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  • पर्यटन के जरिए उत्तराखंड में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, निजी निवेश और नए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा

    पर्यटन के जरिए उत्तराखंड में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, निजी निवेश और नए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा

     नई पर्यटन नीति से उत्तराखंड में विकास और रोजगार की नई राह

     निजी निवेश, स्वरोजगार और नए पर्यटन स्थलों के विकास पर सरकार का विशेष फोकस
    देहरादून 

    देवभूमि उत्तराखंड अपनी हिमालयी चोटियों, आध्यात्मिक आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और रोमांचकारी पर्यटन स्थलों के कारण देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। चारधाम यात्रा से लेकर योग और वेलनेस, ट्रैकिंग से लेकर एडवेंचर स्पोर्ट्स और वन्यजीव पर्यटन से लेकर स्थानीय संस्कृति तक, उत्तराखंड के पास पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    राज्य में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार एवं निवेश की संभावनाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने *नई राज्य पर्यटन नीति* जारी की है। यह नीति केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था, स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक रणनीतिक पहल है।

    नई नीति में सरकार की भूमिका को एक व्यवसायी के बजाय *'फैसिलिटेटर' यानी सुविधा प्रदाता* के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को निवेश के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना, पर्यटन परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाना और राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक पर्यटन के लाभ पहुंचाना है।

    ## पर्यटन में तेजी, बढ़ते अवसर

    उत्तराखंड में पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा पर्यटकों की संख्या में हुई वृद्धि से लगाया जा सकता है। वर्ष 2014 में राज्य में करीब *2.2 करोड़ पर्यटक* पहुंचे थे, जो वर्ष 2019 में बढ़कर लगभग *3.9 करोड़* हो गए। इस अवधि में पर्यटकों की संख्या में करीब *11.97 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR)* दर्ज की गई।

    यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड में पर्यटन केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं रह गया है। अब पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य, एडवेंचर, वेलनेस, संस्कृति, स्थानीय खान-पान और अनुभव आधारित पर्यटन के लिए भी पहुंच रहे हैं।

    पर्यटन क्षेत्र की वैश्विक संभावनाओं को देखते हुए भारत में भी इस क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण इंजन के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    ## निजी निवेश को मिलेगा नया आधार

    नई पर्यटन नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है *निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना*। सरकार का मानना है कि पर्यटन के बुनियादी ढांचे, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, टूर संचालन और विभिन्न निजी सेवाओं के विस्तार में निजी निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नीति के तहत निवेशकों के लिए कारोबार करना आसान बनाने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए *सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम* को मजबूत किया जाएगा, ताकि विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया सरल और तेज हो सके।

    नई परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पर्यटन इकाइयों के विस्तार को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले से संचालित होटल, रिसॉर्ट, पर्यटन इकाइयों और अन्य उद्यमों को अपनी क्षमता बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।

    ## पूंजीगत सब्सिडी से लेकर करों में राहत तक

    नई नीति में पात्र पर्यटन इकाइयों और उद्यमियों के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में *पूंजीगत सब्सिडी* के माध्यम से होटल और ठहरने से जुड़ी परियोजनाओं को आर्थिक सहयोग देने की व्यवस्था की गई है।

    इसके साथ ही पर्यटन परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार और मार्केटिंग के लिए सहायता, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहन तथा बिजली शुल्क एवं स्टांप ड्यूटी से संबंधित राहत जैसे प्रावधान भी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

    इसका सीधा उद्देश्य है कि उत्तराखंड में पर्यटन परियोजनाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निवेश और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो।

    ## गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ

    उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति की एक बड़ी संभावना *स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार सृजन* में दिखाई देती है। पर्यटन के विस्तार के साथ होमस्टे, स्थानीय गाइड, ट्रैवल सेवाएं, टैक्सी एवं परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान, साहसिक गतिविधियों और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

    राज्य के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों, लोक संस्कृति और हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों को उत्तराखंड की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान का अनुभव भी प्राप्त होगा।

