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  • Y+ सुरक्षा के फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, बागी सांसदों के खिलाफ उद्धव गुट का विरोध

    Y+ सुरक्षा के फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, बागी सांसदों के खिलाफ उद्धव गुट का विरोध

    मुंबई 

    महाराष्ट्र गृह मंत्रालय ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्देश दिया है. यह आदेश महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को जारी किया गया है. यह फैसला इन सांसदों के खिलाफ बढ़ते सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. हाल ही में, इन सांसदों ने शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में भाग नहीं लिया था, जिसके बाद संजय राउत ने उन्हें “गद्दार” और “धोखेबाज” करार दिया था। 

    सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे- अरविंद सावंत
    उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसद पार्टी की संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए. इस पर लोकसभा में पार्टी के नेता अरविंद सावंत ने कहा कि सांसदों से पूछा जाएगा कि व्हिप जारी किए जाने के बावजूद वे बैठक में शामिल क्यों नहीं हुए. उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा. यदि वे जवाब नहीं देते हैं तो हम उनकी सदस्यता रद्द किए जाने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखेंगे।

    संजय राउत भी आ जाएं- अठावले
    संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 50-50 करोड़ रुपये दिए गए. इस पर रामदास अठावले ने कहा कि इतने पैसों की बात कर रहे हैं तो मैं उनसे कहूंगा कि आप भी आ जाइए. अठावले ने कहा कि पैसा देने जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि ये झूठे आरोप हैं. उद्धव ठाकरे अगर हमारे साथ रहते तो ये नौबत नहीं आती. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो लोग आए हैं उनका शिंदे पर भरोसा है. अगर संजय राउत आरोप लगा रहे हैं तो वो इसे साबित करें कि पैसे कहां से आए। 

    17 जून 2026 को जारी इस मैसेज में महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस और खुफिया अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हालिया संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए संबंधित सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। 

    आदेश में कहा गया है कि संबंधित जिला और पुलिस इकाइयां स्थानीय परिस्थितियों और खतरे के आकलन के आधार पर इन सांसदों को सुरक्षा मुहैया कराएं. इसके साथ ही, जिला स्तरीय सुरक्षा समीक्षा समितियों को उनकी सुरक्षा बढ़ाने, घटाने या यथावत रखने पर फैसला लेने को भी कहा गया है। 

    किन सांसदों को मिली सुरक्षा?
    जारी किए गए डॉक्यूमेंट में जिन सांसदों के नाम शामिल हैं, उनमें यवतमाल के सांसद संजय देशमुख, परभणी के सांसद संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व के सांसद संजय दीना पाटिल, हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकार, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और शिरडी के सांसद भाऊसाहेब वाघचौरे शामिल हैं। 

    जारी किए गए मैसेज में यह भी निर्देश दिया गया है कि जब ये सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में दौरा करें या सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लें, तब स्थानीय पुलिस अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाए, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। 

    यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने और पार्टी से अलग होने की अटकलें तेज हैं. ऐसे में इन सांसदों की सुरक्षा बढ़ाए जाने को राजनीतिक हलकों में काफी अहम माना जा रहा है। 

     

     

     

  • आधा इंच भी नहीं बरसे बादल, 13 जिलों में किसानों की बढ़ी चिंता; जानिए एक्सपर्ट की क्या है सलाह

    आधा इंच भी नहीं बरसे बादल, 13 जिलों में किसानों की बढ़ी चिंता; जानिए एक्सपर्ट की क्या है सलाह

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति धीमी पड़ने से कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। राज्य के कई जिलों में जून के पहले 17 दिनों में बहुत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे सोयाबीन, मूंग, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई रुक गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी के बिना बोवनी करने से फसल खराब हो सकती है।

    राज्य में इस महीने अब तक औसत बारिश सामान्य से काफी कम रही है। कुछ जिलों में तो बारिश का आंकड़ा शून्य या आधा इंच से भी नीचे है। इससे बारिश पर निर्भर छोटे और मध्यम किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन इलाकों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वहां किसान इंतजार कर रहे हैं।

    प्रभावित जिलों की स्थिति
    मौसम विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, अलीराजपुर, टीकमगढ़, दमोह, रीवा, शहडोल, बालाघाट, कटनी, भिंड, दतिया, धार, खरगोन, बड़वानी और मैहर जैसे जिलों में बारिश बेहद कम या न के बराबर रही है। कई अन्य जिलों में भी 1-2 इंच से कम पानी गिरा है, जो बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। भोपाल और आसपास के कुछ इलाकों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई, लेकिन पूरे राज्य का औसत सामान्य से 25-35 प्रतिशत कम रहा।

    आज तीन जिलों में हीटवेव का अलर्ट, 28 में बारिश होगी
    मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के 3 जिले रतलाम, छिंदवाड़ा-बालाघाट में हीट वेव का अलर्ट है। वहीं, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी-बारिश का दौर रहेगा। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया और शहडोल में गर्मी का असर रहेगा।

    मानसून की रफ्तार धीमी, सामान्य तारीख निकल चुकी
    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। पिछले वर्षों में 2021 में मानसून सबसे जल्दी 9 जून को पहुंचा था, जबकि 2018 में सबसे देर से 25 जून को प्रवेश हुआ था। वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी। इस वर्ष मानसून की प्रगति धीमी बनी हुई है और इसके लगभग एक सप्ताह देरी से पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि जून महीने की बारिश का आंकड़ा अभी काफी पीछे चल रहा है।

