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  • नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला, 48 घंटे में 19 ने गंवाई जान

    नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला, 48 घंटे में 19 ने गंवाई जान

    कोहिमा
    नागालैंड में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 19 लोगों की मौत हो गई है. पिछले दो दिनों में अलग-अलग इलाकों से मौत के मामले सामने आए हैं. पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT बनाई है। 

    पुलिस के मुताबिक, मौतें मोकोकचुंग और तुएनसांग जिलों में हुई हैं. मोकोकचुंग में 8 लोगों की मौत हुई है. वहीं, तुएनसांग में 11 लोगों की जान गई है. आशंका है कि इन लोगों ने मिलावटी या अवैध शराब का सेवन किया था। 

     शराब की सप्लाई का पता लगाएगी SIT

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि मामले की जांच के लिए SIT बनाई गई है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आई बंगलांग चांग को टीम का प्रमुख बनाया गया है. SIT मौतों की वजह का पता लगाएगी. इसके साथ ही संदिग्ध मिलावटी शराब के स्रोत और उसकी सप्लाई चेन की भी जांच होगी। 

    पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ सुराग मिले हैं. हालांकि, अभी इनके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है. पुलिस ने संदिग्ध शराब के सैंपल जांच के लिए गुवाहाटी भेजे हैं. इनकी फॉरेंसिक जांच की जाएगी. इससे मौतों की असली वजह का पता लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने मामले में कई जगह छापेमारी भी की है. कार्रवाई के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया. करीब 3 हजार शराब की बोतलें भी जब्त की गई हैं। 

    जांच में जुटी पुलिस
    वहीं घटना के बाद से पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई है और जांच में जुट गई है। जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले पर सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) वेसुप्रा केजो ने शनिवार को बताया कि इन मौतों की जांच करने और मिलावटी शराब के स्रोत और सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) आई. बुंगलांग चांग की अगुवाई में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। इस घटना में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

    फोरेंसिंक जांच के लिए भेजे गए सैंपल
    पुलिस ने बताया कि मौतों की वजह का पता लगाने के लिए सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए गुवाहाटी भेजे गए हैं। पुलिस ने कहा, "हमें कुछ सुराग मिले हैं, लेकिन अभी उनके बारे में जानकारी देना जल्दबाजी होगी।" इन मौतों के बाद, पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की, 19 लोगों को गिरफ्तार किया और लगभग 3,000 शराब की बोतलें ज़ब्त कीं।

    सावधानी बरतने की अपील
    इस मामले में, पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे ऐसी शराब न पिएं जिसकी पहचान न हो, जिस पर कोई लेबल न हो या जिस पर अवैध होने का शक हो। साथ ही, पुलिस ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बता दें कि नागालैंड में 1990 से ही शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद इस तरह की घटना होना प्रशासन के रवैये पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। शराबबंदी के बावजूद इलाके में जहरीली शराब किस तरह से बेंची या पहुंचाई जा रही थी, यह जांच का विषय है।

    19 लोग गिरफ्तार, करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त
    मौतों के बाद पुलिस ने प्रभावित इलाकों में कई जगह छापेमारी की. इस कार्रवाई के तहत 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया और शराब की करीब 3,000 बोतलें ज़ब्त की गईं। 

    नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. पुलिस ने लोगों को बिना पहचान, बिना लेबल या संदिग्ध अवैध शराब न पीने की सलाह दी है. अधिकारियों ने यह भी कहा है कि शराब पीने के बाद अगर किसी को चक्कर आना, धुंधला दिखना, सांस लेने में दिक्कत या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत मेडिकल मदद लें।

     लोगों से सावधान रहने की सलाह
    दरअसल, नागालैंड में 1990 से शराबबंदी कानून लागू है. इसके बावजूद राज्य में अवैध शराब की बिक्री और सप्लाई की आशंका सामने आई है. पुलिस अब इस नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है. पुलिस ने लोगों से अज्ञात या बिना लेबल वाली शराब नहीं पीने की अपील की है. संदिग्ध अवैध शराब से भी दूर रहने को कहा गया है। 

    पुलिस ने बताया कि शराब पीने के बाद चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं. पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है. शराब की सप्लाई से जुड़े लोगों का पता लगाया जा रहा है।

