Tag: Jharkhand High Court

  • रांची के 32 पुलिस थानों में CCTV नहीं, हाईकोर्ट ने गृह सचिव और DGP से मांगी समय-सीमा

    रांची के 32 पुलिस थानों में CCTV नहीं, हाईकोर्ट ने गृह सचिव और DGP से मांगी समय-सीमा

    रांची
    झारखंड हाई कोर्ट जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की अदालत में रांची जिले के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से संबंधित मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि सीसीटीवी कैमरे नहीं होने के कारण रांची में चेन छिनतई जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

    सड़क दुर्घटनाओं के बाद भी वाहन चालक मौके से बचकर निकल जाते हैं। ऐसे में अपराध पर नियंत्रण और दुर्घटनाओं में शामिल वाहनों की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरों का चालू रहना जरूरी है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि रांची के जिन 32 पुलिस थानों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं, वहां कब तक कैमरे लगा दिए जाएंगे।

    अदालत ने गृह सचिव, रांची के एसएसपी और डीजीपी को इस संबंध में समय-सीमा के साथ जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। अदालत ने रांची के सभी थानों और शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे कैमरों को चालू रखने का निर्देश दिया है।

    सरकार ने दाखिल किया शपथ पत्र
    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि रांची शहर के आठ पुलिस थानों और ग्रामीण क्षेत्रों के 24 पुलिस थानों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। अदालत ने इन सभी थानों में कैमरे लगाने की समय-सीमा स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

    सरकार के शपथ पत्र के अनुसार, रांची शहर के 17 पुलिस थानों और ओपी में फिलहाल 123 सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं। शहर के जिन आठ थानों और इकाइयों में कैमरे नहीं लगे हैं, उनमें हिंदपीढ़ी, पंडरा ओपी, बरियातू, धुर्वा, एयरपोर्ट, विधानसभा, एएचटीयू और साइबर पुलिस स्टेशन शामिल हैं।

    सीसीटीवी लगाने के टेंडर पर भी मांगा जवाब
    हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि पूरे राज्य में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जारी टेंडर की वर्तमान स्थिति क्या है। इसके अलावा अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) से भी राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में जानकारी मांगी है।

     

  • झारखंड में 104 किसानों की रुकी रकम होगी वापस, हाई कोर्ट ने सरकार को दो महीने की दी मोहलत

    झारखंड में 104 किसानों की रुकी रकम होगी वापस, हाई कोर्ट ने सरकार को दो महीने की दी मोहलत

    रांची
     झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत ने पलामू जिला के पंडवा प्रखंड में धान खरीद के बकाए भुगतान मामले में 104 किसानों को बड़ी राहत दी है।

    अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जिन 104 किसानों पर धान खरीद में अनियमितता का कोई आरोप नहीं है, उन्हें बकाया राशि का भुगतान करने के लिए दो महीने के भीतर हाई कोर्ट में राशि जमा कराई जाए।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि इन किसानों को धान की आपूर्ति के बदले पहले ही 50 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है और उनके पास आपूर्ति की रसीद भी है। ऐसे में बिना किसी ठोस आधार के उनका शेष भुगतान रोका नहीं जा सकता। अदालत ने शेष 24 किसानों के मामले में राज्य सरकार को जांच करने की छूट दी है।

    सरकार को एक महीने के भीतर जांच की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। यदि इन किसानों के खिलाफ निर्धारित समय में कार्रवाई शुरू नहीं होती या जांच पूरी नहीं की जाती है, तो उन्हें भी बकाया राशि का भुगतान करना होगा। इसको लेकर आशा प्रसाद की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है।

    128 किसानों का लगभग 1.71 करोड़ रुपये था बकाया
    याचिका में कहा गया था कि पंडवा प्रखंड के पात्रा पैक्स के माध्यम से किसानों ने सरकार को धान की आपूर्ति की थी। किसानों को 50 प्रतिशत राशि का भुगतान किया गया, लेकिन शेष 50 प्रतिशत यानी लगभग 1.71 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित था। किसानों को भुगतान नहीं होने के मामले में हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2024 को राज्य सरकार के आश्वासन के बाद बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

    सरकार की ओर से बताया गया कि उपायुक्त, पलामू की जांच रिपोर्ट में पात्रा पैक्स के माध्यम से धान खरीद में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि 104 किसानों के बकाए की राशि दो महीने के भीतर अदालत में जमा कराई जाए. इसके बाद हाई कोर्ट की रजिस्ट्री सीधे किसानों के बैंक खातों में राशि हस्तांतरित करेगी। इसके लिए याचिकाकर्ता को किसानों की पहचान और बैंक खाते से संबंधित विवरण रजिस्ट्री को उपलब्ध कराना होगा।

  • झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC परीक्षाओं की खामियों पर जताई चिंता, भर्ती रद्द करने के फैसले पर अगली सुनवाई सोमवार को

    झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC परीक्षाओं की खामियों पर जताई चिंता, भर्ती रद्द करने के फैसले पर अगली सुनवाई सोमवार को

    रांची
    झारखंड सरकार द्वारा जेपीएससी की परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और राज्य सरकार की ओर से वकील अच्युत केशव ने पक्ष रखा. सबसे पहले प्रार्थियों के वकील इंद्रजीत ने अदालत में अपनी बात रखते हुए परीक्षा संचालक एजेंसी TDPL की भूमिका, परीक्षा की पारदर्शिता और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने अदालत को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए सरकार के रद्द करने वाले आदेश को नेचुरल जस्टिस के खिलाफ बताया. वहीं, राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि व्यापक तौर पर गड़बड़ी हुई है इसलिए सेग्रिगेशन संभव नहीं है.

    राज्य सरकार ने कहा सेग्रिगेशन संभव नहीं
    राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अच्युत केशव ने आगे सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि किन परिस्थितियों में नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने कदम उठाना पड़ा. सरकार की ओर से दलील देते हुए अधिवक्ता ने कहा कि "एक मछली पूरे तालाब को दूषित कर देती है." उनका तर्क था कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और गोपनीयता भंग हुई है. इस कारण से निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं रह गया था, इसलिए पूरी प्रक्रिया रद्द करना न्यायसंगत था.

    हाईकोर्ट ने परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ी पर जताई चिंता
    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेपीएससी में अब तक जितनी भी बहाली प्रक्रियाएं हुई हैं, उनमें किसी न किसी चरण में खामियां देखने को मिली हैं. कभी पीटी (PT) परीक्षा में तो कभी मेन्स (Mains) एग्जाम में कमियां देखने को मिली हैं. अदालत ने परीक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों पर चिंता भी जताई है. इससे एक दिन पहले यानी कि गुरुवार को हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा रद्द मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब जेपीएससी रद्द मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर दिन सोमवार को दोपहर 2:15 बजे से होगी. तब तक मामले में पूर्व से मिली अंतरिम राहत बरकरार रहेगी.

  • पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को राहत, अप्रैल 2025 से मिलेगा बकाया मानदेय

    पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को राहत, अप्रैल 2025 से मिलेगा बकाया मानदेय

    रांची
     हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत से पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं होने का हवाला देकर पारा शिक्षकों को सेवा से हटाने और मानदेय रोकने के जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने प्रार्थियों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। इ

    स संबंध में मेरी मुर्मू एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। मामला पारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा है।

    दरअसल, इलाहाबाद और देवघर के कुछ गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट का प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले पारा शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इनमें इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद और हिंदी विद्यापीठ, देवघर आदि संस्थानों के प्रमाण पत्र शामिल थे।

    इन प्रमाण पत्रों के आधार पर कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ तक पढ़ाने वाले पारा शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सात नवंबर 2025 को पत्र जारी किया था। इसके बाद राज्य के विभिन्न जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों ने संबंधित ब्लाक एक्सटेंशन आफिसर, टाउन रिसोर्स सेंटर और स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को कार्रवाई का निर्देश दिया था।

    इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक ने संबंधित पारा शिक्षकों को काम से हटाने और उनका मानदेय रोकने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को पारा शिक्षकों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को रद करने और बकाया मानदेय का भुगतान करने का आग्रह किया गया था।

  • JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के बीच CID जांच तेज, रद्द नियुक्तियों पर 14 अक्टूबर को अगली सुनवाई

    JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के बीच CID जांच तेज, रद्द नियुक्तियों पर 14 अक्टूबर को अगली सुनवाई

    रांची
     हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में राज्य सरकार की ओर से रद की गई झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय देने का आग्रह किया। अदालत ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर निर्धारित की। यह मामला एपीपी नियुक्ति, फाॅरेस्ट आफिसर सहित अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद किए जाने से संबंधित है।

    सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिकाओं में संबंधित परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद करने के सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने 18 अगस्त को नियुक्ति का विज्ञापन रद किया था।

    JSSc-CGL केस के दो आरोपित कुंदन व समीर दो दिनों की रिमांड पर
    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में कथित लेन-देन, पेपर लीक व अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के क्रम में पूर्व में गिरफ्तार दो आरोपित कुंदन कुमार व समीर कुमार को सीआइडी ने गुरुवार को दो दिनों की रिमांड पर लिया है।

    जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह खंगालने में जुटी है कि अभ्यर्थियों की सेटिंग किस स्तर तक और किन-किन माध्यमों से की गई थी तथा इस पूरे खेल में परीक्षा संचालन व दलालों के तंत्र से कौन-कौन लोग शामिल थे। सीआइडी जांच में मिले तथ्यों का सत्यापन भी कर रही है।

    कुंदन कुमार ने न केवल खुद मोटी रकम देकर परीक्षा पास की थी, बल्कि उसने गिरोह के साथ मिलकर अन्य अभ्यर्थियों की भी सेटिंग कराई और बिचौलिए की भूमिका निभाई। वहीं, समीर कुमार का नाम भी पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिले सुराग के बाद इस पूरे प्रकरण में सामने आया था।

  • चार बार टेंडर फिर भी नहीं लगे CCTV, झारखंड HC ने अधिकारियों को दी अवमानना की चेतावनी

    चार बार टेंडर फिर भी नहीं लगे CCTV, झारखंड HC ने अधिकारियों को दी अवमानना की चेतावनी

    रांची
    झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सभी पुलिस थानों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को शो कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अदालत के आदेशों का पालन करने के बजाय वास्तविक स्थिति छुपाकर टालमटोल का रवैया अपना रही है. मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.

    स्वत: संज्ञान से दर्ज हुई थी जनहित याचिका
    यह मामला ईचागढ़ पुलिस हिरासत में गिरफ्तार व्यक्ति को प्रताड़ित किए जाने की घटना से जुड़ा है, जिसे झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका में तब्दील किया था. इसके बाद अदालत राज्यभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देशों के अनुपालन की लगातार निगरानी कर रही है.

    कोर्ट ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल
    सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार अपेक्षित कदम नहीं उठा सकी है. अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार सीसीटीवी लगाने के मामले में आदेशों का पालन नहीं करना चाहती और अपने शपथ पत्रों में वास्तविक स्थिति छुपाकर मामले को टालने की कोशिश कर रही है.

    450 से अधिक हिरासत मौतों का किया जिक्र
    खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2018 के बाद से अब तक पुलिस हिरासत में मौत के 450 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं. इसके बावजूद पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी व्यवस्था बेहद जरूरी है.

    चार बार टेंडर, फिर भी नहीं निकला समाधान
    अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए चार बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. खंडपीठ ने डीजीपी द्वारा इस मामले की जिम्मेदारी गृह विभाग पर डालने को भी गैर-जिम्मेदाराना करार दिया.

    अवमानना की कार्रवाई का संकेत
    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करना ही एक विकल्प नजर आता है. हालांकि, अदालत ने पहले तीनों वरिष्ठ अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है.

    पिछली सुनवाई में भी मिली थी चेतावनी
    इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने डीजीपी को नोटिस जारी कर पूछा था कि अदालत के आदेशों का पालन नहीं होने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए. मौजूदा सुनवाई में डीजीपी स्वयं अदालत में उपस्थित रहीं. अब 15 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में हाईकोर्ट अधिकारियों के जवाब और सीसीटीवी स्थापना की वास्तविक प्रगति की समीक्षा करेगा

  • JPSC परीक्षा घोटाले में 28 गिरफ्तार, 265 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ; सरकार ने दिया हलफनामा

    JPSC परीक्षा घोटाले में 28 गिरफ्तार, 265 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ; सरकार ने दिया हलफनामा

    रांची
    11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त प्रशासनिक सेवा परीक्षा (JPSC) में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. इस मामले में सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. सरकार ने कहा है कि जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जिनसे परीक्षा प्रणाली के दूषित होने की बात सामने आती है. सरकार का कहना है कि पैसे लेकर बेची गई परीक्षा के आधार पर नियुक्त लोगों को पद पर नहीं रखा जा सकता.

    धोखाधड़ी से संबंधित कानूनी सिद्धांत
    सरकार ने कहा है कि सफल अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र मिल जाने के बाद भी पद पर बने रहने का पक्का अधिकार नहीं मिल जाता. परीक्षा के विज्ञापन के नियम 16(6) के अनुसार परीक्षा में सफल होना या नियुक्ति पत्र प्राप्त करना किसी अभ्यर्थी को पद पर बने रहने का पूरा अधिकार नहीं देता. हलफनामे में सरकार ने धोखाधड़ी से संबंधित कानूनी सिद्धांत का भी उल्लेख किया है. सरकार ने कहा कि अगर धोखाधड़ी साबित होती है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है, जिसका मतलब है कि गंभीर गड़बड़ी या धोखाधड़ी पाए जाने पर नियुक्तियों को रद्द किया जा सकता है. सरकार ने कहा कि प्रशासनिक सेवा राज्य की रीढ़ है. 79 याचिकाकर्ताओं के निजी हितों की तुलना में राज्य की प्रशासनिक सेवाओं की पवित्रता/ईमानदारी और लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों के अधिकार ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

    जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर नियुक्ति रद्द
    इसी कानूनी आधार पर, सरकार ने उन नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला किया है जिनके खिलाफ याचिका दायर की गई है. यह हलफनामा 11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त प्रशासनिक सेवा परीक्षा की नियुक्तियों को रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका के जवाब में दिया गया है. सरकार ने याचिकाकर्ताओं के दावों को खारिज करते हुए जांच में सामने आए तथ्यों को आधार बनाया है.

    28 गिरफ्तार, 265 सफल अभ्यर्थियों को नोटिस
    जेएसएससी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी की सीआईडी जांच जारी है. सीआईडी ने अब तक 28 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है. वहीं परीक्षा में सफल 265 अभ्यर्थियों से पूछताछ की जा रही है. यह गिरफ्तारियां और नोटिस दिखाते हैं कि परीक्षा में कितनी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी, और यह भी बताते हैं कि जांच कितनी गहराई से चल रही है. जांच में परीक्षा संचालन करने वाली कंपनी आईसीएन के संचालक से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं. सीआईडी के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को कोलकाता, बिहार और नेपाल ले जाकर उत्तर रटवाये गए थे. ऐसे 28 अभ्यर्थियों में से 10 का चयन हुआ है. अब चयनित अभ्यर्थियों की भूमिका और परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी की जांच की जा रही है.

    सरकार का तर्क
    सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि परीक्षा में सफल होना या नियुक्ति पत्र मिलना अपने आप में पद पर बने रहने का पक्का अधिकार नहीं देता. यदि पूरी परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी या धोखाधड़ी साबित होती है, तो ऐसी प्रक्रिया के आधार पर हुई नियुक्तियों को बनाए रखना संभव नहीं है.

  • 1995 के रिश्वत केस में 75 साल के पूर्व रेलवे क्लर्क को राहत, हाईकोर्ट ने सजा घटाकर की 1 साल

    1995 के रिश्वत केस में 75 साल के पूर्व रेलवे क्लर्क को राहत, हाईकोर्ट ने सजा घटाकर की 1 साल

     रांची
    झारखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 1995 के एक पुराने रिश्वतखोरी मामले में बड़ा निर्णय सुनाते हुए हटिया रेलवे स्टेशन के पूर्व पार्सल क्लर्क काली शंकर धोबी की दोषसिद्धि को सही ठहराया है।

    अदालत ने आरोपी की 75 वर्ष की अवस्था, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और 31 वर्षों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया का संज्ञान लेते हुए उनकी कारावास की अवधि को घटा दिया है। अब आरोपी को एक वर्ष की जेल की सजा भुगतनी होगी।

    क्या था पूरा मामला?
    घटना 27 अप्रैल 1995 की है, जब आरोपी काली शंकर धोबी हटिया रेलवे स्टेशन पर बतौर पार्सल क्लर्क कार्यरत थे। शिकायतकर्ता निर्मल कुमार बेगानी को अपनी मोटरसाइकिल बिहार के समस्तीपुर भेजनी थी, जिसके एवज में आरोपी ने उनसे ₹100 की रिश्वत मांगी थी।

    पीड़ित ने इसकी शिकायत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से की। जांच के बाद CBI ने जाल बिछाकर आरोपी क्लर्क को ₹100 की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था।

    निचली अदालत से हाई कोर्ट तक का सफर

    • CBI कोर्ट का फैसला (2004): भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चले इस मुकदमे में वर्ष 2004 में निचली अदालत ने आरोपी को दोषी माना था। तब उन्हें धारा 7 के तहत 1 वर्ष और धारा 13(2) के तहत 1.5 वर्ष की सजा तथा कुल ₹10,000 जुर्माने का आदेश सुनाया गया था।
    • 22 साल हाई कोर्ट में सुनवाई: ट्रायल कोर्ट के फैसले को आरोपी ने झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ के समक्ष दो दशकों से अधिक समय तक इस अपील पर सुनवाई चली।

    सजा में राहत
    अदालत ने अपराध में दोषसिद्धि को कायम रखा, लेकिन आरोपी की ढलती उम्र और बीमारियों को देखते हुए धारा 7 के तहत सजा 6 महीने और धारा 13(2) के तहत सजा 1 वर्ष कर दी। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे उन्हें कुल 1 साल जेल में व्यतीत करने होंगे।

