिला?
    सीएम के आगमन के साथ ही बगहा को 'राजस्व जिला' बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से पहले सीएम इस पर कोई बड़ा संकेत दे सकते हैं। फिलहाल, शनिवार को ही डीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हवाई अड्डे और कन्वेंशन सेंटर का बारीकी से निरीक्षण कर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

  • बिहार में इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार और नितिन नवीन का राज्यसभा में नया अध्याय शुरू

    बिहार में इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार और नितिन नवीन का राज्यसभा में नया अध्याय शुरू

    पटना
     बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज से अपने राजनीतिक जीवन के एक नए चैप्टर की शुरुआत किए। बिहार विधान परिषद की सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी विधानसभा सदस्यता छोड़ दिया। 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, इन दोनों नेताओं का अब उच्च सदन में जाना का फैसला किया। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इसलिए भी खास है क्योंकि वो अब उन गिने-चुने नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद इन चारों सदनों का प्रतिनिधित्व किया है।

    चारों सदनों के सदस्य बनने का गौरव
    नीतीश कुमार का विधायी सफर 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से शुरू हुआ था। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य बने। 2006 से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने वाले है।इस्तीफे से ठीक पहले रविवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर सरगर्मी तेज रही। जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेता मौजूद रहे। सीएम आवास में भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई।

    नीतीश कुमार का राजनीति करियर

    •     नीतीश कुमार ने 1985 में हरनौत (नालंदा) से पहली बार विधायक बनकर करियर की शुरुआत की। 1989 में बाढ़ (पटना) से पहली बार लोकसभा पहुंचे।
    •     नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार लागू किए।
    •     साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने 'सुशासन बाबू' के रूप में अपनी पहचान बनाई।
    •     शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण जैसे क्रांतिकारी फैसलों का श्रेय नीतीश कुमार को दिया जाता है।
    •     2026 में राज्यसभा निर्वाचित होने के साथ ही उन नेताओं में शामिल हो गए, जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों के सदस्य रहे हैं।

    नितिन का बांकीपुर से राज्यसभा तक का सफर
    भाजपा नेता नितिन नवीन भी आज विधानसभा की सदस्यता त्याग दिया। साल 2006 से लगातार बांकीपुर सीट (पटना) का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब वे राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बनेगी।

    माना जा रहा है कि इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। उनका वर्तमान विधान परिषद कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए उन्होंने समय से पहले ये पद छोड़ने का फैसला लिया।

    नीतीश कुमार का अनोखा रिकॉर्ड
    इस इस्तीफे के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली है। वह अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों (लोकसभा, राज्य सभा, विधानसभा और विधान परिषद) की सदस्यता ग्रहण की है।

    नितिन नवीन ने भी छोड़ी विधायकी
    इधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी बांकीपुर विधानसभा सीट से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को रविवार को ही दे दिया था, जो संजय सरावगी आज विधानसभा में जमा कराएंगे। नितिन नवीन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि वह अब राज्य सभा में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही बांकीपुर सीट अब रिक्त हो गई है, जहां जल्द ही उपचुनाव कराए जाएंगे।

    नितिन नवीन का राजनीतिक करियर

    •     नितिन नवीन ने अपने पिता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की राजनीतिक विरासत को संभाला और पटना की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
    •     2006 में पहली बार बांकीपुर सीट से विधायक बने। तब से लेकर 2026 में राज्यसभा के लिए चुने जाने तक, वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे।
    •     नितिन नवीन ने भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का अनुभव हासिल हुआ।
    •     बिहार में पथ निर्माण मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे और छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह-प्रभारी के रूप में भी सक्रिय रहे, जहां जबर्दस्त कामयाबी मिली।
    •     मार्च 2026 में बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद, अब वे विधानसभा की सदस्यता छोड़कर उच्च सदन में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं।

    रविवार को इस्तीफे का प्रोग्राम नितिन ने टाला
    नितिन नवीन के रविवार को ही इस्तीफा देने की सूचना थी। इसके लिए बिहार विधानसभा सचिवालय ने मीडिया को सूचना भी जारी कर दी। इसमें कहा गया कि सुबह 8:40 बजे नितिन नवीन विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिस में इस्तीफा सौपेंगे। मीडिया में खबरें भी आ गई। नितिन नवीन के इस्तीफे के लिए विधानसभा ऑफिस को रविवार को खोला गया। 

