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  • UP Rajya Sabha Election: खत्म हुआ चुनाव का इंतजार, BJP के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाएंगे

    UP Rajya Sabha Election: खत्म हुआ चुनाव का इंतजार, BJP के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाएंगे

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब नहीं होगा. राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किये थे. लेकिन आज नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद BJP के 8 और समाजवादी पार्टी (सपा) के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है. यानी अब इन 10 सीटों के लिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है. इसे देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने इन सीटों पर 16 अक्टूबर को द्विवार्षिक चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किया था। 

    10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने दाखिल किया था नामांकन
    चुनाव प्रक्रिया के तहत 29 सितंबर से 6 अक्टूबर तक नामांकन की अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी. 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच तथा 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की समयसीमा तय है. जिसके तहत 10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। 

    सबसे पहले नामांकन कर बैकफुट पर आई सपा
    नामांकन प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले सपा की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया. वहीं 1 अक्टूबर को कांते सयन्ना ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा. हालांकि इस दौरान सपा ने जल्द ही अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतारने का ऐलान कर दिया था. हालांकि बीते 6 अक्टूबर को नामांकन के अंतिम दिन सपा मुखिया अखिलेश यादव ने X पर “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” पोस्ट कर अपना तीसरा उम्मीदवार ना उतारने का ऐलान कर BJP और सपा के सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन तय कर दिया था। 

    BJP के आत्मविश्वास से बैकफुट पर आये विपक्षी
    इस दौरान BJP ने अपने 8 उम्मीदवारो के नाम का ऐलान कर दिया था. जिसमें 7 को जिताने के लिए BJP के पास पर्याप्त संख्या थी. जबकि BJP ने अपना 8 वां उम्मीदवार विपक्षी विधायकों के समर्थन के भरोसेमंद मैदान में उतारा था. जिसके बाद एक ओर जहाँ विपक्ष बैकफुट पर नज़र आया. तो वही BJP पूरे आत्माविश्वास के साथ CM योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी CM के साथ संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ BJP ने अपने सभी 8 उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराते हुए नज़र आई. जिसमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, राम प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह और श्रुति गंगवार शामिल रही. हालांकि इस दौरान ओमकार नाथ चौरसिया ने भी बिना आवश्यक 10 प्रस्तावको के ही निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया. जिससे 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों के नामांकन हो गए। 

    दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज
    7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने कांते सयन्ना और ओमकार नाथ चौरसिया के नामांकन पत्र खारिज कर दिए. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक दोनों निर्दलीय उम्मीदवार आवश्यक 10 प्रस्तावकों की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर सके थे. जिसके चलते बिना 10 प्रस्तावको के ही नामांकन पत्र दाखिल कर देने के आधार पर इन दोनों निर्दलीय उम्मीदवारो का नामांकन ख़ारिज कर दिया गया है. अब राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मैदान में केवल BJP के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार रह गए हैं. ऐसे में इन सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है। 

    9 को नाम वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद मिलेगा सर्टिफिकेट
    अब 9 अक्टूबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी. यदि कोई उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता है. तो इसके बाद सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी. और सभी उम्मीदवारों को निर्वाचन का सर्टिफिकेट भी दें दिया जायेगा. और फिर उसके बाद बिना मतदान ही राज्यसभा चुनाव की समस्त प्रक्रियाओ को संपन्न करने की औपचारिकताओ को भी पूरा कर दिया जायेगा। 

    इन राज्यसभा सदस्यों का 25 नवंबर को खत्म होगा कार्यकाल
    उत्तर प्रदेश से जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है, उनमें अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, प्रो. राम गोपाल यादव, रामजी, बी.एल. वर्मा, सीमा और हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं. वहीं डॉ. दिनेश शर्मा को बीते दिनों अंडमान निकोबार का उप राज्यपाल बना दिया गया है. जिसके चलते राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे जाने के चलते उनकी सीट बीते 11 सितंबर 2026 से रिक्त है। 

  • राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल, चार चरणों में मतदान; जानें नामांकन से वोटिंग तक पूरा शेड्यूल

    राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल, चार चरणों में मतदान; जानें नामांकन से वोटिंग तक पूरा शेड्यूल

    जयपुर
     राजस्थान में निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पंचायत चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मीडिया से रूबरू होकर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी किया। चुनाव की तिथियों का ऐलान होने के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। अगले दो महीने तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक आचार संहिता प्रभावी रहेगी।

    नामांकन 8 अक्टूबर से
    मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि पंच सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के लिए 8 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर है। 15 अक्टूबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। जिला प्रमुख के चुनाव 25 नवंबर को होंगे। पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी प्रक्रिया 28 नवंबर को पूरी हो जाएगी।

    जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य चुनाव कार्यक्रम

    चरण / प्रक्रिया अधिसूचना (Notification) नामांकन अंतिम तिथि नाम वापसी व प्रतीक आवंटन मतदान तिथि (सुबह 7 से शाम 6 बजे)
    प्रथम चरण 08.10.2026 (गुरुवार) 13.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 15.10.2026 23.10.2026 (शुक्रवार)
    द्वितीय चरण 13.10.2026 (मंगलवार) 16.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 19.10.2026 29.10.2026 (गुरुवार)
    तृतीय चरण 19.10.2026 (सोमवार) 23.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 26.10.2026 04.11.2026 (बुधवार)
    चतुर्थ चरण 31.10.2026 (शनिवार) 04.11.2026 (दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 14.11.2026 (शनिवार)

     

    पंच एवं सरपंच चुनाव कार्यक्रम (बैलेट पेपर से)

    चरण अधिसूचना नामांकन, जांच व प्रतीक आवंटन मतदान व मतगणना तिथि उपसरपंच चुनाव
    प्रथम चरण 08.10.2026 24.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 25.10.2026 (रविवार) 26.10.2026
    द्वितीय चरण 13.10.2026 30.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 31.10.2026 (शनिवार) 01.11.2026
    तृतीय चरण 19.10.2026 05.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 (शुक्रवार) 07.11.2026
    चतुर्थ चरण 31.10.2026 15.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 16.11.2026 (सोमवार) 17.11.2026

    सरपंच और पंच पद की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन होगी।

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    मतगणना एवं शीर्ष पदों के चुनाव की तिथियां

    • जिला परिषद व पंचायत समिति मतगणना: 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) प्रातः 8:00 बजे से
    • प्रधान का चुनाव: 25 नवंबर 2026 (बुधवार)
    • उप प्रधान का चुनाव: 26 नवंबर 2026 (गुरुवार)
    • जिला प्रमुख का चुनाव: 27 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
    • उप जिला प्रमुख का चुनाव: 28 नवंबर 2026 (शनिवार)
    • इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया संपन्न होगी

     

    महिला आरक्षण और वर्गवार समीकरण 

    पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने से ग्रामीण निकायों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रहेगी।

    • महिला सरपंच: कुल 14,403 ग्राम पंचायतों में से 7,201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनेंगी।
    • महिला वार्ड पंच: 1,30,584 वार्डों में से 65,000 से अधिक वार्ड पंच महिलाएं होंगी।
    • महिला प्रमुख व प्रधान: 41 जिलों में से 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में से 227 महिला प्रधान चुनी जाएंगी।
    • एसटी आरक्षित जिले: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सरपंच के सभी पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
    • वर्गवार सरपंच पद आरक्षण: ST – 3,058 | SC – 2,493 | OBC – 1,961 पद।
    • मुख्य बिंदु और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश
    • मतदाता संख्या: कुल मतदाता संख्या में 2.08 करोड़ पुरुष मतदाता शामिल हैं। जयपुर जिला परिषद में सबसे अधिक, जबकि जैसलमेर में सबसे कम मतदाता हैं। खंडेला सबसे बड़ी पंचायत समिति है।
    • मतदान केंद्र व स्टाफ: कुल 45,384 मतदान केंद्रों पर 3.17 लाख कर्मचारी चुनाव संपन्न कराएंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग वोटरों के लिए घर से लाने-ले जाने की व्यवस्था होगी।
    • पहचान पत्र: मतदान के लिए मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के अलावा 11 वैकल्पिक दस्तावेज़ मान्य होंगे।
    • चुनावी खर्च सीमा: जिला परिषद सदस्य हेतु रुपये 3 लाख, पंचायत समिति सदस्य हेतु रुपये 1.50 लाख तथा सरपंच पद हेतु रुपये 1 लाख की खर्च सीमा तय की गई है।
    • कड़े नियम: नामांकन के दौरान रैली निकालने और जीत के बाद विजय जुलूस निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकारी स्तर पर नए कार्यादेश जारी करने पर रोक रहेगी।

     

    महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण
    निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिला था जबकि पंचायती राज संस्थाओं में 50 फीसदी आरक्षण का नियम है। ऐसे में गांव की सरकार में महिलाओं का बोलबाला होगा। वार्ड पंच, सरपंच, उप सरपंच, प्रधान और प्रमुख की कुर्सियों में ज्यादातर जगह महिलाएं ही नजर आने वाली है क्योंकि उन्हें 50 फीसदी आरक्षण प्राप्त है और कई अन्य ग्राम पंचायतों और जिलों में भी महिलाओं नेत्रियां राजनीति में सक्रिय हैं। वे भी चुनाव मैदान में उतरने वाली हैं।

    7201 गांवों में महिलाएं बनेंगी सरपंच
    प्रदेश में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें हैं जहां सरपंच और उपसरपंच के चुनाव होने हैं। पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का नियम लागू है। ऐसे में 14,403 में से 7201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनने वाली हैं। इन ग्राम पंचायतों में कुल 1 लाख 30 हजार 584 वार्ड हैं जहां पंच चुने जाएंगे। आरक्षण के हिसाब से करीब 65 हजार से ज्यादा महिलाएं वार्ड पंच बनने वाली हैं।

    20 जिलों में प्रमुख बनेंगी महिलाएं
    राजस्थान में कुल 41 जिले हैं। इनमें से 20 जिलों में महिलाएं जिला प्रमुख बनेंगी। जिला परिषद सदस्यों के कुल 1,403 पदों पर और पंचायत समिति के सदस्य के 8,245 पदों पर चुनाव होने हैं। आरक्षण व्यवस्था के मुताबिक जिस तरह से 20 जिलों में महिलाएं प्रमुख बनेंगी। उसी तरह 457 प्रधानों में से 227 पंचायतों में महिला प्रधान बनेंगी।

    4 जिलों में सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित
    पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में महिलाओं के साथ अन्य वर्गों को आरक्षण प्राप्त है। सरपंचों के कुल पदों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 3058, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 2,493 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1,961 पद आरक्षित हैं। इसी तरह से वार्ड पंचों के कुल पदों में से 21,962 पद एससी, 19,117 पद एसटी और करीब 15 हजार पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर ऐसे जिले हैं जहां सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है।

     

     
  • वोटर लिस्ट के SIR पर EC का बड़ा बयान, मृत-डुप्लीकेट नाम हटाने और पात्र मतदाताओं को बनाए रखने का दावा

    वोटर लिस्ट के SIR पर EC का बड़ा बयान, मृत-डुप्लीकेट नाम हटाने और पात्र मतदाताओं को बनाए रखने का दावा

     नई दिल्ली
    विपक्षी दलों द्वारा एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने अपना पक्ष साफ किया है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहना है कि एसआईआर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की एक वैधानिक और स्थापित प्रक्रिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा का भी समर्थन प्राप्त है और किसी भी चुनाव आयुक्त ने किसी फैसले पर असहमति दर्ज नहीं की है। 

    फर्जी और मृत वोटर हटाना मकसद
    सूत्रों के मुताबिक, एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाना है. इसके तहत मृत, डुप्लीकेट, फर्जी और शिफ्ट हो चुके मतदाताओं की पहचान की जाती है. साथ ही ये सुनिश्चित किया जाता है कि सभी पात्र नागरिक लिस्ट में बने रहें। 

    सूत्रों ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कभी-भी एसआईआर प्रक्रिया को निलंबित नहीं किया, बल्कि मतदाता घोषणा और मैपिंग प्रक्रिया समेत इसे आगे बढ़ाने की अनुमति दी और मतदाताओं के लिए सुरक्षा उपाय तय किए। 

