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  • भूमि अधिग्रहण मामला: हरियाणा सरकार की अपील खारिज, जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    भूमि अधिग्रहण मामला: हरियाणा सरकार की अपील खारिज, जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    चंडीगढ़
     पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में पानीपत के सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब संबंधित अवधि के वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हों तो पुराने अवॉर्ड को महज उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।

    जमीन की कीमत तय करते समय उसी क्षेत्र की तुलनीय बिक्री, जमीन की स्थिति, आकार और लेन-देन की वास्तविकता को ध्यान में रखना जरूरी है।

    हरियाणा सरकार की अपील खारिज
    हाई कोर्ट ने जमीन मालिकों की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।जस्टिस जगमोहन बंसल ने राज्य सरकार और जमीन मालिकों से जुड़ी कई अपीलों पर साझा फैसला सुनाया। मामला पानीपत जिले के सीवाह गांव में 25 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा था
    28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी हुई थी, जबकि 16 अप्रैल 2013 को धारा छह की अधिसूचना जारी की गई। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 26 सितंबर 2013 को मुआवजा तय करते हुए बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था।

    इसके बाद जमीन मालिकों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और जमीन मालिक दोनों हाई कोर्ट पहुंचे थे।

    हाई कोर्ट ने पाया कि जमीन मालिकों ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई बिक्री विलेख पेश किए थे। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक सामने आई।

    बिक्री विलेखों की कीमत 35 से 40 लाख रुपये
    वहीं राज्य सरकार द्वारा पेश बिक्री विलेखों में कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ थी। कोर्ट ने माना कि जमीन के अधिक करीब स्थित बिक्री विलेख और वास्तविक बाजार मूल्य बताने वाले लेन-देन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2007 के अधिग्रहण से संबंधित पुराने अवॉर्ड को सीधे आधार बनाना उचित नहीं था, क्योंकि वर्ष 2010-14 के तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध थे। कोर्ट ने संबंधित बिक्री विलेखों का विश्लेषण करते हुए वृद्धि और कमी के सिद्धांत लागू किए।

    इसके बाद जमीन का उचित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया। कोर्ट ने कहा कि भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण के लिए कोई कठोर और एकमात्र फार्मूला नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित अनुमान लगाया जा सकता है।

  • ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए जयपुर के 50 गांवों में भूमि अधिग्रहण होगा

    ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए जयपुर के 50 गांवों में भूमि अधिग्रहण होगा

    जयपुर
     कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जयपुर जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है। जिले में 95.4 किमी लंबे इस ‘एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे’ के लिए चौमूं, किशनगढ़-रेनवाल, जोबनेर, फुलेरा और दूदू तहसील के 50 गांवों के 13,480 परिवार प्रभावित होंगे। परियोजना के लिए 2,274 खसरों की 1,022 हेक्टेयर निजी और 50 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। निर्माण की जद में आने से 11,108 पेड़ों को नुकसान होगा और 20 व्यावसायिक इकाइयां भी प्रभावित होंगी। इनमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति के 1,743 परिवार शामिल हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने जयपुर जिले के लिए परियोजना की अंतिम सामाजिक समाघात रिपोर्ट जारी कर दी है।

    209.5 किमी का होगा पूरा एक्सप्रेस-वे, 90 मीटर चौड़ा राइट-ऑफ-वे
    कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 209.5 किमी होगी। यह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा, यानी इस पर अनधिकृत प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। जयपुर जिले में इसकी लंबाई 95.4 किमी होगी। एक्सप्रेस-वे 90 मीटर राइट-ऑफ-वे में बनाया जाएगा और इसकी एम्बैंकमेंट ऊंचाई 2.5 से 13 मीटर तक रखी जाएगी।

    इन तहसीलों से गुजरेगा एक्सप्रेस-वे
    पूरा एक्सप्रेस-वे कोटपूतली, पाटन, नीम का थाना, खंडेला, श्रीमाधोपुर, रींगस, चौमूं, किशनगढ़-रेनवाल, जोबनेर, फुलेरा, दूदू, रूपनगढ़ और किशनगढ़ तहसीलों से होकर गुजरेगा। यह किशनगढ़ के पश्चिम से शुरू होकर कोटपूतली के पूर्व में समाप्त होगा।

