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  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ‘नो रिटर्न’ पॉलिसी के बाद ईरान संग नए युद्ध की आशंका?

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ‘नो रिटर्न’ पॉलिसी के बाद ईरान संग नए युद्ध की आशंका?

    यरुशलम
    पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना अब गाजा, दक्षिणी लेबनान और सीरिया से पीछे नहीं हटेगी. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने ऐलान किया है कि IDF इन तीनों इलाकों में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चित समय तक तैनात रहेगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका स्थायी युद्धविराम की कोशिशों में जुटा है और कई देश तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। 

    लेकिन इजरायल का जवाब साफ है. पहले सुरक्षा, फिर कूटनीति. इजरायल काट्ज ने कहा कि जब तक इजरायल को अपने नागरिकों की सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलती, तब तक सेना की वापसी का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने ईरान को भी सीधी चेतावनी दी. अगर ईरान या उसके सहयोगी इन सुरक्षा क्षेत्रों पर हमला करते हैं, तो इजरायल "पूरी ताकत" से जवाब देगा। 

    इजरायली शासन की तरफ से इस तरह के विवादित बयान नए नहीं. चाहे वो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हों, रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज हों या नेतन्याहू सरकार के अन्य मंत्री, सभी की एक भाषाएं सुनने को मिल जाती हैं. वो इजरायल काट्ज हैं जिन्होंने पूरे लेबनान को जलाने की चेतावनी दी, वो पीएम नेतन्याहू ही हैं जिन्होंने पूरे फिलिस्तीन और ईरान को मिटा देने तक की बात की. तो आइए समझतें हैं कि आखिर लेबनान, गाजा और सीरिया से इजरायली सेना वापसी क्यों नहीं करेगी और नेतन्याहू शासन का प्लान क्या है। 

    गाजा में शुरू जंग लेबनान-ईरान तक फैली
    गाजा में जंग अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुई थी. लेकिन यह बहुत पहले ही साफ हो चुका है कि यह आतंकवाद विरोधी अभियान नहीं रह गया है. इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन के मुताबिक, गाजा के करीब 70 फीसदी हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण है. सरकार का अगला लक्ष्य 100 फीसदी नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है। 

    इजरायल की रणनीति तीन हिस्सों में बंटी हुई है.
    पहला, हमास की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म करना. दूसरा, बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना. तीसरा, सीमा पर स्थायी सुरक्षा बफर बनाना ताकि भविष्य में 7 अक्टूबर जैसा हमला दोबारा न हो. हालांकि इसकी कीमत बहुत भारी रही है. गाजा में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. बड़ी आबादी विस्थापित हो चुकी है. भोजन, दवाइयों और ईंधन की भारी कमी बनी हुई है. इजरायल का कहना है कि यह दबाव हमास को कमजोर करने के लिए जरूरी है। 

    लेबनान में अब पीछे हटने को तैयार नहीं इजरायल
    दूसरा बड़ा मोर्चा दक्षिणी लेबनान है. मार्च महीने में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया. इसके बाद इजरायल ने जमीनी सैन्य अभियान शुरू किया. अब रक्षा मंत्री काट्ज का कहना है कि जब तक पूरे लेबनान में हिजबुल्लाह पूरी तरह हथियार नहीं रख देता, तब तक सेना वापस नहीं जाएगी. यानी सिर्फ सीमा से हटना अब इजरायल का लक्ष्य नहीं है. वह चाहता है कि हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म हो। 

    इस युद्ध में लेबनान को भारी नुकसान हुआ है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक करीब 4,300 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इजरायल के भी 38 सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार मारे गए हैं. इसके बावजूद तेल अवीव अपने फैसले पर अड़ा हुआ है। 

    सीरिया में 'लो-नॉइज ऑक्यूपेशन'
    तीसरा मोर्चा सीरिया है. यहां इजरायल की रणनीति थोड़ी अलग है. दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के कमजोर पड़ने के बाद इजरायल ने सीमा से लगे बफर जोन में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है.रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल अब करीब 235 वर्ग किलोमीटर इलाके में प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है. इसमें माउंट हर्मोन से लेकर यरमूक नदी तक का क्षेत्र शामिल बताया जाता है। 