    नीतीश अब भी 6 महीने रह सकते हैं सीएम
    संविधान के मुताबिक राज्यसभा सदस्य बनने के 14 दिन में राज्य की सदस्यता छोड़नी होती है. इस हिसाब से उन्हें विधान परिषद से इस्तीफा देना पड़ रहा, क्योंकि अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो फिर उनकी एक सदस्यता खुद ही समाप्त हो जाती. एमएलसी पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पर बने रह सकते हैं. एक सांसद मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन 6 महीने के भीतर राज्य की सदस्यता लेना जरूरी होता है। 

    बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा, संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति बिना निर्वाचन के भी 6 महीने तक बिहार का मुख्यमंत्री रह सकता है.नीतीश कुमार को केवल विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना जरूरी है, मुख्यमंत्री पद से नहीं. वे चाहें तो अगले छह महीने तक सीएम पद पर बने रह सकते हैं. बावजूद इसके नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति करने का फैसला कर लिया है। 

    बीजेपी को लेना होगा तुरंत फैसला
    नीतीश के विधान परिषद से इस्तीफा देने के साथ ही उनके सियासी उत्तराधिकारी के चुनने की कवायद तेज हो जाएगी. सियासी गलियारों में नए मुख्यमंत्री को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही है. बीजेपी नेता और मौजूदा डिप्टीसीएम सम्राट चौधरी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदारों में एक माना जा रहा है, लेकिन बीजेपी अपने फैसले से हमेंशा चौंकाती रही है. यही वजह है कि किसी एक नाम पर बहुत दावे से नहीं कहा जा सकता है। 

    वहीं, निशांत कुमार को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं, संभावित सत्ता संतुलन और नए समीकरण पर मंथन जारी है, यह बदलाव केवल चेहरे का नहीं, बल्कि रणनीति का भी संकेत होगा. यह फैसला NDA की दिशा भी तय कर सकता है. जेडीयू के कुछ नेता उनके बेटे निशांत कुमार को उत्तराधिकारी मानते हैं. उनका मानना है कि निशांत में मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं. राजनीतिक विश्लेषक यह भी कहते हैं कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद नीतीश कुमार की भूमिका केवल औपचारिक रह सकती है। 

    जेडीयू के दांव पेच में उलझा गेम
    बीजेपी उम्मीद कर रही है कि नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के समापन के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ देंगे. बीजेपी की उम्मीद से विपरीत जेडीयू नेता अभी समय ले रहे हैं. जेडीयू ने इस दौरान समय का लाभ उठाते हुए रणनीतिक दांव-पेच खेल रही है और नीतीश के उत्तराधिकारी का चुनाव करते समय उसे पूरी तरह से विश्वास में लेने पर जोर दे रही है। 

    जेडीयू ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह मध्य प्रदेश या राजस्थान जैसी रणनीति नहीं अपनाना चाहती, जिसमें बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपेक्षाकृत कम जाने-माने नेताओं को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका दिया था. बीजेपी के एक दर्जन संभावित नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी उन्हीं की पसंद का होना चाहिए। 

    नीतीश की विरासत कौन बढ़ाएगा आगे
    बिहार नए मुख्यमंत्री को नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाना होगा और उनकी राजनीति के तौर-तरीकों का पालन करना होगा.जेडीयू का मानना है कि हम सरकार के सामाजिक गठबंधन को बिगड़ने नहीं देना चाहते. हम ऐसा नेता भी चाहते हैं जो निशांत कुमार का विश्वास जीत सके, जो अब राज्य की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं.  बिहार मध्य प्रदेश या राजस्थान नहीं है, जहां बीजेपी ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों के चयन से सबको चौंका दिया था। 

    बिहार में समाजवादी विचारधारा और ओबीसी की सियासी जड़ें काफी गहरी हैं. इसके अलावा बिहार में एनडीए की सरकार है, जिसमें लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे सहयोगी दल है. एनडीए के इन सहयोगियों को पूरी तरह से विश्वास को बनाए रखने वाले नेता की जरूरत है। 

    जेडीयू ने संकेत दिया कि यदि पार्टी को गठबंधन सहयोगी की भूमिका निभाने के लिए कहा जाता है, तो वह वर्तमान मंत्रिस्तरीय वितरण को पलटने पर जोर देगी और अध्यक्ष पद पर दावा करेगी. हालांकि, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद नए सरकार गठन के लिए जेडीयू से बीजेपी के विनोद तावड़े बातचीत कर रहे हैं. ऐसे में देखना होगा कि नीतीश कुमार की विरासत को कौन आगे बढ़ाएगा। 

  • बिहार की राजनीति में हलचल और नीतीश कुमार का एमएलसी पद से आधिकारिक इस्तीफा

    बिहार की राजनीति में हलचल और नीतीश कुमार का एमएलसी पद से आधिकारिक इस्तीफा

    बिहार

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्य यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया है. नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं और नियमानुसार एमएलसी पद छोड़ना जरूरी है.

    सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया
    सुबह सवा 10 बजे इसकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है. उनके इस इस्तीफे को लेकर सुबह से गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ था. पहले JDU की ओर से कहा गया था कि उनका इस्तीफा हमारे पास है.

    बाद में JDU नेता इस्तीफा लेकर सभापति के पास पहुंचे. उन्होंने कहा- सभापति आएंगे तो इस्तीफा उन्हें सौंपा जाएगा. सामने आया है कि नीतीश के इस्तीफ़े वाला लेटर लेकर एमएलसी संजय गांधी विधान परिषद पहुंचे थे और विधान परिषद में इस्तीफे का पत्र दिया. जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि, जेडीयू एमएलसी संजय गांधी इस्तीफे का पत्र लेकर परिषद पहुंचे हैं. उन्होंने मीडिया के सामने इस्तीफे वाला लेटर भी दिखाया था.
    नीतीश कुमार आगे आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देंगे. हालांकि नियम के तहत वह अभी छह महीने सीएम रह सकते हैं.

    क्यों बना हुआ है सस्पेंस?
    असल में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है. राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के बाद नियम के मुताबिक उन्हें परिषद की सदस्यता छोड़नी होती है. एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते है.
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक बिहार विधान परिषद के सदस्य थे. वह हाल ही में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हो चुके हैं. ऐसे में नीतीश कुमार को नियमानुसार एमएलसी पद से इस्तीफा देना अनिवार्य था. वह राज्यसभा की सदस्यता को अपने पास रखेंगे.
    मुख्यमंत्री पद कब छोड़ेंगे यह सवाल बना हुआ है.
    बता दें कि सीएम नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा देने की बात से रविवार शाम से ही बिहार की राजनीति में चर्चाएं होने लगी थीं. उनसे मिलने जेडीयू के कई नेता मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, मंत्री विजय कुमार चौधरी, मंत्री विजेंद्र यादव मंत्री, अशोक चौधरी सीएम हाउस पहुंचे थे.

  • नीतीश कुमार का जदयू पर फिर कब्जा, चौथी बार अध्यक्ष बनना लगभग तय

    नीतीश कुमार का जदयू पर फिर कब्जा, चौथी बार अध्यक्ष बनना लगभग तय

    पटना

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर से जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। आज शाम बाद प्रदेश कार्यालय में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मुमकिन है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आज समृद्धि यात्रा से लौटने के बाद प्रदेश कार्यालय में आएं ताकि कार्यकर्ता और नेता उनको चौथी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने बधाई दे सकें।

    इस वजह से बनेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष
    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्तमान में भी जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अब एक बार फिर चौथी बार भी वह निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। 22 मार्च को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन किया गया था और आज 24 मार्च तक नामांकन वापस लिए जाने का दिन था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावे किसी अन्य ने इस पद के लिए अपना नामांकन पर्चा नहीं भरा, इस वजह से यह साफ़ हो चुका है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगर इनके अलावे कोई अन्य नामांकन दाखिल करता तो 27 मार्च चुनाव होता, लेकिन ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी। अब राज्यसभा सदस्य रहते हुए वह पार्टी की बागडोर अपने ही हाथ में रखेंगे। इस बात की आधिकारिक घोषणा कुछ ही देर में कर दी जाएगी।

    निर्वाचन अधिकारीजारी करेंगे निर्वाचन प्रमाण पत्र
    जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आज. मंगलवार 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। नामांकन वापस लेने का समय समाप्त होने के बाद, निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष है, इसलिए निर्वाचन अधिकारी और राज्यसभा के पूर्व सांसद अनिल प्रसाद हेगडे आज दोपहर 2:30 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्वाचित होने का निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी करेंगे। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य सभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहेंगे।

