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  • बेटी की उच्च शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए मां ने शुरू की नियमित बचत, सालभर में जमा होंगी 12 हजार रुपये

    बेटी की उच्च शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए मां ने शुरू की नियमित बचत, सालभर में जमा होंगी 12 हजार रुपये

    महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ लेकर अनीता ने पेश की आर्थिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल

    रायपुर
    हर मां की ख्वाहिश होती है कि उसकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे, आत्मनिर्भर बने और अपने सपनों को साकार करे। बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ी रकम से ज्यादा जरूरी है समय रहते बचत की शुरुआत करना। इसी सोच को अपने जीवन में उतार रही हैं सरगुजा जिले की श्रीमती अनीता सिंह। वे महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की पूरी राशि अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर खोले गए सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। इस तरह शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता को उन्होंने बेटी की शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए नियमित बचत का माध्यम बना लिया है।

    अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी अनीता सिंह की यह पहल महिला आर्थिक सशक्तिकरण और बेटियों के सुरक्षित भविष्य के प्रति जागरूकता का प्रेरक उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि को वे दैनिक खर्चों में उपयोग करने के बजाय बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित रख रही हैं। प्रतिमाह एक हजार रुपये की इस बचत से एक वर्ष में 12 हजार रुपये जमा होंगे, जो आने वाले समय में समीक्षा की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

    महतारी वंदन की राशि बनी बेटी के भविष्य की पूंजी
    अनीता सिंह बताती हैं कि उन्होंने अपनी बेटी समीक्षा सिंह के नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खुलवाया है। महतारी वंदन योजना से उनके बैंक खाते में प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त होती है। इस पूरी राशि को वे नियमित रूप से बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर देती हैं।

    उनका कहना है कि बेटी की अच्छी शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए अभी से आर्थिक तैयारी करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को बचत में बदलने का निर्णय लिया।

    अनीता का मानना है कि छोटी-छोटी राशि को नियमित रूप से जमा करने से भविष्य में एक अच्छी पूंजी तैयार की जा सकती है। इससे बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा।

    हर महीने एक हजार रुपये की बचत, सालभर में 12 हजार रुपये का संचय
    अनीता सिंह की बचत की यह पहल आर्थिक नियोजन का भी उदाहरण है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक राशि को वे सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं।

    इस तरह नियमित बचत जारी रखने पर एक वर्ष में 12 हजार रुपये की मूल राशि जमा होगी। सुकन्या समृद्धि योजना के प्रावधानों के अनुसार जमा राशि पर निर्धारित ब्याज का लाभ भी मिलता है, जिससे समय के साथ बचत में वृद्धि हो सकती है।

    अनीता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता के कारण उन्हें बेटी के लिए बचत करने में सुविधा हो रही है। इस राशि को वे समीक्षा की आगे की पढ़ाई और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रखना चाहती हैं।

    दो योजनाओं को जोड़कर बेटी की शिक्षा के लिए कर रहीं आर्थिक तैयारी
    अनीता सिंह ने महतारी वंदन योजना और सुकन्या समृद्धि योजना का उपयोग एक-दूसरे के पूरक के रूप में किया है। महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना में वे इस राशि को बेटी के भविष्य के लिए जमा कर रही हैं।

    इस प्रकार एक योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता दूसरी योजना के माध्यम से दीर्घकालिक बचत का आधार बन रही है। अनीता का यह प्रयास दर्शाता है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता का सुनियोजित उपयोग कर परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी की जा सकती है।

    बेटी की अच्छी शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही मां का सपना
    अनीता सिंह चाहती हैं कि उनकी बेटी समीक्षा अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और जीवन में आगे बढ़े। वे अपनी बेटी के भविष्य को लेकर अभी से सजग हैं और नियमित बचत के माध्यम से उसकी शिक्षा के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं।

    उनका कहना है कि बच्चों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिए समय रहते बचत करना आवश्यक है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। अनीता के लिए हर महीने जमा किए जाने वाले एक हजार रुपये केवल बचत की राशि नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में किया गया एक प्रयास है।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
    महतारी वंदन और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ मिलने पर अनीता सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। इस राशि का उपयोग वे अपनी बेटी समीक्षा के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करने के लिए कर रही हैं।

    अनीता ने बताया कि योजना से मिलने वाली सहायता ने उन्हें बेटी के भविष्य के लिए नियमित बचत करने का अवसर दिया है। इससे वे उसकी शिक्षा और आगे की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी कर पा रही हैं।