    जहरीली शराब त्रासदियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी सख्त
    इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शुक्रवार को कई उपाय सुझाए। शीर्ष अदालत ने जहरीली शराब के गैर-कानूनी उत्पादन, परिवहन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बिठाकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया।

    न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने महाराष्ट्र विष नियमावली के नियम 18ए और 18बी को रद्द करते हुए कई सुझाव दिए। ये नियम 2011 में मुंबई में जहरीली शराब से हुई एक बड़ी घटना के बाद एक अधिसूचना के जरिए लागू किए गए थे। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने अपने फैसले में लिखा, ''इतिहास इस बात का गवाह है कि शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगाने से अक्सर शराब का कारोबार गैर-कानूनी तरीके से होने लगता है, जिससे बिना नियमन वाली और जानलेवा शराब का चलन बढ़ जाता है।''

    न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कई सुझाव भी दिए। इन सुझावों में अवैध शराब की आपूर्ति और मांग शृंखला तोड़ने, राज्य की सीमाओं पर सख्ती बढ़ाने और मेथनॉल के नियमन को कड़ा करने पर जोर दिया गया है। मेथनॉल एक ऐसा रसायन है, जिसका इस्तेमाल नकली शराब बनाने में किया जा सकता है। फैसले में कहा गया, ''चूंकि शराब राज्य में बनती भी है और बाहर से भी लाई जाती है, इसलिए इसे लागू करने के कदमों में राज्य की सीमाओं पर कड़ी निगरानी शामिल होनी चाहिए। इस संबंध में, राज्य परिवहन विभाग का सीमाओं पर सतर्क रहना राज्य में शराब की अवैध ढुलाई को नियंत्रित करने में मदद करेगा…।''

    इसमें आगे कहा गया कि राज्य के भीतर शराब की खरीद, निर्माण, ढुलाई, बिक्री और सेवन से जुड़े कानूनों को लागू करना भी जहरीली शराब से होने वाली त्रासदियों को रोकने में अहम साबित होगा। न्यायालय ने कहा, ''राज्य पुलिस, क्रमशः मद्य निषेध विभाग और आबकारी विभाग के साथ मिलकर, स्थानीय शराब बनाने वाले अड्डों की पहचान कर सकती है और उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। ये अड्डे आमतौर पर राज्य के शहरी इलाकों में भीड़-भाड़ वाले या अर्द्ध-औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित होते हैं।''

     

  • सागर शराब कांड में प्रशासन सख्त, 2 शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त; 7.49 लाख के गबन में सरपंच पर गिरी गाज

    सागर शराब कांड में प्रशासन सख्त, 2 शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त; 7.49 लाख के गबन में सरपंच पर गिरी गाज

    सागर 

    सागर जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और जनसुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक के बाद एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की हैं। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देशों पर जिला प्रशासन ने जिले में शिकंजा कसते हुए कई ताबड़तोड़ कदम उठाए हैं।

    विनायका और बंडा थाना क्षेत्रों में आपराधिक मामलों में संलिप्तता पाए जाने पर प्रशासन ने म.प्र. आबकारी अधिनियम 1915 के तहत दो शराब दुकानों मगरधा समूह के लाइसेंसधारी सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा और बरेठी दुकान के लाइसेंसधारी यशवंत सिंह ठाकुर के कंपोजिट लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही बंडा प्रकरण से जुड़े आरोपी सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा की ग्राम मसवासी स्थित पत्थर क्रशर की खनिज लीज भी नियमों के लगातार उल्लंघन और समयसीमा का पालन न करने पर निरस्त कर दी गई है।

    लोक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आयुध अधिनियम, 1959 के तहत तीन हथियार लाइसेंस भी निरस्त किए गए हैं। इनमें सोहन राजपूत, जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी की पत्नी हेमलता राजपूत और सिद्धार्थ कुशवाहा शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी को अपने हथियार संबंधित थानों में तुरंत जमा कराने के कड़े निर्देश दिए हैं। 

