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  • मथुरा रोड से चिड़ियाघर तक बदलेगा पूरा सिस्टम, यू-आकार की 3 लेन और आधुनिक विजिटर सेंटर बनेगा

    मथुरा रोड से चिड़ियाघर तक बदलेगा पूरा सिस्टम, यू-आकार की 3 लेन और आधुनिक विजिटर सेंटर बनेगा

    नई दिल्ली 
    कई साल के लंबे इंतजार के बाद दिल्ली चिड़ियाघर के मॉडर्नाइजेशन का निर्माण कार्य अगले महीने से शुरू होने जा रहा है। इसके तहत मथुरा रोड से लेकर चिड़ियाघर परिसर के अंदर तक बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव किए जाएंगे। वन्यजीवों और विजिटर्स को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना की शुरुआत करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 'एंट्रेंस प्लाजा' से होगी। इसका डिजाइन मुख्य रूप से विजिटर्स की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    एंट्रेंस प्लाजा में विजिटर्स के लिए एंट्री, एग्जिट, पार्किंग और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। डीटीसी बस से चिड़ियाघर आने वालों को अब मथुरा रोड पर नहीं उतरना होगा। योजना के तहत चिड़ियाघर के मुख्य गेट की करीब आठ एकड़ और पुराने किले की करीब दो एकड़ जमीन को विकसित किया जाएगा।
    यू-आकार की तीन लेन बनाई जाएंगी

    इस 10 एकड़ क्षेत्र में फुटपाथ के साथ यू-आकार की तीन लेन बनाई जाएंगी, जिनका एंट्री और एग्जिट मथुरा रोड की ओर होगा। पहली लेन में डीटीसी बसें, दूसरी में कार और श्री-वीलर से आने वाले विजिटर्स के लिए पिक एंड ड्रॉप सुविधा होगी, जबकि तीसरी लेन में सरफेस पार्किंग विकसित की जाएगी। निर्धारित समय से अधिक गाड़ी खड़े करने की इजाजत नहीं होगी।

    मथुरा रोड की तरफ चिड़ियाघर का पहली बार बड़ा प्रवेश द्वार भी बनाया जाएगा। मथुरा रोड पार करने की सुविधा के लिए सुंदर नगर फ्लाईओवर का विस्तार कर एक लूप चिड़ियाघर परिसर तक बनाया जाएगा। इससे चिड़ियाघर और पुराने किले जाने वाले लोगों को सड़क पार करने में आसानी होगी।

    एंट्रेंस प्लाजा में विजिटर सेंटर भी बनेगा। स्क्रीन और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए लोग विभिन्न बाड़ों में मौजूद जानवरों, उनके स्थान और वहां पहुंचने के रास्ते की जानकारी ले सकेंगे। बैठने की सुविधा के साथ यहां 'सोविनियर शॉप' भी होगी, जहां टी-शर्ट, कैप, कॉफी मग, कैलेंडर और अन्य स्मृति चिह्न मिलेंगे।

    योजना के लिए 400 करोड़ मंजूर केंद्र सरकार
    चिड़ियाघर के मॉडर्नाइजेशन के लिए 400 करोड़ रुपये की योजना मंजूर कर चुकी है। एंट्रेंस प्लाजा का निर्माण 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। योजना में वन तारा के नाम से मशहूर रिलायंस के ग्रीन जू रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की सिफारिशों को भी शामिल किया गया है। इसे लेकर एमओयू भी हो चुका है।

  • दिल्ली चिड़ियाघर में तीन नए शावकों के जन्म से शेरों की संख्या नौ हुई

    दिल्ली चिड़ियाघर में तीन नए शावकों के जन्म से शेरों की संख्या नौ हुई

    नई दिल्ली
    चिड़ियाघर में शेरनी महागौरी ने सोमवार को 3 शावकों को जन्म दिया। उसका मिलन महेश्वर नामक शेर से हुआ था। चिड़ियाघर में शेरों का यही एकमात्र स्वस्थ्य जोड़ा है जिनकी मेटिंग से पिछले साल भी शावकों का जन्म हुआ था। इसे चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉ. संजीत कुमार के निर्देश और निगरानी पर चलाई जा रही योजना की सफलता माना जा रहा है।

