Tag: MCD

  • भरभराकर गिरने का था खतरा, MCD ने पड़ोसी बिल्डिंग को भी गर्डर से सपोर्ट देकर शुरू किया ध्वस्तीकरण

    भरभराकर गिरने का था खतरा, MCD ने पड़ोसी बिल्डिंग को भी गर्डर से सपोर्ट देकर शुरू किया ध्वस्तीकरण

    नई दिल्ली
     सत्य निकेतन में खतरनाक घोषित की गई बिल्डिंग की हालत देखकर MCD की टीम के होश उड़ गए। अधिकारियों को डर था कि तोड़ने के दौरान बिल्डिंग भरभराकर गिर सकती है और एक बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए कार्रवाई शुरू करने से पहले ग्राउंड फ्लोर और बराबर वाली बिल्डिंग को लोहे के मोटे गर्डर से सपोर्ट दिया गया है। इसके बाद ही टॉप फ्लोर से तोड़फोड़ शुरू की गई। इस दौरान सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया।

    MCD के सीनियर अधिकारी के मुताबिक, बुधवार को टीम ने कार्रवाई से पहले पूरी बिल्डिंग का मुआयना किया। सत्य निकेतन की यह बिल्डिंग 5 दशक से ज्यादा पुरानी थी। बेसमेंट और 5 मंजिल की बिल्डिंग दो हिस्सों में बनी थी। करीब 2 दशक बाद पुराने स्ट्रक्चर पर बाकी मंजिलें बनाई गई थीं। 4 इंच की दीवारें खड़ी कर एक-एक मंजिल बनाई गई थी। पिलर भी नहीं था।

    बिल्डिंग गिराने के खतरे से पहले दिया सहारा
    अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग की हालत देखकर आशंका थी कि ऊपर के लिंटर पर हथौड़े चलाने से कंपन के कारण पूरा स्ट्रक्चर गिर सकता है। इसलिए तोड़ने से पहले इसे मजबूत किया गया। आगे और पीछे निकाले गए छज्जों समेत पूरे ग्राउंड फ्लोर पर मोटे लोहे के गर्डर लगाए गए। लिंटर डालने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की शटरिंग भी लगाई गई। बराबर वाली बिल्डिंग इससे सटी हुई है, इसलिए उसे भी गर्डर से सपोर्ट दिया गया।

    मशीन से नहीं, 20 मजदूरों से हो रही जर्जर बिल्डिंग की तोड़फोड़
    दोनों बिल्डिंगों को सुरक्षित करने के बाद MCD ने तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारी के अनुसार बिल्डिंग इतनी कमजोर है कि इसे तोड़ने के लिए जेसीबी या दूसरी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए 20 लेबर को मैनुअल तोड़फोड़ के लिए लगाया गया है। धूल-मिट्टी को रोकने के लिए पानी का छिड़काव भी हो रहा है।

  • सत्य निकेतन हादसे में किसकी गलती? HC ने MCD और बिल्डिंग मालिक दोनों पर उठाए सवाल

    सत्य निकेतन हादसे में किसकी गलती? HC ने MCD और बिल्डिंग मालिक दोनों पर उठाए सवाल

     नई दिल्ली
    दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतों के गिरने के मामले में दाखिल PIL पर सुनवाई की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और NHRC को नोटिस जारी किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे. कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी। 

    यह PIL सत्य निकेतन इलाके में कल हुई उस घटना के बाद दाखिल की गई, जिसमें लड़कों के लिए PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतें गिर गई थीं. इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे. हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. इमारतों में रहने वाले कई छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है. उन्होंने कहा कि MCD को इस दिशा में कुछ करना चाहिए। 

    हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अधिक गहरे और सार्थक तरीके से काम करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जो इमारतें गिरीं, उनमें आसपास के DU से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. कोर्ट ने कहा कि यह आम जानकारी है कि DU बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं देता, जिसके कारण छात्रों को PG का इस्तेमाल करना पड़ता है। 

    HC ने DU से बाहर से आने वाले कितने छात्र उसके कॉलेजों में पढ़ते हैं और यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, इसका डेटा मांगा है. कोर्ट ने MCD से पूछा कि क्या PG चलाने के लिए कोई नियम मौजूद हैं. MCD को इस बारे में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है। 

    इमारतों की अनुमति की जांच और PG हॉस्टल का ऑडिट
    हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि MCD के उच्चतम कार्यकारी स्तर पर यह जांच कराई जाए कि हादसे में गिरी इमारतें वैध अनुमति के साथ बनाई गई थीं या नहीं. अगर इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी तो इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है. कोर्ट ने गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है. इसके साथ ही MCD को PG हॉस्टलों का ऑडिट करने और यह जांचने का निर्देश दिया गया है कि उनका निर्माण संबंधित अनुमति और बिल्डिंग बायलॉज के तहत हुआ है या नहीं. सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि छात्र फ्लैट भी किराए पर लेते हैं. इस पर HC ने पूछा कि सरकार को कैसे पता चलता है कि कोई फ्लैट PG के तौर पर किराए पर दिया जा रहा है. कोर्ट ने PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या का डेटा देने को भी कहा.

    चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ PG हॉस्टल के मालिक की नहीं है. जिम्मेदारी MCD प्रशासन की भी है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि हर निर्माण नियमों के अनुसार किया जाए. HC ने कहा कि अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग होते तो शायद ऐसी त्रासदी को टाला जा सकता था. कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने MCD, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए इस आश्वासन को दर्ज किया कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि बचाव प्रयासों को दोगुना किया जाएगा, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। 

  • एमसीडी स्टैंडिंग कमिटी में बीजेपी बहुमत में, 27 जुलाई को चुना जाएगा चेयरमैन

    एमसीडी स्टैंडिंग कमिटी में बीजेपी बहुमत में, 27 जुलाई को चुना जाएगा चेयरमैन

    नई दिल्ली
     एमसीडी की स्टैंडिंग कमिटी के मेंबर्स का चुनाव होने के बाद 27 जुलाई को स्टैंडिंग कमिटी की पहली बैठक बुलाई गई है। डीएमसी एक्ट के अनुसार, मेंबर्स का चुनाव होने के बाद स्टैंडिंग कमिटी की पहली बैठक में ही स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन का चुनाव होना चाहिए।

    निगम सचिव कार्यालय ने जारी किया नोटिफिकेशन
    निगम सचिव कार्यालय ने स्टैंडिंग कमिटी के गठन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। दोनों पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 जुलाई है। चेयरमैन बनने के लिए कई सीनियर निगम पार्षद सीनियर नेताओं के सामने दावेदारी पेश करने में लगे हुए हैं।

    मार्च में स्टैंडिंग कमिटी के नौ मेंबर्स हुए रिटायर
    31 मार्च 2026 को स्टैंडिंग कमिटी के 18 मेंबर्स में से नौ मेंबर्स रिटायर हो गए थे। इनमें से छह मेंबर्स जोन से और तीन मेंबर्स हाउस से रिटायर हुए थे। 15 जुलाई 2026 को जोनल कमिटियों के गठन के साथ-साथ स्टैंडिंग कमिटी की खाली हुई नौ सीटों को भर दिया गया।

    स्टैंडिंग कमिटी में बीजेपी के पास कितने मेंबर
    इस समय स्टैंडिंग कमिटी में जोन और हाउस के सदस्यों को मिलाकर बीजेपी के 12 और आम आदमी पार्टी के छह मेंबर्स हैं। इस बार बीजेपी का एक मेंबर बढ़ गया है। स्टैंडिंग कमिटी के मेंबर्स पूरे होते ही डीएमसी एक्ट के तहत पहली बैठक में ही मेंबर्स किसी एक सदस्य को चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के रूप में चुनते हैं।

    बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत
    आपको बता दें कि एमसीडी की 12 वार्ड समितियों में से 10 में अध्यक्ष पद पर और निगम की स्थायी समिति की छह सीट में से पांच सीट जीतकर धमाकेदार जीत हासिल की है। वहीं आम आदमी पार्टी ने शेष दो वार्ड समितियों के अध्यक्ष पद और स्थायी समिति की एक सीट पर जीत दर्ज की है।

     

  • लैंडफिल साइटों पर बढ़ते कूड़े से निपटने को एमसीडी ने कदम उठाया

    लैंडफिल साइटों पर बढ़ते कूड़े से निपटने को एमसीडी ने कदम उठाया

    नई दिल्ली
     एमसीडी के लिए सभी 12 जोनों से निकलने वाला नया कूड़ा पुराने कूड़े की जगह परेशानी न बने, इससे पहले ही एमसीडी ने इसे ठिकाने लगाने की प्रक्रिया तेज करते हुए अलग-अलग पांच जगहों के लिए 5900 मीट्रिक टन कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए वर्क अवार्ड जारी कर दिया है। यह काम अलग-अलग कंपनियों को सौंपा गया है। एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि अब कंपनियां कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए अपना सेटअप लगाना शुरू कर देंगी। सेटअप होते ही नए कूड़े को ठिकाने लगाने का काम शुरू होगा।

