Tag: JDU

  • चुनाव से पहले पंजाब में गठबंधन, JDU और अकाली दल साथ आए

    चुनाव से पहले पंजाब में गठबंधन, JDU और अकाली दल साथ आए

    चंडीगढ़.

    नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) की पंजाब इकाई ने कई राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों की घोषणा की। इनमें शिरोमणि अकाली दल श्री आनंदपुर साहिब (एसएडीएसएएस) के साथ औपचारिक गठबंधन और दिवंगत अभिनेता व राजनेता सुनील दत्त की भतीजी ममता दत्त का जेडीयू पंजाब में शामिल होना प्रमुख रहा।

    जेडीयू पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष मलविंदर सिंह बेनीपाल, शिरोमणि अकाली दल श्री आनंदपुर साहिब के अध्यक्ष दविंदर सिंह और महासचिव गुरदर्शन ने कहा कि गठबंधन का उद्देश्य समान विचारधारा वाली ताकतों को एक मंच पर लाना और पंजाब में एक साझा राजनीतिक मंच को मजबूत करना है।

    पंजाब में भाजपा शिअद के साथ गठबंधन नहीं करेगी: पुरी
    केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को कहा कि भाजपा पंजाब विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में दोनों पार्टियां साथ आती हैं, तो सीटों का बंटवारा बराबरी की शर्तों पर होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गठबंधन के बारे में आखिरी फैसला पार्टी नेतृत्व ही करता है।

    यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक सवाल पर पुरी ने कहा कि पुराने सहयोगियों का 22 सीटों वाला फॉर्मूला अब काम नहीं करेगा। भाजपा छोटे भाई की भूमिका नहीं निभाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब नशामुक्त बनाने के लिए पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी। केंद्र सरकार राज्य के बेरोजगार युवाओं को नौकरी के मौके देने के लिए तेजी से काम कर रही है। पुरी रोजगार मेले के 20वें संस्करण में शामिल होने के लिए अमृतसर आए थे। उन्होंने यहां व्यापारियों, उद्यमियों, पेशेवरों और कारोबारियों के साथ एक बैठक भी की।

  • बिहार में सत्ता संतुलन का नया फॉर्मूला! विधान परिषद सभापति पद पर JDU की दावेदारी मजबूत

    बिहार में सत्ता संतुलन का नया फॉर्मूला! विधान परिषद सभापति पद पर JDU की दावेदारी मजबूत

     पटना
     बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद अब सत्ता के गलियारों में एक और बड़े राजनीतिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।

    बिहार विधान परिषद के सभापति का पद एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जा सकता है। चर्चा है कि इसको लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहमति बन चुकी है।

    यदि यह बदलाव होता है तो इसे भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-संतुलन साधने की दिशा में अहम कदम माना जाएगा।फिलहाल विधान परिषद के सभापति की जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह के पास है।

    नई सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि सरकार में महत्वपूर्ण पदों के बंटवारे के बाद अब विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी जदयू को दी जा सकती है।

    भाजपा के पास कई अहम पद, जदयू की दावेदारी क्यों मजबूत?
    सरकार में मुख्यमंत्री पद समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भाजपा के पास हैं। विधानसभा अध्यक्ष का पद भी भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद जदयू को दिया जाना एनडीए के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाने का संदेश माना जा रहा है।

    यानी सदन के दोनों शीर्ष संवैधानिक पदों में से एक पर जदयू की मौजूदगी गठबंधन के भीतर जिम्मेदारियों के संतुलित बंटवारे का संकेत दे सकती है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधान परिषद में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन जदयू भी मजबूत स्थिति में है।

    आंकड़ों को देखें तो परिषद में भाजपा के 25 और जदयू के 20 सदस्य हैं। इसके अलावा राजद के 15, कांग्रेस के दो, निर्दलीय सात तथा सीपीआई, सीपीएम, हम, रालोमो और लोजपा (रामविलास) के एक-एक सदस्य हैं।

    विधानसभा में भी भाजपा और जदयू के बीच सीटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं है। भाजपा के 88 जबकि जदयू के 85 विधायक हैं। ऐसे में दोनों दलों की राजनीतिक ताकत को देखते हुए संवैधानिक पदों का बंटवारा एनडीए के भीतर सत्ता-संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है।

