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  • सस्ती और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगी ‘ज्वाला’, स्वदेशी काउंटर-ड्रोन मिसाइल की टेस्टिंग सफल

    सस्ती और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगी ‘ज्वाला’, स्वदेशी काउंटर-ड्रोन मिसाइल की टेस्टिंग सफल

     नई दिल्ली

    भारत की निजी रक्षा कंपनी आईजी डिफेंस ने अपने ज्वाला माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम के तहत दो सॉलिड रॉकेट मोटर्स का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण 3 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब चार बजे किया गया. यह उपलब्धि कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है. ज्वाला भारत का पहला स्वदेशी निजी माइक्रो-मिसाइल कार्यक्रम है जो हार्ड-किल काउंटर-यूएएस यानी ड्रोन को नष्ट करने वाला सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है। 

    आधुनिक युद्धों में ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल वायु रक्षा के लिए नई चुनौती बन गया है. सस्ते और बड़ी संख्या में ड्रोन भेजने की क्षमता ने किफायती जवाबी उपायों की जरूरत बढ़ा दी है. ज्वाला इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाई जा रही है ताकि मौजूदा वायु रक्षा परतों के साथ मिलकर ड्रोन खतरों से बड़े पैमाने पर निपटा जा सके। 

    आज के संघर्षों में ड्रोन झुंड आम हो गए हैं. ये सस्ते होने के साथ प्रभावी भी साबित हो रहे हैं. महंगी मिसाइलों से हर ड्रोन को मार गिराना आर्थिक रूप से संभव नहीं है. इसलिए सस्ती और बड़ी संख्या में उत्पादित की जा सकने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग बढ़ी है। 

    आईजी डिफेंस के एवीपी विंग कमांडर अनूप शर्मा ने कहा कि ड्रोन खतरा तेजी से बदल रहा है और काउंटर-यूएएस सिस्टम को भी उसी गति से विकसित होना चाहिए. ज्वाला ठीक इसी सोच के साथ बनाई जा रही है. सफल प्रोपल्शन टेस्ट इस स्वदेशी हार्ड-किल क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यह मिसाइल न सिर्फ सस्ती होगी बल्कि बड़े पैमाने पर तैनात की जा सकेगी जिससे मिसाइल भंडार की गहराई भी बढ़ेगी।  

    ग्रिड सिस्टम के साथ इंटीग्रेटेड आर्किटेक्चर  
    ज्वाला को अकेले मिसाइल के रूप में नहीं बल्कि आईजी डिफेंस के व्यापक ग्रिड इकोसिस्टम के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है. ग्रिड डिफेंड एक एआई आधारित बैटल मैनेजमेंट सिस्टम है जो सेंसर, इफेक्टर्स और कमांड सिस्टम को जोड़ता है. यह सिस्टम डिटेक्शन, पहचान, ट्रैकिंग, खतरे का आकलन और एंगेजमेंट मैनेजमेंट को एक साथ लाता है. ग्रिड कई सेंसरों से जानकारी लेकर साझा तस्वीर बनाता है, हवाई खतरों को ट्रैक करता है और उपलब्ध हथियारों को निर्देशित करता है। 

    इस तरह सेंसर से शूटर तक का पूरा आर्किटेक्चर तैयार होता है जिसमें ज्वाला हार्ड-किल इंटरसेप्टर का काम करती है और ग्रिड बुद्धिमत्ता व मिशन मैनेजमेंट उपलब्ध कराता है. कंपनी के फाउंडर और सीईओ बोधिसत्त्व संघप्रिय ने कहा कि वे ज्वाला को बुद्धिमान रक्षा आर्किटेक्चर का हिस्सा बना रहे हैं ताकि डिटेक्शन से लेकर एंगेजमेंट तक अधिकृत मिशन स्वायत्त तरीके से पूरे हो सकें। 

    यह विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भागीदारी दर्शाता है. आईजी डिफेंस स्वदेशी प्रोपल्शन, इंटरसेप्टर और काउंटर-यूएएस तकनीकों पर काम कर रही है. सफल परीक्षण के बाद कंपनी सिस्टम की परिपक्वता, विश्वसनीयता, विनिर्माण क्षमता और स्केलेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित करेगी। 

    आधुनिक युद्ध में ड्रोन खतरे के खिलाफ सस्ती और प्रभावी प्रणाली तैयार करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. ज्वाला और ग्रिड का संयोजन महंगी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा. यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय निजी कंपनियां अब जटिल रक्षा तकनीकों में भी आगे बढ़ रही हैं और देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रही हैं। 

  • ईरान-इजरायल जंग के बीच अलर्ट हुए पड़ोसी देशों, उत्तर कोरिया ने दागी मिसाइल, THAAD हटाएगा अमेरिका

