Tag: Mahakal

  • महाकाल की भक्ति में दिखे नितिन नबीन, पारंपरिक धोती पहन पहुंचे उज्जैन; 2 घंटे देखी आरती

    महाकाल की भक्ति में दिखे नितिन नबीन, पारंपरिक धोती पहन पहुंचे उज्जैन; 2 घंटे देखी आरती

     उज्जैन

    विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान श्री महाकालेश्वर के आंगन में शुक्रवार तड़के भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने महाकाल मंदिर में आयोजित भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

    नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नितिन नबीन
    भाजपा राष्ट्रीय नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व अन्य बाबा महाकाल के दरबार में अल सुबह 04 बजे पहुंचे. जहां उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर 2 घण्टे तक भस्म आरती के दर्शन लाभ लिए. भगवान का आशीर्वाद लिया और पूजन अर्चन आरती की. वे नंदी हॉल में बैठ शिव भक्ति में लीन नजर आए. बाबा का भी इस दौरान राजा स्वरूप में श्रृंगार हुआ. नितिन नबीन मंदिर के ही पास सम्राट विक्रमादित्य हेरीटेज होटल में ही रात रुके. अब इंदौर एयरपोर्ट और वहां से पंजाब निकलने का कार्यकम है। 

    भस्म आरती में लीन दिखे भाजपा अध्यक्ष
    बाबा महाकाल की भस्म आरती के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शिवभक्ति में लीन नजर आए। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने पूरे समय हाथ जोड़कर भगवान शिव का ध्यान किया और महाकाल के जाप में डूबे रहे। आरती के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ तालियां बजाकर शिवभक्ति की लय में सहभागिता की।

    उज्जैन आगमन पर भस्म आरती में शामिल होने का यह अनुभव उनके लिए खास रहा। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए। उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी। मंदिर की परंपरा के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के दौरान निर्धारित पारंपरिक परिधान धारण किया जाता है।

    देश की यश-कीर्ति और प्रधानमंत्री के लिए की प्रार्थना
    भस्म आरती के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए नितिन नबीन ने कहा कि यह बाबा महाकाल की पवित्र नगरी है और यहां पहली बार आने का सौभाग्य पाकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल पूरे विश्व का ध्यान रखते हैं। 

    अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पहुंचे उज्जैन
    नितिन नबीन ने कहा, ''बाबा महाकाल की भूमि पर आकर जो खुशी हो रही है उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैंने बाबा महाकाल से देश की सुख समृद्धि की मनोकामना की है.'' उन्होंने बताया कि, ''अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार उज्जैन आया हूं. आज जो कुछ हूं बाबा के आशीर्वाद से हूं. इसलिए तय कर रखा था बाबा का आशीर्वाद लेना है. बाबा का बुलावा आया और मैं चला आया. कल हमने पीएम मोदी का जन्मदिवस मनाया है. बाबा से प्रार्थना की है कि पीएम नरेंद्र मोदी की आयु लंबी हो और वे ऐसे ही विकास कार्य करते रहे. बाबा का आशीर्वाद प्रधानमंत्री पर बना रहे. यश कीर्ति वैभव उन्हें मिले। 

    पारंपरिक सोला-पारिधान में दिखा राष्ट्रीय अध्यक्ष
    सबसे खास बात यह रही ही महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान नितिन नबीन पारंपरिक सोला-पारिधान में नजर आए. उन्होंने पीले रंग की धोती पहनी हुई थी. दर्शन के बाद मंदिर में कलेक्टर एवं मंदिर समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक द्वारा नितिन नबीन एवं हेमंत खंडेलवाल को बाबा महाकाल का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया. उन्हें लड्डू प्रासद दिया गया. साथ ही प्रभारी मंत्री, सांसद व अन्य नेताओं ने भी दोनों पार्टी अध्यक्षों का स्वागत सम्मान किया। 

    'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए नितिन नबीन
    इससे पहले नितिन नबीन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के मशहूर राम घाट पर महाकाल के भक्तों के साथ 'आशीर्वाद दीप' प्रोग्राम में शामिल हुए. इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की प्रार्थना की. नितिन नबीन ने अपने X हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता रहे यही कामना है। 

  • अयोध्या का रिकॉर्ड टूटा, उज्जैन ने 33 लाख से ज्यादा दीप जलाकर रचा नया इतिहास

    अयोध्या का रिकॉर्ड टूटा, उज्जैन ने 33 लाख से ज्यादा दीप जलाकर रचा नया इतिहास

    उज्जैन 

    उज्जैन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर सेवा संकल्प अभियान के तहत 'आशीर्वाद का दीया' नाम से उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे दीप जलाने का कार्यक्रम रखा गया था. इस दौरान उज्जैन ने 33,27,125 दीपक प्रज्वलित कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है. इससे पहले ये रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश में अयोध्या के नाम था जहां साल 2025 में 26,17,215 दीप प्रज्वलित किए गए थे। 

    उज्जैन नगर निगम ने अपने आधिकारिक मीडिया ग्रुप में जानकारी दी है कि "31,15,630 दीपक क्षिप्रा नदी के किनारे प्रज्वलित किए गए. पूरे उज्जैन शहर में अलग अलग जगह मिलाकर टोटल 33,27,125 'आशीर्वाद के दिए' प्रज्वलित किए गए." हालांकि, इस रिकॉर्ड की घोषणा मंच से भी की गई है, जबकि वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट अभी मिलना है. वहीं, उज्जैन नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा और स्मार्ट सिटी सीईओ नेहा जैन ने वर्ल्ड रिकॉर्ड की पुष्टि कर दी है। 

    कब से शुरु हुआ था उज्जैन में दीपउत्सव ?
    उज्जैन में दीप उत्सव की शुरुआत 2022 से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय शिव ज्योति अर्पणम के नाम से महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर हुई थी. साल 2022 में उज्जैन ने साल 2021 के अयोध्या के 9,41,551 दीपों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 11,71,078 दीप प्रज्वलित कर गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया था। 

    कब-कब उज्जैन अयोध्या ने तोड़ा एक दूसरे का रिकॉर्ड
    इसके बाद फिर उत्तर प्रदेश में अयोध्या ने 2022 में ही 15,76,955 दीप जलाकर रिकॉर्ड तोड़ा. वहीं, उज्जैन ने साल 2023 में 18,82,229 दीप जलाकर अयोध्या का साल 2022 का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इसी साल 2023 में अयोध्या ने 22,23,000 दीप जलाए जिसके बाद फिर उज्जैन का रिकॉर्ड टूट गया. 2024 में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण उज्जैन में 5,51,000 दीप ही जलाए गये थे. अयोध्या ने 2024 में 25,12000 दीप जलाए, जबकि साल 2025 में 26,17,215 दीप प्रज्वलित किए.

    उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया. उनके साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह भी मौजूद रहे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य अतिथियों ने शिप्रा आरती में हिस्सा लिया. मां शिप्रा की आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की गई. आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, दीप प्रज्ज्वलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के दौरान राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र सेवा से जोड़कर देखा गया. इसी भाव के साथ उज्जैन में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

    उज्जैन में शिप्रा के विभिन्न घाटों और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन को आयोजकों ने विश्व रिकॉर्ड बताया है. इससे पहले कार्यक्रम के लिए 25 लाख से ज्यादा दीये जलाने की तैयारी की गई थी, लेकिन अंतिम आयोजन में यह संख्या 33.27 लाख तक पहुंची. दीप प्रज्ज्वलन के दौरान बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स की भूमिका रही. घाटों पर पहले से दीयों को व्यवस्थित किया गया था. सायरन बजने के बाद सभी ने एक साथ दीप जलाना शुरू किया, जिससे कुछ ही समय में पूरा आयोजन क्षेत्र रोशनी से भर गया। 

    यह दीपोत्सव सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं रहा. आयोजन के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों और 845 आइकॉनिक प्लेस पर भी एक साथ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. आयोजकों के अनुसार, पूरे प्रदेश में कुल 3 करोड़ 55 लाख दीये जलाए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में प्रदेशभर के अलग-अलग स्थानों को दीपों से सजाया गया. उज्जैन इसका मुख्य केंद्र रहा, जहां शिप्रा तट और महाकाल महालोक में एक साथ 33 लाख 27 हजार दीये जलाए गए। 

    घाटों से महाकाल महालोक तक रोशनी
    शाम होते ही उज्जैन के प्रमुख घाटों का दृश्य बदल गया. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट पर दीयों की कतारें नजर आईं. दूसरी तरफ महाकाल महालोक भी दीपों की रोशनी से जगमगा उठा. हजारों श्रद्धालुओं और नागरिकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने का दृश्य लोगों के लिए खास आकर्षण रहा. 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स ने इस आयोजन में हिस्सा लिया. उज्जैन में हुए इस दीपोत्सव के साथ आयोजकों के अनुसार विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. वहीं पूरे मध्य प्रदेश में 845 आइकॉनिक प्लेस समेत अलग-अलग स्थानों पर 3.55 करोड़ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के जरिए प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया गया। 

  • उज्जैन में बनेगा दीपों का रिकॉर्ड! PM मोदी के जन्मदिवस पर महाकाल महालोक में रोशन होंगे 25 लाख दीप

    उज्जैन में बनेगा दीपों का रिकॉर्ड! PM मोदी के जन्मदिवस पर महाकाल महालोक में रोशन होंगे 25 लाख दीप

    उज्जैन
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को पहली बार महाकाल महालोक लाखों दीपों से जगमगाएगा। सेवा संकल्प अभियान के तहत होने वाले इस आयोजन में पुण्यसलिला शिप्रा के प्रमुख घाटों के साथ महाकाल महालोक में करीब 25 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी की गई है।

    जीरो वेस्ट होगा आयोजन
    आयोजन को पूरी तरह जीरो वेस्ट इवेंट बनाया जा रहा है। दीप प्रज्ज्वलन व्यवस्था को सात सेक्टर और 250 सब-सेक्टर में बांटा गया है। इसमें करीब 22,500 स्वयंसेवकों की भागीदारी रहेगी। घरों और प्रतिष्ठानों में भी दीप जलाने की अपील की गई है, ताकि आयोजन केवल सरकारी स्तर का कार्यक्रम न रहकर पूरे उज्जैन शहर का उत्सव बने।

    पीएम नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में बड़ा सेवा अभियान शुरू होने जा रहा है। सीएम मोहन यादव की पहल पर उज्जैन के महाकाल महालोक सहित प्रदेशभर में 58 लाख आशीर्वाद के दीपक प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।

    सीएम ने इस आयोजन को प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के प्रति प्रदेशवासियों के आभार का प्रकटीकरण बताया है। उनके मुताबिक मोदी ने मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के सफर में गरीब, किसान, युवा, महिला और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया।

    महाशिवरात्रि पर प्रज्ज्वलित किए थे 11 लाख दीप
    उल्लेखनीय है कि उज्जैन ने महाशिवरात्रि 2022 में 11 लाख 71 हजार 78 दीप प्रज्ज्वलित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। बाद में अयोध्या में इससे बड़े दीपोत्सव के आयोजन किए गए, इसलिए इस बार मुकाबला केवल दीपों की संख्या का नहीं है। 25 लाख दीपों का आयोजन उज्जैन के लिए यह बताने का अवसर भी है कि उसकी दीप परंपरा केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता को जोड़ने वाली परंपरा बन सकती है।

    सी भावना के साथ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 'सेवा संकल्प अभियान' आयोजित किया जाएगा। सरकार इसे सेवा को राजनीतिक और सामाजिक संस्कार के रूप में आगे बढ़ाने की पहल बता रही है।

    गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक 25 साल की यात्रा
    सीएम यादव ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक सेवा यात्रा की शुरुआत 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई थी। अब इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के पड़ाव पर मध्यप्रदेश में सेवा और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गरीब कल्याण को शासन के केंद्र में रखा गया। मुफ्त राशन, आवास, शौचालय, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बताया।

    स्टार्टअप से डिजिटल इंडिया तक, युवाओं के लिए नए अवसर का दावा
    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक इन पहलों ने युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

    स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को भी सरकार की उपलब्धियों में गिनाया गया। महिला सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, लखपति दीदी और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी पहलों का भी उल्लेख किया गया।

    CM मोहन यादव ने गिनाईं MP सरकार की उपलब्धियां
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र के अनुरूप काम कर रही है। सरकार के मुताबिक प्रदेश में 85 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं और आने वाले समय में हर साल एक लाख से ज्यादा युवाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

    34 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव और नए एयरपोर्ट का दावा
    मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्यप्रदेश को करीब 34 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। सरकार ने प्रदेश को एक वर्ष में सर्वाधिक निवेश आकर्षित करने वाले देश के तीसरे राज्य के रूप में भी बताया।

    रीवा, दतिया और सतना एयरपोर्ट के लोकार्पण के बाद प्रदेश में एयरपोर्ट की संख्या आठ होने की बात कही गई। केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को भी सिंचाई विस्तार के लिए अहम बताया गया।

    विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य पर सरकार का जोर
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की सेवा यात्रा से प्रेरणा लेते हुए राज्य सरकार विकसित भारत के साथ विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का दावा है कि सुशासन, निवेश, रोजगार, सिंचाई, ऊर्जा और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों के विकास के जरिए प्रदेश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।

     

  • उज्जैन में महाकाल की दूसरी सवारी की भव्य तैयारी, 15 किलो के आभूषण-पोशाक में निकलेगी राजसी सवारी

    उज्जैन में महाकाल की दूसरी सवारी की भव्य तैयारी, 15 किलो के आभूषण-पोशाक में निकलेगी राजसी सवारी

    उज्जैन 

    भादौ के दूसरे सोमवार पर आज उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकाली जाएगी। इसका मार्ग करीब साढ़े पांच किलोमीटर का होगा। सवारी में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु आएंगे। इससे पहले सावन की चार और भादौ की एक सवारी निकल चुकी है। ये छठी और आखिरी सवारी है। इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादत्य सिंधिया पालकी का पूजन करेंगे।

    महाकाल की सवारी में 5 कलाकारों की एक ऐसी टोली भी शामिल होती है, जिनकी वेशभूषा और अंदाज श्रद्धालुओं का ध्यान खुद-ब-खुद खींच लेता है। खास तरह की पगड़ी, आभूषण और पारंपरिक हथियार वाले इस रूप में तैयार होने के लिए करीब दो घंटे तक मेकअप किया जाता है। इसके बाद 11 से 15 किलो तक की राजसी पोशाक पहनकर ये किरदार पूरी सवारी में पैदल चलते हैं।

    शिक्षक ने शुरू की परंपरा, 39 साल से निभा रहे किरदार
    महाकाल की सवारी में शामिल होने वाली इस टोली में स्वामी मुस्कुराके, स्वामी खिलखिलाके, स्वामी दिलमिलाके, स्वामी गुदगुदाके और पप्पू तलवार शामिल हैं। बाबा की पालकी के आगे चलने वाली यह टोली अलग-अलग राजसी किरदारों में नजर आती है। हर साल इनका लुक अलग होता है।

    इस टोली के मुखिया शैलेंद्र व्यास उर्फ ‘स्वामी मुस्कुराके’ 39 साल से लगातार महाकाल की सवारी में शामिल हो रहे हैं। वे उज्जैन के ही रहने वाले हैं। 1989 में शिक्षक की नौकरी के दौरान उन्हें पता चला कि पुराने समय में राजा अपनी राजसी वेशभूषा में महाकाल की सवारी में शामिल होते थे।इसी परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने पहली बार धोती-कुर्ता और साफा पहनकर सवारी में हिस्सा लिया। इसके बाद यह सिलसिला कभी नहीं टूटा।

    राणौजी सिंधिया ने परंपरा को दिया नया स्वरूप
    करीब सवा दो सौ वर्ष पहले मराठा शासनकाल में सिंधिया वंश के संस्थापक राणौजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और महाकाल की सवारी की परंपरा को नया स्वरूप दिया। उन्होंने सवारी में नए रथ, गजराज और लोक परंपराओं को शामिल किया, जिससे आयोजन और अधिक भव्य बन गया।

    राणौजी सिंधिया स्वयं भी सवारी में शामिल होते थे और पालकी के आगे चलकर भगवान महाकाल को राजाधिराज का सम्मान देते थे। इसके बाद स्वतंत्रता पूर्व काल तक सिंधिया और होलकर राजवंशों के प्रमुख भी महाकाल की सवारी में राजकीय रूप से शामिल होते रहे। पालकी के आगे चलना इस बात का प्रतीक माना जाता था कि राज्य के वास्तविक शासक स्वयं भगवान महाकालेश्वर हैं।

    सावन-भादौ में निकलती है महाकाल की सवारी
    विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की सवारी हर वर्ष सावन और भादौ माह में सोमवार को निकलती है। सावन के सोमवारों के साथ भादौ माह के दो सोमवार भी भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं। भादौ माह के दूसरे सोमवार को निकलने वाली सवारी को अंतिम और राजसी सवारी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।

    इस दौरान विभिन्न कलाकार, संगीतकार और लोक कलाकार शामिल होते हैं। भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और सवारी के मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूरी उज्जैन नगरी महाकाल के जयकारों से गूंज उठती है। 

    भक्तों की आस्था का प्रतीक है सवारी
    महाकाल की सवारी को भगवान महाकाल के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भगवान को फल, मिठाई, दूध और अन्य भोग अर्पित करते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु सवारी में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं और बाबा महाकाल के जयकारों के साथ नगर भ्रमण में सहभागी बनते हैं।

    करीब 1100 साल पुरानी इस परंपरा ने राजा भोज के राजकीय उत्सव से लेकर सिंधिया और होलकर राजवंशों के दौर तक कई बदलाव देखे हैं। हालांकि, समय के साथ स्वरूप बदलने के बावजूद भगवान महाकाल की सवारी आज भी उज्जैन की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का सबसे भव्य आयोजन बनी हुई है।

  • महाकाल की राजसी सवारी में चप्पे-चप्पे पर पहरा, कई जिलों से बुलाया अतिरिक्त पुलिस बल

    महाकाल की राजसी सवारी में चप्पे-चप्पे पर पहरा, कई जिलों से बुलाया अतिरिक्त पुलिस बल

    उज्जैन
     भगवान महाकालेश्वर की सोमवार को निकलने वाली राजसी सवारी को लेकर पुलिस ने सुरक्षा का अभेद घेरा तैयार किया है। सवारी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में 2000 से ज्यादा पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहेंगे। भीड़ में होने वाली चोरी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 100 से ज्यादा जवान सादी वर्दी में तैनात किए जाएंगे।

    वहीं 100 से ज्यादा ऊंचे भवनों से पुलिसकर्मी पूरे सवारी मार्ग पर निगरानी रखेंगे। आसमान से 10 ड्रोन कैमरे और जमीन पर सीसीटीवी कैमरों के जरिये भी लगातार निगरानी की जाएगी। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि सवारी की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए इंदौर, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, दतिया, शिवपुरी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है।

    ड्यूटी में लगाए गए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सवारी मार्ग, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर होटल, लाज और धर्मशालाओं की भी लगातार चेकिंग की जा रही है।

