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  • CG Farmers News: किसानों के लिए नया नियम लागू, अब खाद लेने के लिए मोबाइल ऐप जरूरी!

    CG Farmers News: किसानों के लिए नया नियम लागू, अब खाद लेने के लिए मोबाइल ऐप जरूरी!

    दुर्ग.

    किसानों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग उर्वरक विक्रय की नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर रहा है।

    इस व्यवस्था के तहत किसानों को अब खरीफ और रबी सीजन की खेती के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की खरीदी करनी होगी। रबी सीजन में किसानो को टोकन के माध्यम से खाद मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, मोबाइल ऐप आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली को पहले गरियाबंद एवं बीजापुर जिलों में मॉडल के रूप में संचालित किया गया था। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब रबी सीजन 2026-27 से इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है। यह किसानों के लिए नई व्यवस्था होगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण को सुव्यवस्थित करना, कालाबाजारी पर नियंत्रण रखना तथा किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में होने वाली अनावश्यक परेशानियों को कम करना है।

    नई प्रणाली के माध्यम से पीओएस मशीन से अनिवार्य विक्रय, उपलब्ध स्टाक का रियल टाइम मिलान, पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं आधार लिंकिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे उर्वरकों की अग्रिम मांग का आकलन करने, भंडारण एवं वितरण की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने तथा अमानक उर्वरकों और कालाबाजारी पर निगरानी मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

    टोकन के लिए करना होगा यह प्रक्रिया
    नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से उर्वरक खरीदी की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। जिन किसानों के पास स्वयं का मोबाइल फोन नहीं है, वे परिवार के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एफएफएस फर्टिलाइजर ऐप इंस्टाल कर आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद टोकन अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से नजदीकी निर्धारित केंद्र से अनुशंसित मात्रा में उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।

  • खाद-बीज कारोबार में गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त, 3 गोदाम सील; तीन पर FIR

    खाद-बीज कारोबार में गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त, 3 गोदाम सील; तीन पर FIR

    रायपुर.

    किसानों तक पहुंचने वाले खाद, बीज और कीटनाशक सामाग्री में अनियमितता पाए जाने पर खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. बिना प्राधिकार के कारोबार किया जा रहा था. वहीं कुछ संस्थानों में एक्सपायरी कीटनाशक मिली.

    औचक निरीक्षण के दौरान गोदामों से भंडारण संबंधी बॉक्स, स्टीकर और सील जैसी सामान बरामद किया गया है. कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है. जांच के बाद तीन व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. वहीं 9 संस्थानों के विक्रय पर प्रतिबंध और 3 गोदाम को सील कर दिया गया है. वहीं एक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है. राज्य और जिला स्तरीय संयुक्त जांच दल ने प्रतिष्ठानों के औचक निरीक्षण किया. रायपुर जिले में मेसर्स पुलकित बायोफर्टिलाइजर, हरियाणा और रविन्द्र कुमार मित्तल को बिना प्राधिकार पत्र के बीज और उर्वरक का व्यापार किए जाने पर एफआईआर दर्ज की गई.

    इसके अलावा एकॉन क्रॉप साइंसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एमिरॉन ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, डेक्सीस एग्रो सॉल्यूशन, भास्कर कृषि केंद्र, अभनपुर कृषि केंद्र और सोपन एग्री केयर प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य प्रतिष्ठानों पर भी अलग-अलग अनियमितताओं के चलते बिक्री प्रतिबंध और नोटिस की कार्रवाई की गई है. वहीं निधि मार्केटिंग सीएंडएफ, उरकुरा से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों में कृषि उत्पादों के भंडारण में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस जारी किया गया.

    गोदाम से बॉक्स-स्टीकर बरामद
    जांच के दौरान भंडारण से संबंधित बॉक्स, स्टीकर और सील जैसी सामग्री मिलने पर गोदाम सील कर दिया गया. इसके अलावा निरीक्षण में सहयोग नहीं करने पर आरडी इंटरप्राइजेस और डीसी इंटरप्राइजेस के विक्रय केंद्र भी सील किए गए हैं. उप संचालक कृषि ने बताया कि स्पष्टीकरण पर संबंधितों द्वारा पक्ष रखे जाने के बाद उर्वरक में अनियमितता पर उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 एंव आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और कीटनाशी उत्पादों में अनियमितता पर कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियम 1971 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.

  • खाद के लिए दुकानों के चक्कर खत्म, मोबाइल ऐप से होगी बुकिंग; बटाईदार भी उठा सकेंगे लाभ

    खाद के लिए दुकानों के चक्कर खत्म, मोबाइल ऐप से होगी बुकिंग; बटाईदार भी उठा सकेंगे लाभ

    पूर्णिया
     किसानों को अब खाद के लिए उर्वरक दुकानों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। किसान अब ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के नाम से डिजिटल प्रणाली विकसित किया गया है। इसके तहत किसान घर बैठे मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकेंगे।

    इसके लिए किसान की फार्मर आईडी होना अनिवार्य है। मोबाइल ऐप पर आधार संख्या और ओटीपी के माध्यम से किसान की पहचान का सत्यापन होगा। ऐप पर किसान अपने खेत और फसल का विवरण दर्ज कर आसानी से मोबाइल से ही खाद की बुकिंग कर रहे हैं।

    बुकिंग के बाद मोबाइल पर मिलने वाले क्यूआर कोड को अधिकृत विक्रेता के पास स्कैन कराने पर तुरंत खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

    कृषि कर्मियों को दी गई है जागरूकता की जिम्मेदारी
    अधिकारियों का मानना है कि इससे खाद के वितरण में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था को लेकर किसानों को जानकारी देने की जिम्मेदारी पंचायत एवं प्रखंड स्तर के कृषि कर्मियों को दी गई है।

    किसान सलाहकार, कृषि फसल की जानकारी ऐप में दर्ज करेंगे तो उसके अनुसार उर्वरक की उचित मात्रा ऐप पर दिखेगी।

    जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, उन्हें पहले इसे बनवाना होगा। फार्मर आईडी बनने के बाद किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे।

    कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल बुकिंग शुरू होने के बाद खाद की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी पहले से अधिक प्रभावी होगी।

    बटाइदार भी कर सकेंगे खाद का उठाव
    जिन किसानों की जमीन उनके नाम पर दर्ज है, वे आसानी से इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे। जिन किसानों के पूर्वजों के नाम जमीन दर्ज है या जिनका नाम जमाबंदी में नहीं है, उनके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्मर आईडी बनाने की व्यवस्था की गई है।

    संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन समेत जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी नहीं बनी है, जो बटाईदार हैं या फिर सामुदायिक, मंदिर, सरकारी अथवा संस्थागत जमीन पर खेती करते हैं, उनके लिए भी इस निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद लेने की पूरी व्यवस्था की गई है।

    विभिन्न प्रकार की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

    जिले में ऐप के माध्यम से एक सितंबर से खाद की बुकिंग शुरू हो गई है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार अनुशंसित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और पूरी बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। जिले में अब तक 4,846 किसानों ने ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग की है जिन्हें नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। – विजय प्रकाश, जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्णिया

     

  • खेत बचाओ अभियान में बड़ा बदलाव, QR कोड से खाद खरीद की सुविधा; कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश

    खेत बचाओ अभियान में बड़ा बदलाव, QR कोड से खाद खरीद की सुविधा; कृषि मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश

    पटना
    खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ अभियान किसान हित में विभाग की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी, सुव्यवस्थित, जवाबदेह और किसान-केंद्रित बनाना है। ये बातें सोमवार को कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहीं। वे मीठापुर स्थित कृषि भवन सभागार में विभागीय अधिकारियों के कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 

    उन्होंने कहा कि किसान को अब क्यूआर कोड उपलब्ध कराया जाएगा। यह क्यूआर कोड तीन दिनों तक मान्य रहेगा। इसके माध्यम से किसान उसमें अंकित अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर उर्वरक खरीद सकेंगे।

    प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना आवश्यक 
    उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक समय पर और सुगमता से उपलब्ध कराना कृषि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उर्वरक की उपलब्धता, वितरण और बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना आवश्यक है। 

    उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल और किसान-केंद्रित बनाने के लिए विभाग ने एफएसएएस (उर्वरक बिक्री आवेदन प्रणाली का ढांचा) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की है। आइएफएमएस और एग्रीस्टैक के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया गया है। 

    शिकायत पर तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश
    कृषि मंत्री ने निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री, कालाबाजारी, जमाखोरी या अन्य अनियमितता की शिकायत पर तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य किसान की सुविधा बढ़ाना है, उसकी परेशानी नहीं। किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक समस्या का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

     

  • खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम? बिहार में Farmer ID आधारित उर्वरक बिक्री का विस्तार

    खाद की कालाबाजारी पर लगेगी लगाम? बिहार में Farmer ID आधारित उर्वरक बिक्री का विस्तार

    पटना
    उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए 'खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज एवं खाद सुलभ कराओ' विषय पर सोमवार को कृषि भवन सभागार, मीठापुर, पटना में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

    कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने फ्रेमवर्क फार फर्टिलाइजर एप्लीकेशन सिस्टम (एफएफएएस) के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की गई है।

    आईएफएमएस एवं एग्रीस्टैक के एकीकरण से उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने का प्रविधान किया गया है।

    इस व्यवस्था के अंतर्गत राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वैशाली एवं शेखपुरा जिलों में फार्मर आईडी के आधार पर उर्वरक बिक्री की शुरुआत की गई।

    इसके सफल क्रियान्वयन के बाद जहानाबाद, अरवल, शिवहर, लखीसराय एवं किशनगंज जिलों में भी इसे लागू किया गया है।

    अधिकारियों को दी जाएगी ट्रेनिंग
    सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग के संबंधित पदाधिकारियों को उर्वरक बिक्री की डिजिटल एवं फार्मर आईडी आधारित व्यवस्था, उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था तथा किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं बीज सुनिश्चित करने से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

    कृषि मंत्री ने कहा कि खाद की बिक्री व्यवस्था को डिजिटल बनाने का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि किसान हित में पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

    सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी आवश्यकता के समय आवश्यक कृषि इनपुट आसानी से उपलब्ध हो और उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

    उन्होंने बताया कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं बीज समय पर और सुगमता से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।

  • खाद की किल्लत और जमाखोरी रोकने की कवायद, यूरिया 5 तो DAP के 3 बैग प्रति हेक्टेयर का प्रस्ताव

    खाद की किल्लत और जमाखोरी रोकने की कवायद, यूरिया 5 तो DAP के 3 बैग प्रति हेक्टेयर का प्रस्ताव

    जयपुर
     यूरिया और डीएपी की उपलब्धता व वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कृषि आयुक्तालय राजस्थान ने उर्वरक बिक्री की सीमा तय करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। कृषि आयुक्तालय राजस्थान जयपुर की ओर से 25 अगस्त को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजे पत्र में उर्वरक बिक्री का एक फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया गया है।

    प्रस्ताव के अनुसार यूरिया के लिए प्रति हेक्टेयर 5 बैग व प्रति एकड़ 2 बैग की सीमा सुझाई गई है। वहीं, डीएपी के लिए प्रति हेक्टेयर 3 बैग प्रति फसल सीजन की सीमा प्रस्तावित है। प्रस्ताव लागू होने पर किसानों को निर्धारित मात्रा के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।

    जमाखोरी पर रोक और समान वितरण पर जोर
    प्रस्ताव का उद्देश्य किसानों के बीच उर्वरकों का समान वितरण करना और एक ही किसान की ओर से अधिक मात्रा में खरीद पर रोक लगाना है। जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर किसानों को लंबी कतारों में लगकर खाद लेना पड़ता है।

    वहीं, कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंकाएं भी सामने आती रही हैं । अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव मंजूर होने पर आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ कालाबाजारी और कृत्रिम कमी पर नियंत्रण में भी मदद मिलने की उम्मीद है ।

    रबी सीजन में बढ़ेगी खाद की मांग
    खरीफ फसल की कटाई के बाद रबी की बुवाई के दौरान किसानों को पहले डीएपी और इसके बाद यूरिया की मांग बढ़ने की संभावना है। बस्सी, चाकसू, सांगानेर और जमवारामगढ़ क्षेत्रों में खेती का बड़ा दायरा है। रबी सीजन में इन क्षेत्रों में दोनों उर्वरकों की मांग बढ़ती है।

    मांग और आपूर्ति में असंतुलन के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रस्ताव लागू होने पर उर्वरक वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है।

    इनका कहना है
    उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण को सुव्यवस्थित करने के लिए यह प्रस्ताव भेजा गया है। इससे किसानों को समय पर और उचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। अब निर्णय केंद्र सरकार पर निर्भर है।
        विनोद कुमार रेगेरा, संयुक्त निदेशक कृषि (इनपुट)

  • खाद की अवैध सप्लाई का खुलासा, चालक समेत 3 पर केस; MP भेजी जा रही थी DAP

    खाद की अवैध सप्लाई का खुलासा, चालक समेत 3 पर केस; MP भेजी जा रही थी DAP

    सवाई माधोपुर
     कृषि विभाग की निगरानी और पुलिस नाकाबंदी के बावजूद जिले से खाद की खेपें मध्यप्रदेश तक पहुंचने का मामला सामने आया है। शनिवार सुबह छाण पुलिस चौकी पर तिरपाल से ढकी एक पिकअप को रोककर जांच की गई। पिकअप में करीब 100 कट्टे डीएपी मिले। कृषि विभाग की जांच में खाद के अवैध रूप से परिवहन और कालाबाजारी किए जाने की बात सामने आई। मामले में पिकअप चालक सहित तीन लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

    कृषि अधिकारियों और पुलिस के अनुसार, शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे छाण चौकी पर तिरपाल से ढकी पिकअप को रोककर जांच की गई। तलाशी में पिकअप में 100 बैग डीएपी मिले। पूछताछ में चालक देवकीनंदन माली निवासी खंडार ने खाद को मध्यप्रदेश के जावदेश्वर गांव निवासी रामरूप मीणा के यहां ले जाने की जानकारी दी। कृषि विभाग की जांच में यह खाद सवाई माधोपुर शहर स्थित खाद विक्रेता कमलेश की दुकान से खरीदी जाना सामने आया।

    कृषि अधिकारी ने मामले की जांच की
    सूचना पर कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सहायक निदेशक खेमराज मीणा के निर्देशन में कृषि अधिकारी प्रशिक्षण ताराचंद महावर ने मामले की जांच की। जब्त खाद को क्रय-विक्रय सहकारी समिति, छाण के सुपुर्द किया गया। विभाग की ओर से पिकअप चालक देवकीनंदन माली, जावदेश्वर निवासी रामरूप मीणा तथा शहर स्थित खाद विक्रेता कमलेश के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया गया।

    पहले भी पकड़ी जा चुकी खेप
    खाद के अवैध परिवहन का यह पहला मामला नहीं है। गत महीने बहरावंडा खुर्द चौकी पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक पिकअप को पकड़ा था। इसमें भी करीब 100 कट्टे यूरिया मिले थे। प्रारंभिक जांच में खाद को मध्यप्रदेश के सोईकलां क्षेत्र में सप्लाई के लिए ले जाने की बात सामने आई थी। इसके अलावा करीब दो-तीन महीने पहले टोंक जिले के बनेठा थाना क्षेत्र में पकड़ी गई पिकअप में भी अवैध खाद मिली थी। कार्रवाई के बाद मामला कृषि विभाग तक पहुंचा था।

    क्या है किसानों का आरोप
    कृषि विभाग के कार्यालयों व चौकियों को चकमा देकर निकलने का आरोप किसानों का आरोप है कि खाद से भरी पिकअप और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तिरपाल से ढककर दिनदहाड़े जिले से बाहर निकलती है। ये वाहन कृषि विभाग कार्यालय के सामने व समीप से गुजरने के साथ पुलिस चौकियों और थानों को चकमा देकर मध्यप्रदेश सहित आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। किसानों का कहना है कि कुछ खाद की खेपें निवाई, जयपुर और कोटा क्षेत्र से लाकर सवाई माधोपुर के रास्ते मध्यप्रदेश तथा अन्य क्षेत्रों में भेजी जाती है।

    महंगे दामों से बढ़ रही खेती की लागत
    खाद की कालाबाजारी का सीधा असर किसानों पर पड़ने का आरोप है। किसानों के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने और महंगे दामों पर खरीद करने से खेती की लागत बढ़ रही है। किसान संगठनों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से खरीफ फसल की तैयारी भी प्रभावित हो रही है।

    इनका कहना है
    छाण चौकी पुलिस ने तिरपाल से ढकी पिकअप में अवैध रूप से ले जाई जा रही डीएपी खाद की खेप पकड़ी थी। सूचना पर कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जब्त खाद को ग्राम सेवा सहकारी समिति के सुपुर्द किया गया है। पिकअप चालक, शहर स्थित दुकान मालिक तथा मध्यप्रदेश के जावदेश्वर निवासी रामरूप के खिलाफ नियमानुसार मामला दर्ज कराया गया है।
    -ताराचंद महावर, कृषि अधिकारी प्रशिक्षण एवं कृषि विस्तार, सवाईमाधोपुर