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  • ड्रोन से मिलिट्री सिस्टम तक सुरक्षा कड़ी, चीनी मूल के साइबर बग्स पर सेना की नजर; 6 लैब होंगी तैयार

    ड्रोन से मिलिट्री सिस्टम तक सुरक्षा कड़ी, चीनी मूल के साइबर बग्स पर सेना की नजर; 6 लैब होंगी तैयार

     नई दिल्ली

    भारतीय सेना विदेशी मूल के साइबर अटैक से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंतित है. इसलिए वह 6 आश्वस्त (AASHVAST) प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बना रही है. इन लैब्स का मकसद ड्रोन और अन्य सैन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में छिपी कमजोरियों का पता लगाना है. इनमें खराब कोड, छिपे हुए एक्सेस मैकेनिज्म और फर्मवेयर स्तर की खामियों की जांच की जाएगी, जो सैन्य अभियानों को बाधित कर सकती हैं। 

    दिल्ली में लैब पहले ही शुरू हो चुकी है. देशभर में कम से कम पांच और लैब्स लगाने की योजना है. शुरुआत में इनका फोकस ड्रोन पर रहेगा. बाद में सेना द्वारा खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जाएगी. यह पहल ऐसे समय में आई है जब सैन्य उपकरणों में चीनी मूल के पुर्जों को लेकर चिंता बढ़ रही है. खासकर पूर्वी सीमाओं पर तैनात ड्रोनों में चीनी साइबर अटैक की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।  

    भारत ने पहले भी घरेलू सैन्य ड्रोन निर्माताओं को चीनी मूल के पुर्जों का इस्तेमाल सीमित करने के निर्देश दिए थे. 2025 में आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने रक्षा मंत्रालय को एक फ्रेमवर्क सौंपा था, जिसका उद्देश्य यूएवी से चीनी मूल के साइबर अटैक को पूरी तरह हटाना था. आश्वस्त लैब्स इस प्रक्रिया में एक और परत जोड़ेंगी. वे सिर्फ यह नहीं देखेंगी कि कोई हिस्सा कहां से खरीदा गया, बल्कि उसकी असली उत्पत्ति और उसमें क्या छिपा हो सकता है, इसकी भी जांच करेंगी। 

    फर्मवेयर स्तर की छिपी खतरों की जांच
    आश्वस्त सिस्टम को क्विकपे प्राइवेट लिमिटेड ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स महानिदेशालय के लिए विकसित किया है. यह सिर्फ फिजिकल जांच पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम का एनालिसिस करेगा. यह सिस्टम करीब 14 तरह की कमजोरियों का पता लगा सकता है. इनमें छिपे हुए कोड और कमांड शामिल हैं, जो ड्रोन के कामकाज में बाधा डाल सकते हैं। 

    लोकेशन या समय आधारित खराबी भी पता चलेगी, जो किसी खास इलाके या समय पर मिशन को खराब कर सकती है. एम्बेडेड पासवर्ड, एन्क्रिप्शन कुंजी और रिमोट एक्सेस टूल भी स्कैन किए जाएंगे. कुछ खराबियां ऐसी हो सकती हैं जो यूएवी को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने या मिशन पूरा करने से रोक दें। 

    अप्रैल 2026 में सेना ने फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम वैलिडेशन के लिए कस्टमाइज्ड लाइसेंस्ड सॉफ्टवेयर खरीदने का आरएफपी जारी किया था. इससे साफ है कि सेना इस दिशा में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भूमिका बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है. अगर किसी सिस्टम में छिपा बैकडोर या दुर्भावनापूर्ण कोड हो, तो दुश्मन उसे दूर से नियंत्रित या बाधित कर सकता है. इसलिए ऐसी जांच जरूरी है। 

    सीसीटीवी कैमरे भी जांच के दायरे में
    स्क्रीनिंग कार्यक्रम आगे चलकर भविष्य में खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों तक भी फैलेगा. इन जांचों में संभावित रूप से कमजोर प्रॉप्राइटरी प्रोटोकॉल और एम्बेडेड तकनीकों को देखा जाएगा, खासकर विदेशी मूल की प्रणालियों से जुड़ी तकनीकों को. व्यापक उद्देश्य साइबर लचीलापन बढ़ाना, बाहरी हस्तक्षेप का खतरा कम करना। 

    सैन्य प्लेटफॉर्म को विवादित परिचालन वातावरण में भरोसेमंद बनाए रखना है. यह पहल आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत रक्षा तकनीक में अधिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी योगदान देगी. सेना की यह कोशिश दिखाती है कि वह सिर्फ हार्डवेयर खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहती. वह सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर स्तर पर भी पूरी तरह सुरक्षित सिस्टम चाहती है। 

    ड्रोन और सीसीटीवी जैसे उपकरणों में छिपी कमजोरियां युद्ध के मैदान में गंभीर परिणाम ला सकती हैं. आश्वस्त लैब्स इन जोखिमों को कम करने में मदद करेंगी. इससे भारतीय सेना की तकनीकी सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य के संघर्षों में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा घटेगा. कुल मिलाकर यह कदम आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप है, जहां साइबर सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी पारंपरिक सैन्य क्षमता। 

  • कश्मीर में आतंक के खिलाफ अभियान जारी, बांदीपोरा-बारामूला में बड़े खुलासे

    कश्मीर में आतंक के खिलाफ अभियान जारी, बांदीपोरा-बारामूला में बड़े खुलासे

    जम्मू कश्मीर

    जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. उत्तरी कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में चलाए गए संयुक्त तलाशी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के ठिकानों को ढूंढ निकाला और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया.

    सुरक्षा बलों को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के क्रीरी इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी. जिसके बाद सेना और स्थानीय पुलिस ने नीलसर इलाके में एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया था.

    आतंकवादी इस जगह का इस्तेमाल दोबारा न कर सकें, इसलिए सुरक्षा बलों ने इस ठिकाने को तुरंत तबाह कर दिया. पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है.

    23 विस्फोटक स्टिक्स बरामद
    इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने इलाके में बने एक गुप्त आतंकी ठिकाने का पर्दाफाश किया. सुरक्षा बलों को इन ठिकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद हुई. ठिकाने की तलाशी लेने पर वहां से करीब 23 विस्फोटक स्टिक्स और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई.

    बांदीपोरा में प्राकृतिक गुफाओं में बना था ठिकाना
    इससे पहले उत्तरी कश्मीर के ही बांदीपोरा जिले से भी ऐसी ही एक कामयाबी की खबर आई थी. सुरक्षा बलों ने बांदीपोरा के अरागम इलाके में स्थित खंजपत्री के जंगलों में एक बड़े आतंकी ठिकाने को ध्वस्त किया था. ये कार्रवाई 14 से 15 मई के बीच एक विशेष 'सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन' के तहत की गई थी. इस बड़े ऑपरेशन को सेना की 13 राष्ट्रीय राइफल्स, बांदीपोरा पुलिस और CRPF की तीसरी बटालियन ने मिलकर अंजाम दिया था.

    युद्ध जैसा सामान बरामद
    पहाड़ी इलाके में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों की नजर वहां बनी प्राकृतिक गुफाओं पर गई. जब इन गुफाओं की तलाशी ली गई त वहां छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में युद्ध जैसा सामान बरामद हुआ. इस ठिकाने से रोजमर्रा के कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स टूल्स, खाने-पीने का राशन, बर्तन जैसी चीजें भी मिली थीं.