    जून में अब तक 35% कम बारिश
    1 जून से 16 जून के बीच मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। जहां इस अवधि तक औसतन करीब डेढ़ इंच बारिश होनी चाहिए थी, वहां वास्तविक वर्षा इससे काफी कम रही है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य का आधा पानी भी नहीं बरस पाया है।

    इन 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश
    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, इंदौर, झाबुआ, खरगोन, रतलाम, उज्जैन और विदिशा जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। 

    बीज खराब होने का खतरा बढ़ा मानसून के समय पर आने की संभावना के चलते प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर दी। उन पर बीज खराब होने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि पानी के अभाव में बीज खराब हो सकता है। ऐसे में किसानों को दोबारा बोवनी करना पड़ेगी। हालांकि, उन किसानों के लिए राहत है, जिनके पर सिंचाई के लिए पानी है।

    भोपाल-राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा इससे पहले बुधवार को प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिर गया। बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी बारिश दर्ज की गई।

    मौसम में ठंडक घुलने से दिन के तापमान में भी गिरावट आई है। बैतूल में एक ही दिन में 10 डिग्री की गिरावट हुई और पारा 26.5 डिग्री पर आ गया। शिवपुरी-पचमढ़ी में पारा 34 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.9 डिग्री, रायसेन में 26.6 डिग्री, सागर में 37 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.2 डिग्री, श्योपुर-धार में 37.4 डिग्री, मंडला में 37.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

    प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 34.8 डिग्री, इंदौर में 37.2 डिग्री, उज्जैन में 39 डिग्री, जबलपुर में 39.3 डिग्री और ग्वालियर में 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों की चेतावनी
    कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि बुवाई के लिए मिट्टी में कम से कम 4 इंच (लगभग 100 मिमी) बारिश का होना जरूरी है। इससे जमीन में पर्याप्त नमी बनी रहेगी और बीज अच्छे से अंकुरित होंगे। जल्दबाजी में बोई गई फसल सूखे के कारण नष्ट हो सकती है, जिससे किसानों को दोबारा खर्च उठाना पड़ सकता है।

    मानसून की संभावना
    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्य प्रदेश में 21 से 24 जून के आसपास पहुंच सकता है। इस बार समग्र मौसम पूर्वानुमान सामान्य से थोड़ा कम बारिश का इशारा कर रहा है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।

     

  • अफगानिस्तान में स्मार्टफोन बैन! तालिबान के फैसले पर उठे सवाल, डिजिटल आजादी पर बहस तेज

    अफगानिस्तान में स्मार्टफोन बैन! तालिबान के फैसले पर उठे सवाल, डिजिटल आजादी पर बहस तेज

    काबुल 

    अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक और सख्त फैसला लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है. नए आदेश के मुताबिक, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया तो उसका फोन मौके पर तोड़ दिया जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी और शरिया के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। 

    यह आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों की ओर से जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों से लेकर सामान्य कर्मचारियों और मुजाहिदीन तक, किसी को भी स्मार्टफोन रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी. अगर किसी को छूट चाहिए तो उसके लिए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी जरूरी होगी। 

    एक ब्रिटिश न्यूज प्लेटफॉर्म दि गार्डियन के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में तालिबान अधिकारियों को यह आदेश पढ़ते और लोगों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए भी देखा गया है. हालांकि तालिबान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। 

    पूरे देश में लागू नहीं किया जा रहा स्मार्टफोन बैन
    रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रतिबंध पूरे देश में एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा. कुछ इलाकों में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कुछ प्रांतों में महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों तक भी इसका असर देखने को मिल रहा है। 

    विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान फिलहाल लोगों की प्रतिक्रिया पर नजर रख रहा है और संभव है कि भविष्य में पूरे देश में स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाए. उनका कहना है कि यह कदम अफगानिस्तान को दुनिया से और अधिक अलग-थलग कर सकता है। 

    इंटरनेट पर पाबंदी का कड़ा विरोध
    हाल के महीनों में तालिबान ने इंटरनेट और डिजिटल कम्युनिकेशन पर नियंत्रण बढ़ाने की कई कोशिशें की हैं. पिछले साल सितंबर में पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं. तालिबान ने इसे "अनैतिक सामग्री रोकने" के लिए जरूरी बताया था. हालांकि इस फैसले का व्यापार, बैंकिंग, हवाई सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा था, जिसके बाद इंटरनेट बहाल करना पड़ा। 

    विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्टफोन प्रतिबंध के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. हाल ही में हेरात शहर में महिलाओं के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे. ये प्रदर्शन महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए थे. आरोप है कि तालिबान बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत भी हुई थी. वीडियो सामने आने के बाद तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा। 

    तालिबान स्मार्टफोन पर क्यों लगा रहा बैन?
    तालिबान को यह भी चिंता है कि सरकारी अधिकारी मोबाइल फोन के जरिए गोपनीय दस्तावेज और बैठकों की जानकारी लीक कर रहे हैं. कई मामलों में सरकारी फैसलों की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले ही सोशल मीडिया पर पहुंच गई थी। 

    हेरात के कुछ सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि उनके दफ्तरों में कई महीनों से स्मार्टफोन पर अनौपचारिक रोक लगी हुई थी. एक कर्मचारी ने दावा किया कि जब वह मोबाइल लेकर कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों ने फोन जब्त कर लिया और बाद में उसे तोड़ दिया। 

    तालिबान का यह भी मानना है कि कर्मचारी काम करने के बजाय घंटों मोबाइल फोन पर समय बर्बाद करते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या दुनिया के कई देशों में है, लेकिन इसका समाधान स्मार्टफोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं है। 

     

  • ममता सरकार को अदालत से झटका, विपक्ष के नेता पद को लेकर हाई कोर्ट का अहम फैसला

    ममता सरकार को अदालत से झटका, विपक्ष के नेता पद को लेकर हाई कोर्ट का अहम फैसला

    कलकत्ता
    विधानसभा से लेकर संसद तक बगावत झेल रहीं ममता बनर्जी को अब हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी से बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले पार्टी ने यहां विधानसभा स्पीकर रथेंद्र बोस के इस फैसले को चुनौती दी थी। ममता खेमे के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस सिलसिले में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कोई भी अंतरिम आदेश पास करने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार स्पीकर का फैसला बरकरार रहेगा. तृणमूल कांग्रेस के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी है।  

    टीएमसी की तरफ से दो नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए गए थे. शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव टीएमसी नेतृत्व के गुट की तरफ से भेजा गया, जबकि पार्टी के बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम भेजा, जिसे पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बसु ने स्वीकार किया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया। 

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 जून, 2026) को शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रहा है. जस्टिस कृष्ण राव ने सभी पक्षों को विरोध में हलफनामा दाखिल करने और दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। 

    टीएमसी सांसद और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर कहा कि कोर्ट ने कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन याचिका स्वीकार कर ली है. अब इस मामले में फाइनल हियरिंग होगी। 

    मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने पूछा था कि अगर एक ही राजनीतिक दल की तरफ से दो अलग-अलग नामों का प्रस्ताव भेजा जाए, तब अध्यक्ष का कर्तव्य क्या होगा, क्या वह स्वत: संज्ञान लेते हुए फैसला ले सकते हैं या फिर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देना आवश्यक होगा. इस पर अध्यक्ष के लिए पेश एडवोकेट बिल्वदल भट्टाचार्य ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा परिलब्धियां अधिनियम, 1937 के अनुसार नेता प्रतिपक्ष वही सदस्य होता है जिसे सदन में सबसे अधिक संख्या वाले विपक्षी दल के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त हो। 

    उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी दल का संख्याबल या उसके नेता को लेकर कोई विवाद होता है, तो उस मामले में अध्यक्ष का फैसला अंतिम और निर्णायक होगा. उधर, विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर का मामला भी चर्चा में है, जो नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से ही जुड़ा है. आरोप है कि टीएमसी सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की तरफ से नेता प्रतिपक्ष के लिए भेजे गए शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम के प्रस्ताव पर विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी हैं। 

    इसे लेकर सबसे पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने ही सवाल उठाए और शिकायत की, जिसके बाद मामला गरमा गया. विधायकों की शिकायत के बाद विधानसभा सचिव ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने मामले की औपचारिक जांच शुरू की. जिन विधायकों के नाम विवादित दस्तावेजों पर हैं, उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं और हस्ताक्षरों के नमूने भी लिए जा रहे हैं। 

  • गोल्ड-सिल्वर खरीदारों के लिए खुशखबरी! अचानक लुढ़के दाम, देखें आज का लेटेस्ट रेट

    गोल्ड-सिल्वर खरीदारों के लिए खुशखबरी! अचानक लुढ़के दाम, देखें आज का लेटेस्ट रेट

    मुंबई 
    अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए राहत लेकर आया है.  18 जून गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. अमेरिका और ईरान के बीच हुए  शांति समझौते और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद निवेशकों का रुख बदला, जिससे गोल्ड-सिल्वर की कीमतों पर दबाव बढ़ गया. चांदी में 2.5 प्रतिशत से ज्यादा और सोने में करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 

    MCX पर चांदी में बड़ी गिरावट, 7,000 रुपये से ज्यादा टूटा भाव
    गुरुवार के कारोबार में एमसीएक्स सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स अपने पिछले बंद 2,51,807 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2.5 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर दिन के निचले स्तर 2,44,495 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया. चांदी ने आज 2,48,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार की शुरुआत की थी.  सुबह करीब 11:43 बजे जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 7,057 रुपये यानी 2.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,44,750 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। 

    सोने की चमक भी फीकी, 1.5% से ज्यादा गिरा
    MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना भी दबाव में रहा. खबर लिखे जाने तक गोल्ड फ्यूचर्स 2,378 रुपये यानी 1.55 प्रतिशत गिरकर 1,51,501 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया.कारोबार के दौरान सोना अपने पिछले बंद 1,53,879 रुपये प्रति 10 ग्राम से फिसलकर 1,51,348 रुपये प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। 

    आज आपके शहर में सोने और चांदी का क्या है भाव?
    दिल्ली में सोने-चांदी का रेट

    दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,52,340 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं 22 कैरेट सोना 1,39,645 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है. चांदी का भाव 2,47,170 रुपये प्रति किलोग्राम है। 

