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  • 45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    45 हजार महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, कोसी में ₹1.26 अरब से डेयरी प्लांट लगाने की तैयारी

    सहरसा
     पिछड़े कोसी क्षेत्र में आने वाले दिनों में डेयरी से संबंधित कारोबार तेजी से बढ़ेगा। सरकार ने सात निश्चय -3 के तहत एक अरब 26 करोड़ सात लाख की लागत से कोसी दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड के अंतर्गत दही प्लांट, प्रीमियम आईस्क्रीम प्लांट, टोटल मिक्स्ड राशन प्लांट, इंस्टैंट मिल्क चिलिंग प्लांट खोलने की योजना है।

    इससे कोसी क्षेत्र में डेयरी व दुग्ध व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के पशुपालक व दुग्ध कारोबारी काफी लाभांवित होंगे, जो पिछड़े कोसी क्षेत्र के विकास का बढ़ा कारण बनेगा।

    नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का भी होगा गठन
    श्वेत क्रांति-2 पहल के तहत डेयरी किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने के लिए नवीन दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर बल दिया जाएगा।

    इस समिति के गठन होने से सहकारी डेयरी के माध्यम से उपभोक्ताओं द्वारा दिए जाने वाले समितियों का अधिकांश हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचेगा।

    सात निश्चय- 3 से प्राप्त राशि से कोसी प्रमंडल के तीनों जिले में मिल्क चिलिंग प्लांट एवं इंस्टैंट मिल्क चिलिंग सिस्टम की स्थापना होगी। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहेगी और इसे खराब होने से बचाया जा सकेगा।

    दुग्ध उत्पादन बढ़ने से सशक्त होगी ग्रामीण महिलाएं

    कोसी प्रमंडल में दुग्ध उत्पादन में जीविका के माध्यम से महिलाएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। कौशिकी जीविका महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी महिलाओं द्वारा संचालित है और सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में अपनी सेवाएं दे रही है।

    वर्तमान में कंपनी से 45,000 दुग्ध उत्पादक जीविका दीदी जुड़ी हुई हैं। यह महिलाएं न केवल दुग्ध उत्पादन करती हैं, बल्कि इसके संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।

    यह कंपनी चालू वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन औसतन 76,171 लीटर दूध की खरीद कर रही है महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग कर आधुनिक तकनीकों के साथ अपने व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं।

    सात निश्चय से विभिन्न तरह के प्लांट की स्थापना से इस कंपनी का भी कारोबार तेजी से फल-फूल सकेगा। ऐसी संभावना है।

        कोसी क्षेत्र के विकास में डेयरी व्यवसाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण प्लांट की स्थापना से व्यवसाय को पंख लगेगा। इससे इलाके के लोग काफी लाभांवित होंगे। – डॉ. अभिनीत झा, जिला पशुपालन पदाधिकारी, सहरसा

     

  • दूध के नए रेट से इंदौर में घमासान, ₹65 पर विक्रेता-किसान आमने-सामने

    दूध के नए रेट से इंदौर में घमासान, ₹65 पर विक्रेता-किसान आमने-सामने

     इंदौर
     आगामी त्योहारों से पहले शहर के परिवारों का मासिक बजट कुछ गड़बड़ा सकता है, क्योंकि एक अक्टूबर से दूध के दाम बढ़ने जा रहे हैं। इंदौर दूध विक्रेता संघ ने दूध उत्पादकों से खरीदी का भाव बढ़ाने के साथ उपभोक्ताओं के लिए भी नए भाव तय किए हैं। अब आमजन को घर पहुंच दूध 65 रुपये लीटर और दुकान-डेयरी से 68 रुपये लीटर मिलेगा। यानी रोज 2 लीटर दूध लेने वाले परिवार को महीने में करीब 120 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। पांच लीटर प्रतिदिन खपत वाले परिवार का अतिरिक्त खर्च करीब 300 रुपये महीना हो सकता है।

    जानिए दूध के नए भाव
    वर्तमान में घर पर दूध पहुंचाने के दाम 63 रुपये प्रति लीटर हैं। इसमें 62 रुपये दूध और एक रुपये सेवा शुल्क शामिल है, लेकिन बढ़ोतरी के बाद दूध के दाम 65 रुपये प्रति लीटर हो जाएंगे। वहीं दुकान व डेयरी पर वर्तमान में 66 रुपये प्रति लीटर दूध मिलता है, जो गुरुवार से 68 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। यानी दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी होगी। ये भाव 5.5 से 6 फैट वाले दूध के आधार पर तय किए गए हैं।

