Tag: Duleep Trophy

  • ईस्ट जोन की ऐतिहासिक जीत, ईशान-वैभव ने स्टंप लेकर किया जमकर जश्न

    ईस्ट जोन की ऐतिहासिक जीत, ईशान-वैभव ने स्टंप लेकर किया जमकर जश्न

    नई दिल्ली
    दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन ने इतिहास रच दिया. चेन्नई में खेले गए मुकाबले में ईस्ट जोन ने साउथ जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर मात देकर 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया. मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन पहली पारी में मिली बढ़त ने ईस्ट जोन को चैम्प‍ियन बना दिया.

    खास बात यह रही कि 13 साल पहले भी ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी का ख‍िताब एम ए च‍िदम्बरम स्टेड‍ियम में जीता.  यह ईस्ट जोन का कुल म‍िलाकर तीसरा दलीप ट्रॉफी ख‍िताब है.

    मैच खत्म होते ही दोनों टीमों के कप्तानों ने हाथ मिलाए और मुकाबले का अंत हुआ. इसके बाद ईस्ट जोन के खिलाड़ी मैदान पर जश्न में डूब गए. कप्तान ईशान किशन और युवा वैभव सूर्यवंशी हाथ में स्टंप लेकर डांस करते नजर आए. पूरी टीम ने मैदान का चक्कर लगाते हुए दर्शकों का अभिवादन किया.

    ईशान किशन बने खिताबी जीत के हीरो
    ईस्ट जोन की इस जीत में सबसे बड़ा चेहरा कप्तान ईशान किशन रहे. रेड बॉल क्रिकेट में वापसी के बाद ईशान लगातार अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं और दलीप ट्रॉफी फाइनल में उन्होंने अपनी सबसे बड़ी पारियों में से एक खेल दी.

    ईशान ने पहली पारी में अकेले 270 रन ठोक दिए. उन्होंने इस दौरान 334 गेंदों का सामना किया और 522 मिनट तक क्रीज पर डटे रहे. यह पारी सिर्फ रनों के लिहाज से बड़ी नहीं थी, बल्कि इसमें टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी धैर्य और जुझारूपन भी दिखाई दिया.

    ईशान एक समय 250 रन पर ऐंठन (क्रैम्प्स) के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. दोबारा मैदान पर लौटे और अपना स्कोर 270 रन तक पहुंचाया.

    लेकिन कप्तान की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. दूसरी पारी में भी ईशान ने 80 रन की अहम पारी खेली. इस तरह फाइनल में उनके बल्ले से कुल 350 रन निकले. इसी वजह से वह मुकाबले के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाज रहे.

    कुरैशी का शतक, अंत तक रहे नाबाद
    दलीप ट्रॉफी फाइनल के आखिरी दिन एक और नाम ने खूब सुर्खियां बटोरीं. मोहम्मद कोनैन कुरैशी ने शानदार शतक जड़ दिया. कुरैशी का अंदाज ऐसा था जैसे वह लंबे समय से फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल रहे हों. दबाव भरे मुकाबले में उनका आत्मविश्वास और बल्लेबाजी का तरीका खास नजर आया. उन्होंने शतक पूरा किया और अंत तक नाबाद रहे.

    ईस्ट जोन की ओर से यह पारी ऐसे समय आई, जब टीम का खिताब लगभग तय हो चुका था. लेकिन कुरैशी ने अपने डेब्यू को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

    सिराज ने भी दिखाया अपना जुझारूपन
    ईस्ट जोन की खिताबी जीत में साउथ जोन के मोहम्मद सिराज के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मुकाबले का नतीजा लगभग तय हो चुका था, इसके बावजूद सिराज ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी.

    चेन्नई की थकाने वाली और मुश्किल परिस्थितियों में उन्होंने लगातार 9 ओवर गेंदबाजी की. मैच का नतीजा तय होने के बाद भी उनका इस तरह गेंदबाजी करना उनके फाइटिंग स्पिरिट को दिखाता है. फर्स्ट क्लास क्रिकेट की यही खूबसूरती है. नतीजा सामने होने के बावजूद खिलाड़ी आखिरी गेंद तक अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं.

