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  • चंडीगढ़ में ED का बड़ा एक्शन, ₹656 करोड़ गबन केस में 14 जगह छापे

    चंडीगढ़ में ED का बड़ा एक्शन, ₹656 करोड़ गबन केस में 14 जगह छापे

    चंडीगढ़.

    ईडी चंडीगढ़ जोनल ऑफिस-II ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में 14 जगहों पर तलाशी की। यह जांच हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन आदि के 645 करोड़ सार्वजनिक फंड के कथित गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में है।

    जांच हरियाणा पुलिस के फरवरी 2026 के एफआईआर पर आधारित है, जिसमें डेवलपमेंट एंड पंचायत विभाग के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक खातों में गड़बड़ी पाई गई थी। तलाशी मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वेलर्स, सुंदर ज्वेलर्स और बिचौलिये गौरव कंसल सहित ज्वेलरी फर्मों पर हुई। कथित गबन की रकम ज्वेलर्स के खातों से व्यापारिक लेनदेन दिखाकर लेयर्ड की गई और आईएएस अधिकारियों तक पहुंचाई गई।

    सीबीआई ने पहले ही छह हरियाणा कैडर आईएएस समेत आरोपियों के खिलाफ तीसरा चार्जशीट दाखिल किया है। ईडी ने पहले 4 गिरफ्तार किए, 211 करोड़ की संपत्ति अटैच/जब्त की और 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की। नई तलाशियों से और सबूत मिले। जांच जारी है।

  • GMDA घोटाले में ED का शिकंजा, जालंधर से दिल्ली तक कई ठिकानों पर रेड

    GMDA घोटाले में ED का शिकंजा, जालंधर से दिल्ली तक कई ठिकानों पर रेड

    चंडीगढ़/नई दिल्ली

    पंजाब के मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण ( GMDA ) के कार्यालय में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, जालंधर, चंडीगढ़ और दिल्ली से पहुंची ईडी की टीमें तीन वाहनों में कार्यालय पहुंचीं और जांच शुरू की। अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की पड़ताल की। बताया जा रहा है कि छापे मुख्य रूप से जीएमएडीए कार्यालय और पंजाब आवास विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस विकास गर्ग के कार्यालय में मारे गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीमों ने दफ्तरों में दस्तावेज खंगाला और कंप्यूटर रिकॉर्ड को भी देखा। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के फोन भी जांच के लिए लिए लिए गए हैं।

    ईडी की ओर से फिलहाल छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जीएमएडीए में लगभग 150 करोड़ रुपये के भू-उपयोग परिवर्तन (CLU) घोटाले और शुल्क में कथित अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के तहत की जा रही है। जांच में सनटेक सिटी (न्यू चंडीगढ़) सहित कई परियोजनाएं शामिल हैं। इससे पहले ईडी इस मामले में दो भवन निर्माताओं के ठिकानों पर भी छापेमारी कर चुकी है।

    मामले में आईएएस अधिकारी कंवलप्रीत बराड़ से 18 और 27 अगस्त को पूछताछ की गई थी। 18 अगस्त को उनसे करीब आठ से नौ घंटे तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बराड़ नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की पूर्व निदेशक रह चुकी हैं। पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा 9 सितंबर को ईडी के जालंधर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। उस समय वह आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख थे।

    ईडी ने 10 सितंबर को मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी समन जारी कर मामले से संबंधित अभिलेख और जांच की जानकारी मांगी थी। मंगलवार को जीएमडीए कार्यालय में हुई कार्रवाई को इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है

  • पंजाब में ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कॉल सेंटर और IPS अधिकारी के ठिकानों पर छापा

    पंजाब में ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई, कॉल सेंटर और IPS अधिकारी के ठिकानों पर छापा

    चंडीगढ़
     पंजाब के पटियाला और मोहाली जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को छापामारी की। पटियाला के अर्बन एस्टेट फेज 2 में दम वेब सॉल्यूशन नाम के ऑफिस में रेड की। अर्बन एस्टेट फेज 2 में स्को 29 में खुले इस डीएम वेब सॉल्यूशन के अंदर कॉल सेंटर का काम किया जाता था।