    जिस परिवार की रोजमर्रा की जरूरत में दूध की खपत ज्यादा है, उसके महीने के बजट पर इसका असर सीधे दिखाई देगा। संघ के अध्यक्ष भरत मथुरावाला का कहना है कि दूध के खरीदी और बिक्री दोनों दाम में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। आगे बारिश की कमी बनी रही और कपास्या खली, चापड़ व भूसे जैसे पशु आहार के दाम बढ़े तो दूध के भाव पर दोबारा विचार किया जा सकता है।

    9.24 रुपये प्रति फैट के हिसाब से खरीदी
    दूध उत्पादक किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम भी बढ़ाए गए हैं। अब उत्पादकों से दूध की खरीदी 9.23 रुपये प्रति फैट के हिसाब से होगी, जबकि अब तक 8.90 रुपये प्रति फैट खरीदी हो रही थी। इसके अनुसार दूध खरीदी के दाम करीब दो रुपये बढ़ेंगे। उत्पादक किसान लंबे समय से दूध के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में संघ ने दूध के दाम बढ़ाकर किसानों की मांगों को कुछ हद तक माना है। हालांकि किसान 12 रुपये प्रति फैट खरीदी की मांग कर रहे हैं।

     इतना बढ़ेगा खर्च
    दूध के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद विभिन्न परिवारों के मासिक और वार्षिक खर्च में होने वाली वृद्धि इस प्रकार है…

    एक लीटर रोज: 60 रुपये महीना, 730 रुपये वार्षिक
    दो लीटर रोज: 120 रुपये महीना, 1460 रुपये वार्षिक
    पांच लीटर रोज: 300 रुपये महीना, 3650 रुपये वार्षिक
    दूध मूल्य वृद्धि से जुड़ी मुख्य बातें
    33 पैसे प्रति फैट बढ़ाया गया किसानों से खरीदी का भाव।
    दो रुपये प्रति लीटर खरीदी और बिक्री दोनों के दाम बढ़े।
    12 रुपये प्रति फैट से खरीदी की मांग कर रहे थे किसान।
    12 लाख लीटर के करीब दूध प्रतिदिन डेयरी और बंदी में होता है विक्रय।

    किसानों की मांग-खरीद रेट 70 रुपए हो
    मध्यप्रदेश दूध किसान संघ के अध्यक्ष दिलीप सिंह पंवार ने कहा कि हाल में हुई 3 रुपए की बढ़ोतरी में भी 1 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है।

    किसानों के लिए वास्तविक बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि दूध का खरीद मूल्य 70 रुपए प्रति लीटर किया जाए। फैट के आधार पर भुगतान की व्यवस्था होने पर किसान तैयार हैं, लेकिन इसके लिए 12 रुपए प्रति फैट के हिसाब से भुगतान की मांग है।

    पंवार ने कहा कि इंदौर में कुछ अन्य दूध व्यापारियों के यहां 65 से 68 रुपए तक खरीद और 70 से 72 रुपए तक बिक्री की बात सामने आती है। ऐसे में किसानों को भी 68 से 70 रुपए तक उचित खरीद मूल्य मिलना चाहिए।

    विक्रेता संघ बोला- उपभोक्ता पर ज्यादा बोझ नहीं डाल सकते
    इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भरत मथुरावाला ने बताया कि अभी घर पहुंच दूध के 63 रुपए में 62 रुपए दूध और 1 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। 1 अक्टूबर से यह 64 रुपए दूध + 1 रुपए डिलीवरी होकर कुल 65 रुपए होगा। दुकानों पर खुले दूध की कीमत 68 रुपए प्रति लीटर रहेगी।

    मथुरावाला ने कहा कि संघ पिछले 38 वर्षों से काम कर रहा है और पंजीकृत संस्था है। संघ की जिम्मेदारी किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप भुगतान दिलाने के साथ उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ नहीं डालना भी है।

    फैट के हिसाब से भुगतान 9.23 रुपए तक पहुंचा
    मथुरावाला के मुताबिक किसानों को फैट के आधार पर भुगतान किया जाता है। पहले 8.90 रुपए प्रति फैट दिया जा रहा था, जिसे बढ़ाकर 9.23 रुपए प्रति फैट किया गया है। उनका दावा है कि यह भुगतान सांची से अधिक है। उन्होंने कहा कि देवास, उज्जैन, धार और खंडवा सहित आसपास के क्षेत्रों में भी दूध के दाम में करीब 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है।

