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  • पत्थरबाजों की अब खैर नहीं! दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पुलिस का एक्शन प्लान, ड्रोन से होगी निगरानी

    पत्थरबाजों की अब खैर नहीं! दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पुलिस का एक्शन प्लान, ड्रोन से होगी निगरानी

    झाबुआ
    देश के सबसे महत्वाकांक्षी और आधुनिक सड़क प्रोजेक्ट्स में से एक 'दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेस-वे' पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की पुलिस ने कमर कस ली है। जिले से होकर गुजरने वाले इस हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे पर हाल ही में असामाजिक तत्वों द्वारा पत्थरबाजी और अनाधिकृत वाहनों के प्रवेश के कारण दुर्घटनाओं की खबरें सामने आई थीं। घटनाओं को बेहद गंभीरता से लेते हुए झाबुआ पुलिस ने एक व्यापक 'एक्शन प्लान' तैयार कर उसे धरातल पर लागू कर दिया है। पुलिस का यह प्लान न केवल तकनीकी निगरानी पर आधारित है। बल्कि इसमें स्थानीय ग्रामीणों की जनसहभागिता को भी प्रमुखता दी गई है।

    नया पुलिस सहायता केंद्र
    यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उपद्रवियों में खौफ पैदा करने के लिए कुकड़ीपाड़ा-तलावड़ा रेस्ट एरिया (विश्राम क्षेत्र) में एक नया पुलिस सहायता केन्द्र शुरू कर दिया है। इस केंद्र पर सुरक्षा की कमान उप निरीक्षक गोविंद भामदरे को सौंपी है। इनके साथ 2 पुलिस आरक्षक और विशेष सशस्त्र बल के 4 हथियारबंद जवानों को 24 घंटे तैनात किया है।

    ड्रोन से हाई-टेक निगरानी
    अंधेरे का फायदा उठाकर पत्थरबाजी करने वालों पर नजर रखने के लिए पुलिस अब हाई-टेक संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है। सभी 22 गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में अब ड्रोन से आसमान से निगरानी की जा रही है। साथ ही, पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया के लिए अतिरिक्त चार पहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जो रात भर एक्सप्रेस-वे पर पेट्रोलिंग कर रहे हैं।

    50 किमी के दायरे में 22 संवेदनशील गांव
    दिल्ली-मुंबई 8-लेन एक्सप्रेस-वे झाबुआ जिले में गुजरात सीमा से लेकर माही नदी तक लगभग 50 किलोमीटर की लंबाई में फैला है। यह महत्वपूर्ण मार्ग जिले के दो प्रमुख थाना क्षेत्रों थाना थांदला और थाना काकनवानी के अंतर्गत आने वाले लगभग 22 गांवों से होकर गुजरता है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि एक्सप्रेस-वे पर असामाजिक तत्वों द्वारा विशेष रूप से शाम 06 बजे से लेकर मध्य रात्रि 12 बजे के बीच पत्थरबाजी की घटनाएं को अंजाम दिया जाता है। इसके अलावा, एक्सप्रेस-वे पर स्थानीय लोगों द्वारा दोपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों और मवेशियों के अनधिकृत प्रवेश के कारण भी कई गंभीर दुर्घटनाएं होने का अंदेशा बना रहता है।

  • MP को मिलेंगे 2 बड़े एक्सप्रेसवे, भोपाल-दिल्ली सफर होगा आसान; व्यापार को भी मिलेगी रफ्तार

    MP को मिलेंगे 2 बड़े एक्सप्रेसवे, भोपाल-दिल्ली सफर होगा आसान; व्यापार को भी मिलेगी रफ्तार

    सागर
     मध्य प्रदेश के रोड प्रोजेक्ट जहां देश के दूसरे राज्यों को बेहतर कनेक्टिवटी के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही मध्य प्रदेश के शहरों को देश के महानगरों से जोड़ने का काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में बन रहे दो एक्सप्रेस वे के चलते देश की राजधानी दिल्ली मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के करीब आ रही है. दरअसल, भोपाल ग्वालियर और ग्वालियर आगरा एक्सप्रेस वे से मध्य प्रदेश से उत्तरप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली एनसीआर तक हाईस्पीड कनेक्टिवटी मिलने जा रही है। 

    भोपाल से ग्वालियर तक फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड कारीडोर बनेगा, तो ग्वालियर से आगरा तक 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनेगा. इन दोनों एक्सप्रेस वे के कम्पलीट होने के बाद भोपाल से दिल्ली के बीच की दूरी में करीब 4 घंटे का फर्क आएगा. फिलहाल इस सफर में 11-12 घंटे लगते हैं. लेकिन इन दोनों प्रोजेक्ट के कम्पलीट होने पर 7-8 घंटे का समय लगेगा. फिलहाल इन प्रोजेक्ट के निर्माण के पहले की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं और एक अनुमान के मुताबिक, 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इनका काम शुरू हो जाएगा। 

