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  • कोटा जिले में सड़क और कनेक्टिविटी होगी मजबूत, 236 किमी क्षेत्र में होंगे विकास कार्य; ₹214 करोड़ की सौगात

    कोटा जिले में सड़क और कनेक्टिविटी होगी मजबूत, 236 किमी क्षेत्र में होंगे विकास कार्य; ₹214 करोड़ की सौगात

    कोटा
    पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ऐनवक्त पहले मंत्री और विधायक सक्रिय हो गए है। कोटा जिले को एक ही दिन में 214 करोड़ रुपए की सौगात मिली। जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में 236 किलोमीटर से अधिक सड़क और आधारभूत ढांचा मजबूत होगा। भाजपा देहात जिलाध्यक्ष प्रेम गोचर ने बताया कि राज्य सरकार की वर्ष 2026-27 की बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कोटा जिले में तेजी से काम हो रहा है।

    कोटा जिले के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में सड़क, मिसिंग लिंक, नॉन-पैचेबल सड़क, पुलिया एवं अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े 150 विकास कार्यों पर करीब 158.90 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन कार्यों के माध्यम से करीब 236.32 किलोमीटर क्षेत्र में सड़क और कनेक्टिविटी से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इनकी स्वीकृतियां जारी कर दी गई है।

    जिले में 45 नॉन-पैचेबल सड़क कार्य और 10 मिसिंग लिंक सहित कुल 55 कार्यों पर 62.52 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा जिले में 49 क्षतिग्रस्त पुलियाओं के पुनर्निर्माण एवं सुधार के लिए करीब 11.59 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है। जिलाध्यक्ष ने विकास कार्यों की स्वीकृति पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक कल्पना देवी का आभार जताया।

    कोटा शहर में 15 करोड से अधिक के सड़क कार्य कोटा शहर में भी सड़क और कनेक्टिविटी सुधार पर विशेष फोकस किया गया है। कोटा उत्तर में चार नॉन-पैचेबल सड़क कार्यों पर 5.02 करोड़ रुपए तथा कोटा दक्षिण में छह नॉन-पैचेबल सड़क कार्यों पर 6.82 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त कोटा दक्षिण में दो मिसिंग लिंक कार्यों के लिए 3.15 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए है। कोटा उत्तर एवं दक्षिण में इन कार्यों पर कुल 14.99 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    ऊर्जा मंत्री ने 56 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया ऊर्जा मंत्री
    हीरालाल नागर ने कोटड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति (लक्ष्मीपुरा) में आयोजित समारोह में 56 करोड़ 39 लाख रुपए से अधिक की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया। ऊर्जा मंत्री ने क्षेत्र में कृषि, बिजली और सड़क तंत्र को मजबूत करने वाले कई प्रमुख प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी। उन्होंने हरीश चन्द्र सागर परियोजना के तृतीय चरण के अंतर्गत मुख्य नहर और माइनरों में पक्की लाइनिंग के लिए 21.77 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी कर काम शुरू कराया।

  • यूके से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लौटे तन्मय तिवारी ने कानपुर में शुरू किया कारोबार

    यूके से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लौटे तन्मय तिवारी ने कानपुर में शुरू किया कारोबार

    ग्रेटर नोएडा
    उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर किस तरह युवाओं और नए उद्यमियों को रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण से जोड़ रहा है, इसकी प्रेरक कहानी डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के सह-संस्थापक एवं उप प्रबंध निदेशक तन्मय तिवारी ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में यूपीडा के विशेष सत्र में साझा की। यूके में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटे तन्मय ने महज वन बीएचके फ्लैट से अपना कारोबार शुरू किया और आज उनकी कंपनी रक्षा क्षेत्र के लिए उन्नत और हल्के कंपोजिट उपकरण तैयार कर रही है।

    तन्मय तिवारी ने बताया कि उन्होंने ब्रिटेन में करीब पांच वर्ष बिताए और वहीं से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक और परास्नातक की डिग्री पूरी की। वर्ष 2020 में लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो के दौरान उन्होंने भारत के रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण इकोसिस्टम को करीब से देखा। डिफेंस एक्सपो में पांच दिन बिताने के बाद उन्होंने तय किया कि कंपनी की शुरुआत यूके के बजाय भारत में ही की जाएगी।

    उन्होंने वर्ष 2021 में परास्नातक की थीसिस पूरी करने के बाद भारत लौटकर डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि कंपनी की शुरुआती गतिविधियां एक बीएचके फ्लैट से शुरू हुईं। शुरुआत में कंपनी ने नागरिक क्षेत्र पर ध्यान दिया और कृषि ड्रोन, ऑटोमोबाइल तथा उच्च श्रेणी की सुपरबाइक्स में इस्तेमाल होने वाले कार्बन फाइबर और ग्लास फाइबर के कंपोजिट पुर्जे तैयार किए।

    आईआईटी कानपुर की टेस्टिंग से खुला रक्षा क्षेत्र का रास्ता
    तन्मय तिवारी ने बताया कि नागरिक क्षेत्र से रक्षा प्रौद्योगिकी की ओर उनका रुख तेजी से हुआ। कंपनी ने आईआईटी कानपुर के संपर्क में आकर अपने कंपोजिट नमूने और परीक्षण कूपन जांच के लिए भेजे। परीक्षण के बाद यह पुष्टि हुई कि कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद रक्षा क्षेत्र में उपयोग के लिए आवश्यक मानकों को पूरा करने में सक्षम हैं। इसके बाद कंपनी ने रक्षा क्षेत्र के लिए उत्पादन शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी विनिर्माण क्षमता का विस्तार किया। एक छोटे शेड से शुरू हुई कंपनी आज कानपुर में करीब 20 हजार वर्गफुट की फैक्ट्री से संचालित हो रही है और इसमें लगभग 40 लोगों की टीम काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी एएस 9100 प्रमाणित है, जो एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली से जुड़ा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक है। कंपनी का यह प्रमाणन ब्यूरो वेरिटास द्वारा किया गया है।

    डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से मिला विस्तार का अवसर
    तन्मय तिवारी ने बताया कि कंपनी अब भारतीय रक्षा इकोसिस्टम के साथ-साथ उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में कार्यरत अन्य कंपनियों को भी अपने उत्पादों की आपूर्ति कर रही है। कंपनी विमान के ढांचे के निर्माण और हल्के आयुध से जुड़े प्रोजेक्ट में भी योगदान दे रही है। उन्होंने बताया कि अब कंपनी लखनऊ नोड स्थित उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में एक नई अत्याधुनिक इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण सुविधा स्थापित करने जा रही है। इस नई इकाई का निर्मित क्षेत्र करीब 70 से 80 हजार वर्गफुट होगा, जो कंपनी की मौजूदा सुविधा से लगभग चार गुना बड़ा होगा। नई इकाई से करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और लगभग 1,500 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

    निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी
    तन्मय तिवारी ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में मिल रहे प्रोत्साहनों का उल्लेख करते हुए बताया कि नई इकाई में किए जाने वाले पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा विदेश से आयात किए जाने वाले उपकरणों पर परिवहन संबंधी सब्सिडी तथा पेटेंट और ट्रेडमार्क के लिए प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन नीतिगत प्रोत्साहनों और सरकार के सहयोग से युवा उद्यमियों के लिए रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रवेश तथा विस्तार के नए अवसर तैयार हुए हैं। तन्मय तिवारी ने कहा कि एक छोटे से बीएचके फ्लैट से शुरू हुई कंपनी का आज हजारों वर्गफुट की अत्याधुनिक रक्षा विनिर्माण इकाई की ओर बढ़ना इस बात का उदाहरण है कि नई तकनीक, युवा प्रतिभा और सरकारी सहयोग के साथ उत्तर प्रदेश में रक्षा विनिर्माण का नया इकोसिस्टम आकार ले रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से मिले सहयोग के लिए प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस इकोसिस्टम का हिस्सा होने पर गर्व है।

  • बिहार को मिलेंगे दो नए एयरपोर्ट, ₹10 हजार करोड़ का प्लान; 22 जिलों को होगा फायदा

    बिहार को मिलेंगे दो नए एयरपोर्ट, ₹10 हजार करोड़ का प्लान; 22 जिलों को होगा फायदा

    पटना
    बिहार में बनने वाले सोनपुर और अजगैबीनाथ धाम (सुल्तानगंज) ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर कुल 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दोनों हवाई अड्डा के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इसको लेकर विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के विकास से हवाई संपर्कता, पर्यटन, व्यापार एवं क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस संबंध में सोमवार को पटना में सीएम ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें छपरा से भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी समेत कई आला अधिकारी शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को अपने आवास में दोनों एयरपोर्ट के निर्माण को लेकर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि भागलपुर जिले में बनने वाले अजगैबीनाथ धाम एयरपोर्ट में 3500 करोड़ रुपये और पटना के पास सारण जिले में प्रस्तावित सोनपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट में पहले चरण में 6500 करोड़ यानी कुल 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश पीपीपी मोड पर होगा। राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण और एयरपोर्ट के लिए संपर्कता की लागत वहन करेगी।

    समीक्षा के दौरान सीएम ने संबंधित अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाने और सभी आवश्यक कार्यों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया। यह भी निर्देश दिया कि एयरपोर्ट की आधारभूत संरचना और रन-वे का विकास इस प्रकार किया जाए कि यहां बड़े विमानों का संचालन हो सके।

