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  • सीमा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, सिद्धार्थनगर में IB का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी; 4 जगह जमीन प्रस्तावित

    सीमा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, सिद्धार्थनगर में IB का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी; 4 जगह जमीन प्रस्तावित

    शोहरतगढ़
     भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो की इकाइयों के लिए भूमि चिह्नित की गई है। ककरहवा, खुनुआ, बढ़नी और डुमरियागंज में कार्यालय व आवास के लिए भूमि प्रस्तावित है। ककरहवा के भाटिनपार और खुनुआ 0.3000-0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। डुमरियागंज के रूदौलिया बुजुर्ग में भी 0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है।

    बढ़नी क्षेत्र के मधवापुर में 0.1052 हेक्टेयर भूमि आवास निर्माण तथा ढेबरुआ में 0.0910 हेक्टेयर भूमि कार्यालय निर्माण के लिए प्रस्तावित है। ककरहवा और डुमरियागंज की भूमि का निरीक्षण हो चुका है। खुनुआ में चिह्नित स्थल का शीघ्र निरीक्षण कराकर उपयुक्त पाए जाने पर पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। इससे सीमापार गतिविधियों पर स्थानीय निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।

    सीमा सुरक्षा के लिहाज से अहम पड़ाव
    जनपद में भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर की सीमा पूरी तरह से खुली होने के कारण सिद्धार्थनगर का सीमावर्ती क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। खुनुआ और बढ़नी, ककरहवा जैसे प्रमुख सीमा बिंदुओं के आसपास आइबी इकाइयों की स्थापना से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है।

    दो वर्षों के बीच खुनुवा एवं ककरहावा के रास्ते कई विदेशी भारत में प्रवेश करते हुए पकड़े गए हैं। इसको लेकर सीमा की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। बब्बर खालसा ग्रुप, इंडियन मुजाहिदीन ग्रुप से जुड़े आतंकी भारत-नेपाल के बढ़नी बार्डर से पकड़े भी जा चुके हैं।

    खुली सीमा के चलते दुश्मन देश भारत-विरोधी गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। आतंकी संगठन बिहार और उत्तर प्रदेश के नेपाल से सटे इलाकों में उनकी नापाक गतिविधियों को बढ़ाने नए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े किए जाने की आशंका है, जिसके जरिए भारत में अशांति फैलाई जा सके। नेपाल से सटे इलाकों में कट्टरपंथी गतिविधियों में काफी इजाफा नजर आ रहा है।

    बढ़नी बार्डर पर मिल चुका है पाकिस्तान कनेक्शन

    1993 में बढ़नी में भारत-नेपाल सीमा पर अजमेर सिंह व भाग सिंह नामक उग्रवादी पकडे़ गए। वर्ष 2010 में बढ़नी बार्डर से इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी सलमान उर्फ छोटू को एटीएस ने पकड़ा था। वर्ष 2013 में बिहार के रक्सौल से इसी आतंकी संगठन का मास्टर माइंड अब्दुल करीम टुंडा पकड़ा गया था।

    पूछताछ में बढ़नी के आसपास रहकर देश विरोधी गतिविधि चलाने की बात सामने आई थी। इसी बीच इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े आतंकी यासिन भटकल को पकड़ा गया था। इसके अलावा पड़ोसी जनपद महराजगंज से हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी नासिर को पकड़ा गया था। बब्बर खालसा का खतरनाक उग्रवादी मक्कन सिंह भी बढ़नी में पकड़ा गया था

     

     

  • नेपाल में फिर प्राकृतिक आपदा का कहर, सैकड़ों घर तबाह; 21 की मौत

    नेपाल में फिर प्राकृतिक आपदा का कहर, सैकड़ों घर तबाह; 21 की मौत

    काठमांडू

    नेपाल में चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. जबकि पांच लोग लापता हैं और पांच अन्य घायल हो गए. भीषण बारिश, भयंकर तूफान, बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन से देश के कुछ हिस्से बुरी तरह प्रभावित हुए । 

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के एक ऑफिशियल अपडेट के मुताबिक लैंडस्लाइड की वजह से ज़्यादातर मौतें हुई. इस दौरान 14 लोगों की मौत हो गई और पांच लोग लापता हैं. बाढ़ की वजह से चार मौतें हुई, जबकि लगातार भारी बारिश की वजह से तीन मौतें हुई। 

    खराब मौसम ने देशभर में 247 परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया, जिससे कई घर पूरी तरह से तबाह हो गए और 80 अन्य को आंशिक नुकसान हुआ. एनडीआरआरएमए ने बताया कि यह बंगाल की खाड़ी से बने एक कम दबाव वाले सिस्टम के बाद हुआ है, जिससे 24-27 सितंबर तक कई इलाकों में बहुत ज़्यादा बारिश हुई। 

    3000 लोगों सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया गया

    एनडीआरआरएमए ने पुष्टि की कि बढ़ते जल स्तर और भूस्खलन के मद्देनजर इमरजेंसी टीमों ने लगभग 3,000 निवासियों को ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों से सुरक्षित इलाकों में पहुंचाया. सशस्त्र पुलिस बल इकाइयों और स्थानीय अधिकारियों के साथ बचाव कार्यों में विस्थापित परिवारों को खाना और जरूरी राहत दी गई. जाजरकोट, म्याग्दी और संखुवासभा के बुरी तरह प्रभावित पहाड़ी जिलों में फंसे हुए लोगों को इमरजेंसी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करके निकाला गया। 

    9000 विदेशी पर्यटकों और ट्रेकर्स

    आपदा प्राधिकरण ने बताया कि बारिश के दौरान नेपाल में लगभग 9,000 विदेशी पर्यटकों और ट्रेकर्स के सक्रिय होने का अनुमान है. नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसियों के साथ मिलकर एनडीआरआरएमए ने अंग्रेजी में सुरक्षा सलाह जारी की, जिसमें कमजोर इलाकों में पर्यटकों को आश्रय लेने और हालात सुधरने तक यात्रा रोकने की सलाह दी गई। 

    106 जगहों पर 100 एमएम से अधिक बारिश

    एनडीआरआरएमए के मॉनिटरिंग स्टेशनों ने चार दिनों में देश भर में 106 जगहों पर 100 एमएम से ज़्यादा बारिश रिकॉर्ड की. सबसे ज़्यादा बारिश दुमकुआली, नवलपरासी (बरदाघाट सुस्ता ईस्ट) में हुई, जहाँ 455.2 एमएम बारिश हुई. इसके बाद कास्की के पोखरा में 407.2 एमएम और तनहुन के अंबू खैरेनी में 373.2 एमएम बारिश हुई। 

    तूफान के पीक के दौरान सुरक्षा जोखिमों को मैनेज करने के लिए एनडीआरआरएमए के सेंट्रल मॉनसून रिस्पॉन्स कमांड सेंटर ने लोकल अधिकारियों को कमज़ोर सड़क हिस्सों पर गाड़ियों का ट्रैफ़िक रोकने का निर्देश दिया और प्रभावित जिलों में स्कूलों की छुट्टियां घोषित कर दी। 

    5000 से ज्यादा डायरेक्ट एसएमएस अलर्ट

    एजेंसी ने फील्ड रेस्पॉन्डर्स को 5,000 से ज़्यादा डायरेक्ट एसएमएस अलर्ट भी भेजे जबकि बाढ़ संबंधित विभाग ने बाढ़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को 814,000 से ज़्यादा अर्ली-वॉर्निंग टेक्स्ट मैसेज भेजे. एनडीआरआरएमए की प्रवक्ता शांति बसनेट ने कहा कि सभी 77 जिलों में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस और तीनों नेशनल सिक्योरिटी एजेंसियां ​​हाई अलर्ट पर हैं क्योंकि डेटा कलेक्शन और रिकवरी की कोशिशें जारी हैं। 

    दिन में पहले शेयर किए गए एक अलग अपडेट में एनडीआरआरएमए ने लैंडस्लाइड से हुई रुकावटों के कारण बड़ी नदी बेसिन के किनारे रहने वाली आबादी के लिए हाई-अलर्ट एडवाइजरी जारी की. अथॉरिटी ने बताया कि मनांग के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर चामे में लैंडस्लाइड से मार्सयांगडी नदी के पानी के बहाव में रुकावट आई। 

    इसी तरह मस्तंग में थासांग रूरल म्युनिसिपैलिटी के वार्ड 3 में स्थित निसी में एक और लैंडस्लाइड ने काली गंडकी नदी के बहाव को थोड़ा रोक दिया. एनडीआरआरएमए ने दोनों नदियों के निचले इलाकों में रहने वालों से बहुत ज़्यादा सावधान रहने को कहा है, क्योंकि अधिकारी संभावित फ्लैश फ्लड के खतरों पर नजर रख रहे हैं। 

    उफान पर नारायणी नदी

    अधिकारियों ने रविवार सुबह सेंट्रल नेपाल में नारायणी नदी के किनारे रहने वाले सभी लोगों के लिए चेतावनी जारी की, क्योंकि नदी 9 मीटर के चेतावनी लेवल को पार कर बस्तियों में घुस गई थी. चितवन जाने वाले हाईवे, जो पूरे देश में आने-जाने का रास्ता है, भी बंद हैं, और कई जगहों पर लैंडस्लाइड की खबर है। 

    अधिकारी के मुताबिक कई जगहों पर लैंडस्लाइड की वजह से सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में रुकावट आई है, जबकि लगातार बारिश से हालत और खराब हो रहे हैं. विलेज काउंसिल के डिप्टी चेयरपर्सन प्रेम बहादुर घरती मगर ने एएनआई को फोन पर बताया, 'बागलुंग जिले के निशिखोला विलेज काउंसिल में लैंडस्लाइड में दबने से चार लोगों की मौत हो गई। 

    जिले से होकर बहने वाली कालीगंडकी नदी भी घरों और पुलों को बहा ले गई जिससे रोड कनेक्टिविटी कट गई है. बाढ़ और बाढ़ के खतरे के बाद कई जिलों में सिक्योरिटी फोर्स लोगों को निकाल रही हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जा रही है। 

    इसके अलावा नेपाल एक और मुसीबत से जूझ रहा है, क्योंकि नेपाल के ऊंचाई वाले मनांग जिले में हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में हिमस्खलन के बाद दो लाशें बरामद हुई. एनडीआरआरएमए ने नेपाल पुलिस हेडक्वार्टर के जरिए एक्स पर एक पोस्ट में कन्फर्म किया कि मौके पर भेजे गए सर्च और रेस्क्यू कर्मचारियों ने ऊंचाई वाले कैंप में दो मरे हुए लोगों को बरामद किया। 

    हिमालयी देश में यह नई मुसीबत भोटेकोशी बाढ़ की त्रासदी के एक महीने बाद आई है, जिसमें अब तक 1400 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 6000 से ज़्यादा लोग लापता हैं. यह बाढ़ 26 अगस्त की सुबह रसुवा जिले में नदी किनारे की बस्तियों में आई, जिससे नुवाकोट और धाडिंग समेत आस-पास के इलाके तेज़ी से प्रभावित हुए। 

    इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान से इस घटना का असर साफ दिखता है. आठ चालू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (281 MW) और चार बन रहे (388 MW) डैमेज हो गए, जिससे 431.1 MW की जेनरेशन कैपेसिटी पर असर पड़ा. गलछी-बेत्रावती-रसुवागढ़ी रोड और पृथ्वी हाईवे के बड़े हिस्से या तो तबाह हो गए या बुरी तरह डैमेज हो गए। 

  • नेपाल बाढ़ ने छीनीं बुनियादी सुविधाएं, राहत शिविरों में महिलाओं को पैड-अंडरवियर तक के लिए जूझना पड़ा

    नेपाल बाढ़ ने छीनीं बुनियादी सुविधाएं, राहत शिविरों में महिलाओं को पैड-अंडरवियर तक के लिए जूझना पड़ा

    काठमांडू 

    नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है. घर उजड़ गए, सामान बह गया और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. लेकिन बाढ़ से बच निकलने के बाद भी महिलाओं की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। 

    AFP की ग्राउंड रिपोर्ट में नेपाल के राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की ऐसी परेशानियां सामने आई हैं, जिन पर आमतौर पर आपदा के दौरान कम बात होती है. महिलाओं के लिए पीरियड्स, साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े और प्राइवेसी जैसी रोजमर्रा की जरूरतें भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। 