    मुंबई में सोने-चांदी का रेट

    मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,883 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है. चांदी का भाव 2,47,600 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। 

    पटना में सोने-चांदी का रेट
    पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,520 रुपये प्रति 10 ग्राम है. 22 कैरेट सोना 1,39,810 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा है. वहीं चांदी का भाव 2,47,470 रुपये प्रति किलोग्राम है। 

    जयपुर में सोने-चांदी का रेट
    जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,52,580 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,865 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी का भाव 2,47,570 रुपये प्रति किलोग्राम है। 

    कानपुर में सोने-चांदी का रेट
    कानपुर में 24 कैरेट सोने का भाव 1,52,640 रुपये प्रति 10 ग्राम है. 22 कैरेट सोना 1,39,920 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा है. चांदी का भाव 2,47,660 रुपये प्रति किलोग्राम है। 
    लखनऊ में सोने-चांदी का रेट

    लखनऊ में भी 24 कैरेट सोना 1,52,640 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,39,920 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है. चांदी का भाव 2,47,660 रुपये प्रति किलोग्राम है। 

    आखिर क्यों गिर रहे सोना और चांदी के दाम? जानें वजह
    कमोडिटी मार्केट के जानकारों के मुताबिक सोना और चांदी पर कई वजहों से दबाव बना। 

    सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता रहा. इससे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने की मांग कमजोर पड़ी। 

    इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बैठक में ब्याज दरों को 3.5-3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखा, लेकिन साथ ही आगे और ब्याज दर बढ़ाने के संकेत भी दिए. बढ़ती ब्याज दरें आमतौर पर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं। 

    एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं की चमक कम की है। 

    COMEX पर भी गोल्ड-सिल्वर लुढ़के
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी कमजोर कारोबार करते दिखाई दिए.COMEX पर चांदी करीब 3 प्रतिशत गिरकर 68.76 डॉलर पर कारोबार कर रही थी. वहीं COMEX गोल्ड 1 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के साथ 4,318.90 डॉलर पर ट्रेड करता नजर आया। 

    हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में बढ़ते निवेश के कारण चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बनी हुई है. खासकर चीन से मांग बढ़ने की उम्मीद के चलते चांदी में गिरावट सीमित रही। 

  • IMD Alert: कई राज्यों में मूसलाधार बारिश के आसार, चक्रवाती सिस्टम सक्रिय; मॉनसून की तेज बढ़त जारी

    IMD Alert: कई राज्यों में मूसलाधार बारिश के आसार, चक्रवाती सिस्टम सक्रिय; मॉनसून की तेज बढ़त जारी

    नईदिल्ली 
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 (Monsoon) देश के कई हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले 4-5 दिनों के दौरान तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बताई हैं। वर्तमान में मॉनसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फूलबनी, रांची, जमुई, मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए 18 जून से 24 जून 2026 तक का विस्तृत अनुमान और चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद में 18 से 22 जून के बीच अधिकांश इलाकों में व्यापक रूप से बारिश की संभावना है। वहीं 23 और 24 जून को छिटपुट बारिश हो सकती है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 18 से 24 जून के दौरान लगातार छिटपुट बारिश के आसार हैं।

    मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली एनसीआर में 18 से 22 जून के बीच गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी यूपी में 18, 19, 23 और 24 जून को, जबकि पूर्वी यूपी में 18-19 जून और फिर 22-24 जून को बारिश हो सकती है। पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में 18 से 24 जून तक छिटपुट बारिश जारी रहेगी।

    आंधी-तूफान की चेतावनी
    जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है। इन राज्यों में 18 और 19 जून को ओलावृष्टि की भी संभावना है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 18-22 जून के दौरान 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज और झोंके वाली हवाओं की चेतावनी दी गई है।

    राजस्थान में धूलभरी आंधी
    18 और 19 जून को पश्चिमी राजस्थान में भयंकर धूलभरी आंधी चलने की आशंका है। इसके साथ ही 18 जून को पश्चिमी राजस्थान और 18-19 जून को पूर्वी राजस्थान में 60-70 किमी/घंटे की गति से तीव्र चक्रवाती तूफान आ सकता है। 19 जून को भी पश्चिमी राजस्थान में 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी।

    मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश
    आईएमडी के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 और 19 जून को छिटपुट बारिश की संभावना है। वहीं, पूर्वी मध्य प्रदेश में 18-19 जून और फिर 22-24 जून के दौरान बारिश के आसार हैं। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विदर्भ में 18 से 24 जून तक लगातार छिटपुट बारिश होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में 18-19 जून को और छत्तीसगढ़ व विदर्भ 18-21 जून को बारिश के साथ 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

    बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश के आसार
    पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18 से 24 जून तक भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। बंगाल में गंगा से सटे इलाकों में 18-19 जून को छिटपुट बारिश के बाद 20 से 24 जून के बीच बारिश की रफ्तार बढ़ेगी। ओडिशा में 19 और 20 जून को तेज और व्यापक बारिश होगी। बिहार और झारखंड में 18 से 24 जून के दौरान इन दोनों राज्यों में छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा।

  • पहले समझौता, फिर बड़ा बयान! ट्रंप ने ईरान की मिसाइल क्षमता का किया समर्थन, चर्चा तेज

    पहले समझौता, फिर बड़ा बयान! ट्रंप ने ईरान की मिसाइल क्षमता का किया समर्थन, चर्चा तेज