    राजसी सवारी में उमड़ने वाली भारी भीड़ के बीच मोबाइल, पर्स, मंगलसूत्र और चेन चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने विशेष टीम बनाई है। 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी सादी वर्दी में भीड़ के बीच तैनात रहेंगे। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सवारी व्यवस्था में करीब 100 महिला पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है।

    20 मार्गों पर प्रतिबंध, सात जगह पार्किंग
    राजसी सवारी के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था भी बदली रहेगी। यातायात पुलिस ने 20 मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित करने और जरूरत के अनुसार कुछ मार्गों को डायवर्ट करने की योजना बनाई है। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए सात स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। यातायात डीएसपी दिलीपसिंह परिहार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग बनाई गई है।

    भोपाल, इंदौर और देवास की ओर से आने वाले श्रद्धालु वाकणकर पार्किंग, मन्नत गार्डन, हरिफाटक ब्रिज के नीचे और कर्कराज पार्किंग में वाहन खड़े कर सकेंगे। बड़नगर और नागदा की ओर से आने वाले श्रद्धालु- कार्तिक मेला मैदान, मक्सी और आगर की ओर से आने वाले श्रद्धालु क्षीरसागर स्टेडियम और सामाजिक न्याय परिसर में वाहन पार्क करेंगे।

    इन मार्गों पर वाहनों का प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित
        हरिफाटक टी से बेगमबाग की तरफ जाने वाले सभी प्रकार के वाहन।
        दानीगेट से रामानुज कोट तरफ जाने वाले समस्त प्रकार के वाहन।
        गुदरी चौराहा से कहारवाड़ी से होकर रामघाट तरफ जाने वाले वाहन।
        तेलीवाड़ा से कमरीमार्ग तरफ आने वाले सभी प्रकार के वाहन।
        निकास चौराहा से तेलीवाडा की ओर वाहन नहीं ले जा सकेंगे।
        क्षीरसागर से कंठाल चौराहा की ओर।
        बियावानी से तेलीवाड़ा की तरफ।
        नरेंद्र टॉकीज से कंठाल तरफ आने वाले समस्त प्रकार के वाहन।
        दानीगेट से रामानुज कोट तरफ, गुदरी चौराहा से कहारवाडी से होकर रामघाट, तेलीवाड़ा से कमरी मार्ग तरफ आने वाले समस्त प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।
        भार्गव तिराहे से टंकी चौक तरफ, केडी गेट से कमरीमार्ग तरफ आने वाले, चक्रतीर्थ टर्निंग से दानीगेट तरफ, शंकराचार्य से दानीगेट, तोपखाने से लोहे का पुल, नलिया बाखल से बेगमबाम चौराहा, बारह खोली से बेगमबाग की तरफ सभी प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।

    इन मार्गों से होगी आकस्मिक निकासी

        महाकाल घाटी से हरिफाटक टी, हरिफाटक चौराहा।
        महाकाल घाटी से लोहे का पुल होते हुए दौलतगंज, देवासगेट।
        गणगौर दरवाजे से छोटी रपट होते हुए।
        कमरी मार्ग से केडी गेट होते हुए पत्ती बजार, जूना सोमवारिया।
        मुसद्दीपुरा चौराहा से डाबरी पीठा होकर नई सड़क।
        भगत जी चौराहे से छोटा सराफा होकर नमकमंड़ी से नई सड़क ।
        छत्री चौक बैंक आफ इंडिया के सामने से लखेरवाड़ी होकर लोहे का पुल अथवा नमक मंड होकर नई सड़क।
        हरिसिद्धि पाल से हरसिद्धि तरफ।
        गुदरी चौराहा से कसाई बाडा बांसफोड़ की गली तरफ।

     

  • महाकाल नगरी में विकास की नई तस्वीर, 25 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स से खुलेंगे 75 हजार रोजगार के द्वार

    महाकाल नगरी में विकास की नई तस्वीर, 25 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स से खुलेंगे 75 हजार रोजगार के द्वार

    उज्जैन 

    उज्जैन अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में औद्योगिक और ढांचागत विकास का एक नया हब बनकर उभर रहा है। सिंहस्थ-2028 के महाआयोजन से पहले शहर की पूरी तस्वीर बदलने की तैयारी है। वर्तमान में उज्जैन में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से 129 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से 55 से 60 प्रतिशत कार्य पूरे भी हो चुके हैं।

    प्रशासन का फोकस सिर्फ धार्मिक स्थलों के विकास पर ही नहीं है, बल्कि विक्रम उद्योगपुरी के जरिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश भी लाया जा रहा है। इससे आने वाले समय में 75 हजार से ज्यादा नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

    68 बड़ी कंपनियों का निवेश और 75 हजार नौकरियां
        उज्जैन में रोजगार और निवेश के नए द्वार खुल रहे हैं। 2300 एकड़ में फैली विक्रम उद्योगपुरी में 350 एकड़ का मेडिकल डिवाइस पार्क आकार ले रहा है। यहां देश-विदेश की 68 से ज्यादा बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं। 20 से अधिक कंपनियों ने अपनी इकाइयां स्थापित कर ली हैं और कई में उत्पादन भी शुरू हो गया है।

        पेप्सिको इंडिया (1266 करोड़), अदाणी सीमेंट (1500 करोड़) और वीई कमर्शियल व्हीकल्स (580 करोड़) जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपना काम शुरू कर दिया है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।

    437 एकड़ में एयरपोर्ट, बड़े विमान भी उतर सकेंगे
    उज्जैन को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए 437.5 एकड़ में एयरपोर्ट विकसित होगा। उज्जैन कलेक्टर रौशनकुमार सिंह के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के लिए ₹590 करोड़ मंजूर हो चुके हैं।

    राज्य सरकार एयरपोर्ट अथॉरिटी को जमीन उपलब्ध करा चुकी है। मौजूदा करीब एक हजार मीटर लंबे रनवे को बढ़ाया जाएगा, ताकि एटीआर-72 के साथ बड़े यात्री विमान उतर सकें। जरूरत पर बोइंग विमान की लैंडिंग भी हो सकेगी। चार हेलीपैड भी तैयार किए जा रहे हैं।

    धार्मिक: 1125 करोड़ से संवरेंगे मंदिर, कृष्ण लोक और यूनिटी मॉल बनेगा
        वर्ष 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में प्रतिदिन 1 से 1.5 लाख लोग आ रहे हैं। त्योहार, पर्व पर यह संख्या 4 से 5 लाख तक हो जाती है। आय और दान बढ़ा। अब महाकाल मंदिर के खजाने में 472 करोड़ रुपए हैं। इसी से प्रेरित होकर कृष्ण लोक बन रहा है।