    ‘पैड तो मिल रहे हैं, लेकिन अंडरवियर नहीं’

    AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, राहत शिविर में रह रही कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें सैनिटरी पैड मिल रहे हैं, लेकिन पहनने के लिए अंडरगारमेंट्स जैसी जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। 

    बाढ़ में घर और सामान खो चुकी महिलाओं के लिए यह समस्या और बड़ी हो गई है. पीरियड्स के दौरान सिर्फ पैड मिलना ही काफी नहीं होता. साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े बदलने की जगह और निजी स्वच्छता के लिए जरूरी सुविधाएं भी चाहिए होती हैं। 

    400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट
    AFP की रिपोर्ट में राहत शिविरों में सैनिटेशन की स्थिति भी सामने आई है. एक शिविर में 400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट होने की बात बताई गई है। 

    महिलाओं के लिए परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें टॉयलेट के साथ-साथ नहाने और कपड़े बदलने के लिए भी पर्याप्त प्राइवेसी चाहिए. लेकिन आपदा के बाद बनाए गए अस्थायी शिविरों में ये सुविधाएं अक्सर सीमित होती हैं। 

    बाढ़ ने छीन ली सिर्फ छत नहीं, निजी जिंदगी भी
    घर उजड़ने के बाद राहत शिविर में पहुंचना किसी परिवार के लिए राहत की शुरुआत हो सकती है, लेकिन महिलाओं की जिंदगी में कई निजी मुश्किलें वहीं से शुरू होती हैं। 

    घर में जिन चीजों को लेकर कभी सोचना नहीं पड़ता था, वही चीजें अब जरूरत बन जाती हैं- साफ कपड़े, अंडरगारमेंट्स, सैनिटरी पैड, साफ पानी और ऐसी जगह जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी निजी जरूरतें पूरी कर सकें। 

    AFP की रिपोर्ट इस बात को सामने लाती है कि आपदा राहत सिर्फ खाना, पानी और टेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हो सकती. महिलाओं की गरिमा और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों को भी राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाना जरूरी है। 

    जिंदगी बच गई, लेकिन सामान्य जिंदगी कब लौटेगी?
    बाढ़ से बच जाना निश्चित तौर पर सबसे बड़ी राहत है. लेकिन जिन लोगों ने अपना घर और सामान खो दिया है, उनके लिए सामान्य जिंदगी में लौटना लंबा सफर है। 

    राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की बातें इसी संघर्ष को सामने लाती हैं. उनके लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज खाना मिलेगा या नहीं. सवाल यह भी है कि वे कब फिर से अपने घर जैसी सुरक्षा, प्राइवेसी और सम्मान के साथ जिंदगी जी पाएंगी। 

    AFP की रिपोर्ट के जरिए सामने आई ये तस्वीर बताती है कि किसी आपदा का असर पानी उतरने के बाद भी लंबे समय तक लोगों की जिंदगी में बना रहता है। 

  • नेपाल में भारी तबाही के बीच बढ़ा मृतकों का आंकड़ा, 1,344 लोगों की गई जान

    नेपाल में भारी तबाही के बीच बढ़ा मृतकों का आंकड़ा, 1,344 लोगों की गई जान

    काठमांडू 

    नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 1,344लोगों की जान जा चुकी है और 5053 लोग लापता हैं. 32963 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 7570 घरों को नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 1,344 लोगों की जान जा चुकी है. पिछले हफ्ते आई फ्लैश फ्लड ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों को बुरी तरह प्रभावित किया. कई इलाकों में अब भी मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश जारी है। 

    मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी NDRF
    तबाही के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को ढूंढना है, जो अभी भी मलबे और कीचड़ के नीचे फंसे हो सकते हैं. इसी को देखते हुए भारत ने 11 सदस्यीय  NDRF तकनीकी टीम नेपाल भेजी है. यह टीम स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर उन जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है, जहां लोगों के दबे होने की आशंका है। 

    नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद, निचले इलाकों में अलर्ट
    नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी का रास्ता बंद होने से आसपास के क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी के आसपास और निचले क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    चिलिमे सुरंग में भारतीय टीम क्या कर रही है?
    भारतीय सुरंग बचाव दल ने शुक्रवार को चिलिमे सुरंग के अंदर अभियान चलाया। टीम का प्रयास सुरंग के पानी और मलबे से प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने और वहां फंसे लोगों की तलाश करने का है। भारी उपकरणों को सुरंग तक पहुंचाने और बचाव अभियान को गति देने के लिए एक अस्थायी ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है। टीम ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियां लगाई हैं, जबकि पानी और मलबे से बाधित हिस्सों में फ्लोट और पंप भी तैनात किए जा रहे हैं।

    रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी गांव के पास स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना का इलाका बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। सुरंग के कई हिस्से पानी और मलबे से बाधित हो गए थे, जिसके कारण वहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। अब भारतीय टीम सुरंग के अंदर आगे बढ़कर प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि खोज और बचाव अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।

     चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों के लिए बचाव अभियान, भारतीय टीम जुटी; मृतकों का आंकड़ा 1344 पहुंचा
    नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारतीय बचाव दल नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटा है। इसी क्रम में विशेष भारतीय सुरंग बचाव टीम ने चिलिमे सुरंग में अभियान तेज कर दिया है। वहीं शुक्रवार को नेपाल सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। इससे सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। वहीं इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1344 हो गई। प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी है।  

    कहां से कितने लोगों की हो चुकी है मौत कुल मौत – 1,344

        रसुवा: 140
        नुवाकोट: 184
        धादिंग: 67
        गोरखा: 73
        तनहुं: 38
        नवलपरासी पूर्व: 221
        नवलपरासी पश्चिम: 212
        चितवन: 359
        (विभिन्न मानव अंगों सहित)
        शिनाख्त कर सौंपे गए शवों की संख्या: 96
        घायलों की संख्या: 5,663
        लापता लोगों की संख्या: 5,053
        बचाए गए लोगों की संख्या: 13,095

    7570 घरों को हुआ नुकसान

        निजी घर: कुल 7570
        सरकारी संरचना: कुल 48 (35 पूर्ण क्षति, 13 आंशिक क्षति)
        विद्यालय: कुल 18 (11 पूर्ण क्षति, 7 आंशिक क्षति)
        स्वास्थ्य संस्था: कुल 7 (4 पूर्ण क्षति, 3 आंशिक क्षति)
        सड़क: 55 किलोमीटर पूर्ण क्षति पुल: कुल मोटरेबल 37 (33 पूर्ण क्षति) और 68 झोलुंगे (झूला) पुल

    26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़

    नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई और व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ। 

  • नेपाल में चमत्कार! 9 दिन बाद सुरंग से आई इंसानी आवाज, 2 लोगों का हुआ सफल रेस्क्यू

    नेपाल में चमत्कार! 9 दिन बाद सुरंग से आई इंसानी आवाज, 2 लोगों का हुआ सफल रेस्क्यू

    काठमांडू
    नेपाल में 26 अगस्त की फ्लैश फ्लड के नौ दिन बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया है. रेस्क्यू किए गए लोगों की पहचान मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महार्जन के तौर पर हुई है. शुक्रवार को पहले संजय साह को बाहर निकाला गया और उसके बाद कबीर महार्जन को भी सुरक्षित निकाल लिया गया। 

    यह रेस्क्यू तब संभव हुआ जब टीमों को सुरंग के अंदर से इंसानी आवाजें सुनाई दीं. रेस्क्यू टीम ने अंदर फंसे लोगों से कहा, "घबराएं नहीं, हम आपको बचाने आए हैं." इसके जवाब में अंदर से आवाज सुनाई दी। 

    इसके बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने ऑपरेशन तेज किया और सुरंग के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क स्थापित किया. रेस्क्यू टीमों को आशंका है कि अभी और लोग सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं, इसलिए तलाश जारी है। 

    26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने त्रिशूली नदी के पूरे कॉरिडोर में भारी तबाही मचाई थी. इस हादसे में 1,252 लोगों की मौत हुई और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के साथ प्रमुख सड़क संपर्क भी प्रभावित हुए. मुश्किल हालात के बीच रेस्क्यू टीमें लगातार सुरंगों और क्षतिग्रस्त ढांचों में फंसे दूसरे लोगों की तलाश कर रही हैं। 

    900 से ज्यादा हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता
    26 अगस्त को आई भयानक फ्लैश फ्लड ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी. बाढ़ के बाद 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता हो गए. इनमें से सैकड़ों के सुरंगों और जमीन के नीचे बने हिस्सों में फंसे होने की आशंका है। 

    रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में लापता करीब 500 कर्मचारियों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई गई है. बाढ़ शुरू होने के वक्त कुछ कर्मचारियों ने मदद के लिए आवाज लगाई थी. सुरंगों से बाहर निकलने में कामयाब कर्मचारियों ने भी बताया था कि उनके कई साथी अंदर फंसे हुए हैं। 

    ऑक्सीजन कम होने से बढ़ी चिंता
    रेस्क्यू ऑपरेशन लंबा खिंचने के बीच विशेषज्ञों को सुरंगों के अंदर ऑक्सीजन का स्तर कम होने की चिंता है. इससे अंदर फंसे लोगों के बचने की संभावना लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। 

    इस बीच, सुरंग के अंदर से एक से ज्यादा लोगों की आवाज सुनाई देना रेस्क्यू टीम और उनके परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आया है. नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें अब उन लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में जुटी हैं। 

  • नेपाल में तबाही के बाद भी जारी रेस्क्यू, 600 विदेशी लापता; 1,222 शव बरामद

    नेपाल में तबाही के बाद भी जारी रेस्क्यू, 600 विदेशी लापता; 1,222 शव बरामद

    काठमांडू 
    नेपाल में बाढ़ और आपदा के बाद राहत, बचाव और शवों की तलाश का अभियान लगातार जारी है. नेपाल पुलिस के ताजा अपडेट के मुताबिक, देशभर में अब तक 1,222 शव बरामद किए जा चुके हैं. वहीं 4,875 लोगों के लापता होने की जानकारी दर्ज की गई है. लापता लोगों में 601 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। 

    नेपाल पुलिस के मुताबिक, आपदा प्रभावित इलाकों में कुल 7,892 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. अभियान के दौरान 65 पुलिसकर्मी प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 पुलिसकर्मी अभी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। 

    पुलिस के अनुसार, बरामद 1,222 शवों में 406 पुरुष, 236 महिलाएं, 43 बालिकाएं और 34 बालक शामिल हैं. इसके अलावा 421 आंशिक मानव अंग और 82 ऐसे शव या अवशेष भी मिले हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है. अब तक 882 शवों का अंतिम प्रबंधन किया जा चुका है। 

    लापता लोगों में 2,924 नेपाली नागरिकों के बारे में उनके रिश्तेदारों ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दर्ज कराई है. वहीं 1,350 लोगों के लापता होने की सूचना सरकार के अलग-अलग निकायों को फोन के जरिए दी गई है. इसके अलावा 601 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दर्ज है। 

    6,006 लोगों का रेस्क्यू किया गया
    नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 6,006 लोगों को घायल अवस्था में बचाया या रेस्क्यू किया गया है. इनमें 4,666 पुरुष, 1,213 महिलाएं और 45 नाबालिग शामिल हैं. इसके अलावा 675 विदेशी नागरिकों को भी बचाया गया है. बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में फिलहाल 3,126 लोगों को रखा गया है। 

    1,022 मृतकों के DNA सैंपल से पहचान की कोशिश
    पहचान की प्रक्रिया भी जारी है. नेपाल पुलिस ने 553 ऐसे शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, जिनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है. अब तक 1,022 मृतकों के DNA सैंपल और 463 मृतकों के परिजनों के DNA सैंपल लिए गए हैं. DNA प्रक्रिया के तहत कुल 1,655 सैंपल दर्ज किए गए हैं. नेपाल पुलिस का कहना है कि प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव, शव बरामदगी, पहचान और राहत का काम लगातार जारी है। 

  • नेपाल में भीषण त्रासदी का खौफनाक मंजर, 8 दिन बाद भी मलबे में जिंदगी की तलाश; मृतकों की संख्या 1127

    नेपाल में भीषण त्रासदी का खौफनाक मंजर, 8 दिन बाद भी मलबे में जिंदगी की तलाश; मृतकों की संख्या 1127

     काठमांडू
    नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है. हादसे के आठवें दिन भी राहत और बचाव का काम जारी है. मलबे के बीच से अब भी लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इस आपदा में 1127 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। 

    नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 1,126 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें 31 बच्चे, 45 लड़कियां, 220 महिलाएं और 370 पुरुष शामिल हैं. इसके अलावा 460 मानव अवशेष भी मिले हैं. पुलिस के 7,572 जवान राहत और बचाव काम में लगे हैं. इनमें 65 पुलिसकर्मी भी प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 पुलिसकर्मियों का अब तक पता नहीं चल पाया है। 

    राहत और बचाव अभियान में 580 लोगों को बचाया गया है या घायल हालत में निकाला गया है. अब तक 55 शव उनके परिवारों को सौंपे जा चुके हैं। 

    दरअसल, यह हादसा 26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में हुआ था. तेज बारिश के बाद कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते पानी और मलबे ने गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया. कई जगहों पर घर, सड़कें और दूसरी इमारतें मलबे में दब गईं। 

    तीन महीने के लिए घोषित किया गया आपदा क्षेत्र
    नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाके को कम से कम तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया है. सरकार का कहना है कि इससे राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधन तेजी से पहुंचाए जा सकेंगे. साथ ही राहत टीमों की तैनाती भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। 

    सरकार अब बचाव के साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है. प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लगाए गए हैं. टीमें लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रही हैं. लापता लोगों के परिवार अभी भी अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। 

    चीन मीडिया ग्रुप (CMG) के एक रिपोर्टर ने सोमवार को हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाके का जायजा लिया. यह इलाका चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग-रसुवा सीमा चौकी के नेपाली हिस्से में है. आसमान से ली गई तस्वीरों में तबाही का बड़ा मंजर दिखाई दिया। 

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा चौकी के पास नेपाल की तरफ कई गांव और छोटे कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं. कई गाड़ियां और इमारतें गहरे मलबे में दब गई हैं. जहां कभी लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब चारों तरफ मिट्टी और मलबा नजर आ रहा है. कीचड़ से क्षेत्र में दलदल जैसे हालात बन गए हैं। 

    तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में स्याब्रुबेंसी भी शामिल है. यह शहर सीमा चौकी से सीधी दूरी में 10 किलोमीटर से भी कम दूर है. आपदा से पहले यहां काफी चहल-पहल रहती थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। 

    हेलीकॉप्टर से इलाके का जायजा लेने वाले रिपोर्टर का कहना है कि शहर में आम लोगों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी. वहां सिर्फ राहत और बचाव दल के सदस्य नजर आए. ये टीमें मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं। 

    आठ दिन बीतने के बाद भी बचाव अभियान थमा नहीं है. मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश लगातार जारी है. हर गुजरते दिन के साथ चुनौती बढ़ रही है. इसके बावजूद रेस्क्यू टीम का सर्च ऑपरेशन जारी है. चार हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है। 

    नेपाल बाढ़ में लापता पांच लोगों के शव भारत में मिले
    नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बहकर लापता हुए पांच नेपाली नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद हुए. मंगलवार को सभी शवों को सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया. मृतकों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. ये शव कुशीनगर के बरवा पट्टी और खड्डा इलाके से मिले थे. शवों को शाम करीब 4 बजे सोनौली लाया गया. इसके बाद नेपाल के बेलहिया थाने के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर हरिराम डांगी को सौंप दिया गया। 

    अधिकारियों के मुताबिक, शवों को नेपाल के बुटवल ले जाया गया है. वहां नेपाल पुलिस मृतकों की पहचान करेगी. इसके बाद शवों को उनके परिवारों को सौंपा जाएगा. नेपाल में लगातार हो रही बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग बह गए हैं. सीमा से लगे भारतीय इलाकों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। 

    नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण महाराजगंज में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. महाराजगंज में पिछले 24 घंटे में 33.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. जिले में अब तक कुल 655.5 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। 

    मंगलवार दोपहर 2 बजे गंडक नदी का अपस्ट्रीम जलस्तर 355.30 फीट और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 352.60 फीट दर्ज किया गया. रोहिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है. हालांकि महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर है. इसका जलस्तर नौ फीट पहुंच गया है. खतरे का निशान पांच फीट है. राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है. हालांकि ये नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं। 

    अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है. एसडीएम, तहसील अधिकारियों, सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. निचले और संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी पूरी रखने को कहा गया है.महाराजगंज और नेपाल से लगे इलाकों में सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं। 

  • चारों ओर तबाही, फिर भी खड़ा रहा मकान! नेपाल बाढ़ में बच गए घर के मालिक ने खोला मजबूती का राज

    चारों ओर तबाही, फिर भी खड़ा रहा मकान! नेपाल बाढ़ में बच गए घर के मालिक ने खोला मजबूती का राज

    काठमांडू 

    नेपाल में बीते दिनों आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान नुवाकोट जिले में स्थित एक घर अचानक पूरी दुनिया की नजर में आ गया। बाढ़ का पानी अपने साथ मिट्टी, बड़े पत्थर और मलबा लेकर तेजी से बह रहा था। आसपास के कई मकान और ढांचे बह गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन यह घर काफी हद तक खड़ा रहा। ऐसे में इस घर की मजबूती को लेकर काफी चर्चा हो रही है। घर के मालिक प्रकाश प्याकुरेल का कहना है कि यह 35-40 साल पुराना है और इसे काफी मजबूती से बनाया गया था।