    आयोग ने 11 करोड़ मतदाताओं को दोबारा लिस्ट में शामिल करने की राजनीतिक मांग पर स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि इसका सीधा अर्थ उन नामों को फिर से शामिल करना होगा, जिन्हें गहन सत्यापन के दौरान हटाया गया था. लेकिन उनका दोबारा सत्यापन अभी पूरा नहीं हुआ है. नए मतदाताओं और नाम जुड़वाने के इच्छुक लोगों के लिए फॉर्म 6 पूरी तरह उपलब्ध है. सूत्रों के अनुसार फॉर्म 6 में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

    बीएलओ को तीन बार जाने की ट्रेनिंग
    सूत्रों ने बताया कि बीएलओ को प्रशिक्षित किया गया है कि वह मतदाताओं के वेरिफिकेशन के लिए कम से कम तीन बार घर-घर जाएं. इसमें घर पर न मिलने वाले या शिफ्ट मतदाताओं का वेरिफिकेशन भी शामिल है. ये प्रक्रिया सालों से चली आ रही है और केवल 1987 के बाद जन्मे लोगों से ही दस्तावेज मांगे गए हैं. सॉफ्टवेयर के जरिए मैपिंग की गलतियों को चिन्हित कर फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटाए जा रहे हैं. अगर किसी ने भी एसआईआर फॉर्म पर हस्ताक्षर कर बीएलओ को दिया है तो उसका नाम ड्राफ्ट सूची में जरूर शामिल होगा। 

    ERO-AERO ने नहीं की शिकायत
    आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम
    जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया विकेंद्रीकृत है. ये काम EROs और AEROs के स्तर पर होता है, न कि व्यक्तिगत रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा। 

    सूत्रों के मुताबिक, देश भर में करीब 25,000 EROs और AEROs में से किसी ने भी इस प्रक्रिया को लेकर शिकायत नहीं की है। 

    गोवा में तकनीकी गड़बड़ी के कारण करीब 97 मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे. इनमें से 88 के नाम अब जोड़े जा चुके हैं. तीन लोग पुर्तगाली नागरिक हैं, 6 उस वक्त विदेश में थे और बाकी मामलों का सत्यापन किया जा रहा है। 

    बेला एस्टेट विवाद पर EC का जवाब
    आयोग ने राहुल गांधी द्वारा बेला एस्टेट में 727 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के मामले पर सफाई देते हुए सूत्रों ने कहा, बीएलओ अभी-भी नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं, क्योंकि दिल्ली में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है. चुनाव आयोग का तर्क है कि बेला एस्टेट मेजब बीएलओ गए थे तो वहां कोई था नहीं तो फिर किससे पूछते या हस्ताक्षर करवाते?

    चुनाव आयोगके सूत्रों के मुताबिक, अगर किसी ने भी SIR का फार्म हस्ताक्षर करके बीएलओ को दिया है तो उसका नाम ड्राफ्ट सूची में पक्का होगा। 

  • MP में निकाय चुनाव की टाइमिंग बदलेगी? परिसीमन और नए निकायों का काम अटकने से 6 महीने की देरी के संकेत

    MP में निकाय चुनाव की टाइमिंग बदलेगी? परिसीमन और नए निकायों का काम अटकने से 6 महीने की देरी के संकेत

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में अगले साल प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सियासी टाइमिंग के बीच उलझते नजर आ रहे हैं। जनगणना के कार्य के पूरा होने तक वार्डों के परिसीमन और नए नगरीय निकायों के गठन का काम अटकने के कारण चुनाव कार्यक्रम करीब छह महीने आगे खिसकने की पूरी संभावना बन रही है।

    परिसीमन और जनगणना का पेंच
    प्रदेश के कुल 413 नगरीय निकायों (जिसमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं) में 7,679 पार्षद पदों के साथ-साथ महापौर और अध्यक्ष पदों के चुनाव होने हैं। हालांकि, इन चुनावों की राह में जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। आबादी के नए आंकड़ों के बिना वार्डों का परिसीमन और आरक्षण तय करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके अलावा, सरकार द्वारा कुछ ग्रामीण पंचायतों को मिलाकर नई नगर परिषद बनाने की घोषणा भी की गई है, जिस पर जनगणना पूरी होने तक विराम लग गया है।

