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  • अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारी, 9 जुलाई को मशहद में होगा अंतिम संस्कार; भारी जनसैलाब की संभावना

    अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारी, 9 जुलाई को मशहद में होगा अंतिम संस्कार; भारी जनसैलाब की संभावना

    तेहरान 
    ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तारीख की घोषणा कर दी गई है. तेहरान प्रशासन के अनुसार राजकीय अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होगी, जबकि 9 जुलाई को उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में मुहर्रम के आयोजनों का दौर जारी है। 

    तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने बताया कि मरहूम सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार टाल दिया गया है. खामेनेई को लेकर पहले जो कार्यक्रम तय किया गया था, उसमें बदलाव किया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मुहर्रम के दौरान होने वाले पारंपरिक आयोजनों और शोक सभाओं पर असर न पड़े। 

    फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी को दिए बयान में अलीरेजा जकानी ने कहा कि अंतिम संस्कार मुहर्रम के 10 दिनों के बाद करने का फैसला लिया गया है. यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि लोग इमाम हुसैन के लिए अपना वार्षिक शोक पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ मना सकें. शिया समुदाय के लिए इमाम हुसैन का विशेष महत्व है। 

    680 CE में कर्बला की लड़ाई में उनकी शहादत को याद करते हुए हर वर्ष मुहर्रम के दौरान बड़े पैमाने पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसी वजह से अली खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम  4 जुलाई से शुरू होगा और 9 जुलाई को मशहद में उन्हें दफनाया जाएगा. इस दौरान भारी जनसमूह के जुटने की उम्मीद है। 

    अमेरिकी-इजराइली हमले में हुई थी मौत
    लेकिन मेयर अलीरेजा जकानी ने न्यूज एजेंसी के एक बयान में कहा कि समारोह को मुहर्रम के पहले 10 दिनों के बाद तक के लिए टाल दिया गया है, ताकि लोग इमाम हुसैन के लिए अपना सालाना शोक पूरा कर सकें. हुसैन 680 CE में कर्बला की लड़ाई में मारे गए शुरुआती शिया नेता थे। 

    इसका मतलब है कि खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से शुरू होगा. तेहरान के अधिकारियों ने पहले कहा था कि उन्हें 20 मिलियन लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 

    दफनाये जाने का कार्यक्रम मूल रूप से मार्च में निर्धारित था, लेकिन युद्ध के कारण स्थगित कर दिया गया था. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, इसके पहले 4 जुलाई से तेहरान में तीन दिनों तक अंतिम संस्कार समारोह चलेगा, जिसके बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में एक और समारोह होगा। 

    दफनाए जाने के कार्यक्रम में हुई देरी
    ईरानी अधिकारियों ने घोषणा की है कि पूर्व सर्वोच्च नेता को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में मारे जाने के 132 दिन बाद 9 जुलाई को उनके गृहनगर मशहद में दफनाया जाएगा. यह ऐसे समय में आया है जब खामेनेई के दफनाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि उनकी हत्या के 100 से अधिक दिन बीत चुके हैं। 

    मूल रूप से दफनाया जाने का कार्यक्रम मार्च में होने की उम्मीद थी, लेकिन संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं, उनके अवशेषों की स्थिति और उनके बेटे और उत्तराधिकारी, मोजतबा खामेनेई को सत्ता के हस्तांतरण को लेकर महीनों तक चली अटकलों के बीच इसमें देरी हुई। 

    एक अनुमान के अनुसार मरहूम सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में दुनियाभर से करीब दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं. यही वजह है कि सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्थाओं को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. अली खामेनेई ने लगभग 37 वर्षों तक इस्लामिक रिपब्लिक का नेतृत्व किया था। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को US और इजरायल ने अपने संयुक्त हमलों में सेंट्रल तेहरान स्थित अली खामेनेई के घर में उनको मार दिया था. इसी दिन मिडिल ईस्ट शुरू हुआ था. उनकी मौत के बाद 4 मार्च को राजकीय अंतिम संस्कार आयोजित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन युद्ध की वजह से स्थगित कर दिया गया। 

    ईरान सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार की नई तारीखों की घोषणा के बाद देशभर में तैयारियां तेज हो गई हैं. तेहरान से लेकर मशहद तक होने वाले इन कार्यक्रमों पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह आयोजन ईरान के इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक श्रद्धांजलि सभाओं में से एक माना जा रहा है। 

  • केंद्र-राज्य सहयोग से तेज होगा विकास, सीएम विष्णु देव साय ने बताई प्रगति की नई दिशा

    केंद्र-राज्य सहयोग से तेज होगा विकास, सीएम विष्णु देव साय ने बताई प्रगति की नई दिशा

    केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट

    रायपुर 
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की। 

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी।

    इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।

  • ATS एक्शन: भोपाल में कथित कट्टरपंथी नेटवर्क का पर्दाफाश, पाकिस्तान से भेजे गए दस्तावेजों की जांच शुरू

    ATS एक्शन: भोपाल में कथित कट्टरपंथी नेटवर्क का पर्दाफाश, पाकिस्तान से भेजे गए दस्तावेजों की जांच शुरू

    भोपाल

    मध्य प्रदेश ATS ने भोपाल से एक ऐसे कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिसके तार पाकिस्तान, देवबंद, डार्क ऐप्स, जिहादी साहित्य, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग और अफगानिस्तान तक जाते बताए जा रहे हैं. पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार 35 वर्षीय मोहम्मद फराज को एजेंसी एक ऐसे इंटरस्टेट नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही है, जिसे कथित तौर पर लोन वुल्फ हमलों के लिए तैयार किया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा था. निर्देश साफ थे. हथियार खरीदो, तैयार रहो और जरूरत पड़ने पर विदेश जाने के लिए भी तैयार रहो. जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को मिलिशिया ट्रेनिंग के बाद दुनिया के दूसरे देशों में भी जिहाद के नाम पर लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी थी।

    पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें
    MP ATS के IG डॉ. आशीष ने बताया, “मोहम्मद फराज, जो पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके का रहने वाला है, उसे MP ATS ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया. अदालत ने उसे विस्तृत पूछताछ के लिए 16 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

    जानकारी के अनुसार फराज भोपाल में एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था. बाहर से सामान्य जिंदगी, लेकिन मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों में एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर उसकी गहन जांच की जा रही है. ATS का दावा है कि वह कथित तौर पर स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था।

    जांच के दौरान ATS ने आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें बरामद करने का दावा किया है. एजेंसी अब उसके डिजिटल डेटा, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन संपर्कों और संदिग्ध ग्रुप्स की परतें खोल रही है।

    मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी
    सूत्रों के अनुसार फराज सिर्फ डिजिटल कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित नहीं था. वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था. एजेंसियों को शक है कि वह कुछ डार्क ऐप्स के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में प्रारंभिक तौर पर गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आने की बात कही जा रही है।

    ATS के मुताबिक यह कार्रवाई खास इनपुट के आधार पर की गई. एजेंसी को सूचना मिली थी कि फराज एक पाकिस्तानी WhatsApp ग्रुप से जुड़ा हुआ है और सीमा पार बैठे हैंडलर के निर्देश पर मध्य प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

    पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले 5-6 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था. ATS का दावा है कि नईम ने ही फराज को पाकिस्तानी हैंडलर से जोड़ा. इसके बाद फराज धीरे-धीरे इस नेटवर्क में गहराई तक उतरता चला गया।

    मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई
    जांच के दौरान देवबंद के एक मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है. एजेंसियां अब इन संपर्कों की भूमिका की जांच कर रही हैं. ATS यह पता लगाने में जुटी है कि फराज किन-किन लोगों के संपर्क में था, क्या कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था और क्या स्थानीय स्तर पर भी उसे मदद मिल रही थी।

    जांच एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के लिए उकसाया. उसे बताया गया कि भारत में कई युवाओं को पहले ही तैयार किया जा चुका है और अब उसे भी इसी काम के लिए खुद को तैयार करना होगा. ATS सूत्रों का दावा है कि फराज इस कदर कट्टरपंथी हो चुका था कि वह हैंडलर के किसी भी आदेश को अंजाम देने के लिए तैयार था।

    शुरुआती पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह Telegram और WhatsApp के जरिए भारत, पाकिस्तान और दूसरे देशों के कई संदिग्ध कट्टरपंथी समूहों से जुड़ा हुआ था. जांच में यह भी सामने आया है कि नईम अब्दुल्ला ने उसे मारे गए पाकिस्तानी आतंकी खालिद सैफुल्लाह का नाम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया था।

    युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने का काम
    ATS का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था. उन्हें पासपोर्ट बनवाने को कहा गया था, ताकि आगे चलकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाकर कथित आतंकी प्रशिक्षण लिया जा सके ।

    जांच एजेंसी के मुताबिक फराज ने पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया था. वह अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाने के लिए तैयार था. एजेंसियां अब यह खंगाल रही हैं कि क्या उसकी विदेश यात्रा की कोई तारीख, रूट या फंडिंग चैनल भी तय किया गया था।

    ATS सूत्रों के अनुसार युवाओं को भड़काने के लिए इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कथित प्रशिक्षण वीडियो, जिहादी साहित्य और डिजिटल दस्तावेज साझा किए जा रहे थे. फराज के मोबाइल से बरामद कथित सामग्री को एजेंसी उसके बयानों की पुष्टि करने वाला अहम डिजिटल सबूत मान रही है।

    जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज और इस ग्रुप से जुड़े अन्य युवाओं को प्रतिबंधित संगठन PFI के कथित Mission 2047 एजेंडे की ओर भी धकेलने की कोशिश की. आरोप है कि फराज से शपथ दिलवाई गई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को न मानते हुए हथियारबंद संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा गया।

    इस मामले में भोपाल के STF थाने में मोहम्मद फराज और देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के खिलाफ BNS की धारा 152 और UAPA की धारा 13(1)(B) और 18 के तहत केस दर्ज किया गया है. नईम अब्दुल्ला की तलाश जारी है।

    भोपाल पुलिस तक को नहीं थी इस एक्शन की जानकारी
    आरोपी की गिरफ्तारी और पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई. सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन की जानकारी भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस तक को नहीं दी गई थी. ATS ने गिरफ्तारी से लेकर पूछताछ तक पूरे ऑपरेशन को बेहद सीमित दायरे में रखा।

    अब ATS और अन्य एजेंसियां इस कथित पैन-इंडिया नेटवर्क की पूरी कुंडली खंगाल रही हैं. फराज के फोन, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, पासपोर्ट, विदेशी संपर्कों, देवबंद लिंक, डार्क ऐप्स और स्थानीय संपर्कों की जांच की जा रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भोपाल से पकड़ा गया फराज सिर्फ एक कट्टरपंथी युवक था या फिर सीमा पार से रिमोट कंट्रोल हो रहे एक बड़े इंटरस्टेट मॉड्यूल का हिस्सा. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में देश के किन-किन शहरों से युवा जुड़े थे और क्या कोई बड़ा हमला अंजाम देने की तैयारी जमीन तक पहुंच चुकी थी. फराज फिलहाल 16 जून तक ATS रिमांड पर है. पूछताछ में एजेंसी के सामने तीन बड़े सवाल हैं. पाकिस्तान में बैठा हैंडलर कौन है, इंटरस्टेट ग्रुप में कितने लोग जुड़े हैं और क्या लोन वुल्फ हमलों की तैयारी सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक थी या उससे आगे भी बढ़ चुकी थी।

  • मध्य प्रदेश में तीसरी संतान पर कार्रवाई का मामला गरमाया, CM के आश्वासन के बावजूद अधिकारी की सेवा समाप्त

    मध्य प्रदेश में तीसरी संतान पर कार्रवाई का मामला गरमाया, CM के आश्वासन के बावजूद अधिकारी की सेवा समाप्त

    भोपाल
    मध्यप्रदेश की नौकरशाही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी नियमों और राजनीतिक घोषणाओं के बीच चल रहे टकराव को उजागर कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में स्पष्ट कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाएगी, लेकिन उनकी घोषणा के बाद ही सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

    यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस नियम के तहत कार्रवाई हुई, उसी नियम को लेकर सरकार बदलाव के संकेत दे चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री राहत का संदेश दे चुके थे, तब विभाग ने इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की?

    यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस घोषणा के 48 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर को बर्खास्त करने का आदेश गुरुवार को जारी किया गया। यह शुक्रवार को सामने आया।

    CM ने तीन संतान वाला प्रस्ताव किया था रद्द मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था।

    मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

    नौकरी के दौरान हुआ तीसरी संतान का जन्म
    दरअसल, अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिका
    यत की गई थी कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ है। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था।

    दरअसल, अशोक सिंह परिहार पर आरोप था कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए और दस्तावेजों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। जांच रिपोर्ट के बाद पंजीयन विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया।

    दिलचस्प बात यह है कि परिहार ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी, लेकिन विभाग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि 1992 से सरकारी सेवा में रहने वाला कर्मचारी नियमों से अनभिज्ञ होने का दावा नहीं कर सकता।

    जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोप सही
    जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था।

    अफसर ने कहा था- नियम की जानकारी नहीं
    जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।

    अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मुख्यमंत्री की घोषणा केवल भविष्य की नियुक्तियों के लिए थी या वर्तमान कर्मचारियों पर भी लागू होनी थी? यदि सरकार नियम बदलना चाहती थी तो विभागों को स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए गए? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या एक अधिकारी की नौकरी उस समय चली गई जब सरकार उसी नियम को बदलने की तैयारी में थी?

    फिलहाल पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अभी तक कोई नया शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए विभाग ने मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई की है। वहीं अशोक सिंह परिहार के पास अब विभागीय अपील और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है।

    यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की नौकरी का नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की उस खाई का भी है, जहां एक तरफ राजनीतिक घोषणा होती है और दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्था के आधार पर फैसले जारी रहते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

  • West Bengal Raid: अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस एक्शन से हड़कंप, मदन मित्रा के आवास पर भी छापेमारी

    West Bengal Raid: अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस एक्शन से हड़कंप, मदन मित्रा के आवास पर भी छापेमारी

    कोलकत्ता 
    पश्चिम बंगाल की राजनीति शनिवार को पूरी तरह गरमा गई। एक तरफ कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की बड़ी टीम ने छापेमारी की, तो दूसरी तरफ नगर पालिका भर्ती घोटाले में ईडी ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इन दोनों घटनाओं ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है।

    पश्चिम मेदिनीपुर जिले के एक थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में शनिवार तड़के पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। यह कार्रवाई उस समय हुई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के समन और पूछताछ का सामना कर रहे हैं।

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने और कोलकाता पुलिस के अधिकारी तड़के करीब तीन बजे के बाद अभिषेक बनर्जी के पतुआपारा स्थित घर के बाहर पहुंचे। कुछ ही समय बाद केंद्रीय बलों के जवानों ने पूरे परिसर को घेर लिया और बाहर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली, जबकि पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई।

    तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने घर का ताला तोड़कर जबरन प्रवेश किया और पूरे घर की तलाशी ली। घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तुरंत अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंच गईं। इस पूरे अभियान को लेकर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

    देर रात करीब ढाई बजे शुरू हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर आखिरकार घर का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी।

    टीएमसी नेता की शिकायत पर की गई कार्रवाई
    यह सनसनीखेज कार्रवाई शालबनी के एक स्थानीय तृणमूल नेता की शिकायत पर की गई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित राय पर टिकट दिलाने के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस तड़के तीन बजे अभिषेक के घर पहुंची और करीब पांच घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया।

    भागी-भागी आईं ममता बनर्जी
    इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुबह-सुबह गाड़ी से सीधे अभिषेक के घर पहुंचीं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। तलाशी को लेकर अभिषेक बनर्जी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पुलिस ने ताला तोड़कर पूरे घर की तलाशी ली है। हमारे पास इसके सारे रिकॉर्डिंग हैं, हमने जांच में पूरा सहयोग किया है।

    चौतरफा घिरे अभिषेक बनर्जी
    गौर करने वाली बात यह है कि अभिषेक बनर्जी इस वक्त चौतरफा कानूनी मुकदमों से घिरे हैं। फर्जी हस्ताक्षर मामले में गुरुवार को ही सीआईडी ने उनसे साढ़े पांच घंटे पूछताछ की थी, जिसमें उन्हें रविवार (14 जून) को फिर पेश होना है।

    इसके अलावा, सोमवार (15 जून) को प्राथमिक भर्ती घोटाले में ईडी ने समन किया है और मंगलवार (16 जून) को धमकी मामले में सीआइडी के सामने उन्हें पेश होना है। इन सबके बीच शनिवार तड़के हुई इस औचक छापेमारी ने राज्य की राजनीति गरमा दी है।

    यह तलाशी अभियान चार घंटे से अधिक समय तक चला। सुबह तक पुलिस और अधिकारी घर के अंदर मौजूद रहे। बाद में कुछ अधिकारी बाहर निकलते और फिर अंदर जाते देखे गए। घर से बाहर आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर का ताला तोड़ा और हर कमरे की गहन तलाशी ली। उन्होंने कहा, “उन्होंने ताला तोड़ा, घर में घुसे और हर कमरे की जांच की।” हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।

    शनिवार को ही पश्चिम बंगाल में दूसरा बड़ा घटनाक्रम नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़ा सामने आया, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग यानी धन शोधन की जांच के तहत की गई।

    ईडी की टीम ने मदन मित्रा और उनसे जुड़े करीब सात परिसरों को निशाना बनाया। मदन मित्रा उत्तर 24 परगना जिले की कामरहाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं और वे पहले राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

    जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर पालिकाओं में भर्ती के दौरान अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले रिश्वत ली गई। यह रिश्वत नकद और सोने के रूप में बिचौलियों के जरिए दी और ली गई। ईडी के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 125 कथित अवैध नियुक्तियों से मदन मित्रा के संबंध होने की बात सामने आई है।

    ईडी की टीम फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। हालांकि, छापेमारी में क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    इस घोटाले की शुरुआत स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान हुई थी। उस समय ईडी ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी की थी, जहां से कई अहम दस्तावेज मिले थे। वहीं से नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच आगे बढ़ी।

    बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने भी इस मामले में समानांतर जांच शुरू की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने लगे, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई।

    इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा ने नगर पालिका के सभी तृणमूल पार्षदों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। इसी बीच कामरहाटी नगर पालिका के चेयरमैन गोपाल साहा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

    इसके बाद मदन मित्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोपाल साहा को लगातार अपमान और उपेक्षा झेलनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रशासनिक शक्तियां लगभग खत्म कर दी गई थीं, जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। मदन मित्रा ने कार्यकर्ताओं और पार्षदों से इस घटना के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की अपील भी की।

