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  • विश्व कप में आठवें स्थान के बाद भारत की नई चुनौती, एशियाई खेलों में सीधे ओलंपिक टिकट का मौका

    विश्व कप में आठवें स्थान के बाद भारत की नई चुनौती, एशियाई खेलों में सीधे ओलंपिक टिकट का मौका

    नई दिल्ली
    भारतीय पुरुष हॉकी टीम का 2026 विश्व कप अभियान उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सकी और आठवें स्थान पर रही। अब उसके सामने 19 सितंबर से शुरू हो रहे एशियाई खेलों में इस निराशा को पीछे छोड़कर नए सिरे से शुरुआत करने की चुनौती है।

    भारत 20 सितंबर से जापान में अपने अभियान की शुरुआत करेगा और यहां दांव सिर्फ स्वर्ण पदक का नहीं, बल्कि लॉस एंजिल्स 2028 ओलिंपिक का सीधा टिकट हासिल करने का अवसर भी होगा।

    भारतीय टीम के पूर्व गोलकीपर और जूनियर टीम के कोच रह चुके पीआर श्रीजेश का मानना है कि विश्व कप की निराशा के बाद टीम को मानसिक रूप से खुद को रीसेट करना होगा। ‘दैनिक जागरण’ से विशेष बातचीत में श्रीजेश ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से भारत के विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने की उम्मीद कर रहे थे।

    उनके मुताबिक भारत को इंग्लैंड और अर्जेंटीना के विरुद्ध जीत दर्ज करनी चाहिए थी, लेकिन दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार हॉकी खेली। श्रीजेश ने कहा कि एशियाई खेलों में भारत की स्थिति काफी अलग होगी। एशियाई स्तर पर भारत को पाकिस्तान, मलेशिया, चीन और दक्षिण कोरिया से चुनौती मिल सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन टीमों के अनुभव में भारत से अंतर है। हालिया प्रदर्शन को देखते हुए भारत को मजबूत दावेदार के तौर पर उतरना चाहिए।

    श्रीजेश ने यह भी साफ किया कि आसान स्थिति होने के बावजूद भारतीय टीम किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हल्के में नहीं ले सकती। एशियाई खेलों का महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा है क्योंकि पुरुष हॉकी में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम को 2028 ओलिंपिक का सीधा टिकट मिलेगा।

    मानसिक मजबूती बहुत जरूरी
    श्रीजेश ने गोलकीपर और डिफेंस की मानसिक मजबूती पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हॉकी में प्रदर्शन एक तरह से ‘देने और लेने’ का खेल है। कई बार गोलकीपर गलती करता है तो फारवर्ड उस गलती की भरपाई करते हुए ज्यादा गोल कर देते हैं। वहीं कई मौकों पर फारवर्ड 10-15 मौके गंवा सकते हैं, लेकिन तब गोलकीपर की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह विपक्ष के हर हमले को रोके।

    उन्होंने कहा कि गलती होने पर एक-दूसरे को दोष देना समाधान नहीं है। टीम को साथ बैठकर समस्या पर चर्चा करनी चाहिए, वीडियो देखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि गलती कहां हुई और उसे दोबारा कैसे रोका जा सकता है। विपक्षी टीमें भी आपकी वीडियो रिकार्डिंग देखकर कमजोरियां तलाशती हैं और उसी जगह हमला करती हैं। इसलिए एक ही गलती बार-बार दोहराना खतरनाक है।

    तकनीक के साथ संवाद बेहद जरूरी
    श्रीजेश ने कहा कि तकनीकी तैयारी के साथ बेहतर संवाद भी बेहद जरूरी है। टीम मीटिंग, वीडियो विश्लेषण और खिलाड़ियों के बीच खुली बातचीत से दबाव कम होता है। सबसे महत्वपूर्ण है अपनी गलती स्वीकार करना। अगर गोलकीपर कहता है कि गोल उसकी गलती थी और डिफेंडर भी अपनी गलती स्वीकार करता है, तो इससे टीम के भीतर भरोसा बढ़ता है। मैदान पर हर खिलाड़ी को यह भरोसा होना चाहिए कि गलती होने पर उसका साथी उसके पीछे खड़ा है। ‘बैकअप और सपोर्ट’ ही मुश्किल परिस्थितियों में टीम को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।

