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  • 150 से अधिक म्यूल बैंक खातों व सिम का उपयोग कर 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा

    150 से अधिक म्यूल बैंक खातों व सिम का उपयोग कर 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सामने आया कि गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों से मेट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से लोगों को विश्वास में लेकर ठगी करता था। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी और 150 से अधिक साइबर घटनाओं को अंजाम दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम एवं 5 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। विभिन्न बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि को फ्रीज कराया है।

    जिले के शामगढ़ निवासी पीड़िता मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल अपडेट करने के बाद साइबर ठगों के संपर्क में आई थी। आरोपी ने स्वयं को NRI बताकर पीड़िता से शादी करने का विश्वास दिलाया। नकली फोटो और कथित परिजनों के माध्यम से व्हाट्सएप पर बातचीत कर पीड़िता का विश्वास हासिल किया गया। इसके बाद विदेश से गिफ्ट भेजने, गिफ्ट कस्टम में पकड़े जाने तथा कस्टम ड्यूटी एवं प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में राशि जमा कराई गई। इस तरह पीड़िता से 7 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने पर थाना शामगढ़ में प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई।

    पुलिस अधीक्षक मंदसौर  विनोद कुमार मीना के निर्देशन में प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की गई। टीम ने लगभग दो माह तक तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया और साइबर ठगी से जुड़े डिजिटल एवं बैंकिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा।

    लगातार किए गए तकनीकी विश्लेषण से आरोपियों की जानकारी प्राप्त होने के बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से राजस्थान के जयपुर में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ एवं विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरोह के एक अन्य सदस्य एवं मुख्य सरगना को बिहार के अरवल जिले से गिरफ्तार किया गया।

    150 से अधिक म्यूल बैंक खाते और सिम के जरिए चल रहा था नेटवर्क

    जांच में सामने आया कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क अलग-अलग स्तर पर काम कर रहा था। गिरोह द्वारा 150 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट एवं म्यूल मोबाइल सिम का उपयोग किया गया। अधिकांश मोबाइल सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली एवं बिहार से प्राप्त की गई थीं, जबकि कुछ सिम एवं बैंक खाते भोपाल से भी प्राप्त कर उपयोग किए गए।

    गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में ठगी की रकम निकालते थे। निश्चित समय अंतराल के बाद वह अपने स्‍थान बदल लेते थे। बैंक खाते फ्रीज होने पर संबंधित मोबाइल फोन, सिम, पासबुक एवं एटीएम आदि नष्ट कर दिए जाते थे और अगली ठगी के लिए नए मोबाइल, सिम एवं बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।

    गिरोह का एक मुख्य व्यक्ति विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि की जानकारी रखता था और सदस्यों को राशि निकालने तथा निर्धारित खातों में जमा करने के निर्देश देता था।

    मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। मेट्रिमोनियल साइट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश, गिफ्ट अथवा किसी अन्य आकर्षक प्रस्ताव के माध्यम से किए जा रहे संपर्क में सावधानी बरतें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, पासवर्ड एवं अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

     

  • नशामुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को बड़ी कामयाबी, योगी सरकार ने ड्रग नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    नशामुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को बड़ी कामयाबी, योगी सरकार ने ड्रग नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश को नशे के कारोबार से मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में ड्रग माफिया और नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई चेन के खिलाफ कार्रवाई तेज है। सरकार के इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए एएनटीएफ लखनऊ यूनिट और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की संयुक्त टीम ने राजधानी लखनऊ में नशीली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

    ट्रांसपोर्ट नगर में की गई कार्रवाई में करीब 228 किलोग्राम नशीली दवाएं बरामद हुई हैं। इनमें 9.60 लाख एल्जोमैक-0.5 (एल्प्राजोलाम) टैबलेट, 1.20 लाख स्पैसमोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल और कोडीनयुक्त ओनेरेक्स 100 एमएल कफ सिरप की 720 बोतलें शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद भी मिले। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    एक खेप से खुलने लगी पूरे नेटवर्क की कड़ी

    एएनटीएफ को ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की बड़ी खेप पहुंचने की सूचना मिली थी। 3 सितंबर को टीम ने मकान संख्या एस-363/364 के आसपास निगरानी शुरू की। इसी दौरान तीन लोग कार्टूनों को बोरियों में छिपाते दिखाई दिए। संदेह के आधार पर तलाशी लेने पर किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद हुईं। कार्रवाई में एफएसडीए की टीम भी शामिल रही। औषधि निरीक्षकों ने बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए।

    पूछताछ आगे बढ़ी तो सप्लाई नेटवर्क की अगली कड़ी सामने आई। किशन वासवानी और समीर अहमद ने दवाओं की आपूर्ति कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से होने की जानकारी दी। इसके आधार पर उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया।

    फर्म के दस्तावेजों की आड़ में हो रही थी बिलिंग

    जांच में सामने आया कि उमेश कुमार कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था। इसके एवज में सतेन्द्र सिंह को कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। एफएसडीए की जांच के दौरान कन्हैया फार्मा में प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों सहित सात प्रकार की दवाएं मिलीं। फर्म संचालक दवाओं के खरीद और बिक्री से संबंधित पूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सका। इसके बाद एफएसडीए ने कन्हैया फार्मा को सील कर दिया।

    पूछताछ में सामने आया एक और सप्लायर

    जांच का दायरा बढ़ाते हुए टीम ने शाद इरशाद से पूछताछ की। इसमें विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। इसके बाद उसे भी गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में विशाल ने शाद को नशीली दवाओं की आपूर्ति करने की बात बताई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कोडीन से जुड़े एक मामले में अमीनाबाद थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इसके बाद वह कथित तौर पर दूसरी फर्मों के माध्यम से नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा था। बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप के संबंध में विशाल ने इसे बृजेश वर्मा से खरीदने की बात भी बताई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब नेटवर्क की अन्य कड़ियों की भी जांच कर रही हैं।

    नशे के कारोबार पर सरकार का सख्त संदेश

    एएनटीएफ के मुताबिक किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया इस अवैध नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। सभी छह आरोपियों को धारा 8/21/22/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। बरामद दवाओं का नियमानुसार न्यायालय के समक्ष नमूनाकरण कराया जाएगा। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य एप के माध्यम से की गई। योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रदेश में नशीली दवाओं के कारोबार को केवल सड़क स्तर पर नहीं, बल्कि सप्लाई, बिलिंग और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क के स्तर पर निशाना बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाते हुए उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्रवाई करना है।