    इन दोनों बड़ी कार्रवाइयों ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति को तनावपूर्ण मोड़ पर ला दिया है, जहां एक तरफ सत्ता पक्ष के नेताओं पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।

  • पंजाब-चंडीगढ़ में मौसम का प्रहार: 3 की मौत, करोड़ों का नुकसान; अगले 48 घंटे भारी बारिश-आंधी की चेतावनी

    पंजाब-चंडीगढ़ में मौसम का प्रहार: 3 की मौत, करोड़ों का नुकसान; अगले 48 घंटे भारी बारिश-आंधी की चेतावनी

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में तेज आंधी-तूफान और बारिश से तापमान में 5.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इससे अब यह गिरकर सामान्य से 6.3 डिग्री नीचे पहुंच गया है।  मौसम विभाग ने शनिवार व रविवार के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। इसके तहत पंजाब में 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी और बारिश होगी। इसके बाद 15 जून से भी चार दिन पंजाब में 13 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 

    मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, आज 13 जून को पंजाब के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, मानसा, रूपनगर और मोहाली में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई।

    राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.7 डिग्री सेल्सियस फरीदकोट में दर्ज किया गया। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। अब तक करीब 3 लोगों की मौत हो चुकी, जबकि पावरकॉम को आंधी के कारण खंभे और ट्रांसफार्मर टूटने के कारण 2.6 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है।

    इन जिलों में पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला, मानसा, संगरूर व पटियाला शामिल हैं। विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिन फिलहाल भीषण गरमी से राहत रहेगी और तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है। 

    पंजाब में सबसे अधिक 36.7 डिग्री का पारा फरीदकोट का दर्ज किया गया। पंजाब का न्यूनतम पारा भी 5 डिग्री गिर गया है। इससे न्यूनतम पारा सामान्य से 4.4 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। सबसे कम 19.8 डिग्री का न्यूनतम पारा एसबीएस नगर का दर्ज किया गया।

    बारिश-आंधी के 3 बड़े असर
        850 से ज्यादा बिजली के खंभे टूटे: पंजाब राज्य बिजली निगम (PSPCL) की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक आंधी ने बिजली वितरण नेटवर्क को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। 850 से ज्यादा बिजली के खंभे तेज हवाओं के कारण उखड़कर जमीन पर गिर गए। 129 ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। 8.57 किलोमीटर लंबी बिजली लाइनें और भारी मात्रा में लो-वोल्टेज व हाई-वोल्टेज केबल टूट गए, जिसके कारण कई जिलों के दर्जनों गांवों और शहरों में ब्लैकआउट (अंधेरा) रहा।

        शेड्यूल के मुकाबले 625 मेगावाट कम बिजली ली: गर्मी कम होने की वजह से राज्य की कुल बिजली मांग 12,074 मेगावाट रही है। इसमें राज्य में 4,384 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि 7,686 मेगावाट बिजली ग्रिड से ली गई है। शेड्यूल के मुकाबले 625 मेगावाट कम बिजली ली जा रही है, इसलिए पंजाब अंडर ड्रॉल की स्थिति में है।

        अब तक 3 लोगों की मौत: अमृतसर में बारिश के कारण दीवार गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि फाजिल्का के गांव झंगड़ भैणी में सीमेंट का शेड उड़कर सुनीता रानी पर गिर गया, जिससे उसकी गर्दन कट गई और उसकी मौत थी। इसके अलावा संगरूर में भी एक व्यक्ति की मौत को गई।

    सामान्य से 6 फीसदी अधिक बारिश
    पंजाब के कई इलाकों में शुक्रवार को अच्छी बारिश हुई। कुछ जगहों पर तेज गरज-चमक के साथ बिजली कड़की, ओले गिरे और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं। राज्य में औसतन 9.3 मिमी बारिश दर्ज की गई।

    सबसे ज्यादा बारिश नवांशहर (एसबीएस नगर) में 55.6 मिमी हुई। यहां कुछ जगहों पर 7 सेंटीमीटर तक पानी गिरा। 1 से 12 जून के बीच पंजाब में औसतन 13.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 6 फीसदी ज्यादा है।

    पंजाब में शुक्रवार सुबह साढ़े 8 बजे तक एसबीएस नगर में 37.2 एमएम, अमृतसर में 33.9 डिग्री, लुधियाना में 9.6 एमएम, पटियाला में 10.2 एमएम, मोहाली में 21.0 एमएम, गुरदासपुर में 32.2 एमएम, बठिंडा में 24.0 एमएम, पठानकोट में 8.0, और रूपनगर में 9.0 एमएम की बारिश दर्ज की गई। अमृतसर का अधिकतम पारा 32.8 डिग्री, लुधियाना का भी 32.8 डिग्री, पटियाला का 32.7 डिग्री, पठानकोट का 33.7 डिग्री, बठिंडा का 32.0 डिग्री, फिरोजपुर का 34.4 डिग्री, एसबीएस नगर का 30.8 डिग्री, फाजिल्का का 34.7 डिग्री, होशियारपुर का 32.1 डिग्री, रूपनगर का 33.8 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 20.5 डिग्री, लुधियाना का 20.4 डिग्री, पटियाला का 22.2 डिग्री, पठानकोट का 23.2 डिग्री, बठिंडा का 24.7 डिग्री, फिरोजपुर का 23.6 डिग्री, होशियारपुर का 22.5 डिग्री और रूपनगर का 21.2 डिग्री दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी हवाओं के कारण पंजाब के मौसम में अचानक बदलाव आया है।

    तेज आंधी से पावरकाम को 2.06 करोड़ का नुकसान
    पंजाब में वीरवार को चली तेज आंधी व तूफान से बिजली वितरण ढांचे को व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ है। पावरकाम को 2.06 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक तेज आंधी व तूफान से 129 ट्रांसफार्मर, 850 खंबे और 8.57 किलोमीटर बिजली की तारें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे पंजाब के कईं इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित हुई। 

