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  • कांकेर माओवादी मामले में कोर्ट का फैसला, दो दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास

    कांकेर माओवादी मामले में कोर्ट का फैसला, दो दोषियों को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास

    कांकेर 

    छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले स्थित भानुप्रतापपुर की विशेष एनआईए अदालत ने सुरक्षा बलों को विस्फोटकों से निशाना बनाने की साजिश रचने के मामले में दो लोगों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. विशेष एनआईए न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने दोनों अभियुक्तों पर 2,000-2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता त्रिभुवन शंकर यादव ने की। 

    यह मामला 28 अक्टूबर 2023 का है, जब कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के चिलपरस-नयापारा पहाड़ी के पास सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम गश्त कर रही थी. सर्चिंग के दौरान जंगल के पास कुछ संदिग्ध व्यक्ति भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया. पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान सानू कोमरा और अर्जुन साहू के रूप में हुई। 

    जांच के दौरान खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी प्रतिबंधित माओवादी संगठन की जन मिलिशिया शाखा से जुड़े थे और बारूदी सुरंग या विस्फोटक लगाकर सुरक्षा बलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने की साजिश में शामिल थे. आरोपियों के कब्जे से नौ डेटोनेटर, तार का बंडल, स्विच, प्लास्टिक रस्सी, छर्रों के दो पैकेट, लगभग एक किलोग्राम लोहे के टुकड़े, दो पाइप और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया था। 

    पुलिस ने मामला दर्ज कर साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जहां सुनवाई के बाद दोनों को दोषी करार दिया गया। 
    उल्लेखनीय है कि कांकेर जिले में माओवादी मामलों में न्यायिक कार्रवाई तेजी से चल रही है. जिले में लंबित 36 मामलों में से हाल ही में तीन में फैसले आ चुके हैं, जिससे अब लंबित मामलों की संख्या घटकर 33 रह गई है। 
    इससे पहले सितंबर 2026 में कांकेर अदालत ने स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य प्रभाकर राव और उनकी पत्नी राजे कांगे से जुड़े मामले में निर्णय सुनाया था, जबकि 16 सितंबर 2026 को भानुप्रतापपुर अदालत ने माओवादी आरोपी पोलूराम आंचला को भी 10 साल की सजा सुनाई थी.

  • डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ

    डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ

    डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की प्रथम महिला खुली जेल (वीमेन ओ.सी.आई.) का शुभारंभ

    रायपुर
     डीजी, जेल  हिमांशु गुप्ता के कर कमलों से केंद्रीय जेल, रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य की पहली महिला खुली जेल (वीमेन ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन -ओ.सी.आई.) का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर  योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक), श्रीमती खुशबू मिश्रा (महिला ओपन जेल प्रभारी) एवं जेल विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

           छत्तीसगढ़ राज्य में पहली बार इस प्रकार की महिला ओपन जेल प्रारंभ की गई है। रायपुर जेल में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए ओपन जेल खोला गया है।इस ओपन जेल में 25 महिला बंदिनियाँ रहेंगीl ये महिला बंदिनी सुबह विभिन्न कार्य करने के लिए जेल के बाहर निकलेंगी तथा शाम को कार्य पूर्ण कर लॉकअप होने के पूर्व जेल में वापस आ जाएंगी।

             महिला बंदिनियों को जेल की ऊंची दीवारों के बाहर मंदिर के पास स्थित परिसर में सिलाई सेन्टर, ब्यूटी पार्लर एवं जेल उत्पादों के बिक्री केंद्र में रोजगार दिया जाएगा। उनके लिए रोजगार के अन्य वैकल्पिक साधन भी उपलब्ध रहेंगे।

  • नई जेलों के निर्माण से बदली तस्वीर, 2017 के मुकाबले बढ़ी बंदी क्षमता

    नई जेलों के निर्माण से बदली तस्वीर, 2017 के मुकाबले बढ़ी बंदी क्षमता

    योगी सरकार ने नई जेलों के निर्माण और क्षमता विस्तार से ओवरक्राउडिंग पर लगाया ब्रेक 
     
    – 2017 के मुकाबले 2026 में बंदी क्षमता बढ़ी, ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 पर पहुंची 

