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  • Gangrel Dam के सभी गेट खोले गए, महानदी के तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट; संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण

    Gangrel Dam के सभी गेट खोले गए, महानदी के तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट; संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण

    गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खुले, महानदी के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट मोड पर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर-एसपी ने संभाला मोर्चा, संवेदनशील क्षेत्रों का किया निरीक्षण

    शिवरीनारायण में मोटर बोट और बचाव उपकरणों के साथ DDRF की टीम तैनात, दूसरी टीम जिला मुख्यालय में रिजर्व

    घाट-पुलों पर बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती, जलस्तर एवं बहाव पर लगातार निगरानी

    रायपुर, 
    गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले जाने और जांजगीर-चांपा जिले में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार जांजगीर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने महानदी के तटीय और संवेदनशील क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण कर जलस्तर, नदी के बहाव और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर और एसपी संबंधित अधिकारियों से लगातार फीडबैक लेकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और आवश्यकता के अनुरूप दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

    कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, जल संसाधन, नगर सेना सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नदी के जलस्तर और तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर सतत निगरानी रखने के साथ ही किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधन और उपकरण तैयार रखने कहा गया है।

    शिवरीनारायण में DDRF की टीम तैनात, SDRF बिलासपुर से लगातार समन्वय

    जिले में बाढ़ एवं आपदा की संभावित स्थिति से निपटने के लिए होमगार्ड जवानों की जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की दो टीमों को तैयार रखा गया है। इनमें से एक टीम को मोटर बोट एवं अन्य आवश्यक बचाव उपकरणों के साथ शिवरीनारायण में तैनात किया गया है, जबकि दूसरी टीम जिला मुख्यालय में रिजर्व रखी गई है। इसके साथ ही एसडीआरएफ बिलासपुर से लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखा जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अतिरिक्त सहायता प्राप्त की जा सके।

    शिवरीनारायण और बसंतपुर बैराज सहित संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण

    कलेक्टर-एसपी ने शिवरीनारायण क्षेत्र में महानदी के शिवरीनारायण बैराज, घाट, पुल, सांस्कृतिक भवन और बसंतपुर बैराज सहित विभिन्न संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया। सुरक्षा की दृष्टि से घाटों और पुलों पर बैरिकेडिंग की गई है तथा आवश्यक संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों को नदी के जलस्तर और बहाव पर लगातार नजर रखने तथा परिस्थिति के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    निरीक्षण के दौरान नदी पर स्थित पुल-पुलियों और आवागमन वाले क्षेत्रों की स्थिति का भी जायजा लिया गया। कलेक्टर-एसपी ने निर्देश दिए कि यदि किसी पुल या पुलिया पर पानी का बहाव आवागमन के लिए जोखिमपूर्ण हो तो तत्काल यातायात नियंत्रित किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर आवागमन पूरी तरह रोका जाए। ऐसे सभी स्थानों पर सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    तटीय गांवों में मुनादी के निर्देश, सुरक्षित स्थानों पर आवश्यक व्यवस्था रखने कहा

    कलेक्टर ने महानदी के तटीय क्षेत्रों और पूर्व में जलभराव से प्रभावित आबादी वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों को संभावित जलभराव और आवश्यक सावधानियों की जानकारी मुनादी के माध्यम से देने कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए पूर्व से चिन्हांकित स्थानों पर जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें, सेल्फी-वीडियो के लिए जोखिम न उठाएं

    कलेक्टर-एसपी ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदी, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं। तेज बहाव वाले पानी के पास सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम न उठाएं और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। किसी भी आकस्मिक अथवा आपात स्थिति की जानकारी तत्काल जिला प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को दें, ताकि समय पर राहत एवं बचाव कार्रवाई की जा सके।

    वर्तमान में जिले में स्थिति सामान्य है। एहतियात के तौर पर महानदी के तटीय क्षेत्रों, पुल-पुलियों और जलस्तर पर प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार पोयाम, एसडीएम सुभावना साहू सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • तिब्बत में चीन बना रहा दुनिया का विशाल डैम, भारत के लिए बढ़ी चिंता; करोड़ों लोगों की जिंदगी और खेती प्रभावित होने का डर

    तिब्बत में चीन बना रहा दुनिया का विशाल डैम, भारत के लिए बढ़ी चिंता; करोड़ों लोगों की जिंदगी और खेती प्रभावित होने का डर

    नई दिल्ली

    नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कितना गंभीर है. इसी बीच चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में से एक बना रहा है. इस प्रोजेक्ट में एक विशाल बांध (सुपर डैम) बनाया जा रहा है. ब्रह्मपुत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यारलुंग त्सांगपो के नाम से भी जाना जाता है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट से बेहद गंभीर नुकसान की आशंका पैदा हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट हिमालय के उस भूकंपीय इलाके में है, जहां दुनिया में सबसे ज्यादा भूकंप आते हैं. इस क्षेत्र में पहले भी कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। 

    नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रोफेसर एमेरिटस ब्रह्मा चेल्लानी ने ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट' के लिए लिखे एक लेख में कहा कि इस प्रोजेक्ट को लेकर सबसे ज्यादा चिंता की बात अब विदेशी आलोचकों की चेतावनी नहीं, बल्कि चीन के अपने वैज्ञानिकों की चेतावनी है। 

