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  • उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश

    उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश

    रायपुर

    सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग गंभीरता से पहल कर रही है। विभाग ने उपचारित जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने नगरीय निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और उनकी जल आवश्यकता के आकलन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा गया है।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के जिन 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन है, वहां के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इन निकायों को एसटीपी के उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा गया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित जल की आवश्यकता होगी, इसका भी आकलन करने को कहा गया है। 

    50 किमी के दायरे में तलाशेंगे उपयोगकर्ता

    उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसके उपयोग के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से की जा सकेगी।

    स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है।

    केंद्र सरकार और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन की पहल

    सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरोदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगाव के निगम आयुक्तों को परिपत्र जारी कर बताया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी एसटीपी के उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए निर्देशित किया है। सूडा ने संबंधित निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता के संबंध में जानकारी 15 दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

  • केंद्रीय संस्थानों के सहयोग से 2047 तक समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने की तैयारी

    केंद्रीय संस्थानों के सहयोग से 2047 तक समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने की तैयारी

    भोपाल

    ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047: केंद्रीय संस्थानों की भूमिका’ विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के दीर्घकालीन विकास के लिए केंद्रीय एवं शैक्षणिक संस्थानों, राज्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया गया। कॉन्क्लेव में संस्थानों ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप शोध, कौशल विकास, तकनीकी नवाचार, कृषि, उद्योग, पर्यटन, स्वास्थ्य, शहरी नियोजन और डिजिटल गवर्नेंस में सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    कार्यक्रम के स्वागत भाषण में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA) के उपाध्यक्ष प्रो राजीव दीक्षित ने कॉन्क्लेव की रूपरेखा और इसके प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ के विज़न को सात प्रमुख श्रेणियों—कृषि एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, रक्षा एवं सुरक्षा तथा प्रबंधन, शिक्षा, कौशल, डिजाइन, पर्यटन एवं खेल—में विभाजित किया गया है। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रत्येक केंद्रीय संस्थान को एक स्पष्ट ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ के साथ जोड़ना है, ताकि संस्थान अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप ठोस योगदान दें और 2047 के विकास लक्ष्य को साकार करने में भागीदार बनें।

    दूसरे सत्र में कॉन्क्लेव में विभिन्न केंद्रीय संस्थानों ने अपने सहयोग की ठोस संभावनाएँ प्रस्तुत कीं। आईआईटी इंदौर ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने तथा आगामी 4-5 वर्षों में 10,000 युवाओं को विशेषीकृत क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आईआईएसईआर भोपाल ने ड्रोन टेक्नोलॉजी, खनन और कृषि अनुसंधान में सहयोग की जानकारी दी। आईआईएम इंदौर ने कृषि सुधार, पर्यटन और पंचायती राज के डिजिटलीकरण में सहयोग का प्रस्ताव रखा।

    एनआईटीटीटीआर भोपाल ने सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग के लिए स्थापित क्लीन-रूम लैब और शिक्षक प्रशिक्षण के प्रयासों की जानकारी दी। आईआईआईटी भोपाल ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता उपलब्ध कराने की बात कही। मेनिट भोपाल ने ऊर्जा संक्रमण, कौशल एवं उच्च शिक्षा में चल रही पहलों की जानकारी दी। एलएनआईपीईयू ग्वालियर ने खेल, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता को जोड़ने तथा जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। सीएसआईआर-एएमपीआरआई भोपाल ने कौशल विकास, महत्वपूर्ण खनिजों, पर्यावरणीय तकनीक और स्मार्ट विलेज पहल का उल्लेख किया। एसपीए भोपाल ने शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, पर्यावरण और विरासत संरक्षण में सहयोग की जानकारी दी, जबकि एनआईडी मध्यप्रदेश ने राज्य के लिए मानव-केंद्रित ‘डिज़ाइन इंजन’ की भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    सत्र में ‘2047 तक समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण’ विषय पर चर्चा हुई। सतत औद्योगिक गतिवर्धन, बहु-उत्पाद औद्योगिक क्लस्टर, उद्योग-अकादमिक समन्वय, कौशल विकास केंद्र, आर&डी इकोसिस्टम और उत्कृष्टता केंद्रों को प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया। कृषि क्षेत्र में प्रिसीजन फार्मिंग, कृषि निर्यात पार्क, कोल्ड-चेन, एग्रीटेक, बायोटेक और ग्रीनटेक पर बल दिया गया। सेवा क्षेत्र में पर्यटन, आईटी, एवीजीसी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विस्तार की संभावनाएँ रेखांकित की गईं।

    सामाजिक क्षेत्र में विश्वस्तरीय शिक्षा एवं कौशल, एआई-संचालित मूल्यांकन, स्थानीय एवं जनजातीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री, अनुसंधान केंद्र, बौद्धिक संपदा को बढ़ावा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ, नवीकरणीय ऊर्जा, ईवी चार्जिंग तथा सतत शहरी एवं ग्रामीण अवसंरचना को प्राथमिकता दी गई।

    कॉन्क्लेव में नीतिगत समन्वय, डिजिटल नॉलेज रिपॉजिटरी एवं विशेषज्ञ डेटाबेस तथा केंद्रीय संस्थानों और राज्य सरकार के विभागों के बीच निरंतर सहयोग विकसित करने पर सहमति बनी। प्रतिभागियों ने विज़न को मिशन, परियोजनाओं, रणनीतियों और मापनीय परिणामों में बदलने तथा ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ को ठोस कार्ययोजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कार्यक्रम में संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विभाष कुमार ठाकुर, संचालक श्री स्वरोचिष सोमवंशी, प्रो संतोष विश्वकर्मा चीफ साइंटिफिक एडवाइजर के साथ संस्थान के समस्त अधिकारी उपस्थित रहे।