    इस दृष्टि से पर्यटन नीति केवल होटल और रिसॉर्ट के निर्माण की नीति नहीं, बल्कि *स्थानीय समुदाय को पर्यटन अर्थव्यवस्था का भागीदार बनाने की पहल* के रूप में भी देखी जा सकती है।

    ## धार्मिक पर्यटन से आगे बढ़ेगा उत्तराखंड

    उत्तराखंड की पहचान लंबे समय से चारधाम और प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण रही है। नई नीति में धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन के नए आयाम विकसित करने पर जोर दिया गया है।

    ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने, सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने और नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

    इससे पर्यटन का दबाव कुछ चुनिंदा प्रसिद्ध स्थलों से आगे बढ़कर राज्य के अन्य क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। यही संतुलित पर्यटन विकास का आधार बन सकता है।

    ## एडवेंचर और इको-टूरिज्म बनेगा नया आकर्षण

    हिमालयी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखंड में *ट्रैकिंग, रिवर एक्टिविटी, वॉटर स्पोर्ट्स और अन्य एडवेंचर गतिविधियों* की व्यापक संभावनाएं हैं। नई नीति में एडवेंचर पर्यटन के साथ पर्यावरण-अनुकूल यानी इको-टूरिज्म को प्राथमिकता दी गई है।

    इसका उद्देश्य पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना है। प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    ## वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म पर भी नजर

    योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट पहचान है। नई पर्यटन नीति में *वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म* को भी प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है।

    योग और आयुर्वेद को पर्यटन अनुभव से जोड़कर राज्य देश-विदेश के उन पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, जो स्वास्थ्य, मानसिक शांति और प्राकृतिक जीवनशैली से जुड़े अनुभव चाहते हैं।

    इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य एवं वेलनेस सुविधाओं के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

    ## हेलीकॉप्टर पर्यटन को भी मिलेगा प्रोत्साहन

    उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में कनेक्टिविटी पर्यटन विकास का महत्वपूर्ण आधार है। नई नीति में *हेलीकॉप्टर आधारित पर्यटन* को भी प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है।

    हेली सेवाओं के विस्तार से दुर्गम पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के साथ-साथ पर्यटन के नए अनुभव विकसित किए जा सकते हैं। इससे समय की बचत होगी और राज्य के ऐसे क्षेत्रों को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने में मदद मिल सकती है, जहां सड़क या अन्य माध्यमों से पहुंचना अपेक्षाकृत कठिन है।

    ## MICE टूरिज्म से बढ़ेंगे कारोबारी अवसर

    नई पर्यटन नीति में *MICE—Meetings, Incentives, Conferences and Exhibitions* पर्यटन को भी महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड को केवल अवकाश और धार्मिक पर्यटन के गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि कॉरपोरेट मीटिंग, सम्मेलन, प्रदर्शनियों और प्रोत्साहन यात्राओं के लिए भी आकर्षक स्थान बनाना है।

    इससे होटल, परिवहन, इवेंट मैनेजमेंट, खान-पान और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

    ## एक नीति, अनेक संभावनाएं

    उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति का व्यापक उद्देश्य राज्य की पर्यटन क्षमता को एक समग्र आर्थिक अवसर में बदलना है। निजी निवेश को आकर्षित करना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना, नए पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करना, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन का विस्तार करना—ये सभी लक्ष्य इस नीति को व्यापक स्वरूप देते हैं।

    उत्तराखंड के लिए पर्यटन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि पहाड़ों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने का माध्यम भी है। यदि नीति के प्रावधान प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में राज्य के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों तक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था का विस्तार हो सकता है।

    ### विकास के साथ संरक्षण की चुनौती

    हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में पर्यटन विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए नई नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश और पर्यटन विस्तार के साथ प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण का संरक्षण किस तरह सुनिश्चित किया जाता है।

    यही संतुलन उत्तराखंड को एक ऐसे पर्यटन मॉडल की ओर ले जा सकता है, जिसमें *पर्यटक बढ़ें, निवेश बढ़े, रोजगार बढ़े और साथ ही देवभूमि की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान भी सुरक्षित रहे।*

