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  • PM मोदी डिग्री केस: केजरीवाल को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने बरकरार रखा ₹25 हजार का जुर्माना

    PM मोदी डिग्री केस: केजरीवाल को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने बरकरार रखा ₹25 हजार का जुर्माना

    अहमदाबाद
    आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। दरअसल अरविंद केजरीवाल ने अपनी अपील में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें पीएम मोदी की अकादमिक डिग्री सार्वजनिक करने के लिए गुजरात यूनिवर्सिटी को दिए गए निर्देश को रद्द कर दिया गया था।

    सिंगल बेंच के फैसले को रखा बरकरार
    गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने सिंगल बेंच के जज के आदेश को बरकरार रखा। बेंच ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान जो भी दलीलें दीं, उनमें से किसी से भी यह साबित नहीं होता कि पहले के फैसले में कोई त्रुटि थी। इसलिए अपील खारिज की जाती है और इस पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगाया जाएगा।

    हाई कोर्ट ने कहा कि जिस तरह केजरीवाल ने उनके खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की प्रक्रिया का जवाब दिया और लिखित जवाब देकर मामले को आगे बढ़ाया, वह खुद सबकुछ कहता है और अदालत को इस पर आगे टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने कहा कि सीईसी की ओर से केजरीवाल को एक आवेदक मानते हुए स्वत: संज्ञान लेकर आदेश पारित करना कानून के दायरे से बाहर था। अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

    फटकार के साथ अदालत ने लगाया था जुर्माना
    हाई कोर्ट ने कहा, 'इस मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता ने सुनवाई के दौरान जो भी दलीलें दीं, उनमें से किसी से भी यह साबित नहीं होता कि पहले के फैसले में कोई त्रुटि थी। इसलिए अपील खारिज की जाती है और इस पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं लगाया जाएगा।' सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को सीआईसी के आदेश को रद्द करते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। बेंच ने आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी और कहा था कि उनका रवैया गंभीर नहीं था।

    क्या कहा था अरविंद केजरीवाल ने
    अपील पर सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाए जाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके मुवक्किल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री मांगने पर 'लगातार जोर नहीं दिया' था, जबकि एकल पीठ ने अपने आदेश में इसके विपरीत टिप्पणी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और एक औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर केजरीवाल को पक्षकार बनाया था।

    क्या है मामला?
    दरअसल गुजरात हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द करते हुए केजरीवाल पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था। बेंच ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी और कहा था कि उनका रवैया गंभीर नहीं था।

    क्यों की थी अपील?
    अपील पर सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाए जाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके मुवक्किल ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री मांगने पर “लगातार जोर नहीं दिया” था, जबकि सिंगल बेंच ने अपने आदेश में इसके विपरीत टिप्पणी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और एक औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर केजरीवाल को पक्षकार बनाया था। 

  • केजरीवाल बोले- पंजाब से नहीं, मुंद्रा पोर्ट से शुरू हो नशे के खिलाफ लड़ाई

    केजरीवाल बोले- पंजाब से नहीं, मुंद्रा पोर्ट से शुरू हो नशे के खिलाफ लड़ाई

    चंडीगढ़.

    पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधा है।

    केजरीवाल ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा कि अगर पंजाब की रत्ती भर भी चिंता है तो गुजरात से आने वाले नशे को रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत पंजाब की धरती से नहीं, बल्कि मुंद्रा पोर्ट से होनी चाहिए। केजरीवाल ने नितिन नवीन के उस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें प्रधानमंत्री के हवाले से पंजाब के युवाओं और भविष्य को नशे से बचाने की बात कही गई थी।

  • राहुल गांधी पर केजरीवाल का तीखा हमला, ‘पंजाब में नशे के खिलाफ जंग जारी है’

    राहुल गांधी पर केजरीवाल का तीखा हमला, ‘पंजाब में नशे के खिलाफ जंग जारी है’

    चंडीगढ़.

