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  • दिव्यांगजनों के लिए बड़ा बदलाव, जन्म से 40% दिव्यांगता पर मिलेगी पेंशन सहायता

    दिव्यांगजनों के लिए बड़ा बदलाव, जन्म से 40% दिव्यांगता पर मिलेगी पेंशन सहायता

    नई दिल्ली

     केंद्र सरकार ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों, विशेषकर दिव्यांगजनों को बड़ी राहत दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 'राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम' (NSAP) को साल 2030-31 तक यानी अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है।इस फैसले से देश के करीब 3.20 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही दिव्यांग पेंशन के नियमों को आसान बनाते हुए पेंशन की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।

    अब 40% दिव्यांगता पर जन्म से ही मिलेगी पेंशन
    दिव्यांगजनों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि अब 40 प्रतिशत की दिव्यांगता वाले लोग जन्म से ही पेंशन के हकदार माने जाएंगे। इससे पहले पेंशन का लाभ लेने के लिए व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 वर्ष और दिव्यांगता का प्रतिशत 80 होना अनिवार्य था। नियमों में इस ढील से बड़ी संख्या में दिव्यांगों को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा।

    पेंशन की रकम में हुआ इजाफा
    केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नियमों को उदार बनाने के साथ ही सरकार ने पेंशन की राशि भी बढ़ा दी है। अब 0 से 79 वर्ष के आयु वर्ग के दिव्यांगों को 300 रुपये के बजाय 375 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। वहीं, 80 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों की पेंशन 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये कर दी गई है। यह राशि केंद्र सरकार का हिस्सा है; राज्य सरकारें इसमें अपनी तरफ से अलग-अलग राशि जोड़कर लाभार्थियों को भुगतान करती हैं।

    योजनाओं के नाम से हटा 'इंदिरा गांधी'
        कैबिनेट ने योजनाओं के नामकरण में भी अहम बदलाव किए हैं। अब इस पूरे कार्यक्रम को 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' कहा जाएगा। इसके तहत चलने वाली तीन प्रमुख योजनाओं दिव्यांग, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन से 'इंदिरा गांधी' का नाम हटाकर अब उनके आगे 'प्रधानमंत्री' शब्द जोड़ दिया गया है।

    सरकार इन योजनाओं पर अगले पांच सालों में कुल 53,428 करोड़ रुपये खर्च करेगी। हालांकि, वृद्धावस्था, विधवा और पारिवारिक लाभ योजनाओं की बुनियादी शर्तों में कोई और बदलाव नहीं किया गया है।

    11.40 लाख रेलकर्मियों को भी त्योहारी तोहफा
    कैबिनेट बैठक में रेलवे कर्मचारियों के लिए भी खजाना खोला गया है। दुर्गा पूजा और दशहरे से पहले रेलवे के 11,40,770 गैर-राजपत्रित (नॉन-गजटेड) कर्मचारियों को 78 दिनों का उत्पादकता आधारित बोनस (PLB) देने का फैसला लिया गया है। प्रति पात्र कर्मचारी बोनस की अधिकतम सीमा 17,951 रुपये तय की गई है। इस फैसले से सरकारी कोष पर 2,009.61 करोड़ रुपये का भार आएगा।

  • Modi Cabinet में बड़ा बदलाव संभव, 17 नए चेहरों पर मंथन; वैष्णव के प्रमोशन से गडकरी के ट्रांसफर तक चर्चा

    Modi Cabinet में बड़ा बदलाव संभव, 17 नए चेहरों पर मंथन; वैष्णव के प्रमोशन से गडकरी के ट्रांसफर तक चर्चा

     नई दिल्ली

    बीजेपी संगठन की नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है. संगठन में हुए बदलावों के बाद से मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर ओवरहॉलिंग की अटकलें लगाई जा रही हैं. मंत्रिमंडल से कई दिग्गजों की छुट्टी हो सकती है तो युवा और नए चेहरों को एंट्री मिल सकती है. मोदी कैबिनेट बदलाव में 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के समीकरणों को ध्यान में रखा जा सकता है। 

    मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर 'आजतक रेडियो' के कार्यक्रम 'रिपोर्टर्स ऑन एयर' (Reporters On Air) में चर्चा हुई. मंत्रिमंडल विस्तार में कौन से नए चेहरे आएंगे और कौन जाएंगे के मुद्दे पर सियासी गलियारों और बीजेपी के कॉरिडोर में क्या बातें हो रही हैं, उसे लेकर सबने अपनी-अपनी बातें रखीं। 

    'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को प्रमोशन मिल सकता है तो नितिन गडकरी का मंत्रालय बदला जा सकता है. यही नहीं, कई पुराने और दिग्गज नेताओं की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है तो 16 से 17 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है। 

    कैबिनेट के कई दिग्गज नेताओं की होगी छुट्टी
    मोदी कैबिनेट विस्तार को लेकर ऐश्वर्या पालीवाल ने बताया कि कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक कॉरिडोर में काफी चर्चा है. मंत्रिमंडल में किसे एंट्री मिलनी है, यह बात तब पता चलती है जब पीएम मोदी चाय पर बुलाते हैं. कुछ ऐसे मंत्रालय हैं, जिनके ऊपर मंथन चल रहा है. इस बार बीजेपी में एक बात स्पष्ट है, वो है मंत्री का परफॉर्मेंस. एक-एक मंत्री के कामकाज पर मंथन किया जा रहा है। 

    ऐश्वर्या पालीवाल आगे कहती हैं कि बीजेपी जानती है कि नई टीम के साथ 2027 के चुनाव में जाना है. उत्तर प्रदेश का चुनाव आसान नहीं है, पंजाब की लड़ाई भी आसान नहीं है और इससे भी बड़ा 2029 का चुनाव है, जो बीजेपी के लिए काफी अहम है. बीजेपी चुनाव जीत रही है, बहुमत से जीत रही है, लेकिन ग्राउंड पर कनेक्ट कम हो रहा है. पिछले दिनों जो कैबिनेट मीटिंग हुई थी, उसमें पीएम मोदी ने यह बात साफ तौर पर अपने सारे मंत्रियों से कही थी कि आप लोग ग्राउंड पर काम कीजिए. ऐसी ही बातें नितिन नवीन की नई टीम के संदर्भ में भी कही गई हैं। 

    टॉप फाइव मिनिस्ट्री के अंदर भी दिखेगा बदलाव?
    ऐश्वर्या पालीवाल बताती हैं कि कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कई सारे नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं. बीजेपी के सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. वह कहती हैं कि मोदी कैबिनेट के टॉप फाइव मंत्रालयों में से किसी एक मिनिस्ट्री के अंदर भी बदलाव दिख सकता है. यह इसलिए नहीं कि काम खराब था, बल्कि किसी और को मौका देने के लिए हो सकता है. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि मोदी कैबिनेट में जो बढ़िया काम कर रहे हैं, उन्हें कोई और मिनिस्ट्री दी जा सकती है। 

    वह कहती हैं कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वह बहुत बड़ी मिनिस्ट्री है, तो आपको वहां पर भी बदलाव करना पड़ेगा. इसके अलावा कई मंत्री ऐसे हैं, जिनके पास तीन-चार मंत्रालयों का जिम्मा है. इसीलिए उनसे कुछ विभाग लेकर दूसरे मंत्रियों में बांटे जाएंगे। 
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    कैबिनेट में 14 मंत्री ऐसे हैं जिनके पास एक से ज्यादा मंत्रालय हैं. 14 बहुत बड़ा नंबर होता है और प्रावधानों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. मोदी कैबिनेट में फिलहाल 69 मंत्री हैं. इस लिहाज से 12 मंत्री पद खाली हैं। 

    अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है कैबिनेट में प्रमोशन
    ऐश्वर्या पालीवाल को बीच में टोकते हुए राहुल गौतम कहते हैं कि राज्यसभा से आने वाले मंत्री मुझे लगता है थोड़े ज्यादा दिखेंगे. मंत्रियों के पास अधिक विभागों की जो बात हो रही है, उसमें अश्विनी वैष्णव के पास तीन मंत्रालय हैं. तीनों बड़े-बड़े मंत्रालय हैं- रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और आईटी मंत्रालय. ऐसे में उनसे कुछ मंत्रालयों का जिम्मा लिया जा सकता है. मेरे लिहाज से अश्विनी वैष्णव का काम अच्छा रहा है, जिसके चलते उनका प्रमोशन कर टॉप फाइव मंत्रियों में लाया जा सकता है। 

    पीयूष मिश्रा कहते हैं कि कई सारे ऐसे मंत्री हैं जिनके पास भारी-भरकम मंत्रालय हैं. प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बना दिया गया है, यह मंत्रालय सीधे-सीधे Gen-Z से जुड़ा हुआ है. संजय शर्मा भी बीच में टोकते हुए कहते हैं कि अश्विनी वैष्णव के बारे में सुन रहे हैं कि शायद उनको प्रमोशन मिल जाए. वह मोदी सरकार के शीर्ष पांच मंत्रियों में से एक हो सकते हैं। 

    नितिन गडकरी का बदला जा सकता है मंत्रालय
    'रिपोर्टर्स ऑन एयर' में संजय शर्मा ने पूछा कि सियासी गलियारों में चर्चा नितिन गडकरी को लेकर है कि कैबिनेट से उनकी छुट्टी हो सकती है. इस पर ऐश्वर्या पालीवाल ने कहा कि मैंने उनके बयान को बहुत ध्यान से देखा है. वह बहुत सहज और अच्छे तरीके से अपनी बात रखते हैं. वह युवा पीढ़ी को आगे लाने की बात कर रहे हैं, लेकिन अपना मंत्री पद छोड़ने की बात नहीं कर रहे हैं। 

    वह कहती हैं कि मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा संकेत है कि कैबिनेट विस्तार होगा तो उनकी मिनिस्ट्री किसी और को दी जा सकती है. उनके पास जो मंत्रालय है, उसमें फेरबदल किया जा सकता है. आगे उनके पास इतनी हैवी मिनिस्ट्री न दिखे, जिसे लेकर चर्चा चल रही है. इसके बाद संजय शर्मा ने पीयूष मिश्रा से पूछा कि गडकरी को लेकर क्या चर्चा है। 

    पीयूष कहते हैं कि नीट (NEET) की बात हो या ई-20 (E-20) की, जिसे लेकर बहुत बखेड़ा हुआ है. मुझसे एक शख्स बोल रहे थे कि ई-20 तो पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ा हुआ है, फिर नितिन गडकरी का नाम क्यों आ रहा है? उनके पास ट्रांसपोर्ट मंत्रालय है. इस पर संजय शर्मा कहते हैं कि वह खुद तमाम इंटरव्यू में ई-20 को लेकर बयान दे रहे थे, लेकिन जब मामला विवादों में आया तो सफाई दी। 

    पीयूष मिश्रा कहते हैं कि अगर धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय पहले बदल दिया गया होता तो नीट विवाद इतना गहरा नहीं होता. इसी तरह से अब E-20 को लेकर विवाद बढ़ रहा है. विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, उससे बचने के लिए सरकार कुछ फेरबदल कर सकती है। 