        धार्मिक नगरी के प्रमुख मंदिरों को टेंपल बॉन्ड स्कीम के तहत ₹1125 करोड़ से संवारा जाएगा। इसमें काल भैरव, मंगलनाथ, शनि मंदिर, 84 महादेव, अंगारेश्वर महादेव, गढ़कालिका, बगलामुखी माता, भूखी माता, सिद्धवट व सांदीपनि आश्रम शामिल हैं।

        महाकाल लोक के बाद अब ₹220 करोड़ से 30 एकड़ में कृष्ण लोक और परिसर बनाया जाएगा। यहां 181 फीट ऊंची प्रतिमा लगेगी। काम 31 दिसंबर 2027 से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा 3.20 हेक्टेयर में ₹300 करोड़ से यूनिटी मॉल बनाया जाएगा।

    आर्थिक : 68 से अधिक कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, 75 हजार को रोजगार

        2300 एकड़ की विक्रम उद्योगपुरी में 350 एकड़ का मेडिकल डिवाइस पार्क है। 20 से ज्यादा कंपनियों ने इकाइयां लगाई हैं, 25 से ज्यादा में उत्पादन शुरू। दूसरे चरण के लिए 35 कंपनियों के प्रस्ताव आए हैं।

        बड़ी कंपनियां: पेप्सिको इंडिया ₹1266 करोड़ का निवेश कर चुकी है। अदाणी सीमेंट्स ₹1500 करोड़ और वीई कमर्शियल व्हीकल्स ₹580 करोड़ का निवेश कर रही हैं। अमूल-वॉल्वो का काम शुरू हो चुका है।

        मेडिसिटी-आईटी: ₹592 करोड़ से 14 मंजिला मेडिसिटी बन रही है। इसमें 550 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होगा। इंदौर-उज्जैन रोड पर ₹46 करोड़ के आईटी पार्क का 50% काम पूरा हो चुका है।

        होटल-ब्रिज: रेडिसन, विवांता टाटा, हॉलिडे इन, लेमन ट्री और अनंता के होटल बन रहे हैं। शहर में 22 नए ब्रिज भी बन रहे हैं। इनमें 2 एलिवेटेड, शिप्रा पर 17 और 4 रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं।

    1125 करोड़ से संवरेंगे मंदिर, आकार लेगा 'कृष्ण लोक'
        'श्री महाकाल लोक' के निर्माण के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में बंपर उछाल आया है। रोजाना 1 से 1.5 लाख और त्योहारों पर 5 लाख तक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसी से प्रेरित होकर अब 30 एकड़ जमीन पर 220 करोड़ रुपये की लागत से भव्य 'कृष्ण लोक' का निर्माण किया जाएगा।

    यहां भगवान श्रीकृष्ण की 181 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित होगी। साथ ही, 1125 करोड़ की 'टेंपल ब्लेंड स्कीम' के तहत काल भैरव, मंगलनाथ, शनि मंदिर, हरसिद्धि, 84 महादेव और सांदीपनि आश्रम सहित कई प्रमुख मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 300 करोड़ की लागत से यूनिटी मॉल भी बनाया जाना है। इन प्रोजेक्ट्स को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    437 एकड़ में एयरपोर्ट, उतरेंगे बोइंग विमान
    हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 437.5 एकड़ जमीन पर एयरपोर्ट का विकास किया जा रहा है। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के मुताबिक, इसके भूमि अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं और एयरपोर्ट अथॉरिटी को जमीन भी सौंपी जा चुकी है। वर्तमान के एक हजार मीटर लंबे रनवे को इतना बढ़ाया जाएगा कि भविष्य में एटीआर-72 के साथ ही बोइंग विमान भी आसानी से लैंड कर सकें। इसके अलावा चार नए हेलीपैड भी तैयार हो रहे हैं।

    मेडिसिटी, आईटी पार्क और लग्जरी होटल्स का जाल
        शहर में स्वास्थ्य और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नया रूप दिया जा रहा है। 592 करोड़ रुपये से 14 मंजिला 'मेडिसिटी' बन रही है, जिसमें 550 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल होगा। वहीं, इंदौर-उज्जैन रोड पर 46 करोड़ की लागत से बन रहे आईटी पार्क का आधा काम पूरा हो चुका है।

        पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के लिए रैडिसन, विवांता टाटा, हॉलिडे इन और लेमन ट्री जैसे ब्रांडेड होटल बन रहे हैं। यातायात सुगम बनाने के लिए शहरभर में 22 नए पुलों (ओवरब्रिज और एलिवेटेड) का निर्माण भी तेज गति से चल रहा है।

     

  • महाकाल सवारी से पहले उज्जैन को नई सौगात, कंठाल-छत्रीचौक मार्ग बनेगा हेरिटेज रोड

    महाकाल सवारी से पहले उज्जैन को नई सौगात, कंठाल-छत्रीचौक मार्ग बनेगा हेरिटेज रोड

    उज्जैन 
    सिंहस्थ महापर्व 2028 को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इसी क्रम में शहर के प्राचीन और व्यस्ततम मार्गों में शामिल कंठाल चौराहा से छत्रीचौक तक 450 मीटर से अधिक लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है।

    खास बात यह है कि इसी मार्ग से 7 सितंबर को बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकलेगी। सवारी से पहले मार्ग और आसपास के प्रमुख स्थलों को नया स्वरूप देने का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है।

    नगर निगम के मुताबिक 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। कंठाल से छत्रीचौक तक सड़क निर्माण का काम पूरा कर लिया गया है। अब कंठाल चौराहा और सती गेट के सौंदर्यीकरण के बाकी काम को पूरा करने के लिए निगम की टीम ठेकेदार के साथ रात में भी काम कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि राजसी सवारी से पहले पूरा काम पूरा कर लिया जाएगा, ताकि सवारी के दौरान मार्ग आकर्षक और व्यवस्थित नजर आए।

    कंठाल चौराहे पर अंडरग्राउंड लाइटिंग
    कंठाल चौराहे को नया और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए यहां पेपर ब्लॉक लगाए जा रहे हैं। चौराहे पर अंडरग्राउंड लाइटिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। इससे बिजली के तारों के जाल से चौराहे को राहत मिलेगी और इसका स्वरूप अधिक साफ-सुथरा नजर आएगा।

    निगम के अनुसार शहर में इस तरह की अंडरग्राउंड लाइटिंग का काम पहली बार इस स्वरूप में किया गया है।

    सती गेट को मिलेगा हेरिटेज लुक
    ऐतिहासिक सती गेट को भी उसकी विरासत के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। गेट के आसपास करीब 50 मीटर क्षेत्र में कोबल स्टोन लगाए जाएंगे। वहीं गेट पर किए गए पुराने पेंट को हटाकर उसमें लगे ऐतिहासिक एरण पत्थरों को उनके मूल स्वरूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

    पत्थरों पर ट्रांसपेरेंट वाटर रिपेलेंट कोटिंग की जाएगी, जिससे उनकी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे। इस काम के पूरा होने के बाद सती गेट क्षेत्र को हेरिटेज लुक मिलने की उम्मीद है।

    सवारी से पहले रात-दिन काम
    बाबा महाकाल की राजसी सवारी के लिए अब समय कम बचा है। ऐसे में निगम की टीम सड़क निर्माण के साथ सौंदर्यीकरण के बचे हुए काम को भी तेजी से पूरा करने में जुटी है। कंठाल से छत्रीचौक तक तैयार हो रहा यह मार्ग सवारी के दौरान श्रद्धालुओं के लिए न सिर्फ सुगम होगा, बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिक पहचान को भी नए स्वरूप में सामने लाएगा।

  • महाकाल दर्शन का रास्ता होगा आसान, 91 करोड़ की सुरंग से ट्रैफिक जाम का झंझट खत्म

    महाकाल दर्शन का रास्ता होगा आसान, 91 करोड़ की सुरंग से ट्रैफिक जाम का झंझट खत्म

    उज्जैन
     विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। श्रावण, महाशिवरात्रि, नागपंचमी, 84 महादेव, सप्त सागर और पंचकोशी यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान शहर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। अब सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में हरिफाटक चौराहा पार्किंग से महाकाल लोक क्षेत्र तक करीब 650 से 700 मीटर लंबी अंडरपास टनल बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसकी लागत करीब 91.74 करोड़ रुपये की होगी।

    हरिफाटक से महाकाल लोक तक बनेगा भूमिगत मार्ग
    सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन शहर में वैकल्पिक मार्ग और बेहतर क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम विकसित कर रहा है। इसी उद्देश्य से हरिफाटक चौराहे के समीप स्थित पार्किंग क्षेत्र से महाकाल लोक की दिशा में भूमिगत अंडरपास टनल बनाई जा रही है। इस परियोजना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, स्मार्ट सिटी, महाकाल मंदिर समिति और सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। यह अंडरपास हरिफाटक क्षेत्र से शुरू होकर जयसिंहपुरा क्षेत्र में त्रिवेणी संग्रहालय के पास निकलेगा। इसके जरिए महाकाल क्षेत्र की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं और वाहनों के लिए एक अतिरिक्त कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी।

    श्रद्धालुओं के साथ वाहनों की आवाजाही भी होगी आसान
    प्रस्तावित टनल केवल पैदल श्रद्धालुओं के लिए नहीं होगी, बल्कि इसका डिजाइन वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। टनल में दो अलग-अलग बड़े बॉक्स बनाए जाएंगे। प्रत्येक बॉक्स की चौड़ाई करीब 9 मीटर होगी। इनमें 7.50 मीटर का कैरिजवे और दोनों ओर पैदल चलने के लिए फुटपाथ की व्यवस्था प्रस्तावित है। करीब 5 मीटर की वर्टिकल क्लियरेंस के कारण इस मार्ग का उपयोग वाहनों की आवाजाही के लिए भी किया जा सकेगा।बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान इस अंडरपास का उपयोग ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    15 महीने की डेडलाइन, अप्रैल 2027 तक लक्ष्य
    प्रोजेक्ट की कार्यावधि 15 महीने तय की गई है। अनुबंध के अनुसार इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हरिफाटक पार्किंग क्षेत्र से निर्माण शुरू हो चुका है और शुरुआती चरण में जमीन के स्तर से करीब 8 से 10 मीटर नीचे स्लोप तैयार किया जा रहा है।

    फिलहाल करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। आगे निर्माण कार्य अधिक चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि टनल का बड़ा हिस्सा भूमिगत बनेगा। प्रोजेक्ट के दायरे में एक थाना, स्कूल और कुछ अन्य भवन भी आ रहे हैं। इनके हटाने, उपयोगिताओं को शिफ्ट करने और जमीन से जुड़े काम भी निर्माण की गति को प्रभावित कर सकते हैं।

    रेलवे ट्रैक के नीचे सबसे बड़ी चुनौती
    टनल का सबसे जटिल हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे से गुजरेगा। रेलवे ट्रैक के नीचे प्रस्तावित अंडरपास का निर्माण रेलवे स्वयं करेगा। इसके लिए राज्य शासन की ओर से रेलवे को 31 करोड़ रुपए दिए गए हैं। प्रोजेक्ट को शासन ने 28 अक्टूबर 2025 को 91.74 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। टनल निर्माण की अनुबंधित लागत 35.37 करोड़ रुपए है।

    इसके अलावा रेलवे लाइन के नीचे निर्माण के लिए 31 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। शेष राशि का उपयोग भू-अर्जन, भवनों और यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित अन्य कार्यों में किया जाएगा।

    रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण के दौरान रेल यातायात और सुरक्षा मानकों का पालन सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। यही हिस्सा प्रोजेक्ट की समयसीमा और तकनीकी चुनौतियों के लिहाज से सबसे अहम माना जा रहा है।

    अभी महाकाल क्षेत्र में चार टनल की व्यवस्था
    महाकाल मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पहले से दो टनल संचालित हैं और दो अन्य का निर्माण किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग टनल का उपयोग किया जाता है।

    भीड़ प्रबंधन में इन भूमिगत रास्तों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मंदिर से जुड़े अधिकारियों के अनुसार 13 से 15 कतारों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाता है। एक दिन में 7 लाख तक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि सामान्य दिनों में औसतन करीब 2 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, फिलहाल प्रवेश और निकास के लिए दो टनल संचालित हैं। इसके अलावा हैरिटेज होटल से शहनाई द्वार स्थित न्यू वेटिंग हॉल तक एक और टनल बनाई जा रही है।

    यह करीब 6 मीटर चौड़ी होगी और 24 मीटर चौड़ी सड़क को पार करते हुए मंदिर क्षेत्र तक पहुंचेगी। इससे हरसिद्धि की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। हरिफाटक से महाकाल लोक तक बनने वाली टनल इस श्रृंखला की चौथी महत्वपूर्ण भूमिगत कड़ी होगी।