    महिला सरपंच के वित्तीय अधिकार सीज
    वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए, जिला पंचायत सागर ने जनपद पंचायत शाहगढ़ की ग्राम पंचायत नौराज की सरपंच श्रीमती राजकुमारी राजपूत के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है। निर्माण कार्यों के दौरान प्रथम दृष्टया 7 लाख 49 हजार 079 रुपये के गबन और दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद, म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के तहत सरपंच के वित्तीय आहरण एवं संवितरण अधिकारों को सीज कर दिया गया है।

    प्रशासन की इस दोतरफा और त्वरित कार्रवाई से जिले के अन्य लापरवाह और संदिग्ध तत्वों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध गतिविधियों, वित्तीय गबन और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध ऐसे कड़े कदम आगे भी जारी रहेंगे। 

     

  • शराब तस्करी का बड़ा खुलासा, संकुल समन्वयक-शिक्षक समेत 7 दबोचे; कार और 40 पेटियां जब्त

    शराब तस्करी का बड़ा खुलासा, संकुल समन्वयक-शिक्षक समेत 7 दबोचे; कार और 40 पेटियां जब्त

    आरंग/रायपुर.

    सरकारी तंत्र को चूना लगाकर शराब तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का आरंग पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। हैरान कर देने वाले इस मामले में शराब दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन और मल्टी-वर्कर के साथ ही अमोदी में पदस्थ शासकीय शिक्षक व संकुल समन्वयक तिरीत राम बांधे भी तस्करी के इस काले कारोबार में संलिप्त पाया गया है।

    एसएसपी रायपुर, एएसपी एवं डीएसपी माना के निर्देश पर थाना प्रभारी आरंग निरीक्षक नरेश साहू के नेतृत्व में गश्त पर निकली पुलिस टीम को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि सफेद रंग की लग्जरी आर्टिका कार (CG 04 QB 5200) में ग्राम गुल्लू शराब भट्ठी से भारी मात्रा में अवैध शराब भरकर रानीसागर की ओर ले जाई जा रही है।

    मंदिर के पास घेराबंदी कर दबोचा
    सूचना मिलते ही सउनि अनिल चंद्रवंशी, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक सुरेश बंधन, आरक्षक नियाज खान और सैनिक दुर्गेश चंद्राकर की टीम ने रानीसागर हनुमान मंदिर के पास घेराबंदी कर कार को रोका। कार की तलाशी लेने पर 160 नग पाव देशी मसाला शराब (कुल 28.800 बल्क लीटर, कीमत ₹16,000) बरामद हुई। पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त 8 लाख की कार सहित कुल ₹8,16,000 का सामान जब्त किया है।

    गिरफ्तार आरोपियों में शामिल
    गिरफ्तार आरोपियों में परसवानी, ग्राम अमोदी निवासी शिक्षक एवं संकुल समन्वयक तिरीत राम बांधे (45 वर्ष) गुल्लू निवासी , शराब दुकान सुपरवाइजर उबारन दास पुरेना (34 वर्ष), कोडापार निवासी शराब दुकान सेल्समैन राजेश काटले (31 वर्ष), शराब दुकान मल्टी वर्कर परसवानी निवासी सुरेश बांधे (36 वर्ष), परसवानी निवासी वाहन चालक भरत रात्रे (38 वर्ष), अमोदी निवासी दिलीप कुमार कुर्रे (50 वर्ष), अमोदी निवासी भागवत बारले (38 वर्ष) शामिल हैं।

    आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज
    थाना प्रभारी नरेश साहू ने बताया कि सरकारी शराब दुकान के कर्मचारी खुद कोचियों की भूमिका निभा रहे थे, जिसमें संकुल समन्वयक शिक्षक की संलिप्तता ने शिक्षा विभाग को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सभी 7 आरोपियों के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों का पता लगाने जांच जारी है।

  • सागर शराब कांड: मौतों का आंकड़ा 28 पहुंचा, 7 दुकानें फिर खुलेंगी; गांव-गांव शुरू हुआ नशामुक्ति अभियान

    सागर शराब कांड: मौतों का आंकड़ा 28 पहुंचा, 7 दुकानें फिर खुलेंगी; गांव-गांव शुरू हुआ नशामुक्ति अभियान

     सागर
     मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने वाले लोगों की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार को तीन और लोगों की मौत हुई। इनको मिलाकर मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है।इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में उन सात शराब की दुकानों को फिर से खोलने का आदेश हो जारी हो गया है, जिन्हें मौतों के बाद बंद करा दिया गया था। हालांकि आदेश में कहा गया है कि जिले में केवल संदिग्ध बाम्बे व्हिस्की और सागर गोल्ड ब्रांड की देसी शराब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।

    मामले में पुलिस और प्रशासन ने अवैध शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए रणनीति बनाई है। अब प्रशासन ने तीन स्तर पर कार्रवाई शुरू की है।

    इसमें घर-घर सर्वे, चौपाल और कानूनी कार्रवाई शामिल है। बंडा सिविल अस्पताल में शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के आने का सिलसिला अब थमने लगा है। हालांकि, मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शासन-प्रशासन पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है।

    मंगलवार को छापरी, घूरमार और रिछवार सानौधा गांव के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। करीब 13 लोग बुंदेलखंड मेडिकल कालेज की आइसीयू में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग भर्ती हैं। हालांकि कुछ लोगों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है।

    इस बीच, प्रारंभिक जांच में संदिग्ध शराब किसी अधिकृत डिस्टिलरी से तैयार होकर बाजार में आने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि डिस्टिलरी स्तर पर तैयार शराब में गड़बड़ी होती तो उसका असर संभाग के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देता।

    फिलहाल जांच का फोकस शराब की पैकेजिंग और उसमें मिलावट के स्तर पर है। शराब की जांच के लिए तीन टीमें गठित की हैं। पिछले दो दिनों में शराब दुकानों, आरोपितों के कब्जे, फैक्ट्री सहित अन्य स्थानों से शराब के करीब 80 नमूने लिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नकली शराब की बोतल का ढक्कन ढीला होने और शराब का रंग सामान्य से अलग होता है।

    मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पर जताया संदेह
    जिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा ने कहा कि सरकार अभी भी जहरीली शराब से हुई मौतों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। प्रशासन द्वारा बताए जा रहे आंकड़ों और जमीनी हकीकत में अंतर दिखाई दे रहा है।

    पहले मृतकों के शव परिजनों को सौंपने में देरी हुई, पोस्टमार्टम में देरी हुई और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से होगी या नहीं।

    कांग्रेस की मांग है कि सभी मृतकों के विसरा की जांच भोपाल की स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का सवाल न उठे।

    भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार मध्यप्रदेश में-राहुल गांधी
    राहुल गांधी ने सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद X पर लिखा- भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन अगले हादसे तक उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है।

    उन्होंने लिखा- जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है, लेकिन मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा। कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है।

    शिकायतों पर क्लीनचिट भारी पड़ी, वेयर हाउस प्रभारी को हटाया
    सागर में लंबे समय से आबकारी वेयर हाउस की प्रभारी मंजूषा सोनी को मंगलवार देर शाम हटा दिया गया। उनके स्थान पर राम चित्रकार को नया प्रभारी बनाया गया है।

    दरअसल, पिछले महीने एक शराब ठेकेदार ने बाम्बे व्हिस्की की नकली बोतल देकर उसके मिलावटी होने की आशंका जताई थी। 10-12 दिन उसे रखे रहने के बाद सहायक आबकारी आयुक्त ने उसे जांच के लिए वेयर हाउस भेजा।

    बताया गया है कि एडीओ मंजूषा सोनी ने करीब एक घंटे में केवल बैच नंबर का मिलान कर शराब को पीने योग्य बताते हुए रिपोर्ट भेज दी।

    अब इसी ब्रांड की शराब से बंडा तहसील मुख्यालय से सटे आठ गांवों में मौतों के बाद क्लीनचिट पर सवाल है। शराब ठेकेदारों का कहना है मंजूषा सोनी 20-22 साल से सागर में ही कार्यरत हैं।

    राहुल गांधी ने कहा- सरकार जवाब दे
    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष्य राहुल गांधी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर की पोस्ट में लिखा है कि भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्य प्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं।

    जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर जिले में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है। मगर पूरे मध्य प्रदेश को पता है आगे क्या होगा- कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि यह पहली बार नहीं है। कुछ ही वक्त पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई।

    पिछले साल जहरीली कफ सीरप से छोटे बच्चों की जान चली गई। मध्य प्रदेश में दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। 20 साल से ज्यादा समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन जवाबदेही कहां है?

    उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, इन मौतों की पूरी सच्चाई सामने आए और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं, जिसकी भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जवाबदेही तय हो।

    शिवपुरी में महिलाओं ने शराब की दुकान पर लगाई आग
    सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मौतों के बाद शिवपुरी जिले के अमोला गांव की शराब की दुकान पर महिलाओं ने धावा बोल दिया। उन्होंने बोतलें फेंक जमकर तोड़फोड़ की और दुकान में आग लगा दी। पूरी दुकान जलकर राख हो गई। कर्मचारियों ने भागकर खुद को महिलाओं के आक्रोश से बचाया। सभी महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर पहुंचीं थीं।

    दरअसल, शराब ठेकेदारों ने जगह-जगह शराब बिक्री के ठिकाने बना दिए हैं। आमोला में ऐसी ही दुकान खोली गई है। इससे गांव में शराब पीकर रोज हंगामा होता है। नतीजतन, महिलाएं परेशान होती हैं। अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सेंगर का कहना है कि पुलिस टीम ने महिलाओं को शांत कराया।

    शराब दुकानें सील, आरोपियों की धरपकड़ शुरू
    शराब से मौतें होने का कारण सामने आते ही पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी। तत्काल सात लाइसेंसी शराब दुकानों को सील कर दिया गया। सैंपलिंग शुरू कराई गई।

    वहीं, दूसरी ओर पुलिस की अलग-अलग टीमों ने गांवों में दबिश दी। अवैध रूप से शराब बेचने वाले आरोपियों की धरपकड़ शुरू की गई। उनके कब्जे से शराब जब्त की गई। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में लगातार निगरानी बढ़ाई, ताकि कोई भी व्यक्ति अवैध शराब न बेच सके।

    प्रशासन ने गांव-गांव में मुनादी कराकर लोगों से शराब नहीं पीने की अपील की। वहीं, शराब पीने वाले लोगों को अस्पताल में चेकअप कराने की सलाह दी गई। इसके बाद प्रशासन ने जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया।

    इन 30 लोगों को मामले में आरोपी बनाया
    मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक, विशाल लोधी और राजा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

    वहीं, विनायका थाने में राम सिंह लोधी निवासी पाटन, ततरवारा सरपंच चंदू उर्फ चंद्रभान पिता द्वारिका प्रसाद राजपूत निवासी ततरवारा, अरविंद पिता आशाराम यादव, भगवान सिंह पिता देवी सिंह लोधी, मानसिंह प्रताप बिहार अहिरवार, लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, रोहित पिता उत्तम शिवहरे निवासी छतरपुर, राघवेंद्र पिता सोहन सिंह निवासी ततरवारा, धर्मेंद्र पिता भुजबल राजपूत निवासी ततरवारा और सोहन पिता उमराव सिंह राजपूत निवासी ततरवारा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

  • सागर में जहरीली शराब बनी मौत का कारण, 12 लोगों ने गंवाई जान; कई की हालत नाजुक

    सागर में जहरीली शराब बनी मौत का कारण, 12 लोगों ने गंवाई जान; कई की हालत नाजुक

    सागर
    मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा में शनिवार रात जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत हो गई। वहीं कई लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) रेफर किया गया है।

    जानकारी के अनुसार रात में करीब दर्जनभर लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 12 लोगों की मौत हो गई। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम बंडा अस्पताल में कराया जा रहा है। गंभीर हालत वाले पांच मरीजों को उपचार के लिए बीएमसी सागर भेजा गया है।

    घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बंडा पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली और मामले की जांच शुरू कराई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बंडा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    जिलाधिकारी ने दी जांच की सलाह
    जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की कि पिछले 24 से 48 घंटे के दौरान किसी भी प्रकार की शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को यदि किसी तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो वह तुरंत चिकित्सक से जांच कराए। उन्होंने कहा, ”प्रशासन ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रहा है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    बंडा के पूर्व विधायक की अपील
    बंडा के पूर्व विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि 9 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि बंडा विकासखंड के बराज, घूघर, नौराज और आसपास के गांवों में रहने वाले कई लोगों ने शनिवार रात शराब का सेवन किया था, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने बताया कि परिजन उन्हें इलाज के लिए बंडा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने कई लोगों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि चार-पांच लोग बंडा सिविल अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि चार-पांच लोगों को सागर भेजा गया है।