    – प्रदेश को मिलेंगी छह और नई जिला जेलें, कानपुर नगर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर समेत छह जिलों में 7,732 अतिरिक्त बंदियों की क्षमता होगी विकसित
     
    – निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं को मिली रफ्तार, अमेठी और महोबा की जेलें अंतिम चरण में, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर व हापुड़ में तेजी से चल रहा निर्माण कार्य 

    – संभल, शामली और बलिया में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज, नई जेलों की स्थापना के लिए कई जिलों में भूमि क्रय और पंजीकरण की कार्रवाई प्रगति पर 

    लखनऊ, 
    योगी सरकार प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और मानवीय बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बढ़ती बंदी संख्या और जेलों में ओवरक्राउडिंग की समस्या को दूर करने के लिए योगी सरकार ने एक ओर नई जेलों के निर्माण को गति दी है, जिससे जेलों में ओवरक्राउडिंग दर में कमी दर्ज की गई। 

    पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेलों में ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 हुई
    वर्तमान में प्रदेश में कुल 77 कारागार संचालित हैं, जिनमें 7 केंद्रीय कारागार, 2 महिला केंद्रीय कारागार, 64 जिला कारागार, 1 विशेष कारागार, 2 उप कारागार तथा 1 किशोर सदन शामिल है। योगी सरकार के पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल अवसंरचना के विस्तार का ही परिणाम है कि प्रदेश की जेल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की कुल बंदी क्षमता 58,400 थी, जबकि वर्ष 2026 तक यह बढ़कर 77,673 हो गई है। इस अवधि में जेलों में ओवरक्राउडिंग दर भी काफी कम हुई है। वर्ष 2017 में जहां ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी, वह वर्ष 2026 में घटकर 1.03 रह गई है। यह कमी योगी सरकार द्वारा जेलों के विस्तार, नई जेलों के निर्माण और अतिरिक्त क्षमता सृजन के लिए किए गए प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है। योगी सरकार ने वर्ष 2017 के बाद से अब तक सात नई जेलों का संचालन शुरू किया है। इनमें चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा केंद्रीय कारागार, प्रयागराज, श्रावस्ती तथा पुरानी जिला कारागार बरेली शामिल हैं। इन नई जेलों से कुल 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है, जिससे विभिन्न जनपदों की जेलों पर दबाव कम हुआ है।

    योगी सरकार बनाने जा रही 6 और नई जेल
    योगी सरकार छह नई जिला जेलों के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इनमें कानपुर नगर (2030 क्षमता), औरैया (1056), शाहजहांपुर (1520), ज्ञानपुर-भदोही (574), मुरादाबाद (2000) तथा ललितपुर (552) शामिल हैं। इन छह नई जेलों के निर्माण से प्रदेश में 7,732 अतिरिक्त बंदियों की क्षमता उपलब्ध होगी। इन परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके अलावा प्रदेश में नई निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। अमेठी और महोबा में बन रही नई जिला जेलों का निर्माण लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अमेठी जेल का कार्य 98 प्रतिशत से अधिक तथा महोबा जेल का कार्य 93 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। इनके अतिरिक्त हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में भी नई जेलों का निर्माण तेजी से जारी है। इन छह निर्माणाधीन जेलों की कुल क्षमता 6,156 बंदियों की होगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अधिकांश परियोजनाएं वर्ष 2026 तक पूर्ण कर ली जाएं।

    संभल, बलिया और शामली में जेल के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
    जेल अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ सरकार उन जिलों में भी नई जेलों की स्थापना की तैयारी कर रही है, जहां भूमि क्रय एवं पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। संभल, शामली, बलिया, सहारनपुर, अमरोहा और चंदौली में प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि अधिग्रहण और पंजीकरण की कार्रवाई प्रगति पर है। इनमें से कई परियोजनाओं के लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। मालूम हो कि जेलों में अत्यधिक भीड़ सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पुनर्वास संबंधी गतिविधियों को प्रभावित करती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने जेलों की क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता दी है। नई जेलों के निर्माण से न केवल बंदियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि जेल प्रशासन को भी सुरक्षा व्यवस्था और सुधारात्मक कार्यक्रमों के संचालन में सुविधा होगी। योगी सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक बंदी को निर्धारित मानकों के अनुरूप रहने की सुविधा मिले तथा जेलों में भीड़भाड़ के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं को न्यूनतम किया जा सके। इसके लिए नई जेलों का निर्माण, पुराने कारागारों का उन्नयन, अतिरिक्त बैरकों का निर्माण और आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