    सप्लाई रुकी तो क्या होगा?
    किसान संगठन ने मांग पूरी नहीं होने पर दूध की सप्लाई रोकने की संभावना जताई है। हालांकि अभी सप्लाई बंद करने का कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए 1 अक्टूबर से तय नए रेट लागू होंगे या नहीं, यह स्थिति आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी।

    किस बात पर टकराव?
    विवाद मुख्य रूप से दूध के खरीद मूल्य, फैट के हिसाब से भुगतान और किसानों की उत्पादन लागत को लेकर है। दूध विक्रेता संघ का कहना है कि उपभोक्ताओं पर भी कीमत का असर पड़ता है, जबकि किसान संगठन का तर्क है कि मौजूदा खरीद मूल्य उनकी लागत के अनुरूप नहीं है। दोनों पक्ष अपने-अपने स्तर पर किसानों और उपभोक्ताओं के हित की बात कर रहे हैं।

     

  • राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम से बदली योहिनापाली के नीलाम्बर की किस्मत

    राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम से बदली योहिनापाली के नीलाम्बर की किस्मत

    राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम से बदली योहिनापाली के नीलाम्बर की किस्मत

    10 से 65 लीटर पहुँचा दूध उत्पादन

    ​रायपुर

         सारंगढ़ तहसील स्थित ग्राम योहिनापाली के पशुपालक श्री नीलाम्बर पटेल के लिए पशुपालन अब केवल जीवन-यापन का जरिया नहीं रहा, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन चुका है। राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (NAIP) और पशुपालन विभाग के निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन से उनके पशुधन में नस्ल सुधार हुआ, जिससे उनके जीवन में एक अभूतपूर्व बदलाव आया है।
           ​कुछ वर्षों पूर्व तक नीलाम्बर के पास केवल 6 देशी नस्ल की गायें थीं, जिनसे प्रतिदिन कुल मिलाकर मात्र 10 से 15 लीटर दूध ही मिल पाता था। कम उत्पादन के कारण सीमित आय में परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था करना और खेती में निवेश करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इस संघर्षपूर्ण स्थिति से बाहर निकलने के लिए उन्होंने पशुपालन विभाग से संपर्क किया और राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत अपनी गायों में कृत्रिम गर्भाधान कराने का निर्णय लिया।
    ​नस्ल सुधार के इस निर्णय से उनके पशुधन की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। आज उनके पास 2 एच.एफ. क्रॉसब्रीड और 4 जर्सी क्रॉसब्रीड दुधारू गायें हैं, जबकि इसी प्रक्रिया से जन्मी एक जर्सी क्रॉसब्रीड बछिया उनके डेयरी व्यवसाय के उज्ज्वल भविष्य की नींव बन रही है। उन्नत नस्ल की गायों के आने से दूध उत्पादन में क्रांतिकारी उछाल आया है और अब प्रतिदिन लगभग 60 से 65 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। नीलाम्बर इस दूध को स्थानीय निजी होटलों और ग्राहकों को 50 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन 2,400 से 2,600 रुपए की सीधी आय होती है। इस प्रकार उनकी मासिक आय 72,000 से 78,000 रुपए और वार्षिक आय लगभग 8.76 लाख से 9.36 लाख रूपए तक पहुँच गई है।
            ​इस सफलता में पशुपालन विभाग की स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का भी निरंतर सहयोग रहा है। पशुओं को समय-समय पर लगने वाले टीके,कृमिनाशन, जूं-नाशन, स्वास्थ्य परीक्षण और रोग नियंत्रण के तकनीकी मार्गदर्शन से दुग्ध उत्पादन में स्थिरता बनी हुई है। इसके साथ ही, नीलाम्बर ने पशुपालन को कृषि से जोड़कर एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। वे पशुओं से प्राप्त गोबर से जैविक खाद तैयार कर अपने खेतों में उपयोग कर रहे हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों का खर्च कम हुआ है और भूमि की उर्वरता भी बनी हुई है।
             ​नीलाम्बर पटेल का मानना है कि सही तकनीक, शासकीय मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत से पशुपालन ग्रामीण परिवारों के सशक्तिकरण और स्थायी आय का एक मजबूत जरिया बन सकता है। योहिनापाली की यह सफलता की कहानी आज क्षेत्र के अन्य ग्रामीण पशुपालकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

  • दूध की मिलावट जांच होगी ऑन-द-स्पॉट, 7 मिनट में रिपोर्ट

    दूध की मिलावट जांच होगी ऑन-द-स्पॉट, 7 मिनट में रिपोर्ट

    करनाल.

