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  • MP के स्टेट हाईवे पर लगेगी ‘यूजर फीस’? जानें नए कानून में क्या है प्रावधान

    MP के स्टेट हाईवे पर लगेगी ‘यूजर फीस’? जानें नए कानून में क्या है प्रावधान

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में स्टेट हाईवे के विकास, रखरखाव और संचालन के लिए नया कानूनी ढांचा लागू हो गया है। राज्य सरकार अब स्टेट हाईवे या उसके किसी हिस्से के उपयोग से मिलने वाली सेवाओं और सुविधाओं के बदले यूजर फीस लगा सकेगी। शुल्क की दर और वसूली की प्रक्रिया नियमों के जरिए तय होगी। इसके साथ ही सरकार हाईवे के विकास और रखरखाव के लिए किसी व्यक्ति या संस्था के साथ समझौता भी कर सकेगी। इसके तहत संबंधित निजी संस्था को तय शर्तों के अनुसार शुल्क वसूलने और उसे अपने पास रखने का अधिकार भी दिया जा सकेगा। यह प्रावधान मप्र राजमार्ग (संशोधन) अधिनियम 2026 में किया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह तत्काल प्रभावी हो चुका है।

    संशोधन में मूल मप्र राजमार्ग अधिनियम, 2004 की प्रस्तावना में भी बदलाव किया है। इसमें राजमार्गों से अतिक्रमण रोकने और हटाने के साथ यूजर फीस लगाने का प्रावधान जोड़ा गया है। वहीं सड़क सुरक्षा तथा सड़क परिवहन के सभी साधनों की अधिकतम दक्षता सुनिश्चित करने वाली सुविधाओं को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है।

    नए नियम के फायदे
    रखरखाव के लिए अतिरिक्त आयः यूजर फीस से हाईवे के विकास और रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन आसानी से जुटाए जा सकेंगे।

    निजी निवेश का रास्ताः विकास और रखरखाव के लिए निजी संस्थाओं के साथ करार होने से पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल भी संभव होगा।

    सुविधाओं में सुधारः अतिरिक्त शुल्क से मिलने वाले संसाधनों का उपयोग सड़क की गुणवत्ता. संचालन, सुरक्षा और संबंधित सुविधाओं में किया जा सकता है।

    जिम्मेदारी तय करने में मददः करार में निर्माण, रखरखाव, प्रबंधन और संचालन की शर्तें स्पष्ट की जा सकेंगी।

    नए नियम को लेकर ये चुनौतियां
    वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझः
    यूजर फीस से नियमित यात्रियों और मालवाहक वाहनों की यात्रा लागत बढ़ सकती है।

    दोहरी फीस की आशंकाःकिसी मार्ग पर पहले से अन्य शुल्क लागू होने की स्थिति में नया शुल्क अतिरिक्त आर्थिक बोझ डॉल सकता है। यह अनिवार्य प्रावधान नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक चुनौती है।

    निजी एजेंसी की निगरानीःशुल्क वसूली का अधिकार निजी संस्था को मिलने पर दर, सेवा की गुणवत्ता और करार की निगरानी जरूरी होगी।

    कम ट्रैफिक वाले मार्गः कम यातायात वाले हाईवे निजी निवेश के लिए कम आकर्षक होंगे। ऐसे मार्गों के रखरखाव के लिए सरकार को अलग संसाधन जुटाने पड़ सकते हैं।

    सरकार तय करेगी फीस की नई दरें
    अधिनियम में नई धारा 8-ए जोड़ी गई है। इसके तहत राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर स्टेट हाईवे के पूरे या किसी हिस्से के उपयोग से संबंधित सेवाओं या लाभों के लिए नियमों में तय दरों पर शुल्क लगा सकेगी। शुल्क की वसूली भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही होगी। हालांकि, किस हाईवे पर कितनी फीस लगेगी और किन वाहनों या उपयोगकर्ताओं पर लागू होगी, यह संबंधित नियमों और अधिसूचनाओं से स्पष्ट होगा।

    वहीं नई धारा 8-बी के तहत सरकार को स्टेट हाईवे के पूरे या किसी हिस्से के विकास और रखरखाव के लिए किसी व्यक्ति या संस्था से समझौता करने का अधिकार मिला है। करार की शर्तों के तहत संबंधित संस्था को सेवाओं या सुविधाओं के बदले शुल्क वसूलने और अपने पास रखने का अधिकार दिया जा सकता है। संशोधन अधिनियम के तहत मध्यप्रदेश राजमार्ग अधिनियम, 1936 और भारतीय टोल (मध्यप्रदेश संशोधन) अधिनियम, 1932 को निरस्त कर दिया गया है। हालांकि पहले जारी अधिसूचनाएं, निर्धारित यूजर फीस. रियायत समझौते, लाइसेंस, प्राधिकरण और शुल्क वसूलने से जुड़े अधिकार तत्काल खत्म नहीं होंगे।

  • इंदौर-नागपुर से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बैतूल-खंडवा फोरलेन बनेगा नई लाइफलाइन

    इंदौर-नागपुर से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बैतूल-खंडवा फोरलेन बनेगा नई लाइफलाइन

    इंदौर 

    बैतूल से खंडवा के बीच फोरलेन प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. यह प्रोजेक्ट इंदौर और नागपुर के बीच की दूरी को बेहद कम कर देगा. दोनों शहरों के बीच का सफर 6 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह परियोजना बैतूल-खंडवा-वडोदरा कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे मध्य प्रदेश की गुजरात और महाराष्ट्र से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी. इस फोरलेन के बनने से नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली, नांदेड़ जैसे शहर कनेक्ट होंगे. वहीं गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा जैसे बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. इसलिए यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के लिए अहम है, क्योंकि आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा। 

    इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में होगा
    बैतूल से खंडवा फोरलेन बनने से सबसे बड़ा फायदा इंदौर नागपुर रूट पर होगा. केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट दस्तावेज में इस कॉरिडोर को इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट, इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जोड़ने वाली कड़ी बताया गया है. इंदौर से पहले सीधे बैतूल तक का सफर होगा. इसके बाद बैतूल से नागपुर का सफर तय किय जाएगा. पहले इंदौर से नागपुर जाने में 13 से 14 घंटे का समय लगता था. क्योंकि पूरा रूट 2 लेन हाईवे था. यह नया मार्ग सीधे नेशनल NH-47, NH-753 और NH-52 जैसी बड़ी सड़कों को आपस में इंटरलिंक करदेगा. इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को इस अपग्रेडेशन से सीधी मदद मिलेगी. इस फोरलेन के बनने से पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो जाएगा. जिससे इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. इसलिए इंदौर से नागपुर और दक्षिण भारत के बीच का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा। 

    एमपी की गुजरात और महाराष्ट्र तक कनेक्टिविटी
        मध्य प्रदेश: बैतूल खंडवा फोरलेन हाईवे से इंदौर, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी जैसे शहर सीधे कनेक्ट हो जाएंगे. 
        महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों के लिए भी राह आसान हो जाएगी. 
        गुजरात: इस प्रोजेक्ट से एमपी के खंडवा का सीधा कनेक्शन अहमदाबाद, वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों से भी हो जाएगा. 

    मध्य प्रदेश के शहरों को फायदा
    यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के भीतर एक मजबूत कनेक्टिविटी जाल तैयार करेगा, क्योंकि इससे एमपी के कई बड़े शहर आपस में कनेक्ट होंगे. बैतूल, छिंदवाड़ा और नागपुर की तरफ से आने वाला ट्रैफिक खंडवा होते हुए इंदौर और भोपाल की तरफ बेहद आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सकेगा. खंडवा, खरगोन और बड़वानी: निमाड़ अंचल के ये तीनों प्रमुख जिले इस हाईवे के जरिए सीधे बैतूल और छिंदवाड़ा से कनेक्ट हो जाएंगे। 

    सिंहस्थ-2028 में भी फायदा
    बैतूल-खंडवा-जुलवानिया फोरलेन से मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ की कनेक्टिविटी भी मजबूत हो जाएगी. उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के आयोजन के हिसाब से यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा. क्योंकि उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के मंधाता में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से प्रबंधित करने में मदद करेगा. जिससे सिंहस्थ में महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ से आने वाले यात्रियों को इस फोरलेन का फायदा होगा. इसलिए यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। 

    बैतूल-खंडवा फोरलेन को केंद्र की मंजूरी 
    बैतूल से खंडवा के बीच बनने वाले इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने जून 2026 में मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के लिए 4415.60 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. जिसकी कुल दूरी 233.653 किलोमीटर होगी. फिलहाल इसे 4 लेन में विकसित किया जाएगा. जबकि भविष्य में इसे 6 लेन बनाने की योजना है. ताजा अपडेट के मुताबिक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है. जिसे मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा. जनवरी 2027 से इसका काम शुरू होने की संभावना है. खास बात यह है कि सभी ब्लैक स्पॉट्स खत्म होंगे, जिससे गाड़ियां 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी. वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2029 के अंत तक या 2030 की शुरुआत में यह हाईवे पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। 

  • झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों पर केंद्र की नजर, NHAI को सौंपी जाएगी सड़कों की जिम्मेदारी

    झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों पर केंद्र की नजर, NHAI को सौंपी जाएगी सड़कों की जिम्मेदारी

     रांची
     झारखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों को लेकर अब व्यवस्था बदलने वाली है। राज्य के जिन हाईवे पर ज्यादा ट्रैफिक रहता है, उनके रखरखाव और निर्माण कार्य राज्य सरकार से हटाकर केंद्र की एजेंसी एनएचएआई को दी जाएगी।

    इन सड़कों का निर्माण, रखरखाव और विस्तार एनएचएआई की निगरानी में होगा। केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों की ट्रैफिक के आधार पर समीक्षा की। 10 हजार से ज्यादा वाहन गुजरने वाले एनएच को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

    इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने 21 अगस्त को राज्य के मुख्य सचिव और एनएचएआई चेयरमैन को पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी दी। पहले चरण में चार एनएच को एनएचएआई के को देने का फैसला हुआ है। इनमें एनएच-139, एनएच-522 और एनएच-114A को तुरंत एनएचएआइ को सौंपा जाएगा, क्योंकि इन मार्गों पर फिलहाल कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है।

    एनएच-20 का एक हिस्सा राज्य के पास रहेगा। इसके 116 से 176 किलोमीटर के बीच चल रहे काम को पूरा कराया जाएगा और उसके बाद इस हिस्से की जिम्मेदारी भी एनएचएआई को दे दी जाएगी। हालांकि, सभी सड़कों की जिम्मेदारी अभी नहीं बदली है।

    एनएच-220 को फिलहाल झारखंड के पथ निर्माण विभाग के पास ही रखा गया है। वहीं, एनएच-419 के 49 से 65 किलोमीटर और एनएच-133 के 93 से 131 किलोमीटर वाले हिस्सों पर काम धनबाद स्थित सड़क परिवहन मंत्रालय के परियोजना कार्यान्वयन इकाई के जरिए जारी रहेगा।

    सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्र की नजर अब पूरे झारखंड के एनएच नेटवर्क पर है। मंत्रालय इस विकल्प पर भी विचार कर रहा है कि राज्य के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को राज्य सरकार की व्यवस्था से हटाकर सड़क परिवहन मंत्रालय के परियोजना कार्यान्वयन इकाई के जरिए संचालित किया जाए।

  • 4800 करोड़ से बन रहा अंबाला-शामली हाईवे, टोल फ्री सफर की मिलेगी सुविधा

    4800 करोड़ से बन रहा अंबाला-शामली हाईवे, टोल फ्री सफर की मिलेगी सुविधा

    अंबाला
     साल 2027 में हरियाणा के लोगों को एक नई सौगात मिलेगी। अंबाला से शामली तक छह लाइन का हाइवे बनाया जा रहा है।

    इसका काम तकरीबन 70 फीसदी पूरा भी हो चुका है। इस राजमार्ग से बन जाने से पश्चिमी यूपी का सफर आसान हो जाएगा। वहीं, इस रूट का फायदा हरियाणावासियों को भी खूब मिलेगा। हरियाणा से वेस्ट यूपी तक बन रहा यह हाइवे मार्च, 2027 तक पूरा हो जाएगा।
    4900 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण

    हरियाणा के अंबाला से लेकर उत्तर प्रदेश के बीच बन रहा 122 किलोमीटर लंबा यह हाइवे की लागत 4800 करोड़ रुपये है। जिसके पूरा होने का लक्ष्य मार्च, 2027 रखा है। इस हाइवे को भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह साल 2024 में शुरू हुआ था।

    हरियाणा के किन जिलों को फायदा?
        करनाल
        पानीपत
        कुरुक्षेत्र
        यमुनानगर
        अंबाला
        कैथल
        जींद
        रोहतक

    कहां से लेकर कहां तक बना रहा यह हाईवे?
    इस हाइवे का निर्माण अंबाला से शामली के बीच हो रहा है। इस बीच यह छह जिलों से होकर गुजरेगा। हरियाणा के अंबाला के अंतर्गत सोदापुर गांव से इसकी शुरुआत होगी।

    इसके बाद कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होते हुए यह यूपी के सहारनपुर से होकर शामली को जोड़ेगा। खास बात है कि इस पूरे हाइवे पर कोई टोल प्लाजा नहीं होगा। 

    हाइवे से जुड़ी खास बातें…
        हाइवे पर कई स्थानों पर दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॉरिडोर की तर्ज पर रेस्ट एरिया बनाया जाएगा।
        पेट्रोल, सीएनजी पंप, रेस्टोरेंट और शौचालय आदि की सुविधा सुलभ कराई जाएगी। 
        NHAI बागपत डिवीजन द्वारा शामली से सहारनपुर तक 45 किमी हाइवे का निर्माण कराया जा रहा है।
        इस हाइवे का 77 किमी का दरमियां अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है।
        हाइवे का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
        मार्च-2027 तक निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

  • ₹3500 करोड़ से बदलेगी NH-347 की तस्वीर, छिंदवाड़ा-सिवनी फोर लेन से MP-महाराष्ट्र कनेक्टिविटी होगी मजबूत

    ₹3500 करोड़ से बदलेगी NH-347 की तस्वीर, छिंदवाड़ा-सिवनी फोर लेन से MP-महाराष्ट्र कनेक्टिविटी होगी मजबूत

    छिंदवाड़ा
    मध्य प्रदेश के महाकौशल अंचल के प्रमुख मार्ग नेशनल हाईवे 347 (छिंदवाड़ा से सिवनी) पर अब वाहनों की आवाजाही और सुगम होने जा रही है। राज्य सरकार छिंदवाड़ा से सिवनी के बीच की सड़क को फोर लेन में अपग्रेड करने की तैयारी कर चुकी है, जिस पर लगभग ₹3,500 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में सड़क चौड़ीकरण के इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी पूर्व में इस महत्वपूर्ण मार्ग को फोर लेन बनाने की सहमति दे चुके हैं।

    टू-लेन की घुमावदार सड़क और हादसों से मिलेगी मुक्ति
    वर्तमान में छिंदवाड़ा और सिवनी के बीच टू-लेन सड़क है, जिस पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस मार्ग पर पैसेंजर कार यूनिट (PCU) की संख्या 10,000 के पार पहुंच चुकी है।

    आंकड़ों के अनुसार, इस रूट पर बीते छह महीनों में ही 556 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें लगभग 200 लोगों की अकाल मौत हुई है। फोर लेन बनने से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुधार होगा और यात्रा सुरक्षित बनेगी।

    लखनवाड़ा में बैनगंगा पर नया पुल और 3 किमी लंबा अंडरपास
        चौड़ीकरण परियोजना के तहत 70 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के एलाइनमेंट को दुरुस्त किया जाएगा ताकि घुमावदार मोड़ों को सीधा किया जा सके।

        लखनवाड़ा के पास बैनगंगा नदी पर नए विशाल पुल का निर्माण किया जाएगा, जबकि पेंच नदी पर स्थित पुराने पुल का चौड़ीकरण होगा।

        मार्ग के 13 किलोमीटर हिस्से में कान्हा कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसमें वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 3 किलोमीटर लंबा विशेष अंडरपास भी शामिल होगा।

    कैबिनेट बैठक में अन्य महत्वपूर्ण एजेंडे
    सड़क अधोसंरचना के विकास क्रम में राज्य सरकार ने हाल ही में भोपाल-विदिशा फोर लेन के लिए ₹1,757 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। इसके अतिरिक्त, कैबिनेट बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े एक विवादित बयान पर अभियोजन (Prosecution) स्वीकृति देने के बिंदु पर भी निर्णय लिया जा सकता है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के उपरांत इस फाइल को अंतिम अनुमति के लिए राजभवन (राज्यपाल) भेजा जाएगा। इस पूरे मामले में 31 अगस्त को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में सुनवाई होनी तय है।

     

  • सिवनी-बालाघाट की कनेक्टिविटी होगी बेहतर, 91.64 किमी स्टेट हाईवे बनेगा फोरलेन

    सिवनी-बालाघाट की कनेक्टिविटी होगी बेहतर, 91.64 किमी स्टेट हाईवे बनेगा फोरलेन

    सिवनी/बालाघाट

    मध्य प्रदेश में  की राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में मोहन कैबिनेट की बैठक (MP Cabinet Meeting) का आयोजन किया गया। इस बैठक में सिवनी-बालाघाट स्टेट हाईवे के 91.64 किमी मार्ग को पेव्ड शोल्डर सहित फोर-लेन करने का निर्णय लिया गया है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनने वाली इस परियोजना की लागत 3458 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इसके साथ ही, 12 नई सड़कों का निर्माण भी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर किया जाएगा। पीडब्लूडी मंत्री राकेश सिंह ने बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी दी। स्थानीय सांसद ने इस प्रोजेक्ट को लेकर सीएस अशोक बर्नवाल से मुलाकात भी की थी।

    फोरलेन में बदलेगा टू-लेन रोड
    सिवनी से बालाघाट के बीच सरकार फोर-लेन मार्ग बनाएगी, जो 91 किमी लंबा होगा। निर्माण पर करीब 3500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। फोर-लेन बनने से करीब पांच लाख राहगीरों को सुविधा होगी। अभी टू-लेन मार्ग कई जगह घुमावदार है। बार-बार खराब हो जाता है। पूर्व की तुलना में ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। कई बार जाम की स्थिति बनती है, जो घंटों नहीं खुलता। ऐसे में 91 किमी का सफर तय करने में लोगों को 3-4 घंटे लग जाते हैं, जबकि 2 घंटे लगने चाहिए।

    पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
    सिवनी-बालाघाट सड़क बनने से इन इलाकों के पर्यटन को भी काफी फायदा मिलने वाला है. फोरलेन सड़क से कान्हा और पेंच जैसे पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी. इस मार्ग में लगभग 13 किमी का कान्हा कॉरिडोर भी शामिल रहेगा. इसमें लगभग 3 किमी हिस्सा अंडरपास भी होगा. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कॉरिडोर और अंडरपास को जोड़ा जाएगा. 91 किमी मार्ग में कुछ बायपास भी बनाए जाएंगे. इससे भीड़ वाले हिस्सों में यातायात का दबाव कम करने और सफर भी आसान हो जाएगा. इसके अलावा, इससे स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी। 

    3,458 करोड़ होंगे खर्च
    बता दें कि सिवनी-बालाघाट स्टेट हाईवे के 91.64 किलोमीटर हिस्से को पेव्ड शोल्डर के साथ फोरलेन किया जाएगा. इस परियोजना में लगभग 3,458 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया जाएगा. सड़क चौड़ी होने से आवागमन बेहतर होगा. इससे इलाके में व्यापार भी बढ़ेगा, जिससे छोटे-बड़े दुकानदारों और कारोबारियों को भी फायदा होगा. खराब सड़क, जाम और बढ़ते ट्रैफिक से यात्रियों को बदलाव राहत देने वाला साबित हो सकता है. इससे रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। 

    12 नई सड़कों की मंजूरी
    अब बात करें राज्य की अन्य सड़कों की, इसके अलावा 12 नई सड़क परियोजनाओं को भी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाने की योजना बनाई जा रही है. इनमें भोपाल-विदिशा, चापड़ा-नेवरी-देवास, खलघाट-मनावर-मांगरोद, दिनारा-दतिया-सेवढ़ा, मंदसौर-सीतामऊ-मध्यप्रदेश सीमा और आगर-सारंगपुर सड़कें शामिल हैं. इसके अलावा, सीतामऊ-बसई-सुवासरा, पूर्वी भोपाल बायपास को फोरलेन से सिक्सलेन, खेरात-माखनपुर-जीतपुर, शहरगढ़-खुरई-खिमलासा और नीमच-मनासा-रामपुरा-झालावाड़ मार्ग बनाने की योजना है. सुंदर-सिंहपुर-कोटरी, बिरसिंहपुर-सेमरिया-गोहदा-सिहोरा और इंदौर-देपालपुर फोरलेन मार्ग भी इसमें शामिल हैं. इन सड़कों के बनने से एमपी के अलग-अलग इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी होगी. इन परियोजनाओं को मध्यप्रदेश कैबिनेट में मंजूरी दी गई है। 

    प्रस्तावित है कॉरिडोर
    4-लेन मार्ग पर करीब 13 किमी की दूरी में कान्हा कॉरिडोर भी प्रस्तावित है। इसमें करीब 3 किमी अंडरपास वाला हिस्सा होगा। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से कॉरिडोर व अंडरपास को जोड़ा जाएगा।

    सांसद भारती ने सीएस से की थी मुलाकात
    सांसद भारती पारधी ने बीते दिनों मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल से क्षेत्र के विधायकों कमल मस्कोले, राजकुमार कर्राहे, गौरव पारधी के साथ मुलाकात की थी। जनप्रतिनिधियों ने कहा था कि फोर-लेन बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

    ये होंगे लाभ

    दुर्घटनाओं में कमी आएंगी।
    क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, व्यापारियों की आय बढ़ेगी।
    आम राहगीरों, छात्रों, मरीजों, किसानों को लाभ होगा।
    91 किमी की दूरी के अंदर कुछ बायपास भी बनेंगे।
    हालांकि लोगों को टोल देना होगा।

    भोपाल-विदिशा फोरलेन को पहले मिली थी मंजूरी
    बता दें कि कैबिनेट में सरकार ने हाल ही में भोपाल-विदिशा के बीच भी फोर-लेन को मंजूरी दी थी। इसे लोक निर्माण विभाग ने वित्तीय स्वीकृति भी दे दी है। भोपाल-विदिशा फोर- लेन 1757 करोड़ में बनाया जाएगा।