    आयोग की तैयारी बनाम सरकार के अधिकार क्षेत्र
        राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी ओर से तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट किया जा चुका है और ईवीएम की मांग का प्रस्ताव भी सरकार को भेज दिया गया है।

        आयोग का स्पष्ट कहना है कि कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है, जबकि वार्ड परिसीमन, नए निकायों का गठन और आरक्षण की पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है।

    प्रत्यक्ष प्रणाली और राजनीतिक समीकरण
    इस बार नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली से ही कराए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के नियम के चलते परिसीमन के बाद सीटों का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। राजनीतिक दल इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं, लेकिन चुनाव में देरी होने से दलों की पूरी चुनावी रणनीति और टिकट वितरण के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

  • UP Election Survey: BJP+ को कितनी सीटें, SP+ का क्या हाल? ताजा सर्वे में सामने आया बड़ा अनुमान

    UP Election Survey: BJP+ को कितनी सीटें, SP+ का क्या हाल? ताजा सर्वे में सामने आया बड़ा अनुमान

    लखनऊ 

    यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पिछले नौ सालों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक चुनावी सर्वे सामने आया है, जिसमें भाजपा की बंपर जीत का अनुमान जताया गया है। इसमें भाजपा गठबंधन 267 सीटों के साथ प्रदेश में फिर से सरकार बना सकता है, जबकि सपा गठबंधन को 132 सीटें मिलने की संभावना है। बसपा को दो और अन्य के खाते में दो सीटें जा सकती हैं।

    न्यूज लीडर और मैटराइज के सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर यह सर्वे किया गया है। इसमें भाजपा गठबंधन को 267 सीटें दी गईं। इसमें से भाजपा को ही अकेले दम पर 246 सीटें मिलती दिख रहीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (S) को नौ, आरएलडी को तीन, निषाद पार्टी को चार और सुभासपा को एक सीट दी गई है। सर्वे में बताया गया है कि अगर आज चुनाव होते हैं तो भाजपा गठबंधन की सरकार बनेगी।

    वहीं, समाजवादी पार्टी गठबंधन को राज्य में महज 132 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। अगर यह सर्वे सच होता है तो सपा के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि उसे लगातार तीसरी बार सत्ता से बाहर रहना पड़ेगा। इससे पहले सपा 2012-17 तक यूपी में सत्ता में थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। इस बार सपा ही अकेले 125 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस को सात सीटें मिल सकती हैं। सपा और कांग्रेस में पिछले कई दिनों से बयानबाजी भी तेज है। कांग्रेस की ओर से सांसद इमरान मसूद तीखी बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि अब सपा सांसद इकरा हसन भी पलटवार कर रही हैं।

    भाजपा और सपा गठबंधन को कितने फीसदी वोट शेयर का अनुमान
    सर्वे के अनुसार, भाजपा को राज्य में 44 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है, जबकि सपा गठबंधन को 38 फीसदी वोट मिल सकता है। इस तरह दोनों के बीच छह फीसदी का अंतर रहने की संभावना है, जोकि काफी बड़ा अंतर है। वहीं, बसपा को 0.8 फीसदी और अन्य को दस फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान है।

    पिछले दो चुनावों के आंकड़े
    यूपी चुनाव 2022 में भाजपा ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर करीब 41.3 फीसदी रहा था। समाजवादी पार्टी (SP) को 111 सीटें मिलीं और उसका वोट शेयर करीब 32.1 फीसदी था। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) सिर्फ एक सीट जीत सकी, जबकि उसका वोट शेयर करीब 12.9 फीसदी रहा। कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। बीजेपी के सहयोगियों अपना दल (एस) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिलीं। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटों पर जीत हासिल की थी और उसका वोट शेयर करीब 39.7 फीसदी था। समाजवादी पार्टी को 47 सीटें, बसपा को 19 सीटें और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं। यानी 2017 से 2022 के बीच बीजेपी की सीटें 57 कम हुईं, लेकिन उसका वोट शेयर बढ़ा। इसके उलट SP की सीटों में 64 का इजाफा हुआ और उसका वोट शेयर भी करीब 10 प्रतिशत अंक बढ़ा, जबकि बसपा और कांग्रेस दोनों के सीटों तथा वोट शेयर में गिरावट आई।

