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  • धान के आंकड़ों में बड़ा खेल? कई जिलों में अचानक बढ़े किसान, रकबे में भारी गिरावट

    धान के आंकड़ों में बड़ा खेल? कई जिलों में अचानक बढ़े किसान, रकबे में भारी गिरावट

    कुरुक्षेत्र
    प्रदेश में धान के मंडी में पहुंचने से पहले ही मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (एमएफएमबी) पोर्टल पर बड़े धान घोटाले की नींव पड़ने लगी है। एमएफएमबी पोर्टल पर अभी तक ही गैर बासमती धान के पंजीकरण में गत वर्ष के मुकाबले धान का रकबा 4.73 लाख एकड़ घटने और 3.97 लाख किसानों की संख्या बढ़ने से इस पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने इसे बहुत बड़ा गड़बड़झाला बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पोर्टल पर दर्ज पंजीकरण में इस बात पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं, जिन जिलों में गत वर्ष नाम मात्र का गैर बासमती धान पंजीकृत था। महेंद्रगढ़, गुरुग्राम और हिसार जैसे जिलों में एकाएक पंजीकृत किसानों की संख्या कई हजारों में बढ़ गई है।

    एमएफएमबी के आंकड़ों में वर्ष 2025 में जहां पोर्टल पर 4,83,897 किसानों ने 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान का पंजीकरण कराया था। इस तीन अगस्त तक ही 8,81,128 किसानों ने 24,07,104 एकड़ गैर-बासमती धान पंजीकृत कर दिया है। आंकड़ों के इस खेल में साफ है कि रकबा करीब 4.73 लाख एकड़ कम हुआ, वहीं दूसरी ओर किसानों की संख्या करीब 3.97 लाख बढ़ गई है।

    पंजीकरण के इस पूरे खेल में अधिकारियों की ओर से किए गए सत्यापन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गत वर्ष किसानों ने 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान पंजीकृत किया था और कृषि विभाग द्वारा 30,16,285 एकड़ भूमि सत्यापित की है। पंजीकृत रकबे से करीब 1,36,093 एकड़ अधिक भूमि का सत्यापन भी अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है।

    इन जिलों के आंकड़ों पर बड़ा सवाल
    भिवानी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, नूंह और चरखी दादरी जिलों के आंकड़ों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। गत वर्ष इन छह जिलों में करीब 64,726 एकड़ धान का रकबा दर्ज था, इन जिलों में धान की सरकारी खरीद नहीं है। इस वर्ष इन जिलों में भी कुल रकबा घटा है और किसानों की संख्या बढ़ी है।

    भाकियू ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग
    भाकियू चढ़ूनी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश बैंस ने आरोप लगाए कि गत वर्ष धान खरीद में करीब 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस घोटाले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इस वर्ष भी यही स्थिति पैदा होगी। उन्होंने आंकड़ों का जिला, तहसील, गांव और खसरा नंबरवार सत्यापन कराए जाने की मांग की है।

     

  • 31 जुलाई है अंतिम तारीख, MSP पर फसल बिक्री और खाद लाभ के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ में कराएं पंजीकरण

    31 जुलाई है अंतिम तारीख, MSP पर फसल बिक्री और खाद लाभ के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ में कराएं पंजीकरण

    नई दिल्ली.

    हरियाणा के जिन किसानों ने अभी तक मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर खरीफ की फसलों का पंजीकरण नहीं कराया है, उनके पास 31 जुलाई तक पंजीकरण कराने का मौका है। इसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। यह आवश्यक इसलिए है, क्योंकि किसानों को खाद भी पोर्टल में दर्ज जमीन और फसल के अनुसार ही मिलेगी।

    फसल तैयार होने पर जब किसान मंडी में सरकारी एजेंसी के पास फसल बेचने जाएंगे तो पोर्टल में दर्ज फसल ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। फसल पंजीकरण कराने वाले किसान के पास परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) आइडी के रूप में होना चाहिए। किसानों को पंजीकरण में किसी प्रकार की असुविधा हो रही है तो वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के किसान टोल फ्री नंबर 1800-180-117 पर संपर्क कर सकते हैं।

    इसके अलावा कृषि विभाग के खंड कार्यालय से भी मदद ले सकते हैं। किसान अपने गांव के कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) अटल सेवा केंद्र या स्वयं अपने मोबाइल नंबर से fasal.haryana.gov.in पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को जागरूक करने के भी निर्देश दिए हैं।