    भोपाल-ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे
    भोपाल ग्वालियर फोरलेन एक्सप्रेस वे राजधानी भोपाल और ग्वालियर के बीच करीब 320 किमी का प्रोजेक्ट है. जो भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके से शुरू होकर ब्यावरा, गुना, शिवपुरी होते हुए ग्वालियर तक पहुंचेगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर का सफर तय करने में 425 किमी दूरी तय करना होती है, जो सीधे 100 किमी कम हो जाएगी और करीब 320 किमी का सफर तय करना होगा. फिलहाल भोपाल से ग्वालियर पहुंचने में 7-8 घंटे का समय लगता है, जो घटकर 5 से 6 घंटे रह जाएगा. मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) इस प्रोजेक्ट का DPR तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया पर काम कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक 2027 के अंत या 2028 की शुरूआत में इसका काम शुरू हो जाएगा। 

    क्या कहते हैं जिम्मेदार
    पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह कहते हैं कि, ''ये दोनों प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को दिल्ली से शानदार कनेक्टिवटी देने का काम करेंगे. इन प्रोजेक्ट का काम पूरा होते ही मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर सहित मुरैना, गुना, शिवपुरी, राजस्थान का धौलपुर और यूपी के आगरा मथुरा के साथ बेहतर कनेक्टिविटी होगी, जो दिल्ली एनसीआर को जोड़ने का काम करेगी। 

    इस प्रोजेक्ट के कारण भोपाल के उत्तरी इलाके की प्रापर्टी में उछाल आएगा.खासकर सागर विदिशा रोड़ पर सूखी सेवनिया से जहां रोड शुरू होगी, वहां रियल एस्टेट से जुड़े प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ेगी. गुना और ग्वालियर बाॅयपास से गुजरने वाले इस फोरलेन पर लाजस्टिक कंपनियां अपने गोदाम, कोल्ड स्टोरेज चैन और ट्रक टर्मिनल जैसे प्रोजेक्ट आ रहे हैं. एक प्रोजेक्ट पर एमपीआरडीसी और एक पर एनएचएआई काम कर रहा है। 

    ग्वालियर-आगरा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे
    ग्वालियर से आगरा को जोड़ने के लिए 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जो ग्वालियर के सुसेरा बाॅयपास से शुरू होगा. जो राजस्थान के धौलपुर से आगरा, आगरा इनर रिंग रोड से मथुरा और मथुरा से दिल्ली एनसीआर को जोड़ देगा. इसकी लंबाई करीब 90 किमी होगी. इसकी प्रारंभिक लागत 4600 करोड़ आंकी गयी है. इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में करीब 549 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी। 

    फिलहाल भोपाल से आगरा जाने में करीब 11-12 घंटे समय लगता है. इस सिक्स लेन प्रोजेक्ट के पूरा होने पर ये सफर 7 घंटे में पूरा जाएगा. फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए तीनों राज्यों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. ये प्रोजेक्ट ग्वालियर से मुरैना और मुरैना से धौलपुर, धौलपुर से आगरा और आगरा मथुरा होते हुए दिल्ली एनसीआर से कनेक्ट किया जाएगा। 

     

  • कल्याण-लातूर एक्सप्रेसवे से बदलेगा सफर का अंदाज, 8 KM टनल से 5 घंटे में पूरा होगा रूट

    कल्याण-लातूर एक्सप्रेसवे से बदलेगा सफर का अंदाज, 8 KM टनल से 5 घंटे में पूरा होगा रूट

    लातूर
     देश के बड़े शहरों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ ही सरकार अन्य छोटे शहरों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रही है. इस कड़ी में अगला नाम है कल्याण से लातूर तक जाने वाले एक्सप्रेसवे (Kalyan-Latur Expressway)का. महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट ने इस ई-वे को मंजूरी दे दी है. यह ई-वे करीब 450 किलोमीटर लंबा होगा और इसके तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर में लगने वाला समय 11 घंटे से घटकर महज 5 घंटे का रह जाएगा। 

    यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बन रही बदलापुर टनल के उत्तर से ही शुरू होगा और महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के पास लातूर में निकलेगा. इसकी कुल लंबाई 450 किलोमीटर के आसपास है, जिससे महज 4.5 से 5 घंटे के सफर में पूरा किया जा सकेगा. अभी इस दूरी को तय करने में करीब 11 घंटे का समय लग जाता है. आगे चलकर यह एक्सप्रेसवे मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से भी सीधे तौर पर जुड़ जाएगा, जो नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के पास रहेगा। 