    13 साल बाद ईस्ट जोन का राज
    आखिरकार ईस्ट जोन ने वह कर दिखाया जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था. टीम ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर साउथ जोन को पीछे छोड़ते हुए दलीप ट्रॉफी 2026 अपने नाम कर ली.

    ईशान किशन की कप्तानी में मिली यह जीत कई मायनों में खास रही. कप्तान ने बल्ले से 350 रन बनाए, डेब्यू कर रहे कोनैन कुरैशी ने शतक जड़ा, सिराज ने आखिरी तक लड़ने का जज्बा दिखाया और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी ने भी टीम के जश्न में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई.

  • ईस्ट जोन की ऐतिहासिक जीत, 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी पर कब्जा; ईशान किशन ने मचाया धमाल

    ईस्ट जोन की ऐतिहासिक जीत, 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी पर कब्जा; ईशान किशन ने मचाया धमाल

    चेन्नई
    दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन ने इतिहास रच दिया. चेन्नई में खेले गए मुकाबले में ईस्ट जोन ने साउथ जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर मात देकर 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया. मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन पहली पारी में मिली बढ़त ने ईस्ट जोन को चैम्प‍ियन बना दिया। 

    खास बात यह रही कि 13 साल पहले भी ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी का ख‍िताब एम ए च‍िदम्बरम स्टेड‍ियम में जीता.  यह ईस्ट जोन का कुल म‍िलाकर तीसरा दलीप ट्रॉफी ख‍िताब है। 

    मैच खत्म होते ही दोनों टीमों के कप्तानों ने हाथ मिलाए और मुकाबले का अंत हुआ. इसके बाद ईस्ट जोन के खिलाड़ी मैदान पर जश्न में डूब गए. कप्तान ईशान किशन और युवा वैभव सूर्यवंशी हाथ में स्टंप लेकर डांस करते नजर आए. पूरी टीम ने मैदान का चक्कर लगाते हुए दर्शकों का अभिवादन किया। 

    ईशान किशन बने खिताबी जीत के हीरो
    ईस्ट जोन की इस जीत में सबसे बड़ा चेहरा कप्तान ईशान किशन रहे. रेड बॉल क्रिकेट में वापसी के बाद ईशान लगातार अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं और दलीप ट्रॉफी फाइनल में उन्होंने अपनी सबसे बड़ी पारियों में से एक खेल दी। 

    ईशान ने पहली पारी में अकेले 270 रन ठोक दिए. उन्होंने इस दौरान 334 गेंदों का सामना किया और 522 मिनट तक क्रीज पर डटे रहे. यह पारी सिर्फ रनों के लिहाज से बड़ी नहीं थी, बल्कि इसमें टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी धैर्य और जुझारूपन भी दिखाई दिया। 

    ईशान एक समय 250 रन पर ऐंठन (क्रैम्प्स) के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. दोबारा मैदान पर लौटे और अपना स्कोर 270 रन तक पहुंचाया। 

    लेकिन कप्तान की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. दूसरी पारी में भी ईशान ने 80 रन की अहम पारी खेली. इस तरह फाइनल में उनके बल्ले से कुल 350 रन निकले. इसी वजह से वह मुकाबले के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाज रहे। 

    कुरैशी का शतक, अंत तक रहे नाबाद 
    दलीप ट्रॉफी फाइनल के आखिरी दिन एक और नाम ने खूब सुर्खियां बटोरीं. मोहम्मद कोनैन कुरैशी ने शानदार शतक जड़ दिया. कुरैशी का अंदाज ऐसा था जैसे वह लंबे समय से फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल रहे हों. दबाव भरे मुकाबले में उनका आत्मविश्वास और बल्लेबाजी का तरीका खास नजर आया. उन्होंने शतक पूरा किया और अंत तक नाबाद रहे। 

