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  • 25 महिला पुलिसकर्मियों का कमांडो मिशन शुरू, मानेसर में 12 हफ्ते की कड़ी ट्रेनिंग

    25 महिला पुलिसकर्मियों का कमांडो मिशन शुरू, मानेसर में 12 हफ्ते की कड़ी ट्रेनिंग

    जयपुर
    राजस्थान पुलिस के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां प्रदेश की बेटियां अब आतंकवाद और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्पेशल 'ब्लैक कैट' कमांडो का रूप धारण करेंगी। राजस्थान पुलिस के आरएसी एवं एमबीसी कैडर से चयनित 25 महिला पुलिस कार्मिकों को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के मानेसर हरियाणा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में 12 सप्ताह के अति-कठिन और गहन कमांडो प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। 24 अगस्त से शुरू हो रहा ये यह विशेष प्रशिक्षण 13 नवंबर तक संचालित होगा। इस दौरान महिला कार्मिकों को अत्याधुनिक हथियार तकनीक, अर्बन काउंटर टेररिज्म, काउंटर-आईईडी और जीरो एरर की रणनीति पर तैयार किया जाएगा।

    राजधानी जयपुर स्थित पांचवीं बटालियन आरएसी (घाटगेट) में आयोजित विदाई समारोह के दौरान सभी चयनित महिला जवानों का उत्साह चरम पर दिखा। इस ऐतिहासिक ट्रेनिंग सेशन के लिए रवाना होने से पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने महिला जवानों का हौसला बढ़ाया और उन्हें इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पार करने का मंत्र दिया।

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    जीरो एरर की नीति और कड़ा अनुशासन : ADG रूपेंद्र सिंह
    महिला कार्मिकों को मानेसर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करने से पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (आर्म्स बटालियन्स, राजस्थान) रूपेंद्र सिंह ने जवानों को विस्तृत रूप से ब्रीफ किया। एडीजी सिंह ने एनएसजी कमांडो प्रशिक्षण की राष्ट्रीय महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महिला जवानों को प्रेरित किया।

    उन्होंने कहा, 'कमांडो प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जवानों को ऐसी अद्वितीय दक्षता और क्षमता प्रदान करना है, जिससे वे किसी भी प्रकार की चुनौतीपूर्ण या विषम परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी क्षमता और आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकें।'

    उन्होंने कहा, 'एनएसजी का मूल मंत्र 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है और आपको प्रशिक्षण के दौरान कड़े अनुशासन, अत्याधुनिक हथियार तकनीक और जीरो एरर की नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है।'

    जयपुर से मानेसर के लिए रवाना
    समारोह के बाद एडीजी रूपेंद्र सिंह ने सभी 25 महिला पुलिसकर्मियों को विशेष राजकीय वाहन से मानेसर स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण केंद्र के लिए रवाना किया। इस अवसर पर उप महानिरीक्षक पुलिस (आरएसी) विनीत बंसल, चतुर्थ बटालियन एवं पांचवीं बटालियन आरएसी के कमांडेंट सहित पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    12 सप्ताह की इस स्पेशल ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ये महिला कार्मिक राजस्थान पुलिस की पहली समर्पित महिला कमांडो यूनिट का हिस्सा बनेंगी, जिन्हें राज्य में वीआईपी सुरक्षा, एंटी-टेरर ऑपरेशन्स और आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन्स में तैनात किया जाएगा।

  • बस स्टॉप से घर तक सुरक्षा कवच: दिल्ली में महिला यात्रियों के लिए नई योजना पर काम

    बस स्टॉप से घर तक सुरक्षा कवच: दिल्ली में महिला यात्रियों के लिए नई योजना पर काम

    नई दिल्ली

     जल्द ही डीटीसी बसों में हथियारबंद महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती देखने को मिल सकती है। महिलाओं के रोजाना सफर को सुरक्षित बनाने के मकसद से ये प्लानिंग चल रही है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों को इस तैनाती के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा पर हुई एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिया गया। इसमें परिवहन आयुक्त, DTC के प्रबंध निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

    डीटीसी बसों में महिला सुरक्षा पर अहम फैसला
    एक अधिकारी ने कहा, 'बसों में हथियारबंद महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के तौर-तरीके सरकार, DTC और दिल्ली पुलिस के साथ होने वाली अगली बैठकों में तय किए जाएंगे। इसका मकसद महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाना है। रूपरेखा को अंतिम रूप दिए जाने के बाद और स्पष्टता आएगी।'

    सरकार की प्लानिंग जान लीजिए
    CCTV कैमरों, पैनिक बटन, बस मार्शल और 'सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड' पहल के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए, उपराज्यपाल ने न केवल यात्रा के दौरान बल्कि बस स्टॉप, डिपो या स्टेशनों पर उतरने के बाद महिलाओं के लिए 'फर्स्ट और लास्ट माइल' (घर से बस स्टॉप तक और बस स्टॉप से गंतव्य तक) की सुरक्षा को भी मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

    दिल्ली LG ने अफसरों को दिए ये खास निर्देश
    एक अधिकारी ने कहा कि उपराज्यपाल ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि महिला यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा घर से गंतव्य तक सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने दिल्ली परिवहन विभाग को बसों में हथियारबंद महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के प्रस्ताव को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। उपराज्यपाल ने सार्वजनिक परिवहन संचालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। मौजूदा हालात में सिस्टम में 1002 महिला कंडक्टर और 77 महिला ड्राइवर हैं। उन्होंने अधिकारियों की भर्ती को और बढ़ाने का निर्देश दिया।

    डीटीसी बसों में है महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा
    बैठक के दौरान साझा किए गए आंकड़ों से पता चला कि महिलाओं ने 2025-26 (फरवरी तक) में सरकारी बसों में 56.2 करोड़ से अधिक यात्राएं कीं और मुफ्त यात्रा योजना का फायदा उठाया। दिल्ली के सार्वजनिक बस बेड़े में लगभग 6100 बसें हैं, जो रोजाना औसतन 24.3 लाख यात्रियों को ले जाती हैं। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, होम गार्ड से लिए गए 2,983 बस मार्शल पहले ही तैनात किए जा चुके हैं।

    'सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड' के क्रियान्वयन पर LG ने लिया संज्ञान
    उपराज्यपाल ने 'सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड' के सफल क्रियान्वयन का संज्ञान लिया और महिलाओं के लिए निर्बाध यात्रा को सक्षम करने के लिए इसे सार्वजनिक परिवहन के सभी साधनों में एकीकृत करने का आह्वान किया। उन्होंने Uber, Ola, Bharat Taxi और Rapido जैसे प्राइवेट एग्रीगेटर्स के जरिए सिर्फ महिलाओं के लिए कारपूलिंग के विकल्प का भी प्रस्ताव रखा, ताकि महिला यात्रियों को अकेले सफर न करना पड़े, भले ही ड्राइवर पुरुष ही क्यों न हो।