    आंकड़ों के अनुसार पावरकाम को बिजली सप्लाई में बाधा संबंधी 1 लाख 9 हजार शिकायतें प्राप्त हुईं। कुछ घंटों के अंदर पावरकाम ने ज्यादातर शिकायतों का निपटारा करके बिजली सप्लाई बहाल कर दी। लेकिन इस दौरान लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पंजाब में झुलसा देने वाली गरमी के बीच वीरवार को अचानक मौसम बदला और 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी आई और तेज बारिश हुई। इससे राज्य भर में बिजली वितरण ढांचे को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा है। बड़ी गिनती में खंबों और ट्रांसफार्मरों के अलावा कईं किलोमीटर तक बिजली की तारें क्षतिग्रस्त हुईं। इससे बिजली सप्लाई बाधित होने से कईं घंटों तक लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 

    वीरवार को पावरकाम के कंट्रोल रूम और आनलाइन प्रणाली के जरिये बिजली बंद होने की रिकार्ड 1 लाख 9 हजार शिकायतें दर्ज हुईं। यह इस मौजूदा धान सीजन के दौरान अब तक एक ही दिन में आईं सबसे अधिक शिकायतें हैं। इस स्थिति को देखते हुए पावरकाम के तकनीकी और फील्ड स्टाफ ने युद्ध स्तर पर शिकायतों के निपटारे के लिए काम शुरू किया। 

    रात को ही प्रभावित क्षेत्रों में जाकर क्षतिग्रस्त खंबों, ट्रांसफार्मरों व तारों की मरम्मत का काम किया गया। इस दौरान लगातार पड रही बारिश व तेज हवाओं के कारण पावरकाम के कर्मचारियों को काफी दिक्कत भी हुई।

    जून के अंत में आएगा मानसून
    मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल ने कहा कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो गया है। इसके अलावा ईस्टरली विंड आ रही है। आने वाले दोनों में बारिश और आंधी का मौसम बना रहेगा। हालांकि आंधी की रफ्तार कम हो जाएगी। बठिंडा, अमृतसर, तरनतारन, जालंधर और होशियारपुर में बहुत तेज हवाएं चलेंगी। जिस तरह अभी तक मौसम की रफ्तार है, उससे साफ है कि मानसून तय समय से जून अंत में आ जाएगा।

    अगले 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम

        14 जून को आंधी-बारिश का अलर्ट: इसमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा और मानसा शामिल हैं।

        15 जून को आंधी-बारिश का अलर्ट: इसमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा, मानसा, संगरूर और पटियाला शामिल हैं।

        16 जून को बारिश अलर्ट: इसमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला, मानसा, संगरूर और पटियाला शामिल हैं।

     

  • AI vs Water Crisis: 1.3 अरब लोगों के हिस्से का पानी निगलने का दावा, डेटा सेंटरों के खिलाफ दुनिया भर में उठी आवाज़

    AI vs Water Crisis: 1.3 अरब लोगों के हिस्से का पानी निगलने का दावा, डेटा सेंटरों के खिलाफ दुनिया भर में उठी आवाज़

     नई दिल्ली

    दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्रेज जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके खतरनाक असर भी सामने आने लगे हैं. कई देशों में एंटी एआई प्रोटेस्ट जमीन पर देखने को मिल रहे हैं। यूएन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल उर्जा, पानी और जमीन जैसे संसाधनों पर बड़ा दबाव डाल रहा है. यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मामला नहीं है, बल्कि अब यह पर्यावरण और फ्यूचर की स्थिरता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। 

    अगर सिर्फ बिजली की बात करें तो इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार 2030 तक दुनिया भर के डेटा सेंटर करीब 945 टेरावॉट-आवर बिजली खपत कर सकते हैं. यह आंकड़ा समझने के लिए इसे आसान तरीके से समझिए। 

    एक देश के बराबर बिजली की खपत! 
    945 टेरावॉट-आवर बिजली का मतलब है जापान जैसे पूरे देश की सालाना बिजली खपत के बराबर. यानी जो बिजली एक पूरा विकसित देश इस्तेमाल करता है, उतनी बिजली सिर्फ AI और डेटा सेंटर खा जाएंगे. यह ग्लोबल बिजली खपत का करीब 3 प्रतिशत तक हो सकता है। 

    अब इसे और आसान भाषा में समझें तो अगर एक आम भारतीय घर साल भर में जितनी बिजली इस्तेमाल करता है, उसी बिजली में हजारों घर चल सकते हैं. लेकिन उतनी ही बिजली AI के सर्वर कुछ ही सेकंड में इस्तेमाल कर देते हैं जब लाखों लोग एक साथ AI से सवाल पूछ रहे होते हैं। पहले बिजली फैक्ट्री, घर और ट्रांसपोर्ट में खर्च होती थी. अब एक बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया खा रही है, जो दिखती नहीं लेकिन असर बहुत बड़ा डालती है। 

    लेकिन असली संकट पानी है. Earth.Org की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक AI डेटा सेंटर करीब 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी खपत कर सकते हैं. यह पानी सर्वर को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होता है, क्योंकि AI मॉडल्स को चलाने वाले चिप्स बेहद ज्यादा गर्म होते हैं। 

    1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी
    अब इस आंकड़े को समझना जरूरी है. 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी का मतलब है करीब 1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी. यानी जितना पानी भारत जैसे देश की पूरी आबादी को चाहिए, उतना पानी सिर्फ मशीनों को ठंडा रखने में खर्च हो सकता है। 

    अगर इसे और आसान तरीके से समझें तो सोचिए एक शहर में रोज पानी की किल्लत होती है, लोग टैंकर मंगाते हैं, पानी बचाने की अपील होती है. वहीं दूसरी तरफ डेटा सेंटर लाखों लीटर पानी सिर्फ अपने सर्वर को ठंडा रखने में खर्च कर रहे हैं. यानी एक तरफ इंसान पानी के लिए जूझ रहा है और दूसरी तरफ मशीनें वही पानी इस्तेमाल कर रही हैं। 

    अब इस मुद्दे पर सिर्फ एक्सपर्ट ही नहीं, आम लोग भी विरोध करने लगे हैं. खासकर अमेरिका में AI डेटा सेंटर के खिलाफ विरोध तेजी से बढ़ रहा है। 

    अमेरिका में डेटा सेंटर्स का विरोध
    रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के कई शहरों में लोगों ने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का विरोध किया है. इसकी सबसे बड़ी वजह है पानी और बिजली की भारी खपत. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन डेटा सेंटर की वजह से उनके इलाके में पानी की कमी और बिजली पर दबाव बढ़ सकता है। 