    जदयू के लिए नई नहीं है सभापति की कुर्सी
    विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की दावेदारी पहले भी रही है। भाजपा के अवधेश नारायण सिंह से पहले जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर करीब दो वर्षों तक इस पद पर रहे थे।

    वहीं, महागठबंधन सरकार के दौरान उपसभापति हारुण रशीद ने कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे साफ है कि विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी को लेकर जदयू की भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण रही है।

    किसे मिलेगी जिम्मेदारी, इस पर नजर
    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सभापति का पद जदयू के खाते में जाता है तो पार्टी किस वरिष्ठ विधान पार्षद को यह जिम्मेदारी देगी।पार्टी के भीतर अनुभवी नामों पर मंथन की चर्चा है। हालांकि, संभावित नाम को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है।

    राजनीतिक तौर पर यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नई सरकार के दौर में भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-साझेदारी का नया प्रारूप सामने आ रहा है।

    ऐसे में विधान परिषद सभापति का पद किसके पास जाता है, इसे आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर शक्ति-संतुलन के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जाएगा।

     

  • बिहार के बाद यूपी पर JDU की नजर, चुनावी तैयारियों को लेकर बैठकों का दौर तेज

    बिहार के बाद यूपी पर JDU की नजर, चुनावी तैयारियों को लेकर बैठकों का दौर तेज

    पटना
    जनता दल यूनाइटेड (JDU) अगले वर्ष उत्‍तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में फिर अपनी संभावना तलाश रहा है।

    चुनाव को लेकर यूपी और बिहार में बैठकों का सिलसिला नियमित रूप से चल रहा पर अभी यह तय नहीं हाे पाया है कि जदयू पिछले विधानसभा चुनाव की तरह अकेले वहां चुनाव लड़ेगा या फिर गठबंधन की बात बढ़ेगी।

    निराशाजनक रहा था 2022 का विधानसभा चुनाव  
    वर्ष 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में जदयू की आरंभ में यह योजना थी कि वह एनडीए गठबंधन के घटक के रूप में चुनाव लड़ेगा पर इस पर बात नहीं बनी। सीटों को लेकर सहमति नहीं बनी।

    इसके बाद जदयू ने अपने बूते चुनाव में उतरने का फैसला किया। वर्ष 2022 के उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जदयू ने 27 विधानसभा क्षेत्रों से अपने प्रत्याशी उतारे पर एक भी सीट पर उसे सफलता नहीं मिली।

    हाल यह रहा कि जदयू को एक प्रतिशत वोट भी नहीं आ सका। उपलब्ध आंकड़े के अनुसार उक्त चुनाव में जदयू को मात्र 0.11 प्रतिशत वोट ही मिले। अधिकांश सीटों पर जदयू प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गयी।

    पूर्वांचल में जदयू का रहा अधिक जोर
    वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जदयू का जोर पूर्वांचल की सीटों पर अधिक रहा। इसके तहत उसने जौनपुर के मल्हानी, मड़ियाहू, मुंगरा-बादशाहपुर, वाराणसी के रोहनिया, वाराणसी कैंट, चुनार, सोनभद्र के राबर्टसगंज, दुद्धी, कुशीनगर के तुमकुही राज, कुशीनगर, देवरिया के पथरदेवा, बलिया के फेफना, गाजीपुर के जहूराबाद, मुगलसराय के साथ-साथ लखनऊ कैंट, प्रयागराज के करछना, प्रतापपुर, रानीगंज, रायबरेली के सलोन आदि सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए थे।

    वर्ष 2017 में भी थी तैयारी पर नहीं गए चुनाव मैदान में 
    2017 में भी जदयू ने उप्र विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की तैयारी की थी। भाजपा के साथ गठबंधन का प्रयास किया गया था पर बात नहीं बनी। आखिर में यह तय हुआ कि जदयू चुनाव में नहीं लड़ेगा।

    शुरू हुआ बैठकों का दौड़ 
    अगले वर्ष उप्र में होने वाले विधानसभा चुनाव को ले जदयू की सक्रियता फिर आरंभ हुई है। यूपी के जदयू प्रभारी श्रवण कुमार लगातार यूपी का दौरा कर रहे हैं।

    यहां तक कि पश्चिमी उप्र में भी बैठक हो रही है। यूपी के पार्टी नेताओं के साथ हाल ही में राजगीर में भी बैठक हुई है। वैसे यह बात कही जा रही है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस बारे में चर्चा की जाएगी और उसके बाद यह तय होगा कि कहां-कहां से लड़ना है।