    ईस्ट जोन की ओर से यह पारी ऐसे समय आई, जब टीम का खिताब लगभग तय हो चुका था. लेकिन कुरैशी ने अपने डेब्यू को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

    सिराज ने भी दिखाया अपना जुझारूपन
    ईस्ट जोन की खिताबी जीत में साउथ जोन के मोहम्मद सिराज के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मुकाबले का नतीजा लगभग तय हो चुका था, इसके बावजूद सिराज ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। 

    चेन्नई की थकाने वाली और मुश्किल परिस्थितियों में उन्होंने लगातार 9 ओवर गेंदबाजी की. मैच का नतीजा तय होने के बाद भी उनका इस तरह गेंदबाजी करना उनके फाइटिंग स्पिरिट को दिखाता है. फर्स्ट क्लास क्रिकेट की यही खूबसूरती है. नतीजा सामने होने के बावजूद खिलाड़ी आखिरी गेंद तक अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। 

    13 साल बाद ईस्ट जोन का राज
    आखिरकार ईस्ट जोन ने वह कर दिखाया जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था. टीम ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर साउथ जोन को पीछे छोड़ते हुए दलीप ट्रॉफी 2026 अपने नाम कर ली। 

    ईशान किशन की कप्तानी में मिली यह जीत कई मायनों में खास रही. कप्तान ने बल्ले से 350 रन बनाए, डेब्यू कर रहे कोनैन कुरैशी ने शतक जड़ा, सिराज ने आखिरी तक लड़ने का जज्बा दिखाया और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी ने भी टीम के जश्न में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 

  • 35 साल पुरानी दिलीप ट्रॉफी की कड़वी यादें ताजा, वैभव-तिलक की गरमागरमी ने बढ़ाया फाइनल का तापमान

    35 साल पुरानी दिलीप ट्रॉफी की कड़वी यादें ताजा, वैभव-तिलक की गरमागरमी ने बढ़ाया फाइनल का तापमान

    नई दिल्ली
    दोनों घटनाओं के बीच 35 साल का फासला है. एक तरफ भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बदनाम घरेलू क्रिकेट विवाद, दूसरी तरफ नई पीढ़ी के दो चर्चित खिलाड़ियों के बीच कुछ पल की गरमागरमी. फर्क बहुत बड़ा है, लेकिन एक सवाल दोनों घटनाओं को जोड़ देता है- जब दलीप ट्रॉफी के फाइनल में मुकाबला सिर्फ बल्ले और गेंद का नहीं रह जाता, तब मैदान का तापमान कितना ऊपर जा सकता है?

    चेन्नई में पहले बल्ला बोला, फिर तेवर
    चेन्नई के चेपॉक में ईस्ट जोन की पारी शुरू हुई तो सबसे ज्यादा निगाहें वैभव सूर्यवंशी पर थीं. उम्र सिर्फ 15 साल, लेकिन अंदाज ऐसा जैसे सालों से बड़े मंच पर खेल रहे हों.

    सामने थे मोहम्मद सिराज. भारतीय क्रिकेट के स्थापित तेज गेंदबाज.लेकिन वैभव ने उम्र नहीं देखी, गेंद देखी. उन्होंने सिराज के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी की और एक ही ओवर में चौका-छक्का-चौका जड़कर फाइनल की शुरुआत में ही बता दिया कि वह यहां सिर्फ अनुभव लेने नहीं आए हैं.

    इसके बाद मैदान पर एक और दिलचस्प तस्वीर बनी. साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा वैभव के करीब पहुंचे. दोनों के बीच कुछ बातचीत हुई. कैमरों ने उस पल को पकड़ लिया और देखते ही देखते यह फाइनल के सबसे चर्चित दृश्यों में शामिल हो गया. कुछ रिपोर्टों ने इसे गरमागरम एक्सचेंज बताया, जबकि दूसरी व्याख्या में इसे हल्की-फुल्की स्लेजिंग या मजाकिया बातचीत भी माना गया.

    लेकिन इस पूरे दृश्य की असली दिलचस्पी शब्दों में नहीं, पात्रों की उम्र और कद के अंतर में थी. एक तरफ 15 साल का वैभव. दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुका तिलक वर्मा. और यही वह तस्वीर है, जिसने 35 साल पुरानी दलीप ट्रॉफी की एक दूसरी कहानी याद दिला दी.

    वेन्यू – कीनन स्टेडियम, जमशेदपुर
    नॉर्थ जोन और वेस्ट जोन के बीच जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में खेला गया पांच दिवसीय फाइनल का आखिरी दिन भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास के लिए काला दिन साबित हुआ. दरअसल, वेस्ट जोन से खेल रहे राशिद पटेल नॉर्थ जोन के सलामी बल्लेबाज रमण लांबा पर स्टंप्स से हमला करने के लिए आगे बढ़े. लांबा खुद को बचाते रहे. स्टेडियम में बैठा हर कोई हैरान था कि आखिर ये क्या हो गया…?

    मैच के आखिरी दिन राशिद पटेल ने आपा खोया
    मैच का पांचवां और आखिरी दिन था. पहली पारी के आधार पर नॉर्थ जोन का विजेता होना तय था. कपिल देव की कप्तानी वाली नॉर्थ जोन की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 729/9 रनों का पहाड़ खड़ा कर अपनी पारी घोषित की थी. जवाब में रवि शास्त्री की कप्तानी वाली वेस्ट जोन की टीम 561 रनों पर ऑल आउट हो गई थी. यानी बड़े स्कोर वाले इस मैच में चार दिन बीत गए. आखिरी दिन नॉर्थ जोन ने बचे हुए समय में अपनी दूसरी पारी शुरू की. लेकिन 10वें ओवर में जो हुआ, वो अच्छा नहीं हुआ.

    बीमर फेंकी… लांबा का सिर बाल-बाल बचा
    नॉर्थ जोन की दूसरी पारी की शुरुआत एक बार फिर अजय जडेजा और पहली पारी में 180 रन बनाने वाले रमण लांबा ने की. दोनों जोरदार बल्लेबाजी कर रहे थे. स्कोर 59/0 (9.5 ओवर) तक पहुंच गया था. राशिद पटेल गुस्से में राउंड द विकेट गेंदें डाल रहे थे. वह लांबा को डेंजर एरिया के पास गेंद फेंक रहे थे. लांबा ने इस बीच बैट का हैंडल दिखा अपनी नाराजगी जताई.

    फिर क्या था, राशिद ने अपना आपा खो दिया और लगभग आधी पिच पर आकर लांबा पर बीमर फेंकी. लांबा का सिर बाल-बाल बचा.

    स्टंप उखाड़ा और लांबा को दौड़ाया…
    राशिद यहीं नहीं रुके. वह घूमकर आए, स्टंप उखाड़ा और लांबा पर वार करने की कोशिश में उन्हें बाउंड्री लाइन तक दौड़ाया. इस बीच लांबा खुद को बचाते रहे. आखिरकार किसी तरह यह लड़ाई रुकी.

    मैदान पर यह वाकया देख दर्शक भी उत्तेजित हो गए और पत्थर फेंकने शुरू कर दिए. विनोद कांबली बाउंड्री के पास फील्डिंग कर रहे थे. उन्हें चोट लगी. इसके बाद सारे खिलाड़ी पवेलियन में कैद हो गए. अंदर ही विजेता कप्तान को ट्रॉफी दे दी गई.

    आखिरकार राशिद पटेल पर 13 महीने का प्रतिबंध लगाया गया. लांबा भी इस लपेटे में आए, उन्हें भी 10 महीने के लिए बैन कर दिया गया.

    रमण लांबा के दौर में क्रिकेट का मैदान कई बार खिलाड़ियों के गुस्से का गवाह बना. आज क्रिकेट कहीं ज्यादा पेशेवर है, लेकिन प्रतिस्पर्धा की गर्मी अब भी वही है. फर्क सिर्फ इतना है कि वैभव के सामने अभी पूरा करियर पड़ा है.

    लांबा की कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि क्रिकेट में हुनर और आक्रामकता के साथ संयम की अहमियत भी कम नहीं होती. वैभव जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं, उनके लिए चुनौती सिर्फ गेंदबाजों को छक्के लगाना या सीनियर्स के सामने टिकना नहीं है. असली चुनौती है- इस बढ़ते कद, बढ़ती चर्चा और मैदान के बढ़ते दबाव को संभालना.

    दुर्भाग्य से रमण लांबा की कहानी का अंत बेहद दर्दनाक रहा. 1998 में बांग्लादेश में क्लब क्रिकेट खेलते हुए शॉर्ट लेग पर फील्डिंग के दौरान उनके सिर पर गेंद लगी. लांबा उस वक्त बिना हेलमेट के फील्डिंग कर रहे थे. बल्लेबाज मेहराब हुसैन के जोरदार शॉट से निकली गेंद सीधे उनके सिर पर जा लगी. हालत गंभीर होने पर दिल्ली से न्यूरोसर्जन को बुलाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. महज 38 साल की उम्र में लांबा का निधन हो गया.

  • ईस्ट-साउथ जोन फाइनल पर अगरकर की नजर, वैभव सूर्यवंशी समेत स्टार खिलाड़ियों पर फोकस

    ईस्ट-साउथ जोन फाइनल पर अगरकर की नजर, वैभव सूर्यवंशी समेत स्टार खिलाड़ियों पर फोकस

     नई दिल्ली
    दलीप ट्रॉफी 2026-27 के फाइनल में ईस्ट जोन और साउथ जोन की टीम्स भिड़ने के लिए तैयार हैं. 6 सितंबर (रविवार) से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ये हाई वोल्टेज मुकाबला खेला जाएगा. खिताबी मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और तिलक वर्मा भी मैदान पर उतरेंगे. वहीं साउथ जोन के सबसे अनुभवी बल्लेबाजों में शामिल केएल राहुल फाइनल का हिस्सा नहीं हैं. तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और युवा बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को जरूर साउथ जोन की टीम में शामिल किया गया है और वो खिताबी मैच में नजर आएंगे l

    ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने फाइनल से पहले अपनी टीम के सभी प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता की पुष्टि की. उधर साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने भी साफ कर दिया कि केएल राहुल इस मुकाबले का हिस्सा नहीं होंगे. वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और तिलक वर्मा के दलीप ट्रॉफी फाइनल में खेलने को लेकर असमंजस बना हुआ था क्योंकि ये तीनों खिलाड़ी अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज का भी हिस्सा हैं l

    15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के लिए दलीप ट्रॉफी का खिताबी मुकाबला बेहद खास होगा. आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी धाक जमा चुके वैभव ने दलीप ट्रॉफी में भी अपनी बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरी हैं. ईस्ट जोन के लिए ईशान किशन और वैभव की मौजूदगी टीम की बल्लेबाजी को मजबूत करेगी. दूसरी तरफ तिलक वर्मा की अगुवाई में साउथ जोन के पास भी मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप है. दोनों टीमों ने सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन कर फाइनल का टिकट हासिल किया है l

    अजीत अगरकर भी फाइनल देखेंगे
    दलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले पर चयनकर्ताओं की भी नजर रहेगी. भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर चेन्नई में फाइनल देखने पहुंचेंगे. अगरकर की मौजूदगी इसलिए भी अहम है क्योंकि बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड) में उनके भविष्य को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. हालिया बीसीसीआई समीक्षा बैठक में वह पारिवारिक कारणों से शामिल नहीं हो सके थे. उनका मौजूदा अनुबंध 4 अक्टूबर तक है. ऐसे में चेन्नई में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के साथ उनकी संभावित बातचीत भी अहम मानी जा रही है l

    दलीप ट्रॉफी के साथ ही बीसीसीआई एशियन गेम्स को लेकर भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है. भारतीय मेन्स टीम के अभ्यास के लिए मयंक यादव, कार्तिक त्यागी और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहसिन खान को नेट गेंदबाज के तौर पर जापान भेजने की तैयारी है. यह योजना मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण के सुझाव के बाद बनाई गई है. टीम मैनेजमेंट चाहता है कि जापान में अभ्यास के दौरान भारतीय बल्लेबाजों को अलग-अलग तरह के तेज गेंदबाजों के खिलाफ पर्याप्त तैयारी का मौका मिले l