  • मध्य प्रदेश निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव! बढ़ी जमानत राशि, प्रत्याशियों को देना होगा खर्च का लेखा-जोखा

    मध्य प्रदेश निकाय चुनाव में बड़ा बदलाव! बढ़ी जमानत राशि, प्रत्याशियों को देना होगा खर्च का लेखा-जोखा

    भोपाल

    महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षद का चुनाव लड़ने वालों को अब सिक्योरिटी डिपॉजिट (जमानत राशि) के रूप में ज्यादा रकम जमा करनी होगी। अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने महापौर के लिए जमानत राशि 32 हजार रुपए कर दी है, जबकि नपा अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वालों को 24 हजार रुपए जमा करने होंगे।

    इसके साथ ही नामांकन जमा करने की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब यह अवधि सात दिन से कम नहीं होगी। सातवें दिन अवकाश होने पर अगले कार्यदिवस तक नामांकन जमा किए जा सकेंगे। चुनावी खर्च का हिसाब रखने और प्रस्तुत करने के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन किया है। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष के निर्वाचन, नामांकन, जमानत राशि, चुनावी खर्च और पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।

    महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों के चुनाव खर्च के लिए अलग बैंक खाता खोलने और निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करने से संबंधित प्रावधान भी किए गए हैं।

    नामांकन के लिए सात दिन से कम की समय-सीमा नहीं
    संशोधित नियमों के अनुसार महापौर, अध्यक्ष या किसी वार्ड के पार्षद के निर्वाचन के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख, समय और स्थान निर्धारित किया जाएगा। इसकी सूचना प्रकाशित होने के सातवें दिन को नामांकन की अंतिम तारीख माना जाएगा। यदि सातवां दिन सार्वजनिक अवकाश है तो उसके अगले कार्यदिवस को अंतिम तारीख माना जाएगा।

    एक पद के लिए एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं होंगे
    एक ही पद के निर्वाचन के लिए किसी प्रत्याशी की ओर से दो या अधिक नामांकन-पत्र प्रस्तुत किए जाने पर एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन-पत्र स्वीकार नहीं करेगा।

    चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता जरूरी
    महापौर, नपा और नपं अध्यक्ष तथा पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित सभी आय-व्यय का रिकॉर्ड रखने के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग और स्वतंत्र खाता खोलना होगा। नामांकन-पत्र पेश करते समय इस खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। चुनाव से संबंधित प्राप्तियों और खर्च का पूरा विवरण इसी खाते के माध्यम से रखना होगा।

    नामांकन से मतगणना तक के खर्च का देना होगा हिसाब
    उम्मीदवारों को निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसमें नामांकन-पत्र दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक किया गया संबंधित चुनावी खर्च शामिल होगा। निर्धारित समय में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर उम्मीदवार के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई हो सकती है।

    महापौर-अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया भी शामिल
    संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया भी शामिल की गई है। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 और मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 के संबंधित प्रावधानों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    यदि महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद मृत्यु, त्यागपत्र, निर्वाचन रद्द होने या अन्य कारण से रिक्त होता है, तो इसकी सूचना निर्धारित समय-सीमा में जिला निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।

    चुनावी खर्च का हिसाब नहीं दिया तो हो सकती है कार्रवाई
    यदि कोई उम्मीदवार निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करता है या निर्धारित अवधि में खर्च का हिसाब देने में विफल रहता है, तो राज्य निर्वाचन आयोग उसे निर्धारित अवधि के लिए संबंधित पद का चुनाव लड़ने से निरर्हित कर सकता है।

    खर्च से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे
    महापौर, अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से संबंधित खर्च का पूरा हिसाब और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे। अलग बैंक खाते की व्यवस्था से निर्वाचन व्यय से जुड़ी प्राप्तियों और खर्च का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने का प्रावधान किया गया है।

  • पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव में सस्पेंस बढ़ा, काउंटिंग रुकी; कल आएगा रिजल्ट

    पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव में सस्पेंस बढ़ा, काउंटिंग रुकी; कल आएगा रिजल्ट

    चंडीगढ़.

    पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव की रजिस्टर्ड ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना लगातार 36 घंटे चलने के बाद वीरवार दोपहर एक बजे रोक दी गई। मतगणना में तैनात स्टाफ को लगातार काम के बाद आराम नहीं मिल पाने के कारण यह फैसला लिया गया।

    पीयू रजिस्ट्रार वाइपी वर्मा ने बताया कि अब शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से दोबारा मतगणना शुरू होगी। 15 सीटों के लिए 51 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में मतगणना पर प्रत्याशियों और समर्थकों की लगातार नजर बनी हुई है। अब तक बूथवार रिकाॅर्ड के अनुसार 60,044 बैलेट पेपर की गिनती दर्ज की गई है। पंजाब के 212 बूथों से सबसे अधिक 49,422 वोट की गिनती हुई है। चंडीगढ़ के 33 बूथों से 5,446 और हरियाणा के 19 बूथों से 4,269 वोट दर्ज हुए।

    वहीं दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू से कुल 907 बैलेट पेपर की गिनती हुई है। मतगणना दोबारा शुरू होने के बाद रुझान और स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके साथ ही 15 सीटों पर कौन प्रत्याशी जीत की ओर बढ़ रहा है, इसकी तस्वीर भी साफ होगी। सीनेट चुनाव के अंतिम परिणाम के लिए अब शुक्रवार की मतगणना पर सभी की नजर है।

  • नवा रायपुर में जुटे राज्य निर्वाचन आयुक्त, 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का शुभारंभ

    नवा रायपुर में जुटे राज्य निर्वाचन आयुक्त, 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का शुभारंभ

    नवा रायपुर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

    राज्यपाल रमेन डेका ने किया ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book–2026’ का विमोचन

    रायपुर, 
     छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में 32वें अखिल भारतीय राज्य निर्वाचन आयुक्त सम्मेलन का आज भव्य शुभारंभ हुआ। लगभग 11 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है। सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने दीप प्रज्वलित कर किया।

              शुभारंभ समारोह के विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने ‘Chhattisgarh Local Body Election Year Book–2026’ के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया। यह प्रकाशन छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रिया, उपलब्धियों, नवाचारों और चुनावी व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करता है।

              उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने स्थानीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी और तकनीक-सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में स्थानीय स्वशासी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनके निर्वाचन की प्रक्रिया में निरंतर सुधार तथा आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।

              इस अवसर पर राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने सम्मेलन में देशभर से आए राज्य निर्वाचन आयुक्तों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं निर्वाचन विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों और स्थानीय निकाय निर्वाचन को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

                छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकास  शील ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने स्थानीय स्वशासन, निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा प्रशासन और निर्वाचन संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के दौरान स्थानीय निकाय एवं पंचायत चुनावों से जुड़े समसामयिक विषयों, डिजिटल पहलों, तकनीकी नवाचारों तथा निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उपायों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है।

                समारोह में राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह एवं आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन के प्रथम दिन डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग, निर्वाचन प्रबंधन में नवाचार, पारदर्शिता तथा स्थानीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रियाओं को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर परिचर्चा की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्तों की स्थायी समिति के अध्यक्ष विजय देव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। स्थायी समिति के संयोजक सुधांशु पांडे ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

               दो दिवसीय यह सम्मेलन देश में स्थानीय लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने, निर्वाचन व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक के समावेश तथा विभिन्न राज्यों के अनुभवों और नवाचारों को साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच के रूप में आयोजित किया जा रहा है। कल  17सितम्बर को छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय नवा रायपुर अटल नगर में स्टैंडिंग कमिटी की बैठक होनी है। इसके बाद, नया रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी केपिटल सिटी, नया रायपुर के निर्माण और विकास के बारे में प्रस्तुतीकरण होगा। तत्पश्चात सभी अतिथियों को नया रायपुर के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जायेगा, जिसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा, छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का भ्रमण भी शामिल है।

  • नशे के मुद्दे पर पंजाब में चुनावी संग्राम तेज, BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ से AAP-कांग्रेस पर दबाव