  • रतलाम सर्किल जेल में अचानक पहुंचे प्रमुख सचिव, व्यवस्थाओं और सुरक्षा का किया निरीक्षण

    रतलाम सर्किल जेल में अचानक पहुंचे प्रमुख सचिव, व्यवस्थाओं और सुरक्षा का किया निरीक्षण

    प्रमुख सचिव जेल विभाग मुकेश चन्द गुप्ता ने किया सर्किल जेल रतलाम का आकस्मिक निरीक्षण

    सुरक्षा व्यवस्था से लेकर स्वास्थ्य, भोजन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और बंदी सुविधाओं का लिया जायजा

    रतलाम

    जेल विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश चन्द गुप्ता ने गुरुवार को सर्किल जेल रतलाम का आकस्मिक निरीक्षण कर जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने जेल प्रशासन को व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन तथा बंदियों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने जेल के मुख्य द्वार की सुरक्षा व्यवस्था एवं सीसीटीवी कंट्रोल रूम का अवलोकन किया। इसके साथ ही जेल अस्पताल एवं नशामुक्ति वार्ड का भ्रमण कर बीमार बंदियों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने जेल चिकित्सक से बंदियों को उपलब्ध कराए जा रहे उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी लेने के साथ अस्पताल में उपलब्ध औषधियों का भी निरीक्षण किया।

    गुप्ता ने जेल में निरुद्ध बंदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालयीन पेशी की व्यवस्था का अवलोकन किया। उन्होंने बंदियों के लिए संचालित इनकमिंग टेलीफोन बूथ एवं मुलाकात सुविधा के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

    प्रमुख सचिव ने जेल स्कूल एवं लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए बंदियों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक एवं पठन-पाठन संबंधी सुविधाओं का जायजा लिया। जेल लाइब्रेरी में उपलब्ध धार्मिक पुस्तकों का अवलोकन कर उन्होंने इस व्यवस्था पर प्रसन्नता व्यक्त की।

    निरीक्षण के दौरान गुप्ता ने पुरुष बंदी वार्ड एवं महिला वार्ड का भ्रमण कर बंदियों से सीधे संवाद किया तथा उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने बंदियों को उनकी समस्याओं के शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया।

    निरीक्षण के अंत में प्रमुख सचिव जेल विभाग मुकेश चन्द गुप्ता ने सर्किल जेल रतलाम में विराजित गणेश जी की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर सर्किल जेल रतलाम के अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया सहित जेल विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

     

  • बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जेल विभाग की संवेदनशील पहल

    बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जेल विभाग की संवेदनशील पहल

    बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जेल विभाग की संवेदनशील पहल

    केंद्रीय जेल भोपाल में विशेषज्ञ ने बंदियों से संवाद कर किया मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं काउंसलिंग सत्र

    भोपाल 

    महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं डॉ. वरुण कपूर के मार्गदर्शन में प्रदेश की जेलों में निरुद्ध बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जेल विभाग एवं राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर, गुजरात के मध्य हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के अंतर्गत 15 सितंबर 2026 को केंद्रीय जेल भोपाल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

    शिविर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर से आए फोरेंसिक साइकोलॉजिस्ट ओम तिवारी ने बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक तनाव तथा उससे जुड़ी विभिन्न समस्याओं के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बंदियों से संवाद कर उनकी मानसिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं को समझने का प्रयास किया तथा आवश्यकता के अनुसार काउंसलिंग भी की।

    शिविर के दौरान बंदियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं एवं समस्याएं साझा कीं। विशेषज्ञ द्वारा उनकी बातों को समझते हुए आवश्यक मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रदान किया गया।

    जेल विभाग द्वारा बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारिक सुधार एवं पुनर्वास को सुधारात्मक सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए ऐसे कार्यक्रमों को उपयोगी पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ हुए MOU के माध्यम से विशेषज्ञता एवं परामर्श सेवाओं का लाभ जेलों में निरुद्ध बंदियों तक पहुंचाने की दिशा में यह प्रयास महत्वपूर्ण है।

