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  • भारत की समुद्री शक्ति को मिला बड़ा बूस्ट, नया फ्लीट सपोर्ट शिप हुआ नौसेना में शामिल; Rafale डील भी जल्द

    भारत की समुद्री शक्ति को मिला बड़ा बूस्ट, नया फ्लीट सपोर्ट शिप हुआ नौसेना में शामिल; Rafale डील भी जल्द

    मुंबई 

    114 राफेल फाइटर जेट की खेप भारत आने से पहले डिफेंस सेक्‍टर से बड़ी खुशखबरी सामने आई है. इससे इंडियन नेवी की ताकत बढ़ने की संभावना है. भारतीय नौसेना के बेड़े में ‘सूर्या’ शामिल किया गया है. यह भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया फ्लीट सपोर्ट शिप-1 है.  इसका जलावतरण (यानी लॉन्‍च) किया गया. इस जहाज का नाम ‘सूर्या’ रखा गया है और इसकी मौजूदगी से नौसेना की पहुंच और क्षमता मजबूत होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सूर्या को इंडियन नेवी में शामिल किया. इसी अवसर पर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में नए एडवांस स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया गया. साथ ही एक और फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण के लिए कील (शुरुआत) भी रखी गई. भारत इंडियन आर्मी और एयरफोर्स के साथ ही इंडियन नेवी को भी अपग्रेड कर रहा है। 

    इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एक ही स्थान पर एक ही अवसर के दौरान ये तीनों उपलब्धियां भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाती हैं. उन्होंने कहा, ‘यह जलावतरण हमारी उपलब्धि का प्रतीक है, कील रखना हमारे संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती हुई क्षमता का प्रतीक है. आज हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में हम जहाज बनाने के साथ-साथ भारत की समुद्री शक्ति के भविष्य की नींव को और मजबूत कर रहे हैं। 

    गौरवशाली विरासत को मजबूत करने का प्रयास
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में बार-बार अपनी क्षमता साबित की है. मानवीय सहायता और आपदा राहत, समुद्री डकैती रोधी अभियान, निकासी अभियान या समुद्री सुरक्षा जैसी हर परिस्थिति में नौसेना ने अपनी तत्परता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है. उन्होंने कहा कि भारत को बड़ी समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ना कोई नया अध्याय शुरू करना नहीं है. बल्कि यह उस गौरवशाली विरासत को फिर से मजबूत करने का प्रयास है, जिसे भारत ने सदियों पहले स्थापित किया था. इस समुद्री यात्रा में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की महत्वपूर्ण भूमिका है। 

    राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक
    डिफेंस मिनिस्‍टर राजनाथ सिंह ने आगे बताया कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड भारत की राष्ट्रीय समुद्री क्षमता का संरक्षक है. आठ दशकों से अधिक समय से यह संस्थान देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद मंत्रालय और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के प्रयासों से इसकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है. वर्ष 2025 में इसे मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा मिलना इसके बदलाव और पिछले वर्षों में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों का प्रमाण है. राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की समुद्री ताकत का निर्माण अकेले नौसेना या अकेले जहाज निर्माण कारखाने नहीं कर सकते. इसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय समुद्री तंत्र जरूरी है। 

    समंदर में इंडियन नेवी की पहुंच होगी मजबूत
    उन्होंने विश्वास जताया कि नौसेना, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, शिक्षण संस्थान, उद्योग, एमएसएमई तथा नव उद्यम एक एकीकृत टीम के रूप में काम करें. उन्होंने कहा कि फ्लीट सपोर्ट शिप का जलावतरण भारतीय नौसेना की पहुंच, लंबे समय तक समुद्र में सक्रिय रहने की क्षमता और अभियान प्रभावशीलता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. पिछले एक दशक में भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि देश आयातित प्लेटफार्म पर निर्भरता से आगे बढ़कर स्वयं उन्नत प्रणालियों और प्लेटफार्म को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. आज भारतीय जहाज निर्माण कारखाने उन्नत युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है। 

    ‘आत्मनिर्भरता हमारी मंजिल’
    रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता हमारी मंजिल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जबकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा हमारी अगली बड़ी छलांग है. उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी स्थिति हासिल करनी होगी, जहां उसके जहाज निर्माण कारखाने भारतीय नौसेना के साथ-साथ मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी जहाज और समुद्री सेवाएं उपलब्ध करा सकें. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लक्ष्य स्पष्ट है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण किया जाए. ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध हो तथा विश्व पटल पर सम्मान के साथ खड़ा हो। 

  • समुद्र की गहराइयों का नया ‘सहारा’ बना INS निपुण, 75% स्वदेशी सामग्री से तैयार जहाज नौसेना में शामिल

    समुद्र की गहराइयों का नया ‘सहारा’ बना INS निपुण, 75% स्वदेशी सामग्री से तैयार जहाज नौसेना में शामिल

    नई दिल्ली
     इंडियन नेवी ने मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल 'INS निपुण' को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) द्वारा स्वदेशी तकनीक से तैयार INS निपुण गहरे समुद्र के अंदर किसी भी मिशन को अंजाम दे सकता है।

    नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ ही पश्चिमी नौसेना को 'INS निस्तार' के समकक्ष एक समर्पित डाइविंग सपोर्ट वेसल मिल गया है। बताते चलें कि INS निस्तार पिछले साल जुलाई में बेड़े में शामिल किए जाने के बाद से पूर्वी नौसेना कमान के तहत अपनी सेवाएं दे रहा है।

    विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड द्वारा निर्मित और 75% स्वदेशी सामग्री से बना 8,500 टन का यह पोत 300 मीटर की गहराई तक संतृप्त गोताखोरी और संकटग्रस्त पनडुब्बियों से चालकों को सुरक्षित निकालने जैसे कठिन मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है।

    अत्याधुनिक क्षमताएं और फीचर्स
    यह जहाज समुद्र में 300 मीटर तक की गहराई में सैचुरेशन डाइविंग और 75 मीटर तक साइड-स्टेज डाइविंग अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। यह समुद्र की तेज लहरों और खराब मौसम में स्थिर रह सकता है। जिसके चलते यह समुद्र के भीतर फंसी पनडुब्बी और नौसेनिकों को आसानी से बाहर निकाल सकता है।

    इसके अलावा अगर कोई शिप या मशीन समुद्र के भीतर खराब हो जाती है तो यह उसे वहीं पर रिपेयर कर सकता है। गहरे समुद्र में जटिल अभियानों के लिए इसमें 15 टन की सब-सी क्रेन, डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम और 1,000 मीटर की गहराई तक काम करने में सक्षम 'रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स' (ROV) तैनात किए गए हैं।
    खासियत

    जहाज में आठ बिस्तरों वाला अस्पताल, एक गहन चिकित्सा इकाई, एक ऑपरेशन थिएटर और हाइपरबेरिक चिकित्सा सुविधाएं भी हैं, यह इसे गहरे समुद्र में गोताखोरी से संबंधित चिकित्सा समस्याओं से निपटने की क्षमता प्रदान करती हैं।

    2018 में हुआ था अनुबंध
    गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2018 में HSL के साथ लगभग 2,393 करोड़ रुपये की लागत से ऐसे दो जहाजों का अनुबंध किया था। इसमें INS निस्तार की नींव दिसंबर 2019 में और निपुण की नींव उसके तीन महीने बाद रखी गई थी।

    विशाखापत्तनम स्थित 'हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड' (HSL) द्वारा निर्मित INS निपुण को व्यापक साज-सज्जा और कड़े समुद्री परीक्षणों के बाद 30 जुलाई को नौसेना को सौंपा दिया गया। जिसके बाद आज यानी 31 अगस्त, सोमवार को भारतीय नौसेना कमीशन किया गया है।

  • ड्रोन-बम की बारिश के बीच भारतीय नौसेना का कमाल, दो भारतीय जहाजों को सुरक्षित पहुंचाया

    ड्रोन-बम की बारिश के बीच भारतीय नौसेना का कमाल, दो भारतीय जहाजों को सुरक्षित पहुंचाया

    मुंबई 

    भारतीय नौसेना ने रणनीतिक रूप से अहम बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से दो मर्चेंट जहाजों को पार कराया है. इनमें एमवी यूनियन मरीनर और एमवी दाघेर की मिशन पर तैनात नौसेना की यूनिट ने दोनों जहाजों के ट्रांजिट की निगरानी की. नौसेना ने कहा कि वह भारत आने-जाने वाले जरूरी कार्गो की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार तैनात है। 

    बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है. दुनिया के बिजी शिपिंग रूट्स में शामिल इस कॉरिडोर से बड़ी मात्रा में व्यापारिक सामान और ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही होती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का खतरा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है। 

    भारतीय नौसेना ने कहा कि उसकी तैनाती का मकसद भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा करना और भारतीय व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है. नौसेना के युद्धपोत अदन की खाड़ी में एंटी-पायरेसी ऑपरेशन के तहत भी लगातार निगरानी कर रहे हैं। 

    खाड़ी क्षेत्र में भी तैनात हैं युद्धपोत
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट में संकट के बीच भारतीय नौसेना के युद्धपोत मिडिल ईस्ट क्षेत्र में मिशन पर तैनात हैं. भारतीय नौसेना के कुछ युद्धपोत ऑपरेशन संकल्प के तहत ओमान की खाड़ी में भी मौजूद हैं. वहीं, अदन की खाड़ी में तैनात युद्धपोत समुद्री डकैती के खतरे से निपटने के साथ भारतीय मर्चेंट जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में मदद कर रहे हैं। 

    रक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना के युद्धपोत जरूरत पड़ने पर क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक कम्युनिकेशन नहीं हुआ है। 

    बाब-अल-मंदेब में भारतीय नौसेना की सक्रिय मौजूदगी ऐसे समय में अहम है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण समुद्री व्यापार और शिपिंग रूट्स पर सुरक्षा का खतरा बढ़ा हुआ है. नौसेना की यह तैनाती भारत के व्यापारिक हितों और समुद्री सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की रणनीति का हिस्सा है।