    अधिकारियों की टीम में दो गाड़ियों में सवार होकर आई थी और सुबह से टीम ने रेड करने के बाद आने-जाने वालों पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है कि यह कॉल सेंटर दिन-रात चलता था। मौके पर 15 से 20 अधिकारी मौजूद हैं। वहीं, मोहाली सेक्टर 82 ए के प्लॉट नंबर 2010 ईडी ने छापामारी की है। कथित तौर पर यह रेड आईपीएस अधिकीरी से संबंधित है।

    जानकारी के अनुसार,  ईडी की जांच के दौरान इनपुट मिला था कि तकरीबन ढाई सौ 300 करोड रुपए का ट्रांजेक्शन विदेश में हुआ है। इस बीच जांच के दौरान अधिकारियों को मोहाली का इनपुट मिला।

    मोहाली स्थित ऑफिस की मालकिन के भाई का पटियाला में ऑफिस बना हुआ था। डीएम वेब सॉल्यूशन के नाम से खुले इस ऑफिस के जरिए ट्रांजेक्शन होने की जांच की जा रही है।

    यह ऑफिस पहले फ्लाइंग फेदर के नाम से चल रहा था लेकिन पिछले कुछ महीने से इसका नाम बदल कर डीएम वेब सॉल्यूशन कर दिया गया था। फ्लाइंग फेदर का ऑफिस छोटी बरादरी पटियाला में बना दिया था लेकिन वह भी पिछले कुछ समय से बंद कर दिया गया था।

     

  • 58 करोड़ की कथित लोन हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग, होटल कंपनी के ठिकानों पर ED की ताबड़तोड़ छापेमारी

    58 करोड़ की कथित लोन हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग, होटल कंपनी के ठिकानों पर ED की ताबड़तोड़ छापेमारी

    पटना
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग ) मामले में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड के 17 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी बिहार के गया जी और बोधगया के साथ ही नई दिल्ली और गुरुग्राम स्थित कंपनी के विभिन्न ठिकानों पर की गयी।

    कंपनी के निदेशक अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत और नितेश पर कथित धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। कंपनी से जुड़े 85 करोड़ के बैंक ऋण में कथित हेराफेरी मामले की सीबीआई पूर्व से ही जांच कर रही है। इसमें इस अपराध से हुई कथित कमाई 131.79 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में धन शोधन की आशंका को देखते हुए अब ईडी की एंट्री हुई है

    58 करोड़ रुपये की हेराफेरी
    ईडी सूत्रों के मुताबिक, रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड मूलत: बिहार से जुड़ी कंपनी है। कंपनी के निदेशक गया जी के चांदचौरा निवासी अखौरी गोपाल का पूर्व में रामनंदी ऑटोमोबाइल नाम से कारोबार रहा है। उनकी कंपनी पर बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए करीब 85 करोड़ रुपये के ऋण में लगभग 58 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी और डायवर्जन का आरोप है।

    फर्जी और जाली दस्तावेज मिल
    ईडी को जांच में कथित तौर पर फर्जी और जाली दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से परियोजना पूरी होने की दी गयी गलत रिपोर्ट के आधार पर पहले बैंक से लोन की रकम हासिल की गई। फिर लोन के बदले कई संपत्तियां गिरवी रखी गयीं। इनमें पांच संपत्तियां टाटा मोटर्स के पक्ष में मॉर्गेज बताई गई हैं। बाद में इन संपत्तियों को बेच दिया गया। जांच एजेंसी को बिक्री में भी गड़बड़ी का संदेह है।

    प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका
    आरोप है कि संपत्तियों की कीमत कम दिखाई गई। रकम का एक हिस्सा नकद प्राप्ति के रूप में दर्शाया गया। कुछ खरीदार भी ईडी की जांच के घेरे में हैं। एजेंसी को संदेह है कि करोड़ों की संपत्ति खरीदने वाले कुछ लोगों की आर्थिक क्षमता इतनी नहीं थी। ऐसे में उनके बेनामी या प्रॉक्सी खरीदार होने की आशंका है।