    विशेषज्ञ इसे "लो-नॉइज ऑक्यूपेशन" कहते हैं. यानी इजरायल सीरिया में बिना बड़े युद्ध के धीरे-धीरे जमीन पर पकड़ मजबूत कर रहा है. बताया जाता है कि दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच इजरायल ने सीरिया के भीतर 800 से ज्यादा सैन्य अभियान चलाए. कुछ अभियान सीमा से 60 किलोमीटर से ज्यादा अंदर तक पहुंचे. इजरायल का कहना है कि यह कदम "जिहादी संगठनों" को सीमा से दूर रखने के लिए उठाया गया है। 

    लेबनान-गाजा की जंग में ईरान का क्या रोल?
    गाजा में हमास. लेबनान में हिजबुल्लाह और सीरिया में ईरान समर्थित कई सशस्त्र गुट. इजरायल इन तीनों को ईरान के "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" का हिस्सा मानता है. यही वजह है कि तेल नेतन्याहू शासन इन तीनों मोर्चों को एक साथ देख रहा है. काट्ज ने साफ कहा कि अगर ईरान ने सीधे हमला किया, तो जवाब भी सीधे ईरान को मिलेगा। 

    दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख दिखाया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान के लोगों या नेतृत्व को निशाना बनाया गया, तो जवाब तुरंत और पूरी ताकत से दिया जाएगा. यानी दोनों देशों की भाषा लगातार आक्रामक होती जा रही है. यही सबसे बड़ी चिंता है। 

    क्या अमेरिका की बात अब नहीं सुन रहा इजरायल?
    अमेरिका लगातार युद्धविराम की कोशिश कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र भी सैन्य वापसी की मांग कर चुका है. लेकिन इजरायल फिलहाल किसी दबाव में झुकता नहीं दिख रहा. काट्ज ने साफ कहा कि इजरायल ने कभी अमेरिका से अपने युद्ध लड़ने को नहीं कहा. इसलिए सुरक्षा से जुड़े फैसले भी वही खुद करेगा. यानी अब इजरायल अपनी स्वतंत्र सुरक्षा नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। 

    इजरायल की नई "नो-एग्जिट डॉक्ट्रिन" पूरे मध्य पूर्व की राजनीति बदल सकती है. अगर सेना लंबे समय तक गाजा, लेबनान और सीरिया में बनी रहती है, तो इन इलाकों का सुरक्षा संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. जितना लंबा सैन्य कब्जा रहेगा, उतना ही ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के साथ टकराव का खतरा बढ़ेगा. यही वजह है कि अब पूरी दुनिया की नजर एक सवाल पर टिकी है कि क्या यह रणनीति इजरायल को सुरक्षा देगी, या फिर पश्चिम एशिया को एक और बड़े युद्ध की तरफ धकेल रही है?

     

  • मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के कारण एयरस्पेस बंद, सैकड़ों फ्लाइट्स प्रभावित, कैंसिल और डायवर्ट

    मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के कारण एयरस्पेस बंद, सैकड़ों फ्लाइट्स प्रभावित, कैंसिल और डायवर्ट

    नई दिल्ली

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कई देशों के एयरस्पेस बंद होने के कारण पश्चिमी देशों की ओर जाने वाली उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं. कई एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े हैं, जिससे फ्लाइट का समय बढ़ गया है और यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में हालात बिगड़ने के बाद कई देशों ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) बंद कर दिया है. इसके कारण यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है. कुछ फ्लाइट को दक्षिणी मार्ग से ओमान, सऊदी अरब और मिस्र के ऊपर से होकर भेजा जा रहा है, जिससे ट्रैवल टाइम एक से दो घंटे तक बढ़ गया है.