    नई पर्यटन नीति इसी व्यापक सोच के साथ उत्तराखंड को देश के प्रमुख और बहुआयामी पर्यटन गंतव्यों में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • 101 युवाओं की सरकारी सेवा में एंट्री, धामी बोले- मेहनत और योग्यता को मिल रहा पूरा सम्मान

    101 युवाओं की सरकारी सेवा में एंट्री, धामी बोले- मेहनत और योग्यता को मिल रहा पूरा सम्मान

    101 युवाओं को नियुक्ति पत्र, धामी बोले—मेहनत और प्रतिभा के आधार पर मिल रही सरकारी नौकरी

    देहरादून
     उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और सरकारी भर्तियों को पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्य सेवक सदन में पशुपालन तथा गन्ना विभाग में चयनित 101 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें 88 पशुधन प्रसार अधिकारी और 13 गन्ना पर्यवेक्षक शामिल हैं।

    नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र युवाओं की मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। अब वे अपने करियर के साथ जनसेवा की नई यात्रा शुरू कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे अपने ज्ञान, अनुभव और ऊर्जा का उपयोग करते हुए शासकीय कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने की अपेक्षा की।

    पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के हितों की रक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी नौकरियों में चयन मेहनत और प्रतिभा के आधार पर हो।

    उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि भर्ती प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष रहें तथा युवाओं को अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले।

    पशुपालन और गन्ना क्षेत्र को मिल रहा बढ़ावा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन और गन्ना विभाग प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के माध्यम से पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों और पशुपालकों को अनुदान पर गाय, बकरी, भेड़ और मुर्गी पालन की इकाइयां उपलब्ध कराने के साथ कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    गन्ना किसानों के लिए तकनीक और बेहतर सुविधाओं पर जोर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना सर्वेक्षण की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को नई तकनीक, उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए गन्ना क्लीनिक एवं परामर्श केंद्र शुरू किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश की तुलना में पांच रुपये प्रति कुंतल अधिक मूल्य दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर कृषि पद्धतियों के साथ उनकी उपज का उचित लाभ भी मिल सके।

    योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना जिम्मेदारी

    मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों के साथ लगातार संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना जरूरी है।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिक को सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था में संवेदनशीलता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करना होगा।

    ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ का मंत्र

    मुख्यमंत्री धामी ने नवनियुक्त कार्मिकों से ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना ही जनसेवा की वास्तविक भावना है।

    उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    101 युवाओं को मिली यह नियुक्ति केवल रोजगार का अवसर नहीं, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों—पशुपालन और गन्ना क्षेत्र—को नई ऊर्जा देने का अवसर भी है। आने वाले समय में इन नवनियुक्त कार्मिकों की भूमिका किसानों और पशुपालकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण होगी।चाहें तो मैं इसके लिए मैगज़ीन के फ्रंट पेज/इनसाइड पेज के लिए 5 ज्यादा दमदार हेडलाइन और सबहेडिंग भी बना सकता हूं।

  • ‘हनुमान अंश’ देखकर भावुक हुए सीएम धामी, नीम करौली बाबा के जीवन और संदेश की सराहना

    ‘हनुमान अंश’ देखकर भावुक हुए सीएम धामी, नीम करौली बाबा के जीवन और संदेश की सराहना

    ‘हनुमान अंश’ में दिखी नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा, सीएम धामी ने देखी फिल्म

    देहरादून
     उत्तराखंड की देवभूमि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ संतों और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए भी विशेष पहचान रखती है। इसी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी प्रसिद्ध संत एवं आध्यात्मिक विभूति नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी भक्ति, सेवा और मानव कल्याण के संदेश पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाथीबड़कला स्थित सेंट्रियो मॉल के सिनेमा हॉल में देखा।

    फिल्म देखने के लिए मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा सहित विभिन्न दायित्वधारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

    फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की संत परंपरा ने सदियों से समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है। नीम करौली बाबा का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा की भक्ति, मानव सेवा और सभी के प्रति प्रेम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनका जीवन समाज को सेवा, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

    कैंची धाम बना आस्था का प्रमुख केंद्र

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि महान संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भी है। नीम करौली बाबा से जुड़ा कैंची धाम आज देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में श्रद्धा और आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

    उन्होंने कहा कि संतों के जीवन और उनके विचारों को रचनात्मक माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाना भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से युवाओं को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

    भक्ति, सेवा और मानव कल्याण पर केंद्रित फिल्म

    ‘हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़े उन मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिनमें ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, मानव सेवा, करुणा, प्रेम, विनम्रता और लोककल्याण प्रमुख हैं।

    मुख्यमंत्री धामी ने फिल्म को भारतीय संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने वाला सकारात्मक प्रयास बताते हुए इसके निर्माताओं और पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और संत परंपरा पर आधारित प्रेरणादायी फिल्में समाज में सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    नीम करौली बाबा का जीवन और उनका सेवा-संदेश आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है। ऐसे में उनकी आध्यात्मिक यात्रा को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास उत्तराखंड की समृद्ध संत परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत को व्यापक मंच देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है।अगर आप चाहें तो इसे और ज्यादा मैगज़ीन फीचर जैसा बनाकर 600–700 शब्दों में, शुरुआत में एक प्रभावी आध्यात्मिक उद्धरण/ओपनिंग के साथ भी तैयार किया जा सकता है।

  • खेती से बाजार तक किसानों का डिजिटल साथी बनेगा ‘मनोरमा कृषि रक्षक’, एक ऐप में मिलेंगी कई सुविधाएं

    खेती से बाजार तक किसानों का डिजिटल साथी बनेगा ‘मनोरमा कृषि रक्षक’, एक ऐप में मिलेंगी कई सुविधाएं

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    मनोरमा कृषि रक्षक: मोबाइल ऐप से किसानों को मौसम, बीमारी और बाजार की जानकारी

    देहरादून
     खेती-किसानी में मौसम की अनिश्चितता, फसलों में होने वाली बीमारियां और बाजार भाव की सही जानकारी का अभाव किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं को डिजिटल तकनीक के माध्यम से आसान बनाने की दिशा में ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ मोबाइल ऐप एक नई पहल के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में इस ऐप को लॉन्च किया। ऐप को मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति ने विकसित किया है।

    ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का उद्देश्य किसानों को फसल तैयार करने से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम से जरूरी जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराना है। ऐप में मौसम, फसल स्वास्थ्य, कृषि सलाह, बाजार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

    मौसम में बदलाव पर मिलेगा रियल टाइम अलर्ट

    खेती में मौसम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। मौसम में अचानक होने वाला बदलाव कई बार किसानों के लिए नुकसान का कारण बन जाता है। ऐसे में ऐप के जरिए किसानों को रियल टाइम मौसम की जानकारी और अलर्ट उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है। मौसम के पूर्वानुमान और बदलाव की जानकारी के आधार पर किसान सिंचाई, फसल सुरक्षा और अन्य कृषि संबंधी फैसले अधिक बेहतर तरीके से ले सकेंगे।

    फोटो से फसल की बीमारी पहचानने में मदद

    ऐप की प्रमुख विशेषताओं में एआई आधारित फसल रोग पहचान सुविधा भी शामिल है। फसल में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर किसान फोटो के माध्यम से समस्या की पहचान में मदद ले सकेंगे। शुरुआती स्तर पर बीमारी की जानकारी मिलने से किसान समय रहते उचित कृषि सलाह लेने और फसल को संभावित नुकसान से बचाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

    इसके साथ ही अलग-अलग फसलों के लिए फसल-विशिष्ट कृषि सलाह उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया गया है, जिससे किसानों को उनकी फसल के अनुरूप उपयोगी जानकारी मिल सके।

    बाजार भाव और लॉजिस्टिक्स की जानकारी भी

    किसान के लिए उत्पादन के साथ-साथ उपज को उचित बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ में कृषि और बाजार से संबंधित जानकारी के साथ परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसका उद्देश्य किसान को खेत से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया में डिजिटल सहयोग उपलब्ध कराना है।