    पिछले साल 5 को दिया जन्म
    2014 के बाद से महागौरी पहली शेरनी है, जिसने करीब 15 महीने में दूसरी बार शावकों को जन्म दिया है। पिछले साल 27 अप्रैल को महागौरी ने 5 शावकों को जन्म दिया था। उनमें से एक मरा हुआ पैदा हुआ था। अन्य 2 भी गर्भावस्था में ठीक से विकसित नहीं होने के कारण कमजोर पैदा हुए थे। उनकी भी 2 दिन के अंदर मौत हो गई थी। बाकी 2 शावकों को भी चिड़ियाघर के वेटनरी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।

    बूढ़ा हो गया शावक सुंदरम
    एनबीटी ने शेरनी के प्रजनन की संभावना के बारे में 7 जून को खबर छापी थी। चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि 2014 में 2 शावकों को जन्म देने वाली शेरनी को चंडीगढ़ चिड़ियाघर भेज दिया गया था। वहां भी उसने 2 शावकों को जन्म दिया था। 2009 में जन्म लेने वाला शावक जिसका नाम सुंदरम है, वो बूढ़ा हो गया है।

    9 हो गई है शेरों की संख्या
    2009 से पहले तक चिड़ियाघर में शेरों के प्रजनन की स्थिति काफी अच्छी थी। हर 2-3 साल में शेर के बच्चों का प्रजनन हो जाता था। इस कारण अन्य जू में यहां से शेर और शेरनी दिए गए हैं। 2009 के बाद 27 जून 2014 में और उसके बाद 27 अप्रैल 2025 में शेर के बच्चों का प्रजनन हुआ। शेर सुंदरम, महेश्वर, शैलजा, महागौरी और उसके 2 बच्चों को मिलाकर चिड़ियाघर में कुल 6 शेर थे। इनमें 3 नर और 3 मादा हैं। अब महागौरी के 3 और शावकों की संख्या बढ़ने से शेरों की संख्या 9 हो गई है।

  • दिल्ली जू में बड़ा बदलाव: नए रेप्टाइल हाउस, अत्याधुनिक अस्पताल और रेस्क्यू सेंटर का होगा निर्माण

    दिल्ली जू में बड़ा बदलाव: नए रेप्टाइल हाउस, अत्याधुनिक अस्पताल और रेस्क्यू सेंटर का होगा निर्माण

    नई दिल्ली
     दिल्ली के चिड़ियाघर में आने वाले लोगों का अनुभव जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। अब कई वन्यजीवों को दूर से देखने की बजाय विजिटर्स और जानवरों के बीच सिर्फ मजबूत ग्लास की दीवार जितनी दूरी होगी। इसके लिए एरिना (जहां दर्शकों के लिए वन्यजीव लाए जाते हैं) की डिजाइन बदली जाएगी, ताकि लोग उन्हें पहले से ज्यादा करीब और सुरक्षित तरीके से देख सकें। इसी बदलाव के साथ चिड़ियाघर के बड़े हिस्से के कायाकल्प का काम शुरू हो गया है। योजना को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की 400 करोड़ रुपये की मंजूरी दे चुका है।

    रेप्टाइल हाउस का होगा निर्माण
        केंद्र सरकार के डेलीगेटेड इन्वेस्टमेंट बोर्ड (DIB) से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना अब जमीन पर पर काम शुरू हो गया है।
        सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) के अधिकारियों के मुताबिक, डिजाइन की डीपीआर और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कंसल्टेंट (PMC) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन्यजीवों के बाड़ों का निर्माण नए सिरे से शुरू होगा।
        अभी एरिना (जहां विजिटर्स के देखने के लिए वन्य जीव लाए जाते हैं) में विजिटर्स वन्यजीवों को काफी दूर से देख पाते हैं। एरिना की बनावट को ठीक किया जाएगा।
        इसके तहत कई बाड़ों में वन्य जीव और लोगों के बीच सिर्फ ग्लास की दीवार होगी।
        वहीं नाइट शेल्टर भी आधुनिक मानकों के अनुसार बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए रेप्टाइल हाउस का भी निर्माण होगा। फिलहाल चिड़ियाघर में 72 बाड़ों में वन्यजीव रखे गए हैं।