    8 किलोमीटर की टनल भी बनेगी
    इस एक्सप्रेसवे के रास्ते में 8 किलोमीटर लंबी एक टनल भी बनाई जाएगी, जो मलशेज घाट के पास होगी. यह टनल बिलकुल वैसी ही होगी जैसी इगतपुरी के पास बन रही ट्विन टनल है. यह ट्विन टनल समृद्धि एक्सप्रेसवे पर बनाई गई है. इस ई-वे पर कुल मिलाकर 17 इंटरचेंज बनाए जाएंगे. इस ई-वे को तैयार करने पर 22 से 25 हजार करोड़ का खर्चा आएगा. इस ई-वे की सबसे खास बात इसकी लंबाई नहीं, बल्कि इसका दुर्गम रास्ता है। 

    क्यों जरूरी है 8 किलोमीटर की सड़क
    मलशेज घाट पर बनने वाली 8 किलोमीटर लंबी टनल काफी मायने रखती है. इस टनल से गुजरने के लिए फ्लैट हाईवे जैसा रास्ता नहीं होगा, बल्कि इसमें तीखे मोड़ और स्लोप हैं जिस पर ट्रैफिक को काफी धीमे-धीमे गुजरना होगा. यही वजह है कि ई-वे पर सबसे जरूरी सेक्शन यह टनल ही है. यह ई-वे दो और एक्सप्रेसवे के साथ कनेक्टिविटी मजबूत करेगा, जिसकी वजह से इसकी अहमियत काफी बढ़ जाती है. इसके अलावा प्रोजेक्ट को विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर के साथ भी जोड़ा जाएगा. इससे बाद में नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु तक जाना भी आसान हो जाएगा. यह रास्ता मराठवाड़ा में बन रहे सूरत-चेन्नई इकनॉमिक कॉरिडोर को भी जोड़ेगा। 

     

  • एमपी-यूपी को मिलेगी नई सड़क कनेक्टिविटी, भोपाल से वाराणसी और सतना-सागर का सफर होगा तेज

    एमपी-यूपी को मिलेगी नई सड़क कनेक्टिविटी, भोपाल से वाराणसी और सतना-सागर का सफर होगा तेज

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। 9,850 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद भोपाल से वाराणसी की दूरी तय करने में केवल आठ घंटे का समय लगेगा। यह मार्ग दोनों राज्यों के बीच परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगा। नया एक्सप्रेसवे बनने से यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। वर्तमान में भोपाल से वाराणसी जाने में काफी समय लगता है, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह यात्रा मात्र आठ घंटे में पूरी की जा सकेगी। बुनियादी ढांचा विकास विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी।

     यात्रा के समय में होगी भारी कटौती
    एक्सप्रेसवे केवल भोपाल और वाराणसी को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि राज्य के आंतरिक शहरों के बीच भी यात्रा को बेहद आसान और तेज बनाएगा। इस एक्सप्रेसवे की मदद से सतना से सागर की दूरी केवल तीन घंटे में तय की जा सकेगी। वर्तमान मार्ग की तुलना में यह नया मार्ग वाहन चालकों को सीधा और बाधा रहित रास्ता प्रदान करेगा।, सतना और सागर के बीच यात्रा समय में तीन घंटे की यह कटौती स्थानीय व्यापार और दैनिक यात्रियों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी।  

    9,850 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
    इस परियोजना के, निर्माण कार्य पर कुल 9,850 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग भूमि अधिग्रहण, आधुनिक सड़क निर्माण, पुलों के निर्माण और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना के लिए किया जाएगा। निर्माण प्राधिकरण के अनुसार, परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण मानकों का पालन किया जाएगा। बजट आवंटन के साथ ही इस एक्सप्रेसवे के निर्माण को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। 
     
    आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों को गति
    नया एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों को उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जोड़ेगा। मध्य प्रदेश के औद्योगिक और परिवहन रिकॉर्ड के अनुसार, सतना से सागर के बीच तीन घंटे में यात्रा संभव होने से विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, भोपाल, सागर, सतना और वाराणसी के बीच माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही पहले से काफी तेज और सुरक्षित होगी। 

  • Delhi-Gurugram Expressway पर बड़ा प्लान, एलिवेटेड कॉरिडोर से द्वारका-महिपालपुर की हरियाणा बॉर्डर तक कनेक्टिविटी

    Delhi-Gurugram Expressway पर बड़ा प्लान, एलिवेटेड कॉरिडोर से द्वारका-महिपालपुर की हरियाणा बॉर्डर तक कनेक्टिविटी

    गुरुग्राम

    गुरुग्राम में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार जल्द ही एक तीन लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बना रही है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके लिए प्लान तैयार कर लिया है.  इसके बनने से दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर लगने वाला जाम काफी हद तक कम हो जाएगा. इसके लिए दिल्ली की शिव मूर्ति महिपालपुर और एम्बिएंस मॉल के पास हरियाणा बॉर्डर के बीच तीन-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। 

    यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 2 कलोमीटर लंबा बनाया जा सकता है. दरअसल एक्सप्रेसवे के इसी हिस्से में सबसे ज्यादा जाम लगता है. सुबह-शाम दिल्ली-गुरुग्राम के बीच सफर करने वालों को इससे काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. खासकर ऑफिस आने-जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं.. हर दिन वे इस जाम से जूझते हैं. लेकिन नया एलिवेटेड रोड बनने से उनको सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। 

    181 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एलिवेटेड रोड
    जानकारी के मुताबिक, एलिवेटेड रोड करीब 181 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह रोड तीन लेन को होगा.इसके दोनों तरफ दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाएगी.सालों से इस योजना पर विचार चल रहा है. पहले सड़क चौड़ी करने और फ्लाईओवर का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन अब एलिवेटेड रोड बनाए जाने को ट्रैफिक जाम से मुक्ति का ज्यादा बढ़िया समाधान माना गया है। 

    द्वारका अंडरपास के ट्रैफिक को मिलेगा नया रोड
    NHAI योजना बना रहा है कि तीन-लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर रंगपुरी के पास द्वारका एक्सप्रेसवे इंटरचेंज की राइट-टर्न टनल से बनाया जाए. इसे सेक्टर 10 तक बनाए जाने की प्लानिंग है. जिससे इसे द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे के बीच कनेक्ट हो सके. वहीं अंडरपास से निकलने वाले ट्रैफिक को शहर की तरफ जाने वाले एलिवेटेड सेक्शन पर भेजने का प्रस्ताव है। 

    राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा नया रोड
    नए एलिवेटेड रोड के बनने के बाद NH8 से गुजरने वाले वाहनों को अंडरपास से निकलते ही शानदार कॉरिडोर मिलेगा, जिससे उनको जाम में नहीं फंसना पड़ेगा. द्वारका एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक को मौजूदा सड़क के ही ऊपर से ले जाने की योजना है, ताकि लोग जाम में न फंसे. बता दें कि नया एलिवेटेड रोड मौजूदा राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा। 

    शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच होगा है भारी जाम
    इसका प्रस्ताव इस रूट पर ट्रैफिक की पूरी स्थिति देखने के बाद तैयार किया गया है. जिससे पता चला कि शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच NH8 के पूरे हिस्से पर पीक आवर्स में खचाखच जाम रहता है. सर्विस रोड पर भी बिल्कुल जगह नहीं होती. वाहन रेंग-रेंगकर चलते हैं. महिपाल फ्लाईओवर तक गाड़ियों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं. जब से द्वारका एक्सप्रेसवे खुला है, तब से ये परेशानी और भी बढ़ गई है। 

    वर्तमान में मिलेनियम सिटी में घुसते ही शिव मूर्ति पर जाम लग जाता है. सोनीपत, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले वाहनों को जाम से ज्यादा जूझना पड़ता है. जिसकी वजह से एम्बिएंस मॉल की ओर जाना मुश्किल हो जाता है। 

    हर दिन ट्रैफिक में नहीं फंसना पड़ेगा
    एक सर्वे से पता चला है कि NH8 के मुख्य कैरिजवे पर हर दिन एक तरफ 1.2 लाख और दूसरी तरफ 1.6 लाख गाड़ियां होकर गुजरती हैं. सर्विस रोड और अलग-अलग इंटरचेंज रास्तों से भी हजारों गाड़ियां होकर गुजरती हैं.हालांकि दिल्ली से NH-8 पर आने वाले वाहनों को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर जाने की परमिशन नहीं होगी. ये वाहन  मौजूदा चार-लेन वाले कैरिजवे पर ही चलेंगे. नया एलिवेटेड कॉरिडोर मुख्य रूप से द्वारका एक्सप्रेसवे अंडरपास से निकलने वाले वाहनों के लिए बनाया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा। 

     

  • राजस्थान में बनेगा नया 4-लेन एक्सप्रेस-वे, 210 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    राजस्थान में बनेगा नया 4-लेन एक्सप्रेस-वे, 210 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    जयपुर
     प्रदेश में पूर्व से पश्चिमी राजस्थान के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 210 गांवों के 10,890 खसरों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। जयपुर जिले के दूदू के ग्राम झाग से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे एनएच-21 पर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा।

    फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा समय भी 7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है। भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। निर्माण पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे। प्रति किलोमीटर लागत करीब 31.55 करोड़ रुपए होगी।

    30 पुल, 4 आरओबी, 10 इंटरचेंज और 179 अंडरपास
    परियोजना में 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी, सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज तथा वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारा मजबूत करेगा। बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