    लोन की व्यक्तिगत गारंटी दी थी
    प्रवर्तन निदेशालय की जांच में रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके पुत्रों निशांत एवं नितेश के पास होने की बात सामने आई है। बैंक ऋण के लिए अखौरी गोपाल और परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी भी दी गयी थी। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने शुक्रवार की अहले सुबह ही गया जी के चांदचौरा में अखौरी गोपाल और उनके नजदीकी रहे बोधगया के अमर बिगहा गांव में मिथिलेश राय के आवास पर छापेमारी शुरू की। जांच एजेंसी के अधिकारी बिहार समेत देशभर में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों की विस्तृत छानबीन करेगी।

    गया में 15 घंटे तक चली तलाशी
    ईडी की टीम ने गया जी और बोधगया में तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापेमारी करीब 15 घंटे तक चली। इस दौरान गया जी शहर की कालीबाड़ी स्थित न्यू कॉलोनी में अरविंद कुमार के घर में रह रहे किरायेदार, बाला जी नगर और बोधगया के अमर बिगहा में मिथिलेश राय के घर की जांच की गयी। जांच टीम ने दस्तावेज, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। तलाशी पूरी होने के बाद टीम जरूरी दस्तावेज और अन्य कागजात अपने साथ ले गई है। जांच एजेंसी ने छापेमारी व बरामदगी से संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया।

  • ED की ताबड़तोड़ रेड से मचा हड़कंप, कांग्रेस मंत्री और सांसद बेटी जांच के घेरे में

    ED की ताबड़तोड़ रेड से मचा हड़कंप, कांग्रेस मंत्री और सांसद बेटी जांच के घेरे में

    बेंगलुरु 

    कर्नाटक में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार तड़के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली और उनके करीबियों के कई ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक ED ने जारकीहोली के साथ-साथ उनकी बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली और उनके साले मंजूनाथ के ठिकानों पर भी कार्रवाई की है। मामला बेलगावी में कई बार को अवैध रूप से लाइसेंस देने का है।

    जानकारी के मुताबिक ईडी की टीमों ने बुधवार सुबह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की कड़ी सुरक्षा के बीच छापेमारी शुरू की। बेंगलुरु शहर के 5 मुख्य ठिकानों के अलावा बेलगावी और महाराष्ट्र में स्थित मंत्री और उनके साले मंजूनाथ के घर और दफ्तरों की भी तलाशी ली जा रही है। अधिकारी परिसरों में मौजूद वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों और संपत्ति के कागजातों की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
    क्या हैं आरोप?
    मामला आबकारी विभाग में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि सतीश जारकीहोली ने अपने मंत्री पद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए लगभग 18 बार को नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से लाइसेंस दिलाए। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन बार से हासिल हुई काली कमाई को अवैध रूप से विदेशों में निवेश किया गया। शुरुआती जांच में 3 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध के हेरफेर की बात भी सामने आई है। अब ईडी इस फंड ट्रांसफर के स्रोत और नेटवर्क का पता लगाने के लिए कागजातों को खंगाल रही है।

    साले पर हुआ था एक्शन
    इससे पहले बीते जनवरी महीने में ED ने कर्नाटक के आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त वाई मंजूनाथ के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की थी। मंजूनाथ जारकीहोली के साले हैं। ED ने तब मंजूनाथ से जुड़े कम से कम छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान ED ने कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे। अधिकारियों को मंजूनाथ के घर से नकदी मिलने की भी जानकारी सामने आई थी।

    ED की शुरुआती जांच में आरोप था कि सरकारी पद पर रहते वाई मंजूनाथ ने अपनी आय से कहीं अधिक संपत्ति बनाई। जांच एजेंसी को संदेह था कि उन्होंने करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जुटाई है। उन पर यह आरोप भी लगा कि उन्होंने बेलगावी, बेंगलुरु, मैसूर, दावणगेरे और बल्लारी समेत कई शहरों में बेनामी नामों से बार और शराब कारोबार में निवेश किया। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज मिलने के बाद ED अधिकारियों ने वाई मंजूनाथ को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया था।