    दूध में फॉर्मेलिन जैसे हानिकारक रसायनों की मिलावट की जांच अब आसान बनाने की दिशा में आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने अहम कदम उठाया है।

    एनडीआरआई ने दूध में फॉर्मेलिन का पता लगाने वाली पेपर आधारित स्ट्रिप तकनीक के व्यावसायिक उपयोग के लिए अहमदाबाद की एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है। संस्थान के अनुसार वर्ष 2025 से अब तक कंपनी को हस्तांतरित की जाने वाली यह उसकी 10वीं तकनीक है। यह समझौता सतत एवं जलवायु-अनुकूल डेयरी व खाद्य मूल्य श्रृंखला पर आयोजित 13वें राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में हुआ। उद्घाटन सत्र में एनडीआरआई निदेशक डॉ. धीर सिंह ने पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी के लिए तीन सूत्रीय एजेंडा रखा।

    कार्यक्रम में एनडीआरआई और एनजीएए के बीच अगले पांच वर्षों के लिए संयुक्त शैक्षणिक एवं विकासात्मक गतिविधियों को जारी रखने के एमओयू का नवीनीकरण भी किया गया। वहीं एनजीएए ने नवनिर्मित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डेयरी औपचारिक रूप से संस्थान को सौंप दिया। सेमिनार में डायमंड और गोल्डन जुबली बैच के पूर्व छात्रों को परिजनों की मौजूदगी में सम्मानित किया गया।

  • चाय से लेकर रात के सफर तक महंगा! मुंबई में मंगलवार से आम आदमी पर बढ़ा खर्च

    चाय से लेकर रात के सफर तक महंगा! मुंबई में मंगलवार से आम आदमी पर बढ़ा खर्च

    नई दिल्‍ली/ मुंबई 
     हर नया महीना अपने साथ जिंदगी और जेब से जुड़े कुछ बदलाव जरूर लेकर आता है. नया महीना सितंबर शुरू हो चुका है. कैलेंडर बदलते ही रसोई गैस, इनकम टैक्स, दूध के भाव से लेकर हवाई यात्रा तक के कई अहम नियम बदल चुके हैं. इनमें से कुछ बदलाव जहां आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाएंगे, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो आपकी जेब पर सीधा बोझ डालेंगे. अगर आप भी अनजाने में अतिरिक्त चार्ज या जुर्माने से बचना चाहते हैं, तो 1 सितंबर से लागू हुए इन 5 बड़े बदलावों के बारे में जान लीजिए। 

    सितंबर के पहले दिन तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका दिया है. 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹9.50 की बढ़ोतरी कर दी गई है. इसके अलावा 5 किलोग्राम वाले नॉन-डोमेस्टिक सिलेंडर का भाव भी ₹2 बढ़ाकर ₹762 से ₹764 कर दिया गया है. इससे होटल और रेस्टोरेंट का खाना महंगा हो सकता है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 

    महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में रहने वालों के लिए 1 सितंबर की तारीख महंगाई की मार लेकर आई है. एक ही दिन में तीन अलग-अलग मोर्चों पर आम आदमी की जेब पर असर पड़ा है. दूध, सीएनजी-पीएनजी और ऑटो-टैक्सी का किराया, तीनों एक साथ महंगे हो गए हैं. गैस कंपनी महानगर गैस ने सीएनजी और घरेलू पीएनजी के दाम बढ़ा दिए हैं, टैक्सी और ऑटो का न्यूनतम किराया भी बढ़ गया है, और तबेले का दूध भी अब पहले से महंगा मिलेगा। 

    सबसे पहले बात गैस की. महानगर गैस यानी एमजीएल ने सोमवार को बताया कि मुंबई और आसपास के इलाकों में सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो का इजाफा किया गया है. अब यहां सीएनजी 88 रुपये प्रति किलो में मिलेगी. घरेलू पीएनजी की कीमत भी 1 रुपये प्रति एससीएम बढ़ाई गई है. यह बढ़ोतरी 1 सितंबर की आधी रात से ही लागू हो चुकी है। 

    कंपनी का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर उनकी लागत पर पड़ रहा है. कंपनी को महंगे दामों पर स्पॉट आरएलएनजी आयात करनी पड़ रही है, इसलिए यह बढ़ोतरी जरूरी हो गई। 

    दूसरा झटका सफर करने वालों को लगा है. मुंबई महानगर क्षेत्र परिवहन प्राधिकरण यानी एमएमआरटीए ने ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. अब ऑटो का न्यूनतम किराया 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का न्यूनतम किराया 33 रुपये हो गया है. टैक्सी का प्रति किलोमीटर किराया 20.66 रुपये से बढ़कर 21.90 रुपये हो गया है, जबकि ऑटो का किराया 17.14 रुपये से बढ़कर 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। 

