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  • लखनऊ में जाम का समाधान, तेलीबाग में 4 लेन फ्लाईओवर को मिली मंजूरी

    लखनऊ में जाम का समाधान, तेलीबाग में 4 लेन फ्लाईओवर को मिली मंजूरी

    लखनऊ
    यूपी की राजधानी लखनऊ में तेलीबाग चौराहे पर रोजाना जाम झेलने वालों को अब राहत मिलने वाली है। यहां चार लेन वाले 858.06 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनने जा रहा है। इस फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इसे 145.99 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। फ्लाईओवर बन जाने से पांच लाख से अधिक लोगों को जाम से निजात मिलेगी।

    लखनऊ-रायबरेली मार्ग पर स्थित तेलीबाग चौराहा शहर के व्यस्तम चौराहों में से एक है। यहां पर सुबह और शाम पीक ऑवर में लोगों को भीषण जाम का सामना करना पड़ता है। तीज-त्योहारों में तो चौराहे से वाहनों को निकालने में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के पसीने तक छूट जाते हैं। लोगों को आधा-आधा घंटा तक चौराहे पर ही जाम से जूझना पड़ता है। घंटों जाम में जूझने की वजह से बच्चों को स्कूल और बड़ों को आफिस पहुंचने में देरी होती है। इस समस्या को देखते हुए सरोजनीनगर के विधायक राजेश्वर सिंह ने यहां पर फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन के निर्देश पर सेतु निगम ने इसका खाका तैयार कर अनुमोदन के लिए भेजा। व्यय वित्त समिति की हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। सेतु निगम के अधिकारियों ने बताया कि अब शासन से धनराशि स्वीकृति का इंतजार है।

    आगरा एवं कानपुर से आने वाले वाहन निर्बाध निकल सकेंगे : तेलीबाग चौराहे पर फ्लाईओवर बन जाने से आगरा और कानपुर एक्सप्रेस-वे की तरफ से आने वाले वाहन बिना बाधा के चौराहे से निकल सकेंगे। रायबरेली रोड, आलमबाग रोड पर स्थित और पीजीआई की कॉलोनियों सहित कैंटोनमेंट, वृंदावन योजना से रोजाना आने-जाने वालों को सुविधा हो जाएगी।

    दो साल में मिलने लगेगी फ्लाईओवर की सुविधा
    सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में निर्माण के लिए शासन से धनराशि आवंटित होगी। धनराशि मिलते ही निर्माण कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित करने सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। संभावना है कि डेढ़ से दो साल में लोगों को इस फ्लाईओवर की सुविधा मिलने लगेगी।

    पीजीआई के मरीजों को भी राहत मिलेगी
    कानपुर, आगरा के अलावा शहर में आलमबाग, कृष्णा नगर, कैंटोनमेंट आदि क्षेत्रों से पीजीआई जाने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। कैंटोनमेंट से रायबरेली रोड और आलबाग व पीजीआई रोड से शहीद पथ तक सीधे निर्बाध रूप से वाहनों का आवागमन सुलभ हो सकेगा। प्रस्ताव में निर्माण के दौरान लखनऊ शहर के पालोहरुखेड़ा, इमलिया बाग समेत आसपास के क्षेत्रों से जुड़े यातायात को भी ध्यान में रखा गया है।

  • इंदौर के बड़ा गणपति फ्लाईओवर को मिली रफ्तार, एक साल की देरी के बाद निर्माण शुरू; दिसंबर तक हटेंगी सभी बाधाएं

    इंदौर के बड़ा गणपति फ्लाईओवर को मिली रफ्तार, एक साल की देरी के बाद निर्माण शुरू; दिसंबर तक हटेंगी सभी बाधाएं

    इंदौर
     लंबे समय से बाधाओं में उलझे बड़ा गणपति फ्लाईओवर के निर्माण की राह अगले वर्ष तक ही साफ हो पाएगी। चौराहे पर आ रही सीवरेज और पानी की लाइन को हटाने का काम जारी है। फ्लाईओवर में सबसे बड़ी अड़चन बन रही 500 मीटर लंबी सीवरेज लाइन शिफ्टिंग के लिए अब तक 250 मीटर की नई लाइन डाली जा चुकी है। शेष 250 मीटर लंबी लाइन डालने का काम दिसंबर तक पूरा होगा।

    ऐसे में नए साल से फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा बड़ा गणपति चौराहा पर बनाए जा रहे फ्लाईओवर का निर्माण एक साल से अधिक की देरी के बावजूद शुरू नहीं हो पाया है।

