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  • ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी, MP स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर्स को दिए खास निर्देश

    ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी दूर करने की तैयारी, MP स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर्स को दिए खास निर्देश

    भोपाल

    मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पाटने के लिए एक अहम और सख्त कदम उठाया है। इस साल राज्यभर के जिला और ब्लॉक-स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर 3,118 बॉन्डेड डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई है। विभाग का मुख्य संदेश बिल्कुल साफ है- 'डॉक्टरों को नौकरी छोड़ने नहीं देना है।' इसके लिए प्रशासन ने सभी जिला कलेक्टरों को मैदान में उतरकर इन युवा डॉक्टरों की शुरुआती समस्याओं को समझने और उन्हें पूरी सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

    बॉन्ड नियमों के पालन में आया रिकॉर्ड उछाल
    पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले इस बार अनिवार्य बॉन्ड प्रणाली का अनुपालन काफी बेहतर रहा है:

        इस साल कुल 3,118 डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई।

        इनमें से 2,601 डॉक्टर (यानि 83% से अधिक) पिछले हफ्ते तक अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर चुके हैं।

        तुलनात्मक रूप से देखें तो साल 2025 में यह आंकड़ा मात्र 39.5% और 2024 में 42% था।

        इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों के जुड़ने से राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी का आंकड़ा जो पहले करीब 5,000 था, अब घटकर लगभग 2,000 के आसपास रह जाने की उम्मीद है।

    नई चुनौतियों से पार पाना बड़ी प्राथमिकता
    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस समय सबसे बड़ी चिंता इन डॉक्टरों के रिटेंशन (नौकरी में टिके रहना) को लेकर है। इनमें से अधिकांश युवा डॉक्टर पहली बार बड़े शहरों से बाहर दूरदराज और आदिवासी जिलों में काम करने पहुंचे हैं। वहां उन्हें आवास, भोजन, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर कई तरह की शुरुआती परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग का मानना है कि यदि शुरुआती महीनों में इन्हें एक सकारात्मक और अनुकूल माहौल मिल जाए, तो उनके नौकरी छोड़ने के मामलों में भारी कमी आएगी।

    जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील
    इस दिशा में कलेक्टर्स को विशेष रूप से ब्रीफ किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में डॉक्टरों के रहने और काम करने की स्थितियों की समीक्षा के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करें। इसके अलावा, विभाग ने स्थानीय विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क साधा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके समर्थक या स्थानीय लोग डॉक्टरों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं, बल्कि एक सकारात्मक और सहयोगी रुख अपनाएं।

    क्या हैं मेडिकल बॉन्ड के कड़े नियम?

        मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नियम स्पष्ट हैं:
        सामान्य वर्ग के एमबीबीएस स्नातक: ग्रामीण क्षेत्रों में 1 साल की अनिवार्य सेवा, ऐसा न करने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना।

        एससी/एसटी वर्ग: नियम के तहत एक साल की सेवा और जुर्माना राशि 5 लाख रुपये।
        मेरिटोरियस/सीएम वेलफेयर योजना: सरकारी कॉलेजों से पढ़ने वाले इन छात्रों को 2 साल की सेवा देनी होगी और 10 लाख रुपये का बॉन्ड पेनल्टी है।

        निजी कॉलेज के छात्र (सरकारी फीस पर): जिन छात्रों की फीस सरकार ने उठाई है, उन्हें 5 साल की सेवा देनी होगी और 25 लाख रुपये का जुर्माना प्रावधान है।

        नॉन-सर्विस पीजी छात्र (MD/MS): 1 वर्ष की सेवा और 10 लाख रुपये जुर्माना।

        इन-सर्विस उम्मीदवार, डिमॉन्स्ट्रेटर और मेडिकल ऑफिसर: इनके लिए 5 साल की अनिवार्य सेवा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है।

  • मानदेय बढ़ोतरी के बाद भी नहीं मानी हड़ताल, रायपुर में जूनियर डॉक्टरों की OPD ठप

    मानदेय बढ़ोतरी के बाद भी नहीं मानी हड़ताल, रायपुर में जूनियर डॉक्टरों की OPD ठप

    रायपुर
     MBBS इंटर्न और पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के बाद भी जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। पीजी डॉक्टरों का कहना है कि उनकी 17 सूत्रीय मांगों में स्टाइपेंड के अलावा कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर डॉक्टर चार दिन से आंदोलन कर रहे हैं और आज आंदोलन का पांचवा दिन है।

    आंदोलन के कारण अंबेडकर अस्पताल समेत मेडिकल कॉलेज से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है और ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में आधी रह गई है।

    स्टाइपेंड में 26 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी
    शासन ने एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया है। इसके बाद अब पीजी मेडिकल डॉक्टरों के स्टाइपेंड में भी करीब 26 प्रतिशत तक वृद्धि का आदेश जारी किया है।

    नई दरों के अनुसार पीजी प्रथम वर्ष का स्टाइपेंड 67,500 से बढ़कर 85,050 रुपये, द्वितीय वर्ष का 71,450 से 90,027 रुपये और तृतीय वर्ष का 74,600 से 93,996 रुपये किया गया है। नई दरें 1 अक्टूबर से लागू होंगी। इसके बावजूद डॉक्टरों का कहना है कि केवल स्टाइपेंड बढ़ाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा।

    बांड की अवधि और राशि घटाना प्रमुख मांग
    जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांग एमबीबीएस और पीजी के बाद लागू बांड व्यवस्था में बदलाव की है। डॉक्टरों के अनुसार एमबीबीएस और पीजी के बाद दो-दो वर्ष की बांड सेवा की व्यवस्था है। वे इसकी अवधि कम करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही बांड की राशि भी घटाने की मांग है।

    डॉक्टरों के अनुसार पीजी के लिए बांड राशि 50 लाख और एमबीबीएस के लिए 25 लाख रुपये है। एसोसिएशन बांड को खत्म करने या इसकी अवधि कम करने की मांग कर रहा है।

    सुपर स्पेशियलिटी कैडर बनाने की भी मांग
    इसके अलावा पोस्ट-पीजी स्टाइपेंड, पीजी रेजिडेंट, बांडेड जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट के मानदेय में संशोधन, डीएम और एमसीएच सुपर स्पेशियलिटी रेजिडेंट के स्टाइपेंड में बदलाव और सुपर स्पेशियलिटी कैडर बनाने जैसी मांगें भी शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सुपर स्पेशियलिटी कैडर बनने से प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ सकती है।

    आज मंत्री से होगी चर्चा, नहीं तो इमरजेंसी भी प्रभावित
    जूनियर डॉक्टरों को 29 सितंबर को सुबह 11:30 बजे स्वास्थ्य मंत्री ने चर्चा के लिए बुलाया है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि बैठक में लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल ओपीडी का बहिष्कार जारी है।

    यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी है। 28 सितंबर से इमरजेंसी समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी भी एसोसिएशन दे चुका है। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर मरीजों को इलाज के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में नियमित सेवाओं का दबाव बढ़ सकता है।

  • इंदौर में स्टाइपेंड को लेकर गरमाया विवाद, जूनियर डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा; MY अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

    इंदौर में स्टाइपेंड को लेकर गरमाया विवाद, जूनियर डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा; MY अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

    इंदौर

    इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच में चिकित्सा व्यवस्था उस समय प्रभावित हुई जब जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। यहां के डॉक्टर भोपाल में हुए लाठीचार्ज और 'वन नेशन-वन स्टाइपेंड' की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स 3 दिन से सड़कों पर हैं। भोपाल में सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां डॉक्टर सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में इसका असर दिख रहा है और कई जगह ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं।

    हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की
    अस्पताल परिसर में एकत्र हुए रेजिडेंट डॉक्टरों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों का कहना है कि एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र अस्पतालों में दिन-रात सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद देश के अलग-अलग राज्यों में उनके मानदेय में भारी असमानता है। डॉक्टरों की मांग है कि पूरे देश में एक समान मानदेय व्यवस्था लागू की जाए और भोपाल में चिकित्सकों पर बल प्रयोग करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो। इंटर्न डॉक्टर राजेश सोनी ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉ. रागिनी खन्ना ने बताया कि धूप और गर्मी में भी हम लगातार आंदोलन करेंगे। सीनियर डॉक्टर, हमारे सभी साथी और परिचित इस आंदोलन में हमारे साथ हैं। 

    स्टाइपेंड पर पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था की मांग
    जूडा इंदौर के अध्यक्ष डॉक्टर विक्रम नेतू ने कहा कि भोपाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर लाठीचार्ज किया गया। हम दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं। इस तरह का सलूक कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमारी प्रमुख मांग है कि पूरे देश में समान स्टाइपेंड व्यवस्था लागू होना चाहिए।  

    अस्पताल प्रबंधन बोला मरीज परेशान नहीं होंगे
    अस्पताल प्रबंधक डॉक्टर अशोक यादव का कहना है कि मरीजों की देखभाल प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। प्रबंधन के अनुसार ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से चालू हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों और कंसल्टेंट्स को मोर्चे पर तैनात किया गया है। वहीं कई रेजिडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े। 

  • भोपाल में डॉक्टरों का प्रदर्शन हुआ उग्र, OPD-ऑपरेशन बंद; ₹14 हजार से ₹30 हजार स्टाइपेंड करने की मांग

    भोपाल में डॉक्टरों का प्रदर्शन हुआ उग्र, OPD-ऑपरेशन बंद; ₹14 हजार से ₹30 हजार स्टाइपेंड करने की मांग

    भोपाल

    मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स स्टाइपेंड बढ़वाने 3 दिन से सड़कों पर हैं। भोपाल में सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां डॉक्टर सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में इसका असर दिख रहा है। ओपीडी सेवाएं ठप हैं।

    भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बुधवार को 12 बजे तक ओपीडी बंद कर दी गई। सीनियर डॉक्टर्स ने मरीजों को देखा। किडनी और लिवर के मरीज भटकते दिखे। हमीदिया में आज सिर्फ 2 ऑपरेशन हुए, जबकि बाकी दिन 40 से ज्यादा होते थे।

    कमला पार्क के पास आंदोलन, रास्ते को वन-वे किया गया
    भोपाल में कमला पार्क के पास बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठे हैं। प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। रास्ते को वन-वे किया गया है। पुलिस और प्रशासन डॉक्टरों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि प्रदर्शन से आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो।

    इंटर्न डॉक्टर सौरभ सोनी ने बताया- जब तक मांग पूरी नहीं होगी, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉ. शालिनी खन्ना ने बताया कि धूप और गर्मी से काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन खाने-पीने की परेशानी नहीं है। सीनियर डॉक्टर, साथी और भोपाल के लोग भी हमारे लिए खाना भेज रहे हैं।

    भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा- जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को लेकर कल मेडिकल कॉलेज में विस्तृत चर्चा हुई थी। आज भी उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और ट्रैफिक भी सुचारू रूप से चल रहा है।

    उन्होंने कहा- छात्रों को अपने बीच से तय प्रतिनिधियों के जरिए प्रशासन से तुरंत बातचीत करनी चाहिए। प्रदर्शन करना उनका अधिकार है, लेकिन सरकार के फैसले के बाद यह भी देखना चाहिए कि उनकी मांगों में से सरकार ने किस हद तक सहमति दी है। हर व्यक्ति के असंतुष्ट होने पर लगातार विरोध जारी रखना उचित नहीं है।

  • लेडी डॉक्टर की रहस्यमयी मौत से पहले जिंदगी में मचा था तूफान! कर्ज, अफेयर और तलाक की चर्चाओं ने बढ़ाया सस्पेंस

    लेडी डॉक्टर की रहस्यमयी मौत से पहले जिंदगी में मचा था तूफान! कर्ज, अफेयर और तलाक की चर्चाओं ने बढ़ाया सस्पेंस