    पहले 1.5 किलोमीटर के लिए टैक्सी में अब 31 की जगह 33 रुपये देने होंगे. ड्राइवरों को अपने मीटर नई दरों के हिसाब से कैलिब्रेट कराने के लिए नवंबर के अंत तक का समय मिला है, वरना जुर्माना भरना पड़ सकता है. मुंबई में साढ़े चार लाख से ज्यादा ऑटो और 50 हजार से अधिक टैक्सियां चलती हैं. इससे पहले किराया फरवरी 2025 में बढ़ा था, यानी करीब 18 महीने बाद यह बढ़ोतरी हुई है। 

    तीसरा और सबसे सीधा असर दूध पर पड़ा है. आज से तबेले का दूध 9 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है. अब यह 93 की जगह 102 रुपये प्रति लीटर मिलेगा. यह नई कीमत अगले साल 28 फरवरी तक लागू रहेगी। 

    दूध उत्पादकों का कहना है कि पशु आहार जैसे अनाज, तूर चुनी और चना चुनी की कीमतें 25 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं, इसलिए यह फैसला लेना पड़ा।  

    दूध के दाम बढ़े
    मुंबई और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को अब दूध लेने के लिए ज्‍यादा दाम चुकाने होंगे. मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने डेयरी फार्मों से मिलने वाले भैंस के दूध के थोक दाम सीधे ₹93 से बढ़ाकर ₹102 प्रति लीटर कर दिए हैं. दूध की कीमतों में हुआ यह ₹9 का भारी इजाफा 28 फरवरी तक लागू रहेगा. इस बढ़ोरती से दूध के साथ ही दूध से बने सभी डेयरी उत्पाद महंगे हो जाएंगे। 

    LPG e-KYC की डेडलाइन खत्म
    एलपीजी कनेक्‍शन की ई-केवाईसी कराने की अंतिम तारीख 31 अगस्त थी, जो अब बीत चुकी है. आपने अगर अपने घरेलू रसोई गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं कराई है, तो आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. जिन उपभोक्ताओं ने यह प्रोसेस पूरा नहीं किया है, उन्हें आगे गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने और बैंक खाते में सब्सिडी हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 

    ITR फाइल करने पर लगेगा जुर्माना
    असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नॉन-ऑडिट खातों वाले टैक्सपेयर्स के पास बिना पेनाल्टी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-3 और ITR-4) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त थी. अगर आप इस डेडलाइन से चूक गए हैं, तो अब रिटर्न फाइल करने पर आपको लेट फीस चुकानी होगी। 

    बोर्डिंग पास पर मुहर का झंझट खत्म
    विदेश यात्रा करने वाले भारतीय यात्रियों के लिए एक बड़ा और राहत भरा नियम लागू हुआ है. ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने एयरपोर्ट्स पर इमिग्रेशन काउंटर पर फिजिकल बोर्डिंग पास पर मुहर (स्टैम्प) लगाने की व्यवस्था को बंद कर दिया है. अब अंतरराष्ट्रीय यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या डिजिटल कॉपी दिखाकर तेजी से इमिग्रेशन क्लीयर कर सकेंगे, जिससे लंबी कतारों और समय की बर्बादी से मुक्ति मिलेगी। 

  • त्योहारों से पहले महंगाई की मार! दूध के दाम ₹9 बढ़े, जानें कब से लागू होंगी नई कीमतें

    त्योहारों से पहले महंगाई की मार! दूध के दाम ₹9 बढ़े, जानें कब से लागू होंगी नई कीमतें

    मुंबई

    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आम लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। मुंबई में 1 सितंबर से दूध की थोक कीमत में सीधे 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने जा रही है। मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (MMPA) ने दूध के दाम बढ़ाने का फैसला किया है। इसके बाद ताजा भैंस के दूध का थोक भाव 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा।

    1 सितंबर से लागू होगी नई कीमत
    मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के फैसले के मुताबिक, नई दर 1 सितंबर 2026 से लागू होगी और 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी। यानी मुंबईकरों को अगले करीब छह महीने तक बढ़ी हुई कीमतों पर दूध खरीदना पड़ेगा। इसके बाद कीमतों की दोबारा समीक्षा की जाएगी।

    इससे पहले फरवरी 2026 में दूध का थोक भाव 91 रुपये से बढ़ाकर 93 रुपये प्रति लीटर किया गया था। अब एक बार में 9 रुपये की वृद्धि की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह MMPA के करीब 70 साल के इतिहास में सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी बताई जा रही है।