    शिवनगर, उड़गवार, भूतेड़ा, आष्ठीकलां, हस्तेड़ा, विजय नगर, नोपा का बास, लालासर, जुनसिया, बाघावास, धोल्याकावास, हरसोली, सुन्दरपुरा, रामजीपुरा कलां, रामजीपुरा खर्द, पचकोड़िया, श्योसिंहपुरा, सुखालपुरा, मूण्डोती, भोजुरा खुर्द, दीपपुरा, चारणवास, आईदानकावास, डयोड़ी, शिम्भूपुरा, जोरपुरा, प्रतापपुरा, जगमालपुरा, गुमानपुरा, माजीपुरा, सुरसिंहपुरा, माल्यावास, रोजड़ी, सामोताकावास, खेड़ीराम, कुड़ियों की ढाणी, आकोदा, रामनगर, चारणवास, चैनपुरा, नरायना, नारदपुरा, भरतोलाव, जैकमपुरा, नानण, हटुपुरा, श्योपुरा, साखून, लदेगा और सिरोहीकलां शामिल हैं।

    एनएच-48 पर बढ़ते दबाव को कम करने का तर्क
    रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से सुगम, तेज और सुरक्षित यातायात संचालन के साथ क्षेत्रीय आर्थिक विकास, व्यापार-वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। राज्यों के बीच बढ़ती व्यावसायिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के कारण एनएच-48 पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़क की सीमित चौड़ाई, दुर्घटनाओं में वृद्धि और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याओं को देखते हुए नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की आवश्यकता बताई गई है।

    घर-संरचना खोने वाले परिवारों के मुआवजे का प्रावधान
    रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के कारण जिन परिवारों के घर या अन्य संरचनाएं प्रभावित होंगी, परियोजना अधिकारियों को उनका सत्यापन और मूल्यांकन करना होगा। रिपोर्ट में मुआवजा भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के आधार पर निर्धारित करने के लिए कहा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के परिवारों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज तैयार करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि कटने वाले हर पेड़ की एवज में कम से कम तीन पेड़ लगाए जाएं।

  • सेटेलाइट टाउनशिप के लिए आसान होगा भूमि अधिग्रहण, बिहार सरकार ने बढ़ाया मुआवजा

    सेटेलाइट टाउनशिप के लिए आसान होगा भूमि अधिग्रहण, बिहार सरकार ने बढ़ाया मुआवजा

    पटना

    बिहार के लोगों को जमीन अधिग्रहण में अब और ज्यादा मुआवजा मिलेगा। भूमि अधिग्रहण से संबंधित नई नीति को सम्राट कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इसके तहत राज्य सरकार अगर आपकी जमीन लेगी तो अब 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क प्रोत्साहन राशि के रूप में देगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस मीटिंग में कुल 27 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

    बैठक के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सम्राट कैबिनेट ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 को मंजूरी दी है। लोकहित की परियोजनाओं के लिए आपसी सहमति के आधार पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से यह नीति लाई गई है।

    इसके तहत शहरी क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण के दौरान भूमि का मूल्य बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर (एमवीआर), जो भी अधिक होगा, उसके दोगुने के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह दाम बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर, जो भी अधिक होगी, उसके चार गुना के बराबर होगा। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी। सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली जमीन पर स्टांप और पंजीयन शुल्क भी नहीं लगेगा।

    11 नई सेटेलाइट टाउनशिप परियोजना में होगी आसानी
    बिहार के 11 प्रमुख शहरों के आसपास नई सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जा रही है। चिह्नित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर फिलहाल रोक लगाई गई है। माना जा रहा है कि इन टाउनशिप को विकसित करने के लिए जमीन का अधिग्रहण नई नीति के आधार पर किया जाएगा। पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि किसी भी रैयत (जमीन मालिक) का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

    पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, छपरा, सोनपुर समेत 11 शहरों में विकसित होने वाली सेटेलाइट टाउनशिप के अधिकतर चिह्नित क्षेत्र ग्रामीण इलाकों में हैं। ऐसे में सम्राट सरकार की नई नीति का फायदा किसानों को मिलेगा।

    राज्य सरकार की ओर से पूर्व में स्पष्ट किया गया था कि नई टाउनशिप में जमीन मालिकों को भी हिस्सेदारी दी जाएगी। अगर जो रैयत हिस्सेदारी नहीं चाहते, उन्हें बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा मुआवजा दिया जाएगा। इसी क्रम में नई नीति लाई गई है। इसके अलावा विभिन्न परियोजनाओं को लागू करने में भी सरकार को आसानी होगी। 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के जरिए प्रशासनिक अधिकारी को जमीन मालिकों को तैयार भूमि अधिग्रहण के लिए और सहजता से तैयार कर सकेंगे।