    उड़ान की स्थिति चेक करने की सलाह
    नागरिक उड्डयन अधिकारियों के अनुसार, सैकड़ों उड़ानें रद्द या डायवर्ट की गई हैं. कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने यात्रियों को एडवाइजरी जारी कर पहले से उड़ान की स्थिति चेक करने को कहा है. ट्रांजिट यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कनेक्टिंग फ्लाइट्स के समय में बदलाव हुआ है. भारतीय एयरलाइंस पर भी इसका असर पड़ा है. दिल्ली-लंदन और अन्य यूरोपीय मार्गों पर उड़ानों को वैकल्पिक रास्तों से संचालित किया जा रहा है. कुछ फ्लाइट में ईंधन भरने के लिए अतिरिक्त टेक्निकल हॉल्ट भी करना पड़ रहा है.

    एयरलाइंस का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हालात सामान्य होते ही नियमित रूट बहाल कर दिए जाएंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि तनाव जारी रहा तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के समय और लागत पर और असर पड़ सकता है. फिलहाल यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा से संपर्क कर अपनी फ्लाइट की ताजा स्थिति की जानकारी लेते रहें.

    कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित
    मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कई प्रमुख एयरपोर्ट और देशों ने अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. इससे यूरोप, एशिया और नॉर्थ अमेरिका के बीच उड़ान संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. नीचे प्रमुख हवाई अड्डों और उनके हालात की जानकारी दी गई है:

    1. Dubai International Airport (DXB)

    दुनिया के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हब में शामिल इस एयरपोर्ट पर रात में हमला होने की खबर है. कई उड़ानें प्रभावित हुईं और संचालन बाधित रहा.

    2. Abu Dhabi International Airport (AUH)

    ड्रोन हमले की सूचना के बाद सभी प्रस्थान (Departures) अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए गए.

    3. Hamad International Airport (DOH)

    कतर का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हब 28 फरवरी की शाम से एयरस्पेस बंद है.

    4. Kuwait International Airport (KWI)

    ड्रोन हमले के खतरे के बाद एयरस्पेस 28 फरवरी से बंद. 

    5. Baghdad International Airport (ORBI)

    28 फरवरी दोपहर से एयरस्पेस बंद. यह रूट भारत-यूरोप के उत्तरी ओवरफ्लाइट कॉरिडोर को सीधे प्रभावित करता है.

    6. Tehran Imam Khomeini International Airport (IKA)
    लगातार एयरस्पेस बंद. फारस की खाड़ी और ओमान सागर के ऊपर संघर्ष क्षेत्र घोषित.

    7. Bahrain International Airport (BAH)
    एयरस्पेस बंद. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल हमला हुआ.

    8. King Abdulaziz International Airport (JED)
    एयरस्पेस आंशिक रूप से बंद. केवल निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से ही विमान संचालन की अनुमति.

    9. Israel
    देश का एयरस्पेस 6 मार्च तक बंद घोषित.

    10. Muscat International Airport (MCT)
    18 नॉटिकल माइल का नो-फ्लाई जोन घोषित. यूएई से आने-जाने वाली उड़ानों के लिए अस्थायी नया मार्ग तय.

    11. Sharjah International Airport / Ras Al Khaimah International Airport
    2 मार्च तक एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) सेवाएं बंद या सीमित.

    असर क्या पड़ा?
    लंबी दूरी और अतिरिक्त ईंधन की जरूरत के कारण एयरलाइंस की ऑपरेटिंग लागत बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो टिकट कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. साथ ही कार्गो और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की संभावना है. कुल मिलाकर, क्षेत्रीय तनाव का असर अब वैश्विक हवाई नेटवर्क और यात्रियों की जेब दोनों पर पड़ता दिख रहा है.

    ट्रांजिट यात्रियों को भारी असुविधा
    विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्षेत्रीय तनाव जारी रहा तो अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे उड़ान से पहले एयरलाइन से स्थिति की पुष्टि ज़रूर करें.