    सिंहस्थ और पीक सीजन में मिलेगी सबसे ज्यादा राहत
    कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, हरिफाटक ब्रिज से बनने वाला यह भूमिगत रास्ता सीधे महाकाल लोक तक पहुंचेगा। इससे श्रद्धालु पार्किंग से उतरकर ट्रैफिक में फंसे बिना महाकाल क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे।

    सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ऐसे में यह कॉरिडोर भीड़ और यातायात प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    हरिफाटक का ट्रैफिक दबाव कम करने की तैयारी
    हरिफाटक चौराहा उज्जैन के सबसे महत्वपूर्ण यातायात केंद्रों में से एक है। इंदौर-उज्जैन मार्ग सहित रतलाम, बड़नगर, आगर मालवा, देवास और अन्य प्रमुख मार्गों से आने वाला ट्रैफिक इस क्षेत्र से होकर गुजरता है। बड़े पर्वों और विशेष अवसरों पर यहां वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है, जिससे जाम की स्थिति बनती है। प्रस्तावित अंडरपास के तैयार होने के बाद हरिफाटक क्षेत्र को एक वैकल्पिक कनेक्शन मिल सकता है।श्रद्धालु पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़े करने के बाद भूमिगत मार्ग के जरिए महाकाल लोक की दिशा में पहुंच सकेंगे। इससे महाकाल मंदिर क्षेत्र की ओर सीधे वाहनों के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

    VIP और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए अलग व्यवस्था संभव
    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सामान्य श्रद्धालुओं की आवाजाही को अंडरपास के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि हरिफाटक ब्रिज का उपयोग स्थानीय यातायात और जरूरत के अनुसार वीआईपी-वीवीआईपी मूवमेंट के लिए किया जा सकेगा। इससे सुरक्षा और प्रोटोकॉल व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी सहायता मिल सकती है। बड़े आयोजनों के दौरान अलग-अलग श्रेणी के यातायात और श्रद्धालुओं के प्रवाह को अलग रखने की प्रशासन की योजना है।

    बारिश के पानी के लिए बनेगा विशेष ड्रेनेज सिस्टम
    भूमिगत संरचना में जलभराव को रोकना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। इसके लिए अंडरपास में अलग अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जाएगा।बारिश या अन्य स्रोतों से आने वाले पानी को संपवेल और सम्प पिट तक पहुंचाया जाएगा, जहां से पंप के जरिए पानी को बाहर निकाला जा सकेगा। पानी के स्तर की निगरानी के लिए सेंसर और ऑटोमेटिक पंपिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है।इसका उद्देश्य बारिश के दौरान टनल में जलभराव की स्थिति को रोकना और यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

    हवा, रोशनी और आपात स्थिति के लिए भी व्यवस्था
    टनल के भीतर हवा और वाहनों से निकलने वाले धुएं की निकासी के लिए भी विशेष डिजाइन तैयार किया जा रहा है। कुछ हिस्सों को ऊपर से खुला रखने की योजना है, ताकि प्राकृतिक रोशनी और हवा अंदर पहुंच सके। आपात स्थिति से निपटने के लिए टनल में निश्चित दूरी पर इमरजेंसी अलार्म सिस्टम की व्यवस्था भी की जा सकती है। इससे किसी श्रद्धालु की तबीयत खराब होने या अन्य आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    भगदड़ रोकने में भी मददगार हो सकता है डिजाइन
    सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में लाखों लोगों की एक साथ आवाजाही प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। प्रस्तावित टनल में दो अलग-अलग बॉक्स होने से आने और जाने वाले श्रद्धालुओं तथा यातायात को अलग-अलग दिशा में संचालित करने की सुविधा मिल सकती है। भीड़ के प्रवाह को अलग रखने से एक स्थान पर अत्यधिक दबाव बनने की आशंका कम हो सकती है। जरूरत पड़ने पर सुरक्षा और आपातकालीन एजेंसियों को भी अलग और स्पष्ट मार्ग उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि महाकाल लोक के दूसरे चरण की तैयारी पूरी है, हमने मंदिर में भविष्य की जरुरतों को देखते हुए काम किए है। महाकाल लोक में पार्किंग की क्षमता बढ़ाई है  और त्रिवेणी गेट से भक्तों की एंट्री को सुगम किया है। रुद्र सागर में एक ब्रिज भी बनाया जा रहा है, हालांकि उसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। अनुभूति वन और तपोवन का निर्माण भी किया गया है। इसके अलावा एक पुराने स्कूल को हेरिटेज होटल में बदला गया है।

    एक लाख लोगों के भोजन की क्षमता का अन्नक्षेत्र
    महाकाल लोक के दूसरे चरण में 20 करोड़ की लागत से भोजनशाला भी तैयार की गई है। जिसमें एक साथ तीन हजार लोग भोजन कर सकेंगे और दिनभर में एक लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था होगी। अन्नक्षेत्र भक्तों के लिए निशुल्क होगा। अन्नक्षेत्र में माह में एक बार दाल बाफले भी बनाए जा सकेंगे।

    करीब 15 प्रतिशत काम पूरा
    परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और शुरुआती चरण में जमीन के भीतर स्लोप तैयार करने का काम किया जा रहा है। अब तक करीब 15 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी है। इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे बनने वाला अंडरपास होगा। रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण कार्य रेलवे की देखरेख में किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से करीब 31 करोड़ रुपये रेलवे को दिए जाने की बात कही गई है। रेलवे ट्रैक के नीचे निर्माण के दौरान ट्रेनों के संचालन, पटरियों की सुरक्षा और जमीन की स्थिरता जैसे तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा।

    अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
    परियोजना को पूरा करने के लिए करीब 15 महीने का समय निर्धारित किया गया है। प्रशासन के अनुसार, निर्माण कार्य अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि काम तय समय सीमा के भीतर पूरा हो जाता है तो सिंहस्थ 2028 से पहले महाकाल क्षेत्र तक पहुंचने के लिए उज्जैन को एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक भूमिगत मार्ग मिल जाएगा।

    महाकाल क्षेत्र में पहले से मौजूद है टनल सिस्टम
    महाकाल मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए पहले से एंट्री और एग्जिट टनल का उपयोग किया जा रहा है। इन मार्गों के जरिए श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर तक पहुंचाने और बाहर निकालने में मदद मिलती है। इसके अलावा महाकाल मंदिर क्षेत्र में सम्राट विक्रमादित्य हैरिटेज होटल से शहनाई द्वार के न्यू वेटिंग हॉल तक एक अन्य टनल का निर्माण भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य हरसिद्धि मंदिर और चौबीस खंभा माता मंदिर की दिशा से आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाना है।

     