    पंजाब में नशे के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच सियासी तकरार तेज हो गई है। राहुल गांधी के आरोपों और इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट के बाद केजरीवाल ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर पंजाब में नशे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

    केजरीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार नशे के खिलाफ निर्णायक युद्ध लड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि पहली बार देश में कोई राज्य नशे के खिलाफ इस तरह अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा की सरकारों के दौरान पंजाब में नशे की समस्या फैली और अब उनकी सरकार इसे खत्म करने का प्रयास कर रही है।

    केजरीवाल ने कहा- 
    पंजाब में नशा कौन लाया? आपकी कांग्रेस सरकार लायी। अकाली दल और बीजेपी की सरकार लायी। पहली बार पूरे देश में कोई राज्य नशे के ख़िलाफ़ इस तरह से युद्ध छेड़ रहा है। आज पंजाब सरकार काँग्रेस, अकाली दल और बीजेपी के फैलाये नशे को साफ़ करने की कोशिश कर रही है। मुझे बेहद दुख है कि आप जैसा नेता लाशों के ऊपर गंदी राजनीति कर रहा है।

    निर्णायक युद्ध लड़ रही सरकार –
    राहुल जी, पंजाब सरकार नशे के विरुध्द निर्णायक युद्ध लड़ रही है।
    पंजाब में नशा कौन लाया? आपकी कांग्रेस सरकार लायी। अकाली दल और बीजेपी की सरकार लायी।
    पहली बार पूरे देश में कोई राज्य नशे के ख़िलाफ़ इस तरह से युद्ध छेड़ रहा है। आज पंजाब सरकार काँग्रेस, अकाली दल और बीजेपी के फैलाये…

    – Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal)

    गुलजार सिंह की मौत राजनीति न करें
    गुलजार सिंह की मौत को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बेहद दुख है कि राहुल गांधी जैसे नेता एक व्यक्ति की मौत पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस व्यक्ति की मौत पर राजनीति करने के लिए कल आपके विधायक भी जब उस गांव में गये तो गांव वालों ने उन्हें निकाल दिया। केजरीवाल ने अपने पेज पर एक वीडियो भी शेयर किया। उन्होंने राहुल गांधी से निवेदन किया कि वे भी एक चक्कर इस गांव का लगाकर आएं। पंजाब सरकार के किसी मंत्री, किसी विधायक का इस व्यक्ति की मौत से कोई लेना देना नहीं और वे इस तरह की गंदी राजनीति मत कीजिए।

    गुलजार सिंह मौत पर सियासत तेज –
    इससे पहले राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार में सरकारी नाकामी पर सवाल उठाने वालों को धमकी और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि दलित समुदाय से आने वाले गुलजार सिंह ने वित्त मंत्री से नशे के कारोबार पर सवाल किया था, जिसके बाद उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया और प्रताड़ित किया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह ने जहर खा लिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से वित्त मंत्री का इस्तीफा लेने और मामले की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। अब केजरीवाल के जवाब के बाद इस मुद्दे पर पंजाब की राजनीति और गरमा गई है।

  • दिल्ली की सियासत में बड़ा मोड़, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बात पर माने केजरीवाल-सिसोदिया

    दिल्ली की सियासत में बड़ा मोड़, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बात पर माने केजरीवाल-सिसोदिया

    नई दिल्ली

     दिल्ली के कथित आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट सामने आई है। हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के इस केस से अलग होने के बाद, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आखिरकार कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने के लिए राजी हो गए हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान जस्टिस मनोज जैन के हाथों में आ गई है, जिनकी बेंच के सामने इस केस की नियमित सुनवाई शुरू हो चुकी है।

    केजरीवाल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक दुर्गेश पाठक ने भी इस नई बेंच के सामने सुनवाई में शामिल होने के लिए अपनी हामी भर दी है।

    क्या था विवाद और क्यों बदला वकालतनामा?
    न्यायिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले काफी समय से आम आदमी पार्टी के नेता इस केस की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में होने को लेकर हिचकिचा रहे थे। लेकिन अब जैसे ही यह मामला दूसरी बेंच में ट्रांसफर हुआ, वैसे ही तीनों नेताओं के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सोमवार को जब सीबीआई (CBI) द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती वाले मामले को जस्टिस मनोज जैन की बेंच के सामने लिस्ट किया गया, तो कोर्ट रूम में एक नई प्रगति देखने को मिली।