     

  • हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की शर्मनाक हार, दूसरे राउंड में एक भी मैच नहीं जीत सकी टीम

    हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की शर्मनाक हार, दूसरे राउंड में एक भी मैच नहीं जीत सकी टीम

     नई दिल्ली
     हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम का शर्मनाक प्रदर्शन देखने को मिला। टीम इंडिया के लिए अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबला करो या मरो जैसा था। हरमनप्रीत सिंह की टीम से काफी उम्मीदें थी लेकिन भारतीय टीम कमाल नहीं कर सकी। हैरानी की बात ये रही कि टीम इंडिया दूसरे राउंड में एक भी मैच नहीं जीत सकी और उन्हें सभी तीनों मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा।

    भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप का खिताब सिर्फ एक बार अपने नाम किया है। उन्होंने 1975 में विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। उसके बाद से भारतीय टीम कभी भी विश्व कप का खिताब अपने नाम नहीं कर सकी है। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम से काफी उम्मीदें थी लेकिन हार के साथ विश्व कप जीतने का सपना चकनाचूर हो गया है। अर्जेंटीना ने टीम इंडिया को 5-3 से हराया है।

    अर्जेंटीना ने पहले क्वार्टर में दागे दो गोल
    भारत के लिए अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले क्वार्टर के पहले ही मिनट में अर्जेंटीना की टीम ने पहला गोल दाग दिया। जोकिन टोस्कानी ने पहले मिनट में गोल दाग दिया। इसके बाद छठे मिनट में निकोलस डेला टोरे ने दूसरा गोल दागा और अर्जेंटीना को 2-0 की बढ़त दिला दी। अर्जेंटीना के दो गोल दागने के साथ ही भारतीय टीम पर दबाव आ गया। हालांकि, पहले क्वार्टर के 10वें मिनट में भारत के लिए सुखजीत सिंह ने पहला गोल दागा और स्कोर को 1-2 कर दिया।
    दूसरे क्वार्टर में रोमांचक रही जंग

    दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने अच्छा खेल दिखाया। दोनों में से कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। भारतीय टीम के लिए अच्छी बात ये रही कि उन्होंने अर्जेंटीना को कोई पेनल्टी कॉर्नर भी नहीं दिया। हालांकि, पहले हाफ का खेल समाप्त होने तक टीम इंडिया 1-2 से पीछे थी।

    तीसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने बनाई बढ़त
    दूसरे क्वार्टर में एक भी गोल नहीं कर सकी अर्जेंटीना की टीम ने तीसरे क्वार्टर की शानदार शुरुआत की। उन्होंने खेल के 33वें मिनट में तीसरा गोल कर दिया। अर्जेंटीना के लिए टॉमस डोमेन ने तीसरा गोल दागा और टीम को बढ़त को 3-1 कर दिया। भारत को तीसरे क्वार्टर में 5 पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन टीम इंडिया इसका फायदा नहीं उठा सकी। भारतीय खिलाड़ी कोई गोल नहीं कर सके। टॉमस डोमेन ने तीसरे क्वार्टर में ही एक बार फिर कमाल किया और अपना दूसरा गोल दाग दिया। उन्होंने खेल के 45वें मिनट में गोल दागा और अर्जेंटीना की बढ़त को 4-1 कर दिया।

    भारतीय टीम को मिली हार
    चौथे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने पांचवा गोल किया और भारत पर विशाल बढ़त बना ली। अर्जेंटीना के लिए पांचवा गोल लुकस टोस्कानी ने दागा और उन्होंने बढ़त को 5-1 कर दिया। भारत की हार यहीं से सुनिश्चित हो गई थी। हालांकि, अंत में टीम इंडिया ने दो गोल दागे और हार के अंतर को कम किया। 58वें मिनट में सुखजीत सिंह ने गोल किया, जबकि 60वें मिनट में हार्दिक सिंह ने भी गोल किया। इस तरह से भारत ने स्कोर को 5-3 किया। हार के साथ टीम इंडिया विश्व कप से बाहर हो गई है और वे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सके।

     

  • भारत की सेमीफाइनल राह बेहद मुश्किल, अर्जेंटीना और नीदरलैंड्स पर टिकी उम्मीदें

    भारत की सेमीफाइनल राह बेहद मुश्किल, अर्जेंटीना और नीदरलैंड्स पर टिकी उम्मीदें

     एम्सटेलवीन
    नीदरलैंड्स से पिछले मैच में हारने के बाद भारतीय टीम विश्व कप सेमीफाइनल की दौड़ से लगभग बाहर होने की कगार पर है। हालांकि शनिवार को आखिरी पूल मैच में इंग्लैंड की अर्जेंटीना के हाथों हार ने तकनीकी तौर पर रास्ते बंद नहीं किए हैं लेकिन हरमनप्रीत सिंह की टीम को इसके लिए बड़ी जीत के साथ दूसरे मैच का परिणाम भी अनुकूल रहने की दुआ करनी होगी।

    विश्व कप के नए प्रारूप के तहत पूल ई और एफ में दूसरे दौर में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली टीमें सेमीफाइनल में जाएंगी। इंग्लैंड को रियो ओलंपिक 2016 चैंपियन अर्जेंटीना ने 3-1 से हराया, लेकिन पहले दौर में भारत पर मिली जीत के कारण इंग्लैंड के पास तीन अंक हैं।

    भारत के पास अब तक कोई अंक नहीं
    नीदरलैंड्स छह अंक के साथ अंतिम चार में पहुंच चुका है। अर्जेंटीना के भी कल मिली जीत के बाद तीन अंक हो गए हैं जबकि भारत के पास कोई अंक नहीं है। अब भारत को ना सिर्फ अर्जेंटीना को बड़े अंतर से हराना होगा बल्कि इंग्लैंड के भी बड़े अंतर से हारने की दुआ करनी होगी।

    अर्जेंटीना को हराना आसान नहीं होगा जिसने उसे इस साल एफआईएच प्रो लीग में राउरकेला में 8-0 और 4-2 से हराया है। इसके अलावा इंग्लैंड के विरुद्ध भी पिछले मैच में उसने जबर्दस्त प्रदर्शन करके भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। उसके पास रियो ओलंपिक विजेता मटियास रे के रूप में अनुभवी कप्तान है जो 329 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं और यह उनका छठा विश्व कप है।

    भारत अगर दो गोल से अधिक के अंतर से जीत दर्ज करता है तो ही अर्जेंटीना बाहर हो सकता है क्योंकि ऐसे में उसके गोल अधिक हो जाएंगे। अर्जेंटीना ने अभी तक चार गोल स्कोर किये हैं जबकि भारत के तीन गोल हैं। इसके अलावा भारतीय टीम को नीदरलैंड्स की इंग्लैंड पर बड़ी जीत का भी इंतजार करना होगा। इंग्लैंड के खाते में पांच गोल है लिहाजा भारत को इंग्लैंड से कम से कम चार गोल के अंतर की जरूरत होगी।

    अर्जेंटीना को बड़े अंतर से हराना होगा
    अगर भारत अर्जेंटीना को 3-1 से हराता है तो उसके नाम छह गोल स्कोर और आठ गोल गंवाने का आंकड़ा होगा। ऐसे में इंग्लैंड अगर 2-0 से हारता है तो उसके पांच गोल होंगे जबकि सात गंवाए हैं। ऐसे में भारत गोल स्कोर की गिनती के आधार पर सेमीफाइनल में चला जाएगा। लेकिन भारत 3-1 से जीतता है और इंग्लैंड 1 -3 से हारता है तो इंग्लैंड के गोल स्कोर छह और गंवाए गोल आठ हो जाएंगे और फिर फील्ड गोलों की गिनती के आधार पर तय किया जाएगा।

    भारत ने पिछले मैच में पेनाल्टी कॉर्नर पर गोल किया था और इंग्लैंड के विरुद्ध एक फील्ड गोल पहले चरण में दागा था। इंग्लैंड ने भारत के विरुद्ध तीनों फील्ड गोल किए थे तो इंग्लैंड आगे निकल जाएगा। भारत के लिए सबसे आसान यही है कि अर्जेंटीना को दो गोल से अधिक के अंतर से हराये और इंग्लैंड कम से कम तीन गोल से हारे।