    कैबिनेट में 16-17 नए और युवा चेहरों को मिलेगी एंट्री
    पीयूष मिश्रा कहते हैं कि मोदी कैबिनेट विस्तार सितंबर और अक्टूबर में कभी भी हो सकता है. कैबिनेट में बड़ा बदलाव होने की संभावना है. इसी दौरान ऐश्वर्या कहती हैं कि नए चेहरों को लेकर बात डिसाइड हो चुकी है. सितंबर में जन्माष्टमी के बाद या उससे पहले मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. साथ ही एक बात और है, आपको उम्मीद भी नहीं होगी कि ये मंत्री हट गए हैं. कई सारे ऐसे मंत्रियों के नाम भी हैं जिनकी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है. उनके नामों पर चर्चा हो चुकी है, उनको हटाने और नए लोगों को लाने पर। 

    ऐश्वर्या पालीवाल कहती हैं कि आपको एक बात बताऊं, हम पहले भी इस बात पर चर्चा कर चुके हैं कि इस बार जो मंत्रिमंडल विस्तार होने वाला है, वह बहुत ही लाजवाब और गजब तरीके का होगा. 15 से 17 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं, बीजेपी के अंदर ऐसी चर्चा है. आप भले स्वीकार न करें, लेकिन बड़े बदलाव की तैयारी है. मोदी सरकार 'शाइनिंग इंडिया' जैसी गलती नहीं दोहराना चाहती. बीच में टोकते हुए राहुल गौतम कहते हैं कि कांग्रेस 2011-12 में सियासी नब्ज को समझते हुए मंत्रिमंडल में बदलाव कर लेती तो लोगों के गुस्से से शायद बच जाती। 

    मोदी कैबिनेट विस्तार पर कांग्रेस में क्या चल रहा है
    राहुल गौतम कहते हैं कि कांग्रेस को लगता है कि मोदी सरकार ने अपनी कैबिनेट में फेरबदल और मेकओवर नहीं किया, तो जाहिर है लोगों की नाराजगी मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर बढ़ेगी. विपक्ष इसलिए उत्सुकता से देख रहा है कि कैबिनेट में किन-किन चेहरों को लाया जाता है, उनका सोशल कॉम्बिनेशन (सामाजिक समीकरण) क्या होगा और उससे क्या संदेश दिया जाएगा। 

    वह कहते हैं कि विपक्ष की इस बात पर भी नजर है कि कैबिनेट में महिलाओं, Gen-Z, युवाओं और चुनावी राज्यों को कितना प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है जो चुनाव में जाने वाला है, वहां से क्या मंत्रियों की संख्या बढ़ेगी या नहीं. पंजाब और गोवा में चुनाव हैं, तो इन तमाम चीजों पर कांग्रेस पार्टी और समूचा विपक्ष नजर रखे हुए है. अगर इनसे कोई चूक हुई तो जाहिर है वे सवाल उठाएंगे। 

  • कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज, शिक्षा और वित्त मंत्रालय में बदलाव की अटकलें

    कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज, शिक्षा और वित्त मंत्रालय में बदलाव की अटकलें

     नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में फेरबदल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है। इस फेरबदल में कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। वहीं विवादों में रहे मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि पूर्व आईएएस अधिकारी और आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री बनाया जा सकता है और निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय का जिम्मा मिल सकता है। बता दें कि NEET पेपर लीक मामले के बाद धर्मेंद्र प्रधान का विरोध तेज हो गया है। कई संगठन उनके इस्तीफे का मांग कर रहे हैं। ऐसे में मोदी कैबिनेट में फेरबदल करके बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