    स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को भी लाभ

    ऐप का दायरा केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं रखा गया है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने से संबंधित सुविधाएं भी इसमें शामिल की गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले उत्पादों को संभावित बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    आधुनिक तकनीक से किसानों को मिलेगी आसानी: धामी

    ऐप लॉन्च के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी पहल बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर किसानों को कृषि से जुड़ी आवश्यक जानकारियां और सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए संस्था को शुभकामनाएं भी दीं।

    ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म खेती को केवल उत्पादन की प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय मौसम की जानकारी, फसल स्वास्थ्य, कृषि सलाह, बाजार और लॉजिस्टिक्स को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। इससे तकनीक और खेती के बीच की दूरी कम करने में मदद मिल सकती है और किसानों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।अगर आप चाहें तो मैं इसी के लिए मैगज़ीन कवर स्टोरी के अनुरूप 5 दमदार हेडलाइन और सबहेडिंग भी बना सकता हूं।

  • 5 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ, धामी कैबिनेट का हुआ विस्तार

    5 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ, धामी कैबिनेट का हुआ विस्तार

    देहरादून 

     उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार के कैबिनेट का आज विस्तार हुआ। कैबिनेट विस्तार में 5 मंत्रियों को राज्यपाल गुरमीत सिंह ने शपथ दिलाई। कैबिनेट में मंत्री की शपथ लेने वाले विधायकों में मदन कौशिक प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, भरत सिंह चौधरी और खजान दास शामिल रहे। इन विधायकों के शपथ के साथ ही पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट में अब मुख्यमंत्री समेत 12 सदस्य हो गए हैं।

    अभी कैसा है धामी कैबिनेट का स्वरूप
    उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी कैबिने
    ट में अब मुख्यमंत्री समेत12 सदस्य हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज 5 नए मंत्रियों को शपथ दिलाने के बाद कैबिनेट सदस्यों की संख्या 7 से अब 12 हो गई।

    इन पांच विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ

     1    मदन कौशिक
    2. खजान दास
    3. राम सिंह कैडा
    4. प्रदीप बत्रा
    5. भरत चौध

    ये रहे धामी सरकार के नए सिपाही

    खजान दास (अनुसूचित जाति): देहरादून जिले की राजपुर सीट से लगातार दो बार चुनाव जीतने वाले खजान दास भुवन खंडूरी सरकार में शिक्षा राज्यमंत्री रह चुके हैं.

    साल 2007 में टिहरी जिले से जीते थे चुनाव. संगठन के पदों पर भी रह चुके हैं खजान दास. फिलहाल बीजेपी के प्रवक्ता भी हैं खजानदास.

    प्रदीप बत्रा (पंजाबी समाज): हरिद्वार जिले में रुड़की विधानसभा से तीन बार के विधायक प्रदीप बत्रा पंजाबी समाज से आते हैं. हरीश रावत सरकार के दौरान जिन कांग्रेसी विधायकों ने बगावत करके बीजेपी का दामन थामा था, उसमें बत्रा भी शामिल रहे हैं. बीजेपी संगठन में बत्रा की अच्छी पकड़ मानी जाती है.

    मदन कौशिक (ब्राह्मण): हरिद्वार से पांच बार के विधायक मदन कौशिक, बीजेपी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं। पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे, कौशिक बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सदस्य हैं. कौशिक 2002 में पहली बार हरिद्वार से विधायक चुने गए थे. तब से लगातार हरिद्वार से विधायक हैं कौशिक.

    राम सिंह कैड़ा (ठाकुर): नैनीताल जिले की भीमताल सीट से दो बार के विधायक राम सिंह कैड़ा पहली बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बने हैं। 2017 में कैड़ा, निर्दलीय के तौर पर भीमताल से जीते थे. छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले राम सिंह कैड़ा लंबे समय तक कांग्रेस से भी जुड़े रहे.

    भरत चौधरी (ठाकुर): रुद्रप्रयाग जिले की रुद्रप्रयाग विधानसभा से दो बार के बीजेपी विधायक भरत चौहान राजनीति में चार दशक से हैं. इनको मंत्री बनकर बीजेपी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का मैसेज दिया है. भरत चौधरी ने संस्कृत भाषा में शपथ लिया.