    मयंक यादव, कार्तिक त्यागी और मोहसिन खान भारतीय एशियन गेम्स दल में शामिल नहीं होंगे. उन्हें सिर्फ नेट गेंदबाज के तौर पर टीम के साथ रखा जाएगा. भारतीय टीम के 20 सितंबर को दिल्ली से जापान रवाना होने की उम्मीद है, जबकि मेन्स टीम का पहला मुकाबला 28 सितंबर को निर्धारित है. बीसीसीआई ने तीनों तेज गेंदबाजों के जापानी वीजा के लिए आवेदन भी कर दिया है l

  • आबिद मुश्ताक की घातक गेंदबाजी, 10 ओवर में सिर्फ 10 रन देकर 4 विकेट

    आबिद मुश्ताक की घातक गेंदबाजी, 10 ओवर में सिर्फ 10 रन देकर 4 विकेट

    बेंगलुरु
    बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मैदान पर दलीप ट्रॉफी के मुकाबले हो रहे हैं। दूसरे क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ जोन का सामना वेस्ट जोन से हो रहा है। इस मुकाबले में नॉर्थ जोन की तरफ से बाएं हाथ के स्पिनर आबिद मुश्ताक ने कमाल की बॉलिंग कर रहे हैं। आबिद ने मैच के पहले दिन वेस्ट जोन के विस्फोटक बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को अनप्लेवल गेंद डालकर बोल्ड दिया। इसके बाद मैच के दूसरे दिन भी उनका दबदबा कायम है।

    आबिद ने प्रमुख बल्लेबाजों को आउट किया
    दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल के दूसरे दिन पहले सेशन में आबिद ने तीन विकेट लिए। उन्होंने सबसे पहले शिवालिक शर्मा को आउट किया। बड़ौदा के शिवालिक का फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड शानदार है। इसके बाद उन्होंने कप्तान रुतुराज गायकवाड़ को भी पवेलियन भेज दिया। उसी ओवर में विस्फोटक बल्लेबाज उर्विल पटेल भी आबिद की गेंद पर आउट हो गए। इन तीनों बल्लेबाजों को उन्होंने एलबीडब्ल्यू किया।

    आबिद मुश्ताक ने 10 ओवर में सिर्फ 10 रन दिए
    आबिद मुश्ताक ने अपने 10वें ओवर में चौथा विकेट लिया। उन 10 ओवर के दौरान उन्होंने 6 मेडन डाले और सिर्फ 10 रन ही दिए। वेस्ट जोन के शुरुआती 5 में से 4 विकेट आबिद को मिले हैं। नॉर्थ जोन ने पहले बैटिंग के लिए 251 रन बनाए थे। आबिद ने बल्ले से 30 गेंदों पर 19 रनों का योगदान दिया। आबिद जम्मू कश्मीर के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते हैं। उनकी टीम ने पिछले रणजी सीजन को अपने नाम किया था।

    फर्स्ट क्लास क्रिकेट में आबिद का रिकॉर्ड
    जम्मू कश्मी को डोडा में जन्मे 29 साल के आबिद मुश्ताक बाएं हाथ के गेंदबाज के साथ ही निचले क्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज हैं। 45 मैचों में उन्होंने 22 की औसत से 134 विकेट लिए हैं। वह 9 बार पारी में 5 जबकि दो बार मैच में 10 विकेट ले चुके हैं। 27 की औसत से उनके नाम 1483 रन भी हैं। 6 फिफ्टी के साथ उनके नाम एक शतक भी है। उन्होंने पिछले रणजी सीजन में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ 177 रनों की पारी 8वें नंबर पर आकर खेली थी। 207 गेंदों पर उन्होंने 18 चौके और 6 छक्के मारे थे।