    छोटी बचत से बड़े सपनों को संबल, अनीता की पहल बनी प्रेरणा
    सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत अनीता सिंह की कहानी यह संदेश देती है कि आर्थिक सहायता का सही नियोजन परिवार के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

     

  • महतारी वंदन योजना ने दिया आर्थिक सहारा, ₹1,000 से ईश्वरी ने संवारी सब्जी-बाड़ी; बच्चों की पढ़ाई में भी मदद

    महतारी वंदन योजना ने दिया आर्थिक सहारा, ₹1,000 से ईश्वरी ने संवारी सब्जी-बाड़ी; बच्चों की पढ़ाई में भी मदद

    महतारी वंदन योजना से ईश्वरी ने बढ़ाए आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम

    हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से संवारी सब्जी-बाड़ी, बच्चों की पढ़ाई में भी मिल रहा सहारा

    कभी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लेना पड़ता था उधार, अब अपनी मेहनत से बढ़ा रही परिवार की आमदनी

    रायपुर
     जीपीएम जिले के पेण्ड्रा विकासखण्ड के दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी की 40 वर्षीय ईश्वरी मरकार के लिए हर महीने बैंक खाते में आने वाले एक हजार रुपये महज आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का आधार बन गए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का सदुपयोग कर ईश्वरी ने अपने घर के पीछे की जमीन पर सब्जी-बाड़ी विकसित की है। इस बाड़ी से न केवल उनके परिवार को ताजी सब्जियां मिल रही हैं, बल्कि अतिरिक्त उपज की बिक्री से उन्हें आमदनी भी हो रही है।

    कभी ईश्वरी की जिंदगी में ऐसे दिन भी थे, जब घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूसरों से पैसे उधार मांगने पड़ते थे। कई बार जरूरत बेहद जरूरी होती थी, लेकिन उधार भी नहीं मिल पाता था। ऐसी परिस्थितियां उन्हें हताश कर देती थीं। सीमित आय में घर की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी।

    अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये ने ईश्वरी को आर्थिक संबल दिया है। नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि से उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

    ईश्वरी बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों से पैसे उधार मांगने पड़ते थे। कई बार बहुत जरूरी काम होने पर भी पैसे नहीं मिल पाते थे। इससे काफी परेशानी होती थी। अब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी ने हम जैसी जरूरतमंद महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना शुरू की है। हर महीने एक हजार रुपये खाते में आने से बहुत सहारा मिला है। अब हर जरूरत के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    एक हजार रुपये की सहायता को बनाया आमदनी का जरिया

    ईश्वरी ने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को केवल घरेलू जरूरतों पर खर्च करने के बजाय इसका एक हिस्सा अपनी सब्जी-बाड़ी में लगाना शुरू किया। उन्होंने घर के पीछे उपलब्ध जमीन पर विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाई हैं। इन सब्जियों का उपयोग परिवार के भोजन में किया जाता है और अतिरिक्त उपज को बाजार में बिक्री कर वे अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रही हैं।

    इस पहल से एक ओर परिवार के लिए सब्जियों पर होने वाला खर्च कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर बाजार में सब्जियां बेचने से आय का एक छोटा लेकिन नियमित जरिया भी तैयार हुआ है। घर के पीछे की यह छोटी-सी बाड़ी अब ईश्वरी के लिए केवल सब्जियां उगाने की जगह नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते उनके कदमों की पहचान बन गई है।

    बच्चों की पढ़ाई में भी मिल रहा सहारा

    महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग ईश्वरी अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जरूरतों को पूरा करने में भी कर रही हैं। हर महीने एक निश्चित राशि मिलने से परिवार के बजट में राहत मिली है और बच्चों की छोटी-छोटी शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है।

    ईश्वरी की कहानी बताती है कि शासन से मिलने वाली आर्थिक सहायता जब मेहनत और सही सोच से जुड़ती है, तो वह जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाले एक हजार रुपये को ईश्वरी ने केवल सहायता राशि न मानकर उसे अपनी मेहनत से जोड़ा और आय बढ़ाने का माध्यम बनाया।