    अत्याधुनिक अस्पताल और रेस्क्यू सेंटर भी बनेंगे
    वन्यजीवों के इलाज की व्यवस्था को भी आधुनिक बनाया जाएगा। मौजूदा अस्पताल का विस्तार कर करीब दो एकड़ में अत्याधुनिक हॉस्पिटल बनाया जाएगा, जिसमें ऑपरेशन थियेटर, पोस्टमार्टम रूम, लैब और जच्चा-बच्चा वार्ड जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा चार एकड़ में रेस्क्यू सेंटर और एक एजुकेशन सेंटर भी डिवेलप किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस चरण का काम पूरा होने के बाद 'वेलकम जू गेट' परिसर को भी नए रूप में डिवेलप किया जाएगा। यहां पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन, सरफेस पार्किंग और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं तैयार की जाएंगी।

  • स्मार्ट सिटी की ओर एक और कदम: दिल्ली के चिड़ियाघर में QR कोड से मिलेगी वन्यजीवों की जानकारी

    स्मार्ट सिटी की ओर एक और कदम: दिल्ली के चिड़ियाघर में QR कोड से मिलेगी वन्यजीवों की जानकारी

    नई दिल्ली

    चिड़ियाघर में घूमने आए विजिटर्स अब वन्यजीवों के बाड़े के बाहर QR कोड वाले साइन बोर्ड से वन्यजीवों की सारी जानकारी तुरंत पढ़ सकेंगे। रेनोवेशन और विजिटर्स की सुविधा के लिए नए साइन बोर्ड बदलने के साथ पहली बार कई साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। 1000 से अधिक साइन बोर्ड लगाने का काम शुरू हो चुका है।

    नाम के साथ लगे होंगे QR कोड
    20 बीटों के 72 बाड़ों में 96 प्रजातियों के करीब 1300 वन्यजीव रह रहे हैं। नए साइन बोर्ड में उस जानवर के नाम की जानकारी के साथ QR कोड लगे होंगे। मोबाइल से कोड स्कैन करने पर जानवरों की सारी जानकारी मिल जाएगी। चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि इससे वाइल्डलाइफ और पर्यावरण के प्रति लोगों का रूझान बढ़ाने के उद्देश्य में सफलता मिलेगी।

    चिड़िया घर में लगाए जाएंगे नए बोर्ड
    चिड़ियाघर के ज्यादातर साइन बोर्ड बहुत पुराने हो चुके थे। कई बोर्ड में ठीक से पढ़ा भी नहीं जा पा रहा था। खतरनाक जानवर की सूचना देते हुए बाड़े की रेलिंग से दूर रहने आदि के करीब 100 वॉर्निंग साइन बोर्ड, बाड़ों में बंद जानवरों के नाम के 200 से अधिक साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।

    रिक्शा स्टॉप पर भी बोर्ड
    बैटरी रिक्शा स्टॉप पर भी नए साइन बोर्ड लगेगे। अभी उनकी हालत बहुत ठीक नहीं है। कई जगह साइन बोर्ड नहीं है। लेकिन विजिटर को बैटरी रिक्शा लेने के लिए अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। चिड़ियाघर के कई रास्तों की जानकारी देते हुए भी बोर्ड लगाए जा रहे है। किस रास्ते पर किस जानवर का बाड़ा है, इसकी जानकारी भी साइन बोर्ड से दी जाएगी। इससे चिड़ियाघर घूमने आए लोगों को अपना रूट तय करने में आसानी मिलेगी। उन्हें अपनी पसंद के जानवरों को ढूंढ़ने में अब ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा।

    हाथी से बाघ तक, एक दिन के लिए भी ले सकेंगे गोद
    चिड़ियाघर अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए ‘वन्यजीव गोद’ योजना में बड़े सुधार करने जा रहा है। अब आप किसी वन्यजीव को एक दिन के लिए भी गोद ले सकते हैं। तिमाही और छमाही समय तक के लिए भी गोद लिया जा सकता है। मार्च से यह योजना चालू हो रही है। इसके तहत वन्यजीव की खुराक और रखरखाव का खर्चा शामिल है। 2022 में शुरू हुई वन्यजीव गोद योजना के तहत एक साल और दो साल की अवधि के लिए वन्यजीवों को गोद लिया जा सकता था।

    आमदनी बढ़ाने के लिए बदला जा रहा टाइम
    योजना सफल नहीं रही। गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों ने ही बामुश्किल आधा दर्जन वन्यजीवों को गोद लिया था। अफ्रीकी शंकर हाथी को भी गोद लिया गया था, जिसकी पिछले साल मौत हो चुकी है। चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉ संजीव कुमार ने बताया कि आमदनी बढ़ाने के लिए वन्यजीव गोद योजना की समय अवधि को बदला जा रहा है।