Tag: Floods wreak

  • बिहार में बाढ़ से हालात गंभीर, गंडक-बागमती के बढ़े जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

    बिहार में बाढ़ से हालात गंभीर, गंडक-बागमती के बढ़े जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

    पटना
    बिहार के कई जिले बाढ़ का कहर झेल रहे हैं। खासकर गंडक नदी ने बड़ी तबाही ला दी है। अब मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने वाली तीनों प्रमुख नदियों का जलस्तर चिंताजनक बना हुआ है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा आज मंगलवार सुबह 6 बजे जारी दैनिक जलस्तर एवं बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़े के अनुसार, गंडक नदी रेवाघाट में खतरे के निशान पर पहुंच गई है, जबकि बागमती नदी दो स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है।

    रेवाघाट (गंडक) – खतरे के निशान पर, बढ़ोतरी जारी
    गंडक नदी का उच्चतम जलस्तर 55.46 मीटर (वर्ष 2020) है। इसका खतरे का निशान 54.41 मीटर है। आज सुबह 6 बजे यह ठीक 54.41 मीटर पर पहुंच गई है और बढ़ने की प्रवृत्ति में है। यानी अगले कुछ घंटों में यह लाल निशान को पार कर जाएगी। इससे साहेबगंज और पारू प्रखंड में चिंता की स्थिति बन रही है।

    कटौझा (बागमती) – 1.30 मीटर ऊपर, पर अब घट रही
    बागमती नदी का कटौझा में खतरे का निशान 55.00 मीटर है, जबकि आज का जलस्तर 56.30 मीटर है। यह खतरे से 1.30 मीटर ऊपर है। हालांकि राहत की बात है कि इसकी प्रवृत्ति घटने की है। उच्चतम स्तर 58.34 मीटर (2024) से अभी नीचे है।

    बेनीबाद (बागमती) – 1.24 मीटर ऊपर, स्थिर
    बेनीबाद में बागमती का खतरे का निशान 48.68 मीटर है। आज का स्तर 49.92 मीटर है, जो खतरे से 1.24 मीटर ऊपर है। प्रवृत्ति स्थिर है। इससे कटरा और गायघाट प्रखंड के तटबंध पर दबाव बना हुआ है। इसका सर्वकालिक उच्च स्तर 50.12 मीटर (2025) है।

    सिकंदरपुर (बूढ़ी गंडक) – खतरे से नीचे, पर बढ़ रही
    शहर के बीच से गुजरने वाली बूढ़ी गंडक सिकंदरपुर में खतरे के निशान 52.53 मीटर से नीचे है। आज का स्तर 48.90 मीटर है, लेकिन यह बढ़ने की प्रवृत्ति में है। लगातार हो रहीl बारिश के अब थमने से थोड़ी राहत मिली है। इसका उच्चतम स्तर 54.29 मीटर (1987) रहा है।

    गंडक बराज की क्या है स्थिति
    बता दें कि वाल्मिकीनगर स्थित गंडक बराज पर नदी का जलस्त्राव 13 घंटे तक 5 लाख क्युसेक से अधिक तथा 32 घंटे तक 4 लाख क्युसेक से अधिक बना रहा। दिनांक 26 एवं 27, सितम्बर के बीच बिहार स्थित गंडक नदी के सीमावर्ती जिलों यथा पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण एवं गोपालगंज में भी काफी अधिक वर्षापात हुई है, जिसके कारण गंडक बराज के निम्नप्रवाह में नदी का जलस्तर पूर्व से ही बढ़ा हुआ है। इस बार बराज से प्रवाहित जलस्त्राव कुछ कम रहने के बावजूद नदी द्वारा बगहा गेजस्थल पर 91.25 मीटर का अब तक का नया उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया है, जो पूर्व के उच्चतम जलस्तर 90.90 मीटर (वर्ष 2024) से 0.35 मीटर अधिक है।

    गंडक नदी से प्रवाहित अत्यधिक जलस्त्राव के फलस्वरुप नदी पर निर्मित तटबंधों पर भारी दबाव की स्थिति बनी हुई है तथा कई स्थलों पर सीपेज, पाईपिंग एवं ओवर-टाॅपिंग की समस्या भी उत्पन्न होती रही। अभी तक 169 बिन्दुओं पर हुए सीपेज/पाईपिंग को तत्काल कार्य कराते हुए सुरक्षित किया गया है। गंडक नदी के बढ़े हुए जलस्तर के कारण 28-29, सितम्बर के मध्यरात्रि में, पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत, गंडक नदी के बांयें तट पर निर्मित चम्पारण तटबंध 02 स्थलों पर (1. ग्राम-खैरतवा, प्रखंड-बगहा-1 एवं 2. ग्राम-फुलियाखाड़, प्रखंड-बैरिया) क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश प्रभाग में कुशीनगर जनपद अंतर्गत गंडक नदी के दायें तट पर निर्मित तटबंध एक स्थल पर क्षतिग्रस्त हुआ है।

  • गंगा-गंडक-कोसी के उफान से बिहार बेहाल, 52 लाख लोगों के लिए चल रहीं 1194 सामुदायिक रसोइयां

    गंगा-गंडक-कोसी के उफान से बिहार बेहाल, 52 लाख लोगों के लिए चल रहीं 1194 सामुदायिक रसोइयां

    पटना
    बिहार में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ने के साथ प्रभावित आबादी का आंकड़ा 47 लाख के पार पहुंच गया है। राज्य के 15 जिलों के 88 प्रखंडों और 561 पंचायतों में 47 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

    इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के साथ खाद्यान्न, पशु चारा, दवा एवं अन्य जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौती बढ़ती जा रही है। गंगा, गंडक, कोसी एवं सोन के कारण परेशानी बरकरार है।

    बाढ़ प्रभावितों के लिए सामुदायिक रसोई की संख्या बढ़ाकर 1194 कर दी गई है। इन रसोइयों के माध्यम से करीब 52 लाख लोगों को दो समय का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    सरकार की ओर से जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी प्रभावित परिवार को भोजन की कमी नहीं होनी चाहिए। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) की संख्या और बढ़ाने को भी कहा गया है।

    पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पर बल
    बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में पशुधन भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में हरा और सूखा चारा उपलब्ध कराने के साथ पशुओं के लिए आवश्यक दवाओं की व्यवस्था की जा रही है।

    डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में चारा आपूर्ति की लगातार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    पशुओं में संक्रमण और बीमारी की आशंका को देखते हुए पशु चिकित्सा दलों को भी सक्रिय करने में निगरानी करने को कहा गया है।

    दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने का निर्देश
    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने, प्रभावित आबादी के बीच चिकित्सा दल भेजने और बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

    जलजमाव वाले क्षेत्रों में डायरिया, बुखार, त्वचा रोग और अन्य जलजनित बीमारियों को लेकर विशेष निगरानी की जा रही है।

    राहत सामग्री की आपूर्ति पर नजर
    सरकार ने प्रभावित परिवारों तक राशन और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था को भी मजबूत करने का निर्देश दिया है। जिन इलाकों में सड़क संपर्क बाधित है, वहां नाव समेत अन्य माध्यमों से राहत सामग्री पहुंचाने पर बल है।

    जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए राहत कार्यों में तेजी लाने को कहा गया है।

    बाढ़ प्रभावित जिले
    बक्सर, भोजपुर, पटना, वैशाली, सारण, बेगूसराय, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, भागलपुर, मधेपुरा, समस्तीपुर एवं अरवल है।

  • असम में बाढ़ से हालात गंभीर, 1.47 लाख प्रभावित, टूटे तटबंधों की होगी मरम्मत

    असम में बाढ़ से हालात गंभीर, 1.47 लाख प्रभावित, टूटे तटबंधों की होगी मरम्मत

    असम
    असम में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। हालात गंभीर बने हुए हैं। शनिवार को एक और मौत की वजह से मरने वालों की संख्या 99 तक पहुंच गई है और 1.47 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं। असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) बुलेटिन में कहा गया है कि नवीनतम मौत गोलाघाट जिले से हुई है। इसके साथ ही इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 99 तक पहुंच गई।

    बुलेटिन में कहा गया है कि 12 जिले सोनितपुर, नागांव, गोलाघाट, शिवसागर, होजई, दरांग, जोरहाट, धेमाजी, चराइदेव, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और बिश्वनाथ बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित आबादी की संख्या 1,47,376 थी, गोलाघाट सबसे अधिक प्रभावित था क्योंकि 61,735 लोग बाढ़ की चपेट में थे, इसके बाद शिवसागर (43,492) और जोरहाट (24,283) थे। शुक्रवार को प्रभावित जिलों की संख्या 13 थी और जनसंख्या 1.55 लाख से अधिक थी।

    प्रशासन 53 राहत शिविर संचालित कर रहा था, जिसमें 8,568 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया था। अन्य 41 राहत वितरण केंद्र भी कार्यरत हैं। 10,599.89 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलमग्न रहा। एएसडीएमए बुलेटिन में कहा गया है कि धनसिरी (एस) गोलाघाट और नुमालीगढ़ में और कुशियारा श्रीभूमि में खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है। प्रभावित जिलों से घरों और सड़कों सहित विभिन्न बुनियादी ढांचे को नुकसान की सूचना मिली है।

    'टूटे तटबंधों को ठीक करने के लिए उपाय किए जाएंगे'
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि टूटे हुए तटबंधों की मरम्मत के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य भर में बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दिया। दरांग जिले के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के दौरान नाहरबारी में कुलसी नदी के किनारे टूटे हुए तटबंध का निरीक्षण करते हुए सरमा ने कहा कि तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने के कारण इलाके के लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

    उन्होंने कहा कि सरकार टूटे हुए तटबंधों को और अधिक मजबूती के साथ फिर से बनाने के लिए विशेष उपाय करेगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बाढ़ से प्रभावित सभी परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार जल्द से जल्द जरूरी मदद दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने और प्रभावित इलाकों की हालत देखने के लिए बेंगाबारा का भी दौरा किया। उन्होंने बेंगाबारा गांव के पास नोआ नदी के किनारे टूटे हुए तटबंध का निरीक्षण किया और जारी मरम्मत कार्यों की समीक्षा की। सरमा ने बेंगाबारा गांव में बन रहे आंगनवाड़ी केंद्र और ओटाला एचएस स्कूल में बनाए गए राहत शिविरों का भी दौरा किया और वहां शरण लिए हुए लोगों से बातचीत की।