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  • उड़ान से पहले नहीं, अब हर साल डोप टेस्ट! पायलटों के लिए DGCA की बड़ी तैयारी

    उड़ान से पहले नहीं, अब हर साल डोप टेस्ट! पायलटों के लिए DGCA की बड़ी तैयारी

    नई दिल्ली

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय पायलटों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. मंत्रालय सभी पायलटों का साल में एक बार अनिवार्य डोप टेस्ट कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विमान उड़ाने वाले पायलट किसी नशीले या प्रतिबंधित पदार्थ के प्रभाव में ड्यूटी पर न हों। 

    इस प्रस्ताव को लेकर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA संबंधित हितधारकों से सलाह-मशविरा कर रहा है. अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि सभी पायलटों का सालाना 100 फीसदी डोप टेस्ट कराना कितना व्यावहारिक होगा।

    इसके साथ ही प्रस्तावित व्यवस्था का एयरलाइन ऑपरेशंस पर पड़ने वाले असर का भी आकलन किया जा रहा है. अधिकारियों का फोकस यह तय करने पर है कि डोप टेस्ट की प्रक्रिया लागू होने के बावजूद उड़ानों के संचालन में किसी तरह की परेशानी न आए. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पायलटों की नियमित जांच के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 

    एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA सख्त
    एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आते समय अचानक करीब 300 फीट नीचे गिरने की घटना के बाद नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA ने विमान सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे. मामले की जांच के दौरान पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है और तकनीकी गड़बड़ियों के साथ-साथ क्रू के मेडिकल टेस्ट की भी जांच की जा रही है। 

    घटना के बाद कराए गए कन्फर्मेटरी मेडिकल टेस्ट में विमान के कैप्टन के मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा फ्लाइट के अचानक ऊंचाई खोने से पहले हाइड्रोलिक सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल से जुड़े कई तकनीकी अलर्ट भी दर्ज हुए थे. DGCA अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। 

    DGCA लगातार एक्शन मोड में
    इस घटना ने विमान उड़ाने वाले पायलट की नियमित और रैंडम ड्रग टेस्टिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. इसी के बाद DGCA कमर्शियल एयरलाइंस में साइकोएक्टिव और नशीले पदार्थों की जांच के नियमों को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 

    नए नियमों के तहत पायलटों और अन्य फ्लाइट क्रू की रैंडम टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जा सकता है. DGCA यह भी देख रहा है कि ड्रग टेस्टिंग को ज्यादा प्रभावी और नियमित कैसे बनाया जाए, ताकि किसी भी तरह के नशे के प्रभाव में कोई क्रू सदस्य विमान संचालन का हिस्सा न बन सके। 

    यानी एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA अब सिर्फ इस मामले की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की तैयारी में है. मकसद साफ है- पायलटों की फिटनेस, ड्रग टेस्टिंग और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश न रहे। 

     

  • इंडिगो और एअर इंडिया का DGCA आदेश पर विरोध, महंगे टिकटों का खतरा जताया

    इंडिगो और एअर इंडिया का DGCA आदेश पर विरोध, महंगे टिकटों का खतरा जताया

     नई दिल्ली

    आपने कभी फ्लाइट बुक की होगी तो देखा होगा कि टिकट का दाम अलग होता है और सीट चुनने का चार्ज अलग. विंडो सीट चाहिए? पैसे दो. आगे की सीट चाहिए? और पैसे दो. परिवार के साथ बैठना है? उसके लिए भी पैसे. यह एक तरह से एयरलाइंस की अलग कमाई है। अब सरकार ने कहा, "नहीं. हर फ्लाइट की 60 फीसदी सीटें यात्रियों को फ्री में दो. सीट चुनने के पैसे मत लो." और इस पर एयरलाइंस भड़क गई हैं। 

    किसने क्या कहा?
    सरकार का यह फैसला MoCA यानी नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने लिया. और 18 मार्च 2026 को इसका ऐलान कर दिया. इसके खिलाफ FIA यानी भारतीय एयरलाइंस महासंघ ने MoCA के सचिव समीर सिन्हा को चिट्ठी लिखी है. FIA में कौन-कौन है? इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइसजेट. यानी देश की तीन सबसे बड़ी एयरलाइंस। 

    एयरलाइंस का तर्क क्या है?
    एयरलाइंस का कहना है कि यह फैसला उल्टा पड़ेगा. उनका कहना है कि पैसा तो यात्री ही देगा. एयरलाइंस ने साफ कहा, "अगर हम सीट का चार्ज नहीं लेंगे, तो वो पैसा कहीं से तो आएगा. और वो आएगा टिकट के दाम बढ़ाकर। 

    इसपर सोचने वाली बात है कि अभी आप 4,000 में टिकट लेते हैं और 300 में मनपसंद सीट. कुल 4,300. कल को हो सकता है टिकट ही 4,500 का हो जाए और सीट भले फ्री हो. आपका फायदा क्या हुआ?

    FIA का कहना है कि जो लोग सस्ती फ्लाइट लेते हैं. बजट ट्रैवलर, परिवार, बार-बार उड़ने वाले लोग उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा. क्योंकि टिकट महंगे होंगे और उनकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा। 

    एयरलाइंस की अपनी पहचान खत्म होगी
    अभी हर एयरलाइन अपने तरीके से सेवा देती है. कोई सस्ती सीट देता है, कोई ज्यादा लेगरूम देता है, कोई बेहतर खाना देता है. इससे यात्री अपनी पसंद की एयरलाइन चुन सकते हैं. अगर सब एक जैसे नियमों में बंध जाएंगे तो यह अलगप्पन खत्म हो जाएगा। 

    एयरलाइंस ने एक और बड़ा सवाल उठाया
    FIA ने यह भी कहा कि DGCA यानी जो सरकारी संस्था हवाई यातायात देखती है उसे कानूनी तौर पर यह अधिकार ही नहीं है कि वो सीट चार्ज जैसी अलग सेवाओं के दाम तय करे। 

    पहले की अदालती फैसलों का हवाला देते हुए कहा, "यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता." यानी एयरलाइंस सिर्फ विरोध नहीं कर रहीं वो यह भी कह रही हैं कि यह आदेश कानूनी रूप से सही नहीं है। 

    सबसे बड़ी शिकायत – बिना पूछे फैसला
    एयरलाइंस की सबसे बड़ी नाराजगी यह है कि यह आदेश बिना किसी से पूछे आ गया. FIA ने चिट्ठी में लिखा, "18 मार्च को प्रेस रिलीज से पहले हमें कुछ नहीं बताया गया. न कोई बैठक हुई, न कोई सलाह ली गई." यानी एक दिन अखबार में खबर आई और एयरलाइंस को पता चला कि सरकार ने नया नियम बना दिया। 

    एयरलाइंस की मांग क्या है?
    FIA ने सरकार से साफ कहा है कि यह आदेश वापस लीजिए. और यह भी चेताया कि अगर यह चलता रहा तो भविष्य में सरकार किसी भी सेवा के दाम में दखल दे सकती है. इससे एयरलाइंस को अपना कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा।