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  • 1 अक्टूबर से जेब पर पड़ेगा असर! LPG सब्सिडी, बैंक चार्ज और प्रॉपर्टी टैक्स समेत 6 बड़े बदलाव

    1 अक्टूबर से जेब पर पड़ेगा असर! LPG सब्सिडी, बैंक चार्ज और प्रॉपर्टी टैक्स समेत 6 बड़े बदलाव

    पटना
     New rules October 2026: बिहार में 1 अक्टूबर से बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जिसका असर सीधा आम आदमी पर पड़ने वाला है। इस स्टोरी में हम कुछ प्रमुख बदलावों के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। बिना जानकारी के आपको नुकसान हो सकता है, तो आइए एक-एक कर इन बदलावों के बारे में जानते हैं…

    LPG सिलिंडर के लिए BAA अनिवार्य
    बिहार समेत पूरे देश के घरेलू एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत एलपीजी सिलिंडरों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA) कराना अनिवार्य हो गया है।

    अगर कोई उपभोक्ता तय समय सीमा तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं करता है, तो उसके गैसे सिलिंडरों की बुकिंग या आपूर्ति तो बंद नहीं होगी, लेकिन उसे सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ मिलना बंद हो जाएगा।

    अगर आपने BAA पहले ही पूरा कर लिया है तो दोबारा कुछ करने की जरूरत नहीं है। आपका रिफिल पहले की तरह जारी रहेगा।

    जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र में बदलाव
    जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम के नए प्रावधान लागू होंगे। नए नियमों के तहत, जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के अंदर भीतर रजिस्ट्रेशन फ्री और सरल रहेगा।

    वहीं, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र पंजीकरण में देरी होने पर अब नए प्रावधानों के तहत जुर्माने और कड़ी अनुमति का प्रवाधान है।

    एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर जन्म प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन के लिए उपजिलाधिकारी या जिलाधिकारी के कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी

    ऐसे में अब किसी की मौत होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र और जन्म होने पर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में बिल्कुल भी देरी न करें।

    SBI का कैश विदड्रॉल पर नया नियम
    अगर आपका भी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में अकाउंट है, तो नया नियम जानना बहुत जरूरी है। स्टेट बैंक ब्रांच के जरिए खोले गए 'बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट' से कैश निकालने के चार्ज में बदलाव कर रहा है।

    इसके तहत, 1 अक्टूबर से महीने में चार बार कैश निकालना फ्री रहेगा। इसके बाद आपको हर बार कैश निकालने पर 15 रुपये और उस पर लागू GST देना होगा।

    बल्क FD पर समान दरें
    बैंक अब एक ही शहर/क्षेत्र की अलग-अलग शाखाओं में बल्क एफडी पर अलग-अलग ब्याज दरें ऑफर नहीं कर सकेंगे। दरें सभी जगह समान और पारदर्शी होंगी।

    अब 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की FD बल्क डिपॉजिट मानी जाएगी। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बल्क FD पर बैंक अपनी जरूरत के हिसाब से अलग ब्याज दर तय कर सकेंगे।

    बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की फ्री सुविधा खत्म
    आधार कार्ड में  बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की फ्री सुविधा 30 सितंबर को खत्म हो रही है। 1 अक्टूबर से फिंगरप्रिंट, फोटो आदि के अपडेट करने के लिए 125 रुपये फीस देनी होगी। अगर फीस से बचना है, तो 30 से पहले अपडेट करा डालें।

    प्रॉपर्टी टैक्स पर जुर्माना
    पटना नगर निगम क्षेत्र के संपत्तिधारकों के लिए संपत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। इसके बाद एक अक्टूबर से बकाया कर की मूल राशि पर हर माह 1.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। बकाया जितने समय तक रहेगा, देनदारी उतनी ही बढ़ती जाएगी।

     

  • मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर पर नए नियम, 1 अप्रैल 2027 से BIS सर्टिफिकेशन होगा जरूरी

    मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर पर नए नियम, 1 अप्रैल 2027 से BIS सर्टिफिकेशन होगा जरूरी

    भारत सरकार ने मोबाइल फोन पर इस्तेमाल होने वाली स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए नियम का ऐलान किया है. नए नियम के तहत फोन डिस्प्ले पर लगने वाले प्रोटेक्टर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) को अनिवार्य कर दिया है. यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा.

    इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की तरफ से दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अधिसूचना के मुताबिक, मोबाइल फोन के डिस्प्ले पर इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर को उन सामानों की लिस्ट में शामिल किया है, जिनके लिए BIS सर्टिफिकेशन्स की जरूरत होती है.

    स्मार्टफोन के डिस्प्ले के लिए इस्तेमाल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर का नया नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. स्क्रीन प्रोटेक्टर को निर्धारित भारतीय मानक IS 19348:2025 का पालन करना होगा. रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत  BIS की मंजूरी के बिना ऐसे स्क्रीन प्रोटेक्टर को भारत में कानूनी रूप से बेचना संभव नहीं होगा.

    किन कंपनियों पर पड़ेगा सीधा असर
    मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर वाले नियम का सीधा असर उन कंपनियों और ब्रांड पर पड़ेगा, जो भारत में इंपोर्ट करने वालों पर पड़ेगा. नियमों के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मार्केट में सेल होने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर क्वालिटी और सेफ्टी मानकों को पूरा करते हैं.

    BIS स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए स्टैंडर्ड को सेट करेगा
    BIS के स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए स्टैंडर्ड तैयार किए जाएंगे, जिनको स्क्रीन प्रोटेक्टर मैन्यूफैक्चरर और सेलर को मानना होगा. इसके लिए जरूरी फीचर्स और टेस्टिंग को कंप्लीट करना होगा.

    इसमें स्क्रीन प्रोटेक्टर की थिकनेस और डाइमेंशन को तय किया जाएगा. साथ ही ग्लास की क्वालिटी, मजबूती का ध्यान रखा जाएगा. इसमें एंटी-शैटर फिल्म, ओलेओफोबिक कोटिंग, एंटी-ग्लेयर फिल्म, ब्लू-लाइट फिल्टर आदि के लिए नियम बनाएं जाएंगे.

    स्मार्टफोन यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर
    स्क्रीन प्रोटेक्टर के नए नियम आने के बाद स्मार्टफोन यूजर्स पर उसका क्या असर पड़ेगा. बिजनेस टुडे ने बताया है कि भारत में बिकने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर एक निर्धारित क्वालिटी स्टैंडर्ड को पूरा करेंगे. इसकी वजह से स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमत और अवेलेबिलिटी पर असर नजर आएगा. नए स्टैंडर्ड के तहत बनने वाले स्क्रीन प्रोटेक्टर महंगे की कीमत ज्यादा हो सकती है.

    भारतीय मार्केट में मौजूदा समय में ढेरों स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर ब्रांड और कंपनियां मौजूद हैं. इनमें से कुछ भारत में प्रोडक्शन करती हैं तो कई चीन और अन्य देशों से इंपोर्ट भी करते हैं.

  • हरियाणा कैबिनेट के बड़े फैसले, कोचिंग संस्थानों के नियम सख्त; स्टार्टअप और नर्सिंग होम नीति में बदलाव

    हरियाणा कैबिनेट के बड़े फैसले, कोचिंग संस्थानों के नियम सख्त; स्टार्टअप और नर्सिंग होम नीति में बदलाव

     चंडीगढ़
     मुख्यमंत्री नायब सैनी की अध्यक्षता में वीरवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम प्रस्ताव पास हुए। इनमें कोचिंग संस्थानों के लिए कड़े नियम, 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले विश्व बैंक वित्त पोषित वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम, रिहायशी कॉलोनियों में लीज पर नर्सिंग होम खोलने, महिला स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन योजना और शहरी क्षेत्रों के विकास से जुड़े लाइसेंस प्रक्रिया आसान बनाने को मंजूरी दी गई।

    प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर एनओसी सहित कई शर्तें जोड़ी
    दिल्ली और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए हादसों से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। नौकरियों, पेशेवर पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सभी निजी कोचिंग संस्थानों को अब नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा।

    छात्रों और अभिभावकों को रिझाने के लिए भ्रामक दावे नहीं किए जा सकेंगे। कोचिंग सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। स्कूल-कॉलेजों के समय के दौरान कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्रिमंडल की बैठक में "हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण और विनियमन) नियम, 2026" के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    छात्रों को देनी होंगी बुनियादी सुविधाएं
    छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं जैसे फर्नीचर, पर्याप्त रोशनी, पीने योग्य पानी, छात्र और छात्राओं के लिए अलग शौचालय और अग्नि-सुरक्षा उपायों जैसी सुविधाएं देनी होंगी।

    वहीं, चिकित्सा सहायता या प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट-एड), पार्किंग, पुस्तकालय, वाई-फाई, स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर प्रयोगशाला, छात्रावास और कैंटीन उपलब्ध करानी होंगी। संचालकों को बताना होगा कि भवन अपना है या लीज/किराए पर लिया गया है।

    अग्नि-सुरक्षा प्रमाणन, संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणन और क्या भवन विशेष रूप से सक्षम (दिव्यांग) छात्रों के लिए बाधा मुक्त है। इसके अलावा कर्मचारियों के चरित्र और पूर्ववृत्त (एंटीसिडेंट्स) के सत्यापन के संबंध में भी जानकारी देनी जरूरी होगी।

    पोर्टल के जरिये होगा पंजीकरण
    निजी कोचिंग संस्थान के साथ-साथ नया कोचिंग सेंटर खोलने के लिए नामित पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। पंजीकरण के लिए दस हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जो इलेक्ट्रानिक माध्यम से देय होगा।

    संबंधित प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर आवेदनों की जांच करेगा और आवेदन सभी प्रकार से पूर्ण पाए जाने पर, तीन साल के लिए वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करेगा

    पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए निजी कोचिंग संस्थान को अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र की समाप्ति से कम से कम एक महीने पहले 5,000 रुपये के नवीनीकरण शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। आवेदन की जांच और त्रुटियों को दूर करने (यदि कोई हो) के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर नवीनीकरण प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।

    वेबसाइट पर फीस, पाठ्यक्रमों की जानकारी देनी होगी
    पंजीकृत संस्थानों को निर्धारित रिकॉर्ड बनाए रखने और संबंधित प्राधिकरण को सालाना जानकारी प्रस्तुत करने के अलावा अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपेक्षित जानकारी अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    पाठ्यक्रमों और पाठ्यक्रम-सामग्री और शुल्क संरचना, कक्षाओं की संख्या और क्षमता, प्रति बैच अधिकतम छात्रों की संख्या, शिक्षण, परामर्शदाता और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता व बायोडाटा और छात्रों की संख्या के अनुपात में कोचिंग क्षेत्र के विवरण से संबंधित व्यापक जानकारी देनी जरूरी।

    वाटर सिक्योर हरियाणा: जल भविष्य को मिलेगी ताकत 45 लाख लोगों को सीधा
    लाभ

    मंत्रिमंडल की बैठक में विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को मंजूरी दी गई। 5,714.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस एकीकृत जल क्षेत्र कार्यक्रम से प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में करीब 45 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

    4,000.36 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ऋण और 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा। इसे 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा, जिनमें 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया शामिल है। नहर सिंचाई की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाने, भूजल दोहन कम करने, भूजल रिचार्ज बढ़ाने और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू होंगी
    सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड एरिया विकास प्राधिकरण के तहत करीब 900 करोड़ रुपये से 620 वाटरकोर्स का पुनर्वास होगा। 600 करोड़ रुपये से 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

    कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के स्तर पर करीब 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का वर्टिकल ड्रेनेज/सब-सर्फेस ड्रेनेज के जरिए सुधार किया जाएगा। 5 लाख एकड़ में डीएसआर (सीधी बिजाई) को बढ़ावा देने और ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत करीब 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

    104 नहर चैनलों की होगी मरम्मत
    रियल टाइम जल प्रबंधन को तकनीक से जोड़ते हुए नहरों के स्वचालित एवं रियल टाइम संचालन के लिए 20 एससीएडीए स्थान स्थापित किए जाएंगे। पानी के डिस्चार्ज और प्रवाह की निगरानी के लिए 400 आरटीडीएएस स्थान/माप बिंदु बनाए जाएंगे। इससे नहर संचालन, जल लेखांकन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने में मदद मिलेगी।

    सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तहत करीब 2,484.87 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 104 नहर चैनलों का पुनर्वास किया जाएगा। इससे करीब 8.75 लाख एकड़ कमांड एरिया (सीसीए) को लाभ मिलेगा। भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देने के लिए 248 करोड़ रुपये की लागत से 131 नए जलाशयों का निर्माण किया जाएगा

    अन्य स्टार्टअप्स के लिए फायदे
    निजी या एंजल निवेशक से 25 लाख जुटाने पर सरकार भी 25 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दे सकेगी। नई तकनीक का लाइसेंस लेने या टेक्नोलाजी ट्रांसफर के लिए 10 लाख तक सहायता मिलेगी। गुणवत्ता प्रमाणन पर खर्च की 50 प्रतिशत राशि, अधिकतम 25 लाख तक, एक बार वापस की जाएगी।

    एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर बनेगा
    विद्यार्थियों को 10 हजार ‘डू-इट-योरसेल्फ’ (डीआईवाई) किट बांटी जाएंगी। एच-हब नाम से विश्वस्तरीय इन्क्यूबेटर स्थापित किया जाएगा, जहां स्टार्टअप को आधुनिक सुविधाओं के साथ तकनीकी और कारोबारी सहयोग मिलेगा। विश्वविद्यालयों और पालीटेक्निक संस्थानों के विद्यार्थी स्टार्टअप में अप्रेंटिसशिप कर सकेंगे।

    पात्र स्टार्टअप को प्रति अप्रेंटिस 7,500 प्रतिमाह तक स्टाइपेंड का 50 प्रतिशत वापस मिलेगा। एक स्टार्टअप अधिकतम 50 अप्रेंटिस का लाभ ले सकेगा।

    टेक्नोलाजी स्टार्टअप के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज का खर्च भी नीति के दायरे में लाया गया है। हरियाणा आधारित स्टार्टअप भारत के किसी भी डेटा सेंटर पर हुए ऐसे खर्च का 75 प्रतिशत (अधिकतम ढाई लाख रुपये सालाना) पांच साल तक वापस ले सकेंगे।

    शहरी विकास से जुड़े लाइसेंस लेना होगा आसान
    कैबिनेट बैठक में हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन आफ अर्बन एरियाज रूल्स-1976 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। संशोधनों का मकसद लाइसेंस से जुड़े आवेदन, उनकी जांच, फैसले की सूचना और लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट बनाना है।

    यह बदलाव विधानसभा की अधीनस्थ विधान समिति की 2016-17 की 45वीं रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर किया गया है।

    लोगों को घर के नजदीक मिलेगी उपचार की सुविधा
    रिहायशी कॉलोनियों में लीज की जमीन पर भी नर्सिंग होम खोले जा सकेंगे। नए नर्सिंग होम के लिए डाक्टर के पास खुद की जमीन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

    बैठक में मौजूदा नीति में संशोधन को मंजूरी दी गई। इससे उन डाक्टरों को राहत मिलेगी, जो अपनी जमीन नहीं होने के कारण रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम शुरू नहीं कर पा रहे थे। लोगों को उनके घर के नजदीक ही उपचार और भर्ती की सुविधा मिल सकेगी।

    महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए विशेष पैकेज
    महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप के लिए नीति में विशेष पैकेज रखा गया है। उन्हें एक साल तक लीज रेंट का 50 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख रुपये तक वापस मिलेगा। सात साल तक नेट एचजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति होगी। इसकी सीमा फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट के 100%तक रहेगी।

    सामान्य स्टार्टअप के लिए नेट एचजीएसटी की 50% प्रतिपूर्ति सात साल तक जारी रहेगी। महिला उद्यमियों के हस्तशिल्प, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य एवं वेलनेस उत्पाद तथा स्थानीय खाद्य उत्पादों के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक माइक्रो-ग्रांट भी दिए जाएंगे।

    इन डॉक्टरों को मिलेगा लाभ
    आयुष और एलोपैथिक दोनों पद्धतियों के योग्य चिकित्सक रिहायशी प्लाट पर नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे। प्लाट डाक्टर के नाम होना जरूरी नहीं बल्कि वह उसे लीज पर लेकर भी सुविधा शुरू कर सकेगा।

    इसके लिएकन्वर्जन चार्ज देना अनिवार्य होगा। प्लाट पर नर्सिंग होम चलाने के लिए अनुमति लीज की अवधि तक ही वैध रहेगी। डाक्टर के पास संबंधित मेडिकल काउंसिल या आयुष काउंसिल का वैध पंजीकरण नंबर होना चाहिए।

    हर 10वां सामान अब हरियाणा के स्टार्टअप से खरीदेगी सरकार
    कैबिनेट बैठक में हरियाणा स्टेट स्टार्टअप पालिसी-2022 के सप्लीमेंट को मंजूरी दी गई। कारपोरेट सेक्टर को भी स्थानीय स्टार्टअप के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    सरकारी खरीद में अब प्रदेश सरकार हर दसवां सामान प्रदेश के स्टार्टअप से खरीदेगी। कोई निजी या एंजल निवेशक स्टार्टअप में 25 लाख रुपये लगाता है तो सरकार भी इतनी ही मैचिंग ग्रांट देगी। कारपोरेट कंपनियां किसी स्टार्टअप के साथ पायलट प्रोजेक्ट शुरू करती हैं और उसे आगे बढ़ाकर वास्तविक अनुबंध में बदलती हैं तो सरकार 10 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट देगी।

    ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ के मुख्य बिंदु
        कार्यक्रम की अनुमानित लागत – 5,714.80 करोड़ रुपये
        विश्व बैंक से ऋण- 4,000.36 करोड़ रुपये
        राज्य सरकार का हिस्सा- 1,714.44 करोड़ रुपये
        संभावित प्रत्यक्ष लाभार्थी – 45 लाख प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टर- 15
        प्रदेश में इस समय सिंचाई योग्य कमांड एरिया- 48.94 लाख एकड़।

    किसानों के लिए क्या बदलेगा?

    •     सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
    •     नहरों में पानी की संचरण हानि कम करने पर जोर होगा।
    •     सूक्ष्म सिंचाई से पानी के अधिक दक्ष उपयोग को बढ़ावा।
    •     डीएसआर और फसल विविधीकरण से कृषि क्षेत्र में पानी की मांग घटाने का प्रयास होगा।
    •     जलभराव वाली भूमि के सुधार से कृषि क्षेत्र के उपयोग में मदद।
    •     भूजल रिचार्ज और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से जल स्रोतों पर दबाव कम होगा।
    •     जलवायु चुनौतियों के बीच किसानों की आय को अधिक टिकाऊ बनाने पर जोर रहेगा।
  • चंडीगढ़ में नई व्यवस्था: किराया, जमीन रिकॉर्ड और फायर सेफ्टी नियमों में सख्ती

    चंडीगढ़ में नई व्यवस्था: किराया, जमीन रिकॉर्ड और फायर सेफ्टी नियमों में सख्ती

    चंडीगढ़

     पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में पांच नए कानून लागू किए गए हैं. प्रशासन की तरफ से 6 मई से लागू किए गए इन कानूनों के बाद अब रेंट एग्रीमेंट, फायर सेफ्टी, जमीन रिकॉर्ड, स्टांप ड्यूटी और इमिग्रेशन कारोबार से जुड़े नियम पूरी तरह बदल जाएंगे.

    चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने गुरुवार को यह जानकारी दी है.
    मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने बताया कि प्रशासन ने पंजाब इंडियन स्टांप (संशोधन) अधिनियम-2001 व 2003, पंजाब आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) अधिनियम-2021, पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट-2012 व संशोधन अधिनियम-2014, हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022 और असम टेनेंसी एक्ट-2021 को चंडीगढ़ में लागू किया है. उन्होंनेबताया कि तीन कानून पंजाब, एक हरियाणा से और रेंट कंट्रोल व्यवस्था के तहत असम टेनेंसी एक्ट लागू किया गया है.

    चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट-2021 लागू होने के बाद कौन सा पुराना कानून समाप्त हो गया?
        A पंजाब इंडियन स्टांप एक्ट-2001

        B ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट-1949

        C हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022
     
        D पंजाब आबादी देह रिकॉर्ड ऑफ राइट्स अधिनियम-2021

    नए कानून की वजह से अब चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट-2021 लागू होने पर ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट-1949 खत्म हो गया है.

    रेंट एग्रीमेंट कानूनः चंडीगढ़ मे अब मकान मालिकों को किरायेदारों के साथ रेंट एग्रीमेंट करना अनिवार्य कर दिया है. प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा. प्रशासन ने बताया कि पोर्टल अगले एक महीने में शुरू होगा. तब तक लोग फिजिकल दस्तावेज जमा कर पंजीकरण कर सकते हैं. रेंट विवाद के निपटारे के लिए रेंट कंट्रोल अथॉरिटी और ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे और सुनवाई जिला स्तर के जज करेंगे. अहम बात है कि अब मकान मालिक मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे. किराया के विवाद 60 दिन में निपटाए जाएंगे. वहीं, मकान मालिकों को भी अवैध कब्जों से राहत मिलेगी.

    फर्जी ट्रैवल एजेंटों पर कसेगा शिकंजा
    चंडीगढ़ मेंने पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट-2012 और संशोधन अधिनियम-2014 भी लागू कर दिया है. गौर रहे कि बहुत से लोग कबूतरबाजी को लेकर शिकायतें देते हैं. ऐसे में अब बिना  रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के इमिग्रेशन ऑफिस या ट्रैवल एजेंट काम नहीं कर पाएंगे. अगर नियम तोड़ा तो तीन से सात साल तक की सजा होगी. दोषी मिलने पर संपत्ति भी अटैच की जाएगी. सभी ट्रैवल एजेंटों और इमिग्रेशन कंपनियों को अपने स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन करनी होगी.

    स्टांप चोरी की तो जुर्माना लगेगा
    पंजाब इंडियन स्टांप संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद चंडीगढ़ में अब प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त में अंडर वैल्यूएशन पर सख्ती की जेगी. नए कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संपत्ति की वास्तविक कीमत छिपाकर कम स्टांप ड्यूटी भरता है तो उस पर संपत्ति की वैल्यू का तीन प्रतिशत जुर्माना लगेगा.

    गांवों की आबादी देह जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड
    पंजाब आबादी देह (रिकॉर्ड ऑफ राइट्स) अधिनियम-2021 लागू होने के बाद अब गांवों की आबादी देह वाली जमीनों का रिकॉर्ड लोगों के नाम से तैयार होगा. अभी तक ये जमीनें केवल खसरा नंबरों के आधार पर दर्ज थीं. इसके तहत हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. इससे जमीन संबधी विवाद कम हो जाएंगे.

    फायर सेफ्टी सर्टिफिकेटः चंडीगढ़ ने हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट-2022 को लागू किया है और इससे अब सेफ्टी सर्टिफिकेट की वैधता पांच साल लागू होगी. अब फायर सेफ्टी अप्रूवल टाइम-बाउंड तरीके से होगे. आधुनिक फायर सेफ्टी उपकरणों होने के बाद ही एनओसी मिलेगी.