  • मोहाली रॉयल एस्टेट केस में शिकंजा कसा, दिल्ली से पकड़े गए प्रमोटर; करोड़ों की जालसाजी का आरोप

    मोहाली रॉयल एस्टेट केस में शिकंजा कसा, दिल्ली से पकड़े गए प्रमोटर; करोड़ों की जालसाजी का आरोप

    चंडीगढ़
    मोहाली के रॉयल एस्टेट के प्रमोटर् प्रवीण कंसल और नीरज कंसल को ईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। पिछले हफ्ते ही ईडी ने रॉयल एस्टेट के चंडीगढ़, मोहाली स्थित कई ठिकानों पर रेड की थी। प्रवीण कंसल और नीरज कंसल पर गलत तरीके से मोहाली में प्रोजेक्ट के सीएलयू लेने का आरोप है।

    इसके अतिरिक्त जमीन की खरड़ फरोख्त में भी गड़बड़ी की शिकायत है। मोहाली विजिलेंस ने भी प्रवीण कंसल और नीरज कंसल के साथ साथ इंदु कंसल और नायब तहसीलदार तरसेम मित्तल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया हुआ है।

    इस केस में सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने भी कंपनी के प्रमोटर को कस्टडी में लेकर पूछताछ जय आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ कंपनी के प्रमोटर्स ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद रॉयल एस्टेट के प्रमोटर्स गायब हो गए थे। पुलिस उनकी तलाश कर रही थी।

    कंपनी के प्रमोटर्स के खिलाफ मोहाली में 11 जून को फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा जालसाजी का केस दर्ज हुआ था । यह केस आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ताओं नरेश कुमार गर्ग और प्यारे लाल गर्ग ने आरोप लगाया कि वर्ष 2011 में संपत्ति उनके नाम पर खरीदी गई थी।

    वर्ष 2013 में बिना उनकी जानकारी और सहमति के उसी संपत्ति को मोतियाज रॉयल सिटी कंपनी)ल के नाम ट्रांसफर कर दिया गया यह ट्रांसफर तथाकथित सप्लीमेंट्री सेल डीड के माध्यम से की गई। नरेश गर्ग ने शिकायत में कहा था कि यह ट्रांसफर फर्जी बोर्ड प्रस्ताव के आधार पर किया गया। आरोपियों (कंपनी के डायरेक्टर्स) ने मिलकर साजिश रची और सरकारी अधिकारी की मिलीभगत से रजिस्ट्री करवाई गई।

    मोतियाज के प्रमोटर्स पर मुख्य आरोप

    धोखाधड़ी करके संपत्ति हड़पना और फर्जी दस्तावेज बनाने का है।
    कंपनी की दलील

    कंपनी के प्रमोटर्स ने कोर्ट में दलील दी थी कि यह कोई धोखाधड़ी नहीं, बल्कि तकनीकी गलती थी। मूल सेल डीड में गलती से खरीदार के रूप में शिकायतकर्ताओं का नाम आ गया।

    बाद में बोर्ड ने प्रस्ताव पास कर सुधार किया गया। शिकायतकर्ता इस प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत थे। यह सिविल विवाद है, क्रिमिनल केस नहीं कोई पैसा या संपत्ति हड़पने की मंशा नहीं थी। वे जांच में शामिल हो चुके हैं, इसलिए कस्टडी में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है। वहीं सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि आरोप गंभीर और स्पष्ट साजिश दर्शाते हैं। इससे दस्तावेज़ फर्जी होने का संदेह मजबूत होता है।

    सरकारी वकील की दलील
    कानून के अनुसार सप्लीमेंट्री सेल डीड से मालिकाना हक नहीं बदला जा सकता। संपत्ति ट्रांसफर के लिए सभी मालिकों का उपस्थित होना जरूरी है।यहां तक कि सरकारी अधिकारी ने भी नियमों का उल्लंघन किया और अवैध ट्रांजैक्शन को मंजूरी दी। इसलिए गहन जांच के लिए आरोपियों की कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है।

    हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया गंभीर मामला है। दस्तावेज़ों से धोखाधड़ी और साजिश का मामला बनता है। संपत्ति बिना मालिक की सहमति के ट्रांसफर की गई। मूल दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए गए। आरोपी बोर्ड प्रस्ताव का असल नहीं दिखा पाए।

  • पश्चिम बंगाल में ED एक्शन मोड में, बंद मकान का ताला तोड़कर की जांच

    पश्चिम बंगाल में ED एक्शन मोड में, बंद मकान का ताला तोड़कर की जांच

     कोलकाता

    पश्चिम बंगाल में कथित रंगदारी रैकेट की जांच को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह बड़े पैमाने पर छापेमारी की है. मुर्शिदाबाद ज़िले के कांडी शहर में कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर (DC) और कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) शांतनु सिन्हा विश्वास के आलीशान पैतृक आवास पर ईडी की टीम ने ताला तोड़कर धावा बोला. यह घर कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है और पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह बंद पड़ा था। 

    शांतनु सिन्हा विश्वास कोलकाता के कालीघाट पुलिस स्टेशन के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) और डिप्टी कमिश्नर (DC) रह चुके हैं और फिलहाल ज़मीन से जुड़े एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में ED की हिरासत में हैं। 

    शांतनु सिन्हा विश्वास का कांडी में एक आलीशान घर है जो कांडी नगर पालिका के वार्ड नंबर 8 में स्थित है. यह घर पिछले सात दिनों से बंद पड़ा है. शांतनु सिन्हा विश्वास की बहन, गौरी सिन्हा विश्वास, फिलहाल कांडी नगर पालिका की उपाध्यक्ष हैं. छापेमारी के दौरान वह भी घर पर मौजूद नहीं थी. चूंकि घर बंद था, इसलिए ED के अधिकारियों ने घर के बाहर से ही अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर दी और स्थानीय लोगों से बातचीत की और इसके बाद ताला तोड़कर घर में घुसे। 

    सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित तौर पर ‘सोना पप्पू’ नाम से जुड़े उगाही नेटवर्क और शांतनु सिन्हा बिस्वास से संबंधित जांच के तहत की जा रही है. जानकारी के अनुसार, ED की टीमों ने सुबह करीब 6 बजे एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दी। 

    कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक होटल और एक कारोबारी के घर पर छापेमारी की गई. इसके अलावा कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर भी जांच एजेंसी पहुंची. एजेंसी कथित उगाही, अवैध लेनदेन और पुलिस अधिकारियों से जुड़े संभावित आर्थिक नेटवर्क की जांच कर रही है। 

    हालांकि ED की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक कार्रवाई का फोकस कथित जबरन वसूली गिरोह और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन पर है. जांच एजेंसी दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत जुटाने में लगी हुई है। 

    बंगाल में एक साथ कई जगहों पर हुई इस कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। 

  • दिल्ली से गोवा तक ED की दबिश, 155 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में कई ठिकानों पर कार्रवाई

    दिल्ली से गोवा तक ED की दबिश, 155 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में कई ठिकानों पर कार्रवाई

    नई दिल्ली
    ईडी ने 155 करोड़ रुपये के एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में आज बड़ी कार्रवाई की है. केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले को लेकर दिल्ली और गोवा में 7 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर रही है. इस मामले में ईडी ने AAP नेता दीपक सिंगला के ठिकानों पर भी रेड की है। 

    ये पूरा मामला 'महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ दर्ज वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है. जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ये छापेमारी मुख्य रूप से दीपक सिंगला, महेश सिंगला, अमरीक गिल और कुछ अन्य संदिग्धों से जुड़े परिसरों और ठिकानों पर की जा रही है। 

    ईडी की टीमें सुबह-सुबह ही सभी संदिग्धों के घरों और व्यावसायिक ठिकानों पर पहुंच गईं. जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है, ताकि 155 करोड़ रुपये के इस कथित बैंक घोटाले की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके। 