    क्यों बढ़ाए गए दूध के दाम?
    दूध उत्पादकों ने कीमत बढ़ाने के पीछे पशु चारे और दूध देने वाले पशुओं की बढ़ती लागत को प्रमुख कारण बताया है। उत्पादकों के मुताबिक, पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले अनाज, तूर चुनी और चना चुनी जैसी चीजों की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा चारा, पेंड और अन्य जरूरी सामग्री भी महंगी हुई है।

    दूध देने वाले पशुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी उत्पादकों की लागत बढ़ाई है। ऐसे में दूध उत्पादन का खर्च बढ़ने का असर अब उसकी थोक कीमत पर डाला जा रहा है।

    3,000 से ज्यादा विक्रेताओं पर असर
    MMPA के चेयरमैन सी.के. सिंह के मुताबिक, मुंबई में 3,000 से अधिक खुदरा विक्रेताओं के जरिए ताजा भैंस का दूध बेचा जाता है। थोक कीमत 93 से बढ़कर 102 रुपये होने के बाद इस पूरे सप्लाई नेटवर्क पर असर पड़ेगा।

    यहां यह समझना जरूरी है कि 102 रुपये प्रति लीटर घोषित थोक दर है। खुदरा बाजार में ग्राहक को मिलने वाली अंतिम कीमत अलग हो सकती है और यह विक्रेता तथा वितरण लागत पर निर्भर करेगी।

    त्योहारी सीजन में बढ़ेगा घरेलू बजट का बोझ
    दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हो रही है जब देश में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। दूध का इस्तेमाल सिर्फ रोजाना पीने के लिए ही नहीं, बल्कि दही, पनीर, मिठाई, खीर और दूसरी कई चीजों में भी बड़े पैमाने पर होता है।

    ऐसे में दूध महंगा होने का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ने के साथ-साथ दूध से बने दूसरे उत्पादों की लागत पर भी पड़ सकता है। खासकर त्योहारों के दौरान दूध और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने से इसका असर और ज्यादा महसूस हो सकता है।

  • सेहत के लिए फायदेमंद होगा ऊंटनी के दूध का पनीर, बीकानेर के वैज्ञानिकों ने किया तैयार

    सेहत के लिए फायदेमंद होगा ऊंटनी के दूध का पनीर, बीकानेर के वैज्ञानिकों ने किया तैयार

    बीकानेर
    रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले ऊंट अब केवल परिवहन या दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध से विशेष प्रकार का पनीर तैयार कर एक नई उपलब्धि हासिल की है. यह पनीर ऊंटनी और गाय के दूध के मिश्रण से बनाया गया है, जो प्रोटीन, खनिज तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है. बीकानेर के वैज्ञानिकों की यह पहल न केवल डेयरी क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है, बल्कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। 

    एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. मितुल बुंबडिया और डॉ. राजेंद्र कुमार ने प्रयोगशाला स्तर पर सिट्रिक अम्ल की सहायता से इस विशेष पनीर को तैयार किया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊंटनी के दूध में सामान्य गाय या भैंस के दूध की तुलना में प्रोटीन की संरचना अलग होती है, जिसके कारण इसे सीधे फाड़कर पनीर बनाना संभव नहीं होता. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में 30 प्रतिशत गाय का दूध मिलाकर उसकी जमावट क्षमता बढ़ाई. तैयार पनीर में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ऊंटनी के दूध का है। 

    पनीर को सात दिनों तक रखा जा सकता है सुरक्षित
    वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पनीर का स्वाद हल्का नमकीन है और इसे पांच से सात दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. खास बात यह है कि यह पनीर पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी माना जा रहा है. ऊंटनी के दूध में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. यही कारण है कि इस उत्पाद को औषधीय गुणों वाला दुग्ध उत्पाद भी माना जा रहा है। 

    ऊंटनी के दूध से तैयार पनीर लोगों के लिए बेहतर विकल्प
    डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि भारत में पनीर का उपयोग दैनिक भोजन से लेकर कई प्रकार के व्यंजनों में बड़े स्तर पर किया जाता है. ऐसे में ऊंटनी के दूध से तैयार यह पनीर लोगों के लिए एक नया और स्वास्थ्यप्रद विकल्प साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि यदि बाजार में इसकी मांग बढ़ती है, तो बड़े स्तर पर उत्पादन की दिशा में भी काम किया जाएगा। 

    ऐसे तैयार होता है ऊंटनी के दूध से पनीर
    पनीर तैयार करने की प्रक्रिया भी वैज्ञानिकों ने साझा की है. सबसे पहले ऊंटनी के दूध को करीब 90 डिग्री तापमान तक गर्म किया जाता है. इसके बाद इसे थोड़ा ठंडा कर विशेष अनुपात में तैयार मिश्रण के साथ फाड़ा जाता है, जिससे पनीर तैयार हो जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे शोध और प्रयोगों के बाद उन्हें अच्छे परिणाम मिले हैं और उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करने में सफलता मिली है.

    एनआरसीसी अब इस तकनीक को पशुपालकों और किसानों तक पहुंचाने की तैयारी भी कर रहा है. यदि कोई किसान या पशुपालक ऊंटनी के दूध से पनीर बनाना सीखना चाहता है, तो वह केंद्र में आकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है. इससे ऊंट पालन से जुड़े लोगों की आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। 

  • आम आदमी को एक और झटका: अमूल और मदर डेयरी के बाद वेरका दूध के दाम भी बढ़े

    आम आदमी को एक और झटका: अमूल और मदर डेयरी के बाद वेरका दूध के दाम भी बढ़े

    चंडीगढ़
     ट्राई सिटी के लोगों को अब वीरवार से वर्क का दूध महंगा खरीदना पड़ेगा। वेरका मिल्क प्लांट मोहाली ने भी दूध के दाम बढ़ाने का फैसला किया है। नई दरें 14 मई यानी वीरवार सुबह से लागू होंगी।

    जारी आदेश के अनुसार, वेरका ने विभिन्न श्रेणियों के दूध के दामों में प्रति लीटर 2 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। इसके तहत 500 एमएल फुल क्रीम दूध अब 35 रुपये की बजाय 36 रुपये में मिलेगा, जबकि स्टैंडर्ड दूध 32 से बढ़कर 33 रुपये हो गया है। डबल टोंड दूध के दाम भी 26 से बढ़ाकर 27 रुपये प्रति पैकेट कर दिए गए हैं।

    गाय का दूध अब 31 रुपये में मिलेगा
    इसके अलावा 500 एमएल गाय का दूध अब 31 रुपये में उपलब्ध होगा। एक लीटर फुल क्रीम दूध की कीमत 69 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये कर दी गई है, जबकि स्टैंडर्ड दूध अब 63 रुपये की बजाय 65 रुपये में मिलेगा। दो लीटर फुल क्रीम दूध के लिए उपभोक्ताओं को अब 140 रुपये और स्टैंडर्ड दूध के लिए 128 रुपये चुकाने होंगे।

    मदर डेयरी और अमूल ने भी बढ़ाए दाम
    गौरतलब है कि बुधवार को मदर डेयरी और अमूल ने भी दामों में बढ़ोतरी की है। मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। वहीं, अमूल ने भी दो रुपये की बढ़ोतरी की है। बढ़ी हुई दरें बृहस्पतिवार से लागू होंगी। बढ़ोतरी का कारण उत्पादन लागत में वृद्धि बताया गया है।

     

  • उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन बन रहा तरक्की का आधार स्तंभ

    उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन बन रहा तरक्की का आधार स्तंभ

    31 जिलों की महिलाओं ने किया पांच हजार करोड़ का दूध का कारोबार

    योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं ने बनाया रिकॉर्ड, 10 लाख लीटर रोज कर रहीं दूध का संग्रहण

    उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन बन रहा तरक्की का आधार स्तंभ

    प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने की अभूतपूर्व तरक्की

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार की योजनाओं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश की लाखों महिलाएं आज आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत आधारशिला बन चुकीं हैं।

    प्रदेश के 31 जिलों में सक्रिय महिला समूहों ने प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि करीब 5000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार भी किया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। छह हजार से अधिक गांवों की महिलाएं इस अभियान से जुड़कर अभूतपूर्व प्रगति कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर ये महिलाएं दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

    स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं
    यह मॉडल न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि उन्हें उद्यमी के रूप में स्थापित कर रहा है। इससे गांवों में पलायन कम होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। योगी सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के सहारे ग्रामीण महिलाओं का यह नेटवर्क आने वाले समय में प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश में राज्य आजीविका मिशन तरक्की का आधार स्तंभ बन रहा है। प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने दुग्ध संग्रहण के जरिए अभूतपूर्व तरक्की की है।

    विभिन्न जिलों में संभाली कमान
    प्रदेश में विभिन्न महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (एमपीसीएल) इस बदलाव की धुरी बनी हुई हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’ बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा जिलों में कार्यरत है। पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’ बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र और वाराणसी में सक्रिय है। सामर्थ्य एमपीसीएल प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी और कानपुर नगर में महिलाओं को सशक्त बना रही है। गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल’ देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में काम कर रही है। तराई क्षेत्र में ‘सृजन एमपीसीएल’ बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर में नई संभावनाएं गढ़ रही है।

  • चाय और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का डर, LPG की किल्लत से महंगे हो सकते हैं दाम

    चाय और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का डर, LPG की किल्लत से महंगे हो सकते हैं दाम

    नई दिल्ली
    ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है. कई जगह लोगों को लंबी लाइनों में लगकर महंगे दाम पर गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. एलपीजी की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों तक पहुंच गया है. चाय बेचने वालों ने भी चाय की कीमत 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दी है. यह संकट सिर्फ रेस्टोरेंट और होटल तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध के कारोबार पर भी इसका असर पड़ रहा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

    पहले गल्फ देशों से 85-90 प्रतिशत एलपीजी आती थी, लेकिन अब आयात पर संकट आ गया है. जिससे घरेलू गैस के साथ-साथ इंडस्ट्रीज को भी मार पड़ रही है. रेस्टोरेंट, होटल पहले से परेशान थे और अब डेयरी वाले भी इसकी मार खा रहे हैं. डेयरी उद्योग में एलपीजी का इस्तेमाल बहुत जरूरी है. दूध को पाश्चराइजेशन (खास तापमान पर गर्म करके बैक्टीरिया मारना) के लिए बड़ी मात्रा में गैस चाहिए. बिना नियमित गैस के दूध जल्दी खराब हो सकता है. छोटे-मध्यम डेयरी प्लांट्स को यह समस्या सबसे ज्यादा झेलनी पड़ रही है. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कई डेयरी मालिकों ने बताया कि गैस न मिलने से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के काम में रुकावट आ रही है. इससे दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

    मुश्किल में पड़ी दूध की पैकेजिंग
    इस इंडस्ट्री में सबसे बड़ी समस्या पैकेजिंग की है. दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन बनाने वाली फैक्टरियां भी एलपीजी पर निर्भर हैं. इन फैक्टरियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही, इसलिए प्रोडक्शन धीमा हो गया है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गोवर्धन डेयरी के फाउंडर देवेंद्र शाह ने कहा, “हमारे पास अभी सिर्फ 10 दिन का पैकेजिंग मटेरियल स्टॉक बचा है. अगर सप्लाई जल्द नॉर्मल नहीं हुई तो दूध सप्लाई करना मुश्किल हो जाएगा.” चेंबूर के सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी चेतावनी दी, “अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो पूरी डेयरी इंडस्ट्री बड़े संकट में फंस सकती है।

    दूध स्टोर करने की क्षमता कम
    इसके अलावा मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में बताया गया है कि बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के अनुसार, हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हुए. छोटी डेयरियों के पास दूध स्टोर करने की क्षमता नहीं है. इसलिए वे गाय और भैंस का दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं. यह संकट सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. देश के कई हिस्सों में डेयरी ऑपरेटर्स इसी तरह की शिकायतें कर रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट पहले से दूध के ऑर्डर कम कर रहे हैं. अगर पैकेजिंग रुक गई तो दुकानों पर दूध के पैकेट कम मिलेंगे. इससे आम लोग प्रभावित होंगे, खासकर शहरों में जहां लोग पैकेज्ड मिल्क पर निर्भर हैं. गांवों में जहां ढीला दूध बिकता है, वहां भी प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है।

    डेयरी मालिकों की मांग क्या है?
    डेयरी मालिकों की मांग है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई प्राथमिकता से बढ़ाई जाए. उनका कहना है कि दूध एक जरूरी चीज है, इसे संकट में नहीं छोड़ना चाहिए. अगर 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं या उपलब्धता कम हो सकती है. कुछ जगहों पर किसान बायोगैस जैसे विकल्प अपना रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर यह मुश्किल है।

    भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात करता है. पहले भारत का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और एलपीजी सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था. लेकिन ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कच्चे तेल की सप्लाई कुछ हद तक संभाली है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों के लिए गैस की सप्लाई कम कर दी गई है और होटल-रेस्तरां जैसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी में भी कटौती की गई है।

    यह संकट अस्थायी है, लेकिन इसका असर आम आदमी तक पहुंच रहा है. पहले रेस्टोरेंट में एक्स्ट्रा चार्ज लगे, अब दूध पर खतरा मंडरा रहा है. सरकार को जल्द कदम उठाने होंगे ताकि दूध जैसी बेसिक चीज प्रभावित न हो।