    कुछ जगहों पर तो प्रोजेक्ट्स को रोकना भी पड़ा. अमेरिका में पिछले साल करीब 200 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स विरोध के चलते या तो रोक दिए गए या देरी का शिकार हुए. यह दिखाता है कि यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि अब यह पब्लिक इश्यू बन चुका है। 

    लोगों को डर है कि कंपनियां उनके संसाधनों का इस्तेमाल करके AI चला रही हैं, लेकिन उसका फायदा आम जनता को उतना नहीं मिल रहा. खासकर पानी की कमी वाले इलाकों में यह चिंता और ज्यादा गहरी है। 

    यूनाइटेड नेशन्स से जुड़ी रिपोर्ट्स में भी साफ चेतावनी दी गई है कि AI का यह बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर पानी, जमीन और क्लाइमेट तीनों पर दबाव बना रहा है. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से पानी की कमी है, वहां डेटा सेंटर का विस्तार बड़ी समस्या बन सकता है। 

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि AI की ज्यादातर बिजली खपत ट्रेनिंग में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में होती है. IEA के विश्लेषण के मुताबिक करीब 80 से 90 प्रतिशत ऊर्जा खपत ‘इंफेरेंस’ में होती है, यानी जब आप और हम AI से सवाल पूछते हैं। 

    मतलब हर बार जब आप ChatGPT से सवाल पूछते हैं, फोटो बनाते हैं या AI वीडियो जनरेट करते हैं, तो उसके पीछे सर्वर चालू होते हैं, बिजली खर्च होती है और उन्हें ठंडा रखने के लिए पानी भी लगता है. यानी AI जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, उतना ही ज्यादा संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा। 

    इसका कोई समाधान है?
    टेक कंपनियां अब ग्रीन एनर्जी, रीसायकल पानी और नए कूलिंग सिस्टम पर काम कर रही हैं. कई कंपनियां दावा करती हैं कि वे अपने डेटा सेंटर को सोलर या विंड एनर्जी से चलाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन असली चुनौती यह है कि AI की डिमांड इतनी तेजी से बढ़ रही है कि ये प्रयास पीछे छूट सकते हैं। 

    आज AI हमारी जिंदगी आसान बना रहा है, लेकिन अगर यही टेक्नोलॉजी भविष्य में पानी और बिजली की कमी की वजह बन जाए, तो यह एक नई समस्या पैदा कर सकती है. AI का फ्यूचर जितना स्मार्ट दिखता है, उसका पर्यावरण पर असर उतना ही गंभीर होता जा रहा है। 

    क्या दुनिया AI और नेचर के बीच बैलेंस बना पाएगी, या फिर टेक्नोलॉजी की यह रफ्तार हमें एक नए संकट की तरफ ले जा रही है? 

  • प्रदेश में ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा: मुख्यमंत्री बोले- गांव-गांव पहुंचेगी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेवा

    प्रदेश में ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा: मुख्यमंत्री बोले- गांव-गांव पहुंचेगी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेवा

    हर शहर, गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगेः मुख्यमंत्री

    सीएम योगी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली 45 इलेक्ट्रिक व 3 हाइड्रोजन बसों को किया फ्लैग ऑफ

    नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी किया शुभारंभ किया सीएम योगी ने

    15 जून तक 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, मांग के अनुरूप 500 तक बढ़ाई जाएगी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या

    लखनऊ,
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ग्रीन मोबिलिटी व सस्टेनेबल डेवलपमेंट का विजन दिया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार आने वाले समय में हर शहर-गांव को पेट्रोल-डीजल मुक्त ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेगी। हर व्यक्ति को बेहतर, आरामदायक व पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवा मिलने पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश में परिवहन विभाग का बेड़ा बड़ा हो रहा है, उनके कार्य भी बड़े दिखने चाहिए।

    सीएम योगी ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 45 इलेक्ट्रिक बसों व 3 हाइड्रोजन बसों को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये फ्लैग ऑफ किया। उन्होंने इस अवसर पर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी शुभारंभ किया।

    15 जून से संचालित होने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 
    अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे गतिरोध बड़ी चुनौतियां हैं। इनके कारण दुनिया वायु प्रदूषण, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओलावृष्टि का सामना कर रही है। दुनिया पर थोपे गए युद्धों की कीमत पूरी मानवता चुका रही है। पीएम के विजन को धरातल पर उतारने के लिए 15 जून से भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डे (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) का संचालन प्रारंभ होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक हब तथा सुचारु वायुसेवा की दृष्टि से यात्रियों, नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीनों अथॉरिटी (नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा) ने परिवहन निगम के माध्यम से यह सेवा प्रारंभ की है। यह नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

    बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरे नोएडा, ग्रेनो व यीडा 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर समेत अन्य औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में उभरी हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों को वहां लाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल परिवहन समय की मांग है। वहां कुछ क्षेत्रों में मेट्रो का संचालन भी हो रहा है, लेकिन लास्ट माइल कनेक्टिविटी की दृष्टि से इलेक्ट्रिक बस का संचालन मील का पत्थऱ साबित होने जा रहा है। 15 जून तक तीनों अथॉरिटी द्वारा 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रारंभ होगा। मांग के अनुरूप इसमें क्रमिक बढ़ोतरी कर 500 बसों का संचालन भी तीनों अथॉरिटी के माध्यम से किया जाएगा। 

    नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में दिख रहा परिवर्तन
    सीएम योगी ने 2017 के पहले और इससे बाद के उत्तर प्रदेश का फर्क समझाया। कहा कि नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में परिवर्तन दिख रहा है और 9 वर्ष में यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार ने किया है। 2017 से पहले टूटी सड़कें, नदारद बिजली, असुरक्षा, अराजकता व अव्यवस्था के वातावरण में नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा था, तब उत्तर प्रदेश में निवेश की बात दिवास्वप्न थी। 2017 के बाद का उत्तर प्रदेश विश्वस्तरीय रोड, एयर कनेक्टिविटी के लिए जाना जाता है। यूपी के पास हाईवे, एक्सप्रेसवे समेत 4 लाख किमी का रोड नेटवर्क है। इंटर स्टेट कनेक्टिविटी सबसे बेहतरीन है। 9 वर्ष पहले जो यूपी बदहाल सड़कों के लिए जाना जाता था, आज उसने एक्सप्रेसवे प्रदेश के रूप में पहचान बनाई है। 

    सीएम ने कहा कि 2019 में प्रयागराज कुंभ के दौरान सरकार ने कैबिनेट में गंगा एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी। मेरठ से प्रयागराज के बीच देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को आश्चर्य होता है कि यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां कभी सड़क व गड्ढे में अंतर का पता नहीं लगता था। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, दिल्ली-मेरठ 12 लेन एक्सप्रेसवे और शीघ्र ही लोकार्पित होने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे नए यूपी की नई पहचान बने हैं। 

    अब यूपी में 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट
    सीएम ने यूपी की बेहतर एयर कनेक्विटी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रयागराज में 11 महीने में एयरपोर्ट बनकर तैयार हुआ। जेवर में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन गया है। कभी त्रेतायुग में भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे, लेकिन इसके बाद अयोध्यावासियों को कभी वायुसेवा प्राप्त नहीं हुई। अयोध्या हजारों वर्ष तक उपेक्षित और आजादी के बाद भी अपमानित रही। आज वहां महर्षि वाल्मीकि को समर्पित एयरपोर्ट संचालित हो रहा है। उप्र में लखनऊ, अयोध्या, काशी, कुशीनगर व नोएडा समेत 5 इंटरनेशनल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। नोएडा एयरपोर्ट यात्रियों के साथ ही कार्गो-एमआरओ हब के रूप में खुद को स्थापित करने जा रहा है। 

    17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन
    सीएम ने कहा कि देश के 20 में से यूपी के 7 शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। 17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित कर रहे हैं। नोएडा में सरकार आज यह सुविधा प्रारंभ कर रही है। पहले इलेक्ट्रिक बसें बाहर से मंगानी पड़ती थीं, लेकिन अब टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड हिंदुजा ग्रुप ने लखनऊ में इलेक्ट्रिक बस के दो-दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर यह सुविधा देनी प्रारंभ की है।

    यीडा में 3 हाइड्रोजन बसों का भी होगा संचालन 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से यमुना अथॉरिटी में तीन अन्य हाइड्रोजन बसें भी संचालित करने जा रहे हैं। यीडा को ये बसें एनटीपीसी ने उपलब्ध कराई हैं। इनमें ग्राउंड या सरफेस वाटर नहीं, बल्कि सीवर वाटर का इस्तेमाल कर हाइड्रोजन का निर्माण होगा। ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी अभिनव अवधारणा बन चुकी है। इन बसों का संचालन भी जेवर एयरपोर्ट के पास करेंगे। वायु प्रदूषण को कम करने, जहरीले वातावरण से बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों को बचाने में इनकी बड़ी भूमिका होगी। 

    नेट जीरो लक्ष्य के प्रति समर्पित सरकार
    सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विश्व बैंक की मदद से 2741 करोड़ रुपये से उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट (यूपी कैंप) प्रारंभ किया है। नगरीय क्षेत्रों में 9 वर्ष पहले हैलोजन बल्ब जलते थे, बहुत ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती थी और उससे आकर्षित होकर कीड़े-मकोड़े जलते थे, जिससे बदबू आती थी। 2017 में सरकार ने 15 लाख से अधिक एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगाईं। इससे ऊर्जा की बचत हुई और कार्बन उत्सर्जन भी कम हुआ। सीएम ने ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं के संचालन में बेरोजगार नौजवानों को प्राथमिकता देने की बात कही। 

    कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी आदि मौजूद रहे।

  • क्या अभी खरीदें या मुनाफा वसूलें? शांति समझौते की अटकलों से उछले सोना-चांदी के दाम, जानिए एक्सपर्ट की राय

    क्या अभी खरीदें या मुनाफा वसूलें? शांति समझौते की अटकलों से उछले सोना-चांदी के दाम, जानिए एक्सपर्ट की राय

    इंदौर 

    शेयर मार्केट में तूफानी तेजी के बाद कमोडिटी मार्केट में भी बड़ी हलचल देखी जा रही है. पिछले कुछ दिनों की गिरावट के बाद सर्राफा बाजार ने यू-टर्न लिया है. ग्लोबल मार्केट में आई मजबूती की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता की बात कही है, नतीजन निवेशकों ने स्टॉक मार्केट के साथ गोल्ड-सिल्वर में खरीदारी पर जोर दिया है. इस दमदार वापसी ने ना केवल ग्लोबल मार्केट के निवेशकों बल्कि भारतीय निवेशकों को भी खुश कर दिया है। 

    एमसीएक्स की बात करें तो सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी आई. सोना जहां 0.66% यानी 979 रुपये की बढ़त के साथ 1,49,902 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है. वहीं चांदी 2,597 रुपये महंगी होकर 2,42,143 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रही है. इस हफ्ते में पहली बार कमोडिटी मार्केट हरे निशान में ट्रेड करता दिखा है। 

    किस लेवल्स पर खरीदें और बेचें?
    निवेशकों के मन में एक सवाल इस समय सबसे ज्यादा आ रहा है कि सोने में तेजी तो है पर किस लेवल पर इसे खरीदा जाए. साथ ही किस लेवल पर इसे निकाल दिया जाए. इसके लिए एनडीटीवी की टीम ने केडिया एडवाइजरी से बात की. उन्होंने बताया कि 1.40 लाख से 1.42 लाख पर निवेशक खरीद सकते हैं. साथ ही इसका ऊपरी लेवल 1.60 से 1.62 लाख पर जा सकता है. अगर स्टॉप लॉस की बात करें तो वो 1.35 से 1.36 लाख के बीच सेट कर सकते हैं. हालांकि केडिया एडवाइजरी के अनुसार ये लेवल्स 6 महीने के निवेश को ध्यान में रखकर बनाए हैं। 

    इंटरनेशनल मार्केट में भी दिखी तेजी
    एमसीएक्स के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निवेशक खूब सोने-चांदी में पैसा लगा रहे हैं. इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड एक बार फिर 4,200 डॉलर प्रति औंस के बड़े लेवल पर पहुंच गया है. मालूम हो कि जंग के पहले दिन से सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 28 फीसदी तक लुढ़क चुका है। 

    क्यों बढ़ा सोना-चांदी?
    सोने-चांदी में आई इस बढ़ते के पीछे की वजह देखें तो कई ऐसे फैक्टर्स रहे, जिन्होंने इन कीमती धातुओं को मजबूत बनाया है. ट्रंप के शांति फॉर्मूले के साथ, कच्चे तेल की कम होती कीमतों ने कमोडिटी मार्केट में एक नई जान फूंकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार ईरान के साथ शांति समझौता बहुत करीब है, ऐसे में दुनियाभर के बाजारों में जंग को लेकर आशंकाएं कम हुई हैं. नतीजन डॉलर से निवेशक खिसक कर अब शेयर मार्केट और सोने-चांदी की तरफ रुख कर रहे हैं। 

    इसके अलावा उम्मीद है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जल्द ही कोई अच्छा समाधान हो सकता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आईं हैं. कच्चा तेल सस्ता होने से दुनियाभर के निवेशक अमेरिकी बाजार से सेफ हेवन कहे जाने वाले सोने में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं। 

  • ‘मिसाइल नहीं, अब होंगे दस्तखत’ वाले दावे पर ईरान का जवाब, बोला- अमेरिका संग समझौते की खबरें महज अटकलें

    ‘मिसाइल नहीं, अब होंगे दस्तखत’ वाले दावे पर ईरान का जवाब, बोला- अमेरिका संग समझौते की खबरें महज अटकलें

    वॉशिंगटन
     पश्चिम एशिया में भयंकर महायुद्ध का काउंटडाउन शुरू हो चुका था, रात के अंधेरे में ईरान में तबाही मचाने के लिए अमेरिकी फाइटर जेट्स और खतरनाक हथियार बिल्कुल तैयार थे, लेकिन अटैक से कुछ मिनट पहले अचानक बाजी पलट गई. जो अमेरिका और ईरान कल तक एक-दूसरे के खून के प्यासे थे, उनके बीच ऐन वक्त पर पर्दे के पीछे एक बहुत बड़ी ‘डील’ फाइनल हो गई. इस सरप्राइज समझौते के बाद ट्रंप ने तुरंत अपना गुस्सा थूककर एक बड़ा यू-टर्न लिया. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर महा-डील का ऐलान कर दिया है और इसके साथ ही ये भी हिंट दी कि इस बार उनकी बात सीधा ईरान के नए पावर सेंटर मोजतबा खामेनेई से हुई है। 

    ट्रंप ने ऐन वक्त पर रोका ईरान पर अटैक
    ट्रंप ने अपने सोशल अकाउंट ट्रूथ सोशल पर लिखा ‘इस बात को ध्यान में रखते हुए कि ईरान के साथ बातचीत ईरानी नेतृत्व के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुच गई है और उसे मंजूरी मिल गई है, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर मैंने आज शाम ईरान के खिलाफ तय हमले और बमबारी रद्द कर दी है। 

    ट्रंप ने आगे लिखा कि ‘बातचीत और आखिरी फैसले में चाहे वो मोटे तौर पर हों या विस्तार से, सभी संबंधित पक्षों ने मंजूरी दे दी है. इन पक्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल, सऊदी अरब, UAE, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और अन्य देश शामिल हैं. जब तक ये समझौता पूरी तरह से तय नहीं हो जाता, तब तक नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी, समझौते पर हस्ताक्षर करने का समय और जगह जल्द ही बताई जाएगी। 

    Iran-US के बीच हो गई महा-डील, टॉप लीडर ने किया एप्रूव
    इस पूरी डील में सबसे बड़ा ट्विस्ट ये रहा कि बातचीत को सीधे ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व, यानी वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और राष्ट्रपति के स्तर पर ले जाया गया था. अब तक ईरान इस बात पर अड़ा हुआ था कि वो किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, लेकिन जब ट्रंप ने ‘आज ही रात’ पूरी ताकत से हमले की कसम खा ली तो तेहरान ने अचानक अमेरिका की शर्तें मान लीं। 

    ईरानी लीडरशिप ने बंद कमरे में अमेरिकी प्रस्तावों की शर्तों को न सिर्फ पढ़ा, बल्कि उन पर पूरी तरह से रजामंदी भी दे दी. जैसे ही ये कन्फर्मेशन व्हाइट हाउस पहुंची, ट्रंप ने तुरंत अपने कमांडर्स को फोन घुमाया और उड़ने के लिए तैयार बमवर्षक विमानों को वापस लौटने का आदेश दे दिया। 

    ट्रंप के दावों को ईरान ने बताया अटकलें
     राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ डील वाले बयान के कुछ घंटों बाद ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और ऐसी खबरें सिर्फ अटकलें हैं. इसके अलावा उन्होंने हाल ही में भारतीय कमर्शियल जहाजों पर हुए अमेरिकी हमलों की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका को जवाबदेह ठहराने की अपील की। 

    ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से बघई ने कहा, 'ईरान ने अभी तक किसी भी समझौते पर अंतिम फैसला नहीं लिया है. हम अपनी 'रेड लाइन्स' पर कभी समझौता नहीं करेंगे। 

    'बारबार रुख बदल रहा है अमेरिका'
    उन्होंने अमेरिका में बार बार रुख बदलने का आरोप लगाते हुए कहा, 'शांति वार्ता की स्थिति शुरू से ही हमारे सामने साफ थी. समझौते का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका था, लेकिन अमेरिकी पक्ष बार-बार अपना रुख बदलता रहा है. इसी के कारण राजनयिक प्रक्रिया लगातार बाधित हो रही है। 

    बघेई ने स्पष्ट किया कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज (Strait of Hormuz) में सुरक्षा कम होने के लिए भी पूरी तरह अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया है। 

    क्या बोले ट्रंप
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से घोषणा की थी कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध का एक शानदार निपटारा (Settlement) कर लिया है, जिसके दस्तावेज अगले कुछ दिनों में अंतिम रूप ले लेंगे. ट्रंप ने दावा किया था कि इस वीकेंड यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह हो सकता है, जिसमें उनकी तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल होंगे. ट्रंप ने ये भी कहा था कि इस समझौते के तहत ईरान कभी-भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। 

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि जैसे ही ईरान के साथ ये समझौता हस्ताक्षरित होगा, वैसे ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंद पड़े होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए आधिकारिक तौर पर दोबारा खोल दिया जाएगा. हालांकि, इसके बिल्कुल उलट ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अमेरिकी कार्रवाइयों और उनकी सैन्य हरकतों की वजह से होर्मुज का पूरा इलाका पहले के मुकाबले अब और भी कम सुरक्षित रह गया है।