    सबसे बड़ा बदलाव-आत्मसम्मान और आत्मविश्वास

    ईश्वरी के जीवन में आया सबसे महत्वपूर्ण बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का भी है। कभी जरूरत के समय दूसरों से उधार मांगने की मजबूरी उन्हें हताश करती थी, आज अपनी बाड़ी में मेहनत कर होने वाली आमदनी उन्हें आत्मनिर्भर बनने का हौसला दे रही है। दूरस्थ वनांचल ग्राम बम्हनी में ईश्वरी की सब्जी-बाड़ी की हरियाली आज उनके बदलते जीवन की तस्वीर बन गई है। शासन की सहायता और ईश्वरी की मेहनत ने मिलकर उनके परिवार के लिए उम्मीदों की नई राह खोली है।

    ईश्वरी मरकार ने महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इस योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक सहारा दिया है, बल्कि अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया है। महतारी वंदन से मिला आर्थिक संबल और ईश्वरी की मेहनत मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक ताकत बनकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं।

  • महतारी वंदन योजना बनी खुशियों का सहारा, सुवासिनी बोलीं- “रक्षाबंधन पर मिला भाई का उपहार”

    महतारी वंदन योजना बनी खुशियों का सहारा, सुवासिनी बोलीं- “रक्षाबंधन पर मिला भाई का उपहार”

    रायपुर

    रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है। इस बार जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम खोखरा निवासी मती सुवासिनी सूर्यवंशी के लिए यह पर्व एक विशेष खुशी लेकर आया। महतारी वंदन योजना के तहत खाते में पहुंची 1,000 रुपये की राशि ने उनके लिए त्योहार की खुशियों को और बढ़ा दिया। सुवासिनी इसे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की ओर से बहनों के लिए मिले भाई के उपहार के रूप में देखती हैं।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली यह राशि महिलाओं की व्यक्तिगत और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहारा बन रही है।

    मती सुवासिनी सूर्यवंशी के लिए महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि हर महीने मिलने वाली नई उम्मीद और आत्मविश्वास का आधार बन गई है। वे बताती हैं कि योजना से मिलने वाली राशि का वे सोच-समझकर उपयोग करती हैं। घर की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वे कुछ राशि बचाकर भविष्य की बड़ी जरूरतों के लिए भी सुरक्षित रखती हैं।

    रक्षाबंधन से पहले खाते में 1,000 रुपये की राशि पहुंचने से उनकी खुशी दोगुनी हो गई। उन्होंने कहा, “इस बार रक्षाबंधन के पहले ही विष्णु भैया ने हमारे खाते में एक हजार रुपये भेजकर त्योहार की खुशी और बढ़ा दी। अब इन पैसों से अपने लिए साड़ी और राखी खरीदेंगे। हमारे लिए यह रक्षाबंधन पर भाई की ओर से मिला उपहार है।”

    सुवासिनी बताती हैं कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम हुई है। वे अपनी आवश्यकताओं को लेकर स्वयं निर्णय ले पा रही हैं और परिवार की जरूरतों में भी योगदान कर रही हैं। उनके लिए यह राशि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना से मिलने वाली सहायता ने उनके जैसे परिवारों को आर्थिक सहारा दिया है। “रक्षाबंधन के समय मिली यह राशि हमारे लिए बहुत खास है। इससे त्योहार की खुशी बढ़ी है और यह एहसास भी हुआ है कि विष्णु भैया अपनी बहनों के साथ खड़े हैं।”

    महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो रही है। सुवासिनी सूर्यवंशी की कहानी इस बात की मिसाल है कि आर्थिक सहायता का छोटा-सा संबल भी महिलाओं के जीवन में बड़ी खुशियां और भविष्य के लिए नया भरोसा ला सकता है।

  • रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त बनी खुशियों की सौगात, देवेंद्र कुमारी के चेहरे पर मुस्कान

    रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त बनी खुशियों की सौगात, देवेंद्र कुमारी के चेहरे पर मुस्कान

    महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त से बहन देवेंद्र कुमारी के चेहरे पर खिली रक्षाबंधन की मुस्कान

    राखी के त्योहार से पहले ‘विष्णु भैया’ का स्नेहिल उपहार

    रायपुर
     प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल, आत्मविश्वास और सम्मान का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में भी सहयोग कर रही हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों से पहले मिलने वाली यह सहायता उनके लिए खुशी और राहत का माध्यम बन रही है।