    करौली में 58.8 किमी लंबाई, 7,122 पेड़ कटेंगे
    करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की 637.64 हेक्टेयर निजी और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। इससे 26,539 परिवारों के 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट जारी हो चुकी है।

    90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर
    एक्सप्रेस-वे करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।

    नया एक्सप्रेस-वे बनने से सफर होगा आसान
    भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज हो सकता है।

  • देश के 20 बड़े शहरों को जोड़ेगा रायपुर एक्सप्रेसवे, दिल्ली से विशाखापट्टनम तक आसान होगा सफर

    देश के 20 बड़े शहरों को जोड़ेगा रायपुर एक्सप्रेसवे, दिल्ली से विशाखापट्टनम तक आसान होगा सफर

    रायपुर 

     रायपुर से विशाखापट्टनम का सफर अब महज 5 घंटे में पूरा होने वाला है. क्योंकि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130CD) का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 465 किलोमीटर लंबा 6-लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बेहद अहम है. क्योंकि यह छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बीच कनेक्टिविटी को और मजबूत करने वाला है. इस प्रोजेक्ट से मध्य भारत और पूर्वी समुद्री तट के बीच सीधा कनेक्शन जुड़ जाएगा. जिससे वाहनों का आना जाना बेहद आसान हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे रायपुर को विजयनगरम, नबरंगपुर, कोरापुट जैसे जिलों से सीधा कनेक्ट करने वाला है. 16 हजार 482 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है. खास बात यह है कि यह एक्सप्रेसवे दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होने की वजह से दिल्ली-आगरा जैसे बड़े शहरों से भी कनेक्ट रहेगा। 

    रायपुर से विशाखापट्टनम की दूरी घंटों में पूरी
    अभी रायपुर से विशाखापट्टनम जाने में NH-26 सड़क की दो-लेन से होकर गुजरना पड़ता है. 597 किलोमीटर की यह कुल दूरी तय करने में 12 से 14 घंटे का समय लगता है. लेकिन नए रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे से यह सफर 132 किलोमीटर कम हो जाएगा और दोनों शहरों की कुल दूरी 465 किलोमीटर रह जाएगी. पुराने हाईवे पर गाड़ियों की रफ्तार भी कम रहती थी. लेकिन इस 6 लेन एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां 100 से 120 किलोमीटर प्रतिघंटे के रफ्तार से दौड़ सकेगी. जिससे रायपुर से विशाखापट्टनम पोर्ट की दूरी महज 5 से 6 घंटे में पूरी कर ली जाएगी। 

    छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में कनेक्शन

        छत्तीसगढ़: रायपुर से अभनपुर, धमतरी, कांकेर, और कोंडागांव का कनेक्शन मजबूत होगा. 
        ओडिशा: यहां से यह एक्सप्रेसवे ओडिशा के नबरंगपुर और कोरापुट को कनेक्ट करता हुआ आगे बढ़ेगा.
        आंध्र प्रदेश: विजयनगरम, अराकू घाटी और सबावरम (विशाखापट्टनम) में जाकर कनेक्ट हो जाएगा. 

    कैसे दिल्ली-आगरा से जुड़ेगा 
    इस कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि रायपुर केवल विशाखापट्टनम तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि यह  नेशनल हाईवे नेटवर्क के जरिए यह सीधे तौर पर देश के उत्तर और मध्य हिस्से के बड़े महानगरों को भी जोड़ रहा है. जिसमें NH-30, NH-34, NH-539, NH-44, यमुना एक्सप्रेसवे, ग्वालियर आगरा एक्सप्रेसवे से जुड़कर रायपुर और विशाखापट्टनम को सीधे दिल्ली, आगरा, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों से जोड़ देगा.  इसके अलावा यह आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में कोलकाता से कन्याकुमारी कॉरिडोर से भी जुड़ेगा, जिससे दक्षिण और पूर्वी भारत के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी मजबूत हो जाएगी। 

    95 प्रतिशत काम पूरा 
    रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का काम 19 चरणों में चल रहा है. जिसका 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. ओडिशा के कोरापुट खंड में 95 प्रतिशत से अधिक का निर्माण पूरा हो चुका है और वर्तमान में आंध्र प्रदेश व छत्तीसगढ़ के हिस्सों में अंतिम चरण की फिनिशिंग और इंटरचेंज बनाने का काम तेजी से जारी है. छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर उदंती वन्यजीव अभयारण्य और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच बनाई जा रही 2.79 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंग का काम भी तेजी से किया जा रहा है. एक तरफ की टनल बनकर तैयार हो चुकी है. जबकि दूसरी तरफ की टनल पर भी काम शुरू हो चुका है। 

    सितंबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जिस पर तेजी से काम किया जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे मध्य भारत और दक्षिण भारत के बीच मजबूत कनेक्शन करने वाला हाईवे साबित होने वाला है। 

  • बिहार को मिलेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर

    बिहार को मिलेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर कॉरिडोर

    पटना
    राज्य कैबिनेट ने हाल ही में बक्सर से भागलपुर के बीच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी है। परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

    करीब 3,700 करोड़ का 336 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे बिहार के 13 जिलों से होकर गुजरेगा, लेकिन पटना इससे सीधे नहीं जुड़ेगा।

    यह पूरी तरह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, हालांकि कई स्थानों पर इसे पहले से बनी सड़कों से कनेक्टिविटी दी जाएगी।

    इन 13 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
    बक्सर से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका होते हुए भागलपुर के बाहरी क्षेत्र तक पहुंचेगा।

    बक्सर तक पहले से सड़क की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद ग्रीनफील्ड एलायनमेंट के माध्यम से सड़क भोजपुर पहुंचेगी और वहां से अरवल की ओर जाएगी।

    अरवल से जहानाबाद होते हुए गया, फिर नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका के रास्ते भागलपुर तक इसका विस्तार होगा।

    जिस एलायनमेंट पर यह एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है, वहां अभी तक कई क्षेत्रों के बीच निर्बाध सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं थी। एक्सप्रेसवे के निर्माण से इन क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होगा।

    पटना से एक्सप्रेसवे तक पहुंचने का सबसे नजदीकी रास्ता जहानाबाद
    पटना से इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए जहानाबाद सबसे नजदीकी कनेक्टिंग प्वाइंट होगा। पटना और जहानाबाद के बीच पहले से फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग उपलब्ध है। इसी वजह से जहानाबाद में इस एक्सप्रेसवे को एनएच से कनेक्टिविटी दी जाएगी।

    जहानाबाद के रास्ते एक्सप्रेसवे पर पहुंचने के बाद गया जाना भी आसान होगा। इसके आगे गया से नालंदा, नवादा और शेखपुरा समेत अन्य जिलों के लिए नई सड़क कनेक्टिविटी विकसित होगी।

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा
    बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी योजना है। इससे बिहार के 13 जिलों को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से उत्तर प्रदेश और आगे दिल्ली की ओर बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा।

    पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद बिहार के इन जिलों से दिल्ली की यात्रा अपेक्षाकृत आसान और तेज होने की उम्मीद है। इससे व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय आवागमन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    पूरी तरह टोल आधारित होगा एक्सप्रेसवे
    बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना में निजी कंपनी निर्माण के लिए निवेश करेगी। इसके बदले एक्सप्रेसवे पर वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा।

    इस तरह यह पूरी तरह टोल आधारित एक्सप्रेसवे होगा। सड़क के निर्माण से बिहार के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों के बीच सीधी कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ कई जिलों को राष्ट्रीय स्तर के सड़क नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।

     

  • दिल्ली-पटना-दरभंगा का सफर होगा आसान, नए एक्सप्रेसवे से चार राज्यों की कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

    दिल्ली-पटना-दरभंगा का सफर होगा आसान, नए एक्सप्रेसवे से चार राज्यों की कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

    पटना

    बिहार में 170 किमी के गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की रफ्तार तेज हो गई है. इसे आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) भी कहते हैं. इसकी लंबाई लिंक रूट को मिलाकर 230 किमी तक बढ़ जाती है. 4 लेन के एक्सप्रेसवे को NHAI भारतमाला परियोजना के फेज-1 के तहत बनाया  रहा है, जिसे छह लेन किया जा सकता है. एक्सप्रेसवे दक्षिण में औरंगाबाद, गया जिले से गुजरते हुए उत्तर में दरभंगा तक जाता है. औरंगाबाद और गया जिले के बॉर्डर के पास आमस से इसकी शुरुआत होगी, जो दिल्ली-कोलकाता NH-19 से कनेक्ट होगा. इसका आखिरी प्वाइंट दरभंगा का बेला नवादा है, जो NH-27 ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को जोड़ता है।

    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट
    आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) 198 किमी लंबा है और 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है. यह गया जिले के आमस से दरभंगा तक जाएगा. यहां से लिंक रोड के जरिये ये बोधगया और राजगीर से जुड़ जाएगा. ये बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ता है. ये ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ेगा।

    गया-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रूट

    1. औरंगाबाद
    2. गया
    3. जहानाबाद
    4. पटना
    5. वैशाली
    6. समस्तीपुर
    7. दरभंगा
    आगे बोधगया और राजगीर से लिंक

