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  • गंगा एक्सप्रेसवे का होगा विस्तार, हरिद्वार तक बनेगा नया कॉरिडोर

    गंगा एक्सप्रेसवे का होगा विस्तार, हरिद्वार तक बनेगा नया कॉरिडोर

    हरिद्वार तक विस्तारित होगा गंगा एक्सप्रेसवे

    10,761 करोड़ रुपये की लागत से होगा विस्तार, बिजनौर से हरिद्वार की कनेक्टिविटी होगी आसान

    दो कुम्भ नगरियों प्रयागराज और हरिद्वार के बीच बनेगा तेज और नियंत्रित एक्सप्रेसवे कनेक्शन

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 6 लेन में किया जाएगा, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।

    10,761 करोड़ रुपये आएगी अनुमानित लागत
    हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार के लिए राज्य सरकार पर संभावित 10,761 करोड़ रुपये का व्यय-भार आएगा। परियोजना में केंद्र सरकार की किसी प्रकार की वित्तीय भागीदारी अपेक्षित अथवा प्रस्तावित नहीं है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद परियोजना की डीपीआर तैयार करने सहित आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

    बिजनौर से हरिद्वार की कनेक्टिविटी होगी आसान
    उत्तराखंड सीमा से लगे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए वर्तमान में प्रमुख रूप से एनएच-34 (मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार राष्ट्रीय मार्ग) की सुविधा उपलब्ध है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर को हरिद्वार से बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।इसके साथ ही बिजनौर की कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी बेहतर होगी। इससे क्षेत्र में व्यापार, निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    प्रयागराज-हरिद्वार के बीच बनेगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर
    गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से गंगा के तट पर स्थित दो प्रमुख कुम्भ नगरियों, प्रयागराज और हरिद्वार के बीच प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे नेटवर्क के माध्यम से तेज और सुगम यातायात सुविधा विकसित होगी। इससे धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए दोनों धार्मिक नगरियों के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

    धार्मिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
    एक्सप्रेसवे के विस्तार से धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। बेहतर कनेक्टिविटी से हरिद्वार, बिजनौर और गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े अन्य क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। परियोजना के निर्माण और इससे उत्पन्न होने वाली आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

  • गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल लागू, जानिए दोपहिया वाहन चालकों की जेब पर कितना असर पड़ेगा

    गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल लागू, जानिए दोपहिया वाहन चालकों की जेब पर कितना असर पड़ेगा

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे पर अब यात्रियों को सफर के लिए टोल टैक्स देना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले महीने उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे पर शुरुआती दिनों में लोगों को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई थी, लेकिन अब यह छूट खत्म हो गई है।

    करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और प्रदेश के कई बड़े जिलों को जोड़ता है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद 15 मई तक वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन अब यूपीडा (UPEDA) की ओर से टोल दरें लागू कर दी गई हैं।

    जारी दरों के मुताबिक, दोपहिया वाहन, तीन पहिया और ट्रैक्टर चालकों को प्रति किलोमीटर 1.28 रुपये टोल देना होगा। वहीं कार, जीप, वैन और अन्य हल्के मोटर वाहनों के लिए यह शुल्क 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया है। सरकार का दावा है कि गंगा एक्सप्रेसवे से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा और व्यापार, पर्यटन व परिवहन को नई रफ्तार मिलेगी। हालांकि टोल लागू होने के बाद अब यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा।

    गौरतलब है कि मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जनपदों को जोड़ता है और इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। 15 दिन की टोल छूट दी गई थी। अब इस जाने वाले को टोल देना होगा।

  • उच्च तकनीक से बना गंगा एक्सप्रेसवे, भारी ट्रैफिक झेलने में सक्षम संरचना तैयार

    उच्च तकनीक से बना गंगा एक्सप्रेसवे, भारी ट्रैफिक झेलने में सक्षम संरचना तैयार

    लखनऊ

    गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी गंगा एक्सप्रेसवे पर दो पहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए टोल दर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे ही कार, जीप, वैन व हल्के वाहन के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर, मिनी बस, बस व ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर तथा उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) के लिए 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल दर तय की गई है।

    हर मौसम के अनुकूल है डामर की परत
    लखनऊ।गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022

    मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया।
    यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रिक टन स्टील, 14.83.313 मीट्रिक टन सीमेंट व 41.88 लाख घनमीटर रेत का भी प्रयोग किया गया है। संरचनात्मक मजबूती के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य को पूरा कराया गया है। 154.58 लाख घनमीटर मिट्टी सड़क की निचली और ऊपरी परतों को ठोस स्वरूप देने के लिए प्रयोग की गई है।

    एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे की कुल मोटाई 485 मिलीमीटर से 500 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना सुनिश्चित करती है कि सड़क भारी यातायात का दबाव आसानी से झेल सके। इस एक्सप्रेसवे की क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) तक मापी गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे करोड़ों भारी मालवाहक वाहनों के भार को बिना किसी संरचनात्मक क्षति के सहन करने की क्षमता रखता है।

    254 लाख मैन-डेज का श्रम और लाखों टन उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री एक्सप्रेसवे को सुरक्षा की दृष्टि से भरोसेमंद बनाती हैं। डिजाइन क्रस्ट तकनीक से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

  • गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना

    गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना

    गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा

    योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना

    गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में देश को समर्पित हो गया। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनने की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां स्पष्ट नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता ने कच्ची मिट्टी पर विकास की महागाथा लिख दी। गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बुलंद इरादों और प्रभावी क्रियान्वयन से कुछ भी संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे, निर्णय से निर्माण तक की वह कहानी है, जो उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ की दिशा में नई गति देगी।

    2017–2019: सुनियोजित विकास की रूपरेखा
    वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला और ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे विकसित करने का फैसला किया गया। 2018–19 में डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। यही वह चरण था, जहां प्रदेश के समावेशी विकास तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन तैयार की गई और इसे अमली जामा पहनाने के लिए डेडिकेटेड टीम तैयार की गई।

    2020–2021: नीति से क्रियान्वयन तक
    वर्ष 2020 गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हुईं और इसके वित्तीय ढांचे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अंतिम रूप दिया गया। इससे न केवल निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि परियोजना के समयबद्ध और पेशेवर क्रियान्वयन की मजबूत नींव भी रखी गई। इसके बाद वर्ष 2021 में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से पूरा करते हुए पूरे प्रोजेक्ट को 4 प्रमुख ग्रुप/पैकेज में विभाजित किया गया। इन पैकेजों का कार्यान्वयन देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईआरबी, अडानी, एचजी इंफ्रा और एलएंडटी जैसी एजेंसियों को सौंपा गया। यह मल्टी-पैकेज रणनीति परियोजना के लिए गेम चेंजर साबित हुई, क्योंकि इससे अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सका।

    2021–2025: नींव से निर्माण तक
    18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, जिसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जमीन पर वास्तविक गति पकड़ी। शिलान्यास के तुरंत बाद 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के अलग-अलग पैकेजों में निर्माण कार्य शुरू किया गया। नतीजतन, जहां पहले ऐसी मेगा परियोजनाएं वर्षों तक खिंच जाती थीं, वहीं इस रणनीतिक योजना के कारण गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और यह प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने लगा।

    2026: सपना बना हकीकत
    ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और अंतिम तकनीकी जांच पूरी होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस परियोजना का 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया था, उसी का उद्घाटन भी उनके कर-कमलों से संपन्न हुआ, जो समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 

    चुनौतियां आईं, लेकिन रुकी नहीं रफ्तार
    भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन, कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और जटिल तकनीकी कार्यों जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कभी थमा नहीं। लगभग एक लाख किसानों से भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी मुआवजा और डीबीटी के माध्यम से तेज और विवाद-मुक्त बनाया गया, वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए अलाइनमेंट को संतुलित ढंग से विकसित किया गया। कोविड काल में श्रमिकों और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भी स्थानीय संसाधनों के उपयोग और चरणबद्ध निर्माण रणनीति से कार्य निरंतर चलता रहा।

    सीएम योगी की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता रही निर्णायक
    इस पूरे प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता निर्णायक रही। उन्होंने नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से हर चरण की प्रगति पर नजर रखी, जबकि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति दी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल चुनौतियों को पार करता हुआ आगे बढ़ा, बल्कि तय समयसीमा में पूरा होकर प्रभावी प्रशासन और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण भी बना।