    अदालत का रिकॉर्ड
    सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज जैन ने आधिकारिक तौर पर नोट किया कि अदालत को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से तीन नए 'वकालतनामा' (सुनवाई में शामिल होने का कानूनी पत्र) प्राप्त हो चुके हैं। यह इस बात का सीधा संकेत है कि आरोपी पक्ष अब इस बेंच के सामने जिरह के लिए पूरी तरह तैयार है।

    CBI की चुनौती पर अब 16 जुलाई को होगी अगली जंग
    गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत (Trial Court) के एक फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है। इस मामले की गंभीरता और आरोपियों की ओर से वकालतनामा मिलने के बाद जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें तैयार करने का समय दिया है।

  • केजरीवाल ने किया ‘सत्याग्रह’ का ऐलान, जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में ना होंगे खुद और ना वकील

    केजरीवाल ने किया ‘सत्याग्रह’ का ऐलान, जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में ना होंगे खुद और ना वकील

     नई दिल्ली
    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. अब अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे। 

    उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है। 

    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से यह केस सुनना बंद करने की अपील करते हुए दलील दी थी कि उनके मन में पहले से ही अरविंद केजरीवाल के मन में राय बन चुकी है। 

    अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का हवाला देते हुए कहा था कि जज अगर उस विचारधारा की समर्थक है और मैं विरोधी, तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?

     जस्टिस शर्मा के बहिष्कार को बताया सत्याग्रह

    आखिरकार सत्य की जीत हुई। अदालत ने मुझे निर्दोष बता दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल निर्दोष है, केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार किया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर दिया। जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी के सामने लगा। तब मेरे मन में बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या मुझे इनके सामने न्याय मिलेगा। इसके कई कारण हैं, लेकिन दो कारण मुख्य हैं, पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाला, जज साहिबा ने माना कि उससे जुड़े संगठन के मंचों पर वह जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं,ऐसे में क्या मुझे अन्या मिल सकता है।

    दूसरा कारण हैं हितों का टकराव। कोर्ट में मेरे खिलाफ सीबीआई है, और जस्टिस के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने दूसरी तरफ से वकील हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वह उनके दोनों बच्चों को केस देते हैं। कितने और कौन से केस मिलेंगे यह तय करते हैं। पैनल में 700 वकील हैं लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस हासिल करने वाले वकीलों में हैं। उनको करोड़ों रुपये फीस में मिले। उनके बच्चों का भविष्य और कमाई तुषार मेहता पर निर्भर है। किसी के मन में स्वभाविक है कि यदि जज साहब के बच्चों का भविष्य वकील तय कर रहा है तो क्या वह उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी।

    मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो न्यायपालिका ने ही न्याय दिया। इसी ने बेल दी। दोषमुक्त करार किया। जब जब देश पर आंच आई न्यायापालिका ने ही बचाया। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है कि ना सिर्फ न्याय हो बल्कि न्याय होता दिखे। इसलिए मैंने उनसे अपील की थी कि वबह खुद को इस केस से अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और कहा कि वह खुद सुनेंगी।

    मेरे सामने आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके अपना केस लड़ूं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ मेरे केस का नहीं आम लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे का है। दिविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिया था। अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं बातचीत हो। पूरी विनम्रता से बात रखनी चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की बात सूनो। शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए, फिर उसके जो भी परिणाम हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले के प्रति गुस्सा, नफरत नहीं होना चाहिए। मैंने भी अपनी बात जस्टिस के सामने रखी, उनसे आग्रह किया कि किसी और जज के द्वारा सुन लिया जाए। उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दीं। उन्होंने कहा कि वह खुद को अलग नहीं करेंगी। उनके इस फैसले से मैं असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या मुझे न्याय मिलेगा। बापू के रास्ते पर चलते हुए मैंने फैसला लिया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता जी के सामने पेश हूंगा और ना ही कोई वकील जाएगा। वह जो भी फैसला सुनाएंगी, मैं सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हूं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि उनके सामने कोई केस लगता है जिसके विरोध में बीजेपी, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं तो मैं उनके सामने पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि मैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं। मैं तैयारी कर रहा हूं। कानून और न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखकर एक एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार और विद्रोह में नहीं उठा रहा हूं। कानून को चुनौती देना नहीं है। इसी केस में मैंने हर अदालत में सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। देश के न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को बढ़ाना।