    चेल्लानी ने बीजिंग से जुड़े एक चीनी भाषा के जर्नल ‘सेडिमेंटरी जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' में हाल ही में छपे एक रिसर्च पेपर का हवाला दिया. इस पेपर में बांध बनाए जा रहे इलाके में गंभीर भूगर्भीय खतरों की बात कही गई है। 

    सुपर डैम से 'वॉटर बम' बनने का खतरा क्यों है? 
    पेपर में वैज्ञानिकों ने बताया कि वहां की जमीन की बनावट ढीली है और चट्टानों व मिट्टी के बीच पकड़ कमजोर है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जमीन के अंदर मौजूद फॉल्ट में हलचल हुई या भूकंप आया, तो बड़े इलाके में जमीन अस्थिर हो सकती है. इससे बांध का जलाशय और आसपास बना बुनियादी ढांचा खतरे में पड़ सकता है. वैज्ञानिकों ने खतरा कम करने के लिए जलाशय के आसपास की ढलानों को मजबूत करने, उन्हें संभालने वाली संरचनाएं लगाने और प्रोजेक्ट के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को दोबारा डिजाइन करने की सलाह दी है, ताकि किसी बड़ी तबाही का खतरा कम किया जा सके। 

    चेल्लानी ने कहा कि जब कम्युनिस्ट शासन के तहत काम करने वाले चीन के वैज्ञानिक भी ऐसी चेतावनी दे रहे हैं, तो पूरी दुनिया को इस पर ध्यान देना चाहिए। 

    भारत के लिए खतरा क्यों?
    भारत के पूर्वोत्तर के लिए ब्रह्मपुत्र बेहद मह
    त्वपूर्ण नदी है. यह खेती, मछली पालन और आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) यानी पानी वाली प्राकृतिक जमीनों के लिए जरूरी है. इस नदी पर लाखों लोगों की जिंदगी और रोजी-रोटी निर्भर है. आगे चलकर यही नदी बांग्लादेश में जाती है, जहां यह देश के लिए मीठे पानी का सबसे बड़ा स्रोत है। 

    ‘प्रोजेक्ट सिंडिकेट' की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की मेकांग नदी पर बनाई गई बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की तरह यह विशाल बांध भी सीमा पार नदी के पानी के बहाव को बदल सकता है. इससे नीचे की ओर जाने वाली वह उपजाऊ मिट्टी और गाद भी कम हो सकती है, जिसमें कई पोषक तत्व होते हैं. यह गाद नदी के पर्यावरण और नदी किनारे की खेती के लिए बेहद जरूरी है. यहां तक ​​कि इसके सामान्य रिपेयर के काम से भी नदी के बहाव की दिशा में मौजूद इकोसिस्टम, खेती, तलछट के बहाव और बाढ़ के पैटर्न पर असर पड़ सकता है। 

    चेल्लानी ने लिखा कि इससे भी ज्यादा खतरनाक स्थिति तब बन सकती है, अगर भूकंप की वजह से बांध का ढांचा टूट जाए या बांध को नुकसान पहुंचने के बाद अचानक बहुत ज्यादा पानी छोड़ना पड़े. ऐसी स्थिति में नीचे भारत और बांग्लादेश की ओर बसे घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों में बिना ज्यादा चेतावनी के भयंकर बाढ़ आ सकती है। 

    उनके मुताबिक, तिब्बत में शुरू हुई ऐसी इंजीनियरिंग से जुड़ी दुर्घटना आगे चलकर एक बड़ी मानवीय त्रासदी बन सकती है, जिसका असर बांग्लादेश तक पहुंच सकता है. बांग्लादेश दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में से एक है। 

    चीन तिब्बत को बना रहा युद्ध का क्षेत्र?
    रिपोर्ट में कहा गया कि पर्यावरणीय खतरा इस पूरी कहानी का केवल एक हिस्सा है. चीन तिब्बत के पठार पर अपने नियंत्रण को धीरे-धीरे एक रणनीतिक ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. तिब्बत का पठार एशिया की कई बड़ी नदियों का स्रोत है. चीन ने सीमा पार बहने वाली नदियों पर एक के बाद एक कई बांध बनाए हैं. तनाव के समय उसने नदियों से जुड़े पानी और बहाव के आंकड़े देने से भी इनकार किया है. इसके अलावा चीन ने नीचे की ओर बसे देशों के साथ पानी बांटने की किसी संधि में शामिल होने से भी इनकार किया है। 

    रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह पानी भी चीन की दबाव बनाने वाली रणनीति का एक और हथियार बन गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक तरह से यह विडंबना है कि हाल की जानकारी से पता चलता है कि चीन के वैज्ञानिक शायद इस प्रोजेक्ट के खतरों को वहां के राजनीतिक नेतृत्व से ज्यादा साफ तौर पर समझते हैं। 

    चीन के अपने भूवैज्ञानिक वैज्ञानिक जब खतरे की चेतावनी दे रहे हैं, तब रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग को पारदर्शिता को प्राथमिकता देनी चाहिए और यह मानना चाहिए कि इस नदी का पानी सिर्फ चीन का मामला नहीं है. बांध के ऊपर की ओर बन रहा यह संभावित 'वॉटर बम' बनने से पहले चीन को अपनी सीमा के बाहर पड़ने वाले देशों की जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए।