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  • चार की मौके पर मौत, उज्जैन से लौट रही कार ट्रक में घुसी

    चार की मौके पर मौत, उज्जैन से लौट रही कार ट्रक में घुसी

    कोटा.

    कोटा जिले के चेचट क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर रविवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसे में कार सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सभी मृतक उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी थे और मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर लौट रहे थे।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तेज रफ्तार कार पीछे से आगे चल रहे एक ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चारों लोगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई।
    सूचना मिलते ही चेचट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया। फिलहाल मृतकों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। पुलिस ने ट्रक को हिरासत में लेकर चालक से पूछताछ शुरू कर दी है।

    चेचट पुलिस मृतकों की पहचान के प्रयास में जुटी हुई है तथा परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है। दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है।

  • अनिल विज से है मरीज का खास रिश्ता, हरियाणा में डाक्टरों ने पेशेंट के एक साथ डाले 4 स्टेंट

    अनिल विज से है मरीज का खास रिश्ता, हरियाणा में डाक्टरों ने पेशेंट के एक साथ डाले 4 स्टेंट

    अंबाला.

    अंबाला कैंट में बना हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज के ड्रीम प्रोजेक्ट आधुनिक सुविधाओं से भरा नागरिक अस्पताल अंबाला कैंट अपने अच्छे इलाज और नई नई सर्जरी के लिए जाना जाता है। वही अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में बना हार्ट सेंटर ने एक और बड़ा कमाल कर दिखाया है जहां एक साथ एक पेशेंट के 4 स्टेंट डाले गए है, ये पेशेंट खुद हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने भाई यानी राजिंदर विज है। 

    इस सर्जरी को करने वाले डॉक्टर डॉक्टर प्रताप कुमार ने बताया कि यू तो वो केरला में काम करते है लेकिन कई साल पहले अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में कार्यकर्ता थे । अब उन्होंने एक विशेष उबलब्धी हासिल की है जिसमें राजिंदर विज के दिल के आस पास कैल्शियम भरा हुआ था जिसके लिए लगभग 3.5 घंटे की सर्जरी में 4 स्टेंट डाले गए ,जबकि हरियाणा में ऐसा कभी नहीं हुआ और अच्छी बात तो ये रही कि सर्जरी के कुछ ही घंटों के बाद राजिंदर विज ठीक हो गए और रात के समय ही डिस्चार्ज होकर अपने घर चले गए।

    इस बारे में बताते हुए राजिंदर विज ने बताया कि उनके दिल के आस पास कैल्शियम चला गया था जो बहुत खतरनाक होता है। डॉक्टर ने उन्हें बायपास की सलाह दी थी लेकिन वे बायपास सर्जरी नहीं करवाना चाहते थे और जब उन्होंने इस बारे में डॉक्टर प्रताप से बात की तो उन्होंने एंजियोग्राफी की बात कही और एक समय निर्धारित करके इलाज की बात कही। जिसके बाद कल उन्होंने अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में बने हार्ट सेंटर में अपने एंजियोग्राफी कारवाई और डॉक्टर ने 4 स्टेंट डाले जिसके बाद वे कुछ ही घंटों में पहले की तरह नॉर्मल हो गए।

  • मुख्यमंत्री सैनी ने महात्मा फुले और सावित्रीबाई के संघर्षों को किया याद, ‘सामाजिक समानता सबसे बड़ा धर्म’

    मुख्यमंत्री सैनी ने महात्मा फुले और सावित्रीबाई के संघर्षों को किया याद, ‘सामाजिक समानता सबसे बड़ा धर्म’

    नई दिल्ली.

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा महात्मा ज्याेतिबा फुले ने समाज में फैली विषमताओं से लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा था शिक्षा व्यक्ति के जीवन के लिए बेहद जरूरी है। इससे बड़ा कोई अधिकार नहीं है।जिसने यह अधिकार हासिल कर लिया उसे जीवन में असफलता का सामना नहीं पड़ेगा।

    शिक्षा के सामाजिक समानता को ज्योतिबा फुले ने सबसे बड़ा धर्म बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों को जब समाज में पढ़ाना सही माना जाता तब माता सावित्री बाई फुले ने अंधकार में ज्ञान का दीप जलाया था। दोनों ने मिलकर समाज कुरीतियों के अंधकार को दूर करने का काम किया। मुख्यमंत्री दिल्ली की मंगोलपुरी में सैनी समाज की ओर से रविवार की सुबह आयोजित मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप शामिल हुए थे।

  • राज्यसभा चुनाव की मिस्ट्री: आरजेडी की शक्ति हुई आधी, लेफ्ट-उद्धव-पवार के पावर में कमी

    राज्यसभा चुनाव की मिस्ट्री: आरजेडी की शक्ति हुई आधी, लेफ्ट-उद्धव-पवार के पावर में कमी

     नई दिल्ली
       
    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव है, जिसे लेकर राजनीतिक दांव पेच सेट किए जाने लगे हैं. कांग्रेस और बीजेपी को पहले से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं तो क्षेत्रीय दलों के लिए यह चुनाव काफी मुश्किल भरा लग रहा है. लालू यादव की आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक सीट मिलती नहीं दिख रही है. वहीं बीआरएस और लेफ्ट का पूरी तरह सफाया हो रहा है. 

    महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, बिहार की 5, पश्चिम बंगाल की 5, ओडिशा की 4 और असम की 3, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की 2-2 और हिमाचल प्रदेश की 1 राज्यसभा सीट के​ लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं. इन 37 राज्यसभा सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 और कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के पास 18 सीटें हैं. इसके अलावा 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं. हालांकि, इन सीटों के लिए अब जो चुनाव हो रहे हैं, उनमें सियासी गणित बदले हुए हैं, जिसमें एनडीए को लाभ तो इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को सियासी नुकसान हो सकता है. 

    कांग्रेस-बीजेपी को फायदा तो घाटा किसे? 

    बिहार से लेकर महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना विधानसभा की स्थिति पहले से काफी बदल गई है, जिसका सियासी असर सीधे तौर पर राज्यसभा के चुनाव पर पड़ता नजर आ रहा है. देश के जिन राज्यों में राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, उसके लिहाज से देखें तो एनडीए की सीटें 15 से बढ़कर 18 होने की संभावना है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 18 से घटकर 14 से 15 हो सकती हैं. 

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी के पास 9, जेडीयू के पास 2 , AIADMK के पास 1, आरएलएम के पास 1 और 1 सीट आरपीआई के पास है. आगामी चुनावों के बाद बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती हैं, तो जेडीयू और AIADMK अपनी-अपनी सीटों को बचाए रख सकती हैं.

    वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो चुनाव वाले 37 में से 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में हैं, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें हैं. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. आगामी चुनावों के बाद कांग्रेस को एक सीट का लाभ हो सकता है तो नुकसान शरद पवार की एनसीपी से लेकर उद्धव ठाकरे और लालू यादव की पार्टी को हो सकता है. ममता बनर्जी और डीएमके अपनी सीटें बचा ले जाएंगी.

    चुनाव वाली 37 राज्यसभा सीटों में से 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं, जिसमें बीजेडी के पास 2 और 1 सीट बीआरएस और 1 सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है. आगामी चुनावों के बाद बीजेडी हाफ तो बीआरएस पूरी तरह साफ हो जाएगी. इसके अलावा वामदल भी अपनी राज्यसभा सीट नहीं बचा पाएंगे? 

    लालू की आरजेडी क्या हो जाएगी साफ
    बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. विधानसभा की मौजूदा स्थिति के लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट पर सियासी मिस्ट्री उलझी हुई है. एनडीए के पास 202 विधायक तो महागठबंधन के पास 35 विधायक और 7 अन्य विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में महागठबंधन अपने दम पर एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. इसका सीधे नुकसान आरजेडी को होता दिख रहा है. 

    41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीतने के लिए एनडीए को 164 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और पांचवी सीट जीतने के लिए उसे 3 विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर इंडिया ब्लॉक के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत होगी. बिहार के राज्यसभा चुनाव में जिस तरह की सियासी मिस्ट्री बन गई है, उसके लिहाज से आरजेडी को एक सीट जीतना भी मुश्किल दिख रहा है.

    एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने की कवायद में है, जिसके संकेत जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने दे दिए हैं. विपक्ष अगर संयुक्त रूप से चुनाव लड़े तो जीत सकता है, पर AIMIM से लेकर बसपा तक का सियासी स्टैंड अलग ही राह पर दिख रहा है. ऐसे में आरजेडी का राज्यसभ चुनाव में सफाया हो सकता है, क्योंकि AIMIM अपना उम्मीदवार उतारने की बात कह रहा है. 
    पवार और उद्धव का पावर होगा कम

    महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरणों ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे की सियासी जमीन को तंग कर दिया है. महाराष्ट्र में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. राज्य में वर्तमान में कुल 284 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं. इस तरह एनडीए के 228 विधायक होते हैं, जिसके दम पर वह राज्य की 7 राज्यसभा सीटों में से 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी को चार सीटें तो एकनाथ शिंदे और अजित पवार की पार्टी को 1-1 सीट मिल सकती हैं. दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. इस तरह तीनों दल मिलकर अगर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें 1 अतिरिक्त विधायक के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. वहीं अगर, एनडीए अपने 7वें उम्मीदवार को जिताना चाहता है तो उसे 31 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी.

    शिवसेना (यूटीबी) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यसभा सीट पर दावा ठोक दिया है. उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या को देखते हुए, राज्यसभा की सीट पर शिवसेना का हक बनता है. महाविकास आघाड़ी में बातचीत कर आगे बढ़ेंगे, लेकिन असल दिक्कत है कि शरद पवार का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. शरद पवार राज्यसभा में अपनी वापसी के फिराक में हैं, लेकिन नंबर गेम में पिछड़ रहे हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे और शरद पवार दोनों में से किसी एक को अपने कदम पीछे खींचने होंगे. 

    महाराष्ट्र में शरद पवार सहित एनसीपी (एसपी) के दो राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो उद्धव ठाकरे की पार्टी से प्रियंका चतुर्वेदी का टर्म पूरा हो रहा. शरद पवार की वापसी होती है तो एनसीपी को एक सीट का नुकसान होगा और उद्धव ठाकरे की पार्टी का सफाया हो जाएगा. शिवसेना अगर अपनी सीट बचाती है तो शरद पवार की राज्यसभा में वापसी नहीं हो पाएगी. इस तरह कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव महाविकास अघाड़ी के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं हैं. 

    लेफ्ट से बीआरएस तक का सफाया

    पश्चिम बंगाल की 5 सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगी, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है. इस तरह लेफ्ट का बंगाल से कोई प्रतिनिधित्व अब राज्यसभा में नहीं रह जाएगा. तेलंगाना की दोनों राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जो कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं और यहां पर बीआरएस को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है. इस तरह लेफ्ट और बीआरएस का राज्यसभा में सफाया हो जाएगा. 

    ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और बीजेडी को एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है. इस तरह बीजेडी को दो सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है. तमिलनाडु की जिन छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें और एक सीट AIADMK  जीत लेगी, एक सीट पर मुकाबला हो सकता है. असम की तीन राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास 2 और असम गण परिषद के पास एक सीट है. नए चुनावी समीकरणों के हिसाब से असम गण परिषद को अपनी सीट गंवानी पड़ सकती है. 

    छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. इस तरह कांग्रेस को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता. ऐसे ही हरियाणा की दो सीटें बीजेपी के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा के लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत लेंगी. ऐसे में बीजेपी को एक सीट का नुकसान होगा. हिमाचल की एक सीट पर हो रहे चुनाव में बीजेपी को अपनी यह सीट कांग्रेस के हाथों गंवानी पड़ सकती है.

     

  • एयरोसिटी समेत 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम, भोपाल में घर खरीदना होगा महंगा

    एयरोसिटी समेत 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम, भोपाल में घर खरीदना होगा महंगा

    भोपाल.

    वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसको लेकर शनिवार को कलेक्ट्रेट में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें पंजीयन अधिकारियों ने नई कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव रखा, जिस पर अधिकारियों व समिति के सदस्यों ने चर्चा करते हुए अपने सुझाव रखे।

    11 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार
    इस बार अधिकारियों ने शहर के एयरोसिटी, कोहेफिजा, करोंद, लांबाखेड़ा, नवीबाग, मेट्रो रेल लाइन, नए औद्योगिक क्षेत्र, नए राजमार्ग के आसपास सहित करीब 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया है। बैठक में जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा, मुकेश श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी व समिति के सदस्य उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुईं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि एक हजार 307 लोकेशन पर अत्यधिक दरों पर दस्तावेज रजिस्टर्ड किए गए हैं।

    समीक्षा के दौरान पता चला कि एक ही वार्ड की आसपास की कालोनियों में दरों के अत्यधिक अंतर को देखते हुए 203 लोकेशन और पंजीयन अधिकारियों के सर्वे के आधार पर 91 लोकेशन व नए विकास के कारण 37 लोकेशन में दरों में वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इसी तरह टीएंडसीपी से अभिन्यास स्वीकृति व आमजन सुविधा के कारण 38 लोकेशन, नए राष्ट्रीय राजमार्ग, बायपास, रिंग रोड के प्रभाव से 18 लोकेशन और नए औद्योगिक व विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना के कारण तीन लोकेशन प्रभावित पाई गई हैं। इस तरह जिले में कुल 621 लोकेशन में दर वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    शहरी क्षेत्र में डेढ़ से 11 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित
    जिले में कुल दो हजार 882 लोकेशन हैं, जहां पर प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की जाती है। इनमें से शहरी क्षेत्र की कुल 551 लोकेशन पर डेढ़ से 11 प्रतिशत तक प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इनमें लांबाखेड़ा, नवीबाग, एयरोसिटी राजाभोज परियोजना, सीटीओ कालोनी, कैलाश नगर, पूजाश्री नगर, लाउखेड़ी बीडीए, हाउसिंग बोर्ड कोहेफिजा, ग्राम पलासी एवं पलासी की अन्य कालोनी, पंचवटी एलआईजी, करोंद, जनता नगर व उसके आसपास की अन्य कालोनियां, बड़बई, नरेला बाजयाफ्त, हिरनखेड़ी, घाटखेड़ी, इनायतपुर, फंदा कलां, बैरागढ़ खुमान, बेहटा, मिनाल शॉपिंग, अरेड़ी, सूखसेवनियां, ओंकारा सेवनियां, नर्मदापुरम रोड, अरेरा कालोनी, भोपाल रेलवे स्टेशन सहित अन्य शामिल हैं।
    जबकि नगर पालिका परिषद बैरसिया की करीब 70 लोकेशन पर भी प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि करने का प्रस्ताव है। इनको मिलाकर कुल 621 लोकेशन प्रस्ताव में परिलक्षित की गई हैं।

    मेट्रो रेल लाइन के आसपास प्रॉपर्टी होगी महंगी
    कलेक्टर गाइडलाइन के प्रस्ताव में उन लोकेशन को भी शामिल किया गया है, जहां पर मेट्रो रेल लाइन का काम किया जा रहा है। इनमें सुभाष नगर से एम्स तक के मेट्रो रूट में आने वाले सभी इलाकों में प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि प्रस्तावित है। जबकि सुभाष नगर से करोंद तक के मेट्रो रूट के बीच आने वाले इलाकों में भी प्रॉपर्टी महंगी की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में शासन को प्रोजेक्ट लगाने या शासकीय प्रयोजन के लिए जमीन चाहिए, उन लोकेशन पर प्रॉपर्टी की दरें यथावत रखी गई हैं।

    औद्योगिक क्षेत्र में प्रॉपर्टी की दरों में बदलाव का सुझाव
    जिला मूल्यांकन समिति के सदस्य व विधायक ने सुझाव रखते हुए बताया कि गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में प्रॉपर्टी दरों में बदलाव किया जाना चाहिए। यहां पर अधिकांश जगह पर एक समान प्रॉपर्टी की दरें हैं, जिनमें बदलाव किया जाना चाहिए। जबकि हाउसिंग बोर्ड ने अपना सुझाव रखते हुए बताया कि रविशंकर शुक्ल मार्केट में बनी इमारतों में सभी में प्रॉपर्टी की दरें एक तरह की हैं, लेकिन एक इमारत में प्रॉपर्टी की दरें अलग हैं, जिन्हें एक समान किया जाना चाहिए।

    नई कलेक्टर गाइडलाइन 2026-27 में प्रमुख 17 लोकेशन पर प्रस्तावित दरें
    लोकेशन     वर्तमान दरें (प्रति वर्ग मीटर)     प्रस्तावित दरें (प्रति वर्ग मीटर)
    एयरोसिटी राजाभोज परियोजना     20,000     22,000
    सीटीओ कालोनी/कैलाश नगर, पूजाश्री नगर     15,000     18,000
    लाउखेड़ी     12,000     15,000
    बीडीए, हाउसिंग बोर्ड कोहेफिजा     45,000     50,000
    ग्राम पलासी एवं पलासी की अन्य कालोनी     15,000     17,000
    पंचवटी एलआईजी     10,000     12,000
    लांबाखेड़ा, नवीबाग व अन्य कालोनी     10,000     12,000
    पुरुषोत्तम नगर     13,000     15,000
    घाटखेड़ी     3,000     4,000
    झागरिया खुर्द     5,600     7,000
    दामखेड़ा खुर्द की कालोनियां     16,000     20,000
    सुरम्य परिसर     26,000     30,000
    नर्मदा एवन्यू     16,000     20,000
    सागर एवन्यू     18,000     20,000
    एकतापुरी, कौशल्या कालोनी     15,800     17,000
    पंत नगर     13,800     15,000
    राजेंद्र नगर     12,800     16,000

    इनका कहना है
    वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिस पर जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में चर्चा करने के बाद अब आम नागरिकों से सुझाव मांगे गए हैं, जिसे संपदा टू पोर्टल पर दे सकते हैं। इन सुझावों पर चर्चा के बाद प्रस्ताव को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया जाएगा।
    – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर व अध्यक्ष, जिला मूल्यांकन समिति

  • लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापनाः सीएम योगी

    लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापनाः सीएम योगी

    अन्नदाता किसानों के साथ खड़ी रहेगी डबल इंजन सरकार: मुख्यमंत्री

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2.51 लाख किसानों को 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का किया वितरण

    मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के 3500 लाभार्थी परिवारों को भी 175 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी सीएम ने

    सीएम ने बागपत, शामली, कासगंज, भदोही के उप कृषि निदेशक कार्यालय व मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं, मऊरानीपुर झांसी में 50 शैय्या के छात्रावास तथा लखनऊ में स्मार्ट कृषि ब्यूरो स्टूडियो का किया शिलान्यास

    लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापनाः सीएम योगी 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (खरीफ-2025) के अंतर्गत 2.51 लाख किसानों को 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का वितरण किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के 3500 लाभार्थी परिवारों को भी 175 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की। मुख्यमंत्री ने बागपत, शामली, कासगंज, भदोही में उप कृषि निदेशक कार्यालय व मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं, राजकीय भूमि संरक्षण केंद्र मऊरानीपुर झांसी में 50 शैय्या के छात्रावास भवन तथा लखनऊ में स्मार्ट कृषि ब्यूरो स्टूडियो इकाई का शिलान्यास भी किया। सीएम योगी ने होली की शुभकामनाएं देते हुए किसानों को आश्वस्त किया कि डबल इंजन सरकार मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि अन्नदाता किसान उन्नत खेती के माध्यम से प्रदेश की समृद्धि में योगदान देते रहेंगे। 

    460 करोड़ रुपये किसानों के खाते में पहुंचे, बिचौलियों की भूमिका समाप्त 
    सीएम योगी ने कहा कि कल ही उत्तर प्रदेश सरकार का 2026-27 का बजट पारित हुआ है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से बजट के माध्यम से प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों के लिए ढेर सारी योजनाएं पास कराई गई हैं। जब बजट होता है तो लाभार्थियों के अकाउंट में सीधे पैसा जाता है और उन्हें लाभ प्राप्त होता है। आज एक बटन दबाते ही 460 करोड़ रुपये किसानों के खाते में पहुंच रहे हैं, बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई। लखनऊ समेत प्रदेश के सभी जनपदों में लाभार्थी परिवारों को इन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। 

    डीएम को निर्देश- कल तक हर हाल में खाते में पहुंच जाए पैसा 
    सीएम योगी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से 2.51 लाख किसान परिवारों को मिली 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति को संबल बताया। कहा कि फसल को सूखे-अतिवृष्टि के कारण नुकसान हुआ है। जब हम फसल का बीमा कराते हैं तो जरूरत पर रिटर्न भी मिलता है। आपदा के कारण नुकसान हुआ तो भरपाई होती है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि योजना के तहत पहले केवल किसान कवर होता था, उसके परिवार के सदस्य, बटाईदार, सह किसान कवर नहीं होते थे। हमारी सरकार में 1000 करोड़ से अधिक की धनराशि के जरिए किसान या उसके परिवार के सदस्यों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। किसी मनुष्य की कमी की भरपाई कोई नहीं कर सकता, लेकिन सरकार संबल देने के लिए खड़ी हो सकती है। आपदा प्रभावित 3500 पीड़ित किसानों, सह किसानों, पारिवारिक सदस्यों, बटाईदारों आदि को आज लाभान्वित किया गया है। इससे पहले 16 जून 2025 को 11,690 किसानों व आश्रितों को 561.86 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे। सीएम ने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि कल तक यह पैसा सभी किसानों या आश्रित परिवारों के खाते में पहुंच जाए। 

    आपदा मित्रों को मिला तीन साल तक पांच लाख का बीमा कवर
    सीएम योगी ने कहा कि आपदा प्रबंधन में फर्स्ट रिस्पॉन्डर आपदा मित्र हो सकता है। पीएम मोदी ने इस संबंध में बड़ा अभियान चलाया है। उत्तर प्रदेश ने पीएम की इस पहल को बढ़ाने का कार्य किया। 25 जनपदों में 29,772 युवा स्वयंसेवकों (एनसीसी, एनएसएस, एनवाईकेएस, भारत स्काउट एंड गाइड) को प्रशिक्षित कर आपदा मित्र प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया है। इन स्वयंसेवकों को सात दिवसीय प्रशिक्षण के साथ भी जोड़ा गया है। इन्हें इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट,  आपदा मित्र ट्रेनिंग, मॉड्यूल आईडी, आईडी कार्ड व प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट में लाइफ जैकेट, सर्च टॉर्च, फर्स्ट-एड बॉक्स, सेफ्टी हेलमेट, चश्मा समेत 15 आइटम हैं। प्रदेश सरकार ने प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवकों का तीन वर्ष का जीवन व चिकित्सा बीमा करने का निर्णय लिया है। 10 फरवरी को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के साथ एमओयू किया गया है, जिसमें आपदा मित्र को तीन वर्ष के लिए 5 लाख का बीमा कवर प्रदान किया गया है। प्रदेश में अभी तक 2959 युवा स्वयंसेवक प्रशिक्षित किए जा चुके हैं, शेष का प्रशिक्षण भी आगे बढ़ाया जाएगा। 

    हमारा प्रयास- आपदा के 24 घंटे के भीतर पीड़ितों के खाते में पहुंच जाए पैसा 
    सीएम ने कहा कि पहले आपदा आने पर वर्षों तक पीड़ितों को कोई पूछता तक नहीं था। उन्हें क्षतिपूर्ति तक नहीं मिल पाती थी। 2015-16 में एक बार किसी किसान के खाते में दो रुपये, किसी के खाते में चार रुपये आए थे। हमारा प्रयास है कि बाढ़, आकाशीय बिजली, आगजनी जैसी आपदा आते ही 24 घंटे के भीतर पीड़ित के खाते में पैसा पहुंच जाए। 2025-26 में राज्य आपदा मोचक निधि में 876 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें से फसल क्षति से प्रभावित 5,14,322 किसानों को 260 करोड़ रुपये का कृषि निवेश अनुदान, जनहानि के 5398 पीड़ितों को 216 करोड़, मकान क्षति के 27448 प्रभावितों को 24 करोड़ रुपये सरकार वितरित कर चुकी है। 

    लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में होगी डॉप्लर वेदर राडार की स्थापना 
    सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी व आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर राडार की स्थापना होने जा रही है। इससे मौसम का पूर्वानुमान लगाने के साथ ही यह भी बता सकेंगे कि कहां पर आकाशीय बिजली गिरने का खतरा है। प्रदेश में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ब्लॉक स्तर पर 2000 ऑटोमेटिक रेन गेज स्थापित करने की कार्रवाई लगभग पूर्ण हो चुकी है। 

    इस अवसर पर में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, उप्र आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, प्रमुख सचिव (कृषि) रवींद्र कुमार, प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू आदि की मौजूदगी रही।

    होमगार्ड की भर्ती में आपदा मित्र को देंगे प्राथमिकताः मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में 45 हजार होमगार्ड्स की भर्ती में आपदा मित्रों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अभी आपदा मित्र की सेवा स्वैच्छिक है, लेकिन जब वे होमगार्ड के रूप में कार्य करेंगे तो उन्हें सरकार द्वारा मानदेय भी दिया जाएगा। प्रदेश में 19 हजार आपदा मित्रों को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्रशिक्षित किया जा चुका है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा स्नातक-परास्नातक विद्यार्थियों के लिए दो वर्षीय आपदा प्रबंधन इंटर्नशिप कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

  • सुपर-8 का रोमांच शुरू: 9 दिन में 12 मैचों का शेड्यूल, क्या आपके पसंदीदा टीम की होगी जीत?

    सुपर-8 का रोमांच शुरू: 9 दिन में 12 मैचों का शेड्यूल, क्या आपके पसंदीदा टीम की होगी जीत?

    कोलंबो

    आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में लीग मुकाबलों का दौर समाप्त हो चुका है. यह टूर्नामेंट अब अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है. 20 टीमों के इस मेगा टूर्नामेंट में अब केवल आठ टीमें बची हैं, जो सुपर-8 राउंड में जंग लड़ेंगी. सुपर-8 मुकाबलों की शुरुआत शनिवार (21 फरवरी) से होगी. सुपर-8 का पहला मुकाबला आज पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे से खेला जाएगा.

    ग्रुप स्टेज में कई करीबी मुकाबले और उलटफेर देखने को मिले हैं.आईसीसी की ओर से प्री-सीड की गई आठ टीमों में से सात ने सुपर-8 में जगह बनाई. जबकि ऑस्ट्रेलिया सुपर-8 में जगह नहीं बना पाया और उसके स्थान पर जिम्बाब्वे ने एंट्री ली. कुल मिलाकर भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे सुपर-8  में पहुंचने वाली टीम्स हैं. इन आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुप्स में बांटा गया है.

    ग्रुप-1 में सहमेजबान भारत के अलावा  वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे और साउथ अफ्रीका की टीम्स हैं. इन चारों टीमों ने अपने-अपने ग्रुप में टॉप किया था. ग्रुप-2 में पाकिस्तान, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और सहमेजबान श्रीलंका आमने-सामने होंगे. यह ग्रुप भी बेहद प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है, जहां हर मैच सेमीफाइनल की दौड़ तय करेगा. सुपर-8 चरण में मुकाबले सिंगल राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में खेले जाएंगे, यानी हर टीम अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों से एक-एक मैच खेलेगी. दोनों ग्रुप से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी.

    भारतीय टीम का कब-कब मैच?
    सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली भारतीय टीम सुपर-8 स्टेज में अपना पहला मुकाबला 22 फरवरी (रविवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलेगी. इसके बाद उसका दूसरा मुकाबला 26 फरवरी (गुरुवार) को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ निर्धारित है. सुपर-8 स्टेज में भारतीय टीम अपना आखिरी मुकाबला 1 मार्च (रविवार) को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेलने वाली है. बता दें कि सुपर 8 में भारतीय टीम के सभी मैच शाम 7 बजे से होंगे.

    सुपर-8 चरण 21 फरवरी से शुरू होकर 1 मार्च तक चलेगा. कुल 9 दिन चलने वाले सुपर-8 स्टेज में 12 मुकाबले खेले जाएंगे, इसके बाद टूर्नामेंट अपने निर्णायक दौर में प्रवेश करेगा, जहां चार टीमें खिताब के लिए भिड़ेंगी. 4 और 5 मार्च को सेमीफाइनल मुकाबले निर्धारित हैं. जबकि मौजूदा वर्ल्ड कप का फाइनल 8 मार्च को आयोजित होगा.

    सुपर 8 का ग्रुप
    ग्रुप-1: भारत, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे
    ग्रुप-2: श्रीलंका, इंग्लैंड, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड

    सुपर-8 और नॉकआउट मैचों का शेड्यूल

    तारीख टीम्स वेन्यू समय
    21 फरवरी न्यूजीलैंड vs पाकिस्तान RPS, कोलंबो शाम 7 बजे
    22 फरवरी इंग्लैंड vs श्रीलंका पल्लेकेले दोपहर 3 बजे
    22 फरवरी भारत vs साउथ अफ्रीका अहमदाबाद शाम 7 बजे
    23 फरवरी जिम्बाब्वे vs वेस्टइंडीज वानखेड़े, मुंबई शाम 7 बजे
    24 फरवरी इंग्लैंड vs पाकिस्तान पल्लेकेले शाम 7 बजे
    25 फरवरी न्यूजीलैंड vs श्रीलंका RPS, कोलंबो शाम 7 बजे
    26 फरवरी साउथ अफ्रीका vs वेस्टइंडीज अहमदाबाद दोपहर 3 बजे
    26 फरवरी भारत vs जिम्बाब्वे चेन्नई शाम 7 बजे
    27 फरवरी इंग्लैंड vs न्यूजीलैंड RPS, कोलंबो शाम 7 बजे
    28 फरवरी पाकिस्तान vs श्रीलंका पल्लेकेले शाम 7 बजे
    1 मार्च जिम्बाब्वे vs साउथ अफ्रीका दिल्ली दोपहर 3 बजे
    1 मार्च भारत vs वेस्टइंडीज कोलकाता शाम 7 बजे
    4 मार्च पहला सेमीफाइनल कोलंबो/कोलकाता शाम 7 बजे
    5 मार्च दूसरा सेमीफाइनल वानखेड़े, मुंबई शाम 7 बजे
    8 मार्च फाइनल अहमदाबाद/ कोलंबो शाम 7 बजे
  • भोपाल और जबलपुर में हल्की बारिश के साथ मध्य प्रदेश में 4 दिन का मौसम अलर्ट, 5 अन्य जिलों पर भी असर

    भोपाल और जबलपुर में हल्की बारिश के साथ मध्य प्रदेश में 4 दिन का मौसम अलर्ट, 5 अन्य जिलों पर भी असर

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश में मौसम इस समय 'दोहरी रंगत' दिखा रहा है। एक तरफ जहां गुलाबी ठंड की विदाई का समय है, वहीं दूसरी ओर आसमान से बरसती आफत ने प्रदेशवासियों को चिंता में डाल दिया है। नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से शनिवार, 21 फरवरी 2026 को प्रदेश के 28 जिलों में बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार और शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने उज्जैन और भोपाल संभाग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे रबी की फसलों को बड़ा नुकसान होने का खतरा पैदा हो गया है।

    प्रदेश के आधे हिस्से में पानी-पानी

    मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल और उज्जैन समेत प्रदेश के 17 जिलों में बारिश दर्ज की गई। उज्जैन में सर्वाधिक 1 इंच के आसपास बारिश हुई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। ठंड के आखिरी दौर में हर हफ्ते बदलता यह मौसम का मिजाज विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहा है। शुक्रवार को बारिश का दौर जारी रहा और शनिवार को भी इसके थमने के आसार नहीं हैं।

    17 जिलों में जमकर बारिश

    बता दें कि उज्जैन सहित शाजापुर, देवास, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, झाबुआ, इंदौर, भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, सागर, छतरपुर, पन्ना और सतना जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बारिश हुई है। प्रदेश में कहीं से ओले की सूचना सामने नहीं आई है। वहीं बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, कई जिलों में ठंड बढ़ गई है।

    बारिश-आंधी और बिजली का अलर्ट

    मप्र मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं के साथ बारिश का 'यलो अलर्ट' जारी किया है। जिन शहरों में सावधानी बरतने को कहा गया है, उनमें राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग के जिले शामिल हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में 'गाज' (आकाशीय बिजली) गिरने की भी संभावना है, इसलिए लोग पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में जाने से बचें।

    फसलों को नुकसान की आशंका

    तेज हवाओं का असर खासतौर पर रतलाम, शाजापुर और उज्जैन में ज्यादा देखा गया। यहां गेहूं की खड़ी फसलें झुक गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसलें लंबे समय तक जमीन पर पड़ी रहीं तो दानों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। पिछले तीन दिनों में करीब 25 जिलों में आंधी के कारण फसल नुकसान की संभावना जताई जा रही है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू करा दिया है। राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर रही हैं।
    अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम

    22 फरवरी को बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, हालांकि आसमान में बादल छाए रह सकते हैं।
    23 फरवरी को दक्षिणी हिस्सों में सक्रिय सिस्टम के प्रभाव से बारिश होने की संभावना जताई गई है।
    24 फरवरी को दक्षिण-पूर्वी जिलों में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है।
    इंदौर में तापमान में खासी गिरावट

    इंदौर में शुक्रवार को मौसम अचानक बदल गया। दिन का अधिकतम तापमान चार डिग्री गिरकर 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रात के तापमान में भी एक डिग्री की कमी आई और पारा 15 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। देर रात शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई। शनिवार सुबह हल्की ठंड महसूस की गई, हालांकि दिन में धूप निकलने से मौसम सुहावना बना रहा।

    फरवरी में लगातार बदल रहा मौसम

    इस महीने की शुरुआत से ही मौसम अस्थिर बना हुआ है। फरवरी के पहले पखवाड़े में दो बार आंधी, बारिश और ओले गिर चुके हैं, जिससे फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, जिसका असर 19 और 20 फरवरी को भी रहा। अब 23 और 24 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह फरवरी में चौथी बार मौसम परिवर्तन होगा।
    कल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर

    22 फरवरी को एक पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होगा। इसका प्रभाव अगले दिन से मध्य प्रदेश में दिखाई दे सकता है। 23 फरवरी को नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में वर्षा की संभावना है। 24 फरवरी को सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बारिश हो सकती है।

    तापमान का हाल

    बारिश के बावजूद रात के तापमान में बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है, लेकिन हवाओं ने सिहरन बढ़ा दी है। कल्याणपुर 10.4°C के साथ सबसे ठंडा इलाका रहा, वहीं शहडोल और उमरिया में पारा 10 से 12°C के बीच बना हुआ है।

    किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

    इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि खेतों में खड़ी गेंहू और चने की फसलें तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जलभराव और नमी के कारण दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है और पैदावार में गिरावट आने की पूरी आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल बड़े स्तर पर ओलावृष्टि की सूचना कहीं से नहीं मिली है।

  • मंत्री सारंग‑गौर की विधानसभा में मतदाताओं की तस्वीर साफ, 3.80 लाख नाम SIR से हटाए गए

    मंत्री सारंग‑गौर की विधानसभा में मतदाताओं की तस्वीर साफ, 3.80 लाख नाम SIR से हटाए गए

    भोपाल 

    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नाम जोड़ने, हटाने के लिए बुलाए गए दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज शनिवार को मध्य प्रदेश में मतदाताओं की स्थिति साफ हो जाएगी। जिलों में निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची का प्रकाशन कर बताएंगे कि किस विधानसभा सीट में कितने मतदाताओं के नाम काटे और जोड़े गए हैं। इसके बाद अब चुनाव आयोग की एसआईआर की कार्यवाही भी कम्प्लीट हो जाएगी। अब ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से नाम जोड़ने और हटवाने की प्रक्रिया चलती रहेगी।

    एसआईआर की कार्यवाही पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत उनके मंत्रियों के क्षेत्र से 8 लाख 20 हजार 255 नाम काटे गए थे। इसके बाद नए नाम जोड़ने को लेकर तय समय-सीमा में सिर्फ 1 लाख 69 हजार 753 आवेदन जमा किए गए।

    सबसे अधिक नाम मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग के विधानसभा क्षेत्र से कटे थे उसी तरह नए नाम जोड़ने के लिए सबसे अधिक आवेदन जमा हुए थे। पूरे प्रदेश की बात करें तो 42 लाख 74 हजार से अधिक नाम काटने की कार्यवाही एसआईआर में की गई और इसके विपरीत नए नाम जोड़ने के लिए सिर्फ 9 लाख 89 हजार 991 लोगों ने आवेदन जमा किए गए थे।

    नए नाम जोड़ने के लिए जिन विधानसभा क्षेत्रों में दस हजार से अधिक आवेदन जमा किए गए थे, उसमें मंत्री कृष्णा गौर की गोविंदपुरा विधानसभा सीट सबसे आगे है। यहां 17888 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। इसके बाद मंत्री विश्वास सारंग की सीट नरेला में 15115 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए थे।

    भोपाल जिले की हुजूर विधानसभा सीट जिसके विधायक रामेश्वर शर्मा हैं, वहां से 13024 नए नाम जोड़ने के आवेदन आए। इंदौर जिले में इंदौर 2 विधानसभा सीट से 10446 और इंदौर 5 विधानसभा क्षेत्र से 11040 नाम जोड़ने के लिए आवेदन जमा कराए गए। राऊ सीट के लिए 12700, नागदा खाचरौद सीट के लिए 11047 आवेदन जमा कराए गए।

    भोपाल में 120+ उम्र के 125 वोटर्स

    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में भोपाल की वोटर संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। पहले सर्वे और फिर दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। बता दें, 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद 22 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर यानी, बीएलओ अपने-अपने बूथ पर बैठें। इस दौरान उन्होंने नए फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए।

    एसआईआर में जिन मतदाताओं को 'नो मैपिंग' में रखा गया कि उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिन के अंदर उनका रिकॉर्ड देखा। 14 फरवरी तक ये काम पूरा हो गया। अब फाइनल मतदाता सूची शनिवार को जारी होगी।

    पहले इतनी थी मतदाता संख्या

    एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल की मतदाता संख्या 21 लाख 25 हजार 908 थी, जो अब 17 लाख 45 हजार 453 हो गई है। इस तरह वोटर लिस्ट से 3 लाख 80 हजार 455 मतदाता कम हो जाएंगे।

    उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे

    जानकारी के अनुसार, शनिवार को फाइनल वोटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से भी आंकड़े जारी होंगे। इनमें शतक यानी, 100 या इससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी सामने आएगी। इस उम्र की कैटेगिरी में करीब 125 मतदाता हैं।

    सबसे कम आवेदन वाले विधानसभा में राजनगर और बीना का नाम

    छतरपुर जिले के राजनगर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए सबसे कम 1138 आवेदन आए थे। राजनगर कांग्रेस के पूर्व एमएलए विक्रम सिंह नातीराजा का क्षेत्र है। इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने को लेकर विवादों में चल रही कांग्रेस की एमएलए निर्मला सप्रे भी उन विधायकों में शामिल हैं जिनके यहां नए नाम जोड़ने के लिए कम आवेदन जमा हुए थे। बीना विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर के बाद नाम जोड़ने के लिए 1288 आवेदन जमा हुए।

    इन विधानसभा सीट में भी दो हजार से कम आवेदन आए

    चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक टिमरनी विधानसभा सीट से 1463 आवेदन मिले थे। भगवानपुरा सीट से 1556 और रतलाम ग्रामीण के लिए 1629 आवेदन जमा कराए गए तो जावद सीट के लिए 1649 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। छतरपुर जिले की मलहरा विधानसभा सीट से 1742 आवेदन आए।

    पूर्व मंत्री बिसाहू लाल सिंह की सीट अनूपपुर से 1750 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए मिले थे। वहीं शमशाबाद विधानसभा सीट के लिए 1781 आवेदन जमा किए गए। भीकनगांव के लिए 1794, बदनावर सीट से 1799, बड़वाह सीट के लिए 1838 आवेदन नए नाम जोड़ने के लिए आए। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा क्षेत्र से 1934 आवेदन जमा हुए थे।

    मंत्री कृष्णा और सारंग के क्षेत्र में सबसे अधिक नाम कटे

    एसआईआर में सबसे अधिक नाम गोविन्दपुरा से विधायक और मोहन सरकार में मंत्री कृष्णा गौर के क्षेत्र से काटे गए थे। भोपाल जिले की इस विधानसभा सीट से 97052 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। दूसरे स्थान पर इंदौर-5 से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया का विधानसभा क्षेत्र है। मोहन सरकार के मंत्री विश्वास सारंग और कैलाश विजयवर्गीय के क्षेत्र से 81235 और 75014 वोटर्स के नाम काटे गए।

    एसआईआर में सबसे कम 6034 नाम नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र से कटे। एसआईआर ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार मोहन सरकार के पांच मंत्रियों के क्षेत्र में 50 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।

    इसमें भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र गोविन्दपुरा और नरेला, इंदौर के इंदौर-1, ग्वालियर जिले की ग्वालियर विधानसभा, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा, इंदौर जिले की इंदौर -1 विधानसभा शामिल है।

    मुख्यमंत्री के यहां 37728, विस अध्यक्ष के यहां 13920 नाम कटे थे

    एसआईआर के ड्राफ्ट प्रकाशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विधानसभा सीट उज्जैन दक्षिण से 37728 वोटर्स के नाम काटे गए हैं। मुरैना जिले के दिमनी विधानसभा सीट से विधायक और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के क्षेत्र के 13920 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं।

    कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विधानसभा क्षेत्र गंधवानी से 14712 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। अटेर विधानसभा कांग्रेस के हेमंत कटारे का निर्वाचन क्षेत्र है जहां से 17505 मतदाताओं के नाम कटे हैं।

    पूर्व मंत्रियों के क्षेत्र में एनालिसिस करने के बाद यह सामने आया कि महेंद्र हार्डिया के यहां सबसे अधिक 87591 नाम कटे हैं। जबलपुर पूर्व से विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के क्षेत्र में 49215 वोटर्स के नाम एसआईआर में काटे गए। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के क्षेत्र से 21981 मतदाताओं के नाम काटे जाने की कार्यवाही एसआईआर में हुई है।

  • 106 CDR और 100 CCTV फुटेज ने खोला राज, 18 दिन बाद सामने आई साध्वी की मौत की सच्चाई

    106 CDR और 100 CCTV फुटेज ने खोला राज, 18 दिन बाद सामने आई साध्वी की मौत की सच्चाई

     जोधपुर

    राजस्थान की चर्चित युवा साध्वी प्रेम बाईसा का मौत को लेकर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा था. क्या उनकी मौत के पीछे कोई साजिश थी? क्या उन्हें जहर दिया गया? या फिर कोई मेडिकल लापरवाही? 18 दिनों तक चली लंबी और पेचीदा जांच, 44 गवाहों के बयान, 106 लोगों की कॉल डिटेल, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज और 37 से अधिक विसरा नमूनों की पड़ताल के बाद आखिरकार जोधपुर पुलिस ने इस राज से पर्दा उठा दिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. क्योंकि मौत की वजह भले सामने आ गई हो, इंजेक्शन का सच सामने आना अभी बाकी है.

    एक लंबी और चुनौतीपूर्ण तफ्तीश के बाद राजस्थान की मशहूर साध्वी प्रेम बाईसा के मौत के रहस्य से आखिरकार पर्दा हट ही गया. इस मामले में फाइनल ओपिनियन के लिए जोधपुर पुलिस को फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी यानी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार था. उस रिपोर्ट के बाद पुलिस ने इसे लेकर फिर से मेडिकल एक्सपर्ट्स से चर्चा की और आखिरकार प्रेम बाईसा की मौत के सच का खुलासा कर दिया. 

    28 जनवरी को हुई प्रेम बाईसा की मौत के बाद से ही इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था. प्रेम बाईसा के अनुयायी तो खैर इस मामले में इंसाफ की मांग कर ही रहे थे, खुद प्रेम बाईसा के पिता वीरमनाथ भी बार-बार इस मामले में साजिश की आशंका जताते हुए अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे, ऐसे में पुलिस ने पहले डॉक्टरों के बोर्ड से उनके शव का पोस्टमार्टम करवाया और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए उनके विसरा के नमूनो को स्टेट फॉरेंसिक साइंस लैब्रोटरी जयपुर भेजा, जिसकी रिपोर्ट 16वें दिन सामने आ गई और 18वें दिन जोधपुर पुलिस ने इस केस को एक तरह से कनक्लूड कर दिया.

    पुलिस की मानें तो साध्वी प्रेम बाईसा के साथ ना तो कोई साजिश हुई, ना उनके साथ मौत से पहले कोई सेक्सुअल ऑफेंस हुआ और ना ही उन्होंने खुदकुशी की, बल्कि उनकी मौत की वजह कार्डिएक और पल्मॉनरी अरेस्ट बनी. कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट से मौत बोले तो दिल की धड़कनों का और सांस लेने की क्रिया रुकने के चलते हुई मौत. पुलिस ने साफ किया कि उन्हें पहले से फेफड़े से संबंधित बीमारी थी, ऐसे में कार्डियो पल्मनॉरी अरेस्ट जानलेवा बन गई. 

    वैसे तो इस मामले में कई पेच थे, लेकिन सबसे बड़ा पेच साध्वी को मौत से ऐन पहले लगाए गए इंजेक्शन का ही था. क्योंकि सामने आई खबरों के मुताबिक इंजेक्शन लगाए जाने के बाद ही उनकी तबीयत एकाएक बिगड़ी और जब तक उनके पिता और आश्रम के लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक उनकी जान चली गई. ऐसे में इंजेक्शन में दी गई दवाओं की जांच के साथ-साथ पुलिस के लिए उस कंपाउंडर की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी थी. पुलिस ने इस दिशा में जांच की भी और शुरुआती तफ्तीश में उसे कंपाउंडर की लापरवाही का पता चला.

    आपको याद होगा कि 28 जनवरी को साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर जोधपुर के एक कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित को आश्रम की ओर से साध्वी के इलाज के लिए बुलाया गया था और तब देवी सिंह दो दवाओं के साथ साध्वी के पास पहुंचा था. साध्वी को ये दवाएं पहले भी दी जाती रही हैं. इन दवाओं में डेक्सोना और डायनापार शामिल हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि से शेड्यूल एच की दवाएं हैं, जिन्हें बिना किसी मेडिकल प्रैक्टिशनर यानी डॉक्टर की इजाजत या देख-रेख के बगैर दिए जाने की मनाही है. इसके बावजूद देवी सिंह राजपुरोहित ने ना सिर्फ साध्वी को इन दो दवाओं का इंजेक्शन दिया, बल्कि वो बगैर किसी प्रैस्क्रिप्शन यानी डॉक्टर की पर्ची के खुद ही ये दवाएं लेकर साध्वी के पास पहुंचा था, जो की एक गैरकानूनी हरकत है.

    जोधपुर पुलिस ने साफ किया कि कंपाउंडर की लापरवाही को लेकर पुलिस ने नए सिरे से मेडिकल बोर्ड से उनकी राय मांगी है, ताकि ये साफ हो सके कि क्या कपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित की ओर से दिया गया इंजेक्शन ही उनकी मौत की वजह बनी या नहीं? पुलिस ने कहा कि इस मामले में मेडिकल बोर्ड की राय आने के बाद ही देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी.

    साध्वी को 28 जनवरी को 2 इंजेक्शन लगाए गए थे. डायनापार और डेक्सोना. डायनापार यानी डाइक्लोफिनैक और डेक्सोना यानी डेक्सामेथासोन. तेज दर्द, सूजन, चोट और सर्जरी के बाद होने वाले दर्द से निजात दिलाने वाली ये दवाएं आम तौर पर एक साथ दी जाती हैं. लेकिन इसकी शर्त है कि इन्हें डॉक्टर की निगरानी में ही दिया जाना जरूरी है. क्योंकि इन्हें दी जाने में बरती गई मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कभी-कभार एक ही सीरींज से डाइक्लोफिनैक और डेक्सामेथासोन का इंजेक्शन मरीज के लिए खतरनाक कार्डियोवैस्कुलर इवेंट यानी हार्टफेल की वजह बन जाती है. कई बार इन दवाओं से पेट से संबंधी समस्याएं, सिर चकराने, सिर दर्द या इनफेक्शन यानी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाने की बात कही जाती है.

    लेकिन साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में डॉक्टर की निगरानी वाली बात की अनदेखी की गई. अब सवाल यही है कि क्या साध्वी के शरीर में इन दो दवाओं का रिएक्शन हो गया, जिसके चलती उनकी जान चली गई? पुलिस फिलहाल ये पता लगाने में जुटी है. फिलहाल इंजेक्शन लगाने वाला कपाउंडर बेशक डॉक्टर की पर्ची के मुताबिक ही इंजेक्शन लगाने की बात कह रहा है, लेकिन ये भी सच है कि वो पर्ची पुरानी थी. साध्वी ने 28 जनवरी को किसी डॉक्टर से कोई सलाह नहीं ली थी. अजमेर से प्रोग्राम कर लौटने के बाद जब साध्वी की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने अपने पिता से ट्रिटमेंट करवा देने की बात कही थी. हालांकि अस्पताल जाने के पिता की पेशकश को उन्होंने ठुकरा दिया था.

    एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद साध्वी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बनी असमंजस की स्थिति भी काफी हद तक साफ हो गई है. क्योंकि इन रिपोर्ट में बताया गया है कि साध्वी के शरीर में ना तो अंदरुनी या बाहरी चोट के निशान थे और ना ही उनके शरीर में कोई ज़हरीली चीज ही पाई गई. यानी उनकी मौत की वजह कुदरती थी. ये और बात है कि कुदरती वजह उन्हें इंजेक्शन में दी गई दवाओं की वजह से बनी या नहीं, इसकी अलग से जांच चल रही है. चूंकि ये मामला एक जानी-मानी युवा साध्वी की रहस्यमयी मौत से जुड़ा था, इसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे. ऐसे में जोधपुर पुलिस की ओर से बनाई गई एसआईटी ने हर उस पहलू को खंगालने की कोशिश की, जिसका कनेक्शन उनकी मौत के मामले से जुड़ता था.

    मसलन पुलिस ने 28 जनवरी की पूरी टाइमलाइन को रीविजिट करने की कोशिश की, जब उनकी तबीयत बिगड़ने से लेकर, उन्हें इंजेक्शन लगाया गया और फिर बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें जोधपुर के ही प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया. इसके अलावा पुलिस ने प्रेम बाईसा की मेडिकल हिस्ट्री की भी अलग से एनालिसिस की. पुलिस ने ये पता लगाया कि वो कब से बीमार थी? तबीयत बिगड़ने पर वो कौन-कौन सी दवाएं लेती थीं? उनको लगाए गए इंजेक्शन के मद्देनजर पुलिस ने ड्रग कंट्रोलर से लेकर सीएमएचओ, राजस्थान नर्सिंग काउंसिल समेत कई इकाइयों से बात की. यहां तक कि पुलिस ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर प्राइवेट अस्पताल तक की अलग से जांच की. यानी हर उस एंगल को एक्सप्लोर करने की कोशिश की, जहां से उनकी मौत में साजिश का कोई भी एंगल जुड़ सकता था. इसके अलावा उनके गांव से लेकर जोधपुर के आश्रम तक उनकी किन-किन से दोस्ती और दुश्मनी थी, पुलिस ने सब चेक किया.

    वैसे तो इस मामले के उलझने की कई वजहें थीं, लेकिन इन वजहों में एक वजह इनकनक्लूसिव पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी थी. यानी एक ऐसी रिपोर्ट जिसने मौत की वजह से पर्दा हटाने की जगह उसे लेकर और ज्यादा संशय पैदा कर दिया था, यही वजह है कि पुलिस को इस केस का आखिरी सच जाने के लिए एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट की जरूरत पड़ी. 

    सूत्रों की मानें तो साध्वी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि मौत से पहले उनकी आंतें और पेट के कई अंदरुनी अंग सिकुड़ गए थे. अब सवाल था कि ऐसा किस सूरत में हो सकता है? तो फॉरेंसिक मेडिसीन के एक्सपर्ट्स से इसका जवाब पूछा गया. एक्सपर्ट की माने तो कि ऐसा आम तौर पर किसी बीमारी की सूरत में ही मुमकिन है. जाहिर है साध्वी भी बीमार थीं, लेकिन क्या वो बीमारी इतनी खतरनाक स्टेज पर थी कि उससे उनके अंदरुनी अंग सिकुड़ गए? या फिर रही-सही कसर इंजेक्शन के हेवी डोज ने पूरी कर दी? पुलिस ने मौत की वजह का तो पता लगा लिया है, लेकिन उसे इंजेक्शन के एफेक्ट का सच अब भी जानना बाकी है.

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही शरीर के कुछ अंदरुनी अंगों के लाल पाए जाने की बात भी सामने आई थी. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा इनफेक्शन के साथ-साथ प्वाइजनिंग के मामलों में भी हो सकता है. कई जहरीले पदार्थ ऐसे होते हैं, जो पेट में ऐसा असर दिखाते हैं. ऐसे में पुलिस को उनके शरीर में जहर होने या ना होने का सच जानना था, जो विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद साफ हो गया. जहर की बात नहीं मिली. पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने पाया था कि साध्वी के हाथ और पांव के नाखुन उनकी मौत के दौरान बिल्कुल नीले पड़ गए थे. कई लोग इसे प्वाइजनिंग की निशानी बता रहे थे. लेकिन फॉरेंसिक मेडिसीन और टॉक्सिकोलॉजी के एक्सपर्ट की माने तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी से कई बार ऐसा होता है. इसीलिए अक्सर ये देखा गया है कि हैंगिंग या ड्राउनिंग के केसेज़ में जब किसी की जान जाती है, तो उसके शरीर में भी नाखून नीले पड़ जाते हैं. अब हिस्टोपैथोलॉजिकल एग्जामिनेशन यानी विसरा रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये साफ हो गया है कि बीमारी की हालत में उनकी सांस रुक गई, जिसके चलते उनके नाखुनों का रंग बदला था.

    ये तो रही साध्वी को जहर दिए जाने या फिर उनके खिलाफ किसी साजिश की आशंका के मद्देनजर की गई पुलिस की जांच का सच, लेकिन जिस एक मामले ने साध्वी की मौत के केस को सबसे ज्यादा उलझा दिया था, वो था उनकी मौत के बाद उनके इंस्टा हैंडल से पोस्ट किया गया उनका कथित सुसाइड नोट। तो पुलिस ने इस मामले की भी पड़ताल की और इसका सच ढूंढ निकाला.

    छानबीन में सामने आया था कि 28 जनवरी को साध्वी की मौत के बाद खुद उनके पिता वीरमनाथ ने उनके मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर उनके इंस्टा हैंडल से साध्वी के नाम से एक सुसाइड नोट पोस्ट किया था और इस पोस्ट उन्होंने अपने ड्राइवर भोमाराम से लिखवाया था. इस पोस्ट में साध्वी के हवाले से लिखा गया था, 'मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जीया. दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है. आज अंतिम श्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली, मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं व पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा. मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा. अग्निपरीक्षा के लिए निवेदन किया लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है. मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा.' 

    जाहिर है, इस सुसाइड नोट में वो अपनी मौत की बात भी लिखती हुई दिख रही थी और साथ ही अग्निपरीक्षा देने की पेशकश करने का भी जिक्र कर रही थी, ये पेशकश. जो वो पहले भी वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कर चुकी थी. यानी उनकी मौत का कनेक्शन उस वायरल वीडियो से भी जुड़ता है, जिसने उनकी और उनके पिता और गुरु की जिंदगी में भूचाल ला दिया था. ऐसे में पुलिस को सुसाइड नोट और वीडियो वाले मामले की भी जांच करनी थी. पुलिस ने इस मामले की जांच की और ये साफ हुआ कि साध्वी के पिता वीरमनाथ ने बेटी की मौत के बाद जज्बात में आकर उनकी इंस्टा आईडी से वो नोट पोस्ट करवाया था, इसके पीछे कोई साजिश जैसी बात नहीं थी.

    अब ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर वायरल वीडियो का वो मामला क्या था? 13 जुलाई 2025 यही वो तारीख थी, जब साध्वी प्रेम बाईसा का एक प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जाने लगे. ये वीडियो जोधपुर के उसी कुटीर आश्रम का बताया जाता है, जहां साध्वी प्रेम बाईसा की रिहायश थी. वीडियो की तारीख के मुताबिक ये तस्वीरें 8 जनवरी 2021 की रात दस बज कर 22 मिनट की हैं. वीडियो में साध्वी एक कमरे में बिस्तर पर लेटी नजर आ रही हैं, जबकि कमरे में आती-जाती एक महिला उनसे बातचीत कर रही है. इसी बीच भगवा वस्त्र पहने,सिर पर पगड़ी लगाए एक शख़्स सीधे साध्वी के कमरे में पहुंचता है और साध्वी के गालों को छू कर उन्हें पुचकारने लगता है. इसके बाद साध्वी बिस्तर से उठती है और उस आदमी के गले लग जाती हैं. वो शख्स भी साध्वी को आलिंगन करते हुए थोड़ी देर के लिए उन्हें गोद में उठा लेता है.

    बस, इसी वीडियो के बहाने सोशल मीडिया पर लोग साध्वी और उनके साथ नजर आ रहे शख्स को जज करने लगते हैं और उनके आचरण पर सवाल उठाए जाने लगते हैं. लेकिन पिता के साथ साध्वी की इन निजी तस्वीरों ने साध्वी और उनके गुरु के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए थे, ये और बात है कि तब साध्वी ने इस वीडियो के लीक होने पर ना सिर्फ आश्रम के ही कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, बल्कि इसे लेकर अपनी सफाई भी दी थी. साध्वी ने तब बताया था कि ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो गहरे अवसाद में थीं और उनके पिता उनसे गले लग कर उन्हें ढांढस बंधा