    दरभंगा से गया 3-4 घंटे में 
    अभी गया, आमस से दरभंगा की दूरी तय करने में 6 से 7 घंटे लगते हैं और एक्सप्रेसवे से ये 3-4 घंटे रह जाएगा. बोधगया, राजगीर, पटना और वैशाली जैसे बुद्ध और जैन सर्किट स्थल कनेक्ट होगी. देश-विदेश के पर्यटकों को आवाजाही में आसानी होगी.उत्तरी बिहार के खाद्य उत्पादों जैसे मखाना, लीची को दक्षिण बिहार और दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर से बंदरगाह तक पहुंचने में आसानी होगी. साथ ही यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे चालू होने और इसके वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाने के बाद बिहार से दिल्ली, कोलकाता और अन्य शहरों की यात्रा कम समय में हो पाएगी।

        दरभंगा से दिल्ली – 18 से 22 घंटे- 10 से 12 घंटे- आमस-दरभंगा से पूर्वांचल और यमुना एक्सप्रेसवे
        पटना से दिल्ली- 16 से 18 घंटे- 9 से 10 घंटे – पटना-बक्सर, पूर्वांचल, यमुना एक्सप्रेसवे
        दरभंगा से कोलकाता-  14 से 16 घंटे- 7 से 8 घंटे- आमस-दरभंगा, वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे
        गया, आमस से कोलकाता- 10 से 12 घंटे – 5 से 6 घंटे- वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे  से रास्ता
        वाराणसी से गया आने में पहले 5-6 घंटे लगते थे, जो घटकर 2 से 2.5 घंटे रह जाएंगे
        वाराणसी से दरभंगा जाने में पहले 10-12 घंटे लगते थे जो अब 5 से 6 घंटे में तय होगा रास्ता
        आमस-दरभंगा और वाराणसी-कोलकाता के जरिये रांची का सफर 5-6 घंटे में पूरा हो जाएगा
        आमस-दरभंगा के उत्तरी छोर से जुड़ने से उत्तर बिहार से सिलीगुड़ी की दूरी 6 से 7 घंटे रह जाएगी

    पटना में आउटर रिंग रोड – गंगा पर नया पुल
    इस एक्सप्रेसवे के लिए गंगा नदी पर नया पुल कच्ची दरगाह-बिदुपुर ब्रिज बन रहा है. पटना के पास ये एक्सप्रेसवे गंगा नदी को पार करने के लिए निर्माणाधीन 9.75 किमी लंबे 6 लेन के कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से आवाजाही आसान होगी.ये पटना आउटर रिंग रोड के जरिये राजधानी को बेहतर कनेक्टिविटी देगा.एक्सप्रेसवे को नेपाल बॉर्डर पर जयनगर तक विस्तार दिया जा सकता है,इससे भारत-नेपाल व्यापार में इजाफा होगा. बिहार सरकार ने इस एक्सप्रेसवे से लिंक रोड से बोधगया और राजगीर को भी सीधे जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है. पटना, जहानाबाद, गया जैसे भीड़भाड़ वाले शहरों के अंदर गए बिना सीधे आउटर रिंग रोड से गाड़ियां निकल जाएंगी।

    राजगीर और बोधगया से कनेक्टिविटी
    बिहार सरकार ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 35 हजार करोड़ की योजना को हरी झंडी दी है. प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों को जोड़कर एक सर्किट बनाने के लिए ये प्रस्ताव तैयार किया गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को ये प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है. पटना से शुरू होने वाले इस एक्सप्रेसवे से गयाजी, राजगीर, बोधगया जैसे धार्मिक केंद्रों को जोड़ा जाएगा. इस योजना में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर को जोड़ा जाएगा. साथ ही वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से इंटरलिंक किया जाएगा.राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण  (NHAI) राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे और लिंक एक्सप्रेसवे निर्माण की जिम्मेदारी संभालेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का रूट
    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) से भी ये कनेक्ट होगा. 6 लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है. भारत के चार बडे़ राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी.वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बिहार के चार जिलों कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से होकर गुजरता है. इस एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में बदलाव कर सासाराम के पहाड़ी इलाके में सुरंग का प्रस्ताव दिया गया है. इससे एक्सप्रेसवे की दूरी करीब 15 किलोमीटर घट जाएगी. साथ ही इस बदलाव से गया और राजगीर को भी सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी.बिहार की ये एक्सप्रेसवे परियोजना करीब 610 किलोमीटर होगी. इस एक्सप्रेसवे का लगभग 170 किलोमीटर हिस्सा बिहार में बनाया जाएगा और बाकी दूसरे राज्यों से होकर गुजरेगा।

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे की यूपी के 4 राज्यों से कनेक्टिविटी
    उत्तर प्रदेश में वाराणसी रिंग रोड से चंदौली जिले के बरहुली गांव तक सीमा. 
    बिहार में कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिले, कुल दूरी 170 किमी 
    झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो तक, 187 किलोमीटर 
    बंगाल में पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा से कोलकाता के उलुबेरिया तक 

  • वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे पर बड़ा बदलाव! रूट बदलेगा, सासाराम की टनल से जुड़ेगा 4 राज्यों का हाईस्पीड नेटवर्क

    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे पर बड़ा बदलाव! रूट बदलेगा, सासाराम की टनल से जुड़ेगा 4 राज्यों का हाईस्पीड नेटवर्क

    वाराणसी

    भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव हुआ है. बिहार के रोहतास जिले में सासाराम के पास पहाड़ों में एक सुरंग निकाली जाएगी, जिससे 15 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी. इस सुरंग को बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेज दिया गया है. जहां से मंजूरी मिलते ही काम शुरू किया जाएगा. ऐसे में वाराणसी से बिहार के रास्ते कोलकाता तक बनने वाले एक्सप्रेसवे का एलाइनमेंट बदल जाएगा. 610 किलोमीटर लंबा यह यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा. 6 लेन एक्सप्रेसवे का यह प्रोजेक्ट पूर्वी भारत के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह बनारस और कोलकाता जैसे बड़े शहरों की दूरी को कम कर देगा. फिलहाल बनारस से कोलकाता जाने में 13 से 14 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने से यह दूरी 6 से 7 घंटे के बीच रह जाएगी। 
     
    बिहार के सासाराम में बनेगी सुरंग 
    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे में 170 किलोमीटर का हिस्सा बिहार में बन रहा है. जिसका निर्माणकार्य चालू है, लेकिन अब इसके एलाइनमेंट में फिर बदलाव होगा. रोहतास जिले में आने वाले पैकेज-4 के तहत सासाराम में एक सुरंग बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया है. हालांकि यह प्रस्ताव पहले भी दिया गया था, लेकिन तब वन विभाग की तरफ से क्लीयरेंस नहीं मिला था. जिसकी वजह से काम आगे नहीं बढ़ पाया था. लेकिन अब नए तरह से फिर प्रस्ताव भेजा गया है. इस सुरंग के बनने से 15 किलोमीटर की दूरी और कम हो जाएगी. इसके अलावा बिहार में सोन नदी पर एक 3.5 किलोमीटर लंबा पुल भी बन रहा है। 

    यूपी से बंगाल तक कनेक्टिविटी
    वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का आधिकारिक नाम NH-319B है. हालांकि 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जाता है. जो देश के चार बडे़ राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा. इस प्रोजेक्ट को अलग-अलग चरणों में बनाया जा रहा है, जिसका एक हिस्सा यूपी, दूसरा बिहार में तीसरा झारखंड और चौथा बंगाल में बनाया जा रहा है। 

    •     उत्तर प्रदेश से इसकी शुरुआत होगी, जहां वाराणसी रिंग रोड के पास चंदौली जिले के बरहुली गांव से बनाया जा रहा है। 
    •     बिहार में कैमूर, रोहतास (सासाराम) औरंगाबाद और गया जिलों से गुजरेगा, कुल दूरी 170 किलोमीटर होगी। 
    •     झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो जो रांची के पास से निकलेगा. कुल दूरी 187 किलोमीटर होगी। 
    •     पश्चिम बंगाल में पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा होते हुए यह कोलकाता के नजदीक उलुबेरिया के पास खत्म होगा। 

    6 घंटे में बनारस से कोलकाता
    वर्तमान में बनारस से कोलकाता की दूरी तय करने में  ग्रैंड ट्रंक रोड से लगभग 12 से 15 घंटे का समय लगता है. इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद वाराणसी से कोलकाता का सफर मात्र 6 से 7 घंटे में पूरा हो सकेगा. क्योंकि इस पर जाम की समस्या नहीं होगी और गाड़ियां 100 से 120 की रफ्तार से चलेगी. ऐसे में दो बड़े शहरों दूरी बेहद कम जाएगी, आप सुबह निकलेंगे तो शाम तक पहुंच जाएंगे। 

    इन शहरों से गुजरेगा
        बनारस
        चंदौली 
        सासाराम
        औरंगाबाद 
        गया
        हजारीबाग
        रांची 
        बोकारो 
        कोलकाता

    2028 तक पूरा करने का लक्ष्य 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 फरवरी 2024 को इस मेगा प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी. उम्मीद की जा रही है कि मार्च 2028 तक यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से बनकर जनता को समर्पित कर दिया जाएगा, हालांकि इस मेगा प्रोजेक्ट को 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सासाराम में टनल के नए निर्माण और बंगाल में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रियाओं की वजह से देरी हुई थी. फिलहाल इस प्रक्रिया पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।