    संजय झा ने भी जमा कराया था अपना नामांकन
    बताया जाता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रस्तावकों में से एक संजय झा ने भी पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में अपना नामांकन जमा कराया था। बिहार के मुख्यमंत्री नामांकन दाखिल करने के लिए दिल्ली नहीं आए थे। इस पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 मार्च थी, जबकि उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच 23 मार्च को की गई थी। राजीव रंजन सिंह के दिसंबर 2023 में पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले जेडीयू की कमान संभाली।

    क्या कहा था संजय झा और विजय चौधरी ने?
    इधर, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी ने कई बार कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा जाने की इच्छा हुई। इसलिए वह जा रहे हैं। यह नीतीश कुमार के खुद का फैसला है। हालांकि इस दौरान उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहेगा और पार्टी भी उनकी छाया में ही काम करेगी।

    मुख्यमंत्री ने पार्टी को क्या कहा?
    दरअसल, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव दिसंबर 2025 में ही होना था। लेकिन, विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव नहीं हो पाया। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महीने में राज्यसभा जाने की घोषणा कर दी। ऐसे में कयास लगने लगे कि सीएम नीतीश कुमार अब बिहार और पार्टी की बागडोर संभालना नहीं चाहते हैं। हालांकि, सीएम नीतीश कुमार ने अपने कार्यकर्ताओं से स्पष्ट कहा था कि आपलोग चिंता नहीं करें। मैं अब भी सक्रिय हूं और दिल्ली जाने के बाद भी आप सभी का मार्गदर्शन करता रहूंगा।

  • बिहार में नेतृत्व बदलने के संकेत? नीतीश कुमार के इशारे से सम्राट के नाम की चर्चा तेज

    बिहार में नेतृत्व बदलने के संकेत? नीतीश कुमार के इशारे से सम्राट के नाम की चर्चा तेज

    भागलपुर.

    राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद की पहली समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने उत्तराधिकारी के बारे में संकेत दे दिया। उनकी सभा बैजानी में थी। नीतीश ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई। केंद्र सरकार के सहयोग का बखान किया।लोगों को भरोसा दिया कि राज्य में आगे भी सबकुछ अच्छा रहेगा।

    कार्यक्रम के अंत में उन्होंने भीड़ से हाथ उठाने का आग्रह किया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री मंच पर अगल-बगल में खड़े थे। अन्य नेता भी खड़े थे।

    पीठ पर रखा हाथ, दूसरा हाथ हवा में लहराया
    मुख्यमंत्री मंच पर तेज कदम बढ़ाते हुए बढ़े। कई नेताओं को किनारे करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास पहुंचे। उनकी पीठ पर एक हाथ रखा। दूसरा हाथ हवा में लहरा दिया। सम्राट के दोनों हाथ जुड़ गए। भीड़ ने भीड़ से सम्राट चौधरी जिंदाबाद का नारा बुलंद किया। सम्राट के बगल में विजय चौधरी खड़े थे। इस सभा में एक तरह से नीतीश ने अपने उत्तराधिकारी का साफ संकेत दिया। भीड़ से उस पर मुहर भी लगवा दी। संयोग यह कि मंच का संचालन कर रही महिला ने भी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री कह कर संबोधित किया। प्राय: सभी समृद्धि यात्रा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी चोधरी जाते रहे हैं, लेकिन राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद की समृद्धि यात्रा के हरेक मंच पर सम्राट को पहले की तुलना में अधिक तरजीह मिल रही है।

    सीमांचल की यात्रा में भी दिखी थी ऐसी तस्वीर
    इससे पहले, सीमांचल की समृद्धि यात्रा में भी नीतीश ने सम्राट की पीठ पर हाथ रखकर भीड़ का अभिवादन करवाया था। जदयू के मंत्रियों में संसदीय कार्य एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को तरजीह मिल रही है। शपथ ग्रहण के क्रम के अनुसार नीतीश मंत्रिमंडल में सम्राट चौधरी को दूसरा स्थान प्राप्त है। वे नीतीश मंत्रिमंडल के पहले गृह मंत्री हैं।