    अजगैबीनाथ एयरपोर्ट से इन जिलों के लोगों को फायदा, श्रावणी मेला में सुविधा होगी
    सम्राट चौधरी ने कहा कि अजगैबीनाथ धाम एयरपोर्ट से मुंगेर, लखीसराय, जमुई, भागलपुर, बांका, खगड़िया, बेगूसराय सहित आसपास के जिलों को बेहतर हवाई सुविधा का लाभ मिलेगा। साथ ही, श्रावणी मेले के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को भी सुविधा मिलेगी।

    बड़े विमानों के संचालन के अनुकूल बनेगा सोनपुर एयरपोर्ट
    सोनपुर एयरपोर्ट के मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इसे बड़े विमानों (वाइड बॉडी एयरक्राफ्ट) के संचालन के अनुकूल विकसित किया जाए। एयरपोर्ट पर कार्गो सुविधा उपलब्ध कराने और यात्रियों की सुविधा के लिए बेहतर संपर्कता सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया। इस एयरपोर्ट से पटना समेत बिहार के 22 जिलों के साथ-साथ झारखंड एवं उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों को भी हवाई संपर्क का लाभ मिलेगा।

    मास्टर प्लान पर चर्चा
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं एवं निर्माण संबंधी कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए तथा परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर प्रगति सुनिश्चित की जाए। बैठक में दोनों एयरपोर्ट के तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट, ट्रैफिक सर्वे, मास्टर प्लान, भूमि अधिग्रहण, एयरपोर्ट की क्षमता, सड़क संपर्कता और आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

    बैठक में सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, सिविल विमानन विभाग के सचिव निलेश रामचंद्र देवड़े सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • आचार संहिता से पहले गांवों में विकास की तैयारी, 2800 से अधिक कामों के आदेश जारी

    आचार संहिता से पहले गांवों में विकास की तैयारी, 2800 से अधिक कामों के आदेश जारी

    जोधपुर
     नगरीय निकाय चुनाव के बाद पंचायत राज चुनावों की तैयारियां तेज होने के साथ ही पंचायती राज विभाग अंतिम समय में विकास कार्यों को जमीन पर उतारने में जुट गया है। संभावित आचार संहिता लागू होने से पहले विभाग ने प्रदेशभर में 2800 से अधिक विकास कार्यों के टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी कर दिए हैं। इनमें जोधपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 100 से ज्यादा कार्य शामिल हैं, जिनकी अनुमानित लागत करीब 20 करोड़ रुपए है।

    विभागीय अधिकारियों के अनुसार अधिकांश कार्यों में गांवों में ट्यूबवेल निर्माण, पेयजल पाइपलाइन विस्तार, टिन शेड निर्माण, सामुदायिक सुविधाओं का विकास और आधारभूत संरचना से जुड़े काम शामिल हैं। लक्ष्य है कि अगले 20 दिन से एक माह के भीतर सभी कार्यों का शिलान्यास और निर्माण शुरू करा दिया जाए, ताकि पंचायत राज चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद इन पर रोक का असर न पड़े।

    चुनाव से पहले गांवों में विकास परियोजनाओं ने पकड़ी रफ्तार
    ग्रामीण क्षेत्रों में केवल पंचायती राज विभाग ही नहीं, बल्कि वाटर रिसोर्स डिपार्टमेंट भी जल संरक्षण और जलापूर्ति से जुड़े कई निर्माण कार्यों की प्रक्रिया तेज कर रहा है। इससे चुनाव से पहले गांवों में विकास परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन कार्यों के टेंडर और वर्क ऑर्डर समय रहते जारी हो जाएंगे, उन्हें नियमानुसार आगे बढ़ाया जा सकेगा। यही कारण है कि विभाग इन दिनों स्वीकृत परियोजनाओं की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कर रहा है।

    जोधपुर में प्रस्तावित प्रमुख कार्य
    जोधपुर जिले में करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से 100 विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ट्यूबवेल और पाइपलाइन विस्तार के काम प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा गांवों में टिन शेड का निर्माण कराया जाएगा। सामुदायिक स्तर पर जरूरी आधारभूत सुविधाओं के विकास से जुड़े कार्य भी प्रस्तावित हैं। विभाग की ओर से इन कार्यों की प्रक्रिया तेज की जा रही है, ताकि आचार संहिता लागू होने से पहले टेंडर और वर्क ऑर्डर जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराए जा सकें।

    इसलिए जल्दबाजी
    निकाय चुनाव के बाद अब सरकार और विभाग का फोकस पंचायत राज चुनावों की तैयारियों पर है। माना जा रहा है कि अगले 20 से 30 दिनों में संभावित आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में विकास कार्यों को मंजूरी देने, टेंडर जारी करने और वर्क ऑर्डर देने का काम तेजी से किया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि आचार संहिता लागू होने से पहले अधिक से अधिक कामों की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके बाद निर्माण कार्यों को मौके पर शुरू कराने पर जोर रहेगा, ताकि स्वीकृत विकास कार्यों में देरी न हो और समय पर धरातल पर काम दिखाई दे।