    इस अवसर पर केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक मानेंद्र परिहार सहित जेल विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

     

  • जेल में बंदी अब लिखेंगे अपनी कहानी, पंजाब की 27 जेलों में साहित्य उत्सव का आयोजन

    जेल में बंदी अब लिखेंगे अपनी कहानी, पंजाब की 27 जेलों में साहित्य उत्सव का आयोजन

     चंडीगढ़
     जेल की सलाखें भले ही बंदियों की बाहरी दुनिया से दूरी तय करती हों, लेकिन अब उनकी कलम को अभिव्यक्ति की आजादी देने की तैयारी है। पंजाब की 27 जेलों में बंद कैदियों और बंदियों को अपनी भावनाओं, अनुभवों और कल्पनाओं को शब्दों में ढालने का अवसर देने के लिए जेल साहित्य उत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित इस उत्सव में प्रदेश की सभी 27 जेलों के बंदी हिस्सा ले सकेंगे।

    इस पहल का उद्देश्य बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें सकारात्मक दिशा देना और पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है। बंदियों को रचनात्मक रूप से व्यस्त रखना इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

    जेल में रहने के दौरान बंदियों के पास अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के सीमित अवसर होते हैं। ऐसे में लेखन उनके लिए अपनी बात कहने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। कहानी, कविता और अन्य रचनात्मक विधाओं के माध्यम से बंदी अपने भीतर चल रहे विचारों और भावनाओं को कागज पर उतार सकेंगे।

    ‘गुलदस्ता’ परियोजना से मिलेगा साहित्यिक माहौल
    इस पहल को ‘गुलदस्ता’ परियोजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। बेल्बा फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस परियोजना के माध्यम से जेलों में साहित्यिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। बंदियों को विभिन्न प्रकार की साहित्यिक सामग्री पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें अपनी रचनाएं लिखने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। जेल प्रशासन का मानना है कि पढ़ने और लिखने की आदत बंदियों को सकारात्मक गतिविधि से जोड़ सकती है।

    जेल में खाली समय का इस्तेमाल केवल समय बिताने के बजाय रचनात्मक कार्यों में किया जा सकेगा। बंदी अपने जीवन की घटनाओं, अनुभवों, यादों, सपनों और भविष्य की उम्मीदों को कहानी या कविता का रूप दे सकेंगे। इससे उन्हें अपने जीवन और परिस्थितियों को नए नजरिये से देखने का अवसर मिल सकता है।

    पुनर्वास की दिशा में अलग तरह का प्रयोग
    जेल साहित्य उत्सव को केवल साहित्यिक आयोजन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसे बंदियों के सुधार और पुनर्वास से जोड़कर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेखन व्यक्ति को अपने विचारों और भावनाओं पर आत्ममंथन करने का अवसर देता है। बंदी अपने अतीत की घटनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हुए भविष्य को लेकर नई सोच विकसित कर सकते हैं।

    इस पहल की खास बात यह है कि इसमें बंदियों को अपनी कहानी खुद लिखने का मंच दिया जाएगा। जेल में बंद व्यक्ति के लिए यह अवसर इसलिए भी अहम है क्योंकि समाज से दूरी के बीच उसकी आवाज अक्सर सीमित हो जाती है। साहित्य उस आवाज को अभिव्यक्ति देने का माध्यम बन सकता है।

    कलम के जरिये दूसरी तरह की आजादी
    पंजाब की सभी 27 जेलों को इस साहित्यिक पहल से जोड़ना इसे व्यापक स्वरूप देता है। जेल प्रशासन के लिए यह प्रयोग बंदियों को अनुशासन और रचनात्मकता के साथ जोड़ने का अवसर भी है। वहीं बंदियों के लिए यह अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे सामने लाने का माध्यम बन सकता है।

    सलाखों के पीछे बाहरी दुनिया की आजादी भले सीमित हो, लेकिन विचारों और कल्पनाओं पर कोई पहरा नहीं होता। ऐसे में एक कलम बंदी को उसकी यादों, कल्पनाओं और आत्ममंथन की दुनिया तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है। जेल साहित्य उत्सव इसी सोच के साथ बंदियों को शब्दों की दुनिया से जोड़ने की एक नई पहल के रूप में सामने आ रहा है।

