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  • बिहार भर्ती परीक्षा में संगठित गिरोह सक्रिय, मास्टरमाइंड की तलाश जारी

    बिहार भर्ती परीक्षा में संगठित गिरोह सक्रिय, मास्टरमाइंड की तलाश जारी

    मुंगेर

    मुंगेर में सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी भर्ती परीक्षा के दौरान मंगलवार को बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जिले के 20 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी के बीच चल रही परीक्षा में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार ‘मुन्ना भाई’ को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि 18 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

     दो पालियों में हुई परीक्षा, कड़ी जांच के बाद मिला प्रवेश
    यह परीक्षा बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से दो पालियों में आयोजित की गई। पहली पाली सुबह 10 बजे से 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक चली। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी केंद्रों पर सख्त व्यवस्था की गई थी। परीक्षार्थियों को पहली पाली के लिए सुबह 8 से 9 बजे के बीच और दूसरी पाली के लिए दोपहर 1 से 1:30 बजे के बीच ही कड़ी जांच के बाद प्रवेश दिया गया।

     बायोमेट्रिक जांच में गड़बड़ी, केंद्राधीक्षक निलंबित
    इसी बीच उपेंद्र ट्रेनिंग एकेडमी स्थित परीक्षा केंद्र पर बड़ी लापरवाही सामने आई। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि बायोमेट्रिक सत्यापन में लगी एजेंसी के प्रतिनिधि मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए केंद्राधीक्षक अर्चना कुमारी को निलंबित कर दिया गया। उन पर परीक्षा की शुचिता बनाए रखने में असफल रहने और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है।

     अलग-अलग केंद्रों से चार फर्जी परीक्षार्थी गिरफ्तार
    पुलिस ने अलग-अलग केंद्रों से चार फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया है। इनमें भगत चौकी के सुजल कुमार, पटना के समीर कुमार, कहलगांव के प्रशांत कुमार और लड़ैयाटाड़ बंगलवा के प्रियांशु कुमार शामिल हैं। ये सभी असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। छापेमारी के दौरान इनके पास से मोबाइल और टैब भी बरामद किए गए।

     संगठित गिरोह और पेपर लीक की साजिश का खुलासा
    पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी की शिकायत पर कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एक संगठित गिरोह स्थानीय युवकों को हायर कर परीक्षा में बैठाने की साजिश रच रहा था। साथ ही प्रश्नपत्र लीक कराने की भी कोशिश की जा रही थी।

     128 अभ्यर्थियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग
    जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान की एक नोडल एजेंसी ने 128 अभ्यर्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया था, ताकि वे परीक्षा में शामिल होकर फर्जी तरीके से सफलता हासिल कर सकें। बायोमेट्रिक क्लियर कराने के लिए सुजल कुमार को एजेंट बनाया गया था, जिसने असली अभ्यर्थियों की जगह मुन्ना भाई बैठा दिए।

     मास्टरमाइंड की तलाश जारी, और खुलासों की आशंका
    इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अंबे चौक स्थित एक कोचिंग संचालक ए.के. राठौर को माना जा रहा है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल सभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी और कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और विश्वसनीय बनी रहे।

     

  • परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की आशंका, पुलिस ने दस्तावेज और मोबाइल की जांच शुरू की

    परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की आशंका, पुलिस ने दस्तावेज और मोबाइल की जांच शुरू की

     तमाड़

    झारखंड के विभिन्न जिलों में रविवार को आयोजित उत्पाद सिपाही की परीक्षा के बीच रांची के तमाड़ से एक संदिग्ध और बड़ी घटना सामने आई है. तमाड़ पुलिस ने रड़गांव स्थित एक निर्माणाधीन भवन में छापेमारी कर करीब 150-160 युवकों को हिरासत में लिया है. यह स्थान नेशनल हाईवे से करीब एक किलोमीटर दूर गांव के बाहरी सुनसान इलाके में स्थित है, जहां इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से पुलिस को संगठित गड़बड़ी का संदेह हुआ.

    थाना परिसर सील, वरीय अधिकारी कर रहे पूछताछ
    हिरासत में लिए गए सभी युवकों को तमाड़ थाना लाया गया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियातन थाना परिसर के मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया है और वरीय पुलिस अधिकारी खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं. पुलिस की टेक्निकल टीम हिरासत में लिए गए युवकों के मोबाइल फोन और उनके पास से मिले दस्तावेजों की जांच कर रही है.

    दस्तावेज और वाहन जब्त
    छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कई अहम साक्ष्य बरामद किए हैं. इनमें अभ्यर्थियों के नामों की लंबी सूची, उनके मोबाइल नंबर और पहचान पत्रों (जैसे आधार कार्ड) की छायाप्रतियां शामिल हैं. इसके अलावा, वहां आने-जाने के लिए इस्तेमाल किए गए कई वाहनों को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है.

    नकल गिरोह या अवैध सेटिंग की आशंका
    प्रारंभिक जांच के अनुसार, हिरासत में लिए गए अधिकांश युवक उत्पाद सिपाही की परीक्षा देने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों से रांची पहुंचे थे. पुलिस इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या इन युवकों को परीक्षा में नकल कराने या किसी विशेष ‘सेटिंग’ के उद्देश्य से यहां जुटाया गया था. पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इसके पीछे किसी संगठित नकल गिरोह का हाथ है या मामला कुछ और है.