    • एमसीडी गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट पर बने पुराने कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने में लगी हुई है।
    • गाजीपुर को छोड़कर बाकी दोनों साइट पर पुराने कूड़े को ठिकाने लगाने का काम काफी तेजी से चल रहा है।
    • अधिकारियों का कहना है कि गाजीपुर साइट पर कूड़ा प्रोसेस करने वाली कंपनी को प्रोसेस हुए कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए जगह नहीं मिल रही है।
    • इस वजह से यहां कूड़ा प्रोसेस करने की रफ्तार बहुत धीमी गति से चल रही है।
    • लगातार तीनों साइट्स पर डाले जा रहे लगभग 6000 मीट्रिक टन नए कूड़े ने परेशानी और बढ़ा रखी थी। क्योंकि एक तरफ जहां पुराने कूड़े के पहाड़ खत्म होते जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नए कूड़े का एक नया पहाड़ खड़ा होता जा रहा है।
    • इससे निपटने के लिए एमसीडी लंबे समय से नए कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए प्लानिंग बना रही थी।
    • तीनों साइट्स में से भलस्वा पर प्रतिदिन 4500 मीट्रिक टन से अधिक नया कूड़ा डाला जा रहा था।
    • इसलिए यहां समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही थी। इसके लिए सबसे पहले एमसीडी ने दूरदराज के एरिया से आने वाले नए कूड़े में भारी कटौती की।

    कहां कितना मीट्रिक टन नया कूड़ा प्रोसेस होगा
        भलस्वा लैंडफिल साइट 1800
        ओखला लैंडफिल साइट 1400
        नरेला-बवाना 1200
        गाजीपुर लैंडफिल साइट 800
        सिंघोला 700

  • MCD की प्रिंटिंग व्यवस्था पर सवाल, मेजरमेंट बुक न मिलने से विकास कार्य प्रभावित

    MCD की प्रिंटिंग व्यवस्था पर सवाल, मेजरमेंट बुक न मिलने से विकास कार्य प्रभावित

    नई दिल्ली

     एमसीडी में पिछले 4-6 महीने से मेजरमेंट बुक का भारी अकाल पड़ा हुआ है। मेजरमेंट बुक न होने की वजह से संबंधित डिविजनों (मेंटिनेंस) के तहत चल रहे हजारों कामों की मेजरमेंट बुक में एंट्री नहीं हो पा रही है। जब मेजरमेंट बुक में एंट्री ही नहीं हो पा रही है तो संबंधित डिविजनों में कॉन्ट्रैक्टर जितने भी काम कर रहे हैं उनकी कोई निगरानी नहीं हो रही है। इसका सीधा असर काम की क्वॉलिटी पर पड़ेगा।

    एमसीडी के पास खुद की प्रिटिंग प्रेस
    सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति तो तब है जबकि एमसीडी को मेजरमेंट बुक किसी बाहरी प्रिंटर से नहीं छपवानी, बल्कि सिविल लाइन स्थित अपनी ही प्रिंटिंग प्रेस पर छापनी है। बावजूद इसके पिछले कई महीनों से डिविजनों में मेजरमेंट बुक उपलब्ध नहीं हो पा रही। दिल्ली सरकार की ओर से सड़कें, गलियां और कॉलोनियों की टूटी पुलिया आदि बनाने के लिए भरपूर फंड उपलब्ध कराया हुआ है।

    MCD के 12 जोनों में चल रहे विकास कार्य
    वॉर्ड वाइज काम कराने के लिए संबंधित जोन की डिविजनों द्वारा टेंडर मांगे जाते हैं। टेंडर अलॉट होने के बाद जब कॉन्ट्रैक्टर काम शुरू करता है उसी दिन से मेजरमेंट बुक में एंट्री करने का काम शुरू हो जाता है। एमसीडी के 12 जोनों के तहत आने वाली मेंटिनेंस डिविजनों में हजारों काम चल रहे हैं। किसी वॉर्ड में कॉलोनी के अंदर ही सड़कें बनाने का काम चल रहा है तो कहीं पर गलियों के साथ-साथ नालियों को बनाया जा रहा है।

    कॉन्ट्रैक्टर को काम शुरू करने से पहले करनी होती है एंट्री
    इसके अलावा जिन कॉलोनियों में पुलिया टूटी हुई थी उन्हें भी दोबारा बनाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर जब काम शुरू करता है तो उसके हर दिन वह जो भी काम करता है उसकी एंट्री मेजरमेंट बुक में की जाती है। उदाहरण के रूप में अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर कहीं पर सड़क बनाने का काम कर रहा है तो सड़क बनाने से पहले वह पुरानी सड़क को तोड़ेगा। कॉन्ट्रैक्टर ने किस दिन कितनी सड़क तोड़ी यह सब मेजरमेंट बुक में दर्ज किया जाता है।

    प्रिंटिंग प्रेस अपनी, फिर मेजरमेंट बुक क्यों नहीं ?
    प्रिंटिंग प्रेस अपनी, प्रिंटिंग प्रेस पर काम करने वाला स्टॉफ भी अपना, पेपर की भी कोई कमी नहीं, बावजूद इसके मेजरमेंट बुक का अकाल पड़ना एमसीडी के प्रिंटिंग प्रेस विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डिविजन के लिए मेजरमेंट बुक का बड़ा महत्व है। कॉन्ट्रैक्टर को जो वर्कआर्डर मिलता है शुरुआत से लेकर आखिर तक छोटे से छोटे काम की एंट्री इसमें दर्ज होती है। मेजरमेंट बुक कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वजह से कई डिविजनों में काम शुरू नहीं हो पाए।