    मोदी कैबिनेट के संभावित नए मंत्री
    1- नीतीश कुमार

    2- शक्तिकांत दास

    3- सुखेंदु शेखर राय

    4- तरुण चुग

    5- राघव चड्ढा

    6- श्रीकांत शिंदे

    7- अनुराग ठाकुर
    इनके बदल सकते हैं पोर्टफोलिया, या फिर बाहर का रास्ता

    1- मनोहरलाल खट्टर

    2- रवनीत सिंह बिट्टू

    3- अश्विनी वैष्णव

    4- धर्मेंद्र प्रधान

    5- निर्मला सीतारमण

    6- हरदीप सिंह पुरी

    7- नितिन गडकरी

    शक्तिकांत दास के अनुभव का फायदा उठाना चाहती है सरकार?
    पूर्व आईएएस और आरबीआई गवनर्र शक्तिकांत दास इस समय 69 साल के हैं। सरकार के साथ काम करने और वित्तीय मामलों का उनका लंबा अनुभव है। अगर उन्हें वित्त मंत्री बनाया जाता है तो पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री सीडी देशमुख की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। सीडी देशमुख आरबीआई के पहले गवर्नर थे और उन्हें 1950 से 1956 तक वित्त मंत्री के तौर पर काम करने का मौका मिला। वहीं डॉ. मनमोहन सिंह 1982 से 1985 तक आरबीआई गवर्नर रहे। इसके बाद 1991 से 1996 तक देश के वित्त मंत्री रहे। इसके बाद 2004 से 2014 तक वह देश के प्रधानमंत्री भी रहे। डॉ. मनमोहन सिंह ऐसे अकेले ही व्यक्ति थे जो कि आरबीआई गवर्नर, वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

    शक्तिकांत दास की बात करें तो वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। हालांकि उन्हें 6 महीने के अंदर ही राज्यसभा भेजा जा सकता है। अटकलें हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा जा सकता है। नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो जाएंगी।

    क्यों वित्त मंत्रालय के लिए योग्य माने जा रहे शक्तिकांत दास?
    शक्तिकांत दास को वित्त मंत्री के पद के लिए योग्य माना जा रहा है। उन्हें टैक्स और निवेश के साथ ही आर्थिक नीति की गहरी जानकारी है। इसके अलावा वित्त मंत्रालय में काम करते हुए वह 8 बजट तैयार करने में शामिल रह चुके हैं। इसके अलावा 2018 से 2024 तक आरबीआई गवर्नर रहने के दौरान उन्हें वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिली। उन्हें A+ रेटिंग के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार भी मिले हैं।

    विधानसभा चुनावों का भी रखा जाएगा ध्यान
    कैबिनेट में फेरबदल में आने वाले यूपी, पंजाब के विधानसभा चुनावों को भी ध्यान में रखा जाएगा। नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विवादों में घिर गए हैं। ऐसे में उनपर कार्रवाई हो सकती है। वहीं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की जगह भी पंजाब से राघव चड्ढा या फिर किसी सिख चेहरे को लाया जा सकता है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

    पंजाब से इस समय रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय मंत्रिमंडल में हैं। वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा नए चेहरों में महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे का नाम शामिल हो सकता है जो कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे है। श्रीकांत शिंदे ही शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को एनडीए के साथ लेकर आए हैं। वहीं टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में जाने वाले सुखेंदु शेखर को भी केंद्रीय मंत्रीमंडल में जगह दी जा सकती है।

    कैबिनेट रीशफल में सबकी निगाहें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी होंगी। हालांकि अटकलें यही हैं कि निर्मला सीतारमण को कैबिनेट से बाहर नहीं किया जाएगा बल्कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। वहीं कई जानकारों का कहना है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय ले लिया जाता है तो यह संदेश जाएगा कि सरकार झुक गई है। इसके अलावा नौकरशाही से कैबिनेट में आए दो मंत्रियों की भूमिका कम की जा सकी है। इनमें अश्विनी वैष्णव और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल में आरएसएस की पसंद का ध्यान रखा जा सकता है। बीते दिनों आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ बीजेपी की बैठक भी हुई थी। विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए रवनीत बिट्टू को पंजाब में चुनाव का जिम्मा दिया जा सका है और तरुण चुग को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

  • BJP में नई सियासी हलचल! पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा की नई भूमिका से कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज

    BJP में नई सियासी हलचल! पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा की नई भूमिका से कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज

    नई दिल्ली

    बीजेपी ने एक बार फिर चौंकाते हुए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्‍होत्रा को प्रदेश की कमान सौंप दी है. उन्‍हें द‍िल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया गया है. दिल्ली से पहले बीजेपी ने यूपी में भी भाजपा ने यही फॉर्मूला अपनाते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी थी. यानी अब दो-दो केंद्रीय मंत्री सीधे राज्यों में संगठन की कमान संभाल रहे हैं. इस बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है क‍ि क्या अब मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा. क्‍योंक‍ि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’के सिद्धांत को मानतीहै. ऐसे में मंत्रियों को संगठन में भेजे जाने का सीधा मतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण कुर्सियां खाली होने वाली हैं। 

    हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. दिल्ली में अगले कुछ समय में होने वाले एमसीडी चुनाव को देखते हुए उनकी न‍ियुक्‍त‍ि काफी मायने रखती है. द‍िल्‍ली में बीजेपी को एक ऐसे जमीन से जुड़े पंजाबी और वैश्य चेहरे की जरूरत थी, जिसकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो. केंद्रीय मंत्री को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के लिए वह कोई कसर नहीं छोड़ने वाली. इसके साथ ही बीजेपी ने पंजाबी चेहरे को मौका देकर पंजाब में भी पैठ बनाने की कोश‍िश की है। 

    ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत
    बीजेपी की कार्यशैली दूसरी पार्टियों से थोड़ी अलग है. बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का नियम बेहद कड़ाई से लागू करती है. पार्टी का इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी नेता को संगठन से सरकार में या सरकार से संगठन में लाया गया है, उसने बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त किया है। 

    जेपी नड्डा का उदाहरण
    जब जेपी नड्डा को मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी से दूरी बनाई और पार्टी ने सांगठनिक निरंतरता के लिए नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. ठीक यही नियम अब राज्यों के स्तर पर भी लागू होने जा रहा है। 

    उत्तर प्रदेश में पंकज चौधरी
    कुछ समय पहले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था. तब भी यह सवाल उठा था कि क्या वे दोनों पद संभालेंगे? भाजपा की नीति के अनुसार, जब कोई मंत्री संगठन के पूर्णकालिक काम में उतरता है, तो उसे सरकारी जिम्मेदारी से मुक्त किया जाता है ताकि वह शत-प्रतिशत समय संगठन को दे सके। 

    अब हर्ष मल्‍होत्रा
    अब यही इतिहास दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा के साथ दोहराया जा रहा है. हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी दोनों केंद्रीय मंत्रालयों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. चूंकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में संगठन का काम 24 घंटे और 365 दिन का होता है, इसलिए इन दोनों मंत्रियों का कैबिनेट से बाहर होना तय माना जा रहा है. यह कदम ही इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि मोदी कैबिनेट में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री होने वाली है। 

    जब-जब संगठन बदला, तब-तब बदली कैबिनेट
    यदि हम मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के इतिहास और उससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के दौर के इतिहास पर नजर डालें, तो काफी कुछ क्‍ल‍ियर हो जाता है। 

        साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब राजनाथ सिंह सरकार में गृहमंत्री बने. ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ा और अमित शाह को संगठन की कमान मिली. इसके बाद संगठन का पूरी तरह कायाकल्प हुआ और कैबिनेट का भी विस्तार हुआ। 

        जुलाई 2021 में मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कैबिनेट फेरबदल किया था. उस समय रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. हर्षवर्धन और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे 12 बड़े मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई थी. इनमें से कई नेताओं को बाद में संगठन के काम में लगाया गया था, जबकि भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नए चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिली थी। 

        अटल जी के समय भी कुशाभाऊ ठाकरे और जन कृष्णमूर्ती जैसे संगठन के दिग्गजों को सरकार के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. प्रमोद महाजन और वेंकैया नायडू जैसे नेताओं को कई बार संगठन से सरकार और सरकार से संगठन में भेजा गया।