  • बाबा महाकाल के नाम होगी सबसे पहली राखी, रक्षाबंधन पर सवा लाख लड्डुओं का लगेगा महाभोग

    बाबा महाकाल के नाम होगी सबसे पहली राखी, रक्षाबंधन पर सवा लाख लड्डुओं का लगेगा महाभोग

    उज्जैन

    रक्षाबंधन पर्व से पहले उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। परंपरा के अनुसार देश-दुनिया में रक्षाबंधन मनाए जाने से पहले सबसे पहली राखी राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर को अर्पित की जाएगी। श्रावण मास के अंतिम दिन भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर विशेष शृंगार किया जाएगा और पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा तैयार की गई विशेष राखी अर्पित की जाएगी।

    भस्म आरती में होगा विशेष पूजन-शृंगार
    रक्षाबंधन के दिन तड़के 3 बजे होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद सूखे मेवों और भांग से बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया जाएगा। इसके बाद पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा तैयार की गई विशेष राखी भगवान महाकाल को अर्पित की जाएगी। मान्यता के अनुसार भगवान महाकाल कालजयी हैं और भद्रा या मुहूर्त के बंधन से परे माने जाते हैं। इसलिए सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी अर्पित कर सृष्टि के कल्याण की कामना की जाएगी।

    8 दिन से तैयार हो रही 2 फीट की विशेष राखी
    वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार पुजारी परिवार की महिलाएं बाबा महाकाल के लिए विशेष रक्षासूत्र तैयार करती हैं। इस बार करीब 2 फीट लंबी राखी बनाई जा रही है। इसे रेशम के धागों, स्पंज, आभूषणों और विशेष वस्त्रों से सजाया जा रहा है। पुजारी परिवार की महिलाओं के अनुसार राखी तैयार करने में करीब 8 दिन का समय लगता है। इस दौरान श्रावण माह के उपवास और मंगल गीतों के बीच पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ रक्षासूत्र तैयार किया जाता है। 

    बाबा महाकाल को लगेगा सवा लाख लड्डुओं का महाभोग
    रक्षाबंधन और श्रावण महोत्सव के समापन के अवसर पर बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया जाएगा। पंडित राजेश शर्मा, पंडित ओम गुरु और पंडित आकाश सहित पुजारी परिवार की ओर से इसकी तैयारियां की जा रही हैं। सवा लाख लड्डुओं के निर्माण में करीब 15 क्विंटल बेसन, 10 क्विंटल शुद्ध घी, 15 क्विंटल शक्कर बूरा और 2 क्विंटल मेवे के साथ इलायची का उपयोग किया जा रहा है। लड्डुओं के निर्माण में सामग्री की शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

    लाखों श्रद्धालुओं को वितरित होगा महाप्रसाद
    28 अगस्त को भस्म आरती के दर्शन करने वाले और दिनभर बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सवा लाख लड्डुओं का महाप्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर परिसर में रक्षाबंधन को लेकर विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। ऐसी महिलाएं और बहनें, जिनके भाई नहीं हैं, वे भी बाबा महाकाल को अपना भाई मानकर मंदिर पहुंचेंगी और उन्हें रक्षासूत्र बांधेंगी। मान्यता और आस्था से जुड़ी इस परंपरा के चलते रक्षाबंधन के दिन महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
      

  • मध्य प्रदेश के शिवालयों में भक्ति का अद्भुत नजारा, महाकाल का विशेष श्रृंगार और भोजेश्वर महादेव का फूलों से दरबार

    मध्य प्रदेश के शिवालयों में भक्ति का अद्भुत नजारा, महाकाल का विशेष श्रृंगार और भोजेश्वर महादेव का फूलों से दरबार

    उज्जैन /भोजपुर
    भगवान शिव को प्रिय सावन महीने के चौथे सोमवार को विश्व प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर के दर्शन के लिए भक्तों की कतारें लगी हुई हैं। भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए। सभा मंडप में शिव के गण वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन कर आज्ञा ली गई, फिर चांदी का पट खोलकर कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया।

    जल से भगवान महाकाल का अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषणों के साथ भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट का श्रृंगार कर भस्म चढ़ाई गई। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ-साथ फूलों की माला धारण कराई गई। फल और मिठाई का भोग लगाया गया।

    भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के दर्शन के लिए भी भक्त लगातार तीर्थनगरी पहुंच रहे हैं। शाम को महादेव नौका विहार करेंगे। पारंपरिक सवारी में ओंकारेश्वर पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी। इसमें पुलिस बैंड, 7 ढोल बैंड और धार्मिक झांकियां शामिल होंगी।

    भोजपुर में भोजेश्वर महादेव को महाकालेश्वर स्वरूप में सजाया गया है। भोलेनाथ का करीब 6 क्विंटल फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया है। टीकमगढ़ के शिव धाम कुंडेश्वर में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने रिमझिम बारिश के बीच लोग लगातार मंदिर पहुंच रहे हैं।

    शाम 4 बजे प्रजा का हाल जानने निकलेंगे महाकाल
    आज शाम 4 बजे भगवान महाकाल की राजसी सवारी निकलेगी। पूजा-अर्चना के बाद बाबा को पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप को सलामी देंगे।

    आज बाबा महाकाल बैलगाड़ी के नंदी पर श्री उमा-महेश स्वरूप में दर्शन देंगे। पालकी पर श्री चंद्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव और नंदी रथ पर श्री उमा-महेश के मुखारविंद रहेंगे। सवारी में घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र बल, होमगार्ड, भजन-झांझ मंडली और पुलिस बैंड भी शामिल रहेगा।

    सवारी महाकाल मंदिर से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट पहुंचेगी। यहां शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा। इसके बाद बाबा मंदिर लौट आएंगे।

    ग्वालियर के मोटे महादेव का अभिषेक करने से हजार गुना पुण्य मिलता है
    ग्वालियर के मोटे महादेव को हजारेश्वर के नाम से भी पूजा जाता है। सावन के आखिरी सोमवार पर आज यहां आसपास के जिलों से भी भक्त आए हैं। मान्यता है कि यहां भोलेनाथ का अभिषेक करने से हजार गुना पुण्य प्राप्त होता है।

    भोजेश्वर महादेव का 6 क्विंटल फूलों से श्रृंगार
    भोजपुर में भोजेश्वर महादेव को महाकालेश्वर स्वरूप में सजाया गया है। मंदिर के महंत पवन गिरि महाराज ने भोलेनाथ का करीब 6 क्विंटल फूलों से विशेष श्रृंगार किया। रुद्राभिषेक-पूजन के बाद दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खुले।