    गौरेला विकासखंड के ग्राम मेढूका निवासी बहन देवेंद्र कुमारी के लिए महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन के पावन अवसर पर विशेष खुशियां लेकर आई। त्योहार से पहले योजना की राशि उनके बैंक खाते में पहुंची, तो उनके चेहरे पर खुशी की मुस्कान खिल उठी। उन्होंने बताया कि 30वीं किस्त की राशि मिलने से रक्षाबंधन की तैयारियों में उन्हें काफी सहूलियत मिली है। वह इस राशि का उपयोग राखी और त्योहार से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी में करेंगी।

    ‘विष्णु भैया’ की पहल से बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल

    बहन देवेंद्र कुमारी ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को स्नेहपूर्वक ‘विष्णु भैया’ कहती हैं। महतारी वंदन योजना के माध्यम से नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए भाई के स्नेह, विश्वास और सहयोग की तरह है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व से ठीक पहले खाते में राशि पहुंचना उनके लिए ‘विष्णु भैया’ के उपहार से कम नहीं है।

    उन्होंने बताया कि योजना की नियमित सहायता से अब महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को स्वयं पूरा करने में अधिक सक्षम हो रही हैं। पहले जिन आवश्यकताओं के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, उन्हें अब महिलाएं अपने स्तर पर पूरा कर पा रही हैं। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार की खुशियों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।

    राखी से पहले मिला ‘विष्णु भैया’ का उपहार

    बहन देवेंद्र कुमारी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व है। ऐसे में त्योहार से पहले आर्थिक सहायता मिलना उनके लिए विशेष खुशी की बात है। महतारी वंदन योजना की राशि से वह अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा करेंगी और राखी की खरीदारी भी करेंगी।

    उन्होंने कहा कि ‘विष्णु भैया’ ने प्रदेश की बहनों के लिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से आर्थिक संबल देने का काम किया है। नियमित रूप से मिलने वाली सहायता से महिलाओं में यह विश्वास बढ़ा है कि वे अपनी जरूरतों के लिए स्वयं भी आर्थिक निर्णय ले सकती हैं। यह सहायता उनके लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का आधार भी बन रही है।

    महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मिल रहा बल

    महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस सहायता का प्रभाव घरेलू जरूरतों से लेकर बच्चों की आवश्यकताओं, व्यक्तिगत खर्चों और त्योहारों की तैयारियों तक दिखाई दे रहा है।

    बहन देवेंद्र कुमारी की खुशी इस बात का उदाहरण है कि नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकती है। खाते में राशि पहुंचने से उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने का भरोसा मिलता है और परिवार के भीतर आर्थिक निर्णयों में उनकी भूमिका भी मजबूत होती है।

    ‘विष्णु भैया’ के भरोसे से बहनों के जीवन में नई खुशियां

    महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने की पहल नहीं, बल्कि प्रदेश की माताओं-बहनों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का माध्यम भी बन रही है। योजना से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की जिम्मेदारियों में अधिक प्रभावी ढंग से सहभागी बनने का अवसर दे रही है।

    बहन देवेंद्र कुमारी ने ‘विष्णु भैया’ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को आर्थिक संबल दिया है। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व से पहले मिली 30वीं किस्त ने उनकी खुशी को और बढ़ा दिया है।

    बहन देवेंद्र कुमारी के चेहरे पर रक्षाबंधन से पहले खिली मुस्कान महतारी वंदन योजना के सकारात्मक प्रभाव की भावपूर्ण तस्वीर है। ‘विष्णु भैया’ के स्नेह और भरोसे के साथ प्रदेश की माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल उनके जीवन में खुशियों, आत्मविश्वास और सम्मान की नई राह खोल रहा है।

  • महतारी वंदन योजना का गलत फायदा पड़ा भारी, शिक्षक और क्लर्क से सैलरी के जरिए होगी रिकवरी

    महतारी वंदन योजना का गलत फायदा पड़ा भारी, शिक्षक और क्लर्क से सैलरी के जरिए होगी रिकवरी

    बिलासपुर.

    छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है. बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक के 11 शिक्षक और बाबुओं को चिन्हित किया गया है जो अपात्र होने के बाद भी उसका लाभ उठा रहे थे.

    शासकीय शिक्षक और बाबू के पद में कार्यरत कर्मियों के परिवारों द्वारा योजना का नियम विरुद्ध लाभ उठाने पर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. बीईओ के जरिए अब उनसे वसूली की कार्रवाई शुरू हो गई है. महतारी वंदन योजना में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की सभी महिलाओं को माह में एक हजार रुपए देने का निर्णय लिया गया है. इसका लाभ शासकीय सेवक वाले नहीं उठा सकते. इसके बाद भी जिले के बिल्हा ब्लॉक के शिक्षा विभाग में शिक्षक और बाबू के पद पर कार्यरत शासकीय सेवक नियमों को ताक पर रखकर महतारी वंदन योजना का लाभ उठा रहे थे.

    इसमें कुछ शिक्षिकाएं और महिला बाबू भी उसका लाभ ले रही थीं. एकीकृत बाल विकास परियोजना, बिल्हा की जांच में 11 ऐसे अपात्र हितग्राहियों के नाम सामने आए हैं. इसलिए विभाग ने ऐसे शासकीय सेवकों की जानकारी बीईओ, बिल्हा को भेज़ी है. अपात्र महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जिनके पति या वे स्वयं शासकीय सेवा शिक्षक, वर्ग 2 और सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं. अपात्र हितग्राहियों के खातों में गलत तरीके से भेजी गई कुल 1,24,000 रुपए की राशि वसूली करने कहा गया है.

    अपात्र हितग्राही ले रहे थे योजना का लाभ
    रत्ना क्षत्री पति विनोद कुमार क्षत्री शासकीय सेवक ग्रेड 2, गंगा बाई पति केसर सिंह शासकीय सेवक ग्रेड 2, रमा वर्मा पति रवींद्र वर्मा शिक्षक वर्ग 2, दिनेश्वरी कुर्रे पति शैलेश कुमार कुर्रे शिक्षक वर्ग 2, कुसुम यादव पति राजकुमार यादव शिक्षा कर्मी, गोदावरी कौशिक पति सुरेश कौशिक शासकीय शिक्षक, रामेश्वरी साहू पति राजेश साहू शासकीय सेवक ग्रेड 2, कीर्ति पाटले पति संतोष पाटले शासकीय सेवक ग्रेड 1, सविता कुर्रे पति गोरेलाल कुर्रे सहायक शिक्षक, अमर ज्योति शांडिल्य पति विनोद कुमार सहायक शिक्षक और लक्ष्मी पति परविंदर कुमार शासकीय शिक्षक शामिल हैं.

    बीईओ ने जारी किया वसूली आदेश
    बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक ने कहा कि शासकीय शिक्षक और बाबू होने के बाद भी शासन की महतारी योजना के नाम पर प्रतिमाह रुपए लेने वालों की पहचान महिला एवं बाल विकास विभाग ने की है. उनसे वसूली का आदेश जारी किया गया है. इसके बाद भी राशि जमा नहीं करने पर वेतन से रिकवरी की जाएगी.

  • पति के निधन के बाद संभाल रही दो बच्चों की जिम्मेदारी

    पति के निधन के बाद संभाल रही दो बच्चों की जिम्मेदारी

    मुंगेली

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना का संचालन किया जा रहा है। नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। जिले की अनेक महिलाएं इस राशि का उपयोग स्वरोजगार एवं परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं। इसी कड़ी में पथरिया विकासखण्ड के ग्राम दौना की मती संतोषी डहरिया ने भी घर पर ही सिलाई का कार्य शुरू किया और आज अन्य दो महिलाओं को रोजगार प्रदान कर रही है। सिलाई मशीन उनकी आत्मनिर्भरता का साधन बन गया है। पति के निधन के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आई, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय अपने हुनर को अपनी ताकत बनाया और सिलाई कार्य को आजीविका का मजबूत सहारा बना लिया।

      संतोषी ने बताया कि महतारी वंदन योजना की राशि से वे सिलाई संबंधी आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं, इससे आर्थिक मदद मिल जाती है। उन्हें पहले से ही सिलाई का कार्य आता था, जिससे उन्होंने घर में सिलाई मशीन से काम शुरू किया। घरेलू जिम्मेदारियों और बच्चों की देखभाल के साथ वे नियमित रूप से सिलाई का कार्य करती रहीं। शुरुआती दौर में आमदनी सीमित थी, लेकिन उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास मजबूत था। लगातार मेहनत और बेहतर काम के कारण धीरे-धीरे उनके पास सिलाई के अधिक काम आने लगे। समय के साथ उन्होंने अपने घर के सामने ही छोटी सी सिलाई दुकान शुरू कर ली। आज यही काम उनके परिवार की आय का मजबूत आधार बन चुका है।