  • केजरीवाल का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से आरोप, जज ने नियम की याद दिलाई और फैसला टाल दिया

    केजरीवाल का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से आरोप, जज ने नियम की याद दिलाई और फैसला टाल दिया

    नई दिल्ली

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए, इसके लिए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को एक बार फिर हाई कोर्ट में पेश हुए और सीबीआई के लिखित जवाब को लेकर अपना रिजॉइंडर स्वीकार किए जाने की गुजारिश की। अदालत ने केजरीवाल को प्रक्रिया की याद दिलाई पर उनके जवाब को स्वीकार कर लिया है और फैसले को दो घंटे के लिए टाल दिया।

    केजरीवाल ने कहा, ‘आपने अनुमति दी थी मैम की रिजॉइंडर फाइल कर दो। रजिस्ट्री स्वीकार नहीं कर रही है। वह आदेश में नहीं आया। अगर हमारे रिजॉइंटर को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। ’मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा।' जज ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा, 'बार बार ये नहीं बोलना चाहिए कि 'मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा, क्योंकि अदालत ने प्रक्रिया से बाहर जाकर आपका हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल को नियमों की याद दिलाते हुए कहा, 'रजिस्ट्री आपकी याचिका इसलिए स्वीकार नहीं करती क्योंकि खुद आप अपनी पैरवी कर रहे हैं। इसलिए आपको ही पेश होना पड़ेगा। रिजस्ट्री का एक नियम है और आपको फॉलो करना पड़ेगा। आपको पहले यहां से मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह कोई असाधारण केस नहीं है। हमने आपको लिखित जवाब की कॉपी दी। रिजॉइंडर कभी उसका फाइल नहीं होता है। जिस दिन आप कोर्ट से गए थे अनुमति लेकर गए थे। आपने कहा कि आप मेरा सम्मान करते हैं। मैं हर वादी का सम्मान करती हूं। मैं इसे लिखित जवाब के रूप में रिकॉर्ड पर लूंगी। चूंकि फैसला 2:30 तक सुरक्षित है, मैं उसमें विचार करूंगी।'

    दो घंटे के लिए टला फैसला
    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, 'मैं इसे लिखित दलीलों के रूप में रिकॉर्ड पर ले रही हूं। केजरीवाल द्वारा पक्षपात का आरोप लगाने के कारण उन्हें यह छूट दी जा रही है। चूंकि फैसला 2:30 बजे सुनाया जाना है, और उनके द्वारा हलफनामा दिए जाने के मद्देनजर, फैसला अब 4:30 बजे सुनाया जाएगा।'

    केजरीवाल ने रिजॉइंडर में क्या कहा है?
    अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब के प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) में कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अटकलों, डर फैलने वाले बयानों और अपमानजनक आरोपों का सहारा लिया लेकिन जस्टिस शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में होने को लेकर पक्षपात के आरोपों पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई इस मामले की सुनवाई केवल एक माननीय जज से करवाकर पूरी न्यायपालिका को बदनाम करना चाहती है।'

    केजरीवाल ने सीबीआई के उन आरोपों का विरोध किया कि वह 'दबाव बनाना चाहते हैं' और 'मामलों को लंबित रखना चाहते हैं' और 'बदनाम करने के लिए कैंपेन चला रहे हैं।'उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है। केजरीवाल ने अपने रिजॉइंडर में कहा है कि सीबीआई ने खुद स्वीकार किया है कि केंद्र सरकार की कानूनी व्यवस्था और जस्टिस शर्मा के परिवार के बीच सक्रिय व्यावसायिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि खुद सीबीआई के मुताबिक, जस्टिस शर्मा के बच्चे पैनल में निष्क्रिय नाम नहीं है बल्कि सरकार से कानूनी काम हासिल कर रहे हैं।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने सीबीआई की उन दलीलों का भी विरोध किया कि जिसमें एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल की दलीलों के आधार पर तो 'सभी जज अयोग्य हो जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'तथ्यों पर जवाब देने के बजाय सीबीआई ने कहा कि 'देश के सभी जज अयोग्य हो जाएंगे' यह विवाद को बढ़ाने और पूरी न्यायपालिका को घसीटने की कोशिश है।'