    प्रकाश ने बताया कि इस घर में 6 लोग फंसे थे। मेरे घर के 5 लोग और एक पड़ोसी था। जब बाढ़ आने की सूचना मिली तब मैं अपनी शॉप पर था और दौड़कर घर आया। द लल्लनटॉप से बातचीत में प्रकाश ने कहा, ‘हम लोग अपने घर के फोर्थ फ्लोर पर चले गए। जब वहां भी पानी आने लगा तो हम लोग सबसे ऊपर चले गए। करीब डेढ़ या दो घंटे बाद पानी थोड़ा कम हुआ। तब जाकर पाइप लगाकर हम लोगों को रेस्क्यू किया गया।’ इस मुश्किल समय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब आपके पास जीवन का लास्ट समय होता है तो जो आप सोचते हैं, मैं भी वही सोच रहा था। ऐसा लग रहा था कि जिंदगी आज खत्म हो जाएगी। मेरा बेटा स्कूल गया था। मैं उसके बारे में सोच रहा था।

    घर के नीचे भी मजबूत राड डलवाए: मालिक
    प्रकाश प्याकुरेल ने बताया, 'यह पुराना घर है, करीब 35-40 साल पुराना होगा। उस टाइम सीमेंट और राड की क्वालिटी काफी अच्छी थी। इस घर को बनाने में काफी खर्चा किया था। यह घर रीवर साइट पर बनाया गया था। इसलिए इसके नीचे भी मजबूत राड डलवाए थे।' उन्होंने कहा कि यह घर वाकई मजबूत था। इसी घर में गोदाम था, जहां मेरी दुकान का सामान रखा हुआ था। इस बाढ़ में हमारा काफी नुकसान हुआ है। इससे रिकवर करने की कोशिश जारी है।

    सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर जब आसपास की इमारतें तबाह हो गईं तो यह घर कैसे बच गया? इंजीनियरिंग डेटा के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह मजबूत आरसीसी फ्रेम हो सकती है। यानी घर के कॉलम, बीम और नींव को स्टील और कंक्रीट की मजबूत संरचना से जोड़ा गया था। ऐसी संरचना तेज पानी और मलबे से पैदा होने वाले साइड के दबाव को बेहतर तरीके से सह सकती है। इसके अलावा घर की कॉम्पैक्ट बनावट और उसकी स्थिति भी अहम रही। माना जा रहा है कि बाढ़ की सबसे तेज धारा सीधे घर के बीच से नहीं टकराई, बल्कि उसका एक हिस्सा घर के आसपास से निकल गया।

  • नेपाल बाढ़ का भयावह मंजर! मृतकों की संख्या बढ़कर 734, हजारों लापता; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

    नेपाल बाढ़ का भयावह मंजर! मृतकों की संख्या बढ़कर 734, हजारों लापता; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

    काठमांडू 

    नेपाल में भयानक अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई है और लगभग 3000 लोग अभी लापता हैं. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह जानकारी मिली है. हिमालयी इलाके में खोज और बचाव अभियान का आज पांचवा दिन है. राहत और मेडिकल कामों में मदद के लिए एक सर्जिकल मेडिकल टीम भी तैनात की गई है, क्योंकि इमरजेंसी रिस्पॉन्स का काम जारी है. काठमांडू ने खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए 18,000 से ज़्यादा सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है, क्योंकि यह हिमालयी देश फंसी हुई आबादी तक पहुँचने और लापता लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है. चितवन में सबसे ज़्यादा 246 शव बरामद किए गए, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 165, नवलपरासी वेस्ट में 63, गोरखा में 57, नुवाकोट में 51, धाडिंग में 45, तनहुन में 35 और रसुवा में 13 शव मिले। गोरखा के आँकड़ों में इंसानी शरीर के कई अंग भी शामिल हैं. 2,498 लापता लोगों की सूची में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लोग, विदेशी नागरिक, आम नागरिक और सुरक्षा व सरकारी कर्मी शामिल हैं. हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स से 933 लोग लापता बताए गए हैं, जबकि 589 विदेशी नागरिकों का कोई पता नहीं चल पाया है। 

    प्रभावित इलाके में सेना का राहत कैंप मदद पहुंचा रहा है
    नेपाल के त्रिशूली के नुवाकोट में सैनिक इलाके में सेना का राहत कैंप मदद पहुंचा रहा है. वहीं हेलिकॉप्टर टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने के लिए समय के साथ होड़ कर रही हैं। 

    नेपाल में फंसे तमिलनाडु के 219 लोग लौटेंगे: मंत्री राजमोहन
    चेन्नई में राज्य के मंत्री राजमोहन ने कहा है कि नेपाल में बाढ़ में फंसे 219 तमिल लोगों को बचा लिया गया है और वे 31 अगस्त तक तमिलनाडु लौट आएँगे. मुख्यमंत्री विजय के आदेश पर मंत्रियों – आधव अर्जुन, राजमोहन, थेन्नारासु और विनोद – की एक टीम नेपाल में बाढ़ में फंसे तमिलनाडु के लोगों को बचाने के प्रयास में दिल्ली गई थी. वहाँ बचाव अभियान चलाने के बाद, मंत्रियों की यह टीम कल रात (29 अगस्त) दिल्ली से हवाई जहाज़ से चेन्नई लौट आई. एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री राजमोहन ने कहा, 'पिछले 3 दिनों से मुख्यमंत्री विजय के आदेश पर हम दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और नेपाल में फंसे तमिलों को बचाने के लिए कई तरह के काम कर रहे हैं. अभी, पड़ोसी तमिल कल्याण मंत्री थेन्नारासु दिल्ली में रुके हुए हैं और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं. हमने विधानसभा में बचाव कार्यों के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है. इसके बाद मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में एक आपातकालीन बैठक हुई। 

    बाढ़ पीड़ित सदमे से जूझ रहे हैं
    नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ से बचे लोग अब चोटों, थकान और कुछ ही मिनटों में अपनी ज़िंदगी को बर्बाद होते देखने के सदमे से जूझ रहे हैं. बहुत से लोगों ने नुवाकोट जिले के बिदुर में जिला आयुर्वेद अस्पताल में बनाए गए राहत शिविर में शरण ली है. कुछ बचे हुए लोगों ने उन डरावने पलों को याद किया जब पानी की तेज लहरें उनके घरों में घुस आई, उनका सामान बहा ले गई और बाढ़ के पानी में फँसे लोगों को यह भी पता नहीं चला कि वे कहां बहकर चले जाएंगे। 