    सरेंडर का आदेश
    कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका रद करते हुए उन्हें अगले 2 महीनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

  • माध्यमिक आचार्य परीक्षा की Response Sheet नहीं खुली, हाईकोर्ट ने JSSC से मांगी तकनीकी जांच

    माध्यमिक आचार्य परीक्षा की Response Sheet नहीं खुली, हाईकोर्ट ने JSSC से मांगी तकनीकी जांच

    रांची
    माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से JSSC पोर्टल पर "User Does Not Exist" संदेश आने और Response Sheet डाउनलोड नहीं होने की शिकायत पर अदालत ने आयोग के IT और कंप्यूटर विशेषज्ञों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि तकनीकी स्थिति की मौके पर ही जांच कर वास्तविक कारण स्पष्ट किया जा सके.

    याचिकाकर्ताओं ने उठाई तकनीकी समस्या
    यह मामला विकास पांडेय एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत में पक्ष रखा. याचिका में कहा गया कि माध्यमिक आचार्य परीक्षा देने के बाद जब अभ्यर्थियों ने JSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के जरिए लॉग-इन कर Response Sheet और Answer Key डाउनलोड करने की कोशिश की, तब पोर्टल पर "User Does Not Exist" का संदेश दिखाई दिया. इसके कारण वे अपनी Response Sheet प्राप्त नहीं कर सके.

    JSSC ने शपथ पत्र में क्या कहा
    मामले में JSSC ने अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर अपना पक्ष रखा है. आयोग ने अपने जवाब में संभावना जताई कि यह समस्या अभ्यर्थियों द्वारा ई-मेल आईडी या पासवर्ड सही तरीके से दर्ज नहीं करने के कारण सामने आई होगी. हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने सही विवरण दर्ज किया था, इसके बावजूद पोर्टल पर यही संदेश आता रहा और Response Sheet डाउनलोड नहीं हो सकी.

    कोर्ट ने तकनीकी जांच का दिया आदेश
    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केवल दस्तावेजों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तकनीकी स्तर पर जांच कराने का फैसला किया. अदालत ने निर्देश दिया कि JSSC के कंप्यूटर और IT विशेषज्ञ अगली सुनवाई में अदालत में मौजूद रहें. साथ ही याचिकाकर्ताओं को भी अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है.

    कोर्ट के सामने होगा लाइव लॉग-इन
    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई के दौरान JSSC के तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में संबंधित अभ्यर्थियों के अकाउंट में लॉग-इन कर यह देखा जाएगा कि उनकी Response Sheet और Answer Key वास्तव में उपलब्ध है या नहीं. यदि उपलब्ध है तो उसे डाउनलोड किया जा सकता है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी. इससे यह साफ हो सकेगा कि समस्या अभ्यर्थियों द्वारा गलत विवरण दर्ज करने की थी या फिर JSSC पोर्टल में कोई तकनीकी खामी थी.

    13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:15 बजे निर्धारित की है. अधिवक्ता चंचल जैन ने बताया कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यही है कि Response Sheet और Answer Key से जुड़ी तकनीकी समस्या की निष्पक्ष जांच विशेषज्ञों की मौजूदगी में कराई जाए. हाईकोर्ट के इस निर्देश को उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने परीक्षा के बाद अपनी Response Sheet डाउनलोड नहीं कर पाने की शिकायत उठाई है.

  • झारखंड हाईकोर्ट में जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल भर्ती मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी

    झारखंड हाईकोर्ट में जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल भर्ती मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी

     रांची
    झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने से जुड़े मामले में राज्य सरकार को दो दिन का समय दिया है. अदालत ने फिलहाल अपने अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है. अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर (शुक्रवार) सुबह 10:30 बजे होगी.
    क्या हुआ कोर्ट में?

    मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा. सरकार ने अदालत से चार सप्ताह का समय मांगा था ताकि वह विस्तृत जवाब दाखिल कर सके. हालांकि, हाईकोर्ट ने लंबी मोहलत देने से इनकार करते हुए केवल दो दिन का समय दिया. राज्य सरकार आज ही अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे.

    अंतरिम आदेश फिलहाल जारी
    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में पहले से पारित अंतरिम आदेश यथावत रहेगा. यानी JPSC और JSSC CGL समेत चारों भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने के फैसले पर अंतिम निर्णय अगली सुनवाई के बाद ही होगा.

    हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी
    इस मामले पर राज्यभर के हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं. JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द किए जाने के बाद उम्मीदवार लंबे समय से न्यायिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं.