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  • बिना काम कराए निकाली रकम, अंबेडकरनगर की 136 ग्राम पंचायतों में 13.37 करोड़ की अनियमितता

    बिना काम कराए निकाली रकम, अंबेडकरनगर की 136 ग्राम पंचायतों में 13.37 करोड़ की अनियमितता

    अंबेडकरनगर
    यूपी के अंबेडकरनगर में गांवों में विकास कार्य के लिए शासन स्तर से दी गई धनराशि में ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई है। कहीं बिना कार्य कराए धन निकाल लिया गया है तो कहीं आधा अधूरा कार्य पर ही धनराशि में हेराफेरी की गई है। सत्यापन के बाद ऐसी 136 ग्राम पंचायतों से कुल 13 करोड़ रुपए की वसूली की कार्रवाई शुरू की गई है। ग्राम पंचायत सचिव और प्रधानों पर ऐक्शन शुरू हो गया हे। जिला पंचायत राज अधिकारी ने आरोपित सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी किया गया है। जबकि ग्राम प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों के खिलाफ ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    ग्राम पंचायतों में विकास के बजट से कराए गए कार्यों की ऑडिट टीम के जांच दौरान अभिलेख न प्रस्तुत करने व कार्य के स्थलीय सत्यापन में अनियमितता पाई जाने पर आरोपित ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव से कुल 13 करोड़ 37 लाख 53 हजार 854 ररुपए की वसूली की जाएगी। इसमें जिलाधिकारी स्तर से आरसी का अनुमोदन होने के उपरान्त पंचायती राज विभाग ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। विभागीय स्तर से तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी किया गया है। प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों से वसूली के लिए ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    कई रिटायर तो कई की मृत्यु भी हो चुकी
    यह अनियमितता वित्तीय वर्ष 211-12 से 2018-19 में ऑडिट के दौरान पायी गई थी। प्रकरण पुराना होने व विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करने में विलम्ब होने के चलते कई सचिवों और ग्राम प्रधान की मृत्यु भी हो चुकी है। जबकि कई सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं।अकबरपुर के सुबारपुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2012-13 में ऑडिट के दौरान तीन प्रकरणों में 1881760 रुपए की अनियमितता पायी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 940880 रुपए व तत्कालीन सचिव से 940880 रुपए की वसूली की जाएगी। अकबरपुर नैली में वर्ष 2012-13 में ऑडिट के दौरान कुल 1163529 रुपए की अनियमिता पकड़ी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 581764 रुपए तथा तत्कालीन सचिव से 581764 रुपए की वसूली की जाएगी। वहीं रोशनगढ़ ग्राम पंचायत में वर्ष 2013-14 में दो प्रकरणों में 1648294 रुपए की अनियमिता पायी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 824147 व तत्कालीन सचिव से 824147 रुपए की वसूली की जाएगी। इसी तरह ऑडिट के दौरान विभिन्न वित्तीय वर्षों में जनपद की कुल 136 ग्राम पंचायतों में कुल 13 करोड़ 37 लाख 53 हजार 854 रुपए के गबन का मामला पकड़ा गया है।

    सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी
    इस बारे में डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि आरोपित सचिवों व ग्राम प्रधानों से धन के रिकवरी की कार्रवाई की जा रही है। सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी हो गया है। ग्राम प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों से वसूली के लिए ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। गबन में जिन अरोपितों की मृत्यु हो चुकी है उनकी वसूली संभव नहीं होगी।

     

  • राजस्व ग्राम के आधार पर बिहार में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन शुरू

    राजस्व ग्राम के आधार पर बिहार में ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन शुरू

    पटना
    बिहार की सभी ग्राम पंचायतों का गठन या परिसीमन राजस्व ग्राम के अनुसार नये सिरे से होगा। इसके तहत अब जिस गांव की आबादी अधिक होगी, उसके नाम से ही पंचायत का नामकरण होगा। प्रखंड को इकाई मान ग्राम पंचायत क्षेत्रों की घोषणा होगी। इतना ही नहीं अब 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन होगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त के निर्देश और पर्यवेक्षण में जिला दंडाधिकारी प्रत्येक प्रखंड में स्थित गांवों के लिए ग्राम पंचायत क्षेत्र घोषित करेंगे। परिसमीन को लेकर पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने सोमवार को अधिसूचना जारी की। इसके साथ ही जिला परिषद, पंचायत समिति और वार्ड सदस्य के संबंध में भी अलग-अलग अधिसूचना जारी की गई है।

    ग्राम पंचायत क्षेत्र का निर्धारण प्रखंड के उत्तर-पश्चिम से प्रारंभ होकर दक्षिण-पूर्व में समाप्त होगा। किसी गांव को विभाजित नहीं किया जायेगा, जब तक कि उसमें दो या उससे अधिक ग्राम पंचायत क्षेत्र घोषित करना आवश्यक नहीं हो। एक से अधिक गांवों वाले घोषित ग्राम पंचायत क्षेत्रों का मुख्यालय अधिक जनसंख्या वाले गांव में होगा, लेकिन उस क्षेत्र में एससी, एसटी और पिछड़े वर्गों की संख्या कुल जनसंख्या का 50 प्रतिशत से होगा, तो मुख्यालय उस गांव में होगा जिसमें एससी, एसटी और पिछड़े वर्गों की संख्या का अनुपात सबसे अधिक होगा।

    सड़क, रेल लाइन और सार्वजनिक स्थान सीमा माने जाएंगे
    ग्राम पंचायत क्षेत्र का नाम उस गांव के नाम से घोषित किया जायेगा, जिस गांव में ग्राम पंचायत का मुख्यालय होगा। लेकिन जहां एक गांव में एक से अधिक ग्राम पंचायत क्षेत्र घोषित करना आवश्यक होगा, वहां संबंधित क्षेत्र की स्थिति की दिशा के साथ उसी ग्राम के नाम से घोषित किया जायेगा। पंचायत क्षेत्र की सीमा प्राकृतिक होगी। इसके अतिरिक्त सड़क, रेलवे लाइन और अन्य सार्वजनिक संस्थान, जिससे स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले स्थान को भी सीमा माना जा सकता है।

    प्रमंडीय आयुक्त करेंगे निगरानी
    जिला स्तर पर किये जा रहे ग्राम पंचायत क्षेत्रों के परिसीमन की निगरानी प्रमंडलीय आयुक्त करेंगे। इसमें राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जायेगा। ग्राम पंचायत क्षेत्र के निर्धारण के प्रारूप में ग्राम पंचायत, संबंधित प्रखंड कार्यालय और जिला दंडाधिकारी के कार्यालय के सूचना पट पर चिपका कर प्रकाशित किया जायेगा। प्रकाशन की तिथि से 15 दिनों के अंदर प्राप्त सुझाव या आपत्ति पर विचार कर जिला दंडाधिकारी ग्राम पंचायत क्षेत्र का निर्धारित करेंगे। इसका जिला गजट प्रकाशित होगा।