    नेपाल में फंसे केरल के 36 लोगों का एक ग्रुप सुरक्षित लौटा
    नेपाल में अचानक आई बाढ़ में फंसे केरल के 36 लोगों का एक ग्रुप नेदुम्बसेरी लौट आया. इस ग्रुप ने नेपाल बॉर्डर से लगभग 100 किलोमीटर का सफर तय करके भारत में प्रवेश किया और गोरखपुर एयरपोर्ट पहुँचे, जहां से वे दो अलग-अलग फ़्लाइट से वापस लौटे। 

    कीचड़ और मलबे में दबे अपने सामान ढूंढ रहे लोग
    कुछ दिन पहले तक ये नेपाल के शांत पहाड़ी गाँव हुआ करते थे. आज, बचे हुए लोग कीचड़ और मलबे में बाढ़ के पानी से बची-खुची चीज़ें ढूंढ रहे हैं. इस भयानक अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही का असर पूरे इलाके में साफ दिख रहा है. देवीघाट में हुए नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. घर और दुकानें कीचड़ और मलबे की मोटी परतों के नीचे दबे हुए हैं. लोगों को मलबे में अपना सामान ढूंढना पड़ रहा है, जबकि वे अभी भी अपने लापता अपनों के बारे में खबर का इंतजार कर रहे हैं. बाढ़ का पानी तेजी से आने के उस डरावने पल को याद करते हुए बचे हुए लोगों ने बताया कि उन्हें भागने के लिए बहुत कम समय मिला था. उन्हें अपने घर और सामान वहीं छोड़ने पड़े जो बाढ़ में बह गए। 

    नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 724 हुई
    मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या रविवार को 724 हो गई, और भी शव बरामद किए गए हैं, जबकि इस आपदा के बाद से लगभग 2,500 लोग अभी भी लापता हैं. सभी आठ प्रभावित जिलों से शव बरामद किए गए हैं और बचाव दल आपदा के पांचवें दिन भी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए तेज़ी से काम कर रहे हैं। 

    भारत ने नेपाल में बचाव के सामान और फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ चौथी राहत उड़ान भेजी

    भारत ने रविवार को काठमांडू के लिए अपनी चौथी राहत उड़ान भेजी. इसमें नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए 11 टन जरूरी सामान और खास तौर पर प्रशिक्षित कर्मचारी भेजे गए. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव द्वारा घोषित इस राहत खेप में रहने और जीवित रहने के लिए जरूरी सामान शामिल था, जैसे कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट.मानवीय सहायता के अलावा, विमान में एक तकनीकी टीम भी भेजी गई जो खास तौर पर मुश्किल सुरंगों में खोज और बचाव कार्यों के लिए तैयार थी. डीएनए जांच के लिए खास उपकरणों से लैस फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम भी इस उड़ान से पहुंची, ताकि पीड़ितों की पहचान और फोरेंसिक जांच में स्थानीय अधिकारियों की मदद की जा सके. यह हालिया खेप संकट के समय नेपाल को तुरंत तकनीकी, चिकित्सा और सामग्री संबंधी सहायता प्रदान करने के भारत के लगातार प्रयासों का हिस्सा है. नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी भोटे कोशी नदी की बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्य तेज़ हो गए हैं, और भारत ज़मीन और हवा दोनों तरह से मदद बढ़ा रहा है। 

    अमेरिका ने 3.6 मिलियन डॉलर की राहत सामग्री देने का ऐलान किया
    नेपाल में भयानक बाढ़ का असर जारी है. इसे देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार (स्थानीय समय) को कहा कि वह हिमालयी देश को 3.6 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की जीवन-रक्षक मानवीय सहायता देगा. एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी कहा कि राहत सामग्री में बाढ़ से प्रभावित 10,000 परिवारों के लिए आपातकालीन खाद्य सहायता भी शामिल है. पोस्ट में कहा गया, 'अमेरिका नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है और 3.6 मिलियन डॉलर से ज़्यादा की जीवन-रक्षक मानवीय सहायता दे रहा है. इसमें बाढ़ से प्रभावित 10,000 परिवारों के लिए तीन महीने तक की आपातकालीन खाद्य सहायता भी शामिल है.' अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हुए पोस्ट में आगे कहा गया, 'अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा से ज़्यादा जरूरी हमारे लिए कुछ भी नहीं है. नेपाल और चीन में हमारे दूतावास अमेरिकियों की मदद करने और आपदा राहत कार्यों में सहयोग देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। 

    हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और सोलर प्लांट्स को बड़ा नुकसान पहुँचा
    नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और सोलर प्लांट्स को नुकसान पहुँचा है. त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सोलर प्लांट का बड़ा हिस्सा मलबे में दबकर नष्ट हो गया है। 

    भोटे कोशी नदी का जलस्तर फिर बढ़ा, नेपाल डिजास्टर अथॉरिटी ने हाई अलर्ट जारी किया
    नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार को भोटे कोशी नदी के बहाव और शोर में अचानक बढ़ोतरी की खबरों के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए एक जरूरी चेतावनी जारी की. अधिकारियों ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और राहत टीमों से बहुत सावधानी बरतने और सतर्क रहने को कहा है. एक्स पर पोस्ट की गई एक आधिकारिक जानकारी में नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने जमीनी स्तर पर स्थानीय अधिकारियों से मिली चेतावनियों का जिक्र किया. यह नई चेतावनी निचले इलाकों के उन तीन प्रमुख ज़िलों के लिए है जो 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए थे. रसुवा नदी के किनारे रहने वाले समुदायों, जिनमें नेपाल-चीन सीमा के पास के इलाके भी शामिल हैं, को जलस्तर पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया गया है. नुवाकोट और धाडिंग में नदी बेसिन के पास आपातकालीन सेवाओं और स्थानीय प्रशासन की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। 

  • नेपाल में शिक्षक बना फरिश्ता, जल-प्रलय से पहले 1,643 बच्चों को स्कूल से सुरक्षित निकाला

    नेपाल में शिक्षक बना फरिश्ता, जल-प्रलय से पहले 1,643 बच्चों को स्कूल से सुरक्षित निकाला