    नशे के मुद्दे पर पंजाब में चुनावी संग्राम तेज, BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ से AAP-कांग्रेस पर दबाव

     चंडीगढ़
    पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज हो गई है। 17 सितंबर को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में मात्र छह माह का समय रह जाएगा और सितंबर माह का यही वह पखवाड़ा है, जब न सिर्फ दोनों राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पार्टियां, बल्कि पंजाब आधारित शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और रफ्तार देने की योजनाएं घोषित कर चुके हैं।

    सत्तासीन आम आदमी पार्टी भी चुनावी मोड में शिफ्ट हो चुकी है और न सिर्फ पार्टी में संगठनात्मक नियुक्तियां की जा रही हैं, बल्कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के चेहरे मुख्यमंत्री भगवंत मान विभिन्न विधानसभा हलकों में कार्यक्रमों का आगाज कर चुके हैं।

    'नशा' रहेगा सभी चुनावी पार्टियों का मुद्दा
    चुनावी तैयारियों के दौरान ही करीब सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रचार का केंद्र बिंदु नशे का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी पंजाब की सत्ता में आने के बाद से ही लगातार पंजाब में युद्ध नशे के विरुद्ध नाम से अभियान चला रही है और समय-समय पर इसके आंकड़े पेश करके अपने द्वारा किए जा रहे काम का क्रेडिट ले रही है।

    18 सितंबर को BJP करेगी चुनावी शंखनाद
    राष्ट्रीय फलक पर बात करें तो बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि नक्सलवाद का खात्मा करने के बाद अब उनका मिशन देश में नशे की समस्या को खत्म करना है और भाजपा द्वारा पंजाब में अपने चुनावी शंखनाद के लिए 18 सितंबर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली चार हजार किलोमीटर लंबी नशा विरोधी जागरूकता के लिए यात्राओं व रैलियों का आयोजन करने की घोषणा की जा चुकी है।

    सचिन पायलट ने भी खोला मोर्चा
    वहीं, कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट अपना पहला पंजाब दौरा 15 सितंबर को शुरू करने जा रहे हैं और दौरे के पहले ही दिन नशे के मामले में आत्महत्या करने वाले तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह को मुद्दा बनाकर न सिर्फ रोष मार्च व प्रदर्शन का एलान किया है, बल्कि कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा की रिहायश का घेराव करने का भी प्रोग्राम दिया गया है।

    कांग्रेस नेता सचिन पायलट अपने पहले ही दिन से सभी नेताओं को एक मंच पर दिखाकर कांग्रेस की एकजुटता का भी प्रदर्शन कराएंगे। खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी खुद व अपने सभी समर्थकों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा करके एकजुटता का संकेत दे दिया है।

  • बार एसोसिएशन चुनाव: गुजराल का दबदबा, 661 वोट हासिल कर बने अध्यक्ष

    बार एसोसिएशन चुनाव: गुजराल का दबदबा, 661 वोट हासिल कर बने अध्यक्ष

    चंडीगढ़.

    करीब डेढ़ साल के इंतजार के बाद चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन को शुक्रवार को नया प्रधान मिल गया। जिला अदालत परिसर में हुए चुनाव के परिणाम देर रात घोषित किए गए। अध्यक्ष पद पर एएस गुजराल ने 661 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।

    उन्होंने गगन अग्रवाल (450), रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जौली (464) और सुनील नारंग (327) को पीछे छोड़ा। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर अभय जोशी ने बाजी मारी। जोशी को 1071 वोट पड़े जबकि उनके मुकाबले धर्मिंदर सिंह को 801 वोट मिले। जोशी 270 वोट से विजयी रहे। उन्होंने पहले राउंड से ही बढ़त बना ली थी। सचिव पद पर तेजविंदर सिंह गिल 1147 वोट हासिल कर विजयी रहे, जबकि नरेश कुमार को 733 वोट मिले। ज्वाॅइंट सेक्रेटरी पद पर पुष्पिंदर सिंह ने बाजी मारी। उन्हें 836 वोट मिले। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर प्रतीक गर्ग ने 1043 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी पुनीत छाबड़ा को 867 वोट मिले।