    चौराहे पर आ रही लाइन को हटाने में देरी के कारण सिंहस्थ से पहले फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करना चुनौती होगा। सीवरेज लाइन हटने के बाद चौराहे पर ही 100 से 150 मीटर लंबी पानी की लाइन भी हटाई जाएगी। दोनों लाइनें हटने के बाद ही फ्लाईओवर के फाउंडेशन का काम शुरू किया जा सकेगा।

    बड़ा गणपति चौराहा पर 600 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा फ्लाईओवर बनाया जाना है। यह अंतिम चौराहे की तरफ से शुरू होकर जिंसी की ओर उतरेगा। इसकी लागत करीब 24 करोड़ रुपये है। हालांकि चौराहे पर आ रही ड्रेनेज और पानी की लाइन को हटाने में ही करीब 10 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। आइडीए यह राशि नगर निगम को हस्तांतरित कर चुका है।

    पिलर की डिजाइन में कर रहे बदलाव
    फ्लाईओवर की राह में सिर्फ यूटिलिटी लाइनें ही नहीं, बल्कि मेट्रो का राइट आफ वे भी नई चुनौती बन गया है। राइट आफ वे की चौड़ाई बढ़ने के कारण फ्लाईओवर के पिलर की डिजाइन नए सिरे से तैयार की जा रही है। रिवाइज डिजाइन इसी महीने पूरा होने की उम्मीद है। डिजाइन में बदलाव के कारण करीब 1.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसकी स्वीकृति आइडीए बोर्ड बैठक में दी जा चुकी है।

    करीब एक लाख वाहनों की राह होगी आसान
    आइडीए के सर्वे में बड़ा गणपति चौराहे पर पीक आवर्स में सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव सामने आया है। एयरपोर्ट रोड से आने वाले वाहनों का भी यहां भारी दबाव रहता है। फ्लाईओवर बनने के बाद एक लाख से अधिक वाहनों को रोजाना राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से अटकी परियोजना में अब पहले जमीन के नीचे की बाधाएं हटाई जा रही हैं, उसके बाद ही ऊपर फ्लाईओवर खड़ा करने का काम शुरू होगा।

  • इंदौर के व्यस्त रेडिसन चौराहे पर बनेगा 4-लेन फ्लाईओवर, 60 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी

    इंदौर के व्यस्त रेडिसन चौराहे पर बनेगा 4-लेन फ्लाईओवर, 60 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी

    इंदौर 

     इंदौर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक रेडिसन चौराहे पर अकसर लगे रहने वाले ट्रैफिक जाम के हालात और जबाव को नियंत्रित करने के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने 60 करोड़ रुपए की लागत से 4-लेन का नया फ्लाईओवर प्लान तैयार किया है। इससे चौराहे के ट्रैफिक में 40 से 45 फीसदी तक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अनुमान के मुताबिक, करीब 60 करोड़ रुपए में बनने वाले इस फ्लाईओवर की कुल लंबाई 596 मीटर और चौड़ाई 15 से 16 मीटर होगी। चौराहे पर 70 मीटर चौड़ा स्टील गर्डर (बो-स्ट्रिंग) स्पैन तैयार किया जाएगा। ये फ्लाईओवर एमआर-10 पर विजय नगर से स्टार चौराहे की तरफ जाने वाले रास्ते पर मेट्रो ट्रैक के एक तरफ बनाया जाएगा। मौजूदा समय में रेडिसन चौराहे से रोजाना पौने दो लाख से ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं। भविष्य में ये दबाव और अदिक बढ़ जाएगा। ऐसे में नए प्लान से पीक आवर्स में जाम के हालातों से मुक्ति मिल सकेगी।

    ये है नया ट्रैफिक प्लान

    विजय नगर की तरफ बनने वाली फ्लाईओवर की भुजा मेट्रो ट्रैक के बाईं तरफ रहेगी। चौराहे से करीब 200 मीटर आगे ये मेट्रो ट्रैक के तीन पिलर के बीच से गुजरते हुए मुख्य मार्ग (कैरेज वे) में मिल जाएगा। वहीं, स्टार चौराहे की तरफ वाली भुजा एमआर-10 के सेंटर में उतरकर दो-दो लेन में बंट जाएगी।

    ग्रीन बेल्ट का होगा इस्तेमाल
    सड़क चौड़ीकरण के लिए विजय नगर से रेडिसन की तरफ स्थित 300 मीटर लंबे ग्रीन बेल्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे विजय नगर से खजराना और निपानिया जाने वाले वाहनों को नीचे बनी 3-लेन सड़क से निकाला जा सकेग। जबकि बायपास जाने वाली गाड़ियां ब्रिज के ऊपर से गुजर जाएंगी। ब्रिज के नीचे 10 से 12 मीटर की सड़क भी उपलब्ध रहेगी।

    खास डिजाइन का कारण
    बायपास के साथ साथ एमआर-10 क्रॉसिंग पर एनएचएआई का काम पूरा होने के साथ कुमेड़ी आईएसबीटी के चालू होने से भोपाल मार्ग की बसों के साथ-साथ अन्य वाहनों के कारण रेडिसन पर 20 से 30 फीसदी अतिरिक्त ट्रैफिक बढ़ने की उम्मीद है। खजराना चौराहे के पास मेट्रो स्टेशन की एंट्री-एग्जिट और 11 मीटर ऊंची मेट्रो लाइन की वजह से रिंग रोड के बराबर ब्रिज बनाना संभव नहीं था। वहीं, जमीन के नीचे 1200 एमएम व्यास की मुख्य ड्रेनेज लाइन और गैस पाइपलाइन बिछी है, जिसके चलते एमआर-10 पर अंडरपास निर्माण भी तकनीकी रूप से किया जाना संभव नहीं था। इसलिए इस खास डिजाइन के तहत निर्माण किया जा रहा है।

  • रांची का नया फ्लाईओवर जल्द तैयार, एयरपोर्ट तक सफर होगा आसान

    रांची का नया फ्लाईओवर जल्द तैयार, एयरपोर्ट तक सफर होगा आसान

    रांची
    राजधानीवासियों को नए साल में बड़ी सौगात मिलने वाली है। 224.94 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सिरमटोली-कांटाटोली कनेक्टिंग फ्लाईओवर का निर्माण जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    इसके शुरू होते ही कोकर, कांटाटोली और बहूबाजार की ओर से आने वाले वाहन बिना शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्से में उतरे सीधे मेकान, डोरंडा और एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे। करीब एक वर्ष तक भूमि अधिग्रहण और अन्य बाधाओं के कारण प्रभावित रहा यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब अंतिम चरण में पहुंच गया है।

    पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता बिनोद कच्छप ने बताया कि परियोजना में सबसे बड़ी बाधा बने आर्मी के कुछ क्वार्टर और सिरमटोली सरना स्थल से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो गया है।

    अब निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और विभाग ने दिसंबर तक तक इसे पूरा करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।उम्मीद है कि नए साल में कनेक्टिंग फ्लाईओवर शहरवासियों के खोल दिया जाएगा।

    यह 132.50 मीटर लंबा कनेक्टिंग फ्लाईओवर कांटाटोली और सिरमटोली फ्लाईओवर को आपस में जोड़ेगा। इसके चालू होने के बाद कोकर, लालपुर और कांटाटोली से आने वाले वाहन सीधे मेकान, डोरंडा और एयरपोर्ट की ओर जा सकेंगे। इससे बहूबाजार, सुजाता चौक और सिरमटोली चौक पर जाम का दबाव काफी कम होगा।

    डिजाइन में बदलाव, सिरमटोली सरना स्थल के पास नहीं बनेगा पिलर
    सिरमटोली सरना स्थल की धार्मिक आस्था को देखते हुए फ्लाईओवर के डिजाइन में बदलाव किया गया है। पहले यहां पिलर प्रस्तावित था, लेकिन अब उसकी जगह 55 मीटर लंबा कंपोजिट स्टील गार्डर लगाया जाएगा। यह गार्डर दोनों ओर बने पिलरों पर टिकेगा, जिससे सरना स्थल पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और निर्माण कार्य भी प्रभावित नहीं होगा

    डिजाइन में बदलाव से पहले आइआइटी मुंबई के विशेषज्ञों ने स्थल का निरीक्षण किया। उनकी अनुशंसा पर कंपोजिट स्टील गार्डर लगाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद संशोधित डिजाइन को मंजूरी मिली और अब उसी के अनुसार निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है।

    परियोजना एक नजर में
        कुल लागत : 224.94 करोड़ रुपये
        कनेक्टिंग फ्लाईओवर की लंबाई : 132.50 मीटर
        सरना स्थल के ऊपर : 55 मीटर लंबा कंपोजिट स्टील गार्डर
        लक्ष्य : जनवरी 2027 तक निर्माण पूरा