    काठमांडू 

    नेपाल में जब पहाड़ों से पानी, मलबा और पत्थर तेजी से नीचे उतर रहे थे, तब नुवाकोट जिले की त्रिशूली घाटी के एक स्कूल में 1,643 बच्चे मौजूद थे. हालात बिगड़ते देख कुछ ही मिनटों में फैसला लेना था. बच्चों को स्कूल में रखा जाए या तुरंत बाहर निकाला जाए. प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बिना देर किए स्कूल खाली कराने का फैसला किया. यही फैसला बाद में 1,643 बच्चों की जान बचाने वाला साबित हुआ। 

    बुधवार सुबह करीब 9:20 बजे दवाड़ी को एक दोस्त ने फोन किया. उसने बताया कि गांव नदी में बह चुका है और उन्हें तुरंत वहां से निकलने को कहा. दवाड़ी को पहले लगा कि त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल सुरक्षित है. तीन मंजिला पक्की इमारत नदी से करीब 60 मीटर ऊपर थी. लेकिन कुछ ही देर में हालात तेजी से बदलने लगे। 

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खतरे की आहट मिलते ही दवाड़ी ने बिना देर किए स्कूल की घंटी बजा दी. उन्होंने तुरंत शिक्षकों को सभी क्लासरूम खाली कराने को कहा. साथ ही बस ड्राइवरों को फोन करके गाड़ियां वहीं से वापस मोड़ने का निर्देश दिया, हालांकि एक बस को वे नहीं रोक पाए जो उस वक्त पुल पार कर रही थी. इधर खतरे को भांपकर बच्चे भी घबरा गए. एक बच्ची डर के मारे बेसुध होने लगी, जिसे फौरन बाइक से पहाड़ी की तरफ सुरक्षित भेजा गया. बाकी बच्चे पैदल ही ऊपर की ओर दौड़ पड़े, वहीं दवाड़ी सबसे पीछे रहे ताकि कोई बच्चा रास्ते में न छूट जाए. कुछ ही मिनटों में सभी बच्चे सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंच चुके थे। 

    फिर नदी ने निगल लिया पूरा स्कूल
    सभी बच्चे ऊंचाई पर लगे एक बोधि पेड़ के नीचे पहुंचकर सांस ले ही रहे थे कि सैलाब ने स्कूल को अपनी चपेट में ले लिया. देखते ही देखते पानी का तेज बहाव पूरी इमारत को बहा ले गया. जिस जगह थोड़ी देर पहले बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, वहां अब सिर्फ कीचड़, मलबा और पानी का खौफनाक मंजर था. दवाड़ी के समय रहते लिए गए फैसले ने 1,643 बच्चों और लगभग सभी शिक्षकों को सकुशल बचा लिया, लेकिन वे अपने दो साथियों को इस त्रासदी की भेंट चढ़ने से नहीं रोक सके। 

    इतिहास पढ़ाने वाले 32 साल के शिक्षक संतोष परियार सुबह खाना बनाने के लिए नदी किनारे अपने किराए के कमरे में लौटे थे. इसी दौरान तेज बहाव उन्हें अपने साथ ले गया. स्कूल के चौकीदार सुल्तान लामा की भी मौत हो गई. वह स्कूल के दरवाजे बंद करने के लिए वापस गए थे। 

    'मैं और क्या करता?'
    बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद पूरा इलाका दवाड़ी को किसी फरिश्ते की तरह देख रहा है, लेकिन वे खुद इसे कोई बड़ा काम नहीं मानते. मलबे में तब्दील हो चुके स्कूल के पास खड़े होकर वे बस इतना ही कहते हैं कि 'उस वक्त मैं और करता भी क्या?'  उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी कि पानी की मार से पहले मासूमों को महफूज़ जगह पहुंचाना है. चंद मिनटों में लिया गया उनका यही फैसला आज 1,643 घरों के चिराग बुझने से बचा गया। 

    घटना यह भी बताती है कि आपदा के समय सिर्फ बड़ी मशीनें या राहत दल ही जान नहीं बचाते. सही समय पर मिली जानकारी को समझना, तुरंत फैसला लेना और लोगों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। 

    बर्फ और चट्टान टूटने से आई थी बाढ़
    इस भीषण फ्लैश फ्लड की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पहाड़ों में हुई. लैंगटांग लिरुंग चोटी से बर्फ और चट्टान का बहुत बड़ा हिस्सा टूटकर करीब 1,200 मीटर नीचे लेंडे नदी की ऊपरी घाटी में जा गिरा। 

    इसके बाद पानी, बर्फ, पत्थर और मिट्टी का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा. रास्ते में जो आया, वह उसकी चपेट में आता गया. गांव, सड़कें, पुल और बिजली से जुड़ी कई परियोजनाएं बर्बाद हो गईं. भू-आकृति विशेषज्ञ डैनियल शुगर ने अनुमान लगाया कि टूटकर नीचे गिरा बर्फ-चट्टान का हिस्सा करीब 50 एकड़ में फैला था. यह क्षेत्रफल लंदन के ग्रीन पार्क के लगभग बराबर बताया गया है। 

    नेपाल पहले भी देख चुका है ऐसी त्रासदी
    इस इलाके के लोगों के लिए पहाड़ों से आने वाली यह तबाही कोई नई बात नहीं है. अप्रैल 2015 में 7.8 तीव्रता के भयानक भूकंप ने दक्षिण एशिया में 8,962 लोगों की जान ले ली थी. उस वक्त भी भूकंप के बाद गिरे हिमस्खलन ने लांगटांग की पूरी 300 लोगों वाली बस्ती को मलबे के नीचे दफन कर दिया था. लांगटांग आज के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले में आता है. इस बार फिर उसी हिमालयी इलाके में अचानक आई बाढ़ ने लोगों को संभलने का ज्यादा मौका नहीं दिया। 

    फर्क सिर्फ इतना रहा कि त्रिशूली घाटी के एक स्कूल में खतरे की खबर समय रहते पहुंच गई. राजेंद्र दवाड़ी ने उस खबर को गंभीरता से लिया, बच्चों को तुरंत बाहर निकाला. पानी स्कूल तक पहुंचा, लेकिन तब तक वहां कोई बच्चा नहीं था. यही कुछ मिनटों का फैसला इस आपदा की सबसे बड़ी बची हुई कहानी बन गया।