    ईरान-इजरायल जंग के बीच अलर्ट हुए पड़ोसी देशों, उत्तर कोरिया ने दागी मिसाइल, THAAD हटाएगा अमेरिका

    फियोंगयांग

    ईरान वॉर अभी तक समाप्‍त नहीं हुआ है, पर एक और क्षेत्र में तनाव की आहट ने खलबली मचा दी है. कोरियाई प्रायद्वीप से बड़ी खबर सामने आ रही है. दक्षिण कोरिया का कहना है कि उत्‍तर कोरिया ने मिसाइल दागी है. उत्‍तर और दक्षिण केारिया के बीच तनाव नई बात नहीं है. दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से तल्‍ख हैं. उत्‍तर कोरिया को चीन और रूस का करीबी माना जाता है, जब‍कि साउथ कोरिया अमेरिका का करीबी सहयोगी है. दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्‍य बेस भी स्थित है. किम जॉन्‍ग उन के देश की तरफ से ऐसे समय में मिसाइल दागी गई है, जब अमेरिका दक्षिण कोरिया से अपने कुछ THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को हटाने पर विचार कर रहा है. ऐसे में उत्‍तर कोरिया के कदम से दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ गई है.

    रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया ने समंदर की तरफ मिसाइल दागी है. उत्‍तर कोरिया की तरफ से अक्‍सर ही समंदर का रुख कर मिसाइल परीक्षण किए जाते रहे हैं. यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किम जोंग उन के देश की तरफ से इस तरह की कार्रवाई की गई है. हालांकि, इस बार की टाइमिंग काफी अहम है. पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही खराब है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्‍त रूप से ईरान पर अटैक कर दिया है. तेहरान की तरफ किए गए पलटवार से माहौल पहले ही तनावपूर्ण और गंभीर हो चुके हैं. ऐसे में उत्‍तर कोरिया की ओर से मिसाइल दागने से एशिया के एक और जोन में हालात तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है. चीन की आक्रामक नीतियों की वजह से इस क्षेत्र में ऐसे ही तनाव का आलम है.

    जापान सतर्क
    उत्तर कोरिया ने शनिवार को एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया है. जापान के रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. ‘निक्‍केई एशिया’ के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि यह मिसाइल संभवतः जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर जाकर गिरी. इस प्रक्षेपण के कारण किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है. वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उत्तर कोरिया ने पूर्व दिशा की ओर कम से कम एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र यानी प्रोजेक्‍टाइल दागा. इससे पहले उत्तर कोरिया ने 27 जनवरी को जापान सागर की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिनके बारे में भी आकलन किया गया था कि वे जापान के ईईजेड के बाहर गिरी थीं.

    बढ़ा तनाव, क्या खुलेगा जंग का तीसरा मोर्चा या होगी World WAR 3?

    दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, शनिवार को उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इससे पूर्वी एशिया में नया तनाव पैदा हो गया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे संघर्ष अभी भी वैश्विक सुरक्षा चिंताओं का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि यह मिसाइल उत्तर कोरिया से उसके पूर्वी जलक्षेत्र की ओर दागी गई थी, जिसे आमतौर पर जापान सागर (पूर्वी सागर) के नाम से जाना जाता है। अधिकारियों ने शुरू में इस हथियार को अज्ञात मिसाइल बताया था, लेकिन माना जा रहा है कि यह एक बैलिस्टिक मिसाइल ही थी।

    अमेरिका- दक्षिण कोरिया कर रहे सैन्य अभ्यास
    बता दें कि यह मिसाइल तब दागी गई जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया मिलकर अपना सालाना स्प्रिंगटाइम संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे थे, जिसमें हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ भी एक बढ़ता हुआ युद्ध लड़ रहा है। हाल ही में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था, जो कि युद्ध हर दिन के साथ बढ़ा और हर जगह तबाही मची हुई है। इसमें ईरान से लेकर इजयारल और अमेरिका तक को नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईरान खाड़ी देश में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    उत्तर कोरिया ने क्यों की होगी मिसाइल लॉन्च?
    उत्तरी कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के सैन्य अभ्यासों को 'आक्रमण का पूर्वाभ्यास' बताता रहा है, और अक्सर इनका इस्तेमाल अपने सैन्य प्रदर्शनों या हथियारों के परीक्षण को तेज करने के बहाने के तौर पर करता है।

    यह मिसाइल लॉन्च, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन द्वारा मंगलवार को वॉशिंगटन और सियोल की आलोचना किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए एक खतरनाक मोड़ पर अपने सैन्य अभ्यास जारी रखने के लिए इन दोनों देशों की आलोचना की थी, और चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को दी गई कोई भी चुनौती भयानक परिणामों को जन्म देगी।

    बता दें कि 11-दिवसीय 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास, जो 19 मार्च तक चलेगा, यह संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले दो वार्षिक कमांड पोस्ट अभ्यासों में से एक है।