     जालंधर 

    पंजाब के जालंधर में सरकारी लेडी डॉक्टर डॉ. मीनाक्षी सूद की मौत के बाद उनके पति और नेशनल आई केयर हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टर पीयूष सूद पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. लेडी डॉक्टर के परिजनों का दावा है कि डॉ. मीनाक्षी लंबे समय से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना कर रही थीं. परिवार ने पति पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, मारपीट और उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर करोड़ों रुपये का लोन लेने के आरोप लगाए हैं. वहीं पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

    मृतका के पिता प्रमोद कुमार के मुताबिक उनकी बेटी की शादी अक्टूबर 2018 में डॉक्टर पीयूष सूद के साथ हुई थी. परिवार का आरोप है कि शादी के बाद खरीदी गई थार गाड़ी का लोन डॉ. मीनाक्षी के नाम पर लिया गया था और उसकी किश्तें भी वही भर रही थीं. परिजनों का दावा है कि बाद में अस्पताल और अन्य कामों से जुड़े लोन भी उनके नाम पर लिए गए। 

    पति से रह रही थीं अलग 
    पिता का कहना है कि जुलाई 2025 से उनकी बेटी पति से अलग रह रही थी. परिवार के अनुसार कुछ दिन पहले जब डॉ. मीनाक्षी बैंक में मकान खरीदने से संबंधित प्रक्रिया के लिए पहुंचीं तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर करीब 2.5 करोड़ रुपये का लोन चल रहा है. परिजनों का आरोप है कि संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं थे. इसके बाद वह काफी परेशान रहने लगी थीं. मृतका की मां ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ कई बार मारपीट की गई. परिवार का दावा है कि डॉक्टर पीयूष सूद कई मौकों पर खुद फोन कर मारपीट की बात स्वीकार करते थे और बाद में माफी मांगते थे. पिता ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी उनकी बेटी का गला घोंटकर जान लेने की कोशिश की गई थी. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

    नर्स के साथ अफेयर का भी आरोप 
    परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर पीयूष सूद का अस्पताल में काम करने वाली एक महिला के साथ कथित संबंध था. पिता के अनुसार जब डॉ. मीनाक्षी को इस बात का संदेह हुआ तो उन्होंने अस्पताल के CCTV फुटेज की जांच की. परिवार का दावा है कि फुटेज में दोनों को साथ देखा गया. परिजनों का कहना है कि संबंधित फुटेज पुलिस को भी उपलब्ध कराए गए हैं. थाना नंबर 6 के प्रभारी सुशील कुमार ने बताया कि महिला डॉक्टर की मौत के मामले में परिजनों के बयानों के आधार पर BNS की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

    उन्होंने कहा कि आरोपी पति से अभी पूछताछ नहीं हो पाई है और कानूनी प्रक्रिया जारी है. एएसआई सतपाल के अनुसार सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी. घर के दरवाजे बंद थे. लोगों की मौजूदगी में घर का शीशा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, जहां डॉक्टर मीनाक्षी का शव जमीन पर पड़ा मिला. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। 

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार 
    मृतका की मां का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उनकी बेटी की मौत किन परिस्थितियों में हुई. परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. मृतका के पिता के अनुसार बेटी मार पिटाई से तंग थी, इसलिए वह डॉक्टर पीयूष से अलग रहने लगी थी। 

    नया मकान बनाना चाह रही थी 
    पिता का कहना है कि जून 2026 में वह अपना मकान लेने का प्लान बना रही थी. मकान लेने के लिए कुछ दिन पहले जब बैंक में गई तो पता चला कि उसने नाम पर 2.5 करोड़ का लोन चल रहा है. जबकि कागजों पर उसके साइन भी नहीं थे. पिता प्रमोद ने बताया कि अब बेटी तलाक लेना चाहती थी. मैंने बेटी को कहा था कि तुम्हारा कोर्ट से तलाक करवा देते हैं. तुम कुछ देर रुक जाओ. इस बीच लोन की बात पता चल गई जिससे बेटी परेशान हो गई. उन्होंने बताया कि मीनाक्षी कपूरथला के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर थी. पिता ने कहा कि डॉक्टर पीयूष ने ही बेटी को मरने के लिए मजबूर किया है. परिवार की मांग है कि पुलिस डॉक्टर पीयूष को अरेस्ट करे और इंसाफ दिलाए। 

  • 3000 किमी की दूरी भी नहीं बनी बाधा, भारतीय डॉक्टर ने रिमोट सर्जरी से बचाई जान

    3000 किमी की दूरी भी नहीं बनी बाधा, भारतीय डॉक्टर ने रिमोट सर्जरी से बचाई जान

    हैदराबाद

    तकनीक और मेडिकल साइंस ने एक बार फिर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींच लिया है. चीन के वुहान में मौजूद भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने हैदराबाद में मौजूद एक मरीज की रोबोट की मदद से सफल सर्जरी की. खास बात यह रही कि डॉक्टर और मरीज के बीच करीब 3000 किलोमीटर की दूरी थी। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह यूरेट्रल रीइम्प्लांटेशन सर्जरी थी, जिसमें यूरेटर (किडनी से यूरिन ब्लैडर तक ले जाने वाली नली) को दोबारा ब्लैडर से जोड़ा गया. यह ऑपरेशन चीन में विकसित रोबोटिक तकनीक और हाई-स्पीड 5G इंटरनेट की मदद से किया गया. पूरा ऑपरेशन करीब 90 मिनट तक चला. इस दौरान वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल और हैदराबाद की मेडिकल टीम के बीच लगातार समन्वय बना रहा। 

    इस उपलब्धि को भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने वुहान में बैठकर हैदराबाद के मरीज की सिर्फ 90 मिनट में रोबोट-असिस्टेड सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की। 

    ऑपरेशन शुरू होने से पहले वुहान और हैदराबाद के डॉक्टरों ने ऑनलाइन मरीज की मेडिकल रिपोर्ट्स की संयुक्त समीक्षा की. इसके बाद रोबोटिक आर्म्स की मूवमेंट को लेकर पूरी योजना तैयार की गई. हैदराबाद में मौजूद मेडिकल स्टाफ ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया और ऑपरेशन थिएटर में रोबोटिक सिस्टम को तैयार किया। 

    इस रोबोटिक सिस्टम में बेहद बारीक सर्जिकल उपकरण और हाई-डेफिनिशन 3D कैमरे लगे थे, जो हैदराबाद से लाइव तस्वीरें वुहान भेज रहे थे. डॉ. गौस वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल में एक कंट्रोल कंसोल पर बैठे थे, जहां से उन्होंने पूरे ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित किया। 

     200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड रोबोट ले रहे थे निर्देश
    रिपोर्ट के अनुसार, 5G नेटवर्क की मदद से डॉक्टर के निर्देश सिर्फ 200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड के भीतर हैदराबाद पहुंच रहे थे. इतनी कम देरी की वजह से रोबोटिक आर्म्स लगभग उसी समय डॉक्टर के हाथों की हरकतों को दोहरा पा रहे थे. यही वजह रही कि हजारों किलोमीटर दूर बैठने के बावजूद सर्जरी के दौरान सटीकता और नियंत्रण बनाए रखा जा सका। 

    हैदराबाद में मौजूद डॉक्टरों की टीम भी पूरे समय ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रही और किसी भी इमरजेंसी स्थिति में तुरंत मदद के लिए तैयार थी.यह सर्जरी International Hepato-Pancreato-Biliary Association के चीनी चैप्टर की 10वीं कांग्रेस के दौरान दिखाई गई 26 सर्जरी में से एक थी. इनमें भारत, ब्राजील, जॉर्जिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान के विशेषज्ञों के साथ लाइव अंतरराष्ट्रीय रिमोट सर्जरी भी शामिल थीं। 

    टोंगजी हॉस्पिटल में सर्जरी विभाग के निदेशक चेन शियाओपिंग ने कहा कि AI, रोबोटिक्स और अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन तकनीकें दुनिया भर के हेल्थकेयर सिस्टम को तेजी से बदल रही हैं।