  • जेल की दीवारों के बीच मना रक्षाबंधन, भोपाल सेंट्रल जेल में बहनों ने भाइयों को बांधी राखी

    जेल की दीवारों के बीच मना रक्षाबंधन, भोपाल सेंट्रल जेल में बहनों ने भाइयों को बांधी राखी

     भोपाल
     भोपाल सेंट्रल जेल ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के लिए खास इंतजाम किए, जिसके तहत बहनें जेल परिसर के अंदर अपने भाइयों से मिल सकीं और उन्हें राखी बांध सकीं। कई महिलाओं ने लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलकर खुशी जाहिर की और उनसे यह वादा भी लिया कि वे भविष्य में अपनी गलतियों को नहीं दोहराएंगे।

    जेल सुपरिटेंडेंट मनेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि जेल आने वाली बहनों के लिए खास इंतजाम किए गए थे, जिसमें जेल कैंटीन के जरिए राखी, मिठाई और कुमकुम की उपलब्धता भी शामिल थी।

    जेल कैंटीन से मिठाई, राखी और कुमकुम का इंतजाम
    परिहार ने कहा, रक्षाबंधन के मौके पर जो बहनें जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधना चाहती थीं, उनके लिए जेल कैंटीन के जरिए मिठाई, राखी, कुमकुम और दूसरी चीजों का इंतजाम किया गया। महिला गार्ड्स द्वारा ठीक से तलाशी लेने के बाद ही उन्हें अंदर जाने की इजाजत दी गई। 20-25 मिनट की मुलाकात के बाद उनके सुरक्षित बाहर निकलने का भी इंतजाम किया गया।

    भाई को सलाखों के पीछे देख छलक पड़े आंसू
    राखी बांधते समय कई बहनों के चेहरे पर भाई से मिलने की खुशी थी, लेकिन सलाखों के पीछे भाई को देखकर दर्द भी साफ नजर आया। कुछ बहनें भाई से मिलकर रो पड़ीं तो कुछ ने खुद को संभालते हुए उन्हें हिम्मत दी। बहनों ने भाइयों से कहा कि वे परेशान न हों और जेल से बाहर आने के बाद अच्छा जीवन जीने का संकल्प लें।

    बंदी भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं ममता और सलोनी ने कहा कि रक्षाबंधन पर भाई से मिलकर बहुत खुशी हुई। भगवान से उन्होंने यही प्रार्थना की है कि उनके भाई जल्द जेल से बाहर आएं और परिवार के साथ रहें।

    3600 पुरुष और 180 महिला बंदी
    जेल अधीक्षक मानवेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि रक्षाबंधन पर खुली मिलाई कराई गई। जेल प्रशासन की ओर से मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। भोपाल सेंट्रल जेल में करीब 3600 पुरुष बंदी और 180 महिला बंदी हैं। महिला बंदियों के लिए अलग समय पर मुलाकात की व्यवस्था की गई।

    उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े कैदियों को भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिजनों से मिलने की अनुमति दी गई। जेल प्रशासन की टीम पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था संभालती रही।

    अभी जेल में लगभग 3,648 कैदी बंद हैं
    आम कैदियों के लिए कोई अलग वर्गीकरण नहीं था और उनके परिवार के सदस्यों को मिलने का एक ही समय दिया गया था। हालांकि, प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े कैदियों के लिए शाम को मिलने का अलग समय तय किया गया था। अभी जेल में लगभग 3,648 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 1,100-1,200 कैदियों की मुलाकातें हो चुकी हैं और करीब 3,500 परिवार के सदस्य उनसे मिलने आए हैं।

    जेल में लगभग 180 महिला कैदी भी बंद हैं
    जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि जेल में लगभग 180 महिला कैदी भी बंद हैं और उनके भाइयों से मिलने के लिए भी अलग इंतजाम किए गए थे। वहां लगभग 180 महिला कैदी हैं। जो पुरुष अपनी कैदी बहनों से मिलने आएंगे, उन्हें शाम 3 बजे से 4 बजे के बीच मिलने की इजाजत दी गई थी। भीड़ कम होने के बाद उन्हें अलग से मिलने दिया जाएगा।