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  • सुपौल में मत्स्य पालकों के लिए बड़ा अभियान, हर शुक्रवार लगेगा मेगा कैंप; जानें KCC लोन की पूरी जानकारी

    सुपौल में मत्स्य पालकों के लिए बड़ा अभियान, हर शुक्रवार लगेगा मेगा कैंप; जानें KCC लोन की पूरी जानकारी

    सुपौल
    पूंजी के अभाव में मछली पालन का कारोबार बढ़ाने में परेशानी झेल रहे मत्स्य पालकों के लिए राहत की खबर है। मछली पालन के लिए अब बैंक से ऋण लेना आसान हो गया है।

    केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर जिले के मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से जोड़ने के लिए शनिवार से विशेष अभियान शुरू किया गया। अभियान के तहत जिले के 8,900 मत्स्य पालकों को केसीसी का लाभ दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    शनिवार को अभियान की शुरुआत
    शुक्रवार को अवकाश रहने के कारण अभियान की शुरुआत शनिवार को की गई। पहले दिन छातापुर और राघोपुर को छोड़कर शेष नौ प्रखंडों में प्रखंड स्तरीय मेगा कैंप लगाया गया। कैंप में बड़ी संख्या में मत्स्य पालक पहुंचे और केसीसी ऋण के लिए आवेदन जमा किए। आवेदनों को बैंकों के माध्यम से शीघ्र स्वीकृत कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई

    मत्स्य पालकों को बैंक ऋण उपलब्ध कराने के लिए अब प्रत्येक शुक्रवार को प्रखंड स्तर पर मेगा कैंप आयोजित किया जाएगा। शुक्रवार को अवकाश रहने की स्थिति में अगले कार्य दिवस पर कैंप लगेगा। जिला स्तर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी और लीड बैंक मैनेजर को अभियान का संयोजक बनाया गया है। दोनों अधिकारी बैंकों से समन्वय स्थापित कर आवेदनों की स्वीकृति और ऋण वितरण की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

    जिले को 8,900 केसीसी का लक्ष्य मिला
    कैंपों का निरीक्षण करते हुए जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले को 8,900 केसीसी का लक्ष्य मिला है। निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किया जाएगा। उन्होंने मत्स्य पालकों से कैंप में पहुंचकर आवश्यक कागजात के साथ आवेदन करने की अपील की।

    केसीसी के लिए आवेदक को पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, पैन कार्ड या मतदाता पहचान पत्र में से कोई एक देना होगा। इसके अलावा आवासीय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की छायाप्रति, पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और चालू मोबाइल नंबर आवश्यक है। निजी तालाब होने की स्थिति में जमीन की अद्यतन रसीद देनी होगी।

    तीन लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध
    वहीं, किराये के तालाब के लिए स्टांप पेपर पर तैयार लीज एग्रीमेंट प्रस्तुत करना होगा।केसीसी के तहत कृषि एवं संबंधित गतिविधियों के लिए अधिकतम तीन लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। वहीं, केवल मछली पालन के लिए मत्स्य पालकों को बिना किसी गारंटी के दो लाख रुपये तक ऋण देने का प्रविधान है।

    ऋण पर सामान्य ब्याज दर सात प्रतिशत वार्षिक है। समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को ब्याज में तीन प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलती है। इस प्रकार समय पर भुगतान करने पर प्रभावी ब्याज दर चार प्रतिशत वार्षिक रह जाती है।

     जिले में विशेष अभियान की शुरुआत कर दी गई है। मेगा कैंप के माध्यम से 8,900 मत्स्य पालकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर केसीसी का लाभ देने का लक्ष्य है। मछली पालन के लिए आवेदक के पास निजी तालाब या जलाशय होना चाहिए। निजी जमीन नहीं होने की स्थिति में कम से कम सात से 10 वर्ष के एग्रीमेंट पर लिया गया तालाब भी मान्य होगा। – संजय कुमार सिंह, जिला मत्स्य पदाधिकारी

     

  • मछली पालकों के लिए बड़ी खबर, बिहार में 332 बैचों में 10 हजार किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण

    मछली पालकों के लिए बड़ी खबर, बिहार में 332 बैचों में 10 हजार किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण

    पटना
     सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राज्य के 10 हजार किसान मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी है।

    मत्स्य पालकों को यह प्रशिक्षण न सिर्फ राज्य में, बल्कि देश के प्रसिद्ध संस्थानों में दिलाया जाएगा। मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना का उद्देश्य राज्य के मत्स्य किसानों को नवीनतम मात्स्यिकी तकनीकों एवं मत्स्य पालन की आधुनिक विधियों में प्रशिक्षित करना है, जिससे मछली उत्पादन के साथ-साथ उनकी वार्षिक आय में वृद्धि हो सके।

    यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क है। निबंधन शुल्क के अलावा लाभार्थियों से कोई अन्य राशि नहीं ली जाती है। इस प्रशिक्षण से यह लाभ हो रहा है कि राज्य के मत्स्य उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है।

    व्यवसाय से जुड़े किसानों की जिंदगी में आर्थिक समृद्धि आ रही है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 9,685 (लगभग 10 हजार) किसानों को मछली पालन का निशुल्क प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है।

    इसके लिए मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस कार्यक्रम के तहत राज्य के अंदर और बाहर स्थित प्रतिष्ठित मात्स्यिकी संस्थानों में कुल 332 बैचों में दस हजार मत्स्य कृषकों/मछुआरों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

    70 हजार से अधिक को दिया गया प्रशिक्षण
    मछली उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए राज्य में अब तक 70,221 मछली पालकों को राज्य के भीतर एवं बाहर स्थित मत्स्य संस्थानों में निशुल्क आधुनिक प्रशिक्षण दिया गया है।

    इनमें 52,485 मछली पालकों को राज्य के भीतर तथा 17,726 मछली पालकों को राज्य के बाहर के संस्थानों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।

    भ्रमण-दर्शन कार्यक्रम के तहत अब तक 47,409 से अधिक मछली पालकों को राज्य में विकसित आर्द्रभूमि एवं बायोफ्लाक इकाइयों की निर्माण प्रक्रिया से अवगत कराने के लिए निशुल्क कराया गया है।

    राज्य ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में पाई बड़ी सफलता
    बिहार में मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल मछली उत्पादन 9.69 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 10.28 लाख टन हो गया।

    सरकार के प्रयासों से 8,262 हेक्टेयर में नए जल क्षेत्र का सृजन, 4,305 हेक्टर में नया तालाब का निर्माण, 2,380 हेक्टेयर चौर भूमि में आधुनिक तालाबों का निर्माण और 5,301 ट्यूबवेल का अधिष्ठापन किया गया है।