  • केजरीवाल का आज दिल्ली HC में पेशी, जज को हटाने की अपील पहले ही की जा चुकी है

    केजरीवाल का आज दिल्ली HC में पेशी, जज को हटाने की अपील पहले ही की जा चुकी है

      नई दिल्ली
    आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक बार फिर वर्चुअल रूप से पेश होंगे. केजरीवाल दिल्ली आबकारी नीति मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के दौरान हितों के टकराव (conflict of interest) का मुद्दा एक बार फिर उठाएंगे। 

    केजरीवाल ने सीबीआई के हलफनामे पर अपना जवाबी हलफनामा पहले ही दाखिल कर दिया है. इसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के साथ हितों के टकराव के मुद्दा फिर से उठाया है। 

    केजरीवाल का तर्क है कि इस मामले की सुनवाई कर रहीं जज के बच्चे (बेटा ईशान शर्मा और बेटी शंभवी शर्मा) केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं और उन्हें सरकारी काम मिलता है. उन्होंने इसे हितों का टकराव बताया है। 

    'जजों को बदनाम करने की कोशिश'
    वहीं, सीबीआई ने केजरीवाल के इस अतिरिक्त हलफनामे का तीखा विरोध किया है. CBI ने इसे अनावश्यक, जजों को बदनाम करने का प्रयास और न्यायिक इतिहास तथा भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल (Dangerous Precedent) करार दिया है। 

    सीबीआई का कहना है कि अगर केजरीवाल की इस दलील को स्वीकार कर लिया गया तो केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी मामले में लगभग कोई भी जज सुनवाई नहीं कर पाएगा, क्योंकि जजों के रिश्तेदार अक्सर सरकारी पैनल में वकील होते हैं. CBI ने इसे न्यायपालिका पर अनुचित हमला बताया है। 

    हालांकि, कोर्ट ने पिछला जवाब रिकॉर्ड लेने से इनकार किया था. अब केजरीवाल सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के इजलास में पेश होकर अपना जवाब रिकॉर्ड पर लेने के लिए अपील करेंगे। 

    दरअसल, केजरीवाल ने 14 अप्रैल के अपने अतिरिक्त हलफनामे में दावा किया है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं. आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जज के बेटे को साल 2023 में 2487, साल 2024 में 1784 और साल 2025 में 1633 केस आवंटित किए गए. केजरीवाल का तर्क है कि ये सीधा हितों का टकराव है, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल इस मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं। 

    AAP ने किया विरोध
    वहीं, अदालत के बाहर आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी. पार्टी ने सवाल उठाया है कि आखिर उनके नेता का जवाब बार-बार रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया जा रहा है. केजरीवाल ने 13 अप्रैल को भी जज के सुनवाई करने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि जस्टिस शर्मा ने पहले उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका और मनीष सिसोदिया व के कविता की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं। 

    क्या है मामला
    आपको बता दें कि ये पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को डिस्चार्ज कर दिया था. निचली अदालत ने कहा था कि सीबीआई का मामला न्यायिक जांच में टिकने के लायक नहीं है और पूरी तरह से बदनाम हो चुका है. इसी आदेश के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर आज सुनवाई होनी है। 

  • सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल की दलीलों पर उठाए सवाल, अदालत में वकील को हटाने की अपील

    सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल की दलीलों पर उठाए सवाल, अदालत में वकील को हटाने की अपील