    तरवर लोधी ने लोगों से अपील की कि जिन लोगों ने पिछले दो-तीन दिनों में बंडा क्षेत्र की किसी दुकान या अवैध रूप से शराब बेचने वालों से शराब खरीदकर पी है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी थोड़ी भी परेशानी महसूस हो रही है, वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से जांच कराएं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस का दल मौके पर मौजूद है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।

    इनकी हुई मौत
    पुलिस के अनुसार मृतकों में गोलू उर्फ चमन लोधी (45), निवासी गूगरा खुर्द, दिग्विजय लोधी (28), निवासी नौराज, करतार सिंह लोधी (30), निवासी नौराज, उजियार सिंह लोधी (56), निवासी गूगरा खुर्द, रोशन लोधी (30), निवासी पाटन थाना विनायका और राजेंद्र लोधी (32), निवासी नौराज-गूगरा शामिल हैं। गोलू उर्फ चमन को पहले से कैंसर की शिकायत होने की जानकारी भी सामने आई है।

    पांच मरीज बीएमसी रेफर
    हरनाम राय (42), निवासी चौका, उत्तम नत्थू नायक (42), निवासी दलपतपुर, मंगल रजक (40), निवासी गूगरा खुर्द, परम आदिवासी, निवासी हिनौता और धनसिंह आदिवासी (30), निवासी हिनौता को गंभीर हालत में बीएमसी सागर रेफर किया गया है।

    प्रशासन और पुलिस द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जहरीली शराब की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है।

  • महाराष्ट्र में जहरीली शराब त्रासदी, मौतों से दहला इलाका; सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड पर

    महाराष्ट्र में जहरीली शराब त्रासदी, मौतों से दहला इलाका; सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड पर

     पुणे 
    महाराष्‍ट्र में चौंकाने वाली घटना सामने आई है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में जहरीली शराब पीने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्‍य की हालत गंभीर बताई जा रही है. पिंपरी-चिंचवाड़ के दापोडी और फुगेवाड़ी इलाके में आठ लोगों ने दम तोड़ा, जबकि पुणे के काले पड़ल इलाके में तीन और हडपसर इलाके में दो लोगों की मौत हुई. घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और प्रभावित इलाकों में जांच तेज कर दी गई है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जहरीली शराब आरोपी योगेश वानखेडे ने तैयार की थी, जो कथित तौर पर अवैध शराब कारोबार से जुड़ा हुआ है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. उसके खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। 

    जानकारी के अनुसार, यह जहरीली और स्पिरिट युक्त शराब योगेश वानखेडे नाम के व्यक्ति ने तैयार की थी. इस शराब को पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के अलग-अलग इलाकों में बेची गई थी. दापोडी, फुगेवाड़ी, हडपसर और काले पड़ल इलाके में लोगों ने यह शराब पी. कुछ समय बाद अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और मुंह से झाग निकलने लगा. इसके कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई. इलाज के लिए ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया. योगेश वानखेडे एक अवैध शराब विक्रेता बताया जा रहा है. उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। 

    पुलिस का अलग राग
    फुगेवाड़ी इलाके में अवैध हाथभट्टी और देसी शराब के अड्डे धड़ल्ले से चलने के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और दबी जुबान में चर्चा है कि ये मौतें जहरीली शराब के कारण हुई हैं, लेकिन दापोडी पुलिस ने इसे अफवाह बताया है. शुरुआती जांच के बाद दावा किया है कि ये सभी मौतें अलग-अलग और स्वतंत्र कारणों से हुई हैं। 

    पुलिस की नजर में मौत की वजह क्‍या?
    पुलिस के अनुसार, पांडुरंग फुगे (57) की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है. विजय राठौड़ (31) और राजेंद्र राठौड़ (34) दो सगे भाइयों की मौत दिल का दौरा पड़ने से होने की आशंका है. राजेंद्र राजपूत (51) की मौत बाथरूम में चक्कर खाकर गिरने की वजह से हुई. अकबर पठान (52) पिछले 15 वर्षों से अत्यधिक शराब पीने के आदी थे।