    संजीव अरोड़ा से जुड़े मामले के तार
    दीपक सिंगला का नाम आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार किया जाता है. बताया जा रहा है कि इन संदिग्धों के तार पंजाब सरकार के गिरफ्तार मंत्री संजीव अरोड़ा से भी जुड़े हुए हैं. संजीव अरोड़ा को पहले ही भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। 

    अब इस नए बैंक फ्रॉड केस में भी संजीव अरोड़ा, उनके करीबियों और पार्टी सहयोगियों का नाम आने से आम आदमी पार्टी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। 

    बता दें कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक बैंक फ्रॉड केस दर्ज है. कंपनी पर कई बैंकों से लगभग 155 करोड़ रुपये का लोन लेकर उसमें हेराफेरी करने और बैंकों को बड़ा नुकसान पहुंचाने का आरोप है। 

  • ईडी की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, केजरीवाल से जुड़े मामले में जज की टिप्पणी पर सबकी नजर

    ईडी की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, केजरीवाल से जुड़े मामले में जज की टिप्पणी पर सबकी नजर

    नई दिल्ली

    दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को हटाने की मांग को लेकर दायर ईडी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि जज की टिप्पणियां संभवतः मामले से सीधे जुड़ी नहीं हो सकतीं और वे सामान्य प्रकृति की भी हो सकती हैं। हाई कोर्ट ने कहा, “जज ने जो कहा है, वह जरूरी नहीं कि इसी मामले के संदर्भ में हो। कई बार जज इस तरह की सामान्य टिप्पणियां करते हैं।”

    हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हमारा सवाल यह है कि ये जो टिप्पणियां की गई हैं, वे सामान्य प्रकृति की हैं और इनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। आगे कहा कि वह आदेश के संबंधित हिस्सों को देखकर यह तय करेगी कि वे सामान्य टिप्पणियां हैं या फिर इस मामले से जुड़ी हुई हैं।

    हाई कोर्ट ने क्या कहा

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “आप कह रहे हैं कि आदेश के कुछ पैराग्राफ इस फैसले के संदर्भ में हो सकते हैं? पूरा फैसला वैसे भी चुनौती के दायरे में है, इसलिए जब हम सीबीआई मामले पर सुनवाई करेंगे तो इस निर्णय को भी पढ़ेंगे। इस मामले में नोटिस जारी करेंगे और इसे उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है, जिस दिन ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई होगी।”

    दरअसल, ईडी ने हाल ही में सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त करते हुए निचली अदालत द्वारा धनशोधन जांच के संबंध में की गई टिप्पणी को हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। ईडी का कहना था कि 27 फरवरी का आदेश "न्यायिक अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट उल्लंघन" था क्योंकि अदालत ने एजेंसी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उसके साक्ष्यों पर ना तो गौर किया और ना ही उसकी बात सुनी।

    अदालत ने क्या कहा था

    विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह की अदालत ने पीएमएलए और ईडी जांच के संबंध में कई टिप्पणियां की थीं। आदेश में विशेष रूप से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के विजय मदनलाल चौधरी मामले में कहा था कि एक बार मूल मामला (सीबीआई मामला) समाप्त होने पर ईडी मामला भी अनिवार्य रूप से खत्म हो जाएगा।

    ईडी की आपत्ति

    ईडी ने 7 मार्च को दायर अपनी याचिका में आदेश के कई पैराग्राफ का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की उसके खिलाफ की गई टिप्पणियां "प्रतिकूल, व्यापक और अवांछित" थीं क्योंकि सुनवाई में ईडी पक्षकार नहीं थी और अदालत के समक्ष केवल सीबीआई की जांच के गुण-दोष पर ही विचार किया जा रहा था।

    एजेंसी ने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार की व्यापक और निराधार टिप्पणियों को बरकरार रहने दिया गया, जिनका आधार ईडी द्वारा एकत्रित किसी भी सामग्री या साक्ष्य पर नहीं है तो इससे सार्वजनिक हित के साथ-साथ ईडी को भी गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।