    नई दिल्ली

    अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में हाजिर हुए और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ CBI की याचिका पर होने वाली सुनवाई से वह खुद को अलग कर लें। दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति शर्मा ने सुनवाई से खुद को अलग करने के अनुरोध वाली केजरीवाल की याचिका को रिकॉर्ड में लिया। अदालत ने इस मामले में सीबीआई से जवाब भी मांगा और सुनवाई 13 अप्रैल को सूचीबद्ध की।

    केजरीवाल की याचिका पर सोमवार को सुनवाई में जोरदार दलीलें रखी गईं। मामले में अरविंद केजरीवाल ने खुद दलीलें रखनी शुरू की। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने रिक्यूजल याचिका दाखिल की है। इसे रिकॉर्ड में लिया जाए। याचिका में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया गया है कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लें।

    अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं- एसजी
    इस पर सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और कोर्ट की अवमानना ​​करने वाले हैं। अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं है। यदि अरविंद केजरीवाल खुद पेश होकर बहस करना चाहते हैं तो उनको अपने वकील को हटा देना चाहिए।

    7 अन्य आरोपियों ने भी जज को हटाने की लगाई गुहार
    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि बरी किए गए 7 अन्य आरोपियों ने भी जज को सुनवाई से हटाने की याचिका दी है। वहीं जस्टिस शर्मा ने कहा कि यदि कोई और भी ऐसी अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है ताकि मैं सभी अर्जियों पर एक ही बार में कोई फैसला ले सकूं।

    क्या है पूरा मामला?
    बता दें कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया था। अदालत ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसका केस न्यायिक जांच में बिल्कुल भी टिकने लायक नहीं है। केस पूरी तरह से खारिज हो चुका है। फैसले के खिलाफ मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने CBI की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया। सीबीआई ने आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने भेजा था नोटिस
    न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने नोटिस जारी करने के साथ ही कहा था कि आरोप तय करने के चरण में ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष पहली नजर में गलत मालूम पड़ रहे हैं। इसके साथ ही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले में CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की ट्रायल कोर्ट की सिफारिश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद केजरीवाल की ओर से एक याचिका में मामला किसी दूसरे जज के हवाले करने की मांग की गई।

    मुख्य न्यायाधीश भी ठुकरा चुके हैं गुजारिश
    बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने जस्टिस शर्मा से किसी दूसरे जज को सौंपने की केजरीवाल की गुजारिश को ठुकरा दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि खुद को सुनवाई से हटाने का फैसला संबंधित जज को ही लेना होता है। फिर अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को खुद को अलग करने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया। मामले में केजरीवाल ने खुद पेश होकर अपनी ओर से दलीलें रखीं।

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    नई दिल्ली
    दिल्ली कोर्ट की तरफ से कथित शराब घोटाला मामले में आरोपमुक्त किए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने खुद को कट्टर ईमानदार बताते हुए चैलेंज दे दिया कि अगर कोई ये साबित कर दे कि उन्होंने रिश्वत ली है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी उनसे नफरत करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं 10 साल दिल्ली का सीएम रहा और इस दौरान पीएम मोदी ने मेरे खिलाफ जांच बैठा दी। उन्होंने कहा, दिल्ली सरकार का एक भी ठेकेदार अगर ये कह दे कि मैंने पैसे मांगे और फाइलों पर साइन किए, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।

    अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि बीजेपी की सरकार ने 12 साल में देश को बर्बाद कर दिया। उन्होंने पीएम मोदी को को नौटंकीबाज कहते हुए कहा कि पूरे देश में पेपर लीक हो रहे हैं, और ये परीक्षा पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मोदीजी कहते हैं केजरीवाल भ्रष्ट है। कोर्ट ने कह दिया, केजरीवाल कट्टर ईमानदार है। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी सोनम वांगचुक से डरते हैं। सोनम वांगचुक को जेल में डाल दिया। उन्हें तो पद्म भूषण और विभूषण मिलना चाहिए।

    अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, बस मार्शलों, महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर करने को लेकर कई वादे किए गए लेकिन कोई भी भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने बीजेपी की सरकार को धोखेबाज बताते हुए कहा कि आज लोग केजरीवाल की सरकार को याद करते हैं कि इससे तो अच्छा अरविंद केजरीवाल था।