    वाशिंगटन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो ईरान की मिसाइलों के जखीरे को खत्म करना चाहते थे, वो अब अपनी बात से पलट चुके हैं. उन्होंने कहा कि ईरान को कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें रखने की इजाजत दी जा सकती है. जी-7 सम्मेलन के दौरान फ्रांस में ट्रंप ने इस बात का बचाव किया. उन्होंने कहा कि अगर दूसरे देशों के पास मिसाइलें हैं तो ईरान को भी कुछ रखने की अनुमति मिलनी चाहिए। 

    ट्रंप ने स्पष्ट किया कि मिसाइलें कोई बड़ी समस्या नहीं हैं क्योंकि वे सिर्फ एक जगह को नुकसान पहुंचाती हैं, लेकिन न्यूक्लियर हथियार पूरे ग्रह को तबाह कर सकते हैं. उन्होंने सऊदी अरब और कतर जैसे देशों का उदाहरण दिया जिनके पास मिसाइलें हैं। 

    ट्रंप का कहना है कि ईरान को भी अनुपात में कुछ मिसाइलें रखने की छूट मिलनी चाहिए. इस बयान से अमेरिकी नीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि पहले ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने पर जोर दिया जा रहा था। 

    ईरान के साथ समझौते की पृष्ठभूमि
    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी. उस समय ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करना और उसके न्यूक्लियर हथियार बनाने की कोशिश को रोकना मुख्य लक्ष्य था. लेकिन अब ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे को कम महत्व दे रहा है। 

    ट्रंप ने कहा कि अगर यह समझौता नहीं होता तो और तीन-चार हफ्ते बमबारी जारी रखी जाती, लेकिन इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो जाता और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी तबाही आ जाती. ट्रंप ने कहा कि अगर हम बमबारी जारी रखते तो रोज 500-700 मिलियन डॉलर का खर्च होता. हम चार हफ्तों में हथियारों के भंडार खत्म कर देते। 

    उन्होंने समझौते को आर्थिक तबाही से बचाने वाला बताया. ईरानी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने इस MOU पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. समझौते का पूरा टेक्स्ट अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिसकी वजह से आलोचना हो रही है। 

    यूरेनियम स्टॉक पर ट्रंप की नरम राय
    समझौते में ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को सौंपने की शर्त नहीं रखी गई है. यह स्टॉक 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त माना जाता है. इसके बजाय दोनों देश अगले दो महीनों में इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे. ट्रंप ने कहा कि ईरान इन स्टॉक तक पहुंच ही नहीं सकता क्योंकि अमेरिका ने उसके तीन मुख्य न्यूक्लियर साइटों को बमबारी से तबाह कर दिया है।  

    ट्रंप का दावा है कि न्यूक्लियर डस्ट मलबे के नीचे दबा हुआ है और सिर्फ अमेरिका व चीन के पास उसे निकालने का उपकरण है. उन्होंने इसे मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण बताया लेकिन व्यावहारिक रूप से कम मूल्यवान माना. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास अन्य जगहों पर भी कम संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक हो सकता है. ट्रंप ने फिर भी कहा कि अगले दो महीनों में यह मुद्दा चर्चा का मुख्य विषय रहेगा। 

    आगे की बातचीत और धमकी
    ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौते का उल्लंघन करता है तो अमेरिका फिर से बमबारी करेगा. उन्होंने कहा कि अगर वे समझौते का पालन नहीं करेंगे तो हम उन पर भारी बमबारी करेंगे. MOU एक सामान्य दस्तावेज है जिसमें सख्त कानूनी बाध्यता नहीं है. ट्रंप का कहना है कि बमबारी की धमकी ही काफी है। 

    उन्होंने यह भी माना कि यह स्थायी रोक तभी तक है जब तक वे राष्ट्रपति हैं. अगर कोई कमजोर राष्ट्रपति आया तो स्थिति बदल सकती है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अगले 60 दिनों में स्विट्जरलैंड में और बातचीत होगी. इस दौरान ईरान को कुछ प्रतिबंधों में छूट दी जा रही है, खासकर तेल निर्यात पर. अमेरिका का कहना है कि यह छूट बहुत ज्यादा नहीं है क्योंकि ईरान पहले भी छूट-छूटकर तेल बेच रहा था। 

    आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
    ट्रंप ने कहा कि ज्यादा बमबारी से वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू जातीं और आर्थिक संकट आ जाता. अब समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहेगा. तेल आपूर्ति बनी रहेगी. अमेरिका ईरानी फंड्स को भी वापस करने पर विचार कर रहा है जो पहले फ्रीज किए गए थे. ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका वह पैसा नहीं लौटाएगा तो कोई भी डॉलर में निवेश नहीं करेगा। 

    ईरान पर युद्ध से सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. इसके मुकाबले प्रतिबंधों में छूट सिर्फ कुछ अरब डॉलर की है. अमेरिकी अधिकारी इसे न्यायसंगत समझौता बता रहे हैं. हालांकि इजरायल इस समझौते से संतुष्ट नहीं दिख रहा है. ट्रंप ने इजरायल को MOU की कॉपी भेजने की बात कही, लेकिन इजरायली मीडिया में पहले खबर आई थी कि अमेरिका ने इजरायल को टेक्स्ट दिखाने से इनकार कर दिया था। 

    समझौते की कमियां और आलोचना
    यह समझौता काफी सामान्य है. इसमें ईरान सिर्फ यह दोहराता है कि वह न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा. ट्रंप का दावा है कि यह ईरान को स्थाई रूप से न्यूक्लियर हथियार से रोकेगा, लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह सिर्फ शब्दों का खेल है. ईरान ने स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक को टालने का संकेत दिया है। 

    अमेरिका का कहना है कि अगले दो महीनों की बातचीत में असली रियायतें ली जाएंगी. इस बीच तेल निर्यात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है ताकि अगर फिर युद्ध हुआ तो दुनिया तैयार रहे. कतर के साथ साझा गैस फील्ड का उदाहरण देकर अमेरिका ने कहा कि पैसा या तो विकास में लगाया जा सकता है या आतंकवाद को बढ़ावा देने में। 

    आगे क्या होगा?
    यह समझौता अमेरिका-ईरान संबंधों में नया मोड़ है. ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे ईरान को बहुत ज्यादा छूट देने वाला समझौता मान रहे हैं. अगले दो महीनों में होने वाली बातचीत बहुत महत्वपूर्ण होगी. अगर ईरान ने रियायतें दीं तो स्थायी समझौता हो सकता है, वरना फिर तनाव बढ़ सकता है। 

    ट्रंप की नीति शक्ति के साथ शांति की लगती है- एक तरफ समझौता और दूसरी तरफ बमबारी की धमकी. दुनिया अब देख रही है कि यह रणनीति कितनी सफल होती है. ईरान के पास मिसाइलें रहने की इजाजत, यूरेनियम पर ढील और तेल निर्यात पर छूट- ये सब मिलकर मध्य पूर्व की राजनीति को नया रूप दे सकते हैं। 

    भारत जैसे देशों के लिए भी इसका असर होगा क्योंकि तेल की कीमतें, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था इससे जुड़ी हुई हैं. फिलहाल ट्रंप का यह बयान और समझौता दोनों तरफ से सवाल खड़े कर रहा है – क्या यह वाकई शांति की ओर बढ़ता कदम है या सिर्फ अस्थायी राहत?

  • महाराणा प्रताप जयंती पर मुख्यमंत्री का संदेश, कहा- उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी को देता है प्रेरणा

    महाराणा प्रताप जयंती पर मुख्यमंत्री का संदेश, कहा- उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी को देता है प्रेरणा

    महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक, उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी के लिए प्रेरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल में हो रही वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक की स्थापना, लोकार्पण जल्द ही
    समाज के युवाओं को पार्थ योजना से पुलिस एवं सेना में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलायेगी सरकार
    स्कूली कक्षाओं में पढ़ाई जायेगी महाराणा प्रताप की जीवनी
    महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती पर हुआ राज्य स्तरीय समारोह
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में सहभागिता कर महाराणा प्रताप को अर्पित किए श्रद्धासुमन

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन वीरता, शौर्य, पराक्रम, त्याग का प्रतीक है। उनका नाम स्मरण करते ही मन श्रद्धा से भर जाता है। महाराणा प्रताप ने तमाम कठिनाइयों के बीच भी 'राष्ट्र प्रथम' को सर्वोपरि रखा। समाज का हर वर्ग देश की अस्मिता और आत्म सम्मान के लिए महाराणा प्रताप को एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में देखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि महाराणा प्रताप सिर्फ़ एक राजा नहीं, स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति के अनुपम प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साहस और वीरता मनुष्य का आभूषण है। यह पराक्रमी राजा का नैसर्गिक गुण होता है। महाराणा प्रताप वीरता के पर्याय हैं। उन्होंने जीवन में अनेक कष्ट सहे, पर अपने लक्ष्य से कभी भी विचलित नहीं हुए। उनका जीवन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर भोपाल के महाराणा प्रताप नगर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में यह उद्गार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिसोदिया-राजपूत-क्षत्रिय समुदाय द्वारा आयोजित इस सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता कर महान योद्धा महाराणा प्रताप को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज के प्रतिभाशाली डाक्टर, युवाओं, खिलाड़ियों और समाजसेवियों को मंच से सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन किया है और आज इसी बोर्ड के माध्यम से यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम किया गया है। हमारी सरकार महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करते हुए इसे और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सेना और पुलिस बल में युवाओं की भर्ती के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से "पार्थ योजना" की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत तैयारी कर रहे युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश के अधिकांश जिले इस योजना के दायरे में ले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि क्षत्रिय समाज के सभी युवाओं को भी इसी योजना में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटर्नशिप की व्यवस्था और समायोजन के लिए भी प्रभावी पहल की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराणा प्रताप लोक निर्माण का शेष कार्य तेजी से पूरा कराकर इसका बहुत जल्द लोकार्पण किया जाएगा। म.प्र.पर्यटन विकास निगम और महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के समन्वय से सरकार महाराणा प्रताप के स्वर्णिम अतीत को दुनिया के सामने लाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि

    मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जिसने महाराणा प्रताप की जयंती पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की जीवनी अब स्कूलों में पढ़ाई जायेगी। हम महाराणा प्रताप के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने जा रहे हैं। इससे हमारी भावी पीढ़ी महाराणा की वीरता और देशभक्ति से प्रेरणा लेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सभी देशों में अपना अग्रणी स्थान बना रहा है। हमारी सरकार विरासत से विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए भारत के गौरवशाली अतीत को दुनिया के सामने लाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप अद्वितीय वीरता, शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणा स्त्रोत हैं। आज इस जयंती समारोह में महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के बैनर तले संपूर्ण क्षत्रिय समाज एक मंच पर आया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अत्यंत बलशाली महाराणा प्रताप का कवच 72 किलो और भाला 80 किलोग्राम वजनी था। यह उनके अद्भुत व्यक्तित्व का परिचायक है। उन्होंने हर युद्ध में महान शौर्य दिखाया। महाराणा प्रताप के घोड़े "चेतक" के साथ उनके लगाव की कहानियां सुनकर मन रोमांचित हो जाता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ की स्थापना कर विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से उनके उत्कृष्ट जीवन से दुनिया का परिचय कराया है। युवाओं को सम्राट विक्रमादित्य पर शोक के लिए फैलोशिप प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही उज्जैन में मां क्षिप्रा के किनारे शहीद दुर्गादास राठौर का भव्य संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमें गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का जो संकल्प दिया है, उसकी प्रेरणा हमें महाराणा प्रताप से ही मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराणा प्रताप के संघर्षमय जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मातृभूमि, संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया , परंतु विकट विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया। इतिहास गवाह है कि महाराणा प्रताप को जीवन के कठिनतम समय में घास की रोटियां तक खानी पड़ीं, तब भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। अपने नाम के अनुरूप वे सचमुच प्रतापी थे। उनका गौरवशाली व्यक्तित्व भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अमर रहेगा। मुख्यमंत्री ने देश-प्रदेश के युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

    समारोह में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन एक प्रकार से प्रदेश में शौर्य की स्थापना करने जैसा है। कुछ व्यक्तित्व समय, युग और जाति के साथ नहीं बंधते हैं। वे सदैव मानव कल्याण, स्वाभिमान और देश के कल्याण के लिए होते हैं। महाराणा प्रताप ने कल्याण बोर्ड बनाकर एक महान वीर के गुणों से परिचित कराने का प्रशंसनीय कार्य किया है। देश के कई राज्य मध्यप्रदेश की योजनाओं का अनुसरण कर रहे हैं। महाराणा प्रताप के समान ही छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह ने भारतीय इतिहास में बलिदान और वीरता का नया इतिहास गढ़ा। आज देश में रामराज्य का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी महाराणा प्रताप की तरह कभी किसी के सामने झुकते नहीं हैं। उन्हें दुनिया के कई देशों ने अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कभी समझौता नहीं किया। हल्दी घाटी के भीषण युद्ध के बाद उन्होंने जंगल में रहकर घास की रोटियां खाईं, लेकिन अपने जीवन में पराधीनता स्वीकार नहीं की। अकबर भी उनकी वीरता का कायल था। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए महाराणा प्रताप के जीवन मूल्य युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

    म.प्र. महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केशव सिंह भदौरिया ने कहा कि महाराणा प्रताप की जीवन एक विचार की तरह है, जो कभी खत्म नहीं हो सकता है। महाराणा प्रताप ने अपने समय में अकबर जैसे मुगल शासकों से समझौता नहीं किया और जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने घास की रोटियां तक खाकर अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य किया। हल्दीघाटी का युद्ध उनकी वीरता का प्रतीक है। राज्य सरकार ने महाराणा प्रताप के प्रेरक प्रसंग पाठ्यक्रम में शामिल किए हैं। यह एक वंदनीय प्रयास है। क्षत्रिय युवाओं को शस्त्र बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।

    इस राज्य स्तरीय समारोह में खेल एवं युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, राहुल कोठारी, अरविन्द सिंह भदौरिया, जयपाल सिंह, सत्येंद्र भूषण सिंह, राजपाल सिंह और बालाजी जसवंत सिंह, महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अन्य पदाधिकारी, समाजजन एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

     

  • ट्रंप ने दिया पॉजिटिव मैसेज, अमेरिका से आए निगेटिव संकेत; शेयर बाजार की चाल ने सबको चौंकाया

    ट्रंप ने दिया पॉजिटिव मैसेज, अमेरिका से आए निगेटिव संकेत; शेयर बाजार की चाल ने सबको चौंकाया

    मुंबई 
    शेयर मार्केट में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारी कन्फ्यूजन देखने को मिला है. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स की चाल बदली-बदली नजर आई. शुरुआती कारोबार के दौरान कभी ये ग्रीन जोन में ट्रेड करते हुए दिखाई दिए, तो अचानक ही गिरावट के साथ रेड जोन में आ गए. हालांकि, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77000 के पार, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 24,000 के पार बना हुआ है। 

    सेसेंक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल 
    शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने गुरुवार को अपने पिछले बंद 77,155 की तुलना में मामूली गिरावट लेकर 77,131 के लेवल पर खुला और फिर अचानक रेड जोन से ग्रीन जोन में छलांग लगाकर 77,281 पर कारोबार करता नजर आया. ये तेजी भी अगले ही पल चली गई और सेंसेक्स गिरकर 77,044 पर ट्रेड करने लगा। 

    बात 50 शेयरों वाले इंडेक्स NSE Nifty की करें, तो इसकी चाल भी सेंसेक्स के जैसे ही देखने को मिली है. अपने पिछले बंद 24,085 की तुलना में गिरकर निफ्टी 24,073 पर ओपन हुआ और फिर कभी रेड तो कभी ग्रीन जोन में कारोबार करता दिखा। 

    बाजार में कन्फ्यूजन की वजह क्या? 
    शेयर बाजार में भारी कन्फ्यूजन की वजह पर गौर करें, तो अमेरिका से आई Good Or Bad News को माना जा सकता है. दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ने नीतिगत ब्याज दरों (US Fed Rate) को बिना किसी बदलाव के 3.50% से 3.75% पर स्थिर रखा है. फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श की अध्यक्षता वाली पहली बैठक में ये फैसला लिया गया है और उन्होंने किसी तरह की राहत नहीं दी है. इसके बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ा है। 

    वहीं दूसरी ओर गुड न्यूज ये आई है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता डन हो गया है और दोनों के बीच एग्रीमेंट पर साइन भी कर दिए गए हैं. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में दिखा है, जो महंगाई का जोखिम कम होने का संकेत है और बाजार को इसका सपोर्ट मिल सकती है। 

    उथल-पुथल के बीच ये 10 शेयर चमके 
    शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच जो शेयर अपने निवेशकों को फायदा कराते हुए नजर आए. उनमें बीएसई लार्जकैप कंपनियों में शामिल टाटा ग्रुप की Trent Share (1.50%), BEL Share (1.20%), HDFC Bank Share (1.10%) की बढ़त में ट्रेड कर रहे थे। 

    इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Nykaa Share (1.20%), Yes Bank Share (1.10%) की बढ़त में कारोबार करता हुआ दिखाई दिया. स्मॉलकैप सेक्शन में शामिल शेयरों की बात करें, तो यहां पर Carboruniv Share (7%), Redington Share (5.50%), ABREL Share (2.50%), WockPharma Share (2.10%), HSCL Share (1.90%) की बढ़त में कारोबार कर रहा था।  

  • महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल! उद्धव गुट के 6 सांसद बागी, शिंदे खेमे में जाने की अटकलें तेज

    महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल! उद्धव गुट के 6 सांसद बागी, शिंदे खेमे में जाने की अटकलें तेज

     मुंबई

    महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से उद्धव ठाकरे को बड़ा सियासी झटका लगा है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग अपना गुट बनाने का फैसला किया है. शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अलग समूह माना जाए। 

    शिवसेना (यूबीटी) के जिन सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखा है, उसमें संजय जाधव , संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर , ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। वहीं, शिवेसना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं। 

    महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, छह सांसदों ने शिंदे गुट की शिवसेना में विलय के लिए बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी भेजी है।

    सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी भेजने वाले सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल का नाम शामिल है। संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था। उन्होंने कहा- मैं उद्धव ठाकरे की पार्टी का सांसद हूं और इसी पार्टी में रहूंगा। इधर, शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने गाली देते हुए कहा- ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। बाद में मीडिया से उन्होंने कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं।

    उद्धव और अन्य पार्टी लीडर्स अपने सांसदों से लगातार संपर्क करने और उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। पार्टी ने गुरुवार को दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक बुलाई है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, पार्टी ने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। जो सांसद बैठक में नहीं आएंगे, पार्टी उनके खिलाफ डिस्क्वालिफिकेशन की कार्रवाई कर सकती है।

    उद्धव के सांसद एकनाथ शिंदे के साथ
    महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के साथ खेला हो गया है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों ने बुधवार सुबह साढ़े 9 बजे स्पीकर को पत्र देकर एकनाथ शिंदे की पार्टी में विलय करने की मांग की है. उद्धव के 6 सांसदों ने अपना गुट बनाकर शिवसेना में विलय कर दिया है। 

    उद्धव की पार्टी के 6 बागी सांसद बुधवार सुबह  नांदेड़, पुणे और मुंबई से प्राइवेट प्लेन से दिल्ली पहुंचे. इस दौरान उनके साथ में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के एक सीनियर नेता मौजूद थे, जिनके साथ दिल्ली आए और स्पीकर को अपने समर्थन का पत्र सौंपा है। 

    उद्धव के साथ सिर्फ 3 सांसद ही बचे
    यूबीटी में बगावत की अटकलों के बीच दिल्ली में संजय राउत के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद सावंत और चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ मौजूद थे. इस तरह शिवेसना (यूटीबी) के 9 में से 3 लोकसभा सांसद ही पहुंचे थे, 6 सांसद नहीं थे. इसके मतलब साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा बना हुई है। 

    वहीं, शिवेसना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आए 9 सांसदों में से छह सांसद एक साथ आए गए हैं तो तीन सांसद अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा था कि सभी 9 सासंद हमारी पार्टी के टिकट पर जीतकर आए हैं. उद्धव ठाकरे ने उन्हें जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिया. हमने उन्हें जितना हो सका, संसाधन दिए। 

    राउत ने कहा कि हमारे सांसद शिवसेना के चुनाव चिह्न मशाल पर चुने गए थे, जिसके नेता उद्धव ठाकरे हैं. वे पीएम मोदी के नाम पर नहीं जीते हैं. ऐसे में अगर अब कोई पाला बदलता है, तो हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, अगर जिन्हें जाना है, वो इस्तीफा देकर जा सकते हैं. इससे साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा टला नहीं है।