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  • मंत्री  परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

    मंत्री परमार की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई संपन्न

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल की सामान्य परिषद की बैठक हुई। बैठक में विद्यार्थियों के हित, शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थान की अधोसंरचना तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, सुरक्षित परिसर और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के प्रारंभ में पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन एवं कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया।

    विद्यार्थियों की सुविधाओं और सुरक्षा को प्राथमिकता

    बैठक में मंत्री  परमार ने संस्थान में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन उपकरण स्थापित करने का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए।

    विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों को सामान्य बजट भाग-1 में शामिल करते हुए वार्षिक गतिविधियों के लिए 50 हजार रुपए का प्रावधान किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के विशेष अन्य आकस्मिक व्यय में भी 10 लाख रुपए की वृद्धि की गई, जिससे संस्थान की विभिन्न गतिविधियों का सुचारु संचालन किया जा सकेगा।

    विद्यार्थियों के अध्ययन की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय भवन की व्यवस्थाओं में सुधार तथा अध्ययन कक्ष को वातानुकूलित करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में मेजर एवं माइनर विषयों के स्वैप तथा डबल मेजर के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क के प्रस्ताव को भी सामान्य परिषद ने मान्यता प्रदान की। बीबीए एवं एमबीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से नियमानुसार विश्वविद्यालय नामांकन शुल्क लिए जाने को भी स्वीकृति दी गई।

    नवाचार, कौशल और रोजगार के अवसरों पर जोर

    विद्यार्थियों के नवाचार एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर में मानसेवी रूप से सीईओ अथवा मैनेजर नियुक्त करने की अनुमति दी गई। यह अधिकारी इनक्यूबेशन गतिविधियों के साथ प्लेसमेंट संबंधी कार्यों में भी सहयोग करेगा।

    संस्थान में रिमोट पायलट एवं ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भोपाल स्थित आईआईएसईआर तथा चित्रकूट में संचालित इसी प्रकार के केंद्रों का अध्ययन करने और उनके अनुरूप विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को बजट स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश दिए गए।

    संस्थान के कृषि विभाग के लिए पर्याप्त कक्षाओं, सेमिनार हॉल तथा विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकों के लिए आवश्यक स्थान की व्यवस्था हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।

    शैक्षणिक गुणवत्ता और NAAC सुझावों पर निरंतर कार्रवाई

    संस्थान द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा दिए गए सुझावों के अनुरूप निरंतर कार्रवाई की जा रही है। सामान्य परिषद ने इन बिंदुओं पर गंभीरता से कार्य करते हुए संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय

    संस्थान में कार्यरत मानसेवी शिक्षकों की मांगों पर संवेदनापूर्वक विचार करते हुए सामान्य परिषद ने निर्णय लिया कि अब इन्हें ‘अतिथि विद्वान’ के नाम से संबोधित किया जाएगा। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश एवं 3 ऐच्छिक अवकाश दिए जाने के निर्देश भी दिए गए।

    संस्थान में कार्यरत मानसेवी कर्मचारियों के मानदेय में प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत वृद्धि करने तथा यह वृद्धि आगामी तीन वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। कन्या छात्रावास की मैनेजर का मानदेय 22 हजार 374 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार 287 रुपए प्रतिमाह करने की भी स्वीकृति दी गई।

    संस्थान में आमंत्रित विशेषज्ञों को व्याख्यान अथवा बैठक के लिए 1,500 रुपए प्रति व्याख्यान/बैठक तथा कार्यालयीन परामर्श के लिए 700 रुपए प्रति बैठक मानदेय दिए जाने को भी स्वीकृति दी गई।

    आउटसोर्स कर्मचारियों की सामान्य आवश्यकता की पूर्ति सेडमैप के माध्यम से तथा उच्च कुशलता से अधिक योग्यता एवं विशेष दक्षता वाले कर्मचारियों के लिए संस्थान स्तर पर विज्ञापन जारी कर नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए।

    संस्थान की कार्यक्षमता बढ़ाने प्रशासनिक निर्णय

    संस्थान में 15 लाख रुपए तक के बजट एवं खरीदी संबंधी प्रस्तावों पर निर्णय लेने के लिए संचालक को अधिकृत किया गया। इससे संस्थान की आवश्यक गतिविधियों और व्यवस्थाओं से संबंधित निर्णयों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    बैठक के प्रारंभ में संस्थान द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘एक्सेल एसेंस’ का विमोचन किया गया।

    बैठक में उच्च शिक्षा के अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा, माधव साइंस कॉलेज उज्जैन के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश अग्रवाल सहित सामान्य परिषद के अन्य सदस्य एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

     

  • प्रतिभाओं को मिलेगी सफलता की नई उड़ान, गौलाना में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ शुरू; 1,751 विद्यार्थियों का सम्मान

    प्रतिभाओं को मिलेगी सफलता की नई उड़ान, गौलाना में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ शुरू; 1,751 विद्यार्थियों का सम्मान

    भोपाल 

    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि गरीब और सामान्य परिवार के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सपनों के बीच आर्थिक परिस्थितियां बाधा नहीं बनें, यही ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ का मूल उद्देश्य है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध हो।

    मंत्री  परमार गुरुवार को शाजापुर जिले के गौलाना स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर शासकीय सांदीपनि विद्यालय में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ के शुभारंभ एवं प्रतिभा खोज परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने चयनित 1 हजार 751 विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

    गरीब पिता की पीड़ा से उपजा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संकल्प

    मंत्री  परमार ने कहा कि अच्छे विद्यालयों में पढ़ने का अवसर हर बच्चे का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक गरीब पिता की उस पीड़ा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया, जब उसकी बेटी ने शहर के बड़े और अच्छे विद्यालय को देखकर वहां पढ़ने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण पिता अपनी बेटी का सपना पूरा नहीं कर सका। इसी पीड़ा को समझते हुए सरकार ने ऐसे विद्यालयों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया, जहां गरीब परिवार के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।

     परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को व्यापक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में सीएम राइज एवं सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो रही है।

    महंगी कोचिंग के आर्थिक बोझ से विद्यार्थियों को मिलेगी मुक्ति

    मंत्री  परमार ने कहा कि JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनेक विद्यार्थी इंदौर, कोटा सहित बड़े शहरों का रुख करते हैं। महंगी कोचिंग और रहने-खाने का खर्च सामान्य एवं गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होता है। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

     परमार ने कहा कि ‘प्रतिभा मंदिर’ के माध्यम से इसी आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है। अब विद्यार्थियों को अपने जिले में ही निःशुल्क कोचिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।

    6,600 से अधिक पंजीयन, 1,751 विद्यार्थियों का चयन

    मंत्री  परमार ने बताया कि प्रतिभा खोज परीक्षा के लिए 6,600 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। परीक्षा के परिणाम में 1,751 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इनमें 937 विद्यार्थी कक्षा 9 की आधारभूत तैयारी, 347 JEE तथा 467 NEET की तैयारी करेंगे।

    विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी को देखते हुए प्रतिभा मंदिर केंद्रों की संख्या 3 से बढ़ाकर 9 की गई है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर आगे एक-दो केंद्र और बढ़ाए जाएंगे, ताकि चयनित किसी भी विद्यार्थी को तैयारी के अवसर से वंचित न होना पड़े।

    कोटा और नई दिल्ली के विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन

    प्रतिभा मंदिर की कक्षाएं कोटा एवं नई दिल्ली स्थित स्टूडियो से ऑनलाइन संचालित होंगी। विषय-विशेषज्ञ शिक्षक विद्यार्थियों को JEE और NEET की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देंगे। अध्ययन सामग्री डिजिटल माध्यमों के साथ मुद्रित स्वरूप में भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मंत्री  परमार ने कहा कि यह केवल कोचिंग की व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रतिभाओं के निर्माण की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ने का कार्य करते हैं। जिस प्रकार मंदिर के शिल्पकार पत्थर को तराशकर सुंदर प्रतिमा का निर्माण करता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के जीवन को आकार देते हैं।

    अब महाविद्यालयों में पीएससी की तैयारी की भी होगी व्यवस्था

    मंत्री  परमार ने कार्यक्रम में घोषणा की कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आने वाले समय में महाविद्यालयों में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यकता के अनुसार इस व्यवस्था पर संसाधन उपलब्ध कराएगी, ताकि विद्यार्थियों को प्रशासनिक एवं अन्य सेवाओं में जाने के लिए अपने ही संस्थानों में बेहतर मार्गदर्शन मिल सके। इसकी शुरुआत शाजापुर जिले से करने का प्रयास किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रयास

    मंत्री  परमार ने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के समान अवसर उपलब्ध कराने के राष्ट्रीय संकल्प को मध्यप्रदेश में धरातल पर उतारने की दिशा में ‘प्रतिभा मंदिर’ महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर विद्यार्थियों को यह प्रकल्प समर्पित करना इस संकल्प को सेवा और कार्य के रूप में आगे बढ़ाने का अवसर है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को भारतीय दृष्टि, ज्ञान और आत्मविश्वास से जोड़ने का कार्य किया गया है। विद्यार्थियों में यह भाव विकसित होना चाहिए कि वे केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माण के लिए भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    नवाचार और प्रतिभाओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन

    मंत्री  परमार ने बताया कि जिले में विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं के साथ विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को भी प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालय और महाविद्यालय स्तर की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर उन्हें प्रदेश और देश के विकास से जोड़ना है।

    उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एकाग्रता, परिश्रम और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ें। सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक, ज्ञान आधारित और भारत-केंद्रित परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

    शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को मिलेगी गति

    मंत्री  परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे नवाचारों का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो ज्ञान, कौशल, संस्कार और राष्ट्रभाव से संपन्न हों। विद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने के स्थान नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिकों के निर्माण के केंद्र हैं।

    उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना भारत की विशेषता है। हमारे विद्यार्थी ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से देश की प्रतिष्ठा को विश्व स्तर पर नई ऊंचाई प्रदान करें, यही ‘प्रतिभा मंदिर’ जैसे प्रयासों की व्यापक सार्थकता है।

    ‘प्रतिभा मंदिर’ के माध्यम से शाजापुर से शुरू हुई यह पहल अब प्रतिभाओं को अवसर देने की व्यापक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का संकल्प है कि आर्थिक या भौगोलिक सीमाओं के कारण कोई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपने सपनों से वंचित न रहे।

    छात्र-छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान

    समारोह के दौरान वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से कोटा से आईआईटी के मुंबई के संचालक पूर्व भौतिक शास्त्री प्रोफेसर डॉ. एच.सी